भाभी की चूत और गांड चाट कर अपने लंड से चोदा

Desisexkahaniya

Jan 9, 2026 - 12:12
Jan 9, 2026 - 16:50
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भाभी की चूत और गांड   चाट कर अपने  लंड  से चोदा

भाभी के घर में ही सब कुछ हुआ। उन्होंने पहले मूत दिया, जो चूत से आया था। फिर धीमे-धीमे बात गर्म हो गई। ऐसे में उन्होंने मुझे अपनी चूत दे दी।.

एक दिन, सुमीत तिवारी बाहर बैठे थे। उनकी गली में एक औरत रहती थी। धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई। कभी कभी चुपके से मुलाकात हो जाती। फिर ऐसे हालात बने। जिन्दगी में कुछ अजीब खींचाव आया। दोनों के बीच बढ़ता तनाव बदल गया। छुपी हुई इच्छाएं आगे आई। घटनाएं ऐसी हुईं जो किताबों में नहीं लिखी।.

एक बार मैंने जो देखा, उसे सुनकर हैरान रह गए। भाभी के चूत से पेशाब टपक रहा था। मैंने वो पानी पी लिया। क्या होगा अब, पता नहीं।

अभी तक जो मैंने सीखा था, उसमें यह भी था कि भाभी ने मुझे अपनी पेशाब पिलाई थी। इसके बाद मेरा काम था उसकी चुत को चूदना।.

भाभी के साथ गंदा सेक्स अब आगे।

अब तो मेरा ध्येय सिर्फ इतना था – भाभी की गुदा में अपना घोंप देना। मैं जिसके लिए आया था, वही करना चाहता था।.

अगली सुबह, जब मैं भाभी के घर पढ़ाई के लिए पहुंचा, तो वो काले गाउन में थी। आकृति पर चपके उस कपड़े से उनकी गांड का आकार साफ झलक रहा था। ऊपर की तरफ बूब्स भी ध्यान खींच रहे थे, ढीले नहीं, बल्कि टांगे हुए से लग रहे थे।.

जैसे मैंने पैर रखा, भाभी बोलीं - आ गया!

मैंने हां कहा.

मुस्कान के साथ भाभी बोलीं - आज तू किसका मुँह चाटने वाला है… मेरा प्यारा कुत्ता!

कह दिया मैंने - जो तुम कहोगे, उसी पर झपटूंगा।!

फिर भाभी बोली - गांड और चूत के सिवा तुझसे और क्या कराया जाए… चल, आज तू मेरी चूत निकाल लेना!

बस इतना कहा - देख लेना, सिर्फ़ एक मौका तो दे दो।!

सोफे पर जाकर बैठ जा तू। भाभी ने प्यार से एक झप्पड़ मारा, फिर बोलीं - इतनी बार भाभी-भाभी कहकर मेरी उम्र का एहसास मत कराओ। हाँ… अंदर चल, ओ छोटू!

भाभी ने कहा और धीमे से कदम बढ़ाते हुए कमरे में प्रवेश किया।.

बात सुनते ही मैं एक बार फिर ‘ठी है भाभी’ कह बैठा।.

पीछे मुड़कर भाभी बोलीं - तुम्हें साफ कहा था, इस शब्द का इस्तेमाल नहीं करना।!

अब तो मैं चुप रहूँगा, सच कहता हूँ यार।!

भाभी मुड़ीं, मेरे पास आईं। उन्होंने मेरे बाल पकड़े। मेरा सिर खींच कर अपनी चूत के पास ले गईं। फिर बोलीं - अब सख्त सजा होगी।!

उसने कहा, इधर देखो - फिर काले गाउन को सरकाकर पैंटी नीचे की। लाल कपड़ा हाथ में आ गया।.

शुरू में वो चाहता था कि मैं बोलूँ।.

मैंने जैसे ही अपना मुँह खोला, वैसे ही उसकी चूत आगे बढ़ गई।.

उसने बीच की उंगली अपने हाथ से मेरे मुँह में डाल दी, फिर थूक भी छोड़ दिया।.

तभी उन्होंने अपनी पैंटी सीधे मेरे होठों पर धकेल दी, जबकि वह खुद अपनी गांड के पास घिस रही थी।.

उसने कहा - यार, अभी इसे बाहर मत निकालो… तब तक जब तक मैं स्वीकार न कर लूँ!

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उस पैंटी से एक तरह का स्वाद आ रहा था, मानो भाभी हर दिन उसी में अपनी चुत का साफ़ा छोड़ देती हो।.

अब रुक जा। खाने की तैयारी मैं सम्भाल लेती हूँ।!

सिर्फ सहमति में डोल गया सिर, आवाज़ निकालने के लिए गला बंद था।.

भाभी की आवाज़ पंद्रह मिनट बाद पड़ोस की ओर से आई।.

मेरे पहुँचते ही भाभी के होंठ खिंच गए, आवाज़ निकल आई। लाल अंडरवियर पर नमी का डर छाया था, मेरी बदौलत। ठुड्डी से तरल बूँदें झर रही थीं, वो भी मेरे ही।.

पैंटी हाथ में लेते हुए भाभी बोली - अब कुछ कहने का मन कर रहा है?

बस इतना हुआ कि मैंने कह दिया - अब तो आपकी बारी है, प्रणाम करने की।!

थोड़ी देर बाद भाभी के चेहरे पर पसीना आ गया। हो सकता है, चूल्हे के पास ज्यादा देर तक रहने से उसे तपिश महसूस हुई हो।.

गाउन पसीने में तर होकर कमर पर चिपक गया।.

उसी लम्हे भाभी बोली - थोड़ा रुको, पहले मेरी गधे को चाटो।

बिना किसी विचार के मैंने भाभी के पिछवाड़े पर अपना मुँह रख लिया।.

एकदम अचानक भाभी ने मेरा हाथ पकड़ लिया। धीरे से मुझे पीछे खींचा। बिना कुछ कहे अपना सारा वजन मेरे मुँह पर डाल दिया।.

एक पल को लगा, जैसे सब कुछ रुक गया।.

उसकी चूत की बदबू सिर तक पहुंच रही थी।.

भाभी के साथ गंदा सेक्स करने में भी मस्ती छा गई।.

उस पल भाभी के होंठ मेरे मुँह से चिपके थे।.

अचानक भाभी खड़ी हो गई। उसके मुंह से निकला - मैं भी तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूँ।.

वो मेरे निचले हिस्से की ओर नज़र डालते हुए बोली - यह क्या चीज़ है? तुमने जंगली घास की तरह उगे बालों पर फंदा भी नहीं चलाया… हे राम, इतनी गंदगी!

बस मैंने यही कहा - पूरी जिंदगी में कभी झाड़ू तक नहीं लगाई!

लंबे बालों वाले लंड ही मेरे पसंदीदा हैं, यह तो तुम जानते हो।!

इसके बाद भाभी ने हाथ में घी लिया। फिर वो मेरे लंड पर लगाने लगी। धीरे-धीरे उसे चूसने भी शुरू कर दिया।.

गर्मजोशी से लगा, जैसे किसी चूल्हे का मुँह खुला हो।.

उसके होठ मेरे लिंग पर इतनी आदत से फिसल रहे थे, मानो यह काम उसका रोज़मर्रा हो।.

उसके दाँत मेरे झांटों में उलझ गए। फिर वो धीरे-धीरे खींचने लगी। कुछ पल बाद काटने भी लगी। हर एक बाल जैसे तनाव समेट रहा था। चमड़ी पर छोटे घाव बन गए। वो रुकी नहीं।.

दर्द के बीच कहीं मुस्कान आ गई।.

गर्मजोशी से भरा वो रिश्ता अब बर्दाश्त के बाहर हो चला। फिर कुछ ऐसा हुआ कि मैंने खुद को संभाला नहीं।.

ऊपर से घूरते हुए उसने कहा - क्यों नहीं बताया पहले, तुम?

बोलते हुए मैंने सॉरी कह दिया - कुछ ज्यादा ही भावुक हो गया था।.

उसी वक्त भाभी उठ बैठी। मेरे होंठों के पास आकर अचानक अपनी जीभ झलकाई। सब कुछ चख लिया, एक-एक छोर तक।.

अब उसने कहा - चल, इधर आ।!

चाची ने मेरे चेहरे पर अपनी गोल पीठ टिका दी, फिर हथेली से एकत्रित घी उंगली से निकाला।.

वह अपनी उंगली पर घी लगाकर धीरे से चूत में डालने लगी।.

इस सब को मैं वहाँ खड़ा-खड़ा देखता जा रहा था।.

उसी पल भाभी ने मुझे जमीन पर गिरा दिया, मेरे मुँह पर पैर रखते हुए। फिर वो ऊपर से दोनों पैर अलग करके खड़ी हो गई।.

उसके मुंह से निकला - ठीक उसी तरह जब घी गरम चुत से टपके, तभी चूत पर झुक जाना मेरे प्यारे भोसड़ी के।!

एक बूँद घी सीधे मेरे होंठों पर आ गिरी। मैंने सिर ऊपर उठाया, फिर भाभी की जांघों के बीच अपना मुँह लगा दियa।.

उसकी उंगलियाँ मेरे सिर में फंसी हुई थीं। वो धीमे-धीमे आगे पीछे हिल रही थी। मेरे होंठों को छूते हुए उसकी जाँघें तन गयीं।.

अब तो सिर्फ लाल रंग कुछ दिखता है।.

मन किया तो दूर होते-होते रुक गया, अगले पल उसकी छाया मेरे चेहरे पर थी।.

मुझे सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी, पर ये बात अच्छी तरह जानता था कि भाभी सुबह-सुबह बिना झड़प के उठने वाली नहीं।.

मैंने भाभी की चूत में ज़ुबान घुमाना शुरू किया, आवाज़ें ऊपर उठीं। वो बढ़ते जोश में आ गई, मेरे मुँह को पैरों के बीच दबोचकर तेज़ स्वर में चीख उठी।.

फिर वो उठी, मैं हल्की-हल्की सांसें लेने लगा।.

हंसते हुए भाभी ने कहा - बड़ा मज़ा आया… आज तेरी बातों ने सबका ध्यान खींच लिया।!

आँख मूंदकर मैंने उसे सहलाया।.

एक पल बाद उसने कहा - अब तुम्हें खुशी का एहसास करवाती हूँ।!

उसके पीछे हो लिया मैं।.

भाभी अंदर गई। उसने दोनों पैर फैला दिए। बोली, "चख इसका स्वाद।" !

मैंने अपना लंड बाहर निकालकर भाभी की चूत में धीरे से घुसा दिया।.

थोड़ा सा और... तभी भाभी बोल पड़ी - ठहरो।!

बहन ने सिर्फ़ इतना कहा - लंड को चूत पर डाल देना।!

ठीक है, मैंने कहा।!

एक झपट्टा खाकर ही तू आगे बढ़ेगा, इससे पहले कभी नहीं।!

एकदम अचानक मैंने कहा - जल्दी से मुझ पर हाथ उठा लो।!

उसकी भाभी मुस्काई, आँखें मेरे होंठों पर टिक गई। फिर बोली - तू झट से अंदर घुसा, तो तेरा उसके साथ कुछ नहीं होगा।.

ठीक है, मैंने कहा।!

कभी-कभी वो मेरे सिर के बाल पकड़कर खींच देती। फिर अचानक उसी हाथ के नाखून मेरे चेहरे पर आ जाते। उसका चेहरा मेरे मुँह के ठीक ऊपर होता, और वहाँ से वो छलकने लगती हँसी।.

केवल इतना ही कह रहा था, भाभी... एक तमाचा मार दो। अपना लंड अंदर घुसा दो।!

गर्मजोशी से भाभी का चेहरा लाल होने लगा। उसके अंदर खुशी की लहर भी तैर रही थी।.

अचानक भाभी ने मुझे अपनी पैंटी थमा दी। फिर कहा, इसे अपने लंड पर लपेट लो।!

एकदम तब, जब मैंने पैंटी को लंड पर लपेटा, भाभी के हाथ ने गाल पर ज़ोर लगाया। ठीक उसी पल मेरा लंड उनकी चूत में समा गया।.

दर्द ने भाभी को घेर लिया, पैंटी का कपड़ा सही तरह नहीं बैठ रहा था।.

फिर भी वो कुछ बताने से हचकिचा रही थी।.

आंखों से आंसू छलक पड़े। वह सिर्फ इतना ही चिल्ला रही थी - चोद… साले को, और मुक्के की तरह जोर से चोद!

उसकी सेहत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी थी।.

उसने मुझे अपना लंड बाहर निकालने को कहा।.

फिर भाभी ने थप्पड़ मारा और बोली - इतना पानी निकलेगा नहीं, तब तक छोडूंगी नहीं तुझे हरामखोर… उफ्फ, ऐसे में खुशी आ रही।.

पैंटी के कारण उसके ऊपर झुकते हुए मेरा लंड सिर्फ लाल ही नहीं पड़ गया।.

उस वक्त मेरी हालत जैसी थी, उसे देखकर अंदाजा लगाओ कि भाभी की गुफा पर क्या बीत रही होगी!

हर बार दर्द से मेरी गति कम होती, तभी भाभी एक थप्पड़ मारकर आगे बढ़ने को कह देती।.

भाभी ने जोर से थप्पड़ मारा, कहा - ये मेरा होने वाला है। सुन, अब तू रुकेगा नहीं… किसी भी हालत में रुका तो तेरी माँ की बेइज्जति कर दूँगी।!

अचानक भाभी का गुस्सा फूट पड़ा। चिल्लाकर बदशब्दी शुरू कर दी। कभी मुझपर झल्लाती, कभी मेरे होंठों पर थूक छिड़कती। आवाज़ काँप रही थी, मन बेचैन।.

थोड़ी देर तक इधर-उधर हिलने के बाद, पसीने में डूबे हम दोनों एक साथ ढह गए।.

बाहर खींचते ही मेरा लंड लाल पड़ गया।.

मज़ा आया या बिल्कुल नहीं, इस पर ध्यान दो। भाभी का कहना है - इतना सब कुछ तुम घूरते क्यों रहते हो?

कहा मैंने - तुम आए, हालांकि ये सब क्या चल रहा था?

एक बहन ने बताया - मुझे दर्द पसंद है सेक्स में… न तो डरती हूँ, न शर्माती।!

भाभी ने अब मेरे लिए से पैंटी उठाकर मेरे होंठों के बीच धकेल दिया।.

उसका मुँह मेरे मुँह के बहुत करीब आ गया। हम दोनों ने साथ में किस किया।.

उस वक्त हम दोनों ने एक साथ पानी पिया, जिसमें मेरे लंड का स्राव और भाभी की चूत का रस घुला था।.

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