एक दिन मैंने अपनी ममेरी भाभी को चोद चोद कर रुला दीया
Savita Bhabhi Sex Stories
शादी के दिन से ही वो मेरे दिमाग में घर कर गई थी। कुछ महीने बाद मौका मिला, तो रिश्ते की सारी डगरें पीछे छूट गईं।.
मेरा नाम प्रेम है। कहीं लगता हूँ, फरीदाबाद में रहता हूँ। हरियाणा की धरती से जुड़ा हूँ मैं।!
सबने सुनी थी मेरी पिछली कहानी
कमसिन साली की पहली चुदाई
प्यार से भरा वक्त दिया, इसलिए डाक के ज़रिए आभार जताना चाहूंगा।.
किसी भी लड़की का फोन नंबर मांगने की बजाय, सभी से गुजारिश है कि ऐसा न करें।.
फिर मौज है। इस बार कहानी है देवर और भाभी के बीच का गुपचुप पल। तनाव था, संयोग था, फिर क्या हुआ - छुपते-छुपाते शुरू हो गया सब कुछ। घर के अंदर के कमरे में, धूप झलकती खिड़की के पास, एक ऐसी चुप्पी छाई जहाँ आवाज़ें टूटकर गिर रही थीं। उसके हाथ काँपे, उसकी साँस रुकी, फिर बढ़ी तेज़। दीवारें सुन रही थीं, पर किसी को खबर नहीं। कपड़े फिसले, नज़रें टकराईं, फिर लिपट गए एक-दूसरे में। बाहर चिड़ियाँ चहचहा रही थीं, अंदर सब शांत था, बस धड़कनें बोल रही थीं।.
अब तो बस पढ़िए, देवर-भाभी के संग चल रही हवस की कहानी।!
एक शाम, जब मैं और मेरी ममेरी भाभी घर पर थे, तभी सब कुछ शुरू हुआ।.
मोनिका, जो संजय के साथ रहती हैं, मेरे मामा की पुत्रवधू हैं।.
बचपन के दिनों से हम दोनों के बीच प्यार का रिश्ता चला आ रहा है। वो लगाव आज भी मौजूद है, संजय के साथ मेरा।.
मेरी उम्र तुम्हारे बराबर की है।.
एक दिन मामा जी ने मोनिका को देखा, संजय के लिए। उन्हें वह बातों-बातों में पसंद आ गई।.
सगाई के दिन मोनिका को देखकर मेरी आँखें ठहर सी गई।!
उसके चेहरे पर वैसा ही जलवा था।.
थोड़े दिन सगाई के बाद, अब उनकी बातचीत फोन पर होने लगी।.
मामा के घर जाने पर किसी वक्त मोनिका से गुफ्तगू हो ही जाती।.
इसके बाद, मैंने मोनिका की तरफ से फ़ोन नंबर की जानकारी हासिल की।.
फिर वो मुस्कुराया, और सौंप दियa।.
बात करने का सिलसिला अब रोज़ के घंटों तक फैल गया।.
ऐसे कुछ समय में हम दोनों के बीच प्यार भरा नाता बन गया, फिर चुपके से उनकी शादी भी हो गई।.
हर बार शादी के बाद उनके घर पहुँचता, मोनिका की आवाज़ सबसे पहले सुनाई देती।.
बातचीत चलती रहती तो धीरे-धीरे लंड सख्त हो उठता। मैं मुट्ठी से काम चलाकर आराम पाने की कोशिश करता।.
अकेले पल में मोनिका मेरे साथ जुड़ जाती।.
कभी-कभी बिस्तर पर एक साथ लेटना भी होता था।.
फिर भी, कोई कदम उठाने का साहस नहीं होता।.
कभी कभी मोनिका मेरी ताना लेती, बस ऐसे ही मज़ाक में। उसके साथ बातचीत हमेशा हल्की फुल्की रहती।.
कभी तो वो संजय के आगे भी बोल पड़ती - अरे, प्रेम जी मुस्कुरा भी नहीं लेते!
सुबह के समय घर में आवाज़ तक नहीं थी।.
थोड़ी देर पहले हम बातें कर रहे थे, उधर वो अपने काम में लगी हुई थी।.
तब दोपहर में काम खत्म हुआ, फिर नहा लिया। बाद में एक नीली साड़ी ओढ़कर वह घर पहुंची।.
खाना खाकर हम दोनों बेड पर लेट गए, उसके बाद टीवी की ओर ध्यान चला गया।.
बस मैंने सुझाव दिया – चलिए, भाभी की शादी की डीवीडी पर नज़र डालते हैं।!
तुरंत जब मैंने प्लेयर चालू किया, स्क्रीन पर एक अश्लील फिल्म दिखाई दी।.
शर्म के मारे मोनिका के चेहरे पर आभा छा गई, जब उसने नीली फ़िल्म की ओर नज़र डाली।.
बिना सोचे मैंने टीवी का बटन दबा दिया, फिर चुपचाप पलंग पर लेट गए।.
हाथ उसकी मुट्ठी में समा गया।.
मोनिका खामोश रही।.
तब मैं बोल पड़ा - अरे भाभी, क्या ज़िन्दगी का आनंद उठा रही हो?
उसने झूमते हुए कहा - अच्छा, तुम भी बस शादी कर लो … वरना कोई प्रेमिका ढूंढकर खुश रहो। किसी ने मना कियa है क्या?
बस इतना कहा - तुम्हारे होने पर किसी दूसरे की बात ही क्यों सोचूँ? मेरी गर्लफ्रेंड तो तुम हो।!
उसने कहा - अब तो मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड हूँ, देवर जी।!
बोला मैंने – सुनो भाभी, एक बात पूछूँ… जिस तरह नीली फिल्मों में लोग सेक्स करते हैं, क्या आप दोनों भी ठीक वैसे ही करते हो?
उसने कहा - अब बस करो इस हाव-हवाईपन को। ये सब तो थोड़ा ज्यादा हो गया है!
कहता हुआ मैंने कहा - अब तो बस, इतना ही हो चुका है!
फिर उसके मुँह से निकला - अरे भला… इतनी जल्दी मैं तेरी प्रेमिका से अच्छी दोस्त बन गई। कुछ और बचा हो, तो वैसा ही बन जाए।!
थोड़ा सिमटते हुए मैंने कहा - अगर दिल पर लगा, तो माफ़ी।!
इसके बाद घटा जो कुछ, मेरे विचारों से पूरी तरह अलग था।!
अचानक उसने किस करते हुए कहा - मेरे पागल सनम, तुम्हारी कोई बात मुझे खराब नहीं लगती।!
खबर सुनते ही मेरे पैरों तले ज़मीन गायब हो गई।.
मैंने उसे खींच लिया, तो वह बेजान सी गुड़िया-सी लग गई मेरे पीछे।.
उसके गालों पर हथेली फिरती रही, इधर-उधर मोनिका के चेहरे पर बिखरे चुंबन।.
बिस्तर पर मोनिका सांप की तरह टेढ़ी होकर चल रही थी।.
थोड़ी देर में, मोनिका का ब्लाउज़ नीचे गिर चुका था। पेटीकोट भी साथ ही पड़ा था।.
सामने वह खड़ी थी, मेरी सपनों की रानी, नीले रंग की ब्रा और पैंटी में।!
उसकी छाती पर हथेली रखकर मैंने धीरे से दबाव डाला, वहीं दूसरे हाथ की उँगलियाँ नीचे की ओर फिसल गईं।.
मोनिका ने कहा - तुम्हारी चालाकी अकेले में है। मेरा सब कुछ छीन लिया, और खुद कुछ भी नहीं गिराए।!
कह दिया मैंने - अब तुझे कहां उघाड़ा है प्राण!
उसके मुंह से निकला - अब तो कुछ शेष भी नहीं। अब तुम भी कपड़े उतार दो!
एक बार मैंने कहा - जब तुमने मेरे सभी गलत कदम सहे हैं, फिर मेरे लिए तुम भी कुछ छोड़ दो।!
तुरंत वो मेरे सभी कपड़े तनिखट से उतार चुका था। बेबस होकर फिर हम एक-दूजे के होंठ चखने लगे, धीरे-धीरे शरीर को छूने भी शुरू कर दियa।.
उसकी ब्रा को हटाने के बाद मैंने पैंटी भी निकाल ली।.
उसके स्तन पहाड़ों की ओर खड़े थे। नारीमार्ग में चिकनाहट थी, जैसे कुछ भीगा हो।.
उसकी चूत पर हाथ घुमाते हुए मैंने पूछ लिया - अब तक झांटें साफ नहीं की?
उसने हिचकियाँ लेते हुए कहा - अभी!
मैंने कहा - शायद मेरी जान पहले ही तैयार थी, बस इतना।!
अचानक मोनिका ने कहा - उफ़, इतनी गलत भाषा क्यों बोलते हो तुम? हैरानी होती है।!
पहले मैंने सवाल किया - चुदाई के लिए तुम्हारे पास क्या शब्द है?
उसके मुँह से निकला - कुछ भी तो नहीं!
इसके बाद मैंने अपना लिंग उसकी हथेली पर रख दिया। फिर मैंने उसकी योनि में उंगली सरकाई।.
उसका शरीर हल्के-हल्के कंपकंपी में आ गया।.
उसकी त्वचा पर मेरे होंठ सरक रहे थे।.
कभी मुंह से लेकर पेट तक। कई बार नाभि के पास दबा हुआ दर्द। जांघों में ऐसा एहसास, मन मचल जाए।.
उसकी जांघ पर होंठ पड़ते ही वह झटके से ऊपर उठी। "थोड़ा रुक," उसने कहा, "अभी मैं तैयार नहीं हूँ।"!
उसकी टांगें मेरी मुट्ठियों में थीं। हल्के से खींचते हुए मैंने अपनी जीभ चुत पर फेर दी।.
उसके होठों से एक लंबी सांस निकली, धीमे-धीमे आवाज़ बदलने लगी। उसने मेरे सिर को अपनी ओर खींचा, बालों में उंगलियां फंसा लीं। गर्दन पर तनाव महसूस हुआ, झटके से चेहरा नीचे को धकेल दिया गया।.
कुछ पल चूसने के बाद मैं धीरे से खिसक गया।.
उसकी तरफ़ देखते हुए मैंने सिर हिलाकर संकेत दिया।.
उसने इंकार कर दिया।.
क्या तुमसे प्यार नहीं होता मैंने पूछा।?
उसने कहा - प्लीज़ भई, इसका अंदाज़ मत दिखाना। मुझे सख्त नफरत है, ऐसा हुआ तो उबल उठूंगी।!
बस मैंने कहा - ये बात नहीं टिकेगी।!
एक बार उसने लंड को मुंह लगाया, फिर जल्दी से पीछे हट गई।.
जब मैंने कहा, तो उसके होठों में सिर्फ एक चीज़ थी।.
इसके बाद मोनिका को एक तरफ किया गया। अब हम दोनों ने 69 में जुदा-जुदा ढंग से लिंग और योनि पर ध्यान दिया।.
उंगलियाँ उसकी चुत में सरकने लगीं, मैं हल्के से चूसने लगा।.
हमले के बाद मोनिका लड़खड़ाई, तब मैंने उसका सारा चूतरस निगल लिया।.
मेरे लंड महाराज ने भी उसके मुँह में उल्टी कर दी।.
वो तुरंत उठ खड़ी हुई, फिर सीधे बाथरूम की ओर दौड़ पड़ी। अंदर जाकर उल्टी शुरू कर दी।.
वापस आते ही, पानी से चेहरा साफ करके, मैंने माफ़ी माँगनी शुरू कर दी।.
उसने होंठ फटकारते हुए कहा - अब जो सूझा, वही किया।!
मैं हंसने लगा.
उसने छाती पर वार करते हुए कहा - तुम्हारा अंदाज़ बहुत खराब है।!
मैंने पूछा- सच्ची?
उसने मेरे सीने से चिपकते हुए कहा - नहीं, तुम वाकई बढ़िया हो। मेरे साथ ऐसा प्यार कभी किसी ने नहीं किया… इतना धन्यवाद!
चपट से उसके गाल पर मारते हुए बोला - ये क्या, प्यार करो तो शुक्रिया भी कह देना!
अच्छा बाबा, अब कुछ नहीं कहूँगी।!
उसकी उँगलियाँ मेरी कमर पर आईं, मेरा हाथ उनके बालों में।.
अब वो लंड फिर से हद में है।.
मोनिका को पीठ के बल लेटाया मैंने, फिर उसके नितंबों के नीचे दो तकिए सुलभा। इससे उसकी योनि स्पष्ट ऊपर को झुक गई।.
एक झटके में मैंने लंड को चूत पर बैठाया, पर वह छूट गया।.
उसने कहा - कुछ समझ तो लो।!
तब मैंने बोला - ऐसे चूसो कि सब कुछ तर हो जाए।!
हथेली में थूक भरा, फिर झट से लंड पर घिस दिया। हाथों से पकड़ कर धीमे से चूत के ऊपर बैठ गई।.
फिसलते ही नारियल का छिलका अंदर चला गया।.
पैर पटकते हुए मोनिका दर्द में कराह उठी।.
क्या बात है? मैंने पूछ लिया। संजय ने कोई गलती की थी, शायद।?
उसने कहा - जब वो पीने या बाहर घूमने से खाली होंगे, तभी सही!
एक झटके के साथ मैंने फिर हलचल पैदा की, तभी मोनिका की आवाज़ ऊपर उछल गई।.
उसके होंठ बंद करते ही मैंने एक और झटका दियa। सारा लंड भीतर चला गया।.
थकान से मोनिका के पैर लड़खड़ाने लगे।.
पानी के छींटे मुँह पर डालते ही वह सचेत हुई, फिर रोना शुरू कर दिया।.
मैंने धीरे से उसके चूचों पर हाथ फिराया, छूकर सहलाया।.
थोड़ी देर बाद जब उसका रंग सही हुआ, मैंने धीमे-धीमे झटके लगाना शुरू किया।.
बाहर निकलते ही लंड पर मोनिका का खून चढ़ा हुआ था।.
मैंने मोनिका की चूत पर थोड़ा सा थूक डाला। इसके बाद लंड को वापस अंदर धकेल दिया।.
मोनिका के मुँह से धीरे-धीरे आवाजें निकलने लगीं - आ आहह… हाय रे… उफ्फ… ओह बचाओ।!
हवा में सिर्फ़ उसकी सांसें थीं। मैंने उसके होंठ चखे, झटके दिए।.
मोनिका की चुत में मेरा लंड अब धीरे-धीरे घुसने लगा।.
अब मेरी तलवार हाथ में है।.
मोनिका ने कहा - चल, अब कर ही लेते हैं।!
मैंने कहा- चूसो!
बार इस पर वह मुँह खोले बिस्तर के कपड़े से लंड साफ करती है। चूसना शुरू कर देती है।.
थोड़ी देर सांस रोककर बोली - इतना हो गया।!
बोला मैं - अब क्या होगा?
उसकी आवाज़ आई - कुछ मत करना… वहाँ से हट जाओ, कपड़े पहन लो!
हवा में उड़ती मेरी सारी बहादुरी कहीं खो गई।!
ऊपर चढ़ते ही मैंने धीरे से अपना लंड उसके अंदर कर दियa।.
उसके मुँह से हंसी छूट गई। हां, ऐसे ही करते रहो… आआ हहह… प्यारे, इतनी देर से कहां आए!
हवा के झोंकों की तरह मैं धमाकेदार होकर आगे बढ़ा।.
मोनिका पहले ही दो मौकों पर गिर चुकी थी। अब उसके मन में सिर्फ इतना था - बस, ये काफी हुआ।.
उसका कहना था - सचमुच, अब तो निकाल देना भई! मेरे पैरों में तकलीफ हो रही है।!
कहा मैंने - अगर खुद हटाऊँगा, तो किसी जगह भेजना ही पड़ेगा।!
उसने आँखें फैलाकर पूछा - क्या मतलब?
उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए मैंने पूछा - इस जगह से तुझे क्या लगता है?
अचानक वो मेरा हाथ छोड़कर चिल्लाई - नहीं, ऐसा कभी नहीं।!
बीच के समय में मैं हल्के-हल्के झटके देता गया।.
उसका तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगा।.
वह उत्सुकता से मेरी पीठ पर हाथ फिराने लगी, फिर अचानक मेरे होंठ चूस लिए।.
मेरे होंठ सुन्न हो गए, उसके चुंबन में इतनी ताकत थी।.
तेजी से आगे बढ़ने लगा मैं।.
थोड़ी देर बाद, एक-एक करके हम दोनों से पत्तियाँ टूटने लगी।.
भाभी के साथ देवर का हलचल अब पहले जैसी नहीं।.
उसकी बाँहें मेरे कंधे पर टिकी थीं।.
कुछ समय पश्चात् वह मेरे पास से दूर हटने को बोला।.
जब मैंने चादर हटाई, तो वह खून से लथपथ थी, बीच में हम दोनों का पसीना भी समा गया था।.
उठते हुए पैर फिसले, वो संभलकर बाथरूम की ओर बढ़ने लगी। आवाज़ छूटी - ऐसा क्यों होता है… अब तो कदम भी आगे नहीं बढ़ रहा!
उसे गोद में उठाया, फिर सीधे कमोड पर बैठा दिया।.
उसने कहा - अब चले जाना।!
ठीक है, बस कर दो। मैं तो इधर ही मौजूद हूँ।!
उसने कहा - अरे नहीं, ऐसा करने से मुझे दिक्कत होती है!
एक बार मैंने कहा - जब तुम्हारे साथ वो सब किया, तो लगा कुछ भी नहीं। पर अब जैसे ही छोटी सी बात आई, घबरा गए।!
उसने कहा - अरे, ऐसी बातें मत किया करो। मुझे पसंद नहीं आता है।!
वो मुझे बाहर कर गया।.
बाहर निकलते ही उसका पेट दुखने लगा।.
उसकी हिलती कमर देख मेरा साहबाज़ फिर से उठ बैठा।.
उसे कमरे में ले जाकर बिस्तर पर धीरे से लिटा दिया, इसके बाद हाथ आगे बढ़ाया।.
उसके मुँह से निकला - अगर तुम मेरे पति होते, तो क्या बात होती।!
उसकी आँखों में पानी आ गया, जब वह बोलने लगा।.
उस दिन मैंने बात को समझाया, फिर हम दोबारा प्यार कर लिया।.
हर बार जब संभव होता है, तब हम दोनों के बीच वो छेड़छाड़ शुरू हो जाती है।.
उसके बिस्तर पर, मेरे कमरे में, किराए के प्रेमघर में, सड़क किनारे खड़ी गाड़ी में… हर जगह वो लड़खड़ाई थी।.
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