छोटी बहू का ससुर और ताऊ संग हनीमून

Desisexkahaniya

Jan 3, 2026 - 15:12
Jan 9, 2026 - 17:05
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छोटी बहू का ससुर और ताऊ संग हनीमून

एक कमरे में मैं तभी खड़ी थी, आसपास कोई कपड़ा नहीं। पीछे से ससुर के हाथ लिपटे, धीमे से झटके दे रहे थे। एक तरफ उनके दो छोटे भाई, आवाज़ बदलकर बोल रहे थे। पति के फूफा ने गर्दन पर हाथ फेरा, ठंढ सी उठ खड़ी हुई। सबकी नज़रें चौंधियाती थीं, शरीर पर निशान छोड़ रही थीं। चलते-चलते एक ने मुँह ढक लिया, दूसरे ने कमर पकड़ ली। ऐसे लगा जैसे जमीन हिल रही हो।

ससुर ने सेक्स करना सिखाया

एक बार मैंने देखा, ससुर और उनके भाई मेरे बेडरूम में थे। धीरे-धीरे कपड़े उतारे गए। हाथ अंदर तक जा रहे थे, कोई रुकावट नहीं। पीछे से आवाजें आ रही थीं - ताऊजी, चाचा जी, फूफा ज खड़े थे। हर कोई कुछ न कुछ कर रहा था।

अचानक ससुर बिस्तर पर लेटे - अब मैं तुम्हारी जांघें अलग करके भीतर घुसूंगा। वो एक शब्द याद है जो तुम बोलोगी अगर रुकना हो?

सिर हलाने पर मैंने हाँ कह दिया।.

पैर मेरे ससुर ने पलटकर फैला दिए। हाथ योनि पर रखते ही जांचने लगे वह।.

बूढ़े आदमी ने पूछा – बेटा, कैसे हो तुम?

अच्छा, सूख चुकी है… पानी डालकर थोड़ा नम करना पड़ेगा।.

ससुरजी ने बहुत देर न करते हुए मेरी चूत पर अपनी जीभ फेर दी।.

थोड़ी देर में ससुर की लार से मेरी योनि नम होने लगी।.

सिर के पास ताऊ जी का हाथ धीरे-धीरे चलने लगा, वो दोबारा वहाँ खड़े थे।

हाथों में कुछ गर्माहट महसूस हुई, जब वो दोनों ने अपनी मुट्ठियाँ बढ़ा दीं।

उसके पिता ने अपने घने हिस्से को मेरी जांघ के ऊपर सरकाया, फिर धीमे से आगे बढ़कर उसे एक स्थिति में लाया।.

उसने सीधे मेरी ओर ताका, फिर धक्का दे दिया।.

मेरे मुँह से एक तेज चीख निकल पड़ी - आआ ई… उफ्फ आह ऊं… आआ ई, बहुत दर्द हो रहा है… खून के छींटे!

मैं बोलते हुए अचानक सिकुड़ने लगी।.

आधा लंड चूत में पहुँचा था, सुनते ही ससुर जम गए - "लाल" का शब्द आते।.

आवाज़ निकलते ही दर्द का पहाड़ लगा। साँसें धक्के खाती छाती में घर ढोए चल रही थीं। एक पल को ऐसा लगा, मानो शरीर अब जान नहीं रखना चाहता।.

आगे को झुकते हुए ससुर ने मेरे मुँह पर चुंबन रख दिया, शायद दर्द भूलने के लिए।.

होंठों को चूसते हुए ससुर जी ने धीमेपन से दबाव डालना शुरू किया। नीचे की ओर गति बढ़ने लगी।.

उसी तरह मैंने फूफा के बेटे को हाथों से घेर लियa।.

पसीना उतराते हुए ताऊजी के हाथ मेरे माथे पर पड़े, मानो सब अच्छा होने वाला है।.

एक-एक करके सासूजी का पूरा लंड मेरी चूत में चला गया।.

मेरी आवाज़ उसके मुँह में समा गई।.

थोड़ी देर के लिए वह रुका, मेरी चूचियां पर ध्यान जाते ही सब कुछ बदल गया।.

बूढ़े आदमी ने अपना बड़ा लंड मेरे चेहरे पर लाकर रख दियa।.

एक दिन मैंने ताऊ जी का लंड चूसना शुरू कर दिया।.

उसी पल ससुर के हाथ ने अपना मोटा लंबा लौड़ा बाहर खींच लिया। सांस सहेजने का वक्त भी नहीं मिला था कि एक झपटे में उनका गर्म घोंघा फिर मेरी चूत में धमक गया।.

चीख निकल पड़ी, क्योंकि ताऊ जी के बेटे के हाथ मेरे मुंह पर थे।

हथेलियां तब उनके बच्चों के सिर पर थीं, जब दर्द ने मुझे झपटा।.

धीमें से, ससुर ने छोटी-छोटी चूचियाँ दबोचीं। फिर उनका लंड मेरी चूत में आना-जाना शुरू कर दिया।

लंड पर कब्जा मजबूत होते ही फूफा-चाचा जी ने कमर डोलाकर मुझसे हाथ चलवाना शुरू कर दिया।

अब तक दर्द के बीच मुस्कान भी फैलने लगी। लौड़े मेरी मुट्ठियों से धीरे-धीरे छूटने लगे।.

दर्द से निकली आवाज़ें… अचानक बदल गईं। हाँफते हुए लबों से छूटा - उफ़… पापा जी… उफ़… ओओ ओओ ओओ… मैं आपकी सबसे पसंदीदा शिष्या बन जाऊँगी। .

ससुर को एहसास हो गया था कि अब धीमेपन नहीं चलेगा। उनकी कमर तेजी से टेढ़ी होने लगी। घिसटते हुए मूसल लंड अब मेरी चूत पर भारी पड़ रहा था।

मेरी नरम, तंग जांघों के बीच वो झटपट आ गए। पसीने से तरबतर होकर उनका लंबा शरीर मेरे ऊपर ढह गया। धीरे-धीरे गति बढ़ी, फिर एकदम रुक गई। गर्म छींटे अंदर तक जा पहुंचे। कक्कड़ खानदान का तेज खून मेरे भीतर उतर गया। चिराग के पिता के हाथों ये सब हुआ।.

लेकिन फिर भी, मैंने अपनी पत्नी का कर्तव्य निभाया।.

अचानक से ससुर जी पास के झरने में लिंग धोने चले गए।

ताऊ जी ने कहा - वो तो हो चुका, पर लड़की अब भी बची है, सुरेश जी, आप तो आइए।.

वो खुद आए, फिर फूफाजी से बोले कि अब मेरी तरफ से सब कुछ संभालेंगे वो।

बिना समय गवाए, फूफाजी ने पहले ही झटके में पूरा लंड भीतर डाल दिया।.

मौज आने लगी थी मुझे उस पल… ‘आह आआ आह …’ हर सांस के साथ बढ़ता ये खेल।

तेरे फूफा ने कभी नहीं सोचा था कि इस उम्र में भी ऐसा हो पाएगा। वो तेरी छाती को याद करते रहते थे, धीरे-धीरे बस वही ख्याल आता रहा। अब जब तक रुक सके, रुका नहीं। उनके होठ काँप रहे थे, जैसे किशोर फिर से जवान हो गया हो। तेरी जांघों के बीच घुलते हुए उन्हें लगा, जैसे सालों की भूख मिट रही हो।!

उसके हाथ मेरी छाती पर जोर से टिक गए, धक्के लगाने लगा। मेरे शरीर में उसका डंठ घुसने लगा, एक-एक हरकत से झटके आने लगे। चीख रुक गई, साँस फूलने लगी।

हो सकता है, कितने ही महीनों बाद उनकी पकड़ में इतना गरम शरीर आया हो।

“आह मह्हा हःहःहः आह … फूफाजी आराम से …”

“सुरेश जी … बहू कहीं भागी नहीं जा रही, ज़रा तमीज से … कक्कड़ परिवार की बहू है वो … अपनी बीवी मत समझिए!” ताऊजी ने फूफा जी को लताड़ा।

फूफाजी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, बस अपनी तेज़ गति से आगे बढ़ते रहे।

सिर्फ इतना हुआ कि मेरी कमर धीरे-धीरे नीचे से ऊपर उठ गई… आह फूफाजी… आह…

गर्मी से भरी मेरी चूत को देख फूफा जी बेकाबू हो गए। ऐसे में जब उन्हें लगा कि अब रुक नहीं पाऊँगा, तो लंड को झट से बाहर खींच लिया। इसके बाद मेरे पेट पर वीर्य की पट्टी छोड़ दी।

हो सकता है, ताऊ जी ने ऐसा कुछ कहा था कि मेरे अंदर सिर्फ कक्कड़ वाले खानदान का बीज आए।

टॉयलेट से कागज़ लेकर ससुर आए। फिर फूफा को वो थमा दिया। उन्होंने मेरे ऊपर जो छिड़का था, उसे पोछ लिया।.

बूढ़े आदमी ने पूछा – बेटी, क्या तुम्हें वो हलका महसूस हुआ?

ताऊजी, बताइए न, विस्फोट कैसे होता है?

ताऊजी बोले – वो दिन याद है, जब छोटे ने तुम्हारी योनि पर मुंह लगाया? धीरे-धीरे उंगली से छेड़ा, तो तुम्हारा शरीर झुलसा सा गया। एक गर्म आह भरी फिसल गई नीचे की ओर। ऐसा लगा, मानो अंदर से कुछ टूट गया हो। इसे ही लोग स्खलन कहते हैं।

उसके बाद कभी नहीं हुआ है। मैंने ऐसा कुछ नहीं देखा, ताऊ जी।.

चाचा की ओर इशारा करते हुए ताऊजी ने बस इतना कहा - अब तुम्हारी बारी।.

उनका वज़न मेरे ऊपर था। मुझे छूते हुए वो मेरी छाती चूसने लगे, इधर उनका लंड धीरे से मेरी फटी चूत में घुस गया।.

उम्र के हिसाब से वो मुझ पर कहीं आगे निकलते हैं।.

उम्र में वो तीनों आदमियों से काफी पीछे थे जो कमरे में मौजूद थे… ताऊजी को इस बात की चाह थी… कि मुझे स्खलन दिलाने में यही लोग काम आएँगे।

धीरे-धीरे चाचा जी ने शुरू किया… कमर को हिलाते हुए लौड़ा मेरी चूत में आगे-पीछे होने लगा। .

हर बार जब वे झड़ने लगते, तो अचानक मुझे छूने के लिए अपना लौड़ा बाहर निकाल लेते।.

वासना के स्पर्श पर मैं धीरे से बोल पड़ी - ओह, चाचा जी, ऐसे रगड़ने पर लगता है बहुत अच्छा।.

सिर पर हाथ फेरते हुए ताऊजी बोले – रमेश क्या पीस रहा है, बहू?

मैं- अपना औजार!

बहू, ये है लंड – ताऊ जी ने कहा – अगर बोलने में दिक्कत है तो जीने में भी रुकावट रहेगी।

मैं- लंड!

ताऊजी ने कहा - हां, उसे लौड़ा भी कहते हैं, लंड भी। उधर, जो तुम्हारी टांगों के बीच में स्वर्ग का रास्ता है, उसका नाम चूत या फुद्दी पड़ा है।

अरे चाचा जी... ऐसे जब आप अपना लंड मेरी चूत पर घिसते हो तो कुछ अजीब सा महसूस होता है।.

चाचा जी मेरे मुंह के गंदे शब्द सुनकर इतना बेकाबू होए कि उनका लंड मेरे अंडों पर रगड़ खाता हुआ टपक गया।.

रास्ता ढूंढ़ने में ताऊजी को पता चल गया था, मैं कहाँ तक जा सकता हूँ।.

जैसे ही चाचा वहाँ से हटे, वो मेरे पैरों के बीच आ धमके। उनका लंबा-सा लंड खड़ा था, मुझे लगा कहीं अब मेरी नाजुक चूत न चीर दे।.

चाचा के रस से ताऊजी ने अपना लौड़ा गीला किया। मेरी चूत के ऊपर उसे रखते हुए बोले, बहू, थोड़ा दर्द होगा, संभालकर रहना।.

एक झटके के साथ उसका लंड मेरी चूत में घुस गया, ऊपर का हिस्सा बाहर रह गया।.

कराहने लगी मैं - हटा दो ये, ताऊ जी… इतना दर्द कि सहा नहीं जा रहा!

अचानक ताऊ जी खड़े हो गए। उन्होंने मेरे दाने पर अंगूठा घिसना शुरू कर दिया।.

हवा में कहीं ऊपर थी मैं।.

मैंने ससुर की ओर इशारा किय, ताकि वह मेरे मुँह में लंड डाल दे और चीख न निकल पाए। चाचा-फूफा को छाती के बटन घुमाने के लिए भेज दिया गया।

उस दिन सुबह के समय पिता-जैसे व्यक्ति ने ढीला हुआ अपना ज़ोर बिना कुछ बोले मेरे ओंठों पर रख दिया।.

चारों आदमी मेरे शरीर पर एक साथ हावी थे।

थोड़ी देर बाद जब मैं संभल रही थी, ताऊ जी ने अचानक फिर धक्का दे दिया। उनका लंड पहले से भी आगे घुस गया, आधे से ज्यादा अंदर चला गया।

आवाज़ गले में ही अटक गई, फिर आंसू धीरे-धीरे छलकने लगे।.

ससुरजी ने मुझे आँखों में आंसू देखकर कहा - बहू, अगर ये सब जरूरी न होता, तो हम कभी न करते। इससे तुम्हारा और चिराग का साथ मजबूत होगा। थोड़ी बहुत धीरज बनाए रखना… ताऊजी को हमने गुरु माना है, उनपर भरोसा है। वो कभी ऐसा कुछ नहीं सिखाएंगे जो गलत हो।

मेरा ध्यान ससुरजी की बातों पर टिका हुआ था। तभी ताऊजी ने अचानक एक तेज़ धक्का दिया। उनका मोटा लंड, जैसे कोई सांड हो, सीधा मेरी चूत में घुस गया।.

तकलीफ इतनी थी कि लग रहा था, अब खत्म हो जाऊँगा। मैंने हाथ ऊपर करके ताऊजी को रुकने को कहा।.

कई घंटों तक वो वहीं बैठे रहे।.

तब तक मैं हिम्मत जुटा चुका था।.

बहू, ताऊजी ने कहा - आंखें घूरकर देखना जिसकी गांड में भी तुमने लोटा डाला हो, सामने वाले की पलकों से पलकें मिलाए रखना।

ताऊजी की ओर देखा, नज़रें जब मिलीं, तो आँखों में पानी छलक आया… ससुरजी ने चुपचाप उन आंसुओं को हथेली से साफ़ कर दिया।

जब ताऊ जी आगे बढ़कर मेरे होंठ चूसने लगे, उसी पल ससुर ने इशारा समझा और मेरे मुंह से अपना ढीला पेनिस धीरे से खींच लिया।

हालाँकि ताऊ जी सबसे बुजुर्ग थे, फिर भी उनकी चुस्ती कमाल थी। उम्र के बावजूद दिमाग तेज रखते थे।

उसके चेहरे पर झुर्रियां थीं, मानो कोई और ही उम्र का आदमी हो। छाती की त्वचा कहीं सफेद थी, कहीं काले बालों से ढकी। ऐसा लगता था, जैसे शरीर एक से ज्यादा इंसानों का मिला हुआ हो।

वह मेरे ऊपर झुका, उसकी सांसें गर्म थीं। धीरे से वजन बदला, मैं नीचे दब गई।

उसके पास जाकर मैंने गले लगा लिया, फिर होठों के स्पर्श से साथ देना शुरू कर दिया।

हथेलियों का स्पर्श उसकी पीठ पर आगे बढ़ रहा था।

उसका मोटा और लंबा हथियार अभी भी मेरे शरीर के अंदर जमा हुआ था।

हवा में सांसें थिरकने लगीं, उनके होंठ मेरे होंठों पर आग छोड़ गए। कभी-कभी वो मेरी जीभ को अपने मुंह में खींच लेते। मैं भी बिना सोचे उनकी जीभ को चूस लेती।

थोड़ा-थोड़ा करके जैसे सब सामान्य होने लगा।.

बुजुर्ग ने पूछा - क्या बहू आगे बढ़ेंगी, वरना मेरा बेटा उसकी जगह खाली छोड़कर सो जाएगा?

हल्की सी मुस्कान छा गई। फिर वो आगे बढ़ पाए, ऐसा हो गया।

ताऊजी ने मेरे कानों को चूसा, बाद में गले पर होंठ फिरे… धीमे-धीमे वो मेरे स्तनों तक पहुँचे। उन्होंने मेरे उरोज को अपने मुँह में ले लिया, फिर दूध पीने लगे।

उसकी उंगलियाँ मेरे होंठों पर आईं, धीमे से दबाव डाला। फिर वो करीब आया, कपड़े खींचे, और एक साथ सब कुछ घटित हुआ।

हल्की सी हवा चल पड़ी, मेरे अंदर कुछ उठने लगा… आवाजें बिना इच्छा के निकलने लगीं।

हथेली के नीचे दबी मेरी आवाज से उठती थी एक बेचैनी - भूख, टूटन, झुंझलाहट का मिश्रण।

फिर वो लंड को बिलकुल खींचकर बाहर लाए। इसके बाद धीमे से मेरी गुदा में जोर से घुसा दिया।

उंगली तेज़ी से फिसलकर आधे गोले पर ठहर गई।.

मेरी चूत में से उसका लौड़ा अब भी आता-जाता रहा।

मैं झटकों के साथ हिल उठा, जब वह मेरे अंडकोष पर बार-बार दबाव डालने लगा।.

तभी मेरे शरीर में एक विचित्र सिहरन दौड़ गई, जब उस युवा लड़की के साथ घनिष्ठता हुई।

ताऊजी ने अब मेरे मुँह से हाथ हटा दिया, फिर वो बेझिझक मेरे साथ ज़ोर-ज़ोर से घूमने लगे।.

थर्राने लगी मेरी टांगें… पकड़ ली ताऊजी की जांघ, खींचा अपनी ओर धीरे से, फिर गहराया वो हरकत।.

ताऊजी की जांघों में मेरे नाखून धंस गए, जब मैं उस सुख के सिरे पर पहुंचा।

उसे पता चल गया कि मैं उस तरह की बातों में हूं।.

तेज़ी से चलते हुए वो मेरे दाने पर लगातार दबाव डाले रहे।.

होंठ सटते ही ससुर की आँखें बंद हो गईं। उन्होंने पास खींचा, चुम्मा दिया।.

मेरे फूफा ने चूची पकड़ी, उधर चाचा भी आ गए।.

अब वो सिसकियाँ, जो कभी ख़ामोशी में गुम हो जाती थीं, दीवारों से टकरा कर मेरे पास लौटने लगी हैं।.

कभी-कभी ताऊजी की सांसें धीमी पड़ती थीं। उनका लंबा काला लिंग मेरे अंदर घूम रहा था। फिर मैं शांति में आ गई।

थोड़ी देर बाद ताऊ जी ने मुझे चोदा, फिर अपना सारा रस मेरी योनि के भीतर छोड़ दिया।.

मेरी चुत को कक्कड़ परिवार के बूढ़ों ने अपने मटठे से लबालब कर दिया।

चाल में डगर भरना मुश्किल हो गया था, चूत के फट जाने से।.

बाथरूम के रास्ते में ससुरजी ने मेरा हाथ पकड़ लिया।.

एकदम अचानक वो बात उसने की थी, जिसे मैं पहले नहीं समझ पा रही थी।

उनके हाथों से गुजरते हुए मैं टब में बैठ गया, प्यार से नहलाया गया। कपड़े भीगे बिना धीरे से डाले गए, ससुर की तवज्जो से।

घर पहुँची तब तक चाचा के साथ फूफा भी नजर नहीं आए।

कपड़े ताऊ जी ने भी पहन लिए थे।

पैरों के बीच से आह निकल पड़ी, जब ससुर ने सोफे पर बैठाया। मन में झनझनाहट थी, मानो ताऊजी का होठ अभी भी भीतर घूम रहा हो।

जब बिस्तर की ओर नज़र पड़ी, तो वह यौन रस से भीगा हुआ था। धीमे-धीमे लाल रंग में डूबता जा रहा था।.

बूढ़े आदमी ने कहा - लड़के, तुमने जिस लड़की से शादी करवाई, उसमें तुम्हारी कोई भूल नहीं हुई।

उन्होंने मेरे सिर पर हाथ फेरा, कहा - खुश तुम रहो, इसके साथ चिराग का दिल भी हल्का रखना।

बूढ़ी सास ने सिर पर लगभग पचास हजार के नोट बरसा दिए, माथे पर हाथ फेरते हुए।

चलो अब हम निकलते हैं। चादर तब तक ऐसी ही रहेगी, जब तक चिराग घर न आ जाए। हाँ, ये ध्यान रखना… पढ़ाई अभी खत्म नहीं हुई। कक्षा बदलेगी, साथ में पाठ भी बदल जाएंगे। क्या बात समझ आई, बहू?

उस बात को मैं नहीं समझ पाई, जो ताऊजी ने कही थी।

सुबह के करीब पाँच बजे चिराग नशे में धुत्त होकर आया, फिर कुछ भी न कहकर सीधे मुझ पर झपट पड़ा।

वह दोबारा मेरी चूत पर अपना लंड सरकाने लगा। जैसे ही उसका लंड योनि के मुंह पर पहुंचा, वीर्य बाहर आ गया।

अगली सुबह आँख खुलते ही लाल पड़दे पर नज़र पड़ी। घमंड से छाती फूल गई। मन में खयाल आया - शायद मैंने ही इसकी कुंवारीपन तोड़ी है। एक अटपटा संतोष दिल में डाल गया।

एकदम अचानक समझ में आया - ताऊ जी क्यों मना कर रहे थे चादर बदलने से।

आगे का सफर किसी और वक्त पड़ेगा।!

उम्मीद है कि गर्म सेक्स वर्जिन फक कहानी आपको अच्छी लगी होगी। प्रतिक्रिया मेरे इ-मेल पते पर भेज दें।

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