किरायेदार राहुल ने मेरी कुंवारी बुर फाड़ दी

Jan 2, 2026 - 15:15
Jan 7, 2026 - 15:00
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किरायेदार राहुल ने मेरी कुंवारी बुर फाड़ दी

एक किरायेदार ने मेरी कुमारिता छीन ली। शादी के बाद मेरा भाई और उसकी पत्नी जब साथ में होते, मैं छुपकर देख लेती। उनके संग रहने के नज़ारे ने मुझे बार-बार उकसाया। ऐसे में एक नए आदमी ने हमारे घर में कमरा किराए पर ले लिया। वो हर बार मेरी उम्र को घूरता, जैसे कुछ गर्माहट ढूंढ रहा हो।.

यह कहानी सुनें.

अरे दोस्तों, नाम मेरा है रूबीना।.

मैं वहाँ का रहने वाला हूँ, जहाँ की मिट्टी बोलती है।.

अब मुझे बीस-दो का होना है। पाँच फ़ीट तीन इंच की ऊँचाई में जिंदगी गुज़र रही है।.

एक दिन मैंने फैसला किया, तुम्हें वो कहानी सुनाने का।.

गर्मियों में एक देसी लड़की की कहानी धीमे-धीमे बदलने लगती है।.

एक साथ हमारे घर में मॉम-डैड का होना था। भाई के साथ उसकी पत्नी भी वहीं रुकती थी। बड़ी बहन मेरी तब शादीशुदा हो चुकी थी। जीजू उसके साथ आकर बस गए थे।.

शादी हो चुकी थी मेरे भाई की, वैसे ही जैसे दीदी की।.

मेरी बारी आ गई थी।.

हर किसी का कमरा अलग-अलग हुआ करता था।.

अँधेरे कमरे में, बिस्तर पर लेटी हुई, नींद आती थी।.

घर में जगह इतनी है कि सबके लिए बसे।.

कई बार पिता जी किसी मुश्किल घड़ी में फंसे इंसान को कमरा सौंप देते।.

तब उसी वक्त मेरे भाई का साथी राहुल हमारे घर में ठहर गया।.

उसकी बातचीत में झझरपन था, कुछ ही पलों में हर किसी के साथ उसकी बात चलने लगी।.

रात के खाने में वहीं बैठ जाता, सभी के साथ।.

एकदम छोटी-सी उम्र से ही मुझे लोगों के सामने बोलते हुए डर लगता था।.

उस वक्त मैंने राहुल से बात नहीं की, सिर्फ़ इसलिए नहीं कि हम दोनों अभी तक शादी नहीं कर पाए थे।.

पता था मैंने कि वो टकटकी लगाकर मेरी तरफ़ देखता रहता।.

सुबह के वक्त मैं अंदर के कमरे में झाड़ू चला रही थी। कोई ओढ़नी नहीं पहनी थी मैंने, इसलिए गहरे नेकवाले कुर्ते से मेरे छाती के ऊपरी हिस्से खुले रह गए थे।.

तभी अचानक राहुल कहीं से आ पहुँचा।.

उसकी नज़र मेरे 34 इंच के गुलाबी-सफेद चूचों पर टिक गई, जैसे कोई भूखा हो।.

उसकी नजरें पढ़ लेने के बाद मन अटपटा हो गया था।.

झाड़ू लगाते हुए मैं धीरे-धीरे पलट गई, ताकि उसकी आंखें ना देख पाए।.

लेकिन जहाँ मैं झाड़ू से साफ करती, वहीं पहुँच जाता वो… उसकी नज़र मेरे सीने पर टिक जाती।.

अच्छा लग रहा था मुझे, हालाँकि शर्म सिर पर चढ़ कर बोल रही थी।.

हवा सी आई, मैं कमरे में गया। वहाँ पहुँचकर सिर पर कपड़ा लपेट लिया।.

बस तक हमारी नजरें जुड़ी रहीं।.

थोड़ी देर के बाद, मैं वह जगह छोड़कर निकल पड़ी।.

उस रात, पलंग से उठकर मैं ज़रूरत से बाथरूम की ओर चल पड़ी।.

हम दोनों का बाथरूम साझा है, मेरा और राहु का।.

अँधेरे में डर सताने लगा, इसीलिए बाथरूम का दरवाजा खुला ही रख दिया।.

बैठते हुए मैंने सलवार उतारा, पैंटी साथ में खिसका दी। फिर झड़प लगाने लगी।.

मैंने जब पेशाब कर दी, तो पहले अंडरवियर ठीक किया। सलवार को सँभालते हुए धीरे से ऊपर खींचा गया।.

मैं फिर मुड़ी, उसी पल नाड़ा को सँभालकर।.

तभी नज़र पड़ी कि गेट के पीछे राहुल वहाँ खड़ा था।.

आवाज़ सुनते ही मेरा दिल धड़क उठा। बिना सोचे, सलवार के पल्लू को मुट्ठी में भींचा और कमरे की ओर झपट पड़ी।.

अब तो मैंने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया है।.

शर्म से मेरा सिर झुका पड़ा था।.

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वह मेरी सफेद, भारी पिछली त्वचा को नजरअंदाज़ नहीं कर पाया।.

तब रात भर आँख लगने का नाम नहीं लिया।.

अगली सुबह कई बार आँखें चुरा लीं।.

उसकी नज़रें मेरे ही ऊपर टिकी थीं।.

डर के मारे मेरी हिम्मत तो निकल ही गई थी।.

उसके बाद कई रातें ऐसी आईं, जब सोते समय मुझे टॉयलेट जाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी।.

अचानक एक पल में, रात के अंधेरे में पेट ने जोरदार संकेत दिया।.

फिर मैं सावधानी से बाथरूम की ओर चल पड़ी।.

आज मैंने गेट को ताला लगा दिया।.

गेट खोलते ही मेरी नजर पड़ी राहुल पर, वह खड़ा-खड़ा अपनी लंबाई से खेल रहा था।.

डर लगा मुझे, जब उसकी ओर नज़र पड़ी।.

लंबा सा लौहा उसके पास था, आँखों को चुभता हुआ।.

उधर से राहुल मेरी ओर बढ़ने लगा।.

मैंने पीछे मुड़कर देखा नहीं।.

अचानक मैं वापस कमरे में आ गई। खिड़की पर जाकर देखा तो राहुल वहीं खड़ा था, बाहर।.

नींद ने आखिरकार मुझ पर हावी हो लिया, चादर तन के ऊपर थी।.

रात भर उसका लंड ही दिमाग में चलता रहा। जब तक नींद नहीं आई, तब तक विचार उसी पर टिके रहे।.

उसका लंड मेरी नज़रों के सामने आया, जब मैंने अपनी आँखें पहली बार इतने करीब से खोली।.

काली सी छाया में वो लंबा सा खड़ा था, मोटाई किसी गन्ने जैसी। धीरे-धीरे आखें उस पर ठहर गईं, ऐसा लगा जैसे कोई मूर्ति हो।.

मुझे अब बार-बार सिर्फ़ उसकी काली चोद नज़र आने लगी।.

कभी-कभी पैरों के बीच एक अजीब सी खिंचाव महसूस होती थी।.

अचानक उसका लंड थोड़ा अलग लगा। दरअसल मैंने पहले कभी अपने भाई का हालत बाहर से देखा था।.

मेरे भाई की शादी तब हो गई थी।.

उस रात कई बार मैंने भाई और भाभी को खिड़की से देखा, जब वे अपने कमरे में एक-दूसरे के पास थे।.

उस वक्त से मेरे मन में यौन इच्छा पैदा हो गई थी।.

वो जब भी मौका मिलता, मेरे भाई के लिंग को होठों से सहलाती।.

एक दिन मैंने देखा, मेरे भाई ने अपनी पत्नी के पैर की उंगलियाँ मुँह में ले रखी थीं।.

जब भी मन चिड़चिड़ा होता, मैं रात में खिड़की के पास जाकर उन्हें साथ आए देख लेती।.

भाई-भाभी के साथ ऐसा करते देखकर मेरी सांसें तेज हो जाती थीं। उनकी छाती पर होंठ फिरते, वह धीमे-धीमे आगे बढ़ते। मैं अपनी जांघों के बीच ऊंगलियां घुमाने लगती। एक झटके के साथ वह अंदर जाता, मैं सिकुड़ जाती। हवा में तनाव घुलने लगता। मेरी नजर चूड़ियों पर टिक जाती, जब वह हिलता। कमर झुकती, सांस रुकती। मैं खुद को छूती, बिना किसी ठहराव के।.

एक वक्त था जब मेरे दिमाग में बस इतना चल रहा था - इसे कर पाने का समय कब आएगा।.

शायद इसलिए मैं चुप रहती, जब भी राहुल कुछ अजीब करता।.

उसके पास भी एक बेटा है, मेरी सबसे बड़ी बहन के।.

उसका लंड मैंने देखा है।.

वैसे, नहाते समय मुझे उसका लंड छूना पड़ा था।.

फिर भी, राहुल के पास जो है, वह आम से हटकर है।.

इतना मोटा व लंबा कि सिर्फ मूसल ही याद आए।.

उसके बाद जब राहुल ने मुझे देखा, तो मुस्कान छूट गई।.

आँखें जब मिलाने की कोशिश की, तो वो सामने होते हुए भी दूर लगे।.

कभी-कभी तो घबराहट होने लगती, किनारे खिसक जाने का मन करता।.

कभी-कभी रात में उठकर जाने की बजाय, मैंने सोचा - अब छोड़ ही दूँ।.

अब तो मन में रति की इच्छा पैदा हो गई।.

कभी-कभी सोच में पड़ जाती थी, आगे कदम कैसे उठाऊँ।?

उस रात मैंने खिड़की के पास जाकर अंदर झांका। भाई और उनकी पत्नी बिस्तर पर एक-दूसरे से चिपके हुए थे। आवाजें आ रही थीं। घबराहट हुई। फिर मैं पलटकर चला गया।.

मैं देखती रही.

उछलती हुई भाभी का प्यार लौड़े पर था, जबकि भाई के मुँह से दूध की धार निकल रही थी।.

घर में राहुल का होना उस शाम संभव नहीं था।.

बाहर जा चुका था, मैंने तभी से भैया-भाभी के बीच हो रहे क्रिया पर नज़र जमाए रखी।.

अगले दिन से मन में सेक्स की इच्छा पैदा हो गई।.

राहुल लौट आया था उस दिन।.

घर में बस हम चार लोग थे - भाई, उनकी पत्नी, राहुल व मैं।.

शादी में सभी कहीं बाहर चले गए थे।.

एक तरफ दिन बेचैनी के साथ खत्म हुआ, वहीं अँधेरा छाने पर नींद दूर-दूर भाग रही थी।.

आज फिर से मन मचल रहा था, बस एक चीज़ याद आई - वो लंबा-सा धतूरा। पिछली शाम की तस्वीर आख़िरी बार घूम गई, जहाँ सब कुछ ओझल था, सिवाय उस नंगे अंग के।.

तब मैं रात में सुलगाकर बाथरूम की ओर चल पड़ी।.

राहुल के वापस लौटने की बात मैं पहले से जानता था।.

ऐसा ही हुआ.

बाहर आते ही मुझे राहुल वहीं खड़ा दिखा। उसका लंड इधर-उधर झूल रहा था।.

उसका लंड मेरी नजरों से छिप नहीं पाया।.

गुस्से से मैंने पूछ लिया - आपको खुद पर अफसोस नहीं होता?

वह हंस दिया.

अब मैं वहाँ से हटकर कमरे की ओर बढ़ गई।.

दरवाज़े पर ताला नहीं डाला मैंने, सिर्फ इसलिए कि दिमाग में एक साथ उलट-पुलट विचार आ रहे थे।.

पलट कर मैंने बिस्तर पर सिर नीचे किया।.

कुछ समय पश्चात् आखें खुलीं।.

अचानक एहसास हुआ कि सलवार और पैंटी नीचे तक फिसल चुकी थी।.

मेरे चूतड़ों पर किसी के हाथ का दबाव महसूस हो रहा है। जीभ की छुअन साफ तौर पर लग रही है।.

एकदम तभी समझ में आया कि वो राहुल है।.

पीठ के बल झूठ गई मैं।.

मैंने पीछे मुड़कर देखा, उसका सिर मेरे कूबड़ों के बीच धंसा हुआ था।.

ख़ुशी का पल था।.

वो बोलता जा रहा था, मैं कुछ कह नहीं पा रही थी। सिमट कर लेटी रही, आँखें बंद किए हुए झूठी नींद के भाव में।.

हर बार जब मैं धीमे से हलचल करती, उसका सांस अटक जाता।.

थोड़ी देर में फिर से चलने लगता।.

ख़ुशी का पल था।.

मुझे एहसास हुआ, उसकी जीभ मेरे पिछले हिस्से पर घूम रही थी।.

मुझे खजाने का एहसास होने लगा था।.

मैं सच कह रहा हूँ, मन लग रहा था।.

अचानक वो मेरी जांघें अलग करने लगा, हाथ धीमे से पैर के तलवे से ऊपर चढ़ने लगा।.

उसके हाथ ने छूते ही पेट में हलचल सी मच गई।.

उसकी जीभ मेरे होंठों पर फिसल गई।.

मन कर रहा था कि कुछ करूँ।.

उसने मुझे सीधा होते देखा, तभी उसकी सांस थम गई।.

मैंने उसको देखा.

उसके शरीर पर कोई कपड़ा तक नहीं था।.

मेरे सामने उसका लंड पड़ा था।.

अब मैंने अपनी बुराइयों पर पर्दा डालना शुरू कर दिया।.

अचानक वह मेरे पास आया। धीरे से हाथ बढ़ाकर मुझे अपने करीब खींच लिया।.

उसने कहा, सिर्फ एक बार मुझे प्यार करने दो रुबीना। तुम्हारे अलावा कुछ भी नज़र नहीं आता।.

वह खामोशी से मेरी हाँ मान बैठा। फिर मुझे पीछे की ओर लिटा दिया। ऊपर से जम गया।.

कोशिश के बावजूद मेरे हाथ से कुछ नहीं बन रहा था।.

उसके होंठ मेरे पास आए, फिर वो मेरे स्तन को निपोड़ने लगा।.

उसने धीमे से मेरी जांघें अलग की। फिर मेरी चुत पर जीभ घुमा दी।.

नशे का असर शुरू हो चुका था।.

दिमाग में बस इतना ख्याल आया कि सब कुछ उस पर छोड़ दूँ।.

उसने मेरे सभी कपड़े निकाल दिए, फिर वह मेरे स्तन चूसने लगा।.

अचानक सब कुछ ऐसे लग रहा था, मानो पहली बार कोई मेरे स्तन चूस रहा हो। कितना अजीब अहसास था .

तब मैं बिस्तर पर लेटी हुई थी, आराम करते हुए।.

खेलते हुए वह मेरे साथ था।.

उसकी जीभ मेरी त्वचा पर फिसलती रही, हर कोने तक पहुँच गई।.

उसके बाद वो मुझे नीचे बैठा गया।.

उसकी जान मेरे होंठों के पास आई, सूजी हुई छड़। अब इसे चूसना था - उसका हुक्म था, बस इतना कहा गया।.

लेकिन मैं हाँ नहीं कर पा रही थी।.

फिर अचानक वो चीज़ मेरे होंठों के बीच समा गई।.

मुझे उसका लंड मुँह में लेने पर सिहरन हुई, इतने में वो मेरे स्तन दबाए हुए था और अपना लौड़ा मेरे मुँह में आगे-पीछे कर रहा था।.

पहले तो उसके लंड का स्वाद मुझे अजीब लगता था… कुछ कड़वाहट-सी महसूस होती थी। धीरे-धीरे, फिर भी, चूसने लगी थी मैं बार-बार।.

उसका लौड़ा मेरे मुँह में था, मैंने काफी देर तक ऐसे ही जारी रखा।.

उसने मुझे पलटकर अपने ऊपर लिटा दिया, ऐसे कि हमारी स्थिति बदल गई।.

वो मेरी बुर पर होंठ चला रहा था, मैंने उसके लंड को हाथ में लिया।.

वो बात मन में घूम रही थी।.

उसने मुझे पलंग पर धकेला, जब मैं हांफ रहा था।.

उसने मेरी जांघों को ऊपर उठाया, फिर पैलव में अपना सा घिसने लगा।.

फिर वो धीरे से पैंट उठाता हुआ, जेब में हाथ डालकर कंडोम निकाला। बाद में, चुपचाप उसे पहन लिया गया।.

वो जब लंड पर कंडोम पहन रहा था, मैं सिर्फ देखती रह गई।.

उसके हाथ ने छाता ओढ़ाया लंबू को, फिर सीधे मेरे अंदर धंसा दिया।.

अचानक दर्द के मारे मैं चीख पड़ी, जब वो अपना लंड अंदर धकेल गया।.

उसकी झपट्टा से मेरा मुँह बंद हो गया। पल भर में ही पूरा लंड मेरी बुर में जा धंसा।.

उसने मुझ पर बेरहमी से हमला किया।.

दर्द कम नहीं था, फिर भी मस्ती कम नहीं थी।.

थोड़ी देर के बाद वह धीमे-धीमे मेरे अंदर हिलने लगा।.

फिर वह मुझे घोड़ी समझने लगा, मेरे पीछे के हिस्से में अपनी चीज धकेल दी।.

दर्द कई घंटों से मेरे साथ चल रहा था।.

उसने मुझे पीटा जारी रखा।.

वो रात भर मुझे छूता रहा। कभी-कभी वो धीमे हो जाता, कभी बहुत तेज़। उसके हाथ मेरी पीठ पर फिसलते रहे। मैं साँस लेना भूल गया था। खत्म होने के बाद वो चुपचाप लेट गया।.

उसने कंडोम निकाला। फिर मुँह में लेने की बात कही।.

उसका लंड मेरे मुँह में था।.

पानी का रुक-रुक के गिरना शुरू हो गया। मेरे बूब्स पर सब कुछ लेकर आ धमकी वो।.

पानी मेरा उस समय तक बह गया था, जब तक देसी अंदाज़ में कुछ होने पाता।.

उसके बाद सब आराम करने लगे।.

थोड़ी देर तक चुपचाप बैठने के बाद, उसने गोली निगल ली। वापस आकर, मेरे होंठों पर लंड रख दिया।.

उसके मुँह से आवाज़ निकली - लंड चूस।.

उसका लंड मेरे मुँह में था।.

थोड़ी देर में उसका लंड पूरा कसकर तन गया।.

इस बार वह मेरे पलंग पर आया।.

बार इस पर उसने मुझे लंड की सवारी का आनंद दिया।.

जब मैं उसके लौड़े पर बैठी, तभी मन में भाभी का चेहरा तैर गया। फिर क्या था, धीरे से अपना दूध उसके मुँह में डाल दिया।.

एक रात में वो मेरे साथ चार दफ़्तर प्यार कर गया।.

लगभग पूरी रात वह उसके साथ चुदाई में डूबा रहा।.

किसी के न होने का एहसास तब हुआ, जब दरवाज़ा खुला।.

वो दोनों कमरे में एक-दूसरे से चिपके हुए थे।.

अब सुबह का वक्त है।.

उठकर मैंने नींद तोड़ी।.

वापसी हुई थी मम्मी-पापा की।.

उसकी ओर देखे बिना ही मैं आगे बढ़ गया। राहुल मुस्कुरा रहा था, फिर भी मेरी नजर उस पर टिकी नहीं।.

अँधेरा छा गया।.

रात हुई थी, मैं बिस्तर पर लेट गयी।.

रातभर मन में यही चल रहा था कि कल होगा क्या।.

मेरी सलवार धीरे से टखनों तक आई। हाथ अपने ऊपर चलने लगा।.

मेरा विवाह हो चुका था।.

किसी अनजान व्यक्ति ने मेरा सम्मान छीन लिया, फिर भी मुझे उसके साथ गलत होने में काफी सुख महसूस हुआ।.

एक-एक कर उसने कई मौकों पर मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाए।.

जब घर पर कोई मौजूद नहीं होता, तब वह मेरे साथ सेक्स कर लेता।.

कभी-कभी मैं उसके लड़के के साथ अपनी जरूरत पूरी कर लेती।.

एक बार एक महीने से ज़्यादा समय तक कोई संबंध नहीं हुआ। हम दोनों अपनी तड़प को शांत नहीं कर पाए।.

वो दिन याद है, मैं किचन में खड़ी थी।.

हर कोई हॉल के अंदर नीचे बैठा हुआ था।.

तभी राहुल वहाँ आ पहुँचा, मेरे पास जाकर चिपक गया।.

डर तो लग रहा था, हालाँकि चुत में पानी आ चुका था। फिर क्या था, संकेत कर दिया और कमरे में खिसक गई।.

उसका कदम मेरे कमरे के अंदर पड़ा, पीछे की तरफ से।.

कमरे में घुसते ही हम इतने उभरे हुए थे कि दरवाजा लगाना याद नहीं रहा।.

राहुल ने मुझसे सारे कपड़े उतार लिए, फिर वो मेरी जाँघों को चूमने लगा।.

उसके कपड़े भी उतर गए थे।.

थोड़ी देर के बाद मैं राहुल के ऊपर 69 में पड़ा हुआ था।.

मेरा मुँह उसके लिंग पर था, उसके हाथ मेरे स्तनों को निचोड़ रहे थे।.

उस रात हम सबकी हालत बेकाबू थी।.

अचानक दरवाजा खुला, और बड़ी बहन अंदर आ गई। पल भर में उसने सब कुछ देख लिया, धीरे-धीरे वो कोने में खड़ी हो गई।.

तभी वो मेरे पास सरक गई।.

फिर खौफ़ ने दिल पकड़ लिया।.

वो डराने लगी - हर किसी को पता चल जाएगा।.

थोड़ा डर लग रहा था हमें, मगर दीदी के मन में तो बस राहुल के साथ यही कुछ करने का ख्याल चल रहा था।.

तब हम दोनों बिल्कुल नंगे खड़े थे। शरीर के हिस्सों को ढकने में जुटे थे हम।.

उसकी बड़ी बहन ने राहुल के पैरों की ओर नजर डाली।.

चौंतीस साल की उम्र पार कर चुकी थी मेरी दीदी।.

हो सकता है अब जीजा का ध्यान दीदी पर कम रहने लगा था।.

अचानक दीदी राहुल के पास पहुँचीं। उन्होंने कहा, "जैसे तुम रुबीना के साथ ऐसा करते हो... ठीक वैसा मेरे साथ भी करना।".

एकदम से मेरा होश उड़ गया, जब यह बात सुनी।.

उसी पल राहुल के लिंग को दीदी के हाथों में महसूस किया। फिर धीमे-धीमे उन्होंने आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।.

ख़ुशी से राहु का चेहरा खिल उठा।.

उसने भैया की तरफ़ बढ़ते हुए उनका लिंग मुँह में ले लिया।.

उसकी दीदी ने मुँह में लिया, धीमे-धीमे शुरू कियa।.

अचानक वह दीदी के कपड़े उतारने लगा।.

उसकी नंगी दीदी को गुस्से में पीटने लगा।.

खड़े होकर मैं वह सब देख रही थी, जो वो दोनों कर रहे थे।.

थोड़ी देर के बाद, राहुल ने मेरा भी नाम लिया।.

उस रात हम तीनों एक साथ थे। पल-पल बीतने वाला समय अजीब सा लग रहा था। कभी कोई चुपचाप उठ जाता, तो कभी कोई हँस देता। हवा में गर्माहट घुल रही थी। आखिरकार सब कुछ धीरे-धीरे आगे बढ़ गया।.

तभी से तीनों के बीच यह चीज़ धीरे-धीरे आदत बन गई।.

एक व्यक्ति हम दोनों बहनों के साथ सेक्स करता।.

एक सुबह, बिना किसी हल्की आवाज़ के, राहुल का रूम खाली पड़ा मिला।.

दोनों बहनें तब फिर प्यास महसूस करने लगीं।.

हर बार जब पापा कोई किरायेदार लाते, हम दोनों बहनें गौर से उसकी उम्र और शक्ल देख लेती। अगर वह जवान नहीं होता, तो हम तुरंत इनकार कर देती - ऐसा आदमी ठीक नहीं लगता था।.

जब कोई ऐसा औरत जैसा घटिया आदमी आएगा, तब दीदी उसके सामने अपनी गुदा खोल देंगी। इसके बाद मैं वहाँ पहुँचकर उन दोनों के साथ अपनी छेद में धमाल करवा लूँगी।.

फिर मैं तुम्हें एक और कहानी सुनाऊँगी, जो पूरी तरह सच है।.

तुम्हें ये देसी अंदाज़ वाली फक स्टोरी कैसी लगी, हाँ? कमेंट में खोलकर बता देना… 🔥



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