हॉट विधवा मामी की प्यासी चुत और गांड दोनों मारी

Jan 6, 2026 - 11:42
Jan 6, 2026 - 12:15
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हॉट विधवा मामी की प्यासी चुत और गांड दोनों मारी

हेल्लो यार, अमोल कहते हैं मुझे।

मैं मध्य प्रदेश से हूँ।

फरवरी 2022 में ऐसा हुआ था, जब एक्सएक्सएक्स वाली कहानी सामने आई।

एक दिन मैं भिलाई पहुँचा, कार की मरम्मत करवाने।

अकेले रहने का सिलसिला तब शुरू हुआ, जब मामी रेखा भिलाई पहुँचीं।

मेरे मामा, जो उनके पति थे, का देहांत कई साल पहले हो गया था।

दो बच्चे हैं उसके, एक शहर से बाहर रहता है तो दूसरा पड़ोस में।

दो दिन कार मरम्मत में जाने वाले थे, तभी मैं सीधे रेखा मामी के घर पहुँच गया बिना कुछ कहे।

घर के भीतर सिर्फ़ मामी थीं।

दरवाज़े पे टक-टक करते ही मामी ने अंदर से हाथ बढ़ाया।

आँखों ने जैसे ही उन्हें पकड़ा, मेरा शरीर जम गया।

पीली शर्ट उसके कमर तक झूल रही थी। सफ़ेद लेगिंग्स पैरों में खिंची हुई थीं।

ऊपर की तरफ उनके बाल क्लिप में बंदे हुए थे।

सच कहूँ तो, उनका अंदाज़ कमाल का था।!

एक तरफ 46 साल की रेखा मामी, दूसरी ओर उनके आंकड़े - लगभग 36-32-38।

लंबाई पांच फुट छह इंच के करीब है। सफेद त्वचा वाले हैं वो। चेहरे पर एक अजीब सी आकर्षक चमक है।

शायद उनका वजन 65 से 70 किलो के बीच में है।

आंख पड़ते ही कोई भी उन्हें गले से लगाने को बेचैन हो जाए।

दरवाज़े पर वो आए, मैंने झुककर पैर छुए, पर उन्होंने मुझे तुरंत भीतर खींचा।

अचानक से एक तरह की खटखटाहट हुई, पर फिर मैंने भी दोनों हाथों से उन्हें समेट लिया।

एक हाथ मेरा उनकी कमर के नीचे फिसला हुआ था, वहीं दूसरा धीरे से साइड ब्रेस्ट को सहला रहा था।

किसी तरह का ऐतराज़ पेश नहीं किया गया।

खाने के बाद गपशप जारी रही, फिर धीरे-धीरे सोने का समय होने लगा।

ऊपर के कमरे में उसके जाने के बाद, नीचे दीवान पर लेटने की तैयारी हुई मेरी।

फिर भी दिमाग में उनका आकर्षक अंदाज़ चल रहा था, इसी वजह से लिंग को तकलीफ हो रही थी।

दस बजकर पैंतालीस मिनट पर मैं हल्के-हल्के कमरे के अंदर घुसा। आवाज़ नहीं हुई किसी तरफ से। फोन टेबल पर पड़ा था, ऊपर से एक रुमाल डालकर। मैंने उठाया बिना झिझके, चुपचाप बाहर निकल आया। फिर छवियाँ देखने लगा, धीरे-धीरे।

मुझे एक बार उन्हें फोन अनलॉक करते हुए देख लिया था। तब पता चल गया था कि पैटर्न बहुत साधारण है।

खोलते ही फोन में कुछ देखकर मैं स्तब्ध रह गया - अंदर भरे पड़े थे अश्लील वीडियो और चित्र।!

एक पोर्ण वीडियो में मामी की तस्वीर संपादित हुई।

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उसकी नज़र उन पर टिकी रही, फिर वो सीधे बाथरूम के अंदर चला गया।

उस जगह ब्रा पड़ी थी, साथ में पैंटी भी।

तभी मुझे उनकी ओर झुकाव होने लगा, साथ ही पल-पल की छवियाँ घूरने लगा।

मैंने सोचा तो उसके टूथब्रश पर अपना वीर्य छोड़ दिया, फिर पैंटी को जेब में डालकर सीढ़ियों से नीचे चला गया।

आँखें खुली रह गई थीं।

फोन को उनके पास लौटाना मुझे याद नहीं आया।

तभी दो बजे रात में मामी नीचे आईं। उन्होंने कहा, अमोल, फोन की घंटी बज रही है, जल्दी से पकड़ लो। मैं खुद ढूँढ नहीं पा रही।!

डर तो लगा, पर हाथ में क्या था?

फोन मेज़ पर पड़ा था, मैंने कॉल किया। रोशनी चालू हुई, वह सब हुआ।

आँख पड़ते ही मुझे बदहवासी सी महसूस हुई - गुलाबी टॉप और गुलाबी शॉर्ट्स में वो ऐसी लग रही थीं, मानो कपड़े तन के आगे झुक रहे हों।

उसकी सफेद जांघों पर नज़र पड़ी, बिना कुछ कहे हाथ खुद-ब-खुद आगे बढ़ने लगे। रातभर ऐसे ही छूने का मन था, धीमे-धीमे, बिना किसी रुकावट के।

अगले पल, झेंपती हुई वो अपने कमरे की ओर बढ़ गईं।

ख़ुशी के बाद डर आ गया, जब उसकी वीडियो में एडिट्स ने मूड बदल दिया।

दस मिनट बाद वो वापस उतरीं। गुस्से से भरकर बोलीं - तूने मेरे फोन के साथ ऐसा क्या कर डाला? मेरी निजी वीडियो कैसे बन गई? मुझे ठीक से पता है, फोन ऊपर था, तू ही लाया था। अब तुरंत इस घर से चला जा। अगर तुझे छोड़ दिया, तो माँ-बाप को सब पता चलेगा। !

उसके बाद कुछ पल में ही, चेहरे पर तीन या चार तमाचे लगे।

मुझे मारते देखकर मेरा लिंग ऊपर की ओर उठ गया।

उसकी बाँहों में हलचल हुई, मैंने तुरंत कसकर पकड़ लिया। छाती पर हथेलियाँ समा गईं, धीरे-धीरे दबाव बढ़ा। कमर से नीचे उतरते हाथों ने गुट थाम लिए।

एकदम सीधा कह दिया - आज रुकने का नहीं है मामी। तुम इतनी आकर्षक लगती हो कि झटका-सा लगा। बस एक छोटा सा अवसर चाहिए, ज़्यादा कुछ नहीं।!

खुशी की बात ये रही कि कोई व्यक्ति पास में नजर नहीं आया, चारों ओर सभी घर बंद खड़े थे।

थोड़ी देर में मैंने कहा - अब इतनी पवित्र बनने की जरूरत नहीं, मेरी जान। तुम्हारे फोन में छिपी उन झूठी तस्वीरों के बारे में मैं सब जानता हूँ। अगर चाहो तो घर में बात कर दो, मुझे गलत नहीं लगेगा। सिर्फ मुझे डाँट पड़ेगी। पर तुम्हारे बच्चे ये बात जान लें, तो? वो क्या समझेंगे तुम्हें? मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन तुम्हें एक पल के लिए भी सांस आसान नहीं लगेगी। !

वो खामोश हो गईं, सिर्फ़ देखती रहीं मेरी तरफ़।

मैं हँसते हुए बोला, अगर किसी को इसके बारे में पता न चले, तो फिर एक रात के लिए साथ रह लो। तुम मेरी रात की पत्नी ठहरो। कौन जाने? उम्र का क्या है, तुम 46 की हो, मैं 33 का, और फिर शाम के बाद मज़े भी आएंगे।!

मामी ने सोचा, फिर बोल पड़ीं - अच्छा, हो जाए, पर ऊपर मेरे कमरे में चलते हैं।

ऊपर के कमरे में कदम रखते हुए मैंने उसे गोद में उठा लिया। धीरे-धीरे झुलाते हुए चला, मानो कोई खिलौना हो। बिस्तर पर सिमट गया वह, मेरी बाँहों से छूटकर।

खुशी उनके चेहरे पर छा गई, जब उन्होंने मेरी ताकत को समझा।

मैं उसके पास लेट गया, फिर धीरे से बोला - आ जा, अपने शॉर्ट्स निकालो और मेरे चेहरे पर वो जगह रख दो... मैं जानना चाहता हूँ कि रेखा की योनि कितने समय से बिना छुए पड़ी है।!

मुझपर सीधे उसने अपना योनि का स्राव मुँह पर डाला, तब तक वो नग्न थी।

चाटते-चाटते मेरी जीभ से उनका तापमान बढ़ गया।

सांसें तेज हो गईं - आह… श्ह… उफ़… फिर धीमे आवाज में कुछ कहा… अंदर तक महसूस कर… ओह जीभ से हर तरफ छू… हरामी, ऐसे चाट जैसे तूने कभी न छोड़ा हो… अब मामी तेरी बन गई है।!

मैंने यह सुना तो मज़ा दोगुना हो गया।

थोड़ी देर चाटने पर ही वो खुलकर गिर गई।

उनके सारे रस को मैंने पी जाना।

कितना अजब लगा स्वाद - थोड़ा सफेद, थोड़ा खटखटाता हुआ नमकीलापन, फिर गाढ़े क्रीम की महक।!

उसके हाथ मेरे लिंग पर आए, फिर वो उसे सहलाने लगी। कभी मुझे चूमती, तो कभी गुदगुदी करती। अंडकोष पर भी उसका ध्यान जा रहा था, जैसे कुछ और सूख गया हो।

पहले दिन मैंने पूछ लिया - मामी, मामा के बाद तुम अपनी सेक्स की चाहत कैसे शांत करती हो?

उसने कहा - अब छिपाने को क्या बचा है? गाजर, मूली और उँगली से ही गुजर रही थी। फिर भी तेरे मामा कुछ खास नहीं कर पाते थे। महीने में डेढ़-दो बार आते, और वो भी जल्दी समाप्त हो जाते। मैं हमेशा अधूरी रहती। आज तेरा लिंग देखकर मन में जोश उठ रहा है। पूरी रात मुझे चोदना… जैसे तुझे लगे सही… मेरी हर इच्छा पूरी कर दे अमोल… मैं बहुत तड़प रही हूँ!

मैंने कहा, अब तुम्हारी जगह मेरे पास रेखा है। अगर आज मस्ती नहीं लगी तो मुझे गांडू कहना।!

वे हँस पड़ीं।

इसके बाद, घोड़ी को तैयार किया गया। फिर तेल लगाकर लिंग को आहिस्ता से अंदर किया गया।

उन्होंने महसूस करते हुए कहा - आओ मेरे राजा... तोड़ दो उसकी सीमा आज!

इसके बाद सांस लेने और छोड़ने की गति आहिस्ता आहिस्ता शुरू हो गई।

एक तेज झटके के साथ पूरा शिश्न भीतर धँस गया।

चीख पड़ी वो - बेटा तुझे कोसती हूं... बाहर निकलना पड़ेगा... हा रही है जान मेरी... जल्दी से खत्म कर इसे!

एकदम अचानक मैंने कहा - शांत रह उस पलटन... वो लगातार बड़बड़ा रही थी... फिर भी आज वो मेरी हो चुकी।!

उसकी आवाज़ में दर्द था।

मन में तेरे साथ ऐसा करने की इच्छा पुरानी है। आखिरकार आज यही हो रहा है।

उसका ध्यान मेरी हर बोली गई चुभती बात पर टिका हुआ था, वह अपने शरीर को सही ढंग से रखने में जुटी थी।

धीरे-धीरे उनकी बातचीत मुश्किल से सुनाई देने लगी।

कितने बार तस्वीर के आगे घुटने टेके, धड़कते हाथों से छुआ है तुझे। हर बार पसीने में डूबा शरीर, झूठी कल्पना में तेरे होंठों के नीचे गिरा। एक-एक बूंद को जीभ से चाटा, तेरे अंदर की गर्मी समझकर। हाँफते सांसों में तेरा नाम फंसा - ओ रेखा, ओ बेइज्जत ख्वाहिश!

बातें करते समय मैं उसके पिछवाड़े पर लगातार 10 से 12 मिनट तक ध्यान दिए रहा।

उसका दिमाग खराब हो गया।

वह मेरे सामने ऐसे झुकी, जैसे तूफान में घास।

उन्होंने कहा - अब रुक जाओ। इतना क्यों है सब?

पहले गिर चुकने की वजह से में देर हो गई।

कहीं से रस निकालूँ मैंने पूछा।?

उसके मुँह से आया - पीना चाहती हूँ… तुरंत छोड़ दो।!

उसके चेहरे पर मैंने अपना तरल छोड़ दिया।

उन्होंने सब कुछ पी लिया। मुंह खिंच गया - ऐसा लगा जैसे कुछ तेज़ नमकीन घुला हो।!

उसके बाद मैंने उनके होठों को छुआ।

हम एक-दूसरे को छूते, प्यार करते हुए बिस्तर में लेट गए।

तीन बजे थे रात के। नींद में डूबा हुआ, पर उंगली उसकी जांघों के बीच अटकी थी।

सुबह के नौ बजे थे, मामी उठी और मुझे धीमे से हिलाकर बोलीं - कल तूने इतना खुश कर दिया। सच्चा एहसास पहली बार आया। हर रात कोई ऐसा होता, कितना अच्छा होता।!

कभी-कभी बस इतना होता है - एक दिन सामने आ जाता है। मुझे याद है, मैंने कहा था कि हर पल ऐसा नहीं होता। जब मौका मिले, तो समझदारी यही है कि उठा लो।!

उसके पैरों के बीच तकलीफ थी, कदम उठाने पर साफ हो जाता था।

एक बार मैंने कहा था - जब तुम्हारे पास कोई न होता, उस वक्त मैं हर महीने छुट्टी का बहाना ढूँढकर दो-तीन दिन ठहर जाऊँगा।!

वे मुस्कुरा दीं।

तब हम पीछे मुड़कर सीढ़ियों से उतरने लगे।

अचानक मामी रसोई में हलचल करने लगीं।

थकने का एहसास हुआ, तो मैंने कह दिया - मामी, अब बाहर चला जाऊँगा।!

सड़क पर जाकर सिगरेट पी, फिर आया ताकत और मन के लिए गोली लेकर।

सुबह के खाने के बाद, गोलियाँ लेना पड़ा।

आज सारा दिन मामी को छेड़ने का मन था, कभी पता ही नहीं चलता कि वक्त मिलेगा या नहीं।

कुछ समय बाद मामी की पुरानी सहेली वहाँ पहुँची।

उसके पहनावे में तंग जींस थी, ऊपर कुछ हल्का सा। दिख रहा था बहुत कुछ, बोले तो अधिक।

एक लड़की का नाम आयशा रखा गया था।

आँखें उसकी आकृति पर टिकी थीं, वो समझ चुका था।

जब मामी रसोई में थीं, तब आयशा ने अपने टॉप को सँभाला, जिससे गहरा हिस्सा साफ़ दिख रहा था।

उसके स्तन कैसे थे! एक पर निशान सा था। मेरी ओर झुकी आंखों से देख रही थी वो।

बदहवासी से तड़पने लगा था मैं, दवा का असर धीरे-धीरे चढ़ने लगा था।

लंबी पैंट के बजाय जो छोटी पैंट मैंने पहनी थी, उसमें मेरा लिंग हिल रहा था।

उसकी नज़र पड़ गई।

आवाज़ सुनकर मामी वहाँ पहुँचीं। उन्होंने कहा, अमोल, इस डिब्बे को तले रख देना।

पैर जमाते ही लिंग शॉर्ट्स के ऊपर निकल आया। मैं अटक गया।

आँखों में उत्सुकता लिए अचानक आयशा की सांस थम गई।

उसके मुंह से निकल पड़ा - अच्छा है यार, कितना ऊंचा।!

कुछ भी नहीं किया मैंने।

उसने बॉक्स को अंदर रखा, हाथ फिर लिंग पर चल पड़ा।

कुछ समय बाद आयशा वहाँ पहुँची। उसने कहा, "अगर तुम हर काम अकेले करोगे, तो मेरा क्या होगा?"!

अचानक करीब आई और बोली - रेखा ने सब उजागर कर दिया है। मुझे भी अपनी प्रेमिका बना ले, हालाँकि पहले मैं तेरे ज़िद्दी शरीर की चुनौती लूँगी!

पेंसिल के साथ-साथ तेल की मांग मैंने मामी से की।

कुछ नहीं समझ में आया।

उसके होठों से निकला - दस मिनट झेल ले, फिर मैं तेरी हूँ। कभी भी दासी बनाकर तुम्हारे इश्क़ पर आ जाऊँगी, मना करने का विचार तक नहीं करूँगी!

एक आवाज़ बोली - ये प्राणी तुम्हें इक्कीस तोपों की सलामी दे रहा है। कुछ भी कर लेना ऐशा जी… ये तुम्हारे कदमों में है।

तेल से लथपथ पेंसिल उसने मेरे लिंग के अंदर धकेल दी।

मुझे डर लगा।

घूमने का सिलसिला शुरू हुआ, धीमेपन से। मन में एक सी खुशी सी छा गई, बस ऐसे ही।

अब पेंसिल डाल दी, कहा - इतने देर ऊपर लटके रहने दो।!

उसकी उंगलियां मेरे अंडकोष पर थीं, सीधा नजर में घूरते हुए बोली - चाहत तुम्हारी भी है, सही कह रही हूँ?

मैंने कहा, हां आयशा मैडम।!

तकलीफ महसूस हो रही थी।

उसने पेंसिल निकाली, सीधा मुँह में डाला, फिर आवाज़ आई - क्लियर हो गया।!

अब मेरा लिंग सीधा हो गया।

आयशा के मुंह से निकला, "क्या बात है… लिंग? या फिर कोई मिसाइल?" इतनी प्रताड़ना के बाद भी वो खड़ा था।!

दरवाज़े पर मामी ने ताला डाल दिया था।

उन्होंने कहा - अमोल, इस महिला के साथ इतना ज़ोरदार संबंध बनाओ कि वह अगले दिन चल भी न पाए।!

मैंने कहा, सुनो प्यारे।!

उसकी जींस मेरे हाथ में थी, सीधे बाथरूम की ओर चल पड़ा।

बिना कपड़ों के वह शौचालय में खड़ा हो गया, फिर धीमे से पानी के नीचे झुक गया।

वह रोने लगी।

तेज़ी से मैंने बढ़ाया।

घर में कदम रखते ही मामी ने कहा, मुझे भी यही चाहिए।!

मैंने कहा - कल पक्का!

आयशा को बिस्तर पर ले जाकर, उलटी तरफ से घुमाया गया। फिर वैसे ही धीरे-धीरे चलते रहे।

हवा में लिंग हिल रहा था, फिर उसके चेहरे पर स्खलन हुआ।

उसकी मामी ने बिना कपड़ों की तस्वीर खींच ली, इसके बाद वीर्य को जीभ से साफ कर दिया।

आयशा ने कहा - इतनी ताकत कहाँ से आ गई? अब तक ऐसा कुछ नहीं मिला… वो रात दोबारा हो जाए।!

ऊपर जाकर मैं सो गया, थक चुका था।

शाम के समय मामी, उसके साथ आयशा भी, मुझे देखने के लिए तैयार खड़ी थीं।

अब मेरे पास हौसला खत्म सा हो गया था।

अचानक दरवाज़े की घंटी बज उठी, मामी तुरंत ले गई खोलने।

जब वे लौटीं, तभी पास एक लड़की थी, उम्र लगभग 19 से 20 साल के बीच।

रानी आयशा के घर पहुँची, सामान लेकर। वो उनकी मददगार थी, हमेशा काम पर तैयार।

रानी चली गई।

मामी ने शाम के नाश्ते में जूस में एक गोली मिला दी। वह चुपचाप पीने लगा, बिना कुछ पूछे।

कुछ समय बाद धीरे-धीरे इच्छा वापस आ जाती है।

अब समझ में आया कि यहाँ दवा दी गई थी।

मैंने पूछा, ऐसा क्यों हुआ? अब बस।!

एक बार फिर से, आयशा ने कहा।!

मैंने कहा, सुनो… ठीक है, पर एक बातचीत है। उस महिला को, जो घर में काम करती है, तुम्हें संबोधित करना होगा।!

आयशा के मुँह से निकला, "तुम्हें वो कभी नहीं मिलेगा।"!

काम वो है जो मुझे करना चाहिए।

आयशा - ओके, ट्राई करूँगी।

अब तो माँ की बहन भी पीछे नहीं हट रही थी। तुम भी ऐसा नहीं कर रही थी। अब दोनों एक साथ यहाँ डटी हुई हो, जैसे कुछ छिपाने को हो।

आयशा मुस्कुराई।

एक के बाद एक, वो दोनों मेरी तरफ झपटी।

उसने लिंग को चूसना शुरू कर दिया, फिर अंडकोष पर भी होंठ लगाए।

मुझे चाटना शुरू कर दिया, मामी की चूत पर ध्यान जा रहा था।

एक-दूसरे पर हाथ लगाते हुए, उन्होंने XXX के साथ जीवंत संबंध बनाया।

आयशा ने अचानक वोदका के पैग तैयार कर लिए।

नशे में धुत्त होकर मैं बिस्तर पर ढह गया।

वह सुबह निकल पड़ा, कार में बैठकर घर की ओर।

अगली बार में आयशा ने कहा, तुम्हें घरवाली की गांड मिलेगी।

यार, इस घटना ने मेरी पूरी ज़िंदगी बदलकर रख दी।

हर रोज़ फिर से आयशा का मैसेज आता है।

एक या दो महीने के बाद रेखा मामी बुलाती हैं, फिर सब होता है।

मैंने उसे अपने साथ रहने को कहा था, तब से वह मेरे पास है।



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