एक लड़की की मुंह बोली बहन, उसकी दोस्त के साथ हुई गपशप में फंस जाती है।
Desisexkahaniya
मेरे बिस्तर पर दो नंगी लड़कियाँ थीं… एक मेरी मुंहबोली बहन, दूसरी उसकी सहेली। वो दोनों खुले में लेटी थीं, मैं धीरे-धीरे उनके पास जा रहा था। छूने का मन कर रहा था, डर भी था। फिर भी आगे बढ़ गया। उनकी त्वचा गर्म थी, सांसें तेज। मैं हर पल महसूस कर रहा था।.
पहले हिस्से में कथा
मुंह बोली बहन की गांड चुदाई
एक बार मैंने पढ़ा कि मैंने अपनी मुंहबोली बहन इल्मा की गांड मार दी थी।.
फिर मैं बाज़ार से थोड़ी चॉकलेट लेकर आया।
अब आगे मेरे बिस्तर पर नंगी लड़कियों का समय है।
अंदर जाकर मैंने सभी कपड़े उतार लिए। फिर इल्मा के गले में हाथ डालकर वो बिस्तर पर चला गया।.
दोनों के बीच चादर पड़ी थी।.
मुस्कान आई जब उसकी नज़र चॉकलेट पर पड़ी, जो पिघल चुकी थी। रैपर खोलते ही उंगलियाँ अंदर गईं और वह धीरे-धीरे चाटने लगी।.
उसकी उंगली से चॉकलेट का पिघला हुआ हिस्सा धीरे से बह रहा था। मेरे होंठों के पास वो उंगली आई।.
मैंने आँखें घुमाकर कहा - इस तरह खिलाने की सोच रखती हो?
उसकी आँखों में बात झलक आई। अचानक, पैरों को मेरे किनारे फैला दिया। बैठते ही हाथ चॉकलेट पर गया।.
मुझे चॉकलेट का स्वाद तब आया, जब उसने मेरे होंठों को अपने से छुआ दिया।.
उसकी पीठ मुझसे लगी हुई थी, इसलिए नजरें मेरी तरफ झुकी हुईं।.
मुझे लगा, जैसे उसकी जुबान से गलती से चॉकलेट ड्रिप हो रही है।.
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। इल्मा के होठों पर चॉकलेट थी, मैंने धीरे से अपनी जीभ उसके मुँह में भेजी। वहाँ से मैंने चॉकलेट अपने मुँह में खींच लिया।.
चॉकलेट का गाढ़ा घोल हमारे होंठों से फैल रहा था, एक-दूसरे के मुंह में धीरे से जाता रहा। बाहर तक, चिपचिपा लेप हमारे आसपास छा गया था।
इल्मा ने एक के बाद एक टुकड़े लिए, फिर मेरे होंठों पर अपने होंठ रखते हुए धीमे से खिलाया।.
जब चॉकलेट समाप्त हो गई, तो मैंने इल्मा के ऊपर के होंठ के किनारे पर जमी चॉकलेट को धीरे से छेड़ दिया।.
उसने अचानक मेरे होंठ से चॉकलेट का रिसाव छीन लिया।.
थोड़ी देर बाद, हम दोनों के होंठों पर से सब कुछ साफ हो गया।
दोनों जगह पर आकर बैठे।.
हवा में सिगरेट की डिब्बी का धुँआ उठा, फिर मैंने आग लगा दी।.
हवा में सिगरेट का धुआँ घूम रहा था। उसके हाथ ने पीछे हटकर जगह बना ली। एक पल के लिए चुप्पी छा गई। फिर वो बोली, सांस लेकर नहीं चलता मेरा।!
फिर मैंने उसे सिगरेट पीना सिखाया, इसके बाद हम दोनों ने एक-दूसरे के मुँह में धुआँ डालना शुरू कर दिया।.
एक-एक करके तीन सिगरेट हम दोनों ने साथ में पी ली।
आठ बजने में अभी कुछ ही देर लगी थी।.
पलंग पर विश्राम करते हुए मैं और तुम।.
फिर मैंने एक चॉकलेट ली। इल्मा के स्तनों पर घिसते हुए उसे खोल दिया। धीरे-धीरे थोड़ी चॉकलेट उसके दोनों छाती के सिरों पर फैला दी। अब मैंने उसके निपल को चूसना शुरू कर दिया, जीभ से चाटा।.
थोड़ी देर बाद, जब मैंने उसके निप्पल से चॉकलेट साफ कर ली, तो मेरा मुंह उसकी चूत की ओर बढ़ गया।.
मैंने उसकी चूत पर भरपूर चॉकलेट लगाई, धीरे-धीरे हाथ से अंदर तक फैला दिया। पूरी तरह लेपित हो गई वो, बाहर तक चॉकलेट की परत चढ़ गई। इसके बाद मैं चाटने लगा, एक घंटे तक ऐसे ही जारी रखा।
थोड़ी देर बाद मैंने चॉकलेट की परत लपलपा ली। जब वो खत्म हुई, तो मेरी जीभ सीधे उसकी चूत पर जा पहुंची।.
चॉकलेट लगे होठों को वो चाटता गया। इल्मा के सांस तेज़ होते गए, आवाज़ काँपी।.
उसकी चूत पर लगी चॉकलेट मैंने धीरे-धीरे जीभ से साफ कर दी। फिर भी चाटता रहा, बारीकी से हर कोने तक पहुँचकर।.
मस्ती में खोई इल्मा ने आनंद उठाया, धीरे-धीरे मेरे बालों पर हथेली फिराती गई।.
थोड़ी देर के बाद इल्मा की चूत से पानी आने लगा।.
चॉकलेट के मीठे स्वाद के बाद अब नमकीन पानी पीते हुए मज़ा आ रहा है।.
एक-एक बूँद जो उसकी चूत से टपक रही थी, मैंने अपनी जीभ से छेड़ दी।
इल्मा ने तभी मुझे अपनी ओर खींच लिया। वो बस मुझ पर झुक गई, फिर होठों से मेरे होठों को छूने लगी।.
उसका चुंबन कैसे लग रहा था, पता ही नहीं चला।.
वो चुम्मे लेते हुए मुझे ज़मीन पर गिरा दिया। फिर मेरे ऊपर सवार होकर बस ऐसे ही चुम्मे खाती रही।.
नीचे की ओर बढ़कर वो मेरे लंड तक जा पहुंची।.
एक चॉकलेट पहले से उसकी मुट्ठी में थमी हुई थी।.
वह चॉकलेट का पैकेट खोलती हुई सिर्फ़ मेरे लंड पर नहीं, बल्कि आसपास भी सावधानी से लपेटने लगी।.
थोड़ी देर बाद वह सिर्फ पैकेट खोलता है। फिर गरम चॉकलेट धीरे-धीरे तुम्हारे ऊपर आती है।.
फिर वो मेरी गोलियों पर लगी चॉकलेट निकालकर जीभ से छुआने लगी।.
उसने धीमे से चॉकलेट को जीभ से छुआ, लंड पर चिपकी हुई थी वो।
चॉकलेट का एक बड़ा ढेर अब लंड पर जम गया था।.
वह लंड को चाटने लगी। धीरे से मुंह में अंदर उतारकर चूसने लगी, एक-एक हलचल से।.
लंदन में धीमे-धीमे एक बहुत प्यार भरा सा अहसास हो रहा था।.
सच कहूँ तो दोस्तों, वो महसूस होने का अंदाज़ ही कुछ और था।!
एकदम नई तरह से, जैसा पहले कभी नहीं हुआ था, इल्मा मेरे लिए कुछ ऐसा कर रही थी। उसके होठों के बीच मेरा लंड धीरे-धीरे गहराई में जा रहा था। कोई झिझक नहीं, सिर्फ एक स्पष्ट इच्छा थी। हर सांस के साथ वह और भी आगे बढ़ रही थी। ये अनुभव पहले कभी नहीं था।.
अब तक उसके होंठ लंड की चमड़ी तक पहुँच गए थे, क्योंकि वो सारी चॉकलेट निकाल चुकी थी। जैसे-जैसे वो चूसती गई, चॉकलेट की परत धीरे-धीरे गायब होती गई।.
अब वो हल्के-हल्के स्वाद लेते हुए लंड को मुँह में घोल रही थी।.
उसके बालों में उँगलियाँ घुमा रहा था, और साथ ही धीमे-धीमे आनंद भी छलक रहा था।.
मेरा लंड अब ज्यादा देर नहीं टिक पाया, फिर मैं सीधे उसके मुंह में उतरने लगा।.
मैंने जो कुछ रखा था, वो सब उसके होंठों में समा गया। धीरे-धीरे हर बूँद निकल आई, लंड पर कहीं कोई दाग न रहे।
थकान ने घेरा, हम दोनों पलंग पर जा बैठे।.
आधा घंटा बीत गया, हम दोनों पलंग पर थे।.
फिर वो इल्मा रसोईघर की ओर बढ़ पड़ी। कुछ पीने के लिए कोल्ड ड्रिंक उठा लायी। साथ में नाश्ते का सामान भी हाथ में था।.
एक के बाद एक हमने ठंडी पेय मंगवाई। उसके साथ कुछ खाने का सामान भी आया।.
तब मैंने सिगरेट को आग दी।.
एक साथ मिलकर हमने उसे पीया।.
उस वक्त घड़ी में नौ बजने को आए थे।.
फिर हम दोनों ने साथ में जुड़कर वो काम शुरू कर लिया।.
उस रात दोपहर बाढ़ जैसे हुआ, उसके बाद मैंने इल्मा को थोड़ी देर में एक-एक कर तीन बार पूरा कियa। अंत में, छठवाँ घटा समय आगे बढ़कर, एक बार पीछे से किया।.
लंड को साबुन से तब धोया जब मैं गांड मारकर बाथरूम पहुँचा।!
लंड को गांड में डालकर फिर उसे साफ किए बिना मुँह में लेना मुझे सही नहीं लगता।.
लंड धोकर मैं वापस आया, फिर हम एक-दूसरे से सटकर सो गए।
उस रात के बाद, जब पहली बार साथ आए थे, इल्मा अस्पताल नहीं जा पाई। तीन दिन बीत गए बिना किसी जाँच के।.
मैंने उसके साथ पहले तीन दिन बिताए। हर पल में वो मेरे साथ रही। कभी आराम नहीं किया मैंने।.
फिर वो वक्त आता, जब काम से लौटकर हम दोनों बिना कपड़ों के हो जाते। काफी थकान होती, मगर एक-दूसरे के पास जाना शुरू कर देते।.
एक महीने का वक्त ऐसे ही बीत गया। उस समय में कई बार मैंने इल्मा के साथ सेक्स किया, कभी-कभी पीछे से भी।
तभी मैंने उसकी तरफ से देखा और सवाल किया - लेस्बियन सेक्स के बारे में हर छोटी बात।.
उसके बारे में भी सवाल आया कि क्या वो किसी के साथ है।.
इल्मा ने कहा, वो भी किसी के साथ नहीं है। ऐसा इसलिए है कि हम दोनों का ख़्याल एक जैसा चलता है।.
मैंने जानना चाहा - किस तरह की सोच?
इल्मा ने कहा - उसका बॉयफ्रेंड बनकर चलना, उसके तरीके से जिंदगी जीना, फोन पर घंटों बातें करना... ऐसा कुछ भी हमें पसंद नहीं। हम तो बस आराम से रहना चाहते थे। इसीलिए ना उसने कोई लड़का बनाया, न मैंने। धीरे-धीरे हम दोनों ने एक-दूसरे के साथ रहना शुरू किया। खुश रखने का काम खुद कर लेते थे, तो किसी और की जरूरत ही नहीं पड़ी। अब मैं तुम्हारे साथ हूं। न तुम्हारी कोई है, न मेरा कोई है। और न ही चाहिए। क्योंकि हम दोनों अपने आप में समा गए हैं।
एक महीने से यह चल रहा था, वो सब।.
सोमवार की सुबह जगे तब तक हमारी नींद पूरी हो चुकी थी।.
एक रविवार सुबह, लगभग 11 बजे, तभी किसी ने दरवाज़े पर धीमी आवाज़ की।.
उस वक्त हम दोनों कपड़े पहने बिना लेटे थे।.
बस इतना ही, हम दोनों हमेशा नंगे रहते। किसी के आने का सवाल ही नहीं था मेरे फ्लैट पर। मकान मालिक दूर रहते थे, और मैं हर बार किराया समय पर भेज देता। ऐसे में वो मेरे चले जाने के बाद कभी नज़र नहीं आए।.
फिर मैं सोच रहा था कि ये कौन हो सकता है।.
फिर भी डर लगने का सवाल ही नहीं था... इसलिए कि यहाँ कोई ऐसा नहीं घूम रहा था जिसे मैं पहचानता।.
सोने का समय इल्मा के लिए था, मैं तब दरवाज़े की ओर बढ़ गया, शॉर्ट्स और टी-शर्ट में ढका हुआ।
खोलते ही दरवाज़ा, मेरे सामने एक नज़र आई – कद में छोटी, उम्र लगभग 21 की।.
उसकी चमड़ी इल्मा जैसी सफेद थी। शरीर के प्रति हिस्से - छाती, कमर, कमर - ये सब मिलकर 32-26-34 का आकार बनाते थे। जींस ने तगड़ा घेरा हुआ था, ऊपर से टीशर्ट ढीली झांक रही थी।.
बालों को ऊपर की ओर घुमाकर उसने गाँठ बाँध रखी थी।.
एक अलग तरह का जूड़ा बनाने पर हर लड़की को सजीला दिखना मिलता है।.
एक लड़की का अंदाज़ इतना आकर्षक था।.
उसे देखते ही मन में ख्याल आया - इसका नाम क्या होगा।.
उसकी गहरी आवाज़ में एक सिहरन थी। वो बोली, "मैं कोमल हूँ, इल्मा की पुरानी दोस्त।" इल्मा? कहाँ है वो?
सिर हिलाकर मैंने हां कही, फिर उसे भीतर आने की इजाज़त दे दी।.
खो चुका था मैं उसे देखकर इतना कि बुलाते वक्त याद भी न आया - इल्मा नंगी पड़ी है मेरे बिस्तर पर।.
अब जब याद आया, सिर में सवाल कौन लाया।.
अब कुछ बदल नहीं सकता था। वापस उसे भेजना मेरे बस में नहीं था।.
इल्मा कहीं गुम हो गई थी, कोमल ने सवाल कियa।?
उस वक्त मैं कुछ और कह भी नहीं सकता था, इसलिए मैंने सिर्फ कमरे की ओर इशारा किया तथा कह दिया - वह अंदर सोई हुई है।
उसकी नज़र मुझ पर पड़ी, कुछ अजीब सी।.
सिर धीरे-धीरे नीचे हो गया मेरा।.
अंदर के लिए उसका रुख किया, मैं तो बाहरी हिस्से पर जा बैठा।.
उसके बाद पंद्रह मिनट के आसपास ही वो दोनों अंदर से बाहर निकली।.
ऊपर से तो बस एक छोटी टीशर्ट थी, जिसका कमर का हिस्सा खुला पड़ा था। नीचे सिर्फ पैंटी पहनी हुई थी इल्मा।.
बस वहीं जगह पकड़ कर बैठा हुआ था मैं।.
जब इल्मा ने कोमल को आसन पर जगह दी, वो मेरे पास ही टिक गई।.
इल्मा ने कहा, "मैं कॉफी बनाकर लाऊगी।"!
थोड़ी देर बाद, हम दोनों के बीच गपशप शुरू हो गई।.
इल्मा अब तक कॉफ़ी व साथ में नाश्ता ले आयी।.
तीनों ने कॉफ़ी की चुस्कियाँ लीं, इसके बाद इल्मा सामान सही-सलामत किचन में वापस जमा करने लगी।
बोझ उतारकर इल्मा लौटी। धीमे कदमों से आई, मेरी ओर झपटी। पलक झपकते ही गोद में जगह बना ली। फिर बिना कुछ कहे मेरे होंठों पर होंठ चढ़ा दिए।.
गोद में बैठी इल्मा ने मुझे चूम लिया। कोमल पास ही तब बैठी थी, सामने वाली जगह पर।.
उसके बाद कोमल के सामने कुछ नहीं रहा, तो मैंने भी इल्मा के पास होना शुरू कर दिया।.
पांच मिनट तक चला वो प्यार भरा पल, जब हम एक-दूसरे से लिपटे रहे। कोमल बस देखती रही, आँखों में कुछ सवाल, कुछ हैरानी।.
उसके बाद हमारी मुट्ठियाँ खुलीं।.
हवा के झोंके की तरह इल्मा का एक हाथ मेरे गाल पर आया। उसने धीरे से मेरा सिर कोमल की ओर मोड़ दियa। दूसरा हाथ उसने कोमल के कंधे पर फेरा। वह उसे अपनी ओर खींचने लगी।.
हरकत ने जब इल्मा की काम किया, तभी मुँह कोमल के पास खुद-ब-खुद आ गया।.
एक हाथ से कोमल को सहलाते हुए मैंने वहीं से किस करना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर बाद कोमल ने भी पास आकर हाथ फैला दियa। एक हाथ मेरे ऊपर गया, तो दूसरा इल्मा की जांघ पर रख दिया।.
थोड़ी देर बाद इल्मा मेरी गोद से उठ गई। फिर वह हम दोनों के हाथ पकड़ कर कमरे की ओर चल पड़ी। जैसे ही बिस्तर के पास पहुंची, उसने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया। अपने आप कोमल को चूमने लगी।.
फिर मैं धीरे से बिस्तर पर आकार लेट गया, नज़र उठाकर उन दोनों पर जम गई।.
उसके कपड़े में नरम जींस थी, साथ में टीशर्ट। हल्का सा झिझकती हुई लग रही थी, बस इतना ही।!
इल्मा ने धीरे से अपने होंठ पीछे खींच लिए। फिर मुस्कुराते हुए बोली - तू घबरा क्यों रही है? पहले जैसे हम दोनों बिना झिझक के एक-दूसरे को छूती थीं, आज भी वैसे ही बिना डर के जी भर के महसूस कर। मैं पूरे चालीस दिनों से ऐसा कर रही हूं। सच बताऊं तो डिल्डो के मुकाबले असली लंड से बहुत ज़्यादा तृप्ति मिलती है।!
बस इतना कहते-कहते, कोमल की टीशर्ट इल्मा के हाथ से फिसल गई।
ऊपर से कोमल में केवल एक काली ब्रा थी, नीचे जींस।.
इल्मा ने कोमल को भी उसी बेड पर धकेल दियa, सीधा मेरी ओर।.
कोमल सीधे मेरे ऊपर गिर पड़ी, पीठ के बल।.
उसकी पीठ सीधे मेरे पेट पर टिकी थी। कमर के पीछे वाले हिस्से को मेरा लंड छू रहा था। ऐसे में कोमल मेरे ऊपर झुकी हुई थी।.
उसी पल इल्मा बिस्तर पर चढ़ गई, फिर कोमल की जींस का बटन अपने हाथ में ले लिया।.
अब मैंने शुरू किया, धीरे-धीरे उसके छाती पर ब्रा के ऊपर से हाथ फेरना।
इल्मा ने धीरे से उसकी जींस का बटन खोला। फिर कमर पकड़कर नीचे खींच दी।.
कोमल के पास अब सिर्फ ब्रा और पैंटी थी।.
ऊपर आते ही इल्मा ने कोमल को पकड़ लिया।.
थोड़ी देर कोमल का दूध निकालने के बाद मैंने इल्मा की टीशर्ट ऊपर उठाने की कोशिश की। तभी वह खुद ही हाथ ऊपर करके मदद करने लगी।.
इल्मा के पास अब सिर्फ़ पैंटी ही बची।.
इल्मा ने कोमल के होंठ छोड़े, फिर उसकी गर्दन पर मुंह लगा दिया। आगे बढ़कर वो उसके स्तनों तक पहुंची, ब्रा के ऊपर से दबाव डालते हुए चुम्मा खा लिया।.
इसे देखकर मैंने कोमल की ब्रा का हुक खोल दिया।.
बिना कुछ कहे, इल्मा ने अपनी ब्रा उतार फेंकी। कोमल के मुँह से दूध की तलाश में वो झुक पड़ी।.
इस बीच, मैंने कोमल पर किस कर दिया।
कोमल अब पूरी तरह से खिल उठी थी, मेरे साथ हर कदम पर।.
धीरे से इल्मा के हाथ कोमल की पैंटी तक जा पहुँचे। फिर वो पैंटी नीचे उतार दी गई।.
कोमल की चूत जब मेरी नज़र में पड़ी, मुझे अच्छा लगा।.
उसकी चूत सफेद, गुलाबी रंग की थी। जैसे इल्मा की होती थी।.
फिर भी कोमल की चूत में वो खिले गुलाब-सी पंखुड़ियाँ नहीं झांक रही थीं, जैसे इल्मा की चूत में दिखती थीं। फिर भी, उसकी चूत अच्छी तरह से बनी हुई थी।.
अब तो किस्मत वाले में से भी कोई ऐसा नहीं था जिसके बिस्तर में दो नंगी लड़कियाँ हों। उनमें से एक की चमड़ी धूप में पली हुई और दूसरी की छाया में जैसे।
अब कोमल ने अपना रंग पहचान लिया था।.
वह उठी, इल्मा को मेरे सिर पर धकेल दिया। फिर पैंटी नीचे करने लगी।.
इल्मा के ऊपर से कुछ नहीं था। कोमल की हालत भी वैसी ही थी। मेरे शरीर पर टी-शर्ट और शॉर्ट अभी तक बने हुए थे।.
टी-शर्ट धीरे से नीचे खिसकने लगी, कोमल के हाथ उसे खींच रहे थे। पैंट का फास्ता ढीला पड़ गया, इल्मा की उंगलियां बटन पर थीं।.
फिर वहीं कुछ सेकंड में, हम सबका कपड़ा गायब था।
फिर इल्मा ने तुरंत मेरा लंड मुँह में डाल लिया, अब वो उसे चूस रही थी।.
उसी पल इल्मा की जांघों के बीच कोमल ने मुँह छिपा दिया।.
अब तो मेरा दिमाग सिर्फ कोमल की जांघों के बीच घुसने पर था। हाथ ने खुद-ब-खुद उसकी टांगों को पकड़ लिया। धीरे से खींचा तो वह मेरे करीब आ गई।.
उसकी नाज़ुक, गुलाबी त्वचा के पास मेरे होंठ आ गए। फिर मैंने धीरे से चाटना शुरू किया।.
तभी एक समोसे-जैसा मोड़ आया, मेरा लंड इल्मा के होठों में था। उधर कोमल की चूची मेरे मुंह पर टिकी थी। वापस घूमकर देखा तो इल्मा की चूत कोमल के होठों से चिपकी थी।.
तभी वह पल आया, जब हम तीनों ने तिकोने ढंग से एक-दूसरे के शरीर के हिस्सों को छुआ, चाटा।
तेरह मिनट के आसपास हवा चली, फिर पेड़ से पत्तियाँ टूटकर नीचे गिरने लगीं।.
रस तक पहुँचने में कोमल को ज्यादा वक्त नहीं लगा। इल्मा की जांघें हल्के से कांप उठीं। हर स्पर्श पर एक झटका-सा गया। कोई बात नहीं की थी, सब कुछ चुपचाप हो रहा था।.
बारिश थमते ही इल्मा कहीं चली गई। कोमल मेरे ऊपर सवार हुई, अब हम उलटे ढंग से जुड़े थे।.
मैं कोमal की चूत चाट रहा था। इधर कोमल ने मेरे लंड को मुँह में ले लिया।.
बाहर निकलते ही इल्मा कोई काम लेकर चल पड़ी।.
मैं तब कोमल के साथ 69 में था। उसकी चूत पर मेरा ध्यान था, मैं उसे आराम से चाट रहा था। वहीं उसके होंठ मेरे लंड पर थे। वो भी अपने तरीके से जुटी हुई थी।.
थोड़ी देर बाद, कोमल मेरे होंठों तक आ गई। लगभग सात से आठ मिनट में वो मेरे मुंह पर थी। मैंने उसका सारा खारा स्वाद धीरे से चख लिया।.
थोड़े देर बाद मैं भी उतना ही खो गया। कोमल ने सब कुछ अपने में समेट लिया, फिर धीरे-धीरे हर बूंद चखी और सफाई कर दी।
इसके बाद हम दोनों पलंग पर लेट गए, फिर चुपचाप किस करना शुरू कर दिया।.
अगले हिस्से में, मेरे बिस्तर में दो नंगी लड़कियों का सीन जारी रहेगा।.
अभी तक क्या हो चुका है, उस पर आपके ख़्याल क्या हैं?
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