चुपके से देवर ने छेड़ा भाभी की बेचैनी को और करि चुदाई
इस कहानी की शुरुआत तब हुई, जब मेरे भाई की शादी हो गई। भाभी को देखते ही मेरा लंड सीधा खड़ा हो गया। कुछ दिन बाद वो उदास रहने लगीं। फिर मैंने धीमे स्वर में बात छेड़ दी।
नमस्ते, इस कहानी में जो कुछ है वह सिर्फ़ मेरा अपना अनुभव है। यह मेरी पहली बार थी जब मैंने ऐसे बारे में लिखा।
यह कहानी मुझसे शुरू होती है, पर उसका रंग तब आया जब मेरी भाभी आगे आईं।
गाँव से हूँ मैं, उत्तर प्रदेश के। मुरादाबाद में काम करता हूँ।
घर में आने के बाद मैं फिर निकल पड़ता हूँ।
एक साल पहले मेरे भाई की शादी हुई थी। हम दोनों भाइयों में से वह बड़ा है।
32 साल की उम्र में अकेले रहना आदत का हिस्सा बन चुका है।
एक सुबह तब हुआ, नवंबर के महीने में, 2023 में।
थोड़ा आगे बढ़ने से पहले, मैं भाभी के बारे में कुछ कह दूँ।
दोबारा पैदा हुई एक महिला, 28 साल की उम्र में, जिसके अंदाज़ में चलती हर चीज़ ठहर जाती है।
ताज़ा उम्र में वो खिली हुई है, स्तन तने हुए हैं, गांड धीरे से बाहर की तरफ झुकी हुई।
कभी-कभी लगता है कि वो कृति सेनन जैसी तस्वीर बन जाती हैं, शरीर की रचना में एक अजब खिंचाव है।
कुछ पल के लिए धड़कन बढ़ गई, फिर खयाल आया – ये तो घर की ही औरत है।
रात थी, सिर्फ़ जन्मदिन की।
घर आया था वो नवंबर के जन्मदिन पर।
सबने स्वागत किया।
नजरें भाभी के पीछे हिम्मत से दौड़ रही थीं।
उसके चेहरे पर मुस्कान थी, जब वो दरवाज़े से बाहर कदम रखती। मैंने भी अपने होंठों को ऊपर की ओर खिंचा।
पहले वो पानी लेकर आईं, उसके बाद चाय के साथ आगे बढ़ीं।
हर चीज़ ठीक-ठाक दिख रही थी।
शाम को केक काटा गया, फिर कुछ देर बाद खाना हुआ। सभी लोग अपने-अपने कमरों में जाकर रहने लगे।
अंधेरे कमरे में रात भर पड़ा रहा।
ठंडक का एहसास होने लगा था।
फिर दरवाज़ा खुला, अंदर भाभी थीं।
वो दूध सामने रखकर धीमे-धीमे पलट गईं।
पूछ बैठा - भाभी, क्या आप सही हैं?
बस इतना सवाल पूछा गया था कि आम बात ही।
सुबह से शाम तक कई आदमी होते हैं, यही वजह थी कि झिझक महसूस होती थी।
थोड़ी देर के बाद भाभी धीमे स्वर में बोलीं - सब सही चल रहा है, देवर जी, सिर्फ मन में कुछ खालीपन सा रहता है। घर में काम नहीं सूझता।
बोला मैंने - अरे भाभी, क्या चल रहा है?
उन्होंने कहा - कुछ खास नहीं, बस इतना सा।
दबाव डाला गया, पर बंद ही रहीं।
खड़ा हुआ, आगे बढ़कर उनके सामने पहुंच गया।
उसने कहा कि बिस्तर पर बैठ जाओ।
मना करने के बाद वो चुपचाप बैठ गईं।
इधर-उधर बात हुई।
पहले काम के बारे में सवाल किया, इसके बाद वो लड़की की बात आई।
बोला मैंने - अरे भाभी, चलो मस्ती करें।
उनकी भाभी ने कहा - तुम्हारा सफर खुशियों से भरा है, आगे बढ़ो।
बोला मैंने - क्यों नहीं लेते, कोई बाधा है?
थोड़ी देर चुप रहकर बोल पड़ीं - खाना और सोना के अलावा मेरे पास कुछ भी नहीं।
क्या बात है, भाभी - थोड़ा सा गुपचुप चल रहा है?
उनके मुँह से निकला - नहीं, सिर्फ तुम्हारे भाई की बात हो रही है।.
और चुप।
कहा मैंने - बस बता दीजिए, हो सके तो मदद कर दूँगा।
उन्होंने कहा - छोड़ दो, ये सब घरेलू बात है।
समझ में आ रहा था कि लंड पर भी मुश्किलें बढ़ने लगी हैं।
लोअर-टीशर्ट पहने था।
लोअर पे भाभी का ध्यान टिक गया।
उन्होंने कहा - अब सो जाना, कल हम बातचीत करेंगे।
किसी ने पूछा, मैंने कहा - ज़रूर बताइए, सहयोग करूँगा।
सांस में ठिठुरती आवाज़ लिए बोलीं - अब चलती हूँ, भैया का वक्त निकल रहा होगा, नाराज़ हो जाएंगे।
रुकूंगा जागते, फिर चलें तो आ जाइए।
कहीं बीच में कुछ झलका, हो सकता है पकड़ लिया हो।
उसने सोते वक्त कहा, दूध पी लेना।
सुबह के समय दूध पिया गया। इसके बाद कोई पुरानी किताब हाथ में आई, जिसमें अंडरवियर वाली कहानी छपी थी।
कहानियों में भाभी के साथ हुई चुदाई पसंद आती है।
उस शाम को लंदन में हलचल बहुत थी।
आवाज़ आई तब घड़ी में 12:30 था।
घर बड़ा है।
दूसरी मंज़िल पर बस एक कोने में मेरा कमरा है, तब वहाँ भैया और उनकी पत्नी का।
चुप रहा।
खिड़की से हल्की सी ठंडक आ रही थी, तभी वो अंदर घुसीं। कपड़े सिर पर लपेटे, एक पैर अंदर, दूसरा बाहर।
थोड़ा सा आवाज में कमी करके बोलीं - सोने चले गए हैं, देवर जी?
कहा मैंने - सो नहीं पा रही हो तुम?
उन्होंने कहा - भैया सोते में घरघरा रहे हैं, फिर तुम्हारी बात दिमाग में आई। बस बातचीत कर ली। पलकें भारी नहीं हो रही थीं।
खड़ी देखा, बिठाया।
चादर को हाथ में लेकर वह बिस्तर पर जमी रही।
जब चादर हटाई गई, सामने साफ-साफ छाती दिखाई पड़ी।
वह अचानक जमीन पर गिर पड़ीं, फिर आँखों से आंसू बह निकले।
कहा - अब तो हर पल दुख का अहसास होता है, मज़े से जीने की उम्मीद धुंधली पड़ गई।
लगता था कि सुनने को मिलेगा, पर बोलने वाला कुछ नहीं आया।
उन्होंने पूछा - मुझे कैसा दिखना चाहिए?
कहा मैंने - भाभी, आप हैरान कर देती हो, पहले कभी ऐसी गर्माहट नहीं देखी।
बस इतना कहा, मुस्कुराहट खोते हुए - तारीफ से क्या मिलता है, अगर वो न करे जो दिल चाहे।
उंगलियाँ सटी रहीं, मखमल जैसे स्पर्श के साथ।
बस हाथ छूते ही सब कुछ गायब।
धीरे सहलाया।
चेहरा वासनामय।
हाथ को पीठ पर स्थित किया गया।
सिहरकर चिपक गईं।
साँसें तेज।
मुझे लगा कि कहीं न कहीं सब कुछ टूटने वाला है।
फिर भी मौके को गुज़ारना पड़ा।
मौका दुर्लभ।
पीठ सहलाई।
थोड़ी सी ठंडक महसूस हो रही है। कपड़ा हल्के-हल्के से शरीर से चिपक रहा है।
राहुल कहकर पुकारूँ मैं? भाभी ने पूछा।?
उसने कहा था - हाँ प्रिया, मुझे भी ऐसा ही लगता।
हल्की हल्चल छुपी सिसकियों में, छूने का असर फैलता है।
जहाँ भी नज़र जाती है, छूने का पता चलता है।
मुँह के ऊपर मुँह सा।
लगी थी झूमकर उस पल में, जब चुपरवे का स्पर्श होठों पर हुआ।
लड़की के होंठों पर बेसब्री से मुस्कान आई, वो उन्हें चखने लगी।
मैं भी चूमा।
वासना भड़की।
साँसें उफान।
हवा में सिसकते होंठों की ध्वनि।
ऊपर उठकर जिन पर बल पड़ा, वे स्तन दब गए।
बाहर निकल पड़ता है दूध।
प्रिया के कान में धीरे से आवाज़ आई - दूध पी लो।
थोड़ी सी झिझक, मुंह में दूध के साथ छाती।
बेदर्दी से चूसा।
हाथ पकड़ने की बात दूसरे ने शुरू की।
ऊपर की तरफ मुड़कर, बच्चों के साथ छेड़छाड़ हुई।
जल्दी नंगे।
उसके हाथ में लंबा सा लोहे का डंडा पकड़ाया गया।
खुशी से पकड़ा।
लगभग नीचे की ओर झुकी हुई, 69 की मुद्रा।
मैंने उसका होंठों के पास सिर झुकाया, फिर वह मेरे लिंग को चूसने लगी।
क्या पसंद है - मुँह या वो जगह?
चूत में।
अब पैर के तरफ़ सीधा किया। हटके दृष्टि में खड़े हुए।
बूढ़ा आदमी, लंड और चूत के बीच में ठहराव।
हम्म से इशारा।
झटका मारा।
अचानक सन्नाटा छा गया, सांसें थम सी गईं।
दर्द का आनंद।
तुम्हें ये सब करना है? बस इतना ही दिमाग में चल रहा है? लगातार वही बात, फिर वही बात।
एक सुबह के दस मिनट में हलचल हो गई। पानी उठा, तनाव खत्म।
बाद में सोते रहे, झड़ने के।
कल मैं आउंगी – भाभी ने कहा।
नाइटी में सिमटते हुए, वह खुश थी। चादर को ऊपर तक खींच लिया गया।
याद कर मुस्कुराया।
हर बार सोते समय वही क्रिया दोहराना पड़ता है।
जब मौका मिलता है, तो सिर्फ़ वही होता है जो शुरू हो जाए।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0