एक पत्नी को दूसरे से बदलने के बाद सेक्स का आनंद लिया जा रहा है।

Desisexkahaniya

Jan 5, 2026 - 12:33
Jan 9, 2026 - 16:43
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एक पत्नी को दूसरे से बदलने के बाद सेक्स का आनंद लिया जा रहा है।

एक दिन ख़्याल आया कि पत्नी बदलकर किसी और की चूत से मज़ा लिया जाए। कभी ट्रेन में एक आदमी से बातचीत हुई। धीरे-धीरे हम दोनों ने ऐसा इंतज़ाम किया कि हमारी पत्नियाँ आपस में बदल जाएँ।?

मेरा नाम राजा है, सब मुझे ऐसे ही पुकारते हैं।.

उत्तर मध्य भारत के एक छोटे से शहर में मेरा जन्म हुआ था।.

प्रिया, वो हैं जिनके साथ मैंने शादी की है।.

थोड़ी सी कमजोर लगती है, पर इतनी नहीं।!

कभी-कभी लगता है कि प्रकृति ने सब कुछ उसके लिए रोशन किया हो।.

अब सुनिए, मैं बिना वक्त गवाए कहानी शुरू करता हूँ।.

काफी समय से मैं सेक्स कहानियां पढ़ रहा हूं। उनमें एक पत्नी बदलने वाली कहानी खास तरह से भाई।.

फिर मन में आया कि क्यों न अपनी पत्नी को छोड़कर किसी और के साथ संबंध बनाऊं।.

मैं अब इस बात को समझने लगा, फिर धीरे-धीरे सही जोड़ी ढूँढ़ने में जुट गया। ऐसा नहीं था कि किसी से सीधे पूछ भी सकता - भई, तुम मेरे साथ अपनी पत्नी को क्यों छोड़ दो?

एक बार किसी से पूछो, भाई, मेरी पत्नी के साथ संबंध बना लो… तो शायद ही कोई ऐसा आदमी होगा जो मना कर दे। वैसे, अगर कोई तुम्हारी बीवी के बारे में ऐसा कहे, तो झगड़ा होने की संभावना होती है। इसी उलझन में घंटे बीत गए, मैं किसी को ढूंढ नहीं पाया। फिर एक दिन, मैं और मेरी धर्मपत्नी इंदौर जा रहे थे, तभी रास्ते में पुराना दोस्त आमने-सामने हो गया।.

उसके साथ कभी नहीं मिला था… फिर भी, चलते-चलते बातें आगे बढ़ गईं।.

एक लड़का था, नाम रोहण। घर इंदौर में ही था उसका।.

पति के साथ महिला खड़ी थी, वो उसकी जीवनसंगिनी थी।.

राखी उसके नाम के तौर पर था।.

रोहण ने कहा - चलो, एक स्लीपर में हम दोनों रहें। वो दोनों महिलाएँ अलग से कमरे में ठहर लें।.

ठीक है, मैंने कह दिया - चलो।.

उस रात का सफर शुरू हुआ, जब हम एक साथ स्लीपर में बैठे।.

दोनों स्लीपर तक पहुंचे, फिर कुछ देर बातचीत हुई। आखिरकार मेरा यार नींद में डूब गया।.

अचानक लगा, सेक्स कहानियाँ पढ़ने का मन हो।.

एक दिन मोबाइल खोलते ही मैं पढ़ने लगा था। कहानी शुरू हुई बिना किसी चेतावनी के। धीरे-धीरे पन्ने बदलते गये। आखिरी पंक्ति तक पहुँचते-पहुँचते सांस अटक गई।

एक सेक्स कहानी पढ़ते-पढ़ते तभी मन में खयाल आया - रोहण हिला।.

जब मैं उसकी ओर देखा, तभी वह बोला - पढ़ रहे हो क्या?

तभी मैं वेबसाइट बंद करने लगा, उधर रोहण बोल पड़ा - थोड़ा तो दिखा दे भई, मुझे भी पढ़ना है!

पढ़ते-पढ़ते मैं एक सेक्स कहानी में खो गया। धीरे-धीरे वो भी मेरे पास बैठकर पढ़ने लगा।.

इस वक्त ख़ुशी से कहानी पर ध्यान जा रहा था।

थोड़ी देर किताब में उलझे रहने के बाद पति ने Xxx कहानी पढ़ना शुरू कर दिया।.

फिर उसके मुँह से निकला - अरे भाई, हमें भी तो ऐसा कुछ मिलना चाहिए।!

मैंने कहा, हां भई, मैं तो पहले से तैयार हूं। फिर भी कोई ठप्पे पर आए नहीं।!

धीरे से बोला - शायद मैं राखी को मना लूँ, तब तुम भी अपनी पत्नी को आजमा लेना।!

फिर मैं बोला - अगर ये होता है, तो हँसी छिड़ जाएगी।!

बात आगे बढ़ी, हम दोनों ने उस मुद्दे पर गहराई से बातचीत जारी रखी। अपनी-अपनी पत्‍नियों के बारे में धीरे-धीरे खुलकर बोला गया।.

थोड़ी देर की बातचीत के बाद, आखिरकार नींद ने घेर लिया।.

सुबह का समय हो चला, इंदौ में हमारी मौजूदगी।.

पहुँचते ही हम दोनों ने अपने-अपने फोन नंबर साझा कर लिये।.

तीन सुबह छूट चुके थे, फिर आवाज़ आई मेरे पुराने साथी की।.

बोला था उसने - तुमने वैसे अपनी पत्‍नी से बात की?

अभी मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।.

फिर उसने कहा, मैंने पत्नी से चर्चा की, वो तैयार हो गई। अब तुम भी अपनी पत्नी से बात कर लो। अगर वो भी हाँ कर दे, तो हम कल सुबह आ जाएँगे।.

मैंने ओके कहा.

फिर मैंने पत्नी से चर्चा की, पर जवाब मिला - वह हलके में भी यह काम नहीं समझती।.

जब मैं फरात के साथ सेक्स में था, तभी उसने पूछा - तुम दिनभर क्या बोल रहे थे? इस तरह का हरकत मैं बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करूँगी।!

मैंने धीमे स्वर में कहा, जब मैं तुम्हें छूता हूँ तो अच्छा लगता है… जिंदगी में कभी-कभी बस इतना कर लेना चाहिए। खुलकर महसूस करो, यार। एक बार ऐसे करके देखोगी, फिर खुद ही पता चल जाएगा कि कैसा लगता है।.

उसके बाद मैंने एक ऐसी फिल्म दिखाई, जहाँ पति-पत्नी के रिश्ते में उलझन थी। साथ ही एक कहानी भी सुनाई। धीरे-धीरे उसके दिमाग में एक नया ख्याल घर करने लगा।.

उसने पूछा, अगर मैं किसी दूसरे के साथ संबंध बनाऊं, तो क्या तुम्हें आघात नहीं होगा?

उसने कहा - मुझे कोई परेशानी नहीं होगी, मैं भी उसकी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाऊंगा।!

उसका कहना था - फिर भी एक ही कमरे में होगा। अकेले में किसी और के साथ संबंध बनाने से मुझे घबराहट होती है!

ठीक है, मैंने कहा - चारों लोग एक साथ उसी कमरे में सेक्स करेंगे।!

अब उसने स्वीकार कर लिया।.

तुरंत मन बन गया… पलक झपकते ही दोस्त को कॉल किया। फिर बोला – कल शाम को आ जाओ।!

उस शाम सुबह के साढ़े सात बजे थे, जब मेरे पास दो लोग आए। मैंने दरवाजा खोल दिया। फिर वे भीतर कदम रख चुके थे।.

जैसे ही मैं अंदर कदम रखा, राखी सीधे मेरे पास चली आई।.

ख़ुशी-ख़ुशी बातें हुईं, पलक झपकते सब कुछ आसान हो गया।.

खाना शुरू हुआ, सबके कदम एक-दूसरे के पास आए। बातचीत कहीं धीमी, कहीं ज़ोर से उठी।.

दस बजकर तीस मिनट पर रात के समय मैंने पूछा - अब तक बस बातें ही चलती रहेंगी, या कुछ और भी होगा?

शर्मिंदगी के माहौल में पति-पत्नी दोनों चुप हो गए।.

एक दोस्त बोला - तुम सबसे पहले आगे बढ़ो।!

उसकी पत्नी का हाथ मेरी ओर खिंच आया। गाल पर चुम्मा लग गया।.

अचानक वह मेरी पत्नी के हाथ को पकड़ कर खींचने लगा, फिर उसे चूमने भी लगा।.

हवा में कुछ हलचल सी महसूस होने लगी।.

थोड़ी देर में सबका बुद्धि पर खतरा हो गया। फिर कुछ ही पलों में, हम दोनों आदमी ने उन दोनों महिलाओं के वस्त्र उतार लिए।.

उनमें से एक कपड़े उतार चुकी थी, फिर दूसरी ने भी वही किया।.

थोड़ी देर में हमने भी अपने कपड़े उतार लिए।.

एक बार मैंने गौर किया, मेरे साथी का शरीर काफी मजबूत था।.

थोड़ा मोटा तो था, पर लंबाई में कोई फर्क नहीं।.

एक पल बाद, हम दोनों ने साथ में काम शुरू कर दिया - बीवियों की चूत चाटने लगे।.

उसकी पत्नी के योनि में जब मैंने अपनी जीभ डाली, तो वह पहले से ही तर चुकी थी।.

रोहण तब तक मेरी पत्नी के योनि को जीभ से छेड़ चुका था।.

मैं और वो, हँसते-खेलते घूम रहे थे।.

कौन जाने, दोस्त… हँसी छिड़कती रही।.

उनके होठों से लगातार आहें निकल रही थीं, क्योंकि दोनों पति अपनी पत्नियों की चूत चाट रहे थे।.

तब वो दोनों मिलकर उठे। फिर मैंने राखी से कहा, जो रोहण की पत्नी है, आगे बढ़ो और ये काम करो।.

तुरंत वो मेरा लंड चूसने लगी।.

इधर, रोहण का लंड स्वाति ने चूसना शुरू कर दिया।.

दोनों महिलाएँ आगे बढ़ीं, फिर हमारे लंड चूसने लगीं।.

राखी मेरे लौड़े के टट्टे पर हाथ फेरती रही, उससे मुझे अच्छा लग रहा था। इधर, स्वाति ने भी रोहण के टट्टों को छूना शुरू कर दिया, जब उसने राखी को देखा।.

थोड़ी देर मस्ती के बाद, हम दोनों ने उन्हें डॉगी स्टाइल में ले लिया। पीछे से लंड पेलते हुए चुदाई की शुरुआत हो गई।.

उसकी आवाज़ सुनकर मेरे अंदर बहुत उमड़ रहा था, दूध निकालते हुए मैं काँप गया।.

इसी तरह स्वाति, रोहण को अपनी चूत का स्वाद चखा रही थी।.

उस दिन, स्वाति के सीने पर हथेली घिसटाते हुए रोहण आगे-पीछे हो रहा था।.

कैसे क्या हुआ पता ही नहीं चला, इतनी रात हो गई।.

उसकी पत्नी की जांघ को सहलाते हुए मैंने उसे कंधे पर उठा लिया। फिर आगे बढ़कर अपना लंड उसकी चूची में गहराई तक डाल दिया।.

चीख उसकी पत्नी के मुँह से निकल पड़ी।.

तब तक रोहण ने भी वैसा कर लियa था।.

वो भी मेरी पत्‍नी के पैर उठाकर लंड घिसने लगा, तो वो बोली – आज तुमने मुझे इस काटनेवाले के हवाले कर दिया… आह, रोहण धीरे-धीरे चढ़ाओ आह! मैंने स्वाति की ओर देखकर कहा – कुछ नहीं होगा तुम्हारे साथ, साली… तुम दोनों गांड झटक रही हो, बीच में बकवास कर रही हो… अब राखी, तुम बारी ले लो मेरे लंड पर।!

उसका शरीर मेरे ऊपर आ गया, फिर वो हल्के-हल्के कूदने लगी, मेरे लंबे धमते पर दूध चढ़ाते हुए। इधर स्वाति ने भी रोहण के उभरे टुकड़े पर झूमना शुरू कर दिया।.

उन दोनों के बीच हल्का फुल्का समय शुरू हो गया।.

थकान भरी मेहनत के बाद हम दोनों तिरछे पड़ गए, सांस लेने में धीमा।.

बारह बजे का समय हो चुका था, तभी वापस शुरू हो गई मारपीट।

सुबह होते-होते चारों ने कई बार पूरा मज़ा लिया। फिर वो सभी जल्दी घर की ओर निकल पड़े।.

एक सुबह अचानक फोन बजा।.

एक बार उसने कहा - मेरे पास एक और यार है। वो भी हम दोनों के साथ जुड़कर शारीरिक संबंध बनाना चाहता है।.

ठीक है, हाँ कह दिया मैंने – उसे भी बुला लो। मस्ती होगी सबके साथ, तीनों के जुड़ने पर।.

दूसरे दिन वो सुबह-सुबह पहुंच गए, रोहण आया था। साथ में राखी थी। शफीक भी था। उसकी पत्नी जैनब भी साथ चली आई।.

एक आदमी मेरी नज़र से गुज़रा, बहुत मोटा लग रहा था।.

उसकी पत्नी का शरीर भी खूब गोल-मटोल था। मज़ेदार अंदाज़ में वो काफी आकर्षक दिख रही थी।.

शफीक ने कहा, जैनब को मेरी पत्नी के साथ एक साथ ले लो। मौका मिलेगा, तो वो दोनों - उनकी बीवियों को अकेले में ढूंढूंगा।.

शफीक का दिमाग पति होने के बावजूद मेरी बीवी को छुए बिना नहीं रह पा रहा था।.

उसके मुँह से निकला - मैं पहले तुम्हारी पत्नियों को बहन समझकर धोखा दूँगा।.

कह दिया मैंने - जो काम है, वो तुम कर लेना पर धीमे से।.

तीनों जोड़े अब सेक्स में भाग लेने के लिए तैयार थे।.

हर कोई ने कपड़े धीरे से उतार लिए। फिर हम आपस में लंड तक देखने लगे।

शफीक के पास जो था, वह काफी मोटा हुआ करता।.

लंबा पाइप सा लंड देखकर वो घबरा गई। उसके होठ कांपते हुए बोले - मैं ये नहीं संभाल पाऊंगी।.

उसने कहा - समझ ले बहन... थोड़ा सा तकलीफ होगी। फिर आगे सब कुछ अच्छा लगेगा।.

उसके बहन कहते ही स्वाति ने हामी भर दी।.

एक दिन शफीक ने स्वाति से कहा, जो मेरी पत्नी है, कि भैया का काम चला दे।!

एक दिन वो शुरू कर दिया, धीरे-धीरे उसके लंबे लंड पर। मज़ेदार अहसास होने लगा, जैसे कुछ गर्माहट सी फैल गई हो।.

गले में दबाव था, शफीक के हाथों से झुकी स्वाति की सांस फूल रही थी।.

शुरू में शफीक ने मेरी पत्नी की चूत में उंगली डाली, धीमे से चाटना भी शुरू कर दिया। इस बीच वहाँ पर नमी घटाओ-बढ़ाओ करने लगी।.

उसकी खुरदुरी जीभ धीमे-धीमे पत्नी की चूत के किनारों पर घूमने लगी। पत्नी का मन बहल गया, वह सिसकते हुए झटपट बोली – ओये शफीक, भाई, क्या ढंग से चाट रहा है…आह…ओये और कर, अपनी बहन की चूची को खूब चूस…आह…इतना अच्छा लग रहा है। स्वाति के होठों से ऐसे शब्द निकलते देख मेरा दिमाग गर्म हो उठा।.

शफीक बोला, "अरे साली स्वाति… मैंने तेरे जैसी कई लड़कियों को बहन बनाकर चोदा है। घबरा मत… आज से तेरी चूत मेरे लौड़े की गुलाम बन जाएगी।" इसके बाद उसने मेरी बीवी की दोनों टांगें ऊपर उठाई, अपना लंड उसकी रस भरी चूत पर रखा और सुपारी से धीमे-धीमे चूत की तहों को रगड़ने लगा।.

कमरे में स्वाति की आहट हलचल पैदा कर रही थी। उसकी सांसें धीमी-धीमी लय में बढ़ रही थीं। हवा में एक अजीब सी गुनगुनाहट घुल चुकी थी।.

कुछ समय पश्चात शफीक ने मोटा लंड महिला की चूत में धीरे-धीरे डालना शुरू कर दिया।.

मेरी पत्नी की चूत में शफीक का मोटा लौड़ा घुसा, तभी उसके होठों से चीख निकल पड़ी - ओये मादरचोद, बस कर…अब ये नाली फट जाएगी। शफีक के कान पर इन बातों का कोई असर नहीं हुआ।.

उसका आधा लंड मेरी पत्नी की चुदाई में घुस गया।.

उसकी सांसें अटक सी गई थीं, पत्नी का गला भर आया।.

एकदम अचानक, शफीक ने सारा लंड भीतर धकेल दिया। फिर वो कुछ पल के लिए ठहर गया।.

उसकी सेहत गिरने लगी थी मेरी पत्नी की।.

मैंने जब शफ़ीक के कंधे पर हाथ रखा, तो उसके मुँह से निकला - घबराओ नहीं। ऐसे ही कई मौकों पर मैंने ढेर सारी चूतें तोड़ दी हैं।.

थोड़ी देर के बाद उसके होंठ फिर से कराहने लगे। आखें मेरी ओर घूमी, गहरी पीड़ा लिए।.

इधर शफीक ने धीरे-धीरे अपनी लंबाई हिलानी शुरू कर दी। उसका घट आगे-पीछे होने लगा। मेरी पत्नी की गुदा से तरल रिसने लगा।.

शफीक ने धीमे स्वर में साँस छोड़ते हुए एक के बाद एक मौके पकड़े।.

थोड़ी देर तक चुदाई करने पर स्वाति को शफीक के साथ रहने में मजा आने लगा। फिर उसने उसके स्तन दबाए। अपना लंड निकालकर उसे अलग कर दियa।.

उसके बाद वह रोहण की पत्नी राखी के ऊपर हो गया, फिर तेजी से धक्के देने लगा।.

शफीक ने राखी की चूत भी फाड़ दी, जैसा उसने स्वाति के साथ किया था।.

एक साले ने अपने भाई की पत्नी के साथ गलत किया।.

फिर भी, उनकी किताब पर मेरी पत्नी को जैसे चढ़ा था। वही हाल मेरे दोस्त की बीवी का भी था।.

फिर कुछ देर में उसने दोनों औरतों को पलंग के किनारे बिठा दिया, जांघें अलग करके। एक के बाद एक वो उनमें घुसने लगा, धीमे-धीमे।.

एक के बाद एक, हम दोनों ने जैनब के साथ शारीरिक संबंध बनाया। वह अपने पति की मौजूदगी में थी। दोनों तरफ से घेरकर हमने उसके शरीर का इस्तेमाल किया। उसके भीतर गहराई तक धँस गए।.

उस देसी रंडी की डबल चुदाई हुई.

उसका भी मज़ा आ रहा था, हम दोनों के साथ ऐसे जैसे कोई बेलगाम औरत हो।.

उसके साथ किया गया वो पल हमें खूब अच्छा लगा।.

उसकी भाभी के स्तन काफी बड़े थे। इसलिए मैं और शफीक उसकी पत्‍नी जैनब के स्तनों में से एक-एक पर हाथ डाले हुए थे।.

चार घंटे तक चला वो सिलसिला, शफीक ने दोनों बीवियों को अपनी बहन बताया, फिर जमकर मारी गई झंडियाँ। उनकी चूत को भोसड़े में बदल डाला। इस कहानी में अभी बहुत कुछ छुपा है, जो धीरे-धीरे सामने आएगा।.

अब तुम्हारे कमेंट पाकर ही आगे लिखूंगा।.

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