आदिवासी लड़कियों में अकेला लड़का
Desisexkahaniya
एक सपने में मैं अफ्रीका पहुँच गया। घने जंगलों के बीच एक छोटा सा आदिवासी गाँव था। कुछ लड़कियों ने मुझे देखते ही पकड़ लिया। उनमें से कोई भी लड़का नजर नहीं आया। धीरे-धीरे महसूस हुआ, वे सभी इश्क की तलाश में थीं। मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया, जैसे कोई दुर्लभ मेहमान हो।.
मैं जय हूँ, आपका स्वागत है।.
शहर के बीचोंबीच मुंबई में पला हूँ। उम्र ढाई दर्जन साल की है, नौकरी साइंस की तरफ से।.
कुछ महीनों पहले की बात है, ये एक अफ्रीकी सेक्स एक्सएक्सएक्स कल्पना की कहानी थी।.
एक बार मुंबई से अफ्रीका की ओर निकल पड़ा था, कोई छानबीन थी।.
सुनो, मैं वो वैज्ञानिक हूँ जो सेक्स ताकत बढ़ाने वाली गोली बनाता है। एक बार अफ्रीका में ट्रेन में सफर कर रहा था मैं।.
आँख बंद हुई, फिर वह तस्वीर आई - कुछ चेहरे ट्रेन में घुस गए।.
उन्होंने हथियार उठाकर आसपास के लोगों में भय पैदा कर दिया।.
टॉयलेट के अंदर मैं खड़ा था, बाहर की आवाजें धुंधली सी लग रही थीं।.
बाहर कदम रखते ही जो दृश्य नज़र आया, मन घबरा उठा।.
ट्रेन छोड़कर मैं भाग खड़ा हुआ, वो सभी पीछे रह गए।.
गिरते ही आँखों के सामने अंधेरा छा गया।.
उस वक्त जब आँख खुली, पहली चीज़ जो नजर आई – कहीं एक जंगली बस्ती।.
एक गहरी चोट ने मेरे हाथ को झंझोड़ दिया, तब से दर्द लगातार बना हुआ।.
आँखें उठीं, तो मुझे जो दृश्य नजर आया वह चौंका गया।.
उधर सब लड़कियाँ ही थीं, कहीं कोई पुरुष नजर नहीं आया। कुछ ने मुझे देखकर आवाज भी डाली। सभी कद्दूसी लग रही थीं, एक अलग ही तरह की खूबसूरती थी।.
शायद उन्होंने दूसरी लड़कियों को बता दिया, मैं होश में वापस आ चुका था। फिर धीरे-धीरे मेरी खूब देखभाल की गई, एक ठंडा पेय मुझे दिया गया।.
एक-एक बूंद ने मुझमें जैसे कोई अजनबी चिंगारी भर दी।.
शाम को उन्होंने मेरे बैग से सभी कपड़े खींचकर आग में फेंक दिए। जब मैंने अपने ऊपर पहने कपड़े छुड़वाने की कोशिश की, तब एक युवा लड़की ने उन्हें उतारना शुरू कर दिया। उसकी उम्र कम थी, इसलिए मन में भाव उठने लगे। धीरे-धीरे मेरा लंड सख्त हो गया।.
लेकिन मैं वहीं पड़ा रहा। कुछ समय के बाद, ऐसे में जब मैं आधा खुला हुआ था, तभी लगभग पच्चीस लड़कियाँ मेरे सामने आ गईं।.
बस अंडरवियर पहना हुआ था मैं।.
एक लड़की तभी दिखाई दी, पानी के साथ।.
उस लड़की ने मुझे सभी लड़कियों के बीच नहला दिया, फिर धीरे से अंडरवियर उतार लिया। मैं तनहा खड़ा था, शरीर पर कुछ नहीं, सिर्फ एक छड़ जैसी चीज़ सामने ऊपर को उठी हुई थी।.
उसके बाद जब मैं खुद को ऐसे दिखा चुका था, तो हर लड़की ने अपने आप को ढकना छोड़ दिया।.
एक लड़की जिसने मुझे नंगा किया, वही आगे बढ़ी। फिर उसने मेरे पूरे शरीर पर शहद लगा दिया। इसके बाद सभी लड़कियाँ मेरे पास आ गईं। अब वे मेरी त्वचा पर जीभ घुमाने लगीं।.
उसी पल कई लड़कियों ने मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया।.
ख़ुशी इतनी थी कि समझ में नहीं आ रहा था।
लड़की ने मेरे लंड को पूरा मुँह में लिया, धीमे-धीमे चूसने लगी। हर बार जब मैं आगे बढ़ता, वो और अंदर ले जाती। सांस फूल रही थी, आवाज़ें छोटी-छोटी आ रही थीं। जैसे ही मैं खत्म होने वाला था, गर्मी बढ़ी। तभी साइड से दूसरी लड़की आई, छाती ऊपर उठी। वीर्य उसके सीने पर फैल गया, एक-एक बूंद साफ दिखी।.
एकदम तब ही सारी लड़कियां उसके मम्मों पर झपटीं, मेरा वीर्य जैसे कुतियां चाटने लगीं।.
लड़कियों में से कई ने मेरे लौड़े पर होंठ चलाए। खत्म होने के बाद वो शांत हो गए। मैं आखिरकार नींद में ढह गया।.
रातभर नींद आती रही।
उठते ही नज़र पड़ी लड़कियों पर, सारी की सारी मेरे चारपाई के आसपास। सन्नाटे में खड़ी, घूर रही थीं मेरी ओर। फिर एक ने छेड़ा बातचीत, अंग्रेज़ी में, धीमे स्वर में पूछा - तुम्हारा कुशल है?
जब मैंने सिर हिलाकर पूछा कि तुम्हारा नाम क्या है, वो बोली – लीना।.
लीना, क्या तुम समझा पाओगी कि आसपास जो चल रहा है वो क्या है… मेरे सिर से लेकर पैर तक कपड़े कहाँ हैं? एक पल को ठहरो, मैं इस स्थिति में खुद को कैसे पहचानूँ? जैसे कोई घटना हो गई हो और मैं उसके बीच में अटका हूँ। तुम्हारे चेहरे पर भी तो कुछ डर सा छाया है। बताने की कोशिश करो, क्या हुआ था जब मैं यहां आया? खुलकर बात करो, झिझक मत। इस जगह की हवा भी तनाव भरी लग रही है। अभी तक कुछ समझ नहीं आया कि मैं यहां ऐसे क्यों हूँ।?
लीना - यहाँ पर तुम्हीं एकमात्र पुरुष हो। बाकी सभी जो बचे हैं, वो महिलाएँ हैं या फिर लड़कियाँ।.
एक आदमी ने कहा कि इधर की हर लड़की बिना पुरुष के सेक्स के लिए तरसती है। उनकी इच्छा इतनी गहरी है, कि वे लिंग के लिए कुछ भी कर सकती हैं।.
अचानक ख्याल आया कि आज मेरे लौड़े का हलवा होने वाला है। सबकी चूतों के आगे मेरा एक लौड़ा कितनी देर टिकेगा, इसी सोच में मैं उठकर टॉयलेट जाने लगा।.
मैं जब पेशाब करने लगा, तभी कुछ लड़कियां वहाँ आईं। उन्होंने धार के नीचे आकर मेरा मूत्र पीना शुरू कर दिया।.
उस गुट में सबसे आगे हमेशा लीना ही चलती थी।.
गर्मी में तपते सूरज जैसी वो लड़की आई नजर। कमर 28 की, छाती 32 की, कमर से नीचे 70 सेमी का हिसाब।.
एकाएक एक लड़की आई। मेरा लंड पहले ही खड़ा था। उसने बिना कुछ कहे अपनी गांड में डाल लिया। फिर वो तेज-तेज ऊपर-नीचे होने लगी।.
लड़की के मुँह से आहें निकल पड़ीं, जब वो चलते-चलते ठिठक गई। उसकी जुबान से हूँ-हाँ की आवाज़ फिर आई।.
उस दिन मैंने भीड़ के बीच खड़े होकर जोर-जोर से बातें कहीं।.
फिर मैंने धीमे से लंड को गांड से हटाया, चुत के भीतर डाल दिया। चूचियों पर हथेली रखकर तेजी से चलाने लगा।.
मौज आ गई थी उसको, इसलिए वो हंसते हुए चुदवाने लगी।.
उसके साथ पंद्रह मिनट तक सेक्स किया, काफी मज़ा आया। खत्म होने से पहले, मैंने उसके मुँह में ही सब कुछ उड़ेल दिया।.
उसके हरकतों को देखकर लड़कियों ने मुझ पर भरोसा करना शुरू कर दियa।.
उसका ध्यान उधर नहीं था। मेरे प्रति वैसी कोई भावना नहीं जैसे बाकी लड़कियों में थी। आदमी के तौर पर मुझे देखने के बजाय, वह सिर्फ अपनी बातों में लगी रहती। कबीले की हर युवती का चेहरा खिल उठा था - एक झलक मिलते ही।.
फिर भी लीना सबमें सबसे ज्यादा गर्म थी, मुझे बहाने से भी उसके साथ संभोग करना था।.
तभी पेट ने आवाज़ दी। मैंने पूछा, क्या रोटी होगी, साथ में दूध भी मिलेगा?
थकान महसूस होने लगी थी।.
अचानक एक लड़की आगे बढ़ी। फिर वो मेरे होंठों के पास अपना सीना ले गई।.
एक दिन मैंने उसकी माँ के दूध पर होंठ लगा दिए।.
दूध की मात्रा उनके स्तनों में काफ़ी ज़्यादा थी।.
अब भूख का नामोनिशान नहीं था, आँखें बंद हुईं।.
हर दिन कुछ ऐसे ही चलता अब।.
एक के बाद एक लड़कियां आती रहीं, दिन हो या रात। कभी मेरे लिंग से छेड़छाड़ करतीं, तो कभी पूरी तरह जुड़ जातीं। धीरे-धीरे वो अपना बन गया - मेरा कुछ भी नहीं रहा। लगातार संबंधों ने शरीर को इतना तोड़ दिया कि टूटन बच गई।.
उसके चौथे दिन जब लीना आई, मुझे उसका शरीर बिल्कुल साफ दिखा।.
तभी नज़र पड़ी उसकी ओर, धड़कन बढ़ गई।.
अचानक लीना ने पूछा - तुम्हारी सेवा कैसी चल रही है? कुछ चाहिए होगा, तो बस कह देना।!
मैंने कहा, "बिना तुम्हारे ये सेवा कुछ खास नहीं।" फिर मुस्कुराते हुए जोड़ा - तुम मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ, और सब कुछ रंगीन हो उठे।!
लीना बोली - ठीक है, सिर्फ इतना कि मुझे ऐसे लंड अच्छे नहीं लगते जो कमजोर हों, या फटे-पुराने से लगते हों।.
मैंने कहा, मैं आसानी से नहीं टूटने वाला इंसान हूँ। चाहो तो परख लो। लीना बोली, ठीक है, पहले मैं तुम्हारी मुट्ठी पकड़ूंगी। अगर छोटे से वक्त में तुमने अपना धैर्य खो दिया, तब तुम्हारी हार हो जाएगी।.
उसने कहा, इस बाल्टी में जो रेत है, खत्म होने से पहले अगर तुम ढीले पड़ गए, तो समझ लेना – मैं तुम्हें काम के लायक नहीं समझूंगी। फिर उसने मेरे लंड को हथेली में भर लिया, धीमे-धीमे ऊपर-नीचे हिलाने लगी।.
उसने अचानक मेरे बेटे की ओर दूध डोलाया। मैंने उसके स्तनों को छेड़ते हुए अपने लिंग पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। धीमे-धीमे आवाजें मेरे मुंह से निकलने लगीं।.
अब वो भी सांसें तेज करने लगी। बोली, "आह… ऊह… तुम्हारा धैर्य नहीं चलेगा इतना देर।" उसके अंदाज में एक ऐसी गर्माहट थी। जिसने मुझे पूरी रेत खत्म होने से पहले ही ढहा दिया।.
उसका हंसना शुरू हो गया, धीमे-धीमे बढ़ते हुए। मेरे अंडकोष पर उसकी मुट्ठी का दबाव तेज़ हो गया।.
दर्द की वजह से मैं बिलकुल खराब हो चुका था।.
उसके सामने बोला मैं - एक और संभावना देना, कृपया।!
लीना बोली, "ठीक है, एक और मौका दिया जाएगा। पर आज की हार का नतीजा भी कुछ तो होना चाहिए!"!
उसने अपनी बेटियों से कहा, आज रात तक इसका लंड बांध देना।.
एक लड़की आगे बढ़ी, जब लीना ने कमांड दिया। उसके हाथ मेरे लंड पर गए। फिर वो एक पिंजरा लेकर आई। उसने धीरे से लंड पर वो कवच चढ़ा दिया।.
इस वजह से मेरा लंड अब सख्त नहीं पड़ता। कभी अगर खड़ा हो जाए, तो दर्द मचलने लगता।.
मेरे लौड़े की चाभी अब लीना के पास थी। जब उसका मन होता, तब मेरा लंड पिंजरे से बाहर आ सकता था। मैं खुद अपने हाथों से पिंजरा न खोल सकूं, यह ध्यान में रखकर मेरे हाथ भी मजबूत रस्सी से बंधे थे।.
शाम होते-होते मेरी आज़ादी खत्म हो चुकी थी। वो मुझे किसी खंभे से जकड़ चुके थे।.
एकाएक, चार या पांच लड़कियों ने मेरे लंड पर अपने पैरों से हमला कर दिया।.
लालिमा ने मेरे लंड को पूरी तरह से ढक लिया था।.
खंभे से बँधकर मेरे घुटने जमीन पर टिके थे।.
एक लड़की ने अचानक मेरे होंठों पर अपनी जांघें तोड़ दी। फिर मैं धीमे-धीमे उसके स्वाद में खो गया।.
थोड़ी देर बाद मेरी जीभ उसकी चुत में आना-जाना करने लगी।.
हर लड़की ने अब यही कुछ ऐसे शुरू कर दिया।.
मुझे लगा, अब तो बस मेरे होंठ ही कुछ बचे थे। हर लड़की ने उन पर अपना हक जता दिया था।.
थोड़ी देर में लीना वहाँ पहुँची। अंदर कदम रखते ही चार तमाचे जड़ दिए। फिर मेरे हाथों के बाद पैर भी बाँधे। इसके बाद मुझे जमीन पर लिटा दिया।.
उसकी चूत मेरे होंठों से टकराने लगी।.
फिर जब वो अच्छी तरह चढ़ आई, तो मेरे होंठों पर एक लकड़ी का टुकड़ा ठूंस दिया - मानो कोई डिल्डो हो।
चढ़ते हुए तेज़ धक्कों के साथ लीना ने अपनी चूत में डिल्डो खींच लिया।.
थोड़ी देर में वो नीचे गिर पड़ी, मेरे चेहरे पर पेशाब करते हुए। इसके तुरंत बाद कई और लड़कियां आगे बढ़ीं, एक-एक करके। हर कोई मेरे ऊपर खड़े होकर पेशाब करने लगी।.
उसने मेरे ऊपर पेशाब करके भिगो दिया। थोड़ी देर में अंधेरा छा गया।.
उधर ज़मीन पर मैं सिर्फ कपड़े-लत्ते बिना पड़ा था।.
उन लड़कियों का, जिनके पास भारी स्तन थे, मेरी अवस्था देखकर घबराहट हुई। धीरे-धीरे उन्होंने एक बरतन में दूध निचोड़ना शुरू कर दियa।.
इस सब को देखकर मन में खुशी हुई, अब खाना मिलने वाला था।.
दोपहर तक उन सभी लड़कियों के पास लगभग 2 लीटर दूध जमा हो चुका था।.
दोपहर से जब कुछ नहीं खाया था मेरे हिस्से आया वो दूध।.
दूध के स्वाद में एक खास नरमी थी।.
पेट तक पहुँची खास बात नहीं थी।.
अचानक लीना वहाँ पहुँच गई, फिर उसने मेरे लंड के पिंजरे का ताला खोल दिया।.
उसकी उँगलियाँ मेरे लंड पर सरकने लगीं, फिर कुछ पदार्थ छिड़क दिया।.
फिर से वो मुझसे लिपटकर चली पड़ने लगी।.
समझ में आया कि थोड़ी देर में वो प्रवेश करने वाली है, मगर फिर भी नहीं पहुँची।.
उस रात, नींद आने लगी थी पर अचानक लंड में तेज़ दर्द उठा।.
एक-दो लड़कियां हर रात मेरे हवस का शिकार बनती थीं, पर आज कुछ भी नहीं हो रहा था।.
मुझे बस इतना पता था कि लीना के साथ यह होना चाहिए।.
खोजते हुए अचानक मेरी नज़र उस बैग पर पड़ी, जो कहीं कोने में धूल जमा कर रहा था।.
बैग लेकर मैं झोपड़ी के अंदर पहुंचा। सामान से दवा निकली, फिर वो मुंह में डाल दी।.
एक दिन आराम करने के बाद मैंने सभी लड़कियों को एक साथ बुला लिया। उस दवा के असर में तब तक कोई ढील नहीं पड़ती, जब तक मैं एंटीडोट नहीं ले लेता।.
उस दिन मैंने हर किसी से साफ-साफ कह दिया था - लीना को छेड़कर ही रहूँगा। अब तुम्हारी बारी, उसे यहाँ लाओ।!
अचानक लीना वहाँ पहुँच गई। उसने मेरी ओर घूरकर कहा - तुझमें अब भी इतना साहस है? मेरे साथ झगड़ेगा तो फिर हारेगा।.
अगर आज मेरी हार हो गई, तो मैं तुम्हारा नौकर बन जाऊँगा। तुम जो भी कहोगी, मैं वही करूँगा।.
एकदम शांतिपूर्ण पल में, लीना के दिमाग में ख्याल आया - अब समय है किसी को अपने हिसाब से चलाने का।.
उसने तुरंत हाँ कह दिया।.
शायद उसे लगा हो कि जैसे पहले वो टूट चुका था, ऐसे ही अब फिर से बिखर जाएगा।.
हाथ छूते ही उसकी उंगलियाँ सरक गई। फिर धीमे-धीमे वो हिलने लगा।
क्योंकि मैंने उत्तेजक गोली खाई थी, मेरा लिंग घनघोर खड़ा हो गया।.
दस मिनट तक लीना ने मेरे लंड को हिलाया, पर कुछ हुआ ही नहीं।.
लीना इसे देखकर हैरत में पड़ गई, क्योंकि लंड अभी भी वहीं था।.
थोड़ी देर में दस से बीस मिनट बीत चुके थे। लंड अब तक उतरा ही नहीं था। वो धीमे-धीमे झलने लगी, फिर जोर से हिलाने लगी। तीस मिनट बाद भी लंड से पानी तक नहीं आया।.
गोली ने सेक्स के पल को अजब ढंग से बदल दिया।.
दर्द ने लीना के हाथ में जगह बन ली।.
वह उसके लंड पर पैर घिसती रही, पर ढ़ाई बजे तक कुछ नहीं हुआ। लीना टूट चुकी थी, अब सिर्फ मेरी हो चुकी थी।.
समय बीता, तो वह घड़ी भी आई।.
उसे पास बुलाते ही मैंने सीधे उसके होंठ छुए।.
उसके होंठों का स्वाद मेरे मुँह में फैल गया था।.
थोड़ी देर में समय आ पहुंचा, जब चुदाई शुरू होनी थी।.
इसलिए उसने हर लड़की की पेशाब पीनी पड़ी, सजा के रूप में।.
शर्म से उसका सिर झुक गया, ऐसा करने के बाद।.
शाम होने तक मैं लीना को वैसे ही रख पाता, जैसे चाहता।.
मैंने तय किया कि अब बारी है उसके मुँह पर होठ फेरने की, धीमे-धीमे।.
उसने एक हवस भरी मुद्रा बनाई। फिर धीमे से अपना लंबा शरीर आगे बढ़ाया। गहराई तक जाने के बाद वो थम गया।.
ये बात सुनकर मज़ा आ गया कि लीना अब भी शादी नहीं की थी।.
उसने लंड के प्रहार को सहा नहीं, फिर खून धीमे-धीमे उसकी चुत से टपकने लगा।.
डर गई थी लीना, ये सब देखकर। फिर बोली मेरी तरफ, छोड़ दो कृपया।.
लाल हो गया था मेरा लंड, उसकी चुत से भरने के बाद।.
थोड़ी देर के लिए मैंने उसे सुकून में छोड़ दिया।.
एक तरफ से उठी गोली, पास ही छिपाकर रखी थी, और अब निगल ली। धीरे-धीरे लंड का असर घटने लगा।.
फिर से मैंने लीना के साथ सेक्स शुरू किया।.
इसी बीच जब मैं भी छलकने वाला था, तो सभी तरल अपनी मम्मों पर गिरा दिया। फिर उसकी चुत को धीरे से साफ किया, और फिर चढ़ने का इरादा किया। पर वो तो बिलकुल तैयार नहीं थी किसी घुसाव के लिए।.
एक लड़की से जड़ी लेकर आने को कहा मैंने। फिर लीना के हाथ-पैर बांधे गए। उसकी चुत में जड़ी डाल दी गई, जो खुजली वाली थी।.
एक छोटी सी चीज़, मैंने उसकी पीठ पर भी लगा दी। इस जड़ी-बूटी का असर बराबर एक घंटे तक रहता है।.
मैंने अभी-अभी लीना को खोल दियa था।.
लीना को अचानक चुत में तेज़ खुजली महसूस होने लगी।.
एक उंगली सरकती रही चुत में, खुजली कम होने लगी।.
खुजली पैदा हो गई थी उसकी चुत में, वहीं गांड के अंदर भी बात शुरू हो चुकी थी।.
इसने उँगलियों से खुजली को रगड़ा, पर कुछ फर्क नहीं पड़ा। घबराहट में उसके मुँह से आवाज़ निकली।.
लीना ने कहा - जय, मेरी गुद में अपना लंड डाल दो। बहुत रिक्वेस्ट कर रही हूँ। मैं हाथ जोड़कर खड़ी हूँ। तुम्हारे जो भी हुक्म होंगे, सब मान लूंगी। बस मेरी चुदाई जरूर कर देना।!
ठीक है, जो मैं कहूँगा उसे तुम्हें करना पड़ेगा… अब इसके बारे में सोच लो!
अब सोच लिया है मैंने… तुम बस इतना कर दो कि मेरी चुत और गांड की खुजली खत्म हो जाए।!
मेरा लंड लीना की गांड में घुसा हुआ था। आगे-पीछे हिल रहा था। वो चिल्लाई - थाम यार! धीरे कर। उसकी गांड जलन से लाल हो गई थी। मैं फिर झटका दे दिया।!
मैंने लौड़े को घचाक से पीछे की तरफ धकेल दिया। अब वो चिल्लाया, साँस छूट गई क्योंकि उसकी जगह पर राहत हो गई थी।.
खुजली से परेशान वो बेचैन होकर मचल रहा था।.
एक खयाल दिमाग में आया, फिर मैंने हाथ से कांच की शीशी उठाकर उसके पिछवाड़े में घुसा दिया। तड़पकर वो चीखने लगी।.
लीना ने पूछा - अब वो क्या कर रहा है? मुझे बहुत दर्द हो रहा है, उफ्फ… ओह, ऐसे मत करो।!
रहो शांत, वरना खुजली रुकेगी नहीं।!
बोतल को मैंने डर के बिना भीतर धकेल दिया, क्योंकि लीना की गांड पहले ही बिल्कुल फट चुकी थी।.
मैंने धीरे-धीरे उसकी चुत में अपना लंड डालना शुरू किया। हर बार जब मैं आगे की ओर झटका देता, लीना के होठ सिकुड़ जाते।.
मेरी उँगलियाँ धीरे-धीरे उसके मम्मों पर चढ़ने लगीं। तभी एकदम से वो लाल हो उठे।.
बीस मिनट के लगातार प्रयोग के बाद मैं हांफ रहा था। इस बार मेरा सारा स्खलन उसकी योनि में आ गया था।.
लंड रस के कारण उसकी चुत की खुजली तो लगभग खत्म हो गई थी.
सांसें तेज चल रही थीं, उधर मेरा दिमाग सभी लड़कियों के पति से आगे निकल चुका था।.
एक-एक कर लड़कियों के साथ समय बिताने में अब पूरा दिन खप जाता।
हर एक लड़की, 24 में से, उस दिन मुझ पर छा गई थी।.
जो लड़कियाँ मेरी चुनौती पूरी कर लेती थीं, उन्हें ही दोबारा चुदवाने का मौका मिलता था।.
एक वक्त आ गया था, जब उन लड़कियों के लिए मेरी पेशाब की एक बूंद भी बचने नहीं देती थी।.
तुम्हें इस अफ्रीकन सेक्स कहानी में जो मजा आ रहा है, वो मैं तुम्हारे कमेंट्स पढ़कर समझ लूँगा। अगर ऐसा लगा कि ये कहानी तुम्हें पसंद चल रही है, तभी अगला हिस्सा सामने रखूँगा।.
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0