एक अंधेरे जंगल के बीचोबीच, तीन चूत थीं। उनके पास एक लंड भी था।
Desisexkahaniya
एक लड़के की जंगल की कहानी में किसी प्रशंसक से दोस्ती हुई, फिर बात सेक्स तक पहुँच गई। अचानक वो लड़की गायब हो गई। उसके बाद कुछ घंटों में एक और महिला का मैसेज आया, जो भी ऐसा ही चाह रही थी। आगे क्या हुआ, पता नहीं। नमस्कार दोस्तों, फिर से आपका स्वागत है!
ये कहानी मेरी तरफ से है, युवराज की ओर से।!
मित्रो, पिछली कहानी
वकील साहिबा ट्रेन में चुदाई को बेताब थी
लोगों ने मेरी लिखी चीज़ की खूब तारीफ की, प्यार का सौदा भी भर दिया।
लेकिन यार, कई दोस्तों ने मेरे पास से उस लड़की की फोटो और नंबर मांगना शुरू कर दिया।
मुझे माफ़ करना पड़ेगा, क्योंकि बात निजी जानकारी की है। किसी के अपने ख़ास मामलों में झाँकने की मुझे इजाज़त नहीं।
माफी माँगना जरूरी समझता हूँ।
तुम सबके इतना प्यार देने के लिए, मैं सच में खुश हूँ।
आज ये कहानी सामने आई है।
एक असली घटना है, जिस पर यह Xxx फोरसम फक इन फ़ोरेस्ट कहानी खड़ी है। शायद कोई मुझे सपनों के दुनिया का रहने वाला कहे, तो कहता हूँ।
मगर जब ये मेरे साथ घटित हुआ, तब समझ आया कि वाकई ऐसा हुआ था।
एक सुबह, जनवरी 2022 में, दो कहानियों पर एक प्रतिक्रिया आई। कई महिलाओं ने तब मुझे डाक के जरिए संपर्क किया।
एक महिला का नाम रखा गया था सताक्षी, हालाँकि असली नाम यह नहीं है।
एक बंगाली लड़की, जिसे गोवा की हवा पसंद आ गई थी।
उनकी शादी टूट चुकी थी, सताक्षी जी के साथ।
लगभग 40 साल की उम्र में वह थे।
गोवा में उनके साथ पति ने कभी एक बेकरी संचालित की थी।
अच्छा, उनकी तरफ से मेल आया। भावनाओं के हवाले से मदद चाहते थे।
अब सही मान लिया मैंने।
बाद में गपशप शुरू हो गई।
हम मिलने लगे।
अक्सर वो मुझे खाने के लिए समय देती।
कभी-कभी फासला कम होने लगा।
उस शाम, खाना खाकर हम सीधे उनके घर पहुँच गए।
कल्पना की गई थी कि फिल्म नेटफ्लिक्स पर चलाई जाएगी।
अब कोई सदस्यता नहीं रही।
तब मैंने ऊपर की तरफ़ नज़र डाली।
देखो न, चरमसुख की वेब सीरीज आ गई है। लगता है काफी मज़ेदार होने वाली है।
श्रृंखला के प्रति उसका तापमान चढ़ने लगा।
बीच में ही सांस थम सी गई। फिर वह पल आया जब उसके होठ मेरे करीब आ गए।
उसके सभी वस्त्र मैंने हटा लिए।
हल्के से तेल उंगलियों पर फैला, फिर वो मसाज शुरू कर दी।
कुछ समय तक रहने के बाद हमने जगह बदल ली, फिर 69 में पहुंच गए।
मेरे लिए चॉकलेट को लंड पर फैला दिया गया। वहीं उसकी चूत में मधु से छेड़छाड़ हुई।
एक-दूसरे के शरीर पर होंठों का स्पर्श शुरू हुआ, तब धीरे-धीरे चूसने लगे, उसके बाद जीभ ने भी रास्ते ढूंढ़ लिए।
थोड़ी देर के बाद मैं उनके होंठों पर आ गिरा, तभी वह मेरे मुँह में समा गई।
तभी मैं सीधा हुआ, फिर धीरे से उन्हें छूने लगा।
उसने नीचे हाथ बढ़ाए, मेरे लिंग को पकड़ा और धीरे-धीरे ऊपर नीचे हिलाया।
उसने मुझे सिर्फ पंद्रह मिनट में ही तैयार कर लिया।
उसके बाद मैंने कंडोम पहना, फिर धीरे से अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया।
वे चीखी।
उसकी योनि में इतना तनाव आ गया था।
खून बहने लगा, क्योंकि मेरे झटके ने उनकी दरारों पर ज़्यादा दबाव डाल दिया।
थोड़ी देर ठहरकर मैंने उन्हें पास खींचा, होठों से सटा लिया।
थोड़ी देर बाद, जैसे ही मुझे लगा कि सब ठीक है, मैं फिर से उन्हें झकझोरने लगा।
शुरू में दर्द कम सा लगता रहा, पर कुछ देर में वह भी खुश हो गई। फिर हम दोनों ने धीमे-धीमे साथ जुड़ना शुरू कर दिया।
उसके होंठों पर मेरा सिर था, छाती को धीमे से दबाते हुए कंपकंपी उठ रही थी।
यार, इसमें पूरी तरह से मेरा ही हिस्सा था।
इसे पसंद करने वालों में वो भी शामिल हैं।
ऐसे हल्के-हल्के झटकों से कमरे में सन्नाटा और गहरा जा रहा था। बिस्तर के सरसराने की आवाज आई, तभी फच–फच की ध्वनि भी घुलने लगी। ये सब मिलकर मुझे अधिक जगा रहा था।
पच्चीस मिनट के बाद मैं गिर पड़ा।
दर्द की वजह से उसका हाल खराब था।
तुरंत सीधे मेडिकल की तरफ पैर बढ़ाए मैंने।
उस जगह से लौटते वक्त मेरे हाथ में दर्द कम करने वाली गोली थी।
पानी को गर्म करके मैंने उसकी चूत पर डाल दिया, फिर गोली दे दी।
थोड़ी देर बाद सूरज के निकलने पर आखिरकार विश्राम मिला।
लेकिन तभी उन्हें मासिक धर्म हो गया।
उसके बाद एक दिन का विचार आया मेरे मन में।
महिलाओं को अक्सर तब दिक्कत होने लगती है, जब पेट में ऐंठन आती है या मन का रुख बदल जाता है।
मैं पांच दिन तक वहीं टिका रहा।
एक तेज़ बारिश के दिन फोन की घंटी बजी, तभी डर लगने लगा।
एक-एक करके सवाल पूछे, मगर जवाब नहीं मिला।
बस इतना कहा - जाओ, अब समय है चले जाने का।
तब मैंने कहा - अच्छा, अब तुम सेक्स को बाय-बाय कर दोगी क्या?
फिर उन्होंने कहा - इस तरह नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं होगा।!
फिर कभी दोस्तों का फ़ोन नहीं आया, मेरे संदेश पर चुपचाप खड़ी रही।
थोड़े समय तक लगा रहा, मगर बाद में हाथ खींच लिया।
मेरे पास सात महीने के बाद इंस्टाग्राम पर एक संदेश का अनुरोध आया।
उसके आईडी पर लिखा था – मोनिका, हालांकि असली नाम यह नहीं था।
उसकी उम्र का अंदाज़ा लगभग चालीस साल था।
बातचीत का सिलसिला अब चल पड़ा।
चार महीने तक हर दिन बात होती रही।
फिर वो मुझे आमने-सामने देखना चाहते थे।
किसी से भी मुलाक़ात नहीं कर लेता मैं… इसलिए उस बार मना कर दिया।
अब वो मेरे पास आकर बात करने लगीं।
फिर मैंने उस होटल में बुला लिया, जो गोवा-मुंबई हाइवे के पास था।
समयदोपहुंचगयाथा।
उस जगह पर हम दोनों की मुलाकात हुई।
उसका रूप अजब सा लग रहा था।
गोरा रंग दूध-सा, आँखें समुद्र जैसी नीली। होंठ खिले गुलाब की पत्तियों जैसे लाल। मुस्कान में एक अजीब सी खींचावट है।
उसे देखते ही मेरा बुदबुदाता दिमाग शांत हो गया।
फिर भी, मैंने अपने आप को संभाल लिया। उसके बाद हम एक-दूसरे से मिल पाए।
कुछ समय पश्चात हम वह कमरे में जा पहुँचे।
वो बोली, मुझे तुमसे मिलना था क्योंकि मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती हूँ।
कहना मुझे याद ही नहीं रहा तुम सभी को।
एक डॉक्टर के तौर पर काम करती थी, अकेले में ही ज़िन्दगी चला रही थी।
उसकी गोद में दो नन्हे जान थे।
एकांत में रहना उन्हें पसंद था।
मुझे उसने बताया - जब मन करता है, सेक्स के लिए कोई जिगोलो आमंत्रित कर लेती हूँ। फिर भी, डर घेर लेता है वैसे भी। सुरक्षित रहना जरूरी लगता है मुझे।
उसके बाद वो बोल पड़ा - मेरी एक जानकार ने तेरे बारे में कुछ कहा था।
मैंने नाम पूछा।
फिर उन्होंने कहा - हैरानी की बात है। इसके ठीक बाद उनके मुँह से निकला - अब ये सहा नहीं जा रहा!
थोड़ी देर और रुक लेना, मैंने कहा, अब जल्दी किस बात की है।
तब मैंने उन्हें पकड़ा, फिर इधर-उधर करके जमीन पर डाल दिया।
साड़ी में वो घर से निकली थी।
अचानक से साड़ी उनके शरीर से अलग हो गई।
अगले ही पल उनके ब्लाउज का फ़िट ढीला पड़ गया।
उसकी हुक टूट चली, कारण कोई खींचाव था।
फिर वहीं पल में, मेरा शरीर उनके करीब आ गया।
उसके बाद मैंने उनकी ब्रा निकाल दी, फिर ऐसे-जैसे प्यासे शख्स को पानी मिलता है, मैंने उनके छाती को चूसना शुरू कर दिया।
उसने जोर-जोर से चूचियों पर हमला कर दिया, फिर दाँत गहरे धँसा दिए।
दर्द के बावजूद खुशी भी छा गई।
थोड़ी देर के बाद मैंने उन्हें मोड़ा, फिर चूत पर वैसलीन लगा दी।
उसके बाद उसने दो उंगलियाँ धीमे-धीमे उसकी चूत में डाल दीं, फिर आगे-पीछे हिलाने लगा।
हल्की-हल्की सांसों के बीच धुंधला सा आवाज़ उठा।
उँगली डाले जाने के बाद वो समय चलता रहा, लगभग आधा घंटे जितना।
गिरने लगीं फिर से वो पत्तियाँ।.
थोड़ी देर के बाद, उनकी पिछवाड़ी में मैंने वैसलीन लगा दी।
फिर उसने इंकार कर दियa।
उसे मैंने सुनाया, तुम्हारी पीठ में कोई घुसपैठ नहीं होगी।
एकदम से उसकी पीठ के नीचे हिस्से में धक्का लगा, जैसे कोई चीज़ वहाँ घुस गई हो।
उसने चीख निकाली, पर मेरी मुट्ठी उसकी दोनों बाजुओं को पीछे से घेरे हुए थी।
फिर मैंने पूरी ताकत से हल्के-हल्के धक्के देना शुरू कर दिया।
उसकी चीखें हवा में थिर-थिर कर रही थीं, साँसों के बीच झटपट सिसकन आ गई।
भाभी का दम घोंटते हुए बोलना – उफ़… तू ऐसे मत कर, पगला देगा। धीरे-धीरे… और… हाँ, वहीं रख। छुओ मुझे और ज़ोर से। अब नीचे तक जा… हाँ, ठीक वहीं। मुझे चीख उठने दे। अर्रे… ये क्या हो रहा है? झटके दे… एकदम भीतर तक पहुँच जा। हाँ… हाँ… वो… वो फिर कर। ओह… नहीं… फिर वही कर। मैं लड़खड़ाऊँगी। हाँ… ऐसे ही… और… नहीं रुकना।!
थोड़ी देर तक धक्के-मुक्की करने पर मैं हिल उठा, इस बीच वह फिर से ढल गई।
कुछ समय के बाद, हम लोग पैदल यात्रा पर चल दिए।
उसने वापसी में कहा - देखो, ओर झलक रहा है सींगोंवाला। आओ, नज़दीक जाकर छवि उतार लेते हैं।
हवा में धुंध थी, मैं उसके साथ रास्ते छोड़कर घने पेड़ों की तरफ बढ़ गया।
कुछ समय बाद जब मैं पलट कर देखा, तो उनका कहीं अता-पता नहीं था।
डर के मारे मेरे हाथ पसीने से तर हो गए, फिर भी मैंने खोजना शुरू कर दिया - एक कोने से दूसरे कोने तक।
कुछ समय पश्चात, वह मेरा ध्यान खींचने लगे।
पलटकर देखा और हैरान रह गया।
दो महिलाएँ उनके साथ थीं।
एक तो वही थी, जिसका ज़िक्र मैंने कहानी के आग़ाज़ में किया था, दूसरी उन दोनों की पुरानी साथी।
फिर मोनिका जी मेरे पास आईं और बोलीं - तुम्हारी यही तो सरप्राइज़ है, हम तीनों को खुश करके दिखाना।
सताक्षी जी के पास मैं खुद चला गया। वजह पूछी - अचानक बातचीत क्यों छोड़ दी? कोई सूचना भी नहीं दी थी आपने।
फिर वो बोली – कानूनी परेशानियों में इतना अटक गई थी कि मोनिका को तुम्हारे साथ बाँधना पड़ा।
फिर सताक्षी जी ने कहा - कम माचो, हे आदमी! अपने उत्साह को दिखाओ, वीरता भी झलके। अब तुम्हारा पानी पिलाओ हमें, बहुत दिनों की प्यास शांत कर दो।!
अच्छा, जब से मैंने शुद्ध शाकाहार पर ध्यान देना शुरू किया, वहीं योग भी साथ चलता रहता। इस आदत ने स्पर्म काउंट में स्थिरता ला दी। ऐसा नहीं कि कल से फर्क दिखा, पर समय के साथ बदलाव टिक गए।
मैं अकेला हूँ, कोई साथ नहीं देता।
एक बार छह महीने तक कोई काम नहीं होता। कई बार सिर्फ एक दिन में छह बार आना पड़ता है।
तैयार रहना मेरी आदत है।
तैयारी पूरी हो चुकी थी, मैं Xxx फोरसम फक के लिए।.
एक को पकड़कर मैंने नीचे खींच लिया, फिर धीरे से अपना लंबा लंड उसके मुँह में डाल दिया।
इस अचानक के हमले ने उन्हें डरा दिया, सांस फूलने लगी थी।
थोड़ा सा बाहर खींचकर मैंने उसे वापस धकेल दिया।
बार-चढ़कर उसने मौका पकड़ लिया, धीमे स्वाद को खुलकर आनंद लेने लगी।
फिर मैंने सताक्षी जी के होठों पर हावी होकर उन्हें चूम लिया।
मोनिका ने मेरे पिछवाड़े के हिस्से पर अपनी जुबान फैलाया।
कुछ समय के बाद, हमने अपनी जगह बदल ली।
इधर सताक्षी जी मेरा लंड चूसने लगीं, वहीं मैंने मोनिका जी के दुल्हने ऊपर मुँह फेर लिया।
कमला नंबर तीन, वो मेरे पिछवाड़े को चाटने लगी।
तब मैं सभी के सामने आ गिरा, उनमें से हर एक नीचे गिर पड़ी।
फिर सताक्षी जी ने मेरे लंड को हाथ में लिया, धीमे-धीमे चलाना शुरू किया। कुछ पल बाद वह फिर से ऊपर उठ गया।
वो सारे कपड़े उतार चुकी थी; उसके 40D साइज के स्तन हल्के-हल्के डोल रहे थे, नजारा कुछ खास लग रहा था।
वो मुझे लेटा कर मेरे ऊपर चढ़ गई… फिर लंड को चूत में घुसाकर तेजी से हिलने लगी।
मोनिका जी ने मेरे मुंह को अपनी चूत से ढक दिया। फिर मैंने हल्के स्वर में स्वाद लेते हुए उसे चाटना शुरू कर दिया।
उस पल कमला ने मेरे अंडकोश पर ध्यान दिया।
कुछ समय बाद मैंने अपनी जगह बदल ली।
अब कमला के साथ ऐसा हुआ कि वह उसकी तरफ बढ़ा, लंड घुसाया।
शरीर पर सताक्षी का स्पर्श था, धीमे-धीमे फिसलता हुआ।
तभी मोनिका ने मेरे पिछवाड़े के हिस्से पर जीभ फेरनी शुरू कर दी।
कुछ समय तक मैं बस इधर-उधर घूमता रहा, फिर आगे बढ़ गया।
उसकी जोरदार चाल पर कमला के होठ खिंच गए थे।
उसकी सांसें तेज थीं, चीख निकल पड़ी - कहाँ रहा इतने दिन? लानत है तेरी… अब मिल गया तो… जमकर धमाल कर… आह… मेरे भीतर ऐसा घटा डाल कि सुरंग बन जाए… आह… और तेजी से… आह!
थोड़ी देर के बाद हवा में उड़ती हुई वे नीचे आ गिरीं।
उसके होठ धीमे से मेरे अंडकोष पर आए।
सताक्षी जी के आने का समय आ गया था।
एकदम अचानक मैंने उसे कॉर्क स्क्रू की मुद्रा में पकड़ लिया, फिर झटपट झटके शुरू हो गए।
उसके झटकों की चपेट में आकर वह बोली - निकाल दो, तकलीफ़ हो रही है।!
थोड़ी देर मैं वहीं खड़ा रहा, फिर धीरे से उनके पास गया।
फिर मैंने उनके बोबो पर चुपचाप नज़र डाली।
उसके दर्द में कमी आई, जब मैंने ऐसा किया।
सात महीने बाद जब उसने संभोग किया, तो योनि की मांसपेशियाँ तंग हो चुकी थीं।
थोड़ा सा लार डालते ही मैंने तेजी से हिलना शुरू कर दिया।
अब वह संभल चुकी है।
उसके साथ मेरा व्यवहार पच्चीस मिनट तक जारी रहा।
मुस्कान के साथ उसके होंठों से धीमी-धीमी सिसकन छूट पड़ी।
सिसकारियों की आवाज़ सुनते ही कमला जी का दिल धड़क उठा। मोनिका जी की आँखों में भी चमक आ गई।
सताक्षी जी घर में पड़ी-पड़ी बड़बड़ाने लगीं - आह शोना… ऐसे ही चलते रहो… आह… हे भगवान… तुम्हारी ताकत देखकर हैरान हूँ… ओह शोना… मैं तो अब तुम्हारी बन गई… जोर से करो वैसे ही… आह!
बीस मिनट तक वो मेरे साथ रही।
इसके बाद हम सीधे तौर पर मिशनरी स्थिति में पहुँच गए।
मोनिका ने सताक्षी के प्रति अपनी भक्ति दिखानी शुरू कर दी।
जैसे ही कमला ने मेरी गांड चाटनी शुरू की।
बीस मिनट बाद मेरा वीर्य उसकी योनि में छलक गया।
फिर कभी नहीं समझ पाया, मोनिका जी वापस मेरे ऊपर हो गईं।
मुझे उनके होंठों का स्वाद याद आया।
इस बार मोनिका की चूत पर सताक्षी के होठ थे, उधर कमला मेरे लंड को धीरे-धीरे जवाबदेह बना रही थी।
थोड़ी देर के बाद मेरा लंड सिकुड़ने लगा।
ज़मीन पर मोनिका जी की गर्दन टिक गई, मैंने पैर ऊपर उठा दिए।
उसकी स्कर्ट हवा में ऊपर उठ गई, अब नीचे कुछ झलकने लगा।
उसी जगह पर मैंने अपना लंड सुलझाया।
दरअसल गर्दन दुखी, पर मस्ती कम नहीं हुई।
थपकियां देने लगा तो कराहने लगी - आआह्ह… हम्म… ऐ माँ… बस कर… खत्म हो गई… आआह्ह… और ज़ोर से!
आवाज़ें फैलीं, पेड़ हिले।
कुछ समय बाद पत्तियाँ टूटकर नीचे आ गईं।
लेकिन ये मेरे साथ नहीं घटा था।
इसके बाद कमला जी को आवाज़ लगाई गई। वहाँ पहुँचते ही उन्हें कुत्ते की तरह लटकने वाली स्थिति में रखा गया।
उसकी समझ में कुछ आने तक, मेरा लंड पहले ही उनकी गांड में जा चुका था।
वो चीखती रही, मैं धकेलता गया।
उसके मुंह से आवाजें निकलती गई – हे भगवान… छोड़ दो… बस करो।
उसके कुछ शब्द सुने बगैर ही मैं आगे बढ़ता गया।
पानी को वो तब तक रोके रखता, जब तक पल भर के लिए समय नहीं थम गया।
बहुत बिगड़ गई थी हालत, पैर से पैर नहीं मिला पा रही थी।
होटल की ओर बढ़ते हुए सताक्षी जी ने उनका हौसला बढ़ाया, मोनिका जी के साथ।
फिर हम लोग होटल की ओर चल पड़े, सब मिलकर।
आगे क्या हुआ, वो तो मैं फिर कभी समय पर बताऊँगा।
तुम्हें मेरी वो Xxx फोरसम फक इन फॉरेस्ट कहानी कैसी लगी, पता नहीं।?
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