एक दोस्त की माँ का सामना अजनबियों से हुआ।

Desisexkahaniya

Jan 3, 2026 - 15:19
Jan 9, 2026 - 17:10
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एक दोस्त की माँ का सामना अजनबियों से हुआ।

एक दिन राजा ने मुझसे बात शुरू की। वो कहने लगा, उसकी मम्मी के बारे में कुछ ऐसा हुआ जो सुनकर मैं चौंक गया। घटना रेलवे ट्रैक के पास की है। एक खाली डब्बे में उन्हें दो अजनबी लड़कों ने रोक लिया। बाद में वहाँ दो सफाई वाले भी आ गए। सबकुछ तभी हुआ।.

माँ का नाम उर्वशी होने की बात है।.

एक चीज़ जो सबने देखी, वह थी उनकी त्वचा का रंग - बिलकुल सफेद। 41 साल की उम्र में भी कद छोटा ही रहा। पाँच फुट छह इंच की ऊँचाई किसी के नज़रिये को अलग तरह से झकझोर सकती है।.

लंबे बालों के साथ, उसकी त्वचा दूध जैसी चमकदार थी। मख़्मल-जैसी नरमी पूरे शरीर में फैली हुई।.

गोल-मटोल तथा बाहर की ओर उभरी हुई थी उर्वशी की पिछवाड़ी। अंदर से नरम, ऊपर से ढीली दिखती थीं उनकी छाती।.

उसके पिता शहर से दूर रहते थे।.

एक देसी महिला के साथ हुई तगड़ी सेक्स घटना को उर्वशी की कहानी बताया जाता है।.

एक दिन, राजा की माँ को घर से बाहर, अपने पैतृक गांव में होने वाली एक शादी में शामिल होने जाना था।.

एग्जाम के दौरान राजा ने मां के साथ घूमने से इंकार कर दिया।.

माँ ने कहा कि वो अकेले चले, पर राजा ने स्पष्ट इनकार कर दिया। उसकी बात न मानते हुए माँ ने फिर भी ज़ोर दिया।.

राजा के पिता को फोन पर अकेले यात्रा के बारे में बताया गया। उसके बाद वे जाने के लिए तैयार हो गए।.

अब सिर्फ उर्वशी, मां का आना-जाना शुरू हो गया।.

उस रात की ट्रेन, दोपहर के बाद के समय में, शुरू होती थी। राजा की माँ का पीछा करने वाला सफ़र अंधेरे में डूबा होता था।.

एक बजे के आसपास, उर्वशी दरवाज़ा बंद करके सड़क पर आ गईं। फिर चलते-चलते वो रेलवे स्टेशन के पास पहुंच गईं।.

वहाँ पहुँचकर एहसास हुआ - ट्रेन को दो घंटे की देरी है। यानी सुबह चार बजे अब वो आएगी।.

घर का रास्ता लंबा था। राजा किनारे नहीं था। इसलिए वो लौट नहीं पाई।.

फिर तो आंटी स्टेशन पर ठहर गईं, बस ट्रेन के आने का इंतजार शुरू कर दिया।.

बेंच पर लेटी आंटी को समय खिसकता महसूस हुआ। धीरे-धीरे उनकी आँखें भारी होने लगीं।.

आज कपड़ों में उर्वशी की चमक थी।.

हवा के झोंके ने तभी एकदम से घूमकर लहंगा-साड़ी ऊपर उछाल दिया। आंटी की गोरी, मोटी जांघें खुलकर सामने आ गईं। सड़क पर लगभग कोई नहीं था। किसी ने शैतानी करते हुए आगे बढ़कर उर्वशी का लहंगा और ऊपर उठा दिया।.

तभी आंटी की जांघें खुलने लगीं, उनकी काली पैंटी धीरे-धीरे नजर आने लगी।.

ठंडक भरी सुबह में वो आंटी जमने लगी थीं, नींद में डूबी हुई।.

उसकी होश गायब थी।.

दो लड़के प्लेटफॉर्म के आसपास टहल रहे थे तब।.

उसकी नज़र उर्वशी पर पड़ते ही घबराए से महसूस करने लगे। जांघों का ढेर देखकर शरीर भी अपने आप तन गया। फिर धीमे-धीमे करीब बढ़े, चारों ओर झांका।.

एक लड़के ने हाथ चढ़ा दिया, कोई देखने वाला नजर नहीं आया था। उर्वशी की नींद टूट गई, जब उसने महसूस किया। वह झट से ऊपर उठ बैठी, टाँगों पर से हाथ हटते देखकर।.

अचानक बोल पड़ा, जब वो अपने कपड़े संभाल रहा था - यार, किसमें उलझे हुए थे?

उन्होंने कहा – चाची, आपका लहंगा ऊपर खिसक गया था, मैं वो समेट रहा था।.

उर्वशी हँस पड़ी, झूठ सुनकर। बोली, "बचाव में क्यों? तुम आखिर मेरी खुली जाँघों को देख ही रहे थे!"!

खुशी से दिल में उतर गई बात, जब दोनों लड़कों ने उर्वशी के चेहरे पर मुस्कान देखी। अब समझ आया - नाराजगी की जगह हल्की हंसी थी।.

फिर वो बोला - ठीक पकड़ लिया है आपने, आंटी। नंगी सफेद जांघ देखकर मेरा ध्यान भटक गया। उर्वशी ने कहा - अब इसके बाद क्या होगा?

बस इतना कहते ही, वो उर्वशी को पकड़कर ले गए - एकांत में पड़ी पटरी पर खंभे-खंभे ट्रेन के डिब्बे में।.

एक लड़के ने तब उनकी जांघों पर होठ फेर दिए।

उसके हाथ आंटी की जांघ पर रखे, तभी सब कुछ धीमा पड़ गया।.

एक लड़के ने उसकी ओर देखते हुए उर्वशी के गहरे गुलाबी होंठ छू लिए।.

मज़े के साथ उर्वशी भी हंस पड़ी।.

दोनों ने मिलकर उर्वशी को कसकर पकड़ रखा था।.

अचानक दोनों लड़कों ने उर्वशी के कपड़े हटाना शुरू कर दिया।


अचानक से एक बच्चे ने लहंगे की रस्सी पकड़ ली। फिर वो कपड़ा धीरे-धीरे नीचे सरक गया।.

उसने तेजी से अपनी मुट्ठी में उसका हाथ लिया, फिर आंटी के शरीर से दूर खींच लिया।.

एक लड़के ने धीमे से आंटी के ब्लाउज के बटन खोलना शुरू किया। दूसरे ने ब्लाउज नीचे उतार दिया। अब उर्वशी पर सिर्फ़ ब्रा और पैंटी था।.

उर्वशी की आंटी जब ब्रा और पैंटी में नजर आई, तो दोनों लड़कों का संभलना मुश्किल हो गया। एक ने उनकी गांड पर अपना लंड घिसना शुरू कर दिया, जबकि दूसरा उनकी चूचियों को जोर से दबाने लगा।.

थोड़ी देर में, उसके साथ मिलकर एक साथ काम किया। अंत में आंटी की ब्रा व पैंटी टुकड़े-टुकड़े हो गई।.

उधर उर्वशी का सारा लिबास जमीन पर था। एक के बाद एक दोनों युवकों ने भी धीरे-धीरे कपड़े निकाले। खुले शरीर हवा में ठंडक महसूस कर रहे थे।.

लंबे-लंबे लिंग देखते ही उर्वशी के भाव तप गए।

एक आगे बढ़ा, धीमे से। फिर उसने आंटी की गोरी जांघ पर हाथ डाला। छूते ही वह झिझकी नहीं। नीचे तक उतर गया वो। अब तो सिर्फ चुपचाप छाती उठा रही थी वो।.

एक ने उर्वशी के दूध पर होंठ चिपका लिए, फिर मुस्कान के साथ धीमे-धीमे चूसना शुरू कर दिया।.

एक तरफ पुराना लड़का धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ा। फिर उसने उर्वशी की चूत पर नाक घुमाई।.

उसकी सांसें तेज हो गईं, जब नाक में वो खुशबू घुलने लगी। फिर वह आंटी की चूत पर जीभ फेरने लगा, मुंह से धीमे-धीमे बड़े को चूसने लगा। उर्वशी के शरीर में झुरझुरी दौड़ गई, पर कहीं भीतर ये अहसास अजीब ढंग से अच्छा लगने लगा। इसीलिए वह बस वैसे ही पड़ी रहीं, एक शब्द नहीं बोलीं।.

उसी पल दूसरे लड़के ने अपना हथेली ऊर्वशी के चेहरे की ओर बढ़ाई। एकदम से उसकी छाती पर दबाव पड़ा, तो मुँह स्वतः खुल गया। धीरे से वो अपने आप भीतर घुस गया।.

एक लड़का था, जिसने आंटी के होंठों से अपना लंड रगड़ना शुरू कर दिया क्योंकि वह खुद बात नहीं कर रही थी।.

उर्वशी के चुस्त होने पर उसका रंग बदलने लगा। फिर आहें भरने लगी थी धीमे-धीमे।

उसके मुँह ने काम शुरू किया।.

खुशी से उस लड़के के चेहरे पर मुस्कान आ गई, फिर वह अपने दोस्त की ओर मुड़ा। एकटक देखते हुए बोला - अरे भाई, ये तो अब लंड चूसने लगी है।.

एक ने कहा - अबे हाँ, मादम की गाड़ भी पानी छोड़ने लगी। दूसरे ने सुना तो जवाब दिया - मैं तो अभी-अभी अपनी चोट चुसवाकर आया… आज उसको मिलके खूब चोदेंगे!

एक ने कहा – सुन, अपना हलचल मुँह से खत्म कर, पीछे से पूरा काम कर लेना। इधर मैं इसकी गुदा का मुंह आजमाकर रख देता हूँ!

एक बार में किसी को ही जाने दो।

एक ने कहा - अपने दोस्त को ले आओ… तुम? वो किस बात को याद रखोगे।.

जब वह हटा, तो दूसरा आदमी उस औरत के योनि पर अपना लिंग रगड़ने लगा।.

धीरे-धीरे उर्वशी के होंठों से आहें टपकने लगीं।.

उस लड़के को आंटी की बातें सुनकर एक अजीब सा उत्साह महसूस होने लगा।.

थूक उसकी चूत पर गिरा। वह अपना लंड धीरे से अंदर सरकाने लगा।

अचानक जैसे ही लंड भीतर गया, उर्वशी को तेज दर्द महसूस हुआ। फिर उन्होंने इसे बाहर खींचने की कोशिश शुरू कर दी।.

फिर एक लड़का आगे बढ़ा। उसने कमर से पकड़ लिया और दूसरा नीचे हो गया। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर चला गया, जब उर्वशी की चूत में घुसा।.

अब वह धीमे से उर्वशी के पास हुआ।.

दर्द में लोटती रहीं उर्वशी, हर सांस के साथ चूत पर जोर डालती गई।.

थोड़ी देर बाद जब आंटी को राहत मिली, धीमे-धीमे उनका शरीर हल्कापन महसूस करने लगा। आवाजें गायब हो गईं, सिर्फ सांसें टिमटिमाती रहीं। पल भर में तनाव गायब, एक अजीब सी खुशी छा गई। गति थमी नहीं, बल्कि धीमी हो गई, लय में बदल गई। कभी कोई झटका, कभी ठहराव, फिर आगे बढ़ना।.

आंटी कुछ बोल नहीं रही थीं, फिर भी उनके चेहरे पर ख़ुशी झलक रही थी।.

एक लड़का अब उर्वशी के हाथों में अपना लंड घुमा रहा था। साथ ही, उसका एक हाथ आंटी के स्तन पर दबा हुआ था। इधर, आंटी की योनि में दूसरे लड़के का लिंग तेज-तेज धक्के देने लगा था।.

उसने उर्वशी के स्तन थामे, फिर धीमे-धीमे अंदर घुसा। कुछ देर बाद, गहरी सांसों के बीच, वह अपना सब कुछ उसके भीतर छोड़ चुका था।.

गुज़र चुका वो, लौट आया पुराना।.

वह उर्वशी को पलटता हुआ सामने आया, फिर धीमे से उसकी त्वचा पर हथेलियाँ घुमाने लगा।.

गांड आंटी की पूरी तरह नरम थी, मानो रुई हो।.

उसने आंटी की गांड पर हथेली से जोरदार चप्पल मारी, फिर दबोच लिया।.

शायद आंटी को मज़ा आ रहा था। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को छूने देने पर हामी भर दी।.

उसने पहले व्यक्ति के पिछवाड़े को मुंह से छुआ, फिर जीभ घुमाने लगा।.

फिर वो अपनी आंटी के पिछले हिस्से को चूसने लगा। इस बीच उर्वशी के होठों से धीमी, भारी आवाजें टपकने लगीं।.

उसने धीमे से उसकी पीठ के निचले हिस्से पर थूक दिया। फिर वह अपनी जांघों के बीच खिसकते हुए आगे बढ़ा। एक झटके के साथ वह अंदर घुस गया।.

दर्द से राज की माँ ने कहा, "थोड़ा धीमे... इतना गहरा मत।" उसके बाद उन्होंने घूमकर कहा, "इधर आ जाओ, यहीं से चलो।" एक पल ठहरकर फिर बोलीं, "अब थोड़ा ऊपर... हां, वहीं।" आवाज़ कांप रही थी, "यही रखो... जल्दी मत करो।"!

एक लड़के ने सवाल किया - पीछे से मैं अब क्या गलती करूंगा?

उर्वशी ने कहा - जैसे तुम अभी करते जा रहे हो।!

एक लड़के ने हंसते हुए कहा - इतनी सुंदर व नाज़ुक छोरी को पीछे क्यों छोड़ दूँ। कब मिलेगा फिर ऐसा मौका, कहना मुश्किल है।.

उसने कहा और तुरंत लंड को मां की गांड में घोंप दिया।.

उर्वशी के मुँह से चीख निकल पड़ी - ऊई… अम्मा… मैं मर गई… आह, तेज दर्द हो रहा है… जल्दी करो।!

लड़के पर उन आवाज़ों का कोई असर ही नहीं हुआ। फिर भी आंटी की बात उसने टाल दी, मौके को भांपते हुए वह तेजी से चढ़ने लगा।.

मुंह से उर्वशी के होठों पर बस यही आवाज़ थी - आहहा, फिर आहहा।.

वह पंद्रह मिनट तक चुपचाप रहा। फिर एकाएक लड़के ने माँ के पीछे हाथ घुमाए। जोर के साथ धक्के शुरू कर दिए। कुछ ही क्षणों में, उसके शरीर ने सब कुछ पीछे छोड़ दिया।.

उसके बाद, धीरे-धीरे कपड़े पहनते हुए वो जगह छोड़कर चले गए।.

उर्वशी को आराम मिला, तब भी नहीं उठी।

उसके दिमाग में ख्वाब तैरने लगे, कहाँ से आई यह हलचल।.

उन्हें पहले दो लड़कों ने ऐसा चोदा था कि सारे खयाल भाग गए। फिर वहीं लेट कर सो गईं। थोड़ी देर में दोनों सफाई वाले आ धमके। उर्वशी को उस हाल में देखकर ठिठक गए। एक ने दूसरे से पूछा - इस औरत का क्या हाल है?

एक ने कहा - चाहे जो भी हो, हमें उससे कोई वास्ता नहीं। बस चीज़ पर ध्यान डालो। अरे रे, कितनी चिकनी और मुलायम वस्तु है। आओ, इसका आनंद उठा लें।.

एक ने कहा - शायद किसी ने इसे खूब ज़ोर से उठाकर रखा है। अच्छा, फिर हम भी आराम से लुत्फ उठा लेते हैं, कौन जाने क्या हुआ था पहले।.

एक के बाद एक कपड़े गिरे। फिर वह उर्वशी को समेटे हुए ऊपर वाले पलंग पर पहुँचा।.

वह उर्वशी को लेटा चुका था, अब खुद भी उन पर समाने लगा।.

उसका लंड उर्वशी की चूत में घुस गया, फिर धीमे-धीमे हलचल शुरू हो गई।.

एक ने कहा, अब इस पर तुरंत हमला करें।

वो आदमी उर्वशी को ऊपर खींच लाया। अपने साथी की लंड चूत में फँसी देखकर बोला - अब तू जोर से धकेल उसकी गांड में!

एक आदमी ने उर्वशी के पिछवाड़े में अपना लंबा धर दिया।.

उस वक्त तक उर्वशी के होंठ खिंच गए थे, पीछे से धक्के लगने लगे थे।.

एक के बाद एक, वे दोनों ने माँ पर हमला कर दियa। उस देसी आंटी को तेज़ सेक्स में मज़ा आ रहा था। थकान के मारे वह लड़खड़ा रही थी, कुछ कहने की हिम्मत नहीं हो रही थी।.

उसके और उसके बीच में वह सिकुड़ती रही।.

दोनों ने मिलकर उर्वशी के साथ आधे घंटे तक सेक्स किया। उनके शरीर के दोनों हिस्सों में अपना वीर्य भर दिया।.

पानी बह गया था, उर्वशी के होंठों से।.

उन दोनों ने धीरे से उर्वशी के शरीर पर होठ फेरे, इधर-उधर से दूध निकालते हुए।.

सुबह का उजाला फैल चुका था। एक ने धीमे स्वर में कहा, चलना होगा अभी। किसी के आ जाने का डर है।.

फिर अचानक दोनों का पैर हिला।.

अब तुरंत कपड़े पहनकर उर्वशी बाहर आ गईं। डर था, कहीं कोई और शुरू न कर दे।.

बाहर निकलीं, पूछताछ की। ट्रेन पहुँची थी, फिर चली गई।.

घर लौटते हुए उर्वशी ने शादी छोड़ दी, क्योंकि उन्हें पता चल गया था। फिर बेटे को सब कुछ समझाया जैसे-जैसे याद आया।.

बेटे ने मुँह बंद रखने का वादा किया।.

फिर उसने मुझसे हर बात साझा की। बोला, "अब ऐसे में तू क्या समझता है?"?

अब सुन... छोड़ देते हैं। पुलिस में क्या चलता है, वो तो तुझे भी पता है। ऐसे में फंसकर नाम खराब कराना क्यों?

अब बताओ, देसी आंटी की हार्ड XXX सेक्स कहानी में तुम्हें क्या अलग लगा। ऐसा लगता है न कि उर्वशी को इस चुदाई के बारे में खुलकर बोल देना चाहिए?

हाँ, कमेंट में अपना ख्याल जरूर रखना।

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