गोवा में लेस्बियन सेक्स की मस्ती
नमस्कार दोस्तो,
मैं जिया पटेल!
एक बार मैंने लिखा था रश्मि के बारे में। उसकी चमकती हुई त्वचा की कहानी थी वो। कहीं डर था, कहीं साहस। धीरे-धीरे बयान हुआ था सब कुछ। पलट कर देखा गया था एक ऐसा पड़ाव जहाँ भावनाएँ अपने आपको छुपा नहीं पातीं।
बहुत समय पहले जो शुरू हुआ था, वो आज फिर लौट आया। एक लड़की के साथ मेरा अनुभव, बस इतना सच्चा कि छिपाने को दिल नहीं करता। कभी-कभी ज़िंदगी ऐसे मोड़ पर खड़ी हो जाती है, जहाँ खुद को पहचानने का सफर शुरू होता है।.
उस वक्त की बात है, जब कोई लॉकडाउन नहीं था। मैं अपनी सहेली के साथ गोवा घूमने निकल पड़ी थी।.
उस समय अक्टूबर चल रहा था।.
मुझे तो लेस्बियन होने के बारे में पहले से जानते हैं आप, उसी वजह से मैं सलोनी के साथ चली गई थी।.
लेस्बियन सेक्स के लिए जो चीजें चाहिए होती हैं, मैंने उस सबको साथ रखा था। डिल्डो भी इसमें शामिल था।.
इस बार मैंने अपने पास एक ऐसा वाइब्रेटर रख लिया था जो चूत को घिसने के काम आता है।.
गोवा में कदम रखते ही, समुद्र तट के पास एक जगह पर हमने ठहरने का इंतजाम किया।.
थकान चेहरे पर साफ़ दिख रही थी, पुणे से गोवा की लंबी सड़क यात्रा के बाद।.
थकावट इतनी ज्यादा थी कि कमरे में पैर रखते ही बिस्तर पर ढह गई। आँख लग गई।.
सलोनी मेरे पास झपकी लगा चुकी थी।.
आए थे हम मस्ती करने, पर सलोनी कहाँ नींद में जा चुकी थी।.
उसकी नज़र पड़ी मेरे ऊपर, मैं आँखें बंद किए आसमान की ओर मुँह किए लेटी थी।.
मैंने महसूस किया, उसके होठ मेरे पेट के बीच में।.
एक ऐसा समय था जब मैंने ऊपर जैकेट पहनी थी। भीतर कोई ऐसा शीर्ष था जो इतना छोटा था कि सिर्फ़ ब्रेस्ट्स ढक पाता।.
बस इतना ही कारण था कि उसकी नज़र उस टॉप से मेरी नाभि पर पड़ी।.
थकान तो बहुत थी, मैंने कहा सलोनी से। उसके होठ मेरी नाभि पर पहुँचे ही थे कि मैं बोला - यार, छोड़ इधर-उधर। अभी शांति से बैठने दे। फिर कुछ देर बाद जब मन चाहे, वक्त ढूँढ लेंगे।.
लेकिन वो हँसते हुए मेरा पेट छूने लगी। साथ ही बोली - थोड़ी देर रगड़ दे, प्यारे, तभी अच्छी नींद आएगी।.
मूड सिर्फ इतना था कि मेरी बातों पर ध्यान देने का। हर बात पर टोक लगा रही थी, जैसे चुभने का शौक हो।.
कभी-कभी वो मेरी नाभि पर होंठ रख देती। कपड़े ओढ़े हुए भी, मेरी चूत को धीरे से दबा लेती।.
उसकी शरारत पर मेरा दिमाग हल्का हो उठा। फिर क्या था, मैंने एकदम से उसे अपनी तरफ घसीट लिया।.
जब वो समझ ही पा रही थी, मैं पहले से उसके ऊपर थी।.
मुस्काहट उसके चेहरे पर फैलने लगी, वो किलकिला उठी। मेरे सीने पर उंगलियाँ सरक गईं, थोड़ा सा दूध बाहर आया।.
मैंने उसकी हथेलियों को अपने सीने पर महसूस किया।.
फिर वो क्या… तुम्हें भी मेरा दूध निचोड़ना पसंद आएगा। सिर्फ हवेली पर एक बार बुला लेना, जिंदगी सजा दूंगी।.
फिर सलोनी मेरे स्तन दबा रही थी, और मैं उसके।!
वो हल्के से खिंची, हंसने लगी। मैंने पकड़ लिया उसे। मुंह के करीब जाकर चुम्मा दिया।.
अब उसे समझ आया कि मैं एक बार चल पड़ी तो थमने वाली नहीं।.
वो भागने लगा, पर बोला - अरे सुनो थोड़ा... अभी-अभी तो पहुँचे हैं! कुछ पेय एक साथ पी लो, तब खेलते हैं।.
मगर अब रुकने का क्या मतलब था। मन तो पहले से ही उसी बात का था, फिर सलोनी ने ऐसा कुछ कह दिया कि जैसे घी में आग डाल दी हो।.
शुरुआत हो गई थी, रफ्तार पकड़ने लगी।.
एक क्षण में ही जैकेट तलहे पर गिरी। फिर बिना सोचे टॉप भी अलग हो गया।.
उस पर वो कपड़े पहने, सीधे चढ़ बैठी।.
एकदम अचानक मैंने सलोनी का टॉप फेंक दिया। ब्रा हाथ से खिंचकर गई।.
हवा के स्पर्श से उसके दूध पिचपिचाने लगे।.
मेरा मुँह उसकी छाती पर आया, फिर एक के बाद एक होठों ने नखरों को चूस लिया।.
वह छटपटाने लगी.
उसकी चूत में भी कुछ समय बाद चींटियों ने प्रवेश कर लिया।.
उसके एक निप्पल को मैंने होठों से दबाया, खींचा। आह भरते हुए वह मुझे अपने छाती पर और दबाने लगी।.
उसकी उंगलियाँ धीमे-धीमे मेरे होठों के पास ले जा रही थीं।.
जैसे ही मैं उसके निप्पल को होंठों में लेती, वह तुरंत दूध अपनी ओर खींच लेती।.
ऐसे में उसका निप्पल खिंच रहा था, जिसके चलते पूरा स्तन भी सिकुड़ गया। ये दृश्य काफी अजीब-सा लग रहा था।.
एक सिसकारी उसके होंठों से आई, मुझे वो कितनी मधुर लगी।.
होंठों से छुआ, फिर दांतों का स्पर्श हुआ।.
उसकी आँखें मेरी ओर टिकी थीं, और धीरे-धीरे सिर चढ़कर बोलने लगा कुछ।.
उसी अंदाज में मैंने सलोनी के दोनों स्तनों को बहुत उत्तेजित होकर चूस लिया।.
उसके शरीर में गर्माहट छा गई थी, हर सांस लंड को पुकार रही थी।.
आजकल कई तरह के रबर के मोटे लंड देखने को मिलते हैं। इन्हें लेस्बियन सेक्स में लंड की जगह इस्तेमाल किया जाता है।.
कभी-कभी उनमें कंपन भी होता है। यह चुत में घुसकर काँपने लगता है। जिससे लंड लेने वाले को खुशी बढ़ जाती है।.
अब सलोनी के होठों पर लंड लंड का जादू छा गया था।.
उसके पास मौका नहीं मिला कि कोई रुकावट आए, मैंने सीधे उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिए।.
एक सेकंड में ही उसकी गुलाबी पैंट को मैंने नीचे खींच दिया।.
अब सिर्फ़ उसके शरीर पर एक पैंटी थी, बाकी सब गया। मैंने मुंह से पकड़ कर उसे खींच लिया।.
एक दुपट्टा बिखरा पड़ा था, फिर वही शख्स - उम्र के आधार पर नहीं, बल्कि अदा से पहचाना। हल्के रंग की त्वचा, धुंधली छवि में भी चमकती। आकृति यादगार, लंबाई और घटनाओं के बीच ठहराव जैसी। वह वहीं थी, कपड़े उतारकर।.
एक तरफ बिस्तर पर लड़की का शरीर पूरा खुला हुआ था। उसकी जांघें अपने आप फैली हुई थीं। चमकदार त्वचा पर धीमी सांसों का असर दिख रहा था। घुटने हवा में ऊपर को उठे हुए थे। नीचे के हिस्से में कोई झिझक नहीं थी।.
तुम्हारे हाथ अगर वो सामान लग जाए… तब क्या होगा? दोस्त, बस सोचो।!
बिल्कुल ऊपर से ही वो पगलाई-सी नज़र आई। उसकी छातीयाँ मलते हुए वो मेरी ओर झूल रही थीं, ऐसा लग रहा था कि मेरे दिमाग को हवा देना चाहती हो।.
एक उंगली अपनी चूत में डालकर, फिर वो उंगली मुँह में ले जाकर रस का स्वाद लिया। इस तरह एक बेझिझक कामुक पल दिख गया।.
बस इतना सोचा कि तुरंत खड़ी हो गई। एक ही बार में सभी कपड़े उतार लिए, धीरे से पलंग के पास फेंक दिए।.
फिर मैंने बैग उठाया, भीतर हाथ डालकर वह डिल्डो निकाला जिसमें बेल्ट लगी थी। कमर पर तुरंत बांध दिया।.
कमर में नकली लिंग बाँधकर मैंने उस पर धीरे से कदम रखा। सलोनी के होठों पर मेरे होठ आ टकराए, फिर वो छुए जारी रहे।.
सलोनी अचानक से बहुत उत्तेजित हो गई थी, पूरा शरीर गर्म।.
उसका हाथ मेरी कमर पर था। मैं महसूस कर रहा था कि वो मेरे लंड को धीरे से घुमा रही है।.
उसके निप्पल पर मेरा मुँह पड़ते ही वह सांस तेज करने लगी।.
उसके निप्पल पर मेरे दांतों का असर था, हर बार कुछ ज़्यादा लाल।.
सलोनी के पेट पर मेरा मुँह था। धीमे-धीमे नीचे की ओर बढ़ रही थी मैं। छोटे कदमों से त्वचा के ऊपर। फिर एकदम नाभि पर ठहर गया होठ।.
उसकी आँखें मेरे जलते होंठों पर ठिठक गईं।.
सुनाई देने लगी ‘आह आह’ की।.
उसकी नाभि पर मेरे होंठ पड़ते ही वह काँप गई। सिर को चूत की ओर धकेलने लगी, बस।.
मैंने सीधे उसकी चूत पर जीभ चला दी।.
मैंने जीभ अंदर डालते ही वो एकदम ऊपर उछली। बाल खींचते हुए गुर्राई - बस कर, मेरा पानी आने वाला है। साली मुझे क्यों परेशान कर रही है… तेरी माँ की बेइज्जति होगी। तू झट से लौड़े को मेरे अंदर घुसा दे… ओह।.
सुनते ही मैं खड़ी हो गई, आगे बढ़ी। फिर उसे जोर से बिस्तर पर गिरा दिया।.
उसके नीचे गिरते ही मैंने अपने 8 इंच के डिल्डो को सीधा उसकी चूत पर मारा, आधा हिस्सा एकदम से भीतर चला गया।.
उसकी चीख फट पड़ी। हाँफते हुए बोली - आह, गधी… ये घमंड तेरे अपने खून में है क्या… जैसे दिमाग भ्रष्ट, वैसे ही काम। क्या सब कुछ झेल सकता हूँ मगर एक पल का ठहराव नहीं?
ग़ुस्सा चढ़ आया, फिर बिना सोचे-समझे डिल्डो को एकदम भीतर धकेल दिया।.
अचानक उसकी आंखें फैल गईं, सिसकी गले में अटक गई।.
सलोनी किसी तरह की तमीजदार औरत नहीं थी, जो हर आए-धुए के लंबे से लंबे घोड़े को चूत में उतार ले।.
उसके मुंह से आवाज़ निकली, पैर फड़फड़ाए बिना रुके।.
मैं तो उसकी बात सुनने के मूड में ही नहीं थी। धीरे से आठ इंच का लौड़ा बाहर खींचा, फिर जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगी।.
कुछ लड़कियाँ अपने दोस्त के साथ संबंध में हैं।!
ऊपर से आवाज़ आई - सलोनी का गला भरा हुआ था। वह बिस्तर पर ऐंठती रही, शब्द टूटकर निकल रहे थे।.
थोड़ी देर तक तेजी से हिलने के बाद उसका शरीर ढीला पड़ गया।.
कमर से डिल्डो निकालकर मैंने उसे चूत से बाहर निकाला। सलोनी को पकड़कर मैं धीरे से सो गई।.
कैसे नींद आई, समझ ही नहीं आई।.
आँखें बंद करते ही सलोनी ने मौका पकड़ लिया। मेरे हाथों को ऊपर की तरफ जकड़कर रस्सी से बाँध दिया।.
फिर सलोनी ने कमर पर डिल्डो बांधा। मेरी जांघें अब आपस में दूर हुईं।.
बीस मिनट का समय बीत चुका था, मैं अभी भी पलंग पर लेटा हुआ था।.
काफी देर हो चुकी थी, तब तक मैं गहरी नींद में समा चुका था।.
बेहोशी का असर पूरी तरह छा गया था मुझपर।.
अचानक सलोनी ने मुझे आवाज़ किए बिना, हिलाए बिना डिल्डो मेरी चूत में ठूस दिया। उसने इतना तेज़ धक्का दिया कि पाँच इंच का लंड एक साथ भीतर खिसक गया।.
एक पल ठहरो। कल्पना करो कि किसी महिला को नींद में कुछ हो जाए, जब वह बिलकुल बेहोश है। ऐसे में क्या होगा?
आठ इंच का मोटा सहारा अगर मेरे भीतर उतरा, तो लगा जैसे धरती डोल पड़ी हो।.
दर्द इतना तेज़ हो गया कि सहने से बाहर हो चला।.
जब सलोनी ने पूरा डिल्डो पेलकर मुझे जकड़ लिया, मेरे हाथ-पैर सून हो गए।.
एकदम से ऐसा लगने लगा कि अब कुछ भी हो जाए। उसपर इतना गुस्सा था मेरा कि सांसें तेज हो गईं। मौका मिलते ही कुछ करने का मन कर रहा था। शायद वो समझ नहीं पाया कि कितना खतरनाक हो चुका हूँ मैं।.
फिर भी कुछ नहीं बचा था, मेरे हाथ पीछे बंधे थे। गुस्से में मैंने ऐसी-ऐसी बातें कह दीं कि वो स्तब्ध रह गई।.
मेरे होंठों से ऐसी कौन-सी गाली रह गई होगी, जो ना आई हो?
ग़ुस्से से उसकी आवाज़ काँप रही थी, मैं पर बरसते हुए शब्द।.
सलोनी - ओए मादरचोद, जब तूने मेरी कसकर चुदाई की थी, उस वक्त खयाल ही नहीं आया था कि चूत में इतना दर्द होता है। अब भैंस की औलाद गाली मार रहा है, धत तेरी। ठहर जा साली… तेरी चूत के बाद अब तेरी गधे में भी यह डिल्डो घुसेगा, फिर पता चलेगा तुझे कि तूने किसके साथ छेड़छाड़ की है।.
उसने सब कुछ बोल दिया - अब मैं पक्का जान गया था कि वो अपनी बारी चाहती है, मगर इस बात को नहीं मानेगी।.
तब एकाएक, उसने मुझ पर हमला कर दिया। मैंसे कहीं ज्यादा तेज़ी से वो झटके दे रही थी।.
चिल्लाहट में गला फट गया, फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई।.
पंद्रह मिनट तक चलने के बाद हरकतें थम गईं।.
फिर वह मेरी उंगलियों पर हथेलियां फैला गई। धीमे से मेरे सीने से चिपक गई।.
मेरे पास इतनी हिम्मत तक नहीं बची थी कि वह मुझ पर हाथ उठा सके।.
फिर भी, मेरी दोस्त की जमकर मेहनत देखकर अजीब संतोष हुआ।.
गोवा में वो पल बस शुरुआत का मौज-मस्ती भरा हिस्सा था। दोनों के ज़हन में आगे के लिए कई ख्याल चल रहे थे। और उनमें सिर्फ़ लेस्बियन सेक्स तक सीमित रहना शामिल नहीं था।.
गोवा में कुछ विदेशी यात्री हमसे मिलने आ रहे थे। उनके संग समय बिताने पर हँसी-ठिठोली का दौर चलता।.
अभी-अभी खत्म हुई मेरी पढ़ी हुई कहानी, जहाँ दो लड़कियाँ थीं और कुछ घटनाएँ घटी थीं।.
तुम्हारे दिमाग में जो भी आए, उसे शब्दों में बदल दो।.
धन्यवाद.लिटाकर
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