गर्लफ्रेंड की वर्जिन चूत होटल में फाड़ी

Desisexkahaniya

Jan 3, 2026 - 12:54
Jan 9, 2026 - 17:26
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गर्लफ्रेंड की वर्जिन चूत होटल में फाड़ी

अरे भई, नमस्ते। दीप हूँ मैं। रहता हूँ झुंझुनू में, राजस्थान के एक कोने में। कद का हिसाब तो साधारण है, पर लंड की बातचीत अलग थी - 7 इंच ऊपर तक, 3 इंच घेरा। आज कहानी सुनाने वाला हूँ अपनी, बिना छिपाए। कॉलेज की लड़की अंकिता के साथ पहली बार जब ऐसा हुआ। उसका फिगर था 30-28-34, रंग गोरा, चेहरा खूबसूरत, बाल लटकते हुए, आँखें बड़ी-बड़ी - देखने वाला ठिठक जाता।

पांच साल तक चला हमारा रिश्ता। स्कूल से लेकर कॉलेज तक साथ-साथ पढ़ाई हुई। उसने खुद मुझसे कहा था - "दीप, मुझे तुमसे प्यार हो गया।" मैंने भी जवाब दिया, हां। कॉलेज अलग हुआ तो अकेलापन सताने लगा। फिर एक और लड़की से बातचीत शुरू हुई। वो पहले से कई अनुभव झेल चुकी थी। उसके साथ लंबे समय तक सेक्स हुआ - घंटों तक चला। वो मेरी ताकत से खुश रहती - एक बार लगातार 52 मिनट तक चला था। उसने कहा था - "दीप, तुम्हारा लिंग अद्भुत है।"

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एक दिन अचानक अंकिता आ गई। उसने कहा, "आज शाम को कहीं बिना किसी के आए बातें करेंगे। भैया घर पर नहीं होंगे, मम्मी को किसी दोस्त की जन्मदिन की पार्टी का झांसा दे दूंगी।" दिमाग में धमाका-सा हुआ – आखिरकार आज कन्या चूत मिलने वाली है! पूरी रात आंखें खुली रहीं। लंड ऊपर उठा रहा, सोचता रहा – अंकिता की चूत दिखेगी कैसे?

कमरे का आरक्षण हो गया था। दोपहर में पहुँचे तो खिड़की से धूप घुस रही थी। पानी का गिलास छोड़कर वेटर चला गया, बोला - “जरूरत हो तो बेल बजा देना।” कमरे में ठंडक फैली थी, ऊपर एसी चल रहा था। बाहर हवा झुलसा रही थी। बिस्तर के किनारे बैठ गए। अंकिता शर्मा का नाम था उसका। मैंने धीरे से हाथ थाम लिया। उसने आखिरकार मुस्कुराहट में जवाब दिया - “आखिर पहली बार है ऐसा।”

शुरू हुई बातचीत। पुराने स्कूल के दिन, कॉलेज के पल याद आए। अचानक मैंने उसके गाल पर चुम्मा दे दिया। वो झेंप गई। धीरे से मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रखे। पहले आहिस्ता, फिर ज़्यादा गहराई। मेरी जीभ उसके मुँह में घुसी। वो भी जवाब देने लगी। करीब बीस मिनट तक चुम्मे चलते रहे। सांसें तेज़ हो गईं। शरीर गर्माहट से भर गया।

शुरू किया कुर्ते को ऊपर उठाकर - ब्रा में छिपे सफेद स्तन। ब्रा निकली, तो लाल निप्पल खड़े हो गए। चूसा, घुमाया। वो बोली, “आह्ह दीप… दबाओ… ऐसे ही…” थोड़ा दाँत लगा तो काँप उठी - “हाय… अच्छा लग रहा है।” फिर नीचे बढ़ा - सलवार ढीली, पैंटी नीचे। चूत चमक रही, गुलाबी, धीमे बाल। जीभ चली - वो झुकी, “आह्ह… ये क्या कर रहे हो… आह्ह…” भीतर घुसाया तो कमर झुकी - “दीप… और गहरा… आ रहा है…” एकदम थरथराई। नमकीन पानी साफ पी लिया।

आँखें बंद किए अंकिता सांस ले रही थी, तेज। मैं नंगा खड़ा था। उसने लंड देखा, फिर बोली - "इतना बड़ा… डर लग रहा है।" मैंने धीरे से मुँह के पास ले जाया। पहले वो मना करने लगी, पर मैंने सिर पकड़ लिया - और भीतर घुसा दिया। उसने चूसना शुरू किया - ग्ग्ग्ग… गी-गी… गले तक। मैंने तेजी से आगे-पीछे किया। जब झड़ने लगा, तो सिर थामकर भीतर छोड़ दिया - उसने सब निगल लिया।

5 मिनट आराम। फिर किस। वो लंड पकड़कर चूत पर रगड़ने लगी – “दीप, अब डालो ना... फाड़ दो मेरी चूत... रोज उंगली करती हूँ तुम्हें सोचकर।”

तेल डाला। किस करते हुए तैयार किया। धीरे-धीरे अंदर गया – तंग। एक तेज धक्का – पूरा अंदर। चूत फट गई। खून बहा। वो चिल्लाई – “आह्ह मर गई... फाड़ दिया...” आँखों से आँसू बहे। मैं थम गया, गले लगाया, छाती चूसी। दर्द कम हुआ तो बोली – “अब चढ़ना...” मैंने तेजी शुरू की। वो पिछवाड़ा ऊपर उठाने लगी – “आह्ह... और मजबूत... जमकर चोदो... गांड बहला दो...” चप-चप की आवाज आई।

मिशनरी से शुरू, फिर घोड़ी बनाकर गांड मारी। वो बोली – “गांड में भी डालो...” मैंने उंगली से खोला, फिर लंड। वो चीखी लेकिन – “मत रोकना...” खूब पेला। फिर सवारी – वो ऊपर, लंड पर कूदती। बूब्स उछलते। मैं चूसता। घंटा भर चुदाई। वो तीन बार झड़ी। मैं बोला – “कहाँ डालूँ?” वो – “चूत में... तुम्हारा गर्म माल लेना चाहती हूँ।” मैंने तेज धक्के मारे, चूत में झड़ा।

खून से तरबतर लंड निकाला। अंकिता के होंठों ने उसे चूसकर साफ किया। नहाने के बाद वो ठिठक रही थी, पैरों में जवाब नहीं था। गोद में उठाकर पलंग पर डाल दियa। एक-दूसरे से चिपके रहे, त्वचा पर त्वचा। फिर शुरू हुआ अगला दौर।

हर बार मौका पड़े, तो जमकर सेक्स होता।

अगर कहानी अच्छी लगी हो, तो जवाब में लिख देना। पहली बार के पल कैसे लगे, यही बता देना। मेरी गर्लफ्रेंड का अनुभव सच में भाड़ा हुआ था। जो हुआ, वही लिख दिया, ज्यादा कुछ नहीं। तुम्हारा रिएक्शन पढ़ना अच्छा लगेगा।



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