कॉलेज वाली प्रेमिका की सीलतोड़ चुदाई
पाँच साल तक साथ रहने के बाद ऐसा हुआ। वो मेरी गर्लफ्रेंड थी, जिसके साथ मैं इस कहानी को पढ़ता आया हूँ। उसका पहला अनुभव मेरे साथ ही हुआ।.
मेरा नाम दीप है, और मैं राजस्थान के झुंझुनू में रहता हूँ।.
कुछ कहते हैं कि मेरी तस्वीर पुराने ज़माने की है।.
ऊँचाई और वजन में कोई खास बात नहीं, सिर्फ इतना कहूँगा - दूसरों जैसा ही।.
लंबाई मेरे लंड की सात इंच है। चौड़ाई तीन इंच के आसपास रहती है।.
एक दिन मैंने फैसला किया कि तुम्हें वो पल सुनाऊँ, जब मेरी गर्लफ्रेंड ने मेरे सामने सब कुछ छोड़ दिया। बात धीरे-धीरे आगे बढ़ी, उसकी आँखों में कुछ ऐसा था जो शब्दों में नहीं आता। हम दोनों एक-दूसरे के करीब आए, फिर सब कुछ खुद-ब-खुद होता गया।.
मेरा ये पहला किस्सा है सेक्स का।.
हर दिन कुछ नया सीखने के बाद मैं उसे गर्लफ्रेंड के साथ ज़िंदगी में आज़माता हूँ। पिछले छह साल से मैं सेक्स से जुड़ी कहानियां पढ़ता आ रहा हूँ।.
अंकिता मेरी गर्लफ्रेंड है।.
लंबाई में तो वो साधारण है, पर उसके आयाम 30-28-34 के बीच टिके हुए हैं। नज़र जमाए बगैर कोई नहीं रह पाता, इतनी खूबसूरत छवि बनाती है वो।.
पिछले करीब पांच सालों से हम दोनों एक-दूसरे के साथ जुड़े रहे।.
उस वक्त हम पढ़ाई में साथ चलते थे, स्कूल से लेकर कॉलेज तक।.
पहली बार उसी ने कहा था कि मुझसे प्यार करता है। मैंने तब सिर हिला दिया था। फिर धीरे-धीरे हम दोनों के बीच कुछ खास होने लगा था।.
एक समय की बात है, कॉलेज के दिनों में अंकिता कहीं और चली गई। मैं पीछे रह गया था, घटनाओं के बीच में।.
बिना उसके, मेरे लिए समय निकाल पाना कठिन होता जा रहा था।.
एक शहर में रहने वाली लड़की से मेरी दोस्ती हो गई, बिना अंकिता को पता चले। फिर मैं उसके साथ सेक्स में खुशी महसूस करने लगा।.
उस लड़की को पहले भी कोई चोद चुका था, इसलिए बात प्यार की नहीं होती।.
लगता है, इंसान के साथ सेक्स भी बुढ़ापा पहचानता है। वैसे ही मैंने वो कदम उठाया था।.
पिछली बार मैंने पुणे की एक लड़की के साथ लगातार 52 मिनट तक सेक्स किया, इसलिए मेरी स्टैमिना अच्छी है।.
उसे मेरी हिम्मत देखकर अच्छा लगा, हम दोनों बस उस पल के सुख में खो गए।.
अब मुझे भी वो बात पसंद आने लगी थी, क्योंकि मैं हाथ से करने के बजाय अपनी गांड में डालना बेहतर समझता था।.
एक सुबह अचानक अंकिता दरवाज़े पर खड़ी थी।.
हम उस दिन सुबह-सुबह तय करके निकल पड़े थे।.
बैठने का समय था। अंकिता बोली, कहीं ऐसी जगह चलते हैं जहां सुकून हो। वहाँ कोई बीच में न आए। दोपहर की रोशनी थी। गपशप शुरू होगी।.
तभी मैंने जवाब में कहा - आज तुम्हारी बातचीत का अंदाज़ क्यों इतना बदला हुआ सा लग रहा है?
उसके मुँह से निकला - आज भैया घर पर उपलब्ध नहीं। कोई पूछताछ वाली बात नहीं होगी, अगर मैं देर से पहुँचूँ। मम्मी को समझा दूँगी कि कहीं एक दोस्त के जन्मदिन में खो गई हूँ, इसलिए रास्ता थोड़ा लंबा हो जाएगा।.
कभी-कभी ऐसा लगता है कि शाम तक कुछ अलग हो सकता है। फिर खयाल आता है - कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि आज पहली बार किसी लड़की के साथ बात आगे बढ़ जाए।!
फिर अचानक फोन बज उठा - दोस्त की तरफ से।.
हमेशा अंकिता को लगता, उसकी दोस्त सबसे ज़्यादा समझदार है।.
वो अपनी दोस्त को हमसे मिलने के बारे में बता चुकी थी। उसने कहा था - अगर माँ पूछे, तो ये जरूर कह देना कि मैं आज तुम्हारे साथ हूँ।.
हम लोगों ने किसी होटल में कमरा पक्का कर लिया।.
जब हम उस होटल में पहुंचे, एक वेटर कमरे तक ले जाने लगा। उसके हाथ में पानी की बोतल भी थी, चुपचाप साथ चल दिया।.
उसने कहा, "सर, अगर कुछ ज़रूरत हो तो बस एक फोन कर दीजिए, मैं व्यवस्था कर दूंगा।".
उसके हावभाव लगता है बियर या फिर सिगरेट की ओर ज़्यादा झुकाव दिखा रहे थे।.
ठीक है बोलकर मैंने उसे वापस भेज दियa।.
बीच के समय में दरवाजा बंद हो गया। मैं व अंकिता बिस्तर पर बैठ गए। कुछ पल चुपचाप बातें होती रहीं।.
इसके बाद, मेरी ओर से अंकिता के होठों पर चुम्मा आया।.
उसने सबसे पहले मुझे धक्का दिया, फिर भी मैं वापस आया। इस बार उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी।.
अब वो वक्त आ गया था जब मैंने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ सेक्स का आनंद उठाना शुरू कर दिया।.
जब वो सिर्फ इसलिए आई थी कि उसे पूरा मिले, तो झझकना किस बात का।.
बीस मिनट तक हमारे बीच यह सिलसिला चलता रहा।.
इसके बाद मुझे ने आहिस्ता से उसके कपड़े निकाल लिए। वो अब सिर्फ अंडरवियर में थी।.
उसने मेरे सभी कपड़ों को निकाल लिया, तब जाकर मैं बिल्कुल खुला हुआ।.
उसकी त्वचा का रंग जब मैंने देखा, धड़ से मेरा लिंग सटक उठा।.
उसकी नजरें मेरे लिए पलट रही थीं।.
एक हाथ से मैंने उसके स्तन को नचोड़ा, वहीं दूसरे पर होठ लगा दिए।.
थोड़ी देर बाद, उसकी सांसें भारी हो गईं।.
शरीर भर में चुम्मे देते हुए मैं धीरे-धीरे उसकी पैंटी तक पहुँच गया।.
हवा में वो खुशबू फैली हुई थी, जो दूर से महक उठती।.
उसकी पैंटी पर मेरा नरम किस पड़ते ही वह थरथर कांपी, इसके बाद उसने मेरे सिर को अपनी जांघों के बीच से हटा लिया।.
फिर मैं चुम्मा देने लगा, आहिस्ता से लड़की की पैंटी नीचे सरका दी।.
उसकी नरम, गुलाबी योनि मेरे सामने दिख रही थी।.
बिना समय गंवाए मैंने उसकी जांघों के बीच होठ फेरना शुरू कर दियa।.
एक्सएक्सएक्स देसी लड़की जब संभोग चाहने लगी, तो बिना पानी के मछली की तरह बेचैन हो उठी।.
बीस मिनट के आसपास मैंने उसकी चूत पर अपना मुँह लगाए रखा।.
उस वक्त वो पहले ही एक बार उफान पर आ चुकी थी, मैंने सारा खारा पानी धीरे-धीरे चूस लिया।.
अब उसके भीतर का झिझक गायब हो चुका था। मेरे सामने वह लेटी थी, जांघें अलग करके। आखें मेरी ओर, हाथ अपने शरीर पर।.
आंखों में नशा था, वो देखते ही मैं उठ बैठा।.
उसकी नज़र पहले मेरे चेहरे पर थी। फिर धीमे-धीमे नीचे को बढ़ने लगी। एकदम सीधे उस हिस्से पर जा टिकी। वहाँ खड़ा था मेरा लंबा, मोटा लंड। आख़िरकार उसने इसे अपनी गर्म नज़रों से घूरना शुरू कर दिया।.
उसने जब अपनी जीभ होंठों पर घुमाई, मेरा लंड तुरंत उसके मुँह के पास पहुँच गया।.
उसने अपनी जुबान से छुआ, तभी मैंने कहा - अंदर ले लो।.
फिर भी वो हाँ नहीं बोला।.
काफी प्रयास के बाद ही वो मेरे लंड को अपने मुँह में ले पाई।.
मैंने तुरंत सारा लंड उसके मुँह में धकेल दिया, जैसे ही उसने छेड़ा।.
आंखें ऐसे उभर आईं, मानो किसी ने धक्का दे दिया हो।.
थोड़ी देर बाद मैंने फिर से उसके होठों पर ध्यान देना शुरू कर दिया।.
पानी का बच्चा आने वाला था। मैंने कुछ सवाल नहीं किए, सबकुछ उसके मुँह में डाल दिया। पीछे से उसके सिर को मजबूती से पकड़ लिया - खींचने का खतरा न रहे!
उसने मेरा रस चुराकर पी लिया।.
आराम के पाँच मिनट बीतने के बाद, फिर से कोशिश की।.
मेरे लिए उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया। फिर वो मेरे ऊपर सवार हो गई, धीमे-धीमे घूमते हुए।.
उसने कहा - दीप, अब सख्ती से धकेल दो… मेरी गांड फाड़ दो… ये जगह मुझे बहुत परेशान करती है। हर रोज़ जब तुमसे बात होती है, तभी इसे संतोष मिलता है, वो भी उंगली करवाकर!
थूक मैंने तुरंत लंड पर लगा दिया, फिर धीरे से उसकी चूत पर बैठने की कोशिश की।.
अगर पहली कोशिश में लंड खिसक गया, तो दूसरी बार चूत के साथ-साथ लंड पर भी तेल डाल दिया।.
इसके बाद, किसी न किसी तरह मेरे होठ अंकिता के पास पहुँच गए।.
उसने पहली बार कुछ ऐसा किया था। मेरे मन में डर था कि कहीं आवाज़ सुनाई न दे।.
धीरे से मैंने अपना लंड उसकी चूत पर टिकाया। फिर तेजी से आगे बढ़कर वह भीतर घुस गया, चूत ने उसे चूस लिया।.
उसकी सांस रुकने लगी, आंखों से पानी का बहाव हो गया।.
फिर मैंने उसके होंठों पर मुँह लगाना चाहा।.
दर्द जब घटने लगा, तो वह बैठ गया और संकेत कियa।.
तब मैं कहीं नहीं रुकने वाला था।.
एक लंबे घंटे तक मैंने हर स्थिति में उसके साथ सेक्स किया।.
उस समय तक अंकिता पहले ही दो मौकों पर गिर चुकी थी।.
कुछ समय बाद मैं पहुँचने वाला था।.
पूछ बैठा - अंकिता, मैं ये कहीं जाऊँगा?
उसके मुँह से निकला - जान, मेरे भीतर ही उफ्रा दे। मैं तेरा सब कुछ अपने अंदर समेटना चाहती हूँ।.
थोड़े तेज धक्कों के बाद मैंने उसके अंदर अपना शुक्र छोड़ दिया, फिर वहीं उस पर गिर पड़ा।.
थोड़ी देर के बाद, मैंने जब अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला, तो वह खू.न से ढका पड़ा था।.
इतना देखते ही अंकिता ने कुछ पल रुके बिना मेरे लंड को मुँह में डाल लिया।.
शॉवर के पानी की आवाज़ सुनकर हम दोनों वहाँ पहुँचे। फिर तब तक टूटा नल खोला गया, जब तक भीतर का धुआँ साफ़ न हो गया।.
उसकी चूत पर मेरा हाथ फिरा।.
बिस्तर पर ले जाकर मैंने उसे सुला दिया क्योंकि वह ठीक से नहीं चल पा रहा था।.
खुशी के बीच, एक घंटा गुज़र गया - कपड़े दूर, सिर्फ़ हम।.
अब वह मिलने का बहाना ढूंढती रहती है। फिर से पलंग पर उलझ गए थे हम।
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