दुबई में मिली देसी प्यासी चूत

Desisexkahaniya

Jan 8, 2026 - 11:29
Jan 9, 2026 - 16:46
 0  2
दुबई में मिली देसी प्यासी चूत

एक दिन ऑफिस में बातचीत हो रही थी। मेरी सहकर्मी ने कहा, उसकी पुरानी दोस्त के साथ ऐसा हुआ था। धीरे-धीरे बात आगे बढ़ी। दोनों ने पहली बार एक-दूसरे को छुआ था। कमरे में सिर्फ वो दो लड़कियाँ थीं। किसी ने कुछ नहीं कहा, फिर भी सब कुछ हो गया। खिड़की से धुंधली रोशनी आ रही थी। उस शाम के बाद कुछ अलग हो गया था।.
अब सुनिए, सन्नी बोला वो संजना और रुचि के बारे में बता रहा था, जिनकी चूत को लेकर उसने कुछ कहा था।.
तीसरा हिस्सा इस कहानी का
कुलीग और उसकी सहेली के साथ थ्रीसम सेक्स
अब तक ये समझ में आया था कि संजना कॉलेज के दिनों की एक घटना पर बात शुरू कर चुकी थी। धीरे-धीरे वो निकिता के साथ अपने पहले लेस्बियन अनुभव की ओर बढ़ रही थी। वो बिना किसी झिझक के उस रात की बारीकियाँ साझा करने लगी थी।
संजना ने अब आगे बढ़कर कहानी सुनानी शुरू की, जिसमें एक लड़की के बारे में था।
एक फिल्म के बीच में ही, ताप बढ़ने लगा था।.
उसी पल मैंने हिचकिचाते हुए अपना हाथ निकिता की जांघ की ओर बढ़ाया। फिर आहिस्ता से उसे छूने लगी।.
हल्के से निकिता के हाथ ने मेरे पेट को छू लिया। वो चुपचाप सहलाने लगी, जैसे कुछ कहने की ज़रूरत न हो।.
हालात अब सहने से ज़्यादा होते जा रहे थे।.
एक कोने में फोन सरकता रहा। निकिता ने कसकर गले लगा लिया। उसके होंठ मेरे गुलाबी होंठों पर आकर ठहर गए।.
एक-दूसरे के मुँह से तरलता चखने लगीं।.
इस रास्ते पर मैं और वो, पहली बार साथ चल रहे थे।.
जब हम दोनों ने साड़ियाँ खोलीं, तभी अहसास हुआ - दोनों बिल्कुल नंगी थी।.
उसके 34 इंच के सीने पर कपड़ा चढ़ा हुआ था। 36 के कमर में हल्का झुकाव नजर आया।.
फिर भी मेरी अपनी एक पहचान थी।.
निकिता ने मेरे निप्पल को मुंह में ले लिया, फिर धीरे से चूसना शुरू कर दिया। मेरे भीतर से एक गर्माहट ऊपर उठने लगी। हल्की सी सिसकी छोड़ते हुए मैं बोल पड़ा - यार, ऐसा लग रहा है… जैसे सब कुछ ढीला पड़ रहा हो। अचानक एक झटका सा लगा, आवाज़ बिना सोचे निकल पड़ी - ओह माय गॉड… वाकई?
पेट पर निकिता की जीभ सरकी, खुजली सी महसूस हुई।.
अचानक उसकी जीभ मेरी चूत पर पहुँच गई। मैं तुरंत काँप उठी।.
सिसकियों के बीच शरीर अचानक हिल उठा।.
कुछ समय के लिए वह मेरी चूत पर जीभ फेरता रहा। इसके बाद उसने अपनी जीभ धीरे से अंदर डाल दिया।.
मुझे तब काफी अच्छा लग रहा था जब वो मेरी चूत को जीभ से चाट रहा था - ओह हाँ, तुम भी ऊपर आकर 69 करो।!
बिना देर किए, हम दोनों ने 69 की स्थिति ले ली।.
एक के मुँह से दूसरी की जांघों के बीच तक लार का निशान खिंच गया। उंगलियाँ धीमे-धीमे पीछे की ओर बढ़ीं, जहाँ तक आराम से जा सकती थीं।.
थोड़ी देर में सिर्फ छूना ही नहीं, अब जीभ चल पड़ी। धीरे-धीरे सब कुछ गर्माया। पहली बार कुछ लम्हों बाद हुआ, फिर बात फिर आगे बढ़ गई। ऐसे ही एक झटके में दोनों का बार-बार हो गया।.
थकान ढहती रही, धीरे-धीरे सांसें लेना मुश्किल हो गया।.
उसके बाद निकिता के साथ मैं भी लेट गई।.
तेरे अंदाज़ में कुछ ऐसा है, निकिता... जैसे तूने ये सब पहले भी किया हो।!
निकिता बोली, सुनो, पहले कॉलेज में हर लड़की ऐसा करती थी।.
क्या बात है, कॉलेज के दिनों में खूब मस्ती की होगी तुझे।!
निकिता ने कहा - कोई बात नहीं। अब तू भी हर ख़ुशी में शामिल होगा।.
इतना कहकर उसने तेजी से मुंह पर चाटना शुरू कियa।.
एक बार निकिता ने धक्का दिया, मुझे ढकेल दियa। फिर वहीं पलट कर आई, चुपचाप चुंबन करने लगी।.
एक झपकती नज़र में हम दोनों खुद को भूल गई। पल भर में कपड़े धरे रह गए। हवा में सिर्फ़ साँसें और ठिठुरती उंगलियां थीं। होठों के बीच आवाज़ फंस गई। वो चुप्पी चबा गई। छाती पर धड़कनें लय बना रही थीं। हमारे बीच अब कुछ भी नहीं था। सिर्फ़ एक घंटे भर की दुनिया टूट रही थी।.
अब हमारा लार उनके मुँह में पहुँच रही थी, फिर भी इस गलत काम में खुशी छिपी थी।.
खड़ी हो गईं हम दोनों, आपत्ति के बिना। निकिता की आंखें मेरे चेहरे पर टिकी थीं।.
आज फिर निकिता बोली, संजना के पास जाकर – चल, तेरे लिए कुछ अच्छा है।.
फिर निकिता ने कहा, वापस मेरी चूत पर मुँह ले गई। मैं हिलने लगी, बेचैनी से एक ओर झुकी।.
निकिता के होंठ धीमे-धीमे फिसल रहे थे, मानो सालों से यही करती आई हो।.
अचानक निकिता मेरे ऊपर आ गई, उसके होंठ मेरे स्तनों पर। मेरे हाथ उसकी छाति की ओर बढ़े, मैंने भी चूस लिया।.
हम दोनों की हर सांस में उत्सुकता भरी हुई थी। अब तो सिर्फ छूने की जगह, गहराई से चखने लगी थीं। एक की खुशबू दूसरी के होठों पर समा रही थी।.
फिर से हम दोनों 69 करते हुए उलझी थीं।.
थोड़ी देर बाद, मुंह से मुंह को छू लिया।.
उठकर बीच में, निकिता ने पलंग के नीचे से अपना बैग खोला। वहाँ से उसने एक प्लास्टिक का दो-तरफ़ा लंड निकाला।.
थोड़ी देर चूसने के बाद मैंने उसे अपनी चूत पर रख लिया। पैरों को क्रॉस करके, जैसे कैंची हो, एक सिरा वहीं टिक गया।.
एक की चूत दूसरे से जुड़ गई। लंड दोनों के बीच में समा गया, आधा यहाँ तो आधा वहाँ।.
उसकी उंगलियां मेरे पैर के आसपास हुई तो मैंने भी अपनी बाहें फैलाकर उसके पैर समेट लिए।.
एक-दूसरे की ओर झुकते हुए, हम धीरे-धीरे करीब आने लगीं।.
खुद से ही आगे-पीछे होते हुए मैं उस पल का आनंद ले रही थी।.
एक की आवाज़ उठती गई, दूसरी ने धीमे से अपने स्तन दबाए।.
इधर निकिता ने प्लास्टिक के डंडे को धीमे से खींचकर निकाला। एक सिरा, जो उसकी चूत में था, वो मेरे होंठों तक ले आई। दूसरा सिरा अपनी जीभ से चाटते हुए गहरे में ले गई।.
एक-दूसरे की चूत के खट्ठे पानी को हम लज्जा से भरी तलब के साथ चख रही थीं।.
उधर वो प्लास्टिक का छेड़ा हवा में उछलकर कहीं जा गिरा। बस, एक-दूजे के सामने घटिया अंग झुक गए।.
लबंदी से उसके होठों पर जीभ का दबाव महसूस किया। फिर वो खुद तेज़ी से आगे-पीछे हिलने लगी।.
मैंने धीरे से उसकी चूत में जीभ घुसा दी।.
उसने भी मुझ जैसा किया, फिर धीरे-धीरे हम दोनों एक-दूसरे पर खुलने लगे।.
थोड़ी देर बाद निकिता ढह गई। मैंने हल्के से उसका सभी पानी पी लिया।.
मैं उतरने लगी थी, तभी निकिता ने मेरी चूत को कुतिया-सी बनकर चाट लिया, सारा पानी सूख गया।.
थोड़ी देर के लिए हम दोनों बस इधर-उधर फैलकर पड़ी रही।.
संजना, बताओ तो सही - निकिता के साथ वक्त कैसा गुजरा? कुछ हल्का-फुल्का महसूस हुआ या बस इतना ही?
बोलते हुए वह मेरे पास आई, फिर अचानक मुझे चूम लिया।.
दोनों ने अपनी-अपनी जांघें सटा लीं, फिर कैंची की तरह हिलने लगीं।.
इतना करते-करते हम दोनों को बड़ी तरह की खुशी मिल रही थी। धीरे-धीरे हमारे मुंह से 'उम्म...आह...' निकलने लगा।.
इसी बीच, हम दोनों का पलटना एक और बार हो गया।.
तब भी, एक-दूसरे को खूब समय तक चिढ़ाने के बावजूद, हमारे मन में कुछ कमी सी लग रही थी।.
इतना समय बीत गया, दोनों ने यही कुछ किया।.
एक ने दूसरी की चूत में उंगली की, फिर बारी-बारी से आगे बढ़ते हुए। ऐसे ही चलता रहा, जब तक दोनों बार-दो बार नहीं झड़ गईं। इधर-उधर हाथ चलता रहा, जीभें भी काम पर लगी रहीं, चूमना भी बंद नहीं हुआ।.
बारिश के बाद हम दोनों के लिए एक-दूसरे को छूना अजीब तरह से खुशी भरा हो गया।.

Lesbian Sex - Porn GIF Magazine


थकावट ऐसी मची जैसे कोई दो पेट मदिरा पी चुका हो।.
फिर वो दोनों एक-दूसरे से सट कर, बिना कपड़ों के, चुपचाप सो गए।.
पहली बार में ही ये मुलाक़ात कुछ अलग लगी।.
सुबह के समय अगले दिन वो बाथरूम की ओर चल पड़ी। फिर गर्म पानी उसकी खाँसती हुई त्वचा पर बरसने लगा।.
थोड़ी देर में वह नहाकर बाहर आ गई।.
वो बोला - अब संजना, उठ जा। पानी में डूबकर आ।.
तभी मैं तैयार होकर बाहर आई। लाल टी-शर्ट उस दिन मेरे कपड़ों में शामिल थी। साथ में, होठों पर लाल रंग का लिपस्टिक भी था।.
उस दिन निकिता को देखकर मालूम हुआ, मैक्सी सचमुच उस पर जमती थी।.
टीवी के सामने सोफे पर निकिता के साथ बैठकर मैंने शुरू किया।.
थोड़ी देर बाद निकिता के पास बैठकर टीवी देखने के बाद आखिरकार मेरी आँख लग गई, इसलिए मैं कमरे में चली गई और बिस्तर पर लेट गई।.
कुछ समय के बाद, निकिता अंदर आई। वह मेरे पास जगह बनाकर लेट गई।.
मैं- क्या हुआ?
फिर उसके मुँह से निकला - कुछ तो घबराहट है, भई।.
उसने सिकुड़कर पलंग पर जगह बना ली।.
उसकी उँगलियाँ मेरी टी-शर्ट के नीचे सरकीं। पेट पर हल्के से फिरते हुए वो मेरे स्तन तक पहुँच गईं। एकदम आहिस्ता, उसने मेरे निप्पल को छू लिया।.
थोड़ी देर मैंने कुछ कहा नहीं, मज़ा आ रहा था।.
थोड़ी देर में निकिता के होंठ मेरे होंठों से टकराए। वह मेरे होंठ चूसने लगी।.
मुझे उसकी चादर जैसी ठंडी उँगलियों का एहसास हुआ।.
मुझे एहसास हुआ, उसके मुँह से मेरी लिपस्टिक पूरी तरह गायब हो चुकी थी।.
उसके होंठ मेरे होंठों से टकराने लगे।.
थोड़ी देर बाद हम दोनों को तेजी से उत्साह आया, फिर वह लड़की मेरे साथ खुद को छूने लगी।.
उसने मेरे होंठ चाहे जितनी देर तक पांच मिनट तक चूसे। मेरी टी-शर्ट बाहर आई उसके हाथ से।.
उसने मेरे गाल पर हल्का सा दबाव डालते हुए धीमे से चूस लिया।.
गुनगुनाते हुए मैंने उसका सिर अपने स्तन पर जमा दिया।.
फिर उसने मेरा दूध मुँह में लिया, धीमे से खींचते हुए।.
अरे ओ… सीई सीई करता हूँ मैं… अबे ले इधर, चूस तू बेशर्म औरत। आह छि छि… ऊइ माँ कहके बोलता हूँ मैं।.
उसके होंठ मेरे निप्पल पर थे, धीरे-धीरे खींचते हुए। एक हाथ दूसरे स्तन पर आराम कर रहा था, दबाव डालते हुए।.
उसकी उंगलियां मेरे नरम तथा गोल मम्मों पर आए-जाए। हथेली धीमे से दबाव बनाए, घूमती रही। छुआई ऐसी, जैसे कुछ ढूंढ रही हो। ऊपर से नीचे, फिर बीच में ठहर गई। सांस थम सी गई, जब उसने खींचा धीमे से।.
कुछ पल बाद, कमरे में सन्नाटा था। उसने धीरे से शर्ट के बटन खोले। हवा में एक हलचल हुई। जैसे-तैसे, पैंट भी फर्श पर आ गया।.
एक सेकंड में ही उसने ब्रा पहन ली, फिर पैंटी भी।.
दोनों मम्मे ब्रा के पीछे से साफ़-साफ़ नज़र आ रहे थे।.
अब जाकर समझ आया, पिछली रात कुछ एहसास नहीं हुआ था। लेकिन अभी देखने पर साफ़ हो गया – उसके बूब्स मेरे से काफी आगे थे।.
उसके गहरे रंग के निप्पल सीधे खड़े थे, ब्रा के कप को ऊपर की ओर धकेलते हुए। ऐसा दिख रहा था मानो पल भर में उन्हें छोड़ देगी कपड़ी।.
मेरा हाथ उसकी छाती पर आया, फिर मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसे मुँह में ले लिया।.
मेरा मुँह उसके एक निप्पल पर आया। धीमे-धीमे दांतों से दबाव डाला। फिर खींचकर चूस लिया।.
बस एक सेकंड में निकिता ने हुक सरका दी। फिर क्या था, छाती पर झट से ढील छूट गई।.
दूध का स्वाद उसके पास होने से कमाल कर रखा था।.
मेरे होंठों ने उसके निप्पल को धीरे से घेर लिया। दूध का आकार इतना ज्यादा था कि मुँह में पूरा नहीं उतर पा रहा था। अब मैंने उसे खींचते हुए चूसना शुरू कर दिया।.
मुँह से गर्म-गर्म सांसें निकल रही थीं निकिता की। ऊह…आह…उई सीई की आवाजें फैल गईं चारों ओर। हां, बस ऐसे ही, और भी तेजी से चूसो वो बोल पड़ी।.
मुझे उसकी सिसकाहटें सुनकर तपती हुई जलन महसूस होने लगी।.
उसका एक दूध मेरे मुँह में था, और धीरे-धीरे मैंने उसकी नरम प्यारी चूत को छेड़ना शुरू किया।.
थोड़ी देर मौन में उसकी जांघों के बीच हाथ फिरता रहा।.
अचानक निकिता ने टांगें अलग कीं। मौका पाकर मैंने उसकी जांघों के बीच झुककर अपना सिर धकेल दिया। हवा में गर्मी थी। मैंने जीभ से उसकी नमी छू ली।.
मैंने उसकी जांघों के बीच मुँह गढ़ा दिया, फिर धीरे-धीरे उसकी नरम परतों को दांतों से छेड़ना शुरू कर दिया। वो मेरे सिर को और नीचे खींच ले गई, तभी मैंने होंठों से झटके भरने शुरू कर दिए।.
निकिता की सांसें भारी हो गईं, वो धीरे-धीरे कराहने लगी - ओह… हाँ… मम्म… आह।!
मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डाल दी, बस तब ही वह अपनी गांड ऊपर उठा कर चूत को और खोलने लगी।.
मेरी उँगलियाँ उसकी चूत की पंखुड़ियों को खींचने लगीं, फिर मैंने जीभ आगे बढ़ाई।.
उसकी चूत को मैं जीभ से चाटते हुए, बीच की उंगली धीमे-धीमे अन्दर ले गई। फिर तेजी से आगे पीछे हिलाना शुरू कर दिया।.
अब निकिता के मुँह से ऐसी आवाजें आने लगीं जो होश भुला दें। मैं उसकी चूत पर झुकी, गहरे घूँट लेते हुए, धीमे-धीमे तेज होती जा रही थी।.
अब निकिता पर काबू पाना मुश्किल होता जा रहा था। उसके होंठ धीरे से एक निप्पल को छूने लगे, फिर वो खुद को रोक न सकी।.
मैंने धीरे-धीरे गहराते हुए उसकी चूत पर जीभ फेरना शुरू किया, साथ में उंगलियों को आगे-पीछे कियa।.
निकिता ने कहा - उफ़... हाँ… पूरी तरह से मुझे छेड़ते रहो, बस ऐसे ही जारी रखो।
उसके होंठ हिले, वह बोलते हुए अपनी जांघों को धीमा घटिया तरीके से हिलाने लगी। एक हाथ नीचे खिसक गया, उसकी उँगलियाँ फिसलकर अपने आप छूने लगीं।.
एक लड़की के मुंह से दूसरी लड़की की चूत पर नमी फैलते ही, उसकी इच्छा तेजी से शिखर की ओर बढ़ गई।.
थोड़ी देर में निकिता बिस्तर से झट से उठी। वह मेरे चेहरे के पास ले आई अपनी जांघों के बीच का हिस्सा।.
फिर उसने मुट्ठी से अपनी चूत पर दबाव डाला, धीमे-धीमे आगे-पीछे करते हुए।.
थोड़ी देर बाद उसकी योनि से गर्म पानी का प्रवाह शुरू हो गया।.
पानी को जब मैंने पिया, तो वह सवाद छुआ मेरी जीभ को। नमक और एक झलक खटास थी, शरीर की ओर से आई हुई।.
बारिश होने के बाद वह मुझे बिस्तर पर लिटा चुकी थी, फिर खुद मेरे ऊपर आकर लेट गई।.
उसने मेरे चूचे का निप्पल हाथ में लिया। फिर बदलते हुए दबाव के साथ मुँह में डालकर चूसने लगी।.
हल्की-हल्की सिसकियों का वक्त अब मेरे पास आ गया।.
हल्की सिसकियों के बीच में मैं ऊँघती रही।.
उसकी जीभ ने मेरी चूत में प्रवेश किया। मैंने उसे करीब खींच लिया, फिर वह हल्के-हल्के झटकों से आगे-पीछे होने लगी।.
मेरी सिसकियाँ अब खुलकर निकल रही थीं।.
उसकी आवाज़ हिल रही थी। कुछ पल के लिए सब कुछ ठहर सा गया। फिर वो दोबारा बोला - धीमे, मगर साफ।
इन छोटी-छोटी सिसकियों के बीच में ही मैंने अपने बूब्स पर हाथ फेरना शुरू कर दिया।.
उसने मेरी चूत के पंखुड़ियों को अलग किया। जीभ तेजी से आगे-पीछे होने लगी। होंठों ने चमटना शुरू कर दिया। खींचाव बढ़ गया।.
मेरे शरीर में ऐसी तपन होने लगी, जैसे कोई आग भीतर से फैल रही हो। इच्छाओं के दबाव से मैं धीरे-धीरे बुझने लगी।.
निकिता ने मेरी चूत में दो उँगलियाँ घुसा दीं, फिर तेजी से धक्के लगाए। मैं छटपटाते हुए ‘उई… हाँ हाँ… आआह…’ की आवाज निकाल रही थी। अपने निपल्स को दबोचे, मैंने खुद को चूस लिया।.
रुकना मुश्किल हो चला था।.
मेरी मुट्ठी निकिता के सिर पर थी, धीरे-धीरे आगे बढ़ी। उसकी उंगलियाँ मेरे भीतर तेजी से घूम रही थीं।.
थोड़ी देर में मेरी चूत से गर्म पानी का स्राव होने लगा।.
उसने मुझे छेड़ा, धीमे हलचल से। मेरी जांघें ढीली पड़ गईं, फिर वो नीचे उतर आया। अब उसकी जीभ थी, लगातार घिसटती हुई। एक-एक बूंद तक छूटने न पाए, ऐसे चूस लिया। खत्म हुआ सब कुछ, बिना कोई निशान छोड़े।.
कुछ समय बाद निकिता ने कहा - तुम्हारी आँखों में चमक देखकर ऐसा लग रहा है, मन में लंड की तलब बहुत गहरी हो गई है।!
उस समय मुझे एहसास हुआ - लंड सिर्फ मेरी नहीं, हम दोनों की ज़रूरत थी।.
उसके बाद कई दिनों तक हम आपस में ऐसा करती रहीं। शादी के बाद मेरे पति ने मुझे सबसे पहले अपना लंड चखवाया।.
बोलते ही संजना चढ़ आई मेरी गोद में, उसके पीछे-पीछे रुचि भी।.
थोड़ी देर आराम के बाद फिर से वही मेहनत शुरू हो गई।.
इतना सब एक साल, फिर दूसरे में भी बस यही चलता रहा।.
मैंने संजना के साथ शुरू किया, फिर बिना रुके रुचि पर आ गया। हर जगह घसीटता हुआ, दीवार से लेकर बालकनी तक पहुँच गया। कोई जगह छूटी नहीं, हर कोना भर गया।.
उस दिन मैंने संजना को पल-पल का बहाना ढूंढकर हर जगह छुपते हुए।.
अभी भी कई लड़कियाँ मेरे पास आकर संबंध बनाती हैं। क्या पता मेरे लिंग को कितनी जगहों में घुसने का भाग्य मिला है।.
तुम्हारे दिमाग में मेरी लड़की की Xxx कहानी पर क्या खयाल आता है, सच बताना।.

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0