अनजान लड़की को फोन से पटाया फिर चोदा
एक शाम को मेरे साथी ने हाथ में एक नंबर थमा दिया। बोला, इस लड़की से बात कर ले, ये तुरंत मान जाएगी। धीरे से मैंने फोन उठाया। आवाज़ सुनते ही घबराहट छू मछू हो गई। बातचीत ऐसे आगे बढ़ी, जैसे पहले से तय हो।.
नमस्ते, सुमित कहता हूँ। पलायन नहीं, जन्म से इलाहाबाद का ही हूँ।.
एक दिन खेत के पास से गुजरते हुए मैंने कुछ ऐसा देख लिया, जिसने मेरे दिमाग को हिला दियa।.
एक दिन दोस्त ने फोन नंबर थमाया। बातचीत कैसे शुरू हुई, पता नहीं। धीरे-धीरे बातें आगे बढ़ीं। वह खुद भी रुचि दिखाने लगी। मुलाकात हुई तो सब कुछ सहज लगा। छुआछूत के बीच वक्त गुजर गया।.
एक बीस साल की लड़की थी। उसे गुड़िया कहते थे।.
एक बात मैं पहले कह देना चाहता हूँ। शादीशुदा आंटी या फिर भाभी, इनमें से कोई भी हो, मुझे उनसे जुड़ा अनुभव खास लगता है।.
उनके काँपते शरीर पर साड़ी का अंदाज़, नाभि से नीचे तक फैला, खूबसूरती में इजाफा कर देता है।.
लेकिन अब तक किसी शादीशुदा आंटी के साथ मेरा कभी रिश्ता नहीं बना। न ही मुझे कभी उनके साथ सेक्स करने का अवसर मिला।.
क्योंकि इस वजह से मेरा ये ख्वाब, शायद सिर्फ एक ख्वाब ही बनकर रह जाएगा।.
तब ऐसा हुआ कि मेरे दोस्त ने एक लड़की का नंबर दियa, जिसका नाम गुड़िया था। मैंने फिर उसी पल पूछ लिया - इससे बातचीत करने पर कहीं झगड़ा तो नहीं खड़ा हो जाएगा?
उसके मुंह से हंसी निकल गई - अरे भाई, तू तो बिल्कुल सिर पर चढ़ा हुआ है… क्या उम्मीद करता है? क्या फोन से कोई बाहर आएगा और तुझे पीटेगा!
उसने जो कहा, मैं वही सोच रहा था।.
शहर में उसका घर था, गाँव से तीस किमी दूर। प्राइवेट फर्म में नौकरी चल रही थी बीच-बचाव के बदले नहीं, बस रोज़ की ड्यूटी।.
उसके सिर पर बीस के आसपास का उम्र झुका था। कद इतना ऊँचा नहीं था कि ध्यान खींचे।.
एक ऐसी लड़की को, जिसके बारे में मुझे कुछ पता नहीं था, मैंने हिचकिचाते हुए फोन लगाया।.
एक लड़की ने मेरा फोन उठाने से पहले ही छोड़ दिया, क्योंकि नंबर अजनबी था।.
फिर भी, मैं हर बार उस तक पहुँचने का प्रयास करता रहा।.
एक-एक करके कई बार कोशिश करने पर वह हल्के से मुस्कुराया, फिर धीमे आवाज़ में बोला।.
उसकी वजह से मैं पहले काफी घबरा गई, क्योंकि मेरे पिता पुलिस में हैं। फिर मैंने सोचा कि शिकायत कर दूँगी।.
उसके पिता असल में खेतों में काम करते थे।.
उसके बारे में मैंने सवाल किया - क्या वो गाँव में जीती है?
उसने कहा - मैं गांव की रहने वाली हूँ। पर फिलहाल, घर से आधा घंटा दूर शहर में अकेले रुकती हूँ। काम एक निजी फर्म में है।.
एकाएक मैंने पूछ लिया - शहर में तुम्हारे साथ कोई और भी रहता है, या बस तुम खुद हो?
उसने मुझसे पूछे गए सवाल पर ज़ोरदार हंसी, फिर कहा - मेरे साथ कोई नहीं टिका या ठहरा। अचानक... तुम खुद मेरे पास आने को दिल लगा बैठे हो?
मैं तो उसकी बात पर जवाब देने वाला था कि हां, तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ। लेकिन अचानक ख्याल आया, और मौन हो गया।.
बातचीत करने लगे।.
फिर वह बात करने लगा - ट्यूब में आवाज़ थी।.
एक पूरा महीना फोन पर बातें करते-करते निकल गया, पर हम आज तक आमने-सामने नहीं हुए।.
बातचीत का सिलसिला जारी रहता था।.
बस स्टॉप पर खड़ी लड़की को घर वापसी का इंतजार था।.
उसकी आवाज़ सुनते ही पता चल गया, वो घर की ओर निकलने लगी।.
उसके बारे में तो सुना था, पर आँखों-आँख अब तक कभी नहीं देखा था। मिलने का मौका मिलते ही दिल धड़क उठा।.
उस दिन वो बस में बैठकर घर जा रही थी। मैंने फोन पर कहा - इस बार बस का इस्तेमाल न करो। मेरी गाड़ी से मैं खुद तुम्हारे यहाँ पहुँच रहा हूँ। तुम्हें बैठाकर छोड़ दूँगा।.
शुरूआत में तो उसने हाँ न कहा - बिल्कुल नहीं, मैं वहाँ नहीं पहुँचूंगी।.
फिर भी, मेरा मन उधड़ रहा था।.
धूप तेज़ थी। छह बजने में अब चंद साँसों का वक्त रह गया था।.
थका देने वाली बहस के बाद वो हाँ बोली, अब बस से यात्रा नहीं होगी।.
डर भी लग रहा था, कहीं वो अचानक चिल्ला न दे – शायद लगे मैं कुछ गलत कर रहा हूँ। पहली बार ऐसा कर रहा था, इसलिए घबराहट थी।.
कुछ होगा पता नहीं, मैंने बस आगे कदम बढ़ाया।.
हिम्मत जुटाकर मैं वहाँ पहुँच गया।.
उस दिन से पहले मैंने कभी ऐसा अनुभव नहीं किया था, तो मन में घबराहट भी थी।.
जब मैं वहाँ पहुँचा, तो बस बाइक पर बैठने को कह दिया।.
शुरू में उसने हाँ नहीं की, फिर भी मैंने जिद पकड़ी तो आखिरकार वो बाइक के पीछे समा गई।.
उल्टे पैरों वो मुझमें छिपा हुआ सफ़र उठा।.
थोड़ा आगे बढ़ने पर एक दुकानदार के पास ठहर गए, वहाँ ठंडा पेय मिला, फिर गपशप शुरू हो गई।.
उलटे पैरों वापस लौट आया, उसे घर से कुछ ही कदम दूर छोड़कर।.
फिर से फोन पर बातचीत चलती रही।.
वो अब मुझ पर बहुत खुश थी, धीरे-धीरे हमारी बातचीत आसान हो गई।.
कभी-कभी बातें सेक्स तक पहुँचने लगती थीं।.
हम तय कर चुके थे कि किसी शाम बस दोनों ही मिलेंगे।.
उसने कहा - शहर के घर में, जहाँ मैं रहती हूँ, आज वो अंकल और आंटी गांव चले गए।.
अब पता चला कि लौंडिया आज टांगें उल्लू बनाने पर तुली है।.
सुबह उठते ही कहा, मुझे शादी में जाना है। घर पर झूठ था ये। आने का वक्त सुबह बताया गया था।.
बात कह देने के बाद मैं सीधा वो लड़की के कमरे के पास खड़ा था।.
पहले मैं होटल पहुँच चुका था, वो अभी नहीं आया था।.
खाना खाते हुए मैं वहाँ था, उसके बाद कमरे में भी पहुँच गया।.
पहली बार के लिए सब कुछ अजनबी था, डर भी आ रहा था।.
बातें हुई थीं हमारी पहले, उसके बाद हाथ आपस में छू गए।.
मेरे लिए सहन कर पाना मुश्किल हो चला था।.
हवा में सिर्फ़ एक छींटा सा लगा।.
थोड़ी देर तक मुंह से मुंह जोड़ने के बाद, हम लोगों ने पहले उसके फिर मेरे कपड़े निकालना शुरू कर दिया।.
उसके बाद मैंने उसकी छाती पर हाथ फेरा, धीमे-धीमे दबाव डालते हुए। एक पल बाद मैंने मुँह से स्पर्श किया, गहराई से चूस लिया।.
फिर मैं धीमे से नीचे की ओर जाने लगा।.
वो बातें पहले ही समझ चुका था।.
पहली बार के लिए ऐसा होना मुझे खुश कर गया।.
उसकी मुट्ठी मेरे सिर पर तंग हो गई, सांसें भारी-भारी।.
उसकी आवाज़ तेज़ हो गई - अब धमाके के साथ चाटना।.
थोड़ी देर में उसकी आंखों से पानी आने लगा। यह पानी खारा था।.
अच्छा लगा तब, सिर्फ़ इसलिए नहीं कि पहली बार हो रहा था।.
दस मिनट तक मेरा मुँह उसके पैरों से चिपका रहा।.
मेरे लंड को हाथ फेरने लगी।.
इसके बाद, हम एक-दूसरे को समझते हुए 69 में ढल गए।.
मैं पहली बार में ही उसके मुँह में आ गिरा।.
थोड़ी देर बाद सन्नाटा छा गया। फिर धीरे-धीरे बातचीत शुरू हो गई।.
बातचीत के कुछ पल बाद, हम दोनों में से एक ने आवाज़ उठाई।.
मैंने उसकी गांड साफ़ करनी शुरू कर दी, तो उसने मेरे लिए निचले होठों का काम शुरू कर दिया।.
इस पल उसके मुँह से निकला - तुम क्यों नहीं हो तैयार इसके लिए?
उसने मुझे धक्का दिया, फिर मेरे ऊपर बैठ गई।.
कभी-कभी समझ में आता है, वो लंड लील चुका था।.
पता चल गया था मुझे, इसने पहले ही किसी को धोखा दिया था।.
फिर वो मेरे ऊपर बैठकर धीमे-धीमे हिलने लगी।.
वो मेरी गोद में थी, धीमे से दूध पिला रही थी। हाथ उसकी कमर पर था। बीच-बीच में तनाव छुटता जा रहा था।.
ख़ुशी का एहसास हो रहा था।.
वह मेरे लंड को अपनी चुत से बाहर निकालकर चूसने लगी, धीमे से। इस तरह वो पूरा चिकना हो चुका था। फिर वापस उसकी बुर में सरकता गया, आसानी से।.
उसके बाद कुछ पल मैंने उसे चारपाइयों की तरह झुका दिया, आगे हाथ जमीन पर टिके। फिर धीमे-धीमे पीठ के नीचे से अपना लंबा शरीर खिसकाया, उलझन भरी गति में।.
मज़े का पल उसके साथ भी जारी था।.
उसके स्तनों पर हथेलियाँ थिरकती रहीं, फिर मैंने ज़ोरदार अंदाज़ में संभोग किया।.
एकदम पहली बार कुछ ऐसा हो रहा था, मन खिल उठा था।.
लंबे समय तक चलने के बाद मैंने अपना लंड उसकी चुत से बाहर निकाला, और वहीं उतर गया।.
खुशी उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी।.
उस रात मैंने और वो चार बार सेक्स किया।.
थकान ने अंत में हम दोनों को पकड़ लिया।.
पूरी रात में चार बार सेक्स हुआ, फिर बिलकुल बेहोशी के घटना के बाद नींद आई।.
आँख खुलते ही पहली बात जो नजर में आई, वह घड़ी में सुबह के छह बजना था।.
एक बार फिर मैं उसके स्तनों का दूध पीने लगा।.
उसके हाथ धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़े। फिर वो मुझ पर झुकी। तापमान बढ़ता गया। उसने अपने होठों से शुरुआत की।.
फिर हुआ वैसे ही, उस शाम।.
थोड़ी देर तक साथ रहने के बाद हम उठ गए, मैंने अपने कपड़े लेकर पहनना शुरू कर दिया।.
थोड़ी सी उदासी उसके चेहरे पर छा गई थी जब मैंने कहा कि अब जा रहा हूँ।.
एक-दूसरे से मिलने की बात हुई, फिर वही चल पड़ी।.
घर पहुँच चुका हूँ।.
फिर कई मौकों पर सेक्स हुआ।.
मेरी ज़िंदगी में यह पहली बार था जब गाँव की असली छुअत के साथ कोई हकीकत आई।.
बार-बार मुझे एक ही लड़की के साथ साथ आया।.
फिर वो कंपनी से हट गया, साथ में कमरे का रुख भी।.
घरवालों को पता चल चुका था, शायद, कि अब वह किसी के साथ सोने लगी है।.
तभी तो उसने मुझसे दूरियाँ बना ली थीं।.
कभी-कभी याद आने लगता है वो।.
कहीं गुम सा हो गया है वो।.
अब उसका नया नंबर है।.
अगली बार फिर मिलूंगा, तब सुनाऊँगा आगे क्या हुआ।.
गाँव की छवि से जुड़ी कहानी पर बात करना चाहें तो मिल सकते हैं।.
एक शादीशुदा लड़की की चूत मुझे अधिक पसंद आती है। वैसे, भाभी या फिर आंटी - उनका भरोसा मुझ पर पूरा हो सकता है।.
चिट्ठियाँ कभी किसी को नज़र नहीं आएँगी।.
मेरी अपनी शादी हो गई है, तो ऐसा कौन सा मन है जो किसी के संसार को उजड़ते देखना चाहे।.
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