पति के साथियों ने मिलकर उसकी पत्नी के साथ जबरदस्ती की।

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Jan 3, 2026 - 15:23
Jan 8, 2026 - 17:54
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पति के साथियों ने मिलकर उसकी पत्नी के साथ जबरदस्ती की।

अचानक घटना हुई थी। पति ने मुझे जुआ खेलते हुए अपने साथियों को दांव पर लगा दिया। फिर वो तीनों एक साथ आगे बढ़े। उनमें से हर एक ने मेरे साथ जोरदार ढंग से संभोग किया। मैं भी ठीक ऐसा ही चाहती थी।.

अरे लोगों, मैं हीना कहलाती हूँ।.

दो साल बीत चुके थे शादी के बाद के, तभी यह कहानी शुरू होती है।.

शौहर को शराब इतनी ज्यादा पसंद है कि रोज़ नशे में धुत रहते हैं, वैसे ही जुए के चक्कर में भी अक्सर फंसे रहते हैं।.

उसके जुए की आदत ने मेरा जीवन अधरम हा दिया, कर्ज़ के बोझ में घर का बजट टूटने लगा।.

एक-एक करके दोस्त आते, घर में जुआ शुरू हो जाता। नज़रें मेरे ऊपर टिक जातीं, ठहरी हुई सी, जैसे कपड़े उतारकर तन पर हमला कर देंगी।.

हर बार जब वो सभी एक साथ ताश खेलने बैठते, मेरा पति मुझसे नमकीन चढ़ाने को कह देता। उनकी शराब के साथ पानी का गिलास भी मेरे ही हाथ आगे बढ़ना था।.

जब मैं वो सब लेकर जाती, तो उनके दोस्त पलटकर मुझे घूरते। आँखें मेरे स्तनों पर टिक जातीं, बार-बार।.

हर बार पानी देने के लिए आगे झुकते ही, सभी की नज़रें मेरी छातियों पर टिक जाती।.

छोटे फिट में कपड़े पहनते हूं, क्योंकि मेरी छाती 36 इंच की है।.

एक बार ऐसा हुआ कि पति ने जुए में सारा धन उड़ा दिया। फिर तो डालने के लिए खाली हाथ थे वहाँ।.

अब मेरा हो गया। तुम सबको जाने का समय है। पैसे मेरे पास बचे नहीं। कल फिर से आना यहाँ।!

फिर उसके दोस्त ने कहा - अच्छा, तेरे पास तो डालने के लिए भरपूर सामान मौजूद है!

उसके सवाल ने मुझे झकझोर दिया - तुम्हारे पास क्या है? फिर चारों ओर खामोशी। ऐसे में कोई जवाब नहीं था।?

कहा, "तुम्हारी पत्नी!"!

फिर वो बोल पड़ा - ऐसी बातें क्यों कर रहे हो?

उसके मुंह से निकला - अरे भई... ऐसे में क्या खटकता है? तुम्हारी पत्नी को दाँव पर लगा दो। जीत गए तो सब कर्ज़ उड़ जाएगा। इतना सोच क्यों रहे हो? क्या रोक रही है?

उस दिन पति के सिर पर शराब चढ़ी हुई थी। इसलिए वो किसी बात को पकड़ नहीं पा रहे थे।.

ऐसा ही हुआ, मैं खेल का हिस्सा बन गया।.

कुछ समझ में नहीं आया, रसोई के अंदर खड़ी थी।.

थोड़ी देर में पति के सारे पैसे उड़ चुके थे।.

ऐसे ही एक दिन पत्नी को जुआ खेलकर गँवा बैठे।.

बेहोशी के घंटों बाद वे बिस्तर पर ढह गए। फिर धीमे-धीमे नींद उनपर हावी हो गई। इसके ठीक बाद तीनों यार मेरी ओर बढ़ने लगे।.

खाना बनते देखकर वो सीधे मेरे सामने आकर जम गए।.

उनमें से हर कोई काला था। ऊँचाई छह फीट से ज्यादा किसी की, किसी की पौने सात तक।.

उसकी तरफ मुड़कर मैंने पूछ लिया - कोई ज़रूरत है?

फिर बोल पड़े - हां हां, तुझे जरूरत है!

कुछ पल तो मैं समझ ही नहीं पाई। फिर मैंने कहा - तुम्हारा मतलब क्या है?

उसने कहा, तेरे पति ने तुझे जुए के दौरान गँवा दिया है। अब तू हमारी है, जो भी मन चले हम तेरे साथ करेंगे।.

अचानक मुझे डर लगने लगा। मैंने कहा - ऐसा क्यों कह रहे हो? अब तुम्हें यहाँ से जाना चाहिए।.

एक ने कहा - अरे प्राण, यहाँ से कैसे जाऊँ… तुझे देखते ही मन में ख्याल आया, अब तो बस वही सूझता है। तू कहती है चला जाओ, मगर मैं समझ नहीं पा रहा। ऐसे कैसे छोड़ दूँगा? नहीं, बिना सटके नहीं जाऊँगा।.

उसके शब्द सुनते ही मेरा दिल धड़क उठा, फिर भी मन में अजनबी जगह के प्रति उत्सुकता घर कर गई।.

उसने कहा - इतनी बड़ी चूचियां, इतनी बड़ी गांड… फिर भी क्या फायदा? तेरा पति तो तुझे छू भी नहीं पाता। दिनभर नशे में धुत्त रहता है। हम सब मिलकर तेरी लालसा को पूरा कर देंगे। एक बार हमारे साथ आकर तो देख। तुझे ऐसा सुख देंगे कि तू हर बार हमीं से वही चाहेगी।.

डर के मारे मेरी आँखों से आँसू छलक पड़े।.

बस मत रखो मुझे… छोड़ दो, सच में।!

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फिर भी कौन मानता, उनकी नज़रें तो बहुत दिनों से मेरी छाती पर टिकी थीं। हर कोई अपने-अपने तरीके से मुझसे सेक्स करना चाहता था।.

बस इतना कहते ही, किसी ने मेरा हाथ पकड़कर पास खींच लिया। फिर धीमे से उसने मेरे होठों को छुआ और चूसना शुरू कर दिया।.

मुझे उसके मुंह से शराब की गंध आई। वह मेरे होंठ चूस रहा था, जैसे किसी औरत के साथ ऐसा पहली बार कर रहा हो।.

फिर किसी ने मेरे स्तनों पर हाथ डाल दिया।.

उसके दबाव में इतनी ताकत थी कि मेरे अंदर चीख उठने लगी।.

खेल में मस्ती हो रही थी, फिर भी मैंने जोर से चिल्लाया - प्लीज छोड़ दो, बस करो!

एक ने पूछा - तुम उसे सीधे रसोई में ही तोड़ दोगे? अच्छा, ऊपर कमरे में ले जाओ।.

फिर वो सभी मेरे ऊपर हाथ डालकर कमरे के अंदर घसीट कर ले गए, मैं बिस्तर पर जा गिरा। एक-एक करके उन्होंने अपने पूरे कपड़े उतारना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे हर कोई मेरे सामने सिर्फ अंडरवियर में खड़ा हो गया।.

तीनों के लंड अंडरवियर में खिंचे पड़े थे।.

मुझे डर सताने लगा कि बच पाना मुश्किल हो गया। इनके लिए मेरी चूत छोड़ना तय है, ऐसे नहीं जाऊंगी।.

अचानक वे मुझे अपनी ओर खींच लिए। साड़ी को हटा दिया गया, पेटीकोट और ब्लाउज फट गए।.

मैं अब वहाँ खड़ी थी, सिर्फ पेंटी और ब्रा पहने।.

गोरी मैं काफी हूँ।.

वो मेरे स्तन देखकर बोला - क्या शानदार जोड़ी है, लड़की।!

फिर वो बातें सुनते ही मेरा पारा चढ़ गया।.

किसी ने कहा - इसे बहुत दिनों से चाहता था मैं, मगर कोई रास्ता नहीं निकल पा रहा था। अभी मिल गया है, आज खूब जमकर करूँगा।.

फिर वह मुझे पास खींच लाए। ब्रा उतार दी गई। फिर पैंटी हटा दी गई।.

मैं खड़ी थी, बिल्कुल नंगी, उनके सामने। वहीं पलक झपकते उसने अपना अंडरवियर जमीन पर डाल दिया।.

एकदम अलग-अलग तरीके से, उसका वो लंबा काला लौड़ा पहले कभी मेरी नजरों के सामने नहीं आया था।.

उसका लंड देखते ही मेरा डर सच हो गया। कितना चौड़ा था वो, मैं समझ नहीं पाई। मेरी छोटी सी बुर में फिट कैसे होगा ये? सवाल आखिरी सांस तक रहा।.

फिर अचानक डर लगने लगा।.

होठों पर सांस फँसी, उधर किसी के हाथ ने छाती को ढूंढ लिया। बीच में जीभ खिसक आई चटख गीली जगह पर।.

उसके होंठ मेरे स्तनों पर थे, मानो पहली बार किसी को छू रहे हों। दाँतों से निप्पल को नोचता गया, धीमे-धीमे ऊपर खींचता रहा। चुभन से त्वचा जलने लगी थी।.

उसने अचानक मेरी छातियों पर हथेलियों से जोर-जोर से मारा, फिर दबोच कर चूसने लगा।.

उसका चूसना शुरू किया और मेरे होश उड़ गए।.

मेरे होंठों पर किसी का दबाव बढ़ता जा रहा था, सांस फंसने लगी।.

एक आदमी खड़ा हुआ, धीरे से करीब आया। उसका लंड मेरे मुंह के पास तक पहुंच गया। वह बोला - तुझे इसे चूसना होगा, तुरंत।!

लंड चूसने की बात पर मैंने ना कह दियa।.

फिर उसने मेरे गाल पर जोरदार तमाचा मारा। बुरी तरह भड़का हुआ था। चिल्लाया - तुझे कुछ सम्मान नहीं आता? अबे धीरे-धीरे मेरा लंड चूस।!

फिर वो मेरे होंठों के पास अपनी चीज़ ले आया।.

उसका लंड इतना मोटा था कि मेरे मुँह में समाया नहीं।.

फिर वो मेरे होंठों पर झपटा, धीमे से।.

हवा मेरे फेफड़ों तक नहीं पहुंच रही थी।.

लंबाई से ज़्यादा मोटाई नज़र आई। रंग गहरा था, छाया-सा लग रहा था।.

उसके मुँह से निकला - चूस बहन की लौड़ी… तू तो हरामखोर है, साली रंडी। मेरा लौड़ा पूरा चाट। उधर, वो मेरी फुद्दी पर जीभ घिस रहा था, मानो कुछ और ही निगल जाएगा।.

वह मेरी चूत में अपनी सारी जीभ ले गया, फिर हर कोने में घुमाने लगा। उसके साथ मेरे भाग के रस धीरे-धीरे खत्म होने लगे।.

उसने अचानक वो लौड़ा जो मेरे मुंह में घुसा हुआ था, खींचकर बाहर निकाल लिया। फिर मेरी दोनों जांघें अलग कर दीं। धीमे-धीमे अपनी तिम्मी को मेरी गुदा के ऊपर सरकाने लगा।.

डर लगा कि आगे क्या होगा।.

मुझे उसके लंबे लौड़े से तगड़ा आनंद पाना था। एक झटके में वो घुस गया, मेरी चूत में पूरा उतर गया।.

एक तरफ सिर्फ आधा ही अंदर घुस पाया। दूसरे के भीतर वहीं अटक गया।.

चीखते हुए आँसू बह निकले। बोलने लगी - मुझे छोड़ दो… कृपया, मुझे जाने दो। मर जाऊंगी।!

फिर भी उसने कुछ सुना ही नहीं, झट से धक्का दिया। पूरा घटा अंदर चला गया, लंड गहराई तक बैठ गया मेरे भग में।.

आँखों से आंसू बहने लगे। उसका मुँह मेरे होंठों पर आया, धीमे-धीमे चूसता हुआ।.

उसके दो यार पास में बैठे थे। एक कोने से वो हमारा नज़ारा देख रहे थे। कुछ शब्द उनके मुंह से आए - ओये, जोर से चोद उसे… अपनी ताकत दिखा… धूत लड़की को घुटने टेकने पर मजबूर कर… भाग लगा दे इसे… ओये, ऐसे ही जारी रख।!

मैं पलंग पर लेटी थी, उसके हाथ कमर पर थे। वह बार-बार झटका देता, मुँह से अपशब्द निकलते। कमरे में सिर्फ हांफने की आवाज थी। उसकी छाती मेरी पीठ से टकरा रही थी। कोई शांति नहीं थी, बस एक तेज धड़कन।.

उसके धक्कों से मेरी छाती काँप उठी। पूरा शरीर डगमगा गया। हर सांस के साथ कुछ टूटता महसूस हुआ।.

उसने मेरी चूत पर बीस मिनट तक हावी रहकर धड़ाधड़ चढ़ाई की।.

फिर उसने अपनी गांड का सामान बाहर निकाला। सीधे मेरे होंठों में घुसा दिया। बोला - जल्दी से चूस, तेरी माँ की जिंदगी!

मेरा मुँह उसके लिंग पर जा रहा था।.

चूत से सफ़ेद-सफ़ेद तरल बह रहा था मेरी।.

एक आदमी हमारी ओर घूरता हुआ बोला। तुझे नजर आया? इस औरत की चूत से भी पानी टपकने लगा। सच्चाई यह थी, वो भी चोदवाने को बेकरार थी। ढोंग कर रही थी बस। गले की बात कोई। फिर एकदम से उसने अपना लंड मेरी चूत में ठूस दिया। चोदने लगा जोर से।.

मुझे याद है, एक मेरी चूत में धसा हुआ था। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि दूसरा मेरे मुँह पर झुका होगा।!

मैं खुद को उन दोनों के सामने छोड़ चुकी थी।.

फिर वह बोला - चल, अब गाली देने लग।!

मैं अब कुतिया हो चुकी थी।.

वो मेरे भीतर घुस गया। फिर तेज़-तेज़ हिलने लगा।.

तीसरा आदमी, जो पहले से वहाँ बैठा था, अचानक खड़ा हुआ। आगे बढ़कर बोला - अरे, क्या तुम दोनों अकेले मज़ा उठाओगे? मैं तो बहुत देर से इंतज़ार कर रहा हूँ।.

उसके बाद वो दोनों मुझ पर से हट गए।!

वो आया और मेरे होंठों के बीच अपना लौड़ा डाल दिया। फिर बोला - तुम्हारे पास है, चूसो मेरी रानी।!

मैंने उसका स्वाद लेना शुरू किया।.

लंड पर कसक गई।.

अब उसका कहना था - मुझे इसकी गालियों पर हंसना है।.

फिर वो पीछे से आकर मेरे पास खड़ा हो गया। उसने अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। फिर वह मुझे तेजी से चोदने लगा।.

वह बोलने लगा - अब बोल तो सच्ची, इस गधे की तरह झूमना कैसा लग रहा है? अभी भी खुशी मिल रही है जब तेरी चुदाई हो रही है? आजतक किसी ने तुझे इस तरह नहीं पीटा होगा।.

सुनते हुए मैं खामोश रही।.

अच्छा लग रहा है तेरी आवाज़ में कुछ खास बात।!

लेकिन मैं बस अपने साथ हो रहे क्रियाओं पर ध्यान दे रही थी।.

एक आदमी खड़ा हुआ। उसने कहा - चलो, दोनों मिलकर एक साथ इसके मुँह में अपना-अपना लंड ठूस देते हैं।.

वो हमारी जगह सुधार गया। फिर अचानक अपना लौड़ा मेरी चूत के भीतर पहुंचा दियa।.

चूत में दो लंड घुसे तो मैं चीखने लगी - थोड़ा धीमा करो। पहले एक-एक करके डालो, आराम से। क्या आज ही मुझे तबाह कर दोगे?

फिर भी वो मेरी बात पर कान नहीं डाला।.

मैं दोबारा बोल पड़ी - कुछ तो बोल ही रही हूं... मैं तो सही ढंग से आपसे करवा रही हूं। फिर इतना कठोर क्यों हो? क्या सिर्फ एक दिन में मुझे थाम लोगे? अब ऐसा लगने लगा है, हर रोज मुझे झेलना पड़ेगा, गुलाम बनाकर रख लोगे! अब तो मैं आपकी गुलाम हो ही चुकी। तो धीरे-धीरे कर लो, इस तरह कि मुझे भी आराम मिले, और तुम्हें भी खुशी आए।.

उसने कहा - देख लिया... मैंने पहले ही तो कहा था, इस औरत को किसी दूसरे से संबंध बनाने की इच्छा है। जो पति है इसका, बिलकुल अयोग्य है। वह इसके साथ शारीरिक संबंध नहीं बना पाता। है ना सच बोला मैंने… ऊपर से चिल्लाती क्यों हो?

दो साल हो गए। इतने वक्त में उसने मेरे शरीर को छुआ तक नहीं। मैं बहुत दिनों से अकेले में तड़पती रही। कोई रास्ता नजर नहीं आया। नहीं समझ पाई थी कि चुदाई का ये हश्र होगा मेरा। सिर्फ एक आदमी के बारे में सोचती रही। वहां तीन आदमी मिल गए। और ये ख्याल भी नहीं था कि मेरी चूत इतनी बिगड़ जाएगी।.

बस इतना कहते ही उन्होंने तेज़-तेज़ धक्के देना शुरू कर दिया।.

सबके अंदर उत्साह की लहर दौड़ गई थी। गालियों के बीच में मेरे साथ तेजी से संभोग होने लगा था!

मज़ा आ गया था, हर बार जब कोई मुझे ऐसा कहता।.

गालियाँ सुनकर मैं खुश हो जाती। ऐसे में उसकी बातें मुझे पसंद आने लगीं।.

कभी ख्याल नहीं किया था कि यूँ चुदाई होगी मेरी।.

मैं ऊपर की ओर चेहरा उठाए चिल्ला रही थी - जोर से, बार-बार। हिलो मुझे… ठूस दो अंदर तक… फाड़ दो इसे… भर दो गालियों से मेरे कान। छलक उठे शब्द गंदगी से लथपथ। वो तीनों लगातार घूसे मारते रहे - आगे, पीछे, ऊपर। चूत में धक्के, मुंह में झटके। छाती पर होंठ चिपके, चूचियां खाली होती रहीं।!

आखिरकार, एक के बाद एक, उन्होंने मेरे मुँह में अपना लंड डाला और पूरा माल भीतर ही छोड़ दिया।.

फिर बोले - चल, साली रंडी, जो कुछ मेरे लंड पर लगा है, सबकुछ चूस ले।!

फिर मैंने उसकी पूँछ का सारा घटिया सामान खत्म कर दिया।.

रात भर में कितनी बार मारा गया, याद है सब।.

सुबह उठने के बाद मैं चल नहीं पा रही थी। झटपट लड़खड़ाते हुए बाथरूम की ओर बढ़ी। अंदर पहुंचकर पेशाब करना भी मुश्किल लग रहा था।.

उठते ही सभी ने कहा - अब तो बस, फिर मिलेंगे तुझसे। हर रोज़ का मामला बन गया है, जब भी बुलाएगी, हम सब तेरी चूत की प्यास शांत कर देंगे।

कभी-कभी, अवसर मिलने पर या जब पति बाहर होते हैं, तो मैं उन्हें आमंत्रित कर लेती हूँ।.

हर कोई साथ मिलकर मेरी चूत पर हावी हो जाता है, फिर मुझे धूमिल कर देता है।

अब तुम्हारा क्या ख़्याल है, इस गैंग बैंग लड़कियों की कहानी पर? मेरी तरफ से एक सवाल।?

अगली बार मैं तुम्हें वो किस्सा सुनाऊँगी, जब मेरी गांड पर किसी ने हथौड़ा चला दिया।

राय आप कमेंट में लिख सकते हैं।.

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