गाड़ी के शौचालय में बुआजी के साथ संबंध बनाया।

Desisexkahaniya

Jan 6, 2026 - 11:35
Jan 9, 2026 - 16:44
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गाड़ी के शौचालय में बुआजी के साथ संबंध बनाया।

एक ट्रेन के शौचालय में हुई बात से पहले मेरी ज़िंदगी में कभी सेक्स नहीं हुआ था। उस वक्त तक मुझे कुछ खास समझ भी नहीं था। फिर एक दिन डब्बे में एक आंटी मेरे पास बैठ गईं। ऐसे में मेरा हाथ अनजाने में उनके सीने पर चला गया।.

नमस्ते। समर शर्मा कहलाता हूँ मैं।.

घर मेरा पश्चिम बंगाल में है।.

थोड़ा सा काम से ही गुज़ारा चलता है। इसी में उलझे रहने के कारण कभी कुछ और सोचने का वक्त नहीं मिलता।.

इस कहानी में ट्रेन, शौचालय और सेक्स का जिक्र है। बहुत समय पहले की बात है।.

एक बार मुंबई जाना पड़ा, कुछ दिन के लिए।.

प्यार के बारे में मेरी समझ उस वक्त बहुत कम थी।.

मुंबई से लौटते वक्त कोई टिकट उपलब्ध ही नहीं था।.

घर वापसी करना मेरे लिए अहम था।.

गाड़ी में जगह न मिलने पर मैंने सामान्य डिब्बे का रुख किया। वहाँ एक लड़के के सहारे, सांस लेने भर की जगह मिली।.

थोड़ी देर बाद वो ट्रेन चल पड़ी, अब गति पकड़ने लगी।.

अचानक डिब्बे में एक चायवाला घुस आया। उससे मैंने एक प्याली चाय ले ली। फिर बैग से बिस्किट निकला, धीरे से चबाना शुरू कर दिया।.

जैसे ही ट्रेन कल्याण में आई, मेरी नजर एक आंटी पर पड़ी। वो धीमे-धीमे आगे बढ़ रही थीं, हाथ में दो बैग थे।.

उस दिन आंटी ने हल्के नीले रंग की साड़ी में खुद को ढक रखा था। ऊपर का कपड़ा भी वैसा ही था, जैसे बादलों के बीच छिपा सूरज।.

शायद वो महिला चौतीस से बयालीस साल की थी।.

बैग तले रख दो, मैंने सुनाया आवाज।?

बस हां, बिलकुल, क्यों न? मैंने कहा।!

बैग को मैंने सीट के नीचे रख दिया, फिर वहाँ खड़ा-खड़ा उसे घूरने लगा।.

खड़ी-खड़ी आंटी कुछ बोले बिना सफर पर चल पड़ी।.

खड़े रहने के दो घंटे बाद अचानक ऐसा लगा कि हो सकता है, इनकी सहायता जरूरी है।.

बोला, आप इधर टिक जाइए।.

थोड़ा स्थान खाली किया मैंने, तभी आंटी पास आकर सट गईं।.

फिर कहीं से बातचीत शुरू हो गई, उन आंटी के साथ।.

कुसुम ने खुद का नाम बताया।.

दोनों के पैर एक-दूसरे से टच कर रहे थे, जगह कम थी।.

एकदम अचानक पता चला, उसकी योजना पटना जाने की है।.

फिर अचानक पल में ही कुछ किन्नर ट्रेन में चढ़ लिए।.

हाथ धीरे से जेब में गया, पैसे बाहर आए।.

हाथ फिसल गया, और उसके स्तन पर जा लगा।.

एकदम अचानक, मुझे उसकी नरम चोंच के छूने पर तेज सा हलचल हुई।.

तभी मैंने अपनी जेब से एक 20 रुपये का नोट निकाला। फिर उसे किन्नर के हाथ में थमा दिया।

अब तक मैं सेक्स के बारे में कुछ नहीं जानता था, ऐसा ही था मेरा। पिछले समय तक मैंने अपने लंड को एक बार भी नहीं छुआ था, सच कहूँ तो।.

हाथ जब उसकी चूची से छू गया, एक अजीब लम्हे ने शरीर में डेरा कर लिया।.

इस उथल-पुथल के पीछे क्या चल रहा था, मेरी समझ से बाहर था। फिर भी, एक अजीब सी खुशी महसूस हो रही थी। धीरे-धीरे मेरा लंड स्वत: सख्त होने लगा।.

हो सकता है ये कुछ ऐसा हो जो प्रकृति ने बनाया।.

रात के दस बजे आधी खुली आँखों से वह टेबल पर झुकने लगी।.

उसकी नींद पलटते ही वो मेरे कंधे पर सिर झुकाने लगी।.

शरीर की खुशबू ने मुझे अंदर से हल्का सा डगमगा दिया।.

रात के दो बज चुके थे, इन सबमें किसी को ख़बर ही नहीं हुई।.

उसी पल नज़र पड़ी आंटी के कपड़ों से झांकती हुई ब्रा की पट्टी।.

अचानक समझ नहीं आया, क्यों मन भटका कि मैंने आंटी के ब्लाउज के अंदर देखना शुरू कर दिया। फिर धीरे-धीरे उनके सीने पर नज़र टिक गई।.

इसके बाद मेरी इच्छा तेज़ हो गई। नींद में डूबी आंटी की जांघ पर धीमे से हाथ फिरने लगा।.

उन्होंने कुछ नहीं कहा, तो मैंने उनकी जांघ पर हाथ फेर दिया। कभी-कभी, मैंने धीमे से उसे दबा भी लिया।.

जैसे ही चाँद की रोशनी पड़ी, मेरे भीतर एक सुकून सा फैल गया।.

लंबा सा घूँघट हिला मेरा।.

हाथ फिर उसकी जांघ पर गया।.

धीरे-धीरे हौसला बढ़ा, फिर मैंने आंटी की कमर पर हाथ रख दिय ।.

थोड़ी देर बाद आंटी की आंखें खुल गईं। उनके होंठ हल्के से मुड़ गए।.

गुदा में दर्द होने लगा।.

लपेटकर साड़ी उसकी कमर पर आ गई।.

एक झटके में होश उड़ गया। क्या हुआ था, समझ ही नहीं आया।?

मुझे फिर से हौसला मिला, जब अचानक आंटी की मुस्कान याद आ गई।.

फिर मन में ख्वाहिश आई कि कोशिश करूँ। धीमे से हथेली उनकी छाती के निचले हिस्से पर बढ़ी।.

मैंने कुछ सेकंड तक उसकी चमड़ी को छुआ। हथेली धीरे-धीरे खिसकने लगी।.

हाथ को उसने पकड़ लिया, तभी।.

डर के मारे मेरी हालत इतनी खराब हो गई थी।.

धीरे से बोलते हुए आंटी ने पूछा - क्या तुम्हारी शादी हो चुकी है?

मैं- नहीं.

एक बार मौसी ने पूछा था - तुमने कभी सेक्स किया है?

मैं- नहीं!

उसकी मुट्ठी में अब भी मेरी कलाई थी।.

हल्के से उठाते हुए, आंटी ने मेरा हाथ जकड़ लिया।.

हाथ को उन्होंने अपने एक दूध पर रख लिया, साड़ी ने ऊपर से ढक दिया।.

उनकी आवाज़ फिर मुश्शा की तरह उठी - अब धीमेपन से दबाओ।!

धीरे-धीरे मैंने उसकी चूची पर हाथ रख दियa।.

दूध की मुलायम चाहत ने पैंट के अंदर जगह बना ली। लंड सख्त होकर खड़ा हो गया।.

उस पल आंटी ने मेरे लौड़े को छुआ। फिर बोलीं, तुम सीधे बाथरूम चले जाओ। मैं थोड़ी देर में पहुँचती हूँ।.

बाथरूम के अंदर पहुँचा, फिर से वहीं खड़ा हो गया।.

बीच रास्ते में घड़ी का कांटा ढल चुका था। फिर वो दरवाज़े पर आकर खड़ी हुईं।.

उसके हाथ में हाथ डालते हुए मैंने जोर से भींच लिया।.

फिर उसने पूछा - क्या तुम्हारा अब तक सेक्स नहीं हुआ है?

उसके दूध को मथते हुए मैंने कहा - बिल्कुल नहीं।.

एक तरफ मुड़कर आंटी ने धीरे से ब्लाउज का बटन खोला। फिर ब्रा से छाती बाहर निकालते हुए बोलीं, इसे ऐसे चूसो जैसे कोई पका आम हो। दबाओ भी, थोड़ा और जोर से।!

इसी तरह से मैं काम करने लगा।.

दूध निकालते वक्त आंटी के होठ काँप गए। हथेली से दबाव डाला, फिर मैंने स्वाद चखा। उनकी सांसें भारी पड़ गईं।.

हाथ को धीरे से उसकी जांघ के पास ले जाते हुए मैंने महसूस किया। वो बोली, तुम्हें लगता है तुम इसे छू पाओगे?

हाँ कर दिया मैं।.

साड़ी ऊपर करते हुए आंटी ने पैंटी निकाल दी। फिर जांघें अलग कीं, कमर थोड़ी ऊपर उठाई और बोलीं - अब चख लो।.

बड़े-बड़े रोएं आंटी की चुत पर मौजूद थे।.

मैं वहीं बैठ गया, फिर धीरे से अपनी जीभ उसकी चुत में ले गया।.

खुशबू कितनी सुंदर लग रही थी।.

दुनिया के सभी हिस्से इसी गड्ढे में समाते नजर आए।.

मेरा सिर उनकी जांघों के बीच दबा हुआ था, आंटी धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रही थी। उनकी सांसें तेज़ हो गई थीं, शरीर कांप रहा था। कभी वो मेरे बाल पकड़ खींचतीं, तो कभी ठहर जातीं। एक पल चुप्पी छा जाती, फिर आवाज़ निकल आती।.

थोड़ी देर मुखमैथुन करने के बाद जब मैंने अपना पेनिस बाहर निकाला, उसकी आंखों में डर साफ झलक रहा था।.

मैंने पूछ लिया - क्या बात है?

आंटी ने पूछा - इतना बड़ा लंड तुम्हारे पास है?

उसने पूछा - हर किसी का ये हिस्सा थोड़ा छोटा क्यों होता है?

उन्होंने पूछा - काशी में कभी ऐसी फिल्म तुमने देखी है?

मैंने कहा- नहीं!

अब तो आंटी को पता चल ही गया था - इस लड़के में सिर्फ बेवकूफी है।.

अब आंटी खामोश हो गईं, मेरे लंड को सामने-पीछे हिलाने लगीं।.

मैंने कहा, तुम्हें भी मेरा लंड मुँह में लेकर सलवाना चाहिए।!

आंटी ने कहा - नहीं… मैं सही महसूस नहीं कर रही। अब तुम सिर्फ पेल दे दो मुझे।.

बिना समय गंवाए, मैंने उसे चुम्मा दे दिया।.

अचानक आंटी ने कहा - जल्दी करो, अब तो लंड को चुत में घुसा ही दो।!

खड़े होकर मैंने पोजीशन सेट की। वाशबेसिन के सहारे आंटी को झुका दिया, मेरा लंड उसकी चुत के किनारे आगे-पीछे होने लगा।.

बैठते ही उन्होंने टांग उठाकर दरवाज़े से छेड़ा।.

खुला पड़ गया था उसका रास्ता।.

उस दिन आंटी ने मेरे लिंग को हाथ में लिया। फिर वह उसे अपनी योनि के ऊपर टिका दियa।.

कहने लगे - हुम्म… मुझे पेल दो।!

जब मैंने धक्का दिया, तभी लंड बाहर हो गया। अंदर जाने से पहले ही सब कुछ खराब हो चुका था।.

उन्होंने कहा - तुमने तो अब तक किसी का भी मन नहीं जीता। इस रास्ते पर तुम अभी बिलकुल नए हो!

मैं चुप रहा.

आंटी बोलीं- रुको.

हाथ से लंड पकड़कर उसने चुत के मुँह पर रख दिया, फिर धीमे स्वर में कहा - अब पेलो।.

कमर को मटकाते हुए उसने धक्का दिया।.

आह छूट गई आंटी की - ऊई मम्मी रे… इतना मोटा है तेरा?

थोड़ी देर बाद मैंने धक्के देना शुरू किया। लंड आहिस्ता-आहिस्ता चुत के भीतर जाने लगा था।.

ख़ुशी महसूस होने लगी थी।.

उस पल मेरे हाथ आंटी की कमर पर थे। झटका लगा, सब कुछ हिल गया।.

ऐसे ही अब आंटी के साथ सेक्स शुरू हो चुका था।.

सच कहूँ तो उस पल मुझे आंटी के साथ हरकत करने में अजीब सुख मिल रहा था।.

थोड़ी देर के बाद, आंटी ने कहा - पीछे से धक्का लगा।.

हाथ में वाशबेसिन को समेटा, फिर एकदम घोड़ी बन उठी। धीरे से लंड भीतर जमा, और इस बार सुगमता से हिला-डुला।.

उसकी कमर में हाथ डालते ही मैंने धक्का दिया।.

थोड़ी देर में आंटी ने कहा - जरा तेजी से चलाओ।.

मैंने धीमी गति से हिलना शुरू किया।.

उसकी आवाज़ में एक सिसकन थी… आह, कभी-कभी धीमे हो जाती।.

मुझे बाहर आना था, इसलिए मैंने धक्के देना और तेज़ कर दिया।.

थोड़े धक्कों के बाद मेरा लंड उसकी चूत में ही पानी छोड़ने लगा। मैंने अंदर ही झड़ दिया।.

अचानक आंटी सीधे बैठ गईं। उन्होंने कहा - तुम्हारा लंड भारी है, गाढ़ा भी है, पेशाब की नाली में दबाव महसूस होता है।.

मेरे होंठों पर उसका चुंबन था, फिर वह कपड़े संभालती हुई कमरे से बाहर चली गई।.

थोड़ी देर ट्रेन के शौचालय में सेक्स करने के बाद, मैं सीधे सीट पर जा बैठा।.

फोन उठाकर आंटी ने अपना नंबर डाल दिया।.

थोड़ी देर के बाद आंटी ने कहा - फिर से चाहत हो रही है।.

धीमे स्वर में मैंने पूछा - क्या तुमने अब पैंटी पहन ली है?

आंटी बोलीं- नहीं.

वहाँ धरती पर बैठ गया मैं। उसकी साड़ी के भीतर हाथ सरकाया। फिर चूत को छुआ।.

आँखें बंद किए, वो सिसक रही थी। होंठ दबाकर उसने मज़े को रोकने की कोशिश की।.

एक उँगली सरक गई उसके भीतर, धीमा नाच था हर सेकंड।.

एक दस मिनट बाद, आंटी की चूत से पानी टपकने लगा। मेरी उंगली पर उनका रस चढ़ गया।.

अचानक से मैंने उंगली मुँह के अंदर डाली। वो थोड़ी गीली हो गई जब मैंने चाटना शुरू किया।.

उठकर सीधे बाथरू की ओर बढ़ गईं आंटी, रास्ते में मेरी तरफ देखा एक झटके से।.

थोड़ी देर के बाद, मैंने भी वहाँ से रुखसती ले ली।.

अब तुरंत लंड को चूत में घुसा दो, आंटी ने कहा।.

मैंने कहा - सिर्फ़ तभी, अगर…!

फिर आंटी ने पूछा - क्या हुआ?

उस समय मैंने कहा - अपने मुँह में मेरा लंड डाल लो, फिर धीरे से चूसना शुरू कर दो।!

आंटी- नहीं यार!

एक बार करने का मौका मुझसे नहीं, तुम्हें ही दो।!

मेरी ज़िद पर आंटी हामी भर बैठीं, फिर वो धीरे से झुककर मेरे लिए घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने मेरा लंड मुँह में लिया तो मैं सिसक उठा।.

ख़ुशी का पल था।.

कुछ पल चूसने के बाद लंड उठ गया।.

उस आंटी को भी लंड चूसने का अहसास बढ़ता जा रहा था।.

मेरा लंड आंटी के मुँह में तेजी से अंदर-बाहर होने लगा। उसके गले से बार-बार गुर्राने जैसी ध्वनि निकल रही थी।.

उठी आंटी, मैंने साथ ही लंड उनकी चूत में प्रवेश करा दिया।.

थोड़ा संभलकर चलना, आंटी ने कहा। तुम्हारा लवड़ा काफी मोटा है।!

मैंने धक्कों के साथ आंटी के ऊपर अपना हावीपन दिखाया, सुने बिना।.

उफ्फ... आह… ये आवाज़ें आंटी के मुंह से आ रही थी। चुदाई के दस मिनट बाद, उनकी चूत से पानी टपकने ही वाला था।.

पानी आने का समय हो गया है, ऐसा आंटी ने कहा।!

उसकी चूत से मेरा लंड बाहर आया, फिर मैंने जीभ लपेट दी।.

उसी पल वो मेरे सिर को अपनी गुदा में धकेलते हुए बोलीं - आह, तेजी से चाटो... और ज्यादा जोर डालो।.

जीभ अंदर तक फिसली, स्वाद छलक उठा।.

पानी मिल गया मुझे, जब आंटी की चूत से रस टपका।.

इस बार तुमने काम किया है बहुत बेहतर, आंटी ने कहा लथड़ी आवाज में।!

उसने कह दिया - अब तुम्हारा हो चुका… मगर मेरे पानी का क्या? होगा कौन समाधान?

बुझा दिया पत्ते की तरह आवाज।!

उसका लंड उसकी जीभ के नीचे आया।.

मेरे हाथ ने धीरे से उसके होठों पर जबरदस्ती की।.

गू-गू की आवाज़ निकल रही थी आंटी के मुँह से, बच्चे को झुलस्ती हुई वो।.

थोड़ी देर बाद उसके होठों पर सब कुछ फैल गया।.

उन्होंने मेरा पानी पी लिया।.

फिर हम दोनों सीट पर जाकर सो गए।.

एक-एक करके मुलाकातें होने लगीं, कौन जाने किस चाची या बहन से। हर बार एक अलग तमाशा था। धीरे-धीरे ऐसा लगने लगा कि सब कुछ आसान हो गया है। कई तरह की लड़कियाँ अब मेरे पास आने लगी थीं। फिर कभी जरूर बताऊँगा।.

मुझे

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