एक गर्म लड़की के सपने में गैंग बैंग आया।

Desisexkahaniya

Jan 3, 2026 - 17:30
Jan 9, 2026 - 16:41
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एक गर्म लड़की के सपने में गैंग बैंग आया।

कहानी में चूत-गांड का ज़िक्र था। एक दोस्त बना, धीरे-धीरे सब कुछ बोलने लगी। बातें हुईं, सेक्स पर भी चर्चा हुई। फिर एक दिन उसके कमरे में पहुंच गई। अंदर क्या हुआ, ये तो वही जानता था।?

नमस्कार दोस्तो!

सीमा मुजाल्दा मैं हूँ, पढ़ाई चल रही है कॉलेज में।

तीस दो, चौंतीस, छत्तीस - ये मेरे आकार के नंबर हैं।

उम्र उन्नीस साल है मेरी। खूबसूरती ऐसी, जो ध्यान खींच लेती है।.

कभी-कभी मेरी चूत कितनी नाज़ुक होती है, पता चलता है।.

मेरी पीठ के निचले हिस्से में गांड का उभार साफ़ दिखता है।!

गाँव के हर लड़के मेरी बहुत तारीफ करते थे। पढ़ाई में मेरी अच्छी पकड़ थी, इसलिए कॉलेज ने मुझे स्कॉलरशिप दी। उस पैसे से मैंने एक मोबाइल ले लिया।

एक दिन फेसबुक पर अकाउंट बना लिया। इस तरह मेरी कहानी शुरू हुई - चूत-गांड Xxx की।.

एक सुबह, मेरे अकाउंट पर रमेश वाघेला की ओर से दोस्ती का ऑफर आया। मैंने हामी भर दी, बस।

बातचीत में पता चला - वो भी हमारे कॉलेज का स्टूडेंट था।.

इस तरह हमारा रिश्ता अब और मज़बूत पड़ने लगा।

अब फेसबुक पर गपशप जमने लगी।

थोड़े समय बाद, गपशप के दौरान बातें धीरे-धीरे अधिक निजी होने लगी।

एक दिन रमेश ने मेरे पास एक पोर्न चुदाई वीडियो भेजा।

मैंने वीडियो देखा, फिर 'मस्त है' लिख दिया।

अब तो रमेश ने धन्यवाद कहा, हम दोनों में बातचीत का रुख और आसान हो गया।

एक दिन रमेश बोला - तुझ में कितनी जगह है?

बातचीत करते हुए मन लग रहा था, इसलिए मैंने कह दिया - मेरे पैमाने 32-34-36 के बीच हैं।

उसने कहा, तुम सच में खूबसूरत हो। कभी-कभी मेरे कमरे में आ जाना। वहाँ एक अलग ही दुनिया लगती है।

हां कर दिया मैंने भी।

अगली सुबह कॉलेज पहुँचते ही मैं बिना रुके उसके कमरे की ओर बढ़ गई।

खाना तैयार करते समय मैंने हथेलियों पर ध्यान दिया।

उसके बाद कुछ देर हम एक साथ रहे, भोजन किया। इसके चलते शाम ढलने तक हम टीवी पर ध्यान देने लगे।

अंधेरा होते ही मैं घबरा गई, रमेश के हाथ खींचकर पास खींच लिया। उसने भी मेरी बाँह पर हाथ फेर दिया। धीरे से मुस्कुराते हुए, उसकी उंगलियाँ मेरी छाती पर आ ठहरीं। .

जब बिजली वापस आई, मैंने धीरे से उसके होंठ छुए।

उसने धीमे से हाथ बढ़ाया, मेरी चूत को छेड़ने लगा।

उसके पैंट के ऊपर से मैंने धीरे-धीरे उसके लिंग को छुआ।

रमेश के लिए सब कुछ धीमा हो गया, फिर उसका लंड सख़्त लोहे जैसा हो चला।

रमेश के अंदर का गुस्सा फूट पड़ा, वह चिल्लाया – सीमा, आज तू मेरी रखेल है! उसकी आवाज़ में क्रोध था, बोला – आज तो तेरी चूत चोद–चोद कर भोसड़ा बना दूंगा!

अचानक रमेश ने कमर से पैंट खींच लिया, फिर धीरे-धीरे सब कुछ उतार दिया।

एकदम अलग साइज़ का था वो, सात इंच का लंबा। मैंने जैसे ही देखा, हैरान रह गई।

अचानक रमेश ने मेरे होंठों के बीच अपना लंड धकेल दिया।

हल्के से मैंने ‘मुऊ… मुऊ’ का शोर छेड़ दिया।

फिर वो मेरे कपड़े उतारने लगा। मैं खुद उसके सामने बिल्कुल नंग हो चुकी थी।

उसने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया, फिर लंबे पल तक ठहर गया। एकदम अचानक उसने अपना लंड मेरे गले तक सरका दिया।

मैंने उसके लंड को पूरे 10 मिनट तक चाटा, और ये मुझे बेहद अच्छा लगा।!

फिर मैंने कहा - रमेश, अब इतना न खींच, मेरे अंदर अपना लंड डाल दे, ऐसे जैसे मैं तेरी प्रेमिका होऊँ, मेरी चुत को गधा बना दे।

जब उसने मुझे पीछे से थप्पड़ मारा, त्वचा लाल हो उठी।

रमेश ने मुंह खोला, कहा - सीमा, आज तेरी गांड भी होगी मेरे लिए। चूत पर भी कब्जा होगा। फिर तू बार-बार आएगी मेरे पास। यही जगह ढूंढेगी वापस। इतना चोदूंगा कि रंडी बनकर रह जाएगी तू।!

उसने ये बोलते हुए मेरी चूत पर अपना 7 इंच का लंड रखा, फिर एकदम से आधा लंड भीतर धकेल दिया।

हल्की सी आवाज़ में कराहते हुए मैंने ‘ऊऊ… ईई’ शुरू कर दिया।

एकदम से वो सात इंच का हिस्सा मेरी जांघों के बीच खिसक गया।

मुझे इतना दर्द हो रहा था कि लग रहा था सब कुछ बिखर रहा है।

खून बहने लगा, दर्द इतना तेज़ कि सहा नहीं जा रहा था।

जब मैं रोने लगी, तब उसने कहा - चिंता मत कर, सब सही हो जाएगा।!

थोड़ी देर बाद पेलने का सिलसिला आहिस्ता शुरू हुआ, जैसे-जैसे वक्त बीता दर्द में भी गिरावट आई।

फिर मैंने भी पीछे से हिलाकर आनंद अनुभव करना शुरू कर दिया।

उसे एहसास हुआ, फिर वह तेज़ चलने लगा।

कमरे में छप-छप की आवाज फैल गई, तभी एहसास हुआ जैसे किसी अनजान बाग में चल रही हूँ।

शुरू में मैंने ईई बोला, फिर ऊऊ आया, धीरे-धीरे आआ भी शामिल हो गया।

मैं वहाँ खड़ा था, उसने शुरू किया। समय गुजरता रहा, पंद्रह मिनट तक नहीं रुकी। हर छूने में जोश था। धीरे-धीरे सब कुछ तेज होता गया। आखिरकार वो रुकी, मैं सांस ले पाया।

एक औरत कई बार हिल चुकी थी।उसके बाद आवाज़ आयी - अब मैं तेरे भीतर छोड़ रहा हूँ!

फिर उसने पानी की बंदूक से हमला कर दिया।

उसका वीर्य मेरी चूत में धीरे-धीरे फैलने लगा।

दस मिनट बाद वो मेरे पीछे आ गया, घोड़ी बनाकर दो जोरदार थप्पड़ मारे। मेरी हालत इतनी खराब हो गई कि सब कुछ धुंधला सा लगने लगा।

लेकिन तब भी, मुस्कान खुद-ब-खुद चेहरे पर आ गई।

उसने सरसों के तेल की बोतल हाथ में ली। मेरे पीछे के हिस्से पर तेल की मोटी परत फैला दी।

मैंने उसका लंड मुँह में लिया, वो तुरंत खड़ा हो गया।उधर, उसने मेरी गांड पर अपना घोंपा और जोर से धकेल दिया।.

गुदा में तीखा असहजपन होने लगा।

शुरू में मैं सिर्फ़ 'ईई... ऊऊ' की आवाज़ निकाल पड़ी।

डर के मारे सांस अटक सी गई थी।

मैं जब वह मुझ पर चिल्ला रहा था, उसने मुझे अपने साथ धकेल दिया।

आधे घंटे तक धीमी गति से चलने के बाद वह मेरे भीतर ही रुक गया।

कई घंटों तक कपड़े बिना ही पलंग पर लेटे रहे।

आंख खुलते ही एहसास हुआ कि पीठ के बीचोबीच कुछ धंस रहा है।

जब पलटकर देखा, तो रमेश के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

वैसे तो मेरी गांड और चूत दोनों दर्द कर रही थी, फ़िर भी रमेश ने मेरी गांड में अपना लण्ड पेल दिया।

दर्द में चीख निकल गई, फिर भी अचानक खुशी सी होने लगी।

गांड में वीर्य छोड़ने से पहले उसने 10 मिनट तक चोदा।

तब हम दुबारा तैयारी के बाद कॉलेज के लिए निकल पड़े।

शाम को वो फिर ठहर गया। मुंह खोलते ही बोल पड़ा - सीमा, आज कुछ अलग करने चलते हैं तुम?

तब मैंने भी सहमति जता दी।

शाम ढलते ही रसोई में कड़ाही गरम हुई। भोजन तैयार हुआ तो दोनों एक साथ बैठ गए। कटोरियाँ चम्मच के साथ आगे रखी गईं। खाने के बीच कभी घबराहट छाई, कभी हल्की मुस्कान छलकी।

उसके मुँह से निकला - सीमा, आज तुझे कैसे चाहिए वो सब?‎

फिर मैंने कहा - मेरी गांड, चूत और मुँह में एक साथ लंड चाहिए।

थर-थर काँपते हुए उसने पूछा - इतनी बड़ी घटिया औरत तू एक शाम में कैसे बन गई?

फिर मैंने कह दिया - हाँ, मुझे पूरे ग्रुप के साथ एक साथ सेक्स करना है

फ़ोन उठाते ही दोस्तों के नम्बर डायल हुए - महेंद्र, मनीष, फिर जयन, आखिरकार अजय का।

तब रमेश ने कहा - हाँ, पीने के लिए बियर भी साथ ले आना।!

बातचीत खत्म करके उसने कहा – अब नहा ले, तैयार हो जा।!

धुएँ के छोटे घेरे बनने लगे, उसकी ओर से नज़रें भाग गईं।

थोड़ी देर बाद अचानक अजय पहुँचा, उसके साथ जयन भी था। मनीष किसी तरह वहाँ घुस आया, महेंद्र हाथ में बियर लिए खड़ा था।

रमेश के मुंह से निकला - आओ। अजय, महेंद्र, फिर जयन भी। मनीष तुम भी चलो।!

सबने मिलकर कहा - हां, दोस्त!

तभी उसने रमेश से पूछ लिया - अरे भाई, ये आदमी कौन है?

तभी तो तुम्हें बुलाया गया है, रमेश ने कहा। सबकुछ इसी वजह से है।!

तब जयन बोला - अच्छा, रमेश भैया, पर इसका परिचय तो करा ही दीजिए!

हाँ यार… मुझे तो बिल्कुल याद ही नहीं था! रमेश ने कहा, फिर मेरी ओर मुड़कर अजय, जयन, मनीष और महेंद्र के बारे में बताया। उसके बाद वापस उनकी तरफ मुड़कर मेरे बारे में भी बात की।

रमेश आगे बढ़कर बोला - सीमा, इनमें से हर एक मुझे जानता है।!

हँसी के ठहाके छूट गए। तब अजय ने बियर निकालकर छह पैग तैयार कर दिए। सबने पीना शुरू कर दिया।

फिर अचानक रमेश ने सब कुछ धीरे से कहा।

अजय वहाँ आकर मेरे पास बैठ गया, फिर धीरे से मेरी छाती दबाने लगा। मैंने कुछ नहीं कहा, सिर्फ उसकी ओर झुकते हुए उसकी गोद में जगह बना ली।

उसकी लंबाई मेरे पीछे के हिस्से में धीमे से घुसने लगी। इधर महेंद्र ने उठकर मेरे सलवार को तख़्त-एटूट ज़मीन पर डाल दिया।

फिर अजय ने मेरा नाड़ा ढीला कर दिया, धीरे से खींचकर। मनीष ने कुर्ता उतार लिया, एक हाथ से खींचकर। मैं बस वैसे ही रही, अजय की गोद में, ब्रा और पैंटी में।

अचानक अजय ने मेरी ब्रा से हाथ लगाया, धीरे-धीरे उसे खोलते हुए। छाती पर हवा का एहसास हुआ, जैसे कुछ गर्माहट बाहर आ गई हो।

उस वक्त रमेश ने मेरी पैंटी फाड़ दी, चारों के बीच में खड़ा कर मुझे नंगा कर दिया।

थकान में आँख लग गई, रमेश को पता ही नहीं चला।

इसके बाद हर कोई ने अपने कपड़े उतारे। सबके सामने मैं खड़ा था। एक-एक करके वो अपनी चीजें दिखाने लगे।

उन सबका लंड साढ़े छह इंच के आसपास ही था।

अजय ने मेरे मुँह में अपना लंड धकेल दिया, इधर बाकी तीनों ने भी हाथ से अपने-अपने लंड चलाए।

अचानक अजय ने लंड गले तक सरका दिया, मेरे होठों से ‘ईई … उउ …’ आवाज़ें छूट पड़ीं।

थोड़ी देर में, जैसे ही अजय का लंड बाहर आया, जयन ने अपना घटिया सा मेरे मुंह में पकड़ा दिया।

अजय ने धीमे से त्वचा को छूते हुए कई बार पीछे के हिस्से पर हथेली फेरी, गुस्से में बोला - जो माता-पिता तुझे पढ़ाने भेजते हैं, उनकी इज्जत तू यहाँ खेल रही है, शर्म की कमी वाली। इधर जयंत ने मेरे चेहरे पर एक के बाद एक कई थप्पड़ जड़ दिए, ऐसा लगा जैसे सांस थम गई हो।

अजय ने मुझमें घुसपैठ की, फिर जयन भी हलचल करता हुआ आगे बढ़ा।

लार टपकते हुए मनीष के होंठों ने धीरे से लण्ड को अंदर खींच लिया।

इस तरह से मैं अपनी चूत, गांड और मुँह से लंड का आनंद उठा रही थी।

पहली बार मैंने ऐसा किया।

खेलते हुए महेंद्र मम्मों के पास था।

सोते-सोते रमेश की नींद पूरी हो चुकी थी।

उन चार दोस्तों ने मिलकर मेरे साथ ऐसा बर्ताव किया, जैसे मैं कोई सड़क की हवसी औरत हूं।

झड़ने के लिए आए अजय ने मेरे होंठों के पास खुद को धकेला, फिर गले से नीचे तक लटकाकर छींटे भर दिए।

नीचे तक पूरा वीर्य सरक गया, सारा।

मनीष ने धीरे से पीछे की तरफ हिलकर अपना लंड उसके गुद में घोंप दिया।

एक के बाद एक, कई लोगों ने मुझे लंबे समय तक पूरी तरह से इस्तेमाल किया।

फिर हर कोई अपना-अपना तेल मेरे मुँह में उड़ेलता गया।

वो सब मेरे ही अंदर उतर गया।

थकान ने घेरा, फिर सब कुछ शांत हो गया।

तब नहा करके मैं कॉलेज की ओर चल पड़ी। कॉलेज से बाद में सीधे अपने कमरे में लौट आई।

दर्द तो कमर तक जा रहा था, फिर भी वो पल दिमाग से नहीं मिटता।

इस वक्त मन में यही चल रहा है कि कमरा छोड़कर रमेश के कमरे में रहना शुरू कर दूँ।

अजय का फ़ोन नंबर ले लिया गया है, उसके बाद महेंद्र का भी नोट कर लिया गया। जयन का डिटेल्स अलग से रखा गया, वैसे ही मनीष का भी।

हर बार जब मन करेगा, तब वैसे ही कर लूंगी।

अब समझिए, ये थी मेरी कॉलेज के दिनों की पहली गर्मजोशी भरी मुलाकात की कहानी।

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