लड़कियों के साथ जूनियर होकर मस्ती करना कैसा लगता है
पढ़ो कहानी में वो लड़की जो अचानक ऑफिस में आई। एक तो पहले से थी, उसके साथ घूमने भी जाता था मैं। अब हम तीनों, गुड्डे-गुड़िया जैसे लगते हैं शायद।
तीस-पांच साल के हो चुके हैं मैं। काम करता हूँ एक ऐसी कंपनी में, जिसके ऑफिस कई देशों में हैं।.
इस कहानी में एक ऑफिस की लड़की के साथ हुआ है। मेरे साथ दो युवा लड़कियाँ काम करती हैं। सबाह उम्र में 29 की है, कई साल से साथ है। मिश्का महज 22 की है, अभी-अभी आई है।.
थोड़ी छोटी कद की वजह से, उनकी उम्र से बच्ची-सी लगती हैं देखने में।.
एक नाजुक चेहरा है सबाह के पास। उसका फ्रेम पतला, ढांचा साफ़। छोटे-छोटे स्तन, गहरी लेकिन मखमली रंगत। मुस्कान खुली, आंखें बातें करती हैं। इन सब के बीच वह धीमे से खिंचाव महसूस कराती है।.
सुबह के प्रकाश में सबाह का चेहरा नमी लिए हवा की तरह ताज़गी देता है। उसकी मुस्कान में वो खिंचाव है जो आकर्षण को गहरा कर देता है।.
गोरी रंगत के साथ मिश्का का चेहरा खिंचा हुआ। उसके गाल मखमली, फूले हुए, और झेंपने पर लाल।.
उसकी आँखें ऐसी, मानो किसी को देखते ही रह जाए। छाती का हिस्सा थोड़ा उभरा हुआ, लेकिन बेहद सहज। होंठ? वो तो इतने नम हैं कि धूप में भी चमचमाते लगते हैं।.
जब मिश्का सामने होती है, सालिम के मन में आता है कि वह उसे बस गले लगा ले।.
शुरू में मिश्का झिझकती थी। सबाह की बातचीत सीधी-साफ है।.
शुरुआत से ही सबाह के साथ मेरा सफर चल रहा है। पल-पल एक अजीब तेवर छाया रहा। इन सभी पड़ावों में लम्बे समय तक जोशदार उठापटक चली।.
कभी-कभी मौके ऐसे आते हैं जब सबकुछ अचानक बदल जाता है। उस वक्त हम लोगों को यात्रा पर जाने की जरूरत पड़ी। दो और एक के साथ चलना पड़ा, इस बार।.
सुबह के समय, वो बात आई कि पहले हमने कितनी छुपी-छुपी की थी। फिर बात मिशका के पास रहने के ढंग पर टिक गई।.
मिश्का को भी इसमें जोड़ने का विचार सबाह ने पेश किया।.
खुशी से दिल भरा पड़ा था मेरा, फिर बोला उससे कि वही खयाल मेरे ज़हन में चल रहा था।.
मन मचल उठा है, दोनों प्यारी गुड़ियों के साथ त्रिकोणीय संबंधों में खोने का।.
फिर बातचीत के बाद, हमने मिश्का को कुछ न बताने पर सहमति जताई। होटल पहुँचने के बाद ही कुछ करने का इरादा था।.
शाम ढलते ही होटल पहुँचे, तब दो कमरों का सूट चुना। उसके बीच एक दरवाजा जुड़ा हुआ था।.
एक कमरा अनु-सबाह के नाम, मैं दूसरे में जा पड़ा।.
शाम के वक्त हमने पार्टी का इंतज़ाम अपने कमरे में पीने की चीज़ों के साथ किया।.
शाम के समय सबाह के ऊपर सिर्फ एक बेलफ़ाड़ा टॉप था। उसने छोटी पतलून भी पहनी हुई थी।.
उसके ऊपर मिश्का का स्लीवलेस टॉप था। नीचे के हिस्से में भी वही ब्रांड था।.
शॉर्ट्स पहने हुए मैं वहाँ खड़ा था।.
बैठते ही मैंने सोफे के किनारे जगह बना ली। उसके बाद, एक इशारे से उन्हें बिस्तर पर बुलाया।.
उसकी कुर्सी मेरे पास समा गई थी।.
तीनों ने पीना शुरू किया। बातें चल रही थीं, मस्ती भी छाई हुई थी।.
पीने के बाद, मैंने सबाह का हाथ उठाए रखा।.
उसने हैरानी में भरी नज़र से मिश्का को ताकते हुए।.
फिर भी, उसकी नज़र पड़ी कि सबाह यहाँ बिल्कुल घुल-मिल गयी है।.
गर्माहट फैले, इसके लिए हमने मिश्का को अश्लील कहानियाँ सुनाई।.
थोड़ी देर के बाद सबाह ने मिश्का के हाथ को पकड़ लिया। फिर धीरे-धीरे उसे सहलाने लगी।.
शर्म से मिश्का का सिर झुक गया। कोई बहाना ढूंढकर वह दूसरे कमरे में चली गई।.
उस दौर में हम काम पर आए, नई राह की ओर।.
फौरन उठाकर सबाह को बाँहों में ले आया। गोद में बैठाते हुए चेहरे पर निशान छोड़ दिए, फिर होंठों पर भी।.
उसकी सांसें तेज हो गईं।.
एक मिनट तक जोश में डूबे हुए चुंबन के बाद, उसके ऊपरी कपड़े धीरे से खींचकर नीचे उतार दिए। फिर उसके छोटे-छोटे गोल स्तन ब्रा से बाहर आए, मैंने निप्पल पर मुँह लगाया और चूसना शुरू कर दिया।.
पल भर में, मिश्का के पैरों की धड़कन सुनाई देने लगी।.
अचानक वह कमरे में घुसी। सबाह मेरी गोद में थी, ऊपर से लगभग खाली। मेरी हथेलियाँ उसके सीने पर टिकी थीं। एक छोटा सा गोल डौंडा मेरे मुँह में था।.
अचानक मिश्का की नजर हम पर पड़ी, उसके चेहरे पर हैरानी साफ झलक रही थी।.
लालिमा उसके चेहरे पर फैल गई, झिझक के मारे।.
उठकर सबाह बिस्तर की ओर बढ़ गई, खुद पर कंबल डाल लिया।.
कुछ नहीं पहना था ऊपर।.
शर्म से मिश्का का चेहरा लाल हो रहा था।.
फिर वो लौटी, धीमे कदमों से बिस्तर के पास।.
एक बार हमने उसके साथ पेय का आदान-प्रदान किया।.
उसने कहा, "यहाँ आओ," मैं बिस्तर के पास गया।.
उसके कंबल को मैंने खुद पर डाल लिया।.
तभी सर्दी ने सबको एक जगह खींच लिया।.
उस वक्त मैंने सबाह को कंबल में घेर लिया, धीरे-धीरे उसके पास बढ़ते हुए। मिश्का की नजर भी वहीं टिक गई, जहाँ मैं अपने हाथ चला रहा था।.
उसी पल में, बिना कुछ सोचे, मैंने सुबह के उस पल में सबाह के गाल पर एक और चुंबन दे दिया।.
सबाह बोली, सर, बस इतना कर दें - मिश्का को भी एक पल के लिए अपने पास खींच लें। घबराहट उसकी आँखों में तैर रही थी। मैंने धीमे से झुककर उसके गाल पर होठ टिका दिए - गीले, ठहरे, बिना किसी आवाज़ के।.
होंठ स्पर्श करते ही रंग उसके मुख पर और गहरा हो गया।.
तब मैं बोला - अच्छा, मुझे तुम दोनों के बीच जगह लेने दो।.
बीच में कहीं मैं खड़ा था।.
थोड़ी देर बाद पीने की चीजें ज्यादा हुईं, मिश्का का व्यवहार नरम पड़ गया।.
इसके बाद मैंने मिश्का के कान के पास जाकर कहा - तुम भी मेरी गोदी में आना चाहोगी?
मुस्कान छलक पड़ी सबाह के चेहरे पर। वो मिश्का की तरफ मुड़ी, आवाज़ हल्की थी - यार, इतना घबराओ मत… अपने सर पर बैठ जाओ न।.
मिश्का के होंठ हल्के से मुड़े, झेंपते हुए। मैंने पलक झपकते ही उसे करीब खींचा। वो मेरी बाँहों में आई, फिर गोद में। मैंने धीरे-धीरे उसके चेहरे को छुआ, नजरें बचाते हुए।.
उसने नज़र डाली तो सबा का गुस्सा साफ झलक रहा था। उसके हाथ मिश्का के सीने पर घूम रहे थे, जैसे कोई आग बुझाने की कोशिश कर रहा हो।.
मेरे मुँह ने मिश्का के नरम होंठों को समेट लिया, फिर मैंने धीरे-धीरे उन पर चाव दिखाया।.
मिश्का के होंठ वास्तव में इतने मीठे लगे, मानो तरबूज का पहला टुकड़ा। थोड़ी देर में, चेहरे पर एक हल्की लालिमा फैल गई, ऐसे जैसे धूप में खिला फूल।.
उसकी नज़र मुझ पर थी, सबाह को देखते ही उसके चेहरे पर बदलाव आया।.
उसके पास जाकर वह मिश्का का टॉप भी निकालने लगी।.
सुबह मैंने सबाह से कहा, तुम दोनों को आपस में नंगा करते हुए मेरे सामने खड़ा देखना चाहूंगा।.
हाथ पकड़कर सबाह ने मिश्का को पलंग से उतारा, दोनों मेरे सामने जगह बना ली। मिश्का के चेहरे पर मुस्कान आई जैसे ही सबाह ने धीरे से उसका टॉप उतारा, फिर ब्रा का स्ट्रैप ढीला किया।.
मिश्का ने आँखें मूँद लीं। सबाह की ब्रा उतर गई, चेहरे पर झुकाव था।.
उसके बाद मैंने उन्हें खुद की तरफ मोड़ लिया।.
उस वक्त मैंने ध्यान दिया, सबाह के स्तन बहुत नरम थे। घुले हुए गोल आकार के, जैसे क्रिकेट बॉल।.
मिश्का के स्तन बड़े थे, गोरे रंग के। उसके निप्पल पहली बार छुए जाने के लिए बचे हुए थे।.
एक की त्वचा हल्की थी, दूसरी की गहरी - फिर भी खूबसूरती में कोई कमी नहीं।.
खड़े होकर बिस्तर पर घुटने टेकते हुए मैंने सबाह के दाएं स्तन को छुआ। उधर, मिश्का के बाएं पर हाथ आगे बढ़ाया। फिर धीमे-धीमे दोनों को सहलाना लगा।.
अचानक सबाह के मुँह से सीटी जैसी आवाज़ निकल पड़ी।.
फिर भी मिश्का को झिझक सा हो रही थी।.
उसके माथे पर झुकी आँखों के बीच तमतमाहट फैल गई।.
इसके बाद मैंने धीमे-धीमे उनके निप्पल पर जीभ फेरना शुरू कर दिया। हर स्तन पर काफी देर तक मुँह में लिए रखा।.
फिर एकदम से मिश्का के तेज आवाज़ में कराहने की ध्वनि सुनाई पड़ी।.
थोड़ी देर में वह गर्म होने लगी। मेरे चूसने पर उसके स्तन धीमे-धीमे गर्म हुए। चाटने के बाद भी वे अब लाल हो रहे थे। फिर मैंने उन्हें नरमी से दबाया।.
उसके हाथ से मेरी टी-शर्ट धीरे से फिसल गई।.
गोद में मिश्का को खींचते ही मैंने उसके होंठों पर, फिर चेहरे पर धीमे-धीमे चुंबन छोड़ दिए।.
इधर मेरा एक हाथ सबाह के नन्हें स्तनों पर था।.
आँखें बंद किए मिश्का मेरी गोद में लेटी थी। मेरे चुम्मों को उसकी गर्दन पर महसूस करते हुए वह सिहर जाती। हाथों पर भी वो छुअन के साथ-साथ धीरे से मुस्कुराई। कंधे पर लगा चुंबन उसे झटके दे गया। छाती पर ठहराव ने उसकी सांस रोक दी। फिर वो और ढीली पड़ गई।.
उसकी बांहें ऊपर हुईं, मैंने सुबह से यही चाहा था। कांख पर जीभ फिर गई, धीरे-धीरे।.
मिश्का के हाथ ऊपर की ओर खिंच गए।.
उसकी बांहों पर फैले सफ़ेद रंग के ऊपर काले-काले घने बाल नज़र आए। मिश्का के गालों पर वो मुलायम छाया ऐसे थी, मानो कुछ खास हो।.
काफी देर तक मैंने उसकी बगल पर होंठ टिका रखे।.
मेरी बाँहों में सबाह को उठा लिया, फिर। वो और मेरी छोटी-सी गुड़िया, दोनों मेरी त्वचा पर सिमट आईं।.
उसके बदन पर मेरे हाथ और होंठ खुद-ब-खुद सैर कर रहे थे। पलटते हुए, छूते हुए, सहलाते हुए।.
हैरत हुई मेरी। दोनों के शरीर एक जैसे नरम लगे, ऐसा पता चला।.
उधर मैं उनके पतले शरीर पर हाथ फेर रहा था, तभी मेरी छोटी मनु ने भी मिश्का के हिस्सों को अपनी मुट्ठियों से छू लिया।
उसके होंठों पर, फिर गाल पर, वो एक बार नहीं, बल्कि कई बार चुम्मा देती जा रही थी।.
तब से वो नन्ही मिश्का हमारी खास गुड़िया बनकर रह गई।.
थोड़ी देर चाटने-फूटने के बाद, जब मैंने उनकी त्वचा पर हाथ घुमा लिया, तभी मैंने आवाज़ उठाकर कह दिया - अब खड़े हो जाओ।.
गर्माहट ने उनकी हड्डियों तक में कर लिया था।.
नीचे की ओर सरकता हुआ कपड़ा, मैंने मिश्का के नीचले भाग से उतारना शुरू कर दिया।.
फिर उसने झेंपकर कहा - सुबह होते ही सर पर बाल निकलवा देना!
उसकी लज्जा में छुपे भाव को पहचानते हुए, मैंने सबाह के तख़्त पर पड़े कपड़े हटा दिए।.
उसकी पैंटी गायब थी, सबा की मोटी जांघें फैली हुई थीं। घने बालों से ढँकी चूत सीधे नजर आ रही थी। वो खड़ी थी, कुछ नहीं छिपा। हवा धीमे-धीमे उसके शरीर के बीच में घूम रही थी।.
मिश्का ने सबाह की जांघों के बीच झांकते हुए मुस्कुरा लिया। पल भर के लिए उसकी नज़र वहीं ठहर गई।.
वो यह देखकर थोड़ा स्तब्ध रह गया कि मैं सबाह के जघन के बालों पर होंठ फिरा रहा हूँ।.
मिश्का ने जोश में आकर कहा - सर, मुझे भी ऐसे ही खाली कर दो।.
उसके कपड़े धीरे से नीचे खिसक गए, मैंने बिना रुके आगे बढ़ दिया।.
अरे वाह… सामने तो खड़ी थीं एक नाजुक, गोरी लड़की। उसकी टांगों के बीच मिश्का की चमकती चूत पर घुंघराले काले बाल छाए हुए थे।.
जब हम दोनों की नजरें उसके पैरों के बीच एक झलक पकड़ने में लगी थीं, तभी मिश्का हल्के से हंसी और अपने हाथों से वहाँ को ढक लिया।.
मैंने कहा था उसे - शर्माने की कोई बात नहीं है, प्रिय।.
उसके आते ही हम दोनों की बाहें खुल गईं।.
उसका सिर हमारे बीच में आ गया, फिर एक-एक करके हम दोनों ने हर जगह प्यार से छुआ।.
उस बीच में, सबाह के नरम और रेशमी होंठों पर मेरी जीभ फिसल गई। थोड़ी देर बाद, वो दोनों बिस्तर पर कपड़े उतारकर लेट गए।.
उसके बाद वो दोनों बिस्तर पर जा लेटीं। सबाह ने मिश्का को झट से अपने हाथों में खींच लिया, जो घबराई-सी रह गई।.
मिश्का का मुँह धीरे से उसके स्तनों के बीच आ गया।.
बिस्तर पर लेटते हुए मैंने उन्हें बताया। दोनों को सिर के ऊपर हाथ उठाकर, पैर फैलाकर सीधा हो जाना था।.
उलटे पैर की तरह, सबाह ने मेरे कहे पर चलना स्वीकार किया। फिर मिश्का को लेटने में उसके हाथ आए।.
बस इतना हुआ कि मेरे पास कोई कपड़ा नहीं रह गया।.
वो दोनों मेरी तरफ़ घूर रही थीं, जब मैं कपड़े उतार चुका था।.
एक-एक करके कपड़े उतरते हुए, मेरा लंड साफ दिखने लगा। मिश्का की नजर जैसे ही उस पर पड़ी, वह ठिठक गई - इतना मोटा, इतना ऊपर उठा हुआ।.
सुबह के समय कोई हैरानी नहीं हुई, क्योंकि पहले भी वो अपनी छोटी चूत में बार-बार लंड डाल चुका था।.
उसकी जांघें मेरे हाथों में आईं, फिर धीरे से अलग हुईं। इतने में गुप्त हिस्से का आकार सामने आया।.
उसकी चूत का फूलना नजर आ रहा था। सुबह से छेद जरा अधिक खिंचा हुआ लग रहा था।.
उसकी जांघों के बीच में, घने काले और लहरदार बालों का ढेर दिख रहा था। सफेद त्वचा के ऊपर ये नजारा कुछ अलग ही लग रहा था।.
उसकी जांघों के बीच, मेरी उंगलियां हल्के से फिसलीं। वहाँ के बाल मुझे तुरंत महसूस हुए। एक पल रुककर, मैंने आगे बढ़कर उन्हें होठों से छुआ दिया।.
उधर, मैंने सबाह के हाथ को मिश्का की जांघ पर ले जाकर रख दिया।.
उसके हाथ मिश्का की जांघों पर सरकने लगे।.
एक हाथ से उसकी नम योनि के आसपास के हिस्से पर ध्यान जा रहा था।.
उंगली घुमाकर दोनों की चूत से हटकर मैंने उनके पैर के अंगूठे से लेकर धीरे-धीरे सारे शरीर पर जीभ फेरना शुरू कियa।.
हर इंच को धीमे से निगलता हुआ, मैंने उनकी टांगों पर मुँह फेरा। आवाज छटपटाहट भरी थी। दोनों के होठ खुल गए, अंदर तक कंपन दौड़ गया।.
हाथ को पकड़कर मैंने उसे सबाह की जगह पर ले जाकर रख दिया, मिश्का की उंगलियाँ धीरे से वहाँ बच गई।.
एक की उँगलियाँ दूसरी के शरीर में समा रही थीं। धीरे-धीरे, वे आपस में बढ़ रही थीं।.
एक बार फिर मैंने उनकी पीठ, कंधों और गर्दन पर अपनी जीभ घुमाना शुरू कर दिया।.
थोड़ी देर में वो दोनों पलकें नीचे किए लेट गई थी। मेरे होठों के छूते ही उसका शरीर धीमे से काँप उठा।.
सिर्फ़ एक कराहट ही उनके होंठों से निकल पा रही थी।.
उनकी निगाहें मुझ पर टिकी थीं। मेरे होंठों के सहारे एक धीमा स्पर्श फैल गया। जीभ के छोटे-छोटे घूमावों ने उसकी त्वचा को छू लिया। रेशम जैसी मुलायमता ने आसपास की हवा बदल दी। ख़ामोशी में एक सांस फंसी रह गई।.
बिल्कुल नंगे होने पर भी दोनों का चेहरा इतना साफ़ लग रहा था।.
एक के बाद एक मैंने उनके नरम होठों पर मुँह लगा दिया।.
जब मैं किसी के होंठ छू लेता, तो वो साथ ही जवाब देती - अचानक जीभ मेरे मुँह में। मैं फिर उसकी जीभ पर ध्यान केंद्रित कर लेता।.
थोड़ी देर में, उन दोनों की योनियों से स्राव धीरे-धीरे बाहर आने लगा।.
एक-एक करके उनके हाथ मेरी पकड़ में आए, फिर मैंने धीरे से उन्हें अपने लंड पर टिका दियa। मिश्का की आंखों पर झुकी पलकें अब तक नहीं खुली थीं।.
उसके हाथ ने जब मेरे लिंग पर स्पर्श किया, तभी उसके रोमांचित शरीर में एक झटका-सा दौड़ गया।.
जांघें सिकुड़ीं, सबाह की उंगलियाँ चूत में धंसी हुई थीं। तभी एक झटके के साथ आनंद की पहली लहर फैल गई।.
उसके आनंद के पल में मैंने उसके स्तन को मुँह में ले लिया। फिर मैंने जोर से चूसा, खींचा, ऐसे महसूस हुआ जैसे सब कुछ धीमा हो गया।.
खुशी का अहसास उसके भीतर और गहरा हो गया।.
शांति के बीच सांसें भारी-भारी हो गईं।.
फिर मैंने दूध छोड़ दिया, छोटे स्तन को मुँह में ले लिया। जब तक वह ऊँघने नहीं लगी, तब तक चूसता रहा। धीरे-धीरे जोर बढ़ाया, स्तन को हल्के से खींचा। उसके होंठ खुले रह गए, आवाज़ थरथराई।.
उसने जांघें दबाईं, फिर चूत को घिसा – और आखिरकार स्खलन महसूस किया।.
अभी मिश्का के हाथों की उँगलियाँ नम जगह पर अंदर तक फैली हुई थीं।.
सबाह की चूत से सैलाब-सा उमड़ पड़ा।.
मैंने उसके एक स्तन को काफी देर तक चूसा, धीरे-धीरे खींचते हुए, जब तक उसकी योनि से रस आना पूरी तरह नहीं रुक गया।.
शांति के बाद मैंने स्वप्नसुंदरियों पर ही ध्यान डाला।.
शुरुआत में उनके ऊपरी हिस्से से जुड़ा, मैंने चाटा उठी बाहों को, कांख में बाल थे।.
मैंने पहले यह सोचा कि सबाह के साथ संभोग करूँ। इस तरह मिश्का की नजर मेरे लिंग को उसके भीतर जाते हुए देखेगी। ऐसा करने से वह स्वाभाविक हो जाएगी।.
आँखें मिलते ही उसे सब समझ आ गया।.
उसकी पीठ तुरंत चादर पर आ गई। जांघें खुली, हवा में ऊपर की ओर।.
मेरी जान धीरे से फिसलकर उसकी जांघों के बीच पहुँच गई। मैंने अपना हिस्सा उसकी नाजुक त्वचा के किनारे टिका दिया।.
उसकी आँखों में झांकते हुए मैंने मिश्का से कहा कि वो चुदाई देखे।.
उसने खड़े होकर देखा, सुबह की छाया में सबाह के पैरों के बीच क्या चल रहा।.
थोड़ी देर तक सबाह की चूत के आगे हिलाकर मैंने धीरे से अपना लंड अंदर डाल दिया।.
आंखें खुली हुई थीं मिश्का की, सबाह की चूत पर नज़र टिकी। कभी-कभी उसके चेहरे पर भी दृष्टि जाती।.
आवाज़ सिसकते हुए निकल रही थी, सबाह के गले से।.
आंखें तो बंद थीं, पर मुँह हल्का सा खुला पड़ा था। होंठों के बीच जगह थी, एक-दूसरे से दूर।.
मैंने तभी मिश्का की ओर देखकर कह दिया - उसके सुबह वाले होंठों पर एक चुंबन रख दो।.
उसके मुँह से पहला शब्द भी न निकला था कि मिश्का ने गाल पर होंठ रख दिए। फिर बिना ठहराव के होंठों पर जामुक्त कियa। गर्दन तक पहुँचते-पहुँचते सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं।.
एक बार जब मैंने महसूस किया कि मेरी छोटी गुड़िया पूरी तरह तैयार है, तभी मैंने अपना पूरा लंड उसकी चूत में धँसा दिया। फिर मैंने अपनी प्यारी सी बच्ची को नरमी से शुरू करते हुए जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया।.
उसके बूब्स पर मेरा हाथ जाने के बाद मैंने मिश्का से कुछ लम्हें और बढ़ाने को कहा।.
दूध की बात आई, तो मिश्का ने पहला संभाल लिया। दूसरा मेरे हाथ आया, मैंने उसे चुपचाप संभाल लिया।.
सबाह अब ऊपर-नीचे हिल रही थी। वह चिल्ला रही थी, पेट आगे करके मेरे लंड को भीतर खींच रही थी।.
वह जितना तेज़ हो सकता था, मैं उसी के साथ आगे बढ़ रहा था।.
उसे एहसास हुआ, कि मेरा लंड जो पहले से उसके भीतर था, उसे फिर से उत्तेजित कर रहा था।.
मेरे होंठों में एक छोटा स्तन था, वहीं मिश्का के मुँह में दूसरा।.
थोड़ी देर बाद सबाह के मुंह से तेज आवाज़ निकली। मैं और मिश्का को वो अपने ऊपर इतने ज़ोर से खींचने लगी कि शरीर चिपक गया। कुछ समय के लिए उसकी धड़कनें तेज हो गईं। फिर भी मैं चोदता रहा।.
थोड़ी देर बाद, जब मैंने महसूस किया कि वह शांत हो चुका है, तो मैंने धीरे से उसके पास बैठकर सहारा दिया।.
इसके बाद मैंने अपना तना हुआ लंड उसकी गीली चूची से धीरे से निकाला। सबाह को आवाज़ देकर मैंने कहा कि वो मेरे साथ मिलकर मिश्का की नरम बालों वाली चूत में पहली बार घुसाए।.
सुबह के लम्बे पलों के बाद मिश्का के अंदर जोश इतना भर गया था कि वह सबाह के होठों से दूध निकलने नहीं दे रही थी।.
सबाह ने मुश्किल से अपना चूचुक मिश्का के मुँह से खींचकर बाहर निकाला, फिर उसने मिश्का को पीठ के बल लेट जाने को कहा।.
वह मिश्का के पैरों को थोड़ा अलग करने में सहायता करने लगा। फिर उसके चेहरे पर जीभ घुमाने लगा, छाती पर हल्के से दबाव डाला। बांहों के सहारे आगे बढ़ा, गर्दन पर साँस भरी।.
मैं मिश्का की खुली टांगों के बीच आ गया, उसकी चूत पर से बालों को हटा कर ढके छोटे से छेद को देखा और उस पर अपने लंड के सुपारे को छुलाया.
मिश्का की चूत बारिश में भीगे सड़क की तरह लबलब हो रही थी।.
मिश्का के सिर पर हाथ फेरते हुए सबाह ने धीरे से झांका। उसकी आवाज़ में कोमलता थी, बोला - चिंता मत कर, सब सही हो जाएगा। बस इतना करो, पैर थोड़े फैलाकर रखना और विश्राम में रहना।.
हर बार जब वो मुस्कुराती, मेरा दिल धड़कने लगता। उसकी आँखों में छुपी कोमलता ने मुझे अपनी ओर खींचा। एक दिन धीरे-धीरे सब कुछ बदल गया। अब मैं हर पल उसके साथ बिताना चाहता।.
होंठ छूते ही मिश्का के, साँस थम सी गई। फिर आहिस्ता-आहिस्ता उसके भीतर झटका पैदा होने लगा।.
सुबह-सुबह मैंने सबाह से कहा कि वो उसके स्तन पर ज़ोर से मुँह लगाए। ऐसा होते ही मिश्का की आवाज़ फिर थरथराने लगी।.
कभी-कभी इंतजार करना पड़ता है। वह लम्हा आएगा जब वो बिल्कुल गर्म हो जाएगी। मौका ढूंढ रहा था मैं, ठीक समय का।.
एक हाथ से सबाह ने उसके स्तन को घेर लिया। मुट्ठी भरते हुए दूसरा मुंह में आ गया।.
सांस भारी हुई मिश्का की। उसकी नज़र पलट कर सबाह पर आ गई।.
उसकी नज़र सबाह पर जाते ही, मेरा मोटा लंड उसकी चूत के अंदर जा घुसा।.
आह आह की आवाज़ निकल पड़ी मिश्का के मुँह से, उसकी पलकें गिर गई थीं।.
थोड़ी सी पीड़ा उसके मुख पर झलक रही थी।.
तभी वह चीखने वाली थी। मैंने झट से उसके पतले होंठों पर अपना मुँह रख दिया।
थोड़ी देर के लिए मैंने अपना लंड उसकी चूत में ऐसे ठहरा दिया। जब तक वह खुद को समायोजित कर पाए, तब तक बस वहीं रुका रहा।.
आगे बढ़ने लगा, पहले सावधानी से। फिर एकदम तेज हो गया।.
उसके कराहने के स्वर के ऊपर उठने लगे, मेरे प्रयास और तीव्र हो गए।.
थोड़ी ही देर में मिश्का का सारा तनाव गायब हो गया। उसके दूसरे आनंद के पल में उसका शरीर थरथर कांपने लगा।.
वो घटना होते ही मैं भी उसके भीतर समा गया। सुबह की मार्मिक धूप में सबाह अब भी उसके स्तनों व निप्पल पर जोरदार चूसने का दबाव डाल रही थी।.
थोड़ी देर के लिए मिश्का सांस लेने में तकलीफ महसूस करने लगी।.
थोड़ी देर बाद, मैं धीरे से उनके पास लेट गया।.
गर्म रस उसकी चूत से काफी देर तक बहता रहा।.
हवा में खुशबू फैल गई, जैसे किसी ने मेरे दिल को छेड़ दिया हो। मैंने धीमे से उन दोनों को अपनी बाहों में ले लिया। होंठ एक-दूसरे से टकराए, बिना किसी आवाज़ के। पलक झपकते, मैंने हर पल को महसूस किया।.
थोड़ी देर बाद, सबके पैर टिके।.
फिर मैंने मिश्का को बिना कपड़ों के हाथों में उठाया, सबाह के पास जाकर नहाने के कमरे में चला गया।.
एक-दूसरे पर साबुन लगाते हुए हम सभी नहाए।.
उसके नहाने के बाद, खूबसूरती उन पर चमक रही थी।.
बारिश में खड़ी वो लड़की सचमुच जन्नत से उतरी लग रही थी।.
उस रात हमने कपड़े छोड़ने का फैसला लिया। बगैर कुछ पहने, तीनों ने खाने में वक्त बिताया।.
तभी से मिश्का हमारे साथ जुड़ गई। तीनों में अब हर पल का लुत्फ उठाने का चलन बन गया। इस कहानी को पढ़कर आपके मन में क्या ख्याल आए, वो मेरी ऑफिस की स्टाफ गर्ल की बात थी।.
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0