पड़ोसन भाभी ने इनकार किया, फिर भी लुंड चुत में ले ही लिया चुत

Jan 13, 2026 - 12:00
Jan 13, 2026 - 19:35
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पड़ोसन भाभी ने इनकार किया, फिर भी लुंड चुत में ले ही लिया चुत

एक दिन पड़ोस में रहने वाली भाभी के साथ मेरा कुछ ऐसा हुआ। वो अपने आप में काफी आकर्षक थी। उसके पति शहर के बाहर नौकरी करते थे, घर पर वो सिलाई का काम सम्भालती थी।.

मेरा नाम अंकित सोनू है, दोस्त।.

पच्चीस साल की उम्र में हूँ, नज़र आता हूँ तेज।.

शरीर में जगह-जगह तकलीफ है।.

इसी बात के चलते आंटियां, साथ ही भाभियां, मुझ पर ढलने लगती हैं।.

कुछ दोस्त कहते हैं कि मेरे शरीर पर तिल ऐसी जगह हैं, जिन्हें देख चाचियाँ और बुआएँ एकदम सॉफ्ट हो जाती हैं। फिर कुछ ही देर में वे अपना बचाव छोड़ देती है । .

अब तक मैंने कई लड़कियों से बातचीत की है। कुछ आंटियों और भाभियों के साथ बार-बार संभोग का अनुभव भी हुआ है।.

एक समय था जब मैं छोटी सी वित्तीय कंपनी में नौकरी करता था। काम यही था कि ग्राहकों को ऋण उपलब्ध कराया जाए।.

हर कोई यह जानता है कि उनमें से कई महिलाएं वहां पहुंचती हैं, सिर्फ तभी जब शारीरिक इच्छा सताने लगे।.

तब बस पन्द्रह दिन पहले की बात है।.

एक बार गर्मी के दिन में छत पर बैठे हुए थे। तभी नेहा भाभी ने पंखा चलाने के लिए कहा। धूप इतनी तेज थी कि कपड़े भीगे जा रहे थे। बातचीत के बीच में आवाज थोड़ी डरी हुई सी थी। घर के अंदर कोई नहीं था। हवा में खुशबू फैली हुई थी। फिर कुछ पल ऐसे आए जब समय ठहर सा गया।.

एक चौबीस का आठ साल बड़ा हो गया है। उनके पास ऐसी त्वचा है, जिसे देखकर मुहँ में पानी आ जाये।.

वो अक्सर घर से दूर रहते थे। कभी-कभार, चंद दिनों के लिए वापस आ जाते।.

उसका मकसद सिर्फ गाड़ी में होने वाला कमबख्त जुगनू था।.

एक किराए के घर में रहती थीं भाभी। पैसों का दबाव सताता रहता था उन्हें।.

कमाई के लिए वो सिलाई मशीन पर काम करती रहती।.

उसकी 34 इंच की छाती, 36 के कमर से नीचे का हिस्सा, और उजली त्वचा देखकर मेरा लंड जोर से ऊपर उठ जाता।.

उनका स्वभाव बिलकुल अंत के दिनों जैसा था।.

हर युवा लड़के के मन में आता है कि वो भाभी को अपने ऊपर लेटाए।.

गारमेंट्स का काम मेरा था। पड़ोस में रहते हुए नेहा भाभी से मुलाकात हुई थी।.

बातें हुआ करती थीं, ज़्यादातर इंस्टाग्राम पर मिलकर।.

बातचीत कुछ देर बाद गंदी पड़ने लगी।.

उस दिन, बातचीत के बीच में ही, मैंने पूरा हाल जान लिया था - वो कौन हैं, उनके पति क्या करते हैं।.

घर में सन्नाटा छाया हुआ था।.

तभी भाभी दुकान पर आ गईं। कपड़ों के लिए थोड़ा सामान चुना।.

ऐसा लगा, जैसे अब वो बात कहने का वक्त है।.

हाथ छूते ही मेरी साँसें तेज़ हो गईं।.

उन्होंने सिकुड़कर अपना हाथ खींच लिया।.

उसके होंठों पर मेरा झुकाव हुआ, पर घबराकर वह सट से खिसक गई।.

भाभी ने कहा - किसी की नजर पड़ जाएगी। यह सब सही नहीं है। मुझमें वो बात नहीं है।!

बस इतना कहकर वो तुरंत चली गईं।.
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अचानक कुछ लड़कियाँ "कोई देख लेगा" बोल देती हैं। पर असल में उनका मन पहले से तैयार होता है। फिर भी, छोटे-मोटे झगड़े जैसा अभिनय जारी रखती हैं। आप धीरे-धीरे अपनी बात दोहराते रहिए।.

उस दिन कुछ ऐसा हुआ, मेरी हालत बेहाल हो गई।.

बाद में इंस्टाग्राम पर चैट हो गई।.

उसने कहा, ये सब ठीक नहीं। मैं इस तरह कुछ नहीं कर पाऊँगी। पति हैं मेरे, याद रखो।!

मैंने सीधा कह दिया - चाहत है, सेक्स करने की। अब इस पर लेक्चर न दो… बस बता दे, हां है या ना? वो सब कुछ करने का मन कर रहा है, तुम्हारे साथ। ख़त्म है तो ठीक, नहीं तो छोड़ दे बात।!

ऐसे ही गपशप का सिलसिला चलता रहा।.

अब उन्हें मज़ा आने लगा। कितनी लड़कियों के साथ मेरा रिश्ता रहा, यह जानने लगीं। फिर पूछा, क्या मैंने कभी किसी के साथ शारीरिक संबंध बनाए हैं या नहीं।!

बस यही सब.

उसके सामने मैंने कई बहनों के साथ हुए पलों के बारे में बताया।.

इतना भी कहा गया कि कितनी लड़कियों के साथ संबंध बने, वो कैसे-कैे हुए।.

मैंने उन्हें यह भी कह दिया कि लड़कियों को रुला देना मेरी आदत है, जब वो चिल्लाती हैं। गोद में लेकर झूलते हुए ऐसा करना मुझे पसंद है… फिर भी सबसे अच्छा लगता है जब वो घोड़ी बन जाए, तब पेलना।.

कभी-कभी वो सब कुछ पूरा ध्यान से सुनतीं, फिर मुस्कान छलक जाती।.

एक सुबह फोन की घंटी बजी। भाभी की आवाज़ थी लाइन पर। कई दिन हो चुके थे तब से।.

उसने पूछा - मुझे दो हजार चाहिए, क्या तुम दे सकते हो? दस दिन में वापस कर दूँगी।!

बस यही बात थी कि भाभी सोने के लिए तैयार हो चुकी थीं।.

बस मैंने समय गवाया नहीं।.

घर पहुँचता हूँ, फिर बोलता हूँ - देने।.

अचानक भाभी ने कहा - तुम्हें वो भूंजा लेकर आना होगा।!

बस, मैं वहाँ हो गया।.

उसके बाद मैंने धीमे से उनकी ओर हाथ बढ़ाया, तभी वो ठहर गए। छुआ तो नरमता ऐसी लगी मानो सुबह की पहली रोशनी हो। जब तक समझ पाते, एक पल में सब कुछ हो चुका था।.

बार-बार कोशिश करने पर भी, उसका समर्थन नहीं मिला। रुकावट भी नहीं हुई।.

हाथ धीरे से भाभी के ब्लाउज के अंदर गए। छाती पर दबाव डाला, एक सिरे से दूसरे तक।.

एकदम ऐसा लगा जैसे हाथ में कोई पका आम हो।.

एक बार जिसने किसी भाभी के पॉम-पॉ नहीं छुआ, वो ख़ुशी का मतलब ही नहीं जान पाया।.

अचानक मेरे होंठ भाभी के पास पहुँच गए।.

उसके होंठ पर छुआई, फिर गाल की ओर बढ़ गया। गर्दन तक पहुँचते-पहुँचते सांस थम सी गई।.

एकदम अचानक भाभी बोलीं - अब कौनी आता है, तुम फटाप चले जाओ, सब कुछ रात में हो जाएगा।!

बात करने में सच था, इसी वजह से मैं भाभी से दूर हट गया।.

क्या समय पर पहुँचूं, मैंने जानना चाहा।?

बोले थे - शाम के आठ बजे के बाद पहुँचना।.

मेरे मुँह पर मुस्कान आ गई, जब मैंने उन्हें चूमा।.

शाम को फोन उठाया, भाभी से बात हुई। नीचे के मैदान को साफ रखने को कहा। कहा - आज चाटूँगा पूरे ज़ोर से। चोदकर इतना कि हालत खराब हो जाए।!

वे हंस दीं.

शाम को मैंने स्ट्रॉबेरी वाले कंडोम खरीद लिए। तुरंत सूचना दे दी कि यही ला रहा हूँ।.

कुछ भी बोलने से वह चुप रहे।.

अब शाम के आठ बजने पर मैं हर पल टकटकी लगाए बैठा।.

अजीब बात है। जब कुछ मिलने को दिल करता है, घड़ी के कांटे लगभग रुक से जाते हैं।.

कई बातें दिमाग में घूम रही थीं, वो बिना कपड़ों के लेटी होगी। साड़ी उतारने में एक खास आनंद होता है।.

एक दिन, ऐसा ही सोचते हुए मैं बाथरूम में गया और कुछ हलचल कर डाली।.

साढ़े सात पर फोन आया। उसने धीमे स्वर में कहा, मैं अब नहीं आऊंगी, बुरी तरह थक गई हूँ।!

सच कहूँ तो मुझे अपने सीधे लंड पर ही विश्वास नहीं रहा।.

गुस्से में आकर सब कुछ बिगड़ गया।.

ग़ुस्से में फोन रखते ही मैंने उसका अकाउंट इंस्टाग्राम पर बंद कर दिया।.

दस बजे का समय हुआ तो भाभी का फ़ोन आ गया।.

बोला मैंने - साफ-साफ जवाब देना है तो ठीक। नहीं तो पास मेरे किसी काम की बातचीत नहीं।!

बातचीत कुछ देर चली, उसके बाद वह सहमत हो गई।.

तब उसने कहा - रात के तीन बजे यहाँ पहुँच जाना, लेकिन सिर्फ एक ही बार होगा।!

हाँ कह दिया मैंने।.

मगर सच तो यह है, माशूका आशिक के पास जाने से पहले कई बहाने ढूंढती है। फिर भी, एक बार उसकी छाती से लगते ही वह ठंडी हवा की तरह धीरे-धीरे गुदगुदी बन जाती है।!

ऊपर पहुँच जाने के बाद, बार-बार चढ़ना आसान हो गया।.

अलार्म बजने का इंतज़ार करते हुए आँख लग गई, दिमाग अभी भी उन्हीं बातों में उलझा था।.

लेकिन हालत ऐसी कि खड़ा होने के बजाय वहीं रह गया।.

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सुबह उठा तो सामने पड़ी थीं 7 याददाश्तहीन कॉलें। घड़ी में तीन बज रहे थे। इतनी जल्दी और इतनी बार - समझ आ गया, कितनी बेचैन थी वो। किसी अजनबी के लिंग को अपने भीतर महसूस करने के लिए तड़प रही थी।.

सुबह उठते ही मैंने घटना सुना दी। जवाब में वे बोले - गलती पूरी तरह आपकी है। अब किसी भी हाल में मैं कुछ नहीं करूँगी।!

सुबह के आठ बजे होने पर भी मैं वहाँ पहुँच गया।.

तुरंत जैसे पहुँचा, मैंने उनके हाथ में दो हजार रख दिए। बोला, इतने दिन के भीतर वापस करना, वरना दोस्तों से लौटाने में दिक्कत होगी।.

बस हां कह दिया - पक्का मैं वो लौटा दूंगी।.

अचानक मेरा हाथ भाभी के हाथ पर पड़ा। धीमे से उन्हें अपनी तरफ खींचते हुए मैंने उनके होंठ छुए। साँस रुक गई, फिर मैंने चुपचाप उनके होंठ चूस लिए।.

बार इस पर वो मेरे साथ खड़ी थी।.

रात के समय उसके शरीर पर नाइटी थी।.

एक हाथ से उसकी छाती पर दबाव डाला। हल्के से कंपकंपी गई… क्या अहसास था, शायद समझ नहीं पाऊँगा।.

रुई जैसी नरमियत पर खेलता हुआ सा दिसवट।.

एक हाथ से वो कर रहा था, तभी दूसरे ने छेड़ना शुरू किया उसकी जांघ।.

अचानक मैंने अपने कपड़े फेंक दिए। पल भर में सब कुछ छोट दिया।.

मैंने कहा- चूसो!

पर समझ नहीं आता, लड़कियों को क्या दिक्कत है… गुदा में डालने के लिए तैयार, पर मुँह में नहीं।.

उसकी भाभी ने मुँह से लंड निकाल दिया।.

ठीक है, उसके पास एक चार साल का बच्चा था। फिर मैंने सुझाव दिया - आओ, किचन में चलते हैं।!

रसोई में उनकी नाइटी धीरे से नीचे गिरा दी।.

उसके तंग स्तन, लंबी पीठ दिखते ही मैं सहेज न सका।.

अचानक मैं उन पर हमला कर बैठा।.

उस पल मैंने उन्हें गोद में उठा लिया, फिर अपनी तरफ से धक्का देते हुए लंड को चूत में घुसा दिया।.

लंड सट में जा घुसा, भाभी की चूत पहले ही ढीली पड़ चुकी थी।.

दीवार के पास खड़ा होकर मैंने जबरदस्ती उन्हें धक्का दिया।.

बहनजी के मुँह से धीमी-धीमी आवाज़ें निकल रही थीं।.

कैश निकलने की आवाज़ के बाद जो ध्वनि मुझे सबसे अच्छी लगती है, वो है - "आह आंह ऊंह आह और फिर जोर से!"

उसके बाद मैंने भाभी को गोद से उतारा, किचन के स्लैब के पास खड़ा किया तथा अपना लंड धीरे से उनकी चूत में डाल दिया।.

सावधानी से उनके होंठों को छूते हुए मैं आहिस्ता से अपनी गति बढ़ाने लगा।.

उसके मुँह से बाहर निकलता रहा – आह, उह, हम्म।.

उसके बाद मैंने उनसे कहा कि वे लेट जाएँ। मैं ऊपर हो गया, शरीर को उनके साथ घुलता हुआ महसूस किया।.

आँखें बंद किए, वो सुकून में डूबी हुई थी।.

होठों ने उसके गाल को छू लिया।.

हर जगह मेरे होंठ पहुँच गए थे।.

इसके बाद मैंने धीमे से आगे बढ़ते हुए लंड को भाभी की चूत में पूरा उतार दिया।.

उसके भीतर जाते ही वह झटके से ऊपर उठी। थोड़ी देर में समायी, धीमे-धीमे आनंद लेने लगी।.

कहना शुरू करूँ तो, मैंने कई साथियों के साथ संबंध बनाए हैं। फिर भी, किसी पति-पत्नी के रिश्ते में जुड़ने का अनुभव कुछ और ही लगता है।.

कोई बाग में छिपकर आम पत्थर से तोड़े, तब उसका स्वाद और भी गहरा हो जाता है।!

बस इतना ही मज़ा आ रहा था। नीचे, मोहल्ले की वो भाभी लेटी थीं, जो सुबह-शाम पति के लिए वट सावित्री की पूजा करती दिख जाया करती थीं। उनके शरीर में मेरा लंड धंसा हुआ था।.

ठीक है... मैंने भाभी की तन्दुरुस्त और खुली उम्र का आनंद कई ढंग से लिया।.

कभी वो घोड़ी बन गई, कभी मेरी गोद में आ बैठी। कभी लेट गई, तो कभी डॉगी स्टाइल में हिलने लगी। आधे घंटे तक ऐसे ही चलता रहा।.

कुछ देर तक सिर्फ आवाजें ही निकलती रहीं।.

उसकी पत्नी मेरे लौड़े पर झूल रही थी, इस खयाल से मन में उमड़-घटा हो रही थी।.

उसके गाल पर मुँह घिसता हुआ, फिर गर्दन तक नीचे आया। दांतों से हल्का काटा, जैसे निशान छोड़ने का खेल हो। होंठों पर ठहरा, थोड़ी देर वहीं रुका। छाती तक पहुँचा, चूसा, धीमे स्पर्श से डर गया कहीं कोई आवाज़ न आ जाए।.

एक बार मैंने सोचा कि भाभी के पिछवाड़े में भी घुस जाऊँ, मगर उन्होंने इनकार कर दिया। फिर मैंने वह ख्याल त्याग दिया।.

थोड़ी देर मस्ती भरे हलचल के बाद, मैं वापस आकर कपड़े धारण किए।.

एक बार फिर शामते भाभी का फोन आया। मोमो लेकर आने को कहा।.

पता था मैंने पहले से कि मोमो का बहाना सिर्फ ढोंग है। अब तो भाभी के भीतर की आग दोबारा जल उठी है, और इसीलिए वो बुला रही हैं वापस।.

अक्सर लड़कियां इस बात पर बात नहीं करतीं कि उन्हें सेक्स करने का मन है।.

पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में कामवासना आठ गुना ज़्यादा होती है, ऐसा महर्षि वात्सायन ने कहा। इसके बावजूद, पहल करने से वे हमेशा चूक जाती हैं। .

ठीक है... मैंने मोमो के ज़रिए दोबारा उसके साथ सेक्स किया।.

बारिश के बाद का पल था, जब भाभी ने कमरे में रोशनी बंद कर दी। उनका बेटा बिस्तर पर आँखें मूंदे था। फिर वह धीरे से कपड़े उतारने लगीं। खिड़की से एक झलक आई, और सब कुछ साफ हो गया।.

अपने मुँह को वो चूचियों पर रखे हुए था।.

उसे मैंने ज़ोर से पलटा, फिर बिल्कुल गुड़िया-सा बनाकर तेज़ी से धकेला।.

गिरते-गिरते मैं सीधा उनकी जाँघों के बीच आ गिरा।.

गर्मियों की तपन में जैसे धूप सी लगती हैं वो। पास आए बिना ही तापमान बढ़ जाता है।

हाल ये हो चुका है कि मैं सिर्फ छूता हूँ, और वो बिना कपड़ों के होने के लिए तैयार।.

एक हफ्ते में सात बार मौका मिला, दस दिन के भीतर। उनके शरीर का स्वाद छक गया मैं।.

फिर एक दिन, भाभी ने तमाशा कियa। लेकिन थोड़ी देर बाद, वहीं खड़ी-खड़ी मेरे पास आ गई।.

अब तो सही-गलत का सवाल ही नहीं उठता। रिश्ते में बचा है सिर्फ़ वो और मैं, जुड़े हुए इस तरह कि दूरी ख़त्म।!

एक नई पैंटी मेरे हाथ से उनको मिली। पहन ली उन्होंने, तभी बीच में से खींचकर मैंने उतार दी।.

गुस्से में आकर मैंने महसूस किया कि उसने पहले भी कई बार दूसरों के साथ संबंध बनाए थे।.

एक बार जब भाभी ने बिना रोक-टोक के सेक्स किया, तभी से मन में खयाल आया कि दोस्तों के साथ भी ऐसा हो।.

शायद अब बस कुछ ही दिनों की बात है।.

कभी-कभी वो मेरी भाभी के पास जाती है। उसके बाद घर में चुप्पी छा जाती है। फिर शाम को खाना एक साथ खाते हैं। कई बार आँखें मिलती हैं, कुछ नहीं कहते। ऐसे में समझदारी से दूर रहना बेहतर होता है।.

कभी-कभी फोन में ऐसी बातें होती हैं, जिन्हें सुनकर लगता है कि भई, ये तो बहुत गलत है।.

अब तो बातचीत में सिर्फ सेक्स आता है।.

उसने मुझे कहा था कि पड़ोस वाली भाभी को भी संभाल लूं, पर वो हल्के में इनकार कर देती है।.

एक बात पूछो, मेरे साथ तुम्हारा मन कभी भरा क्या?

कौन जाने कि भाभी को समझाए किसी और तरह से, हर चुत का स्वाद कितना अलग होता है। मज़ा तब आता है जब शरीर के रस धीरे-धीरे चूसे जाते हैं, इसमें फर्क महसूस होता है।.

कभी-कभी सोचता हूँ कि वो पड़ोसन आएगी या नहीं। उम्मीद है कि जल्दी दिख जाए।.

अभी तक तो मैं सिर्फ नेहा रानी को अपने पास रखे हुए हूँ, धीमे-धीमे उसके साथ प्यार में खोया हूँ।.

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