पांच सहेलियाँ अन्तरंग हो गयी
Desisexkahaniya
प्रिय, बहुत दिनों बाद आज आपसे कुछ यादें साझा करना चाहता हूँ।
मेरी पहली कहानी में एक शादीशुदा लड़की का एक कुंवारी सहेली से प्यार था।
आज की मेरी कहानी देहरादून में एक जलविद्युत परियोजना बना रहे इंजीनियरों की है। रमेश, अंकित, संचित, प्रदीप और विशाल ये पांच इंजीनियर हैं। ये सभी 27 से 28 वर्ष के हैं और पिछले एक या डेढ़ वर्ष में शादी कर चुके हैं। बच्चा किसी का नहीं है और उसकी तैयारी नहीं है।
कम्पनी के कर्मचारियों के रहने के लिए एक बंगलो किराये पर लिया गया है क्योंकि यह एक कॉलोनी बन रहा है. बंगले में एक सुंदर बगीचा, स्विमिंग पूल, जिम और पांच बेडरूम के अलावा एक बड़ा हॉल भी है, जहाँ सभी मिलकर बैठकर गप्पें मार सकते हैं। पसंदीदा जमींदार बंगलो का है, इसलिए उसी हॉल में सर्वश्रेष्ठ सोफे भी थे।
ये पांचों ही दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से थे..। और सभी युवावस्था का पूरा आनंद लेने वाले थे। सुबह सब मिलकर जिम करते और लॉन के बाहर अपनी बीवियों के साथ चाय पीते थे। दस लोगों ने दिन भर कमर तोड़ मेहनत के बाद एक एक पेग खाया। उन्हें खाना बनाने और सफाई करने वाले दो नौकर मियां बीवी मिले, जो बाहर बने सर्वेंट क्वार्टर में रहते थे।
रमेश की बीवी अंकित की सीमा, संचित की रेखा, प्रदीप की रीमा और विशाल की अनीता है। पांचों लड़कियाँ बहुत रोमांटिक और सुंदर हैं। अकेले रहने से शर्म नहीं आती।
यद्यपि इन सभी को अभी डेढ़ महीने ही हुआ है, लेकिन उनकी सहानुभूति और खुलापन इन सबको परिवार से अलग नहीं लगता।
मैं मई महीने था..। हर दिन स्विमिंग पूल भर जाता था। ये पांचों लड़कियां स्विमिंग पूल में आपस में खेलतीं रहतीं, जबकि मर्द लोग बाहर आकर अपनी ड्रिंक संभाल लेते हैं। सुबह उठने पर एक दूसरे की खिंचाई करते और हर कमरे से सीत्कारें आती थीं। लेकिन उन लोगों में कुछ भी गलत नहीं था।
लड़कियों के कपड़े इतने छोटे थे कि वे सिर्फ हाफ पेंट और टी शर्ट पहनते थे। कभी-कभी फ्रॉक भी डाल लेतीं, लेकिन स्विमिंग पूल में सिर्फ टू पीस बिकनी में उतरतीं। उन सभी ने स्विमिंग पूल से बाहर निकलकर अपने पति की गोदी में बैठकर आध सिप मारना अपनी आदत बना लिया।
रात को एक साथ खाते थे और कभी-कभी मजलिस भी जम जाती थी। उन लोगों ने अपने कमरे में टीवी नहीं लगाकर यहीं एक बड़ा टीवी लगा रखा था, जिससे दोनों लोगों का मनोरंजन एक साथ होता था।
जब दोनों सर्वेन्ट्स इन्हें खाना खिलाकर चले गए, तो सभी जोड़ियाँ बेतकल्लुफ हो गईं। अंकित और सीमा कुछ ज्यादा ही सेक्सी थे, इसलिए अक्सर अंकित अपने मोबाइल पर ब्लूटूथ ओन करके पोर्न वीडियो डालता था, जो सभी को परेशान करता था लेकिन सब लोग देखते थे।
हाँ, सभी उस दिन चुदासे हो गए, और किसिंग भी उस दिन शुरू हो गई।
अंकित ने एक रात ऐसी ही फिल्म लगा दी और लाईट बंद कर दी। लेकिन टीवी स्क्रीन से ही कुछ प्रकाश आ रहा था..। यह स्पष्ट था कि आज उठकर कोई नहीं जाएगा। जो कुछ करना है, वही करे।
जोर से खिलखिला उठे सब लोग। क्योंकि आज मर्दों ने ड्रिंक्स नहीं पहने थे और सभी ने डीप नैक फ्रॉक पहने थे, शायद लड़कियों को पहले से ही पता था।
विशाल ने हॉल के फ्रिज से बियर की चिल्ड बोतलें निकालकर उसमें थोड़ी थोड़ी व्हिस्की मिलाकर सबको पकड़ा दीं।
नीता ने लड़कियों का नेतृत्व किया और हर एक में पांच प्लेट सरका दीं। पाँचों आदमी अधलेटे होकर शो देखने लगे. वे अपने पैरों के बीच अपनी बीवी रखते थे। मूवी अंकित ने छांटकर ग्रुप सेक्स लगाया था।
अब उन लोगों को शर्म भी नहीं थी। 15 मिनट बाद बियर और व्हिस्की का सुरूर उन पर चढ़ना शुरू हो गया। असल में, सुरूर सिर्फ नशे का था, बाकी फिल्म की स्क्रीन पर चल रही थी। अब लड़कियों ने मर्दों के हाथों को अपने मम्मों पर घूमना शुरू कर दिया, और लड़कियों ने भी अपने हाथों को पीछे करके लंड को खोजना शुरू कर दिया।
तब विशाल ने पूछा, "अबे अंकित, आज सीमा से यहीं कबड्डी खेलेगा?"
वह सब चौकन्ने होकर हंस पड़े और बैठ गए। लेकिन यह स्थिति को संभालने का नहीं था..। सीमा ने टीवी की आवाज बढ़ा दी..। अब टीवी पर चुदाई चल रही थी, जिससे सीत्कारें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। अब नीता मुंह मोड़कर रमेश के होंठ से मिल गई।
संचित ने उसकी फ्रॉक को नीचे से उठाकर उसकी पैंटी में अपनी उंगलियाँ डाल दीं, जबकि रेखा भी नीचे होकर अपने हाथ ऊपर करके उसके होंठ से अपने होंठ बार-बार मिला रही थी।
रीमा और प्रदीप आपस में चिपट कर लेट गए और उनकी नजदीकियां हद पार कर रही थी।
अनीता, जिसे लंड चूसने का बहुत शौक है, नीचे गिरकर एक बड़ा लंड मुंह में ले गई।
सीमा ने टीवी नहीं देखा। कमरे में अब घुप्प अँधेरा था। मानों अँधेरा होते ही भूचाल की तैयारी हो गई। अब किसी को कुछ दिख नहीं रहा था, लेकिन चूमने-चाटने की सीत्कारें बताती थीं कि वहां क्या हो रहा था।
दस मिनट की हिंसा के बाद हंसते हुए अंकित ने सुझाव दिया कि सभी अपना सामान लेकर अपने कमरे में चले जाएँ।
पांच मिनट में, पाँचों लोग अपनी बीवियों के साथ अपने कमरों में चले गए।
जो सुबह हंसी ठंडी हुई, पूछो मत..। सभी एक दूसरे को टक्कर मार रहे थे। यही कारण था कि वे एक दूसरे पर कोई फर्क नहीं डालते थे।
योजना का काम चल रहा था। अब वे अक्सर रात को सोने लगे। रमेश, जो इनमें सबसे वरिष्ठ था, कभी-कभी रात को देर हो जाती। लौटने पर, इनमें से कोई न कोई उसके काम पर रुक जाता। उधर, बाकी लोग उन दोनों की बीवियों को खाना खिलाकर ही सोते थे। औरतें आदमियों से अधिक और जल्दी बेशरमी होती हैं। उस रात के बाद ये लड़कियां आपस में कुछ अधिक हंसी-मजाक करने लगीं, लेकिन आदमी इसमें कभी शामिल नहीं हुए।
एक दिन दोपहर, सभी लड़कियां नीता के कमरे में बैठकर बहस करती थीं। घर में और कोई व्यक्ति नहीं था
सीमा ने बताया कि कल उसने और अंकित ने एक पोर्न फिल्म देखा. इसमें चार-पाँच जोड़े मिलकर बोतल गेम खेलते हैं, जिसमें बोतल नीचे रखकर घुमाई जाती है। पहले राउंड में, जब बोतल का मुंह किसी की ओर आता है, सामने वाला पार्टनर और वह बदल जाते हैं। ऐसा कई बार होता है, और जब सभी पार्टनर बदल जाते हैं, तो दूसरा राउंड शुरू होता है, जिसमें बोतल नीचे रखकर घुमाई जाती है। जब बोतल का मुंह किसी की ओर आता है, उसे अपना कपड़ा उतारना चाहिए। गेम की शर्त यह है कि जब तक सब लोगों के कपड़े नहीं उतर जाएंगे, गेम बंद नहीं हो सकता।
जब सबके कपड़े आखिर में उतर जाते हैं, तो सभी चिपटकर एक दूसरे को किस करते हैं और फिर एक साथ सेक्स करते हैं।
लड़कियों को कहानी सुनना बहुत अच्छा लगा..। रेखा ने इतनी देर में फ्रिज से पानी की बोतल निकाली। सभी ने घूँट भरकर खाली कर दिया।
बीच में बेड पर रखकर रेखा ने बोतल घुमा दी, जो उसके मन में घूम रहा था। नीता के सामने आते ही बोतल रुकी। नीता ने अपना एक कपड़ा उतारा और सभी जोरों से हंस पड़े।
लंबे संघर्ष के बाद, नीता ने शर्त लगाई कि वह इसके बाद नहीं उतारेगी। अब नीता ने अपनी पहचान उतार दी। गुलाबी ब्रा उसके नीचे थी।
गेम पुनः शुरू हुआ..। अबकी बार, रेखा फंस गई..। उसने अपना हाथ उठाया..। उसने फ्लोवेरिश पैंटी पहनी हुई थी।
नीता ने एक बार फिर हंसते हुए बोतल को देखा। नीता ने जोर से कहा, "कमीनियो, मैं अब नहीं उतारने वाली।" मैं पहले ही कह चुका था।
सब लोग मान गए।
अबके रुकी अनीता के सामने, बोतल फिर से घुमाई गई..। वह फंस गई..। वास्तव में, उसने सिर्फ पैंटी और ब्रा पहनी थी। रेखा ने उसे घेर लिया जब वह भागने लगी..। आखिरकार, उसे अपने कपड़े उतारने पड़े। उसकी गोल गोल गोलाइयां क्या थीं!
आगे आकर नीता ने उसके निप्पल चूम लिए।
अब सिर्फ सीमा और अनीता है..। बोतल घूमते ही नीता ने अनीता का टॉप भी खींच लिया, और अनीता ने सीमा भी। अब जब पाँचों कपड़े नहीं पहनते थे, तो सभी हंसने लगे। अनीता ने जबरदस्ती अपना टॉप वापस पहन लिया।
चलो आगे भी खेलते हैं, नीता ने कहा।
अनीता ने कहा, "मैं नहीं, अब तुम मुझे नंगी करके मानोगी।"
रेखा ने कहा, "अब खेल का नियम बदलेगा", जब वह उसकी बात सुनती थी। अब बोतल का मुंह उसकी ओर होगा और बोतल का पीछे वाला भाग उतारेगा।
इसके बावजूद, चाहे अनीता ऊपर या नीचे उतरे, उसके पास ये विवेक रहेगा।
बोतल एक बार फिर हंस पड़ी..। अबकी बार रेखा के सामने मुंह और नीता के सामने पीछे का हिस्सा..। रेखा की ब्रा गायब हो गई, नीता का लोअर गायब हो गया।
क्योंकि नीता ने पैंटी नहीं पहनी थी और भूल भी गई थी, सब जोर से हंस पड़े।
नीता ने तुरंत बोतल घुमाई, चाहती थी कि कोई और भी नंगा हो जाए। अबकी बार बोतल का मुंह अनीता के सामने था और उसके पीछे का भाग सीमा के सामने था।
उसने बहुत छोटी सी, जालीदार पैंटी पहनी थी, इसलिए सीमा का लोअर उतरते ही सबने आहें भर दीं। नीता ने अनीता का लोअर खींचकर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया।
अब हड़ताल हो गई..। बोतल को एक तरफ फेंककर सभी एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे..। बेड मानो हिल गया..। तकिये सब नीचे गिर गए। सब हंसते हुए बेड पर नंगी पड़ी थीं।
नीता ने कहा कि रानी आ गई होगी, फटाफट कपड़े पहनो, जब डोरबेल बजी।
सबने अपने आप से वादा किया कि वे मर्दों को नहीं बताएँगे।
मर्दों को उस रात के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया था, लेकिन उस रात और इस घटना ने लड़कियों को बहुत खुश कर दिया था। अब वो स्विमिंग पूल में भी एक दूसरे के निजी भागों को छेड़ने लगी थीं। दिन ऐसे ही खुशी से गुजर रहे थे।
अब दिन में बहुत मस्ती नहीं होती क्योंकि रमेश और विशाल अक्सर रात को जल्दी लेट जाते हैं या सुबह जल्दी चले जाते हैं. दोपहर को वे या तो सोने आते हैं और शाम को चार बजे तक वापस आते हैं, जिससे वे दो या तीन घंटे के लिए जा सकते हैं।
साथ ही, उन लोगों को मुख्यालय से चेन्नई में तीन दिन की ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया। अगले हफ्ते पांच इंजिनियर फ्लाइट से चेन्नई गए थे..। पीछे से लड़कियों को कठोर आदेश दिया गया कि वे शाम होते ही मुख्य दरवाजा बंद कर दें। सेफ्टी के लिए स्थान पर से एक गार्ड भी लगाया गया था।
सुबह तड़के ये लोग चले गए। अब तीन दिन तक लड़कियां पूरी तरह से स्वतंत्र थीं..। पहले, उन लोगों ने रानी और राकेश को बताया कि वे केवल उनके बुलाने पर आएंगे और तुरंत काम पूरा करके चले जाएंगे। सुबह रानी और राकेश ने पूरे घर को साफ करके नाश्ता बनाया। काम देखने के बाद, नीता ने उन्हें जाने को कहा और कहा कि अगर आवश्यकता होगी तो फोन करेगी।
अब भी बाकी लड़कियां बिस्तर से उठी नहीं थीं।
रानी के जाने के बाद नीता ने उन्हें एक एक के कमरे में उठाया..। सब लोग बहुत खुश थे। बहुत दिनों बाद आज 10 बजे तक सोने और उठते ही नाश्ता तैयार करने का अवसर मिला।
फ्रेश होकर सब नाश्ते के लिए इकट्ठे हुए, अनीता ने देखा कि कोई खाना नहीं है।
नीता ने कहा कि आज घर पर कोई नहीं है; आप लोगों को जितना कमीनापन करना हो करो!
सब लोग हंस पड़े..। नाश्ते के बाद सभी लोग हॉल में पसर गए..। पेट भर गया था और मज़ा हावी था।
रेखा ने बोलना शुरू किया और सबसे पहले पूछा कि आज कौन सच कहता है कि कितनी बार चुदी है।
यह ठीक था क्योंकि पुरुष तीन दिन की छुट्टी पर जा रहे थे, इसलिए अतिरिक्त सेक्स होता ही था।
नतीजा एक ही था: एक बार रात को चुदाई हुई, फिर सुबह उठते ही..।
जब साहस आ चुका था, सीमा ने अपने स्तन उघाड़ दिए और कहा, "जालिम ने चूसते हुए चूसते हुए नील भी डाल दिया।"
वास्तव में, उसके गोरे गोरे मम्मों पर गहरा नीला या लाल रंग का निशान था।
रेखा ने कहा कि रात की चुदाई कुछ अलग थी।
उसने कहा कि संचित रात को सोना नहीं चाहता था, इसलिए मैंने उसे सुलाकर कहा कि सो जाओ वरना दिन में थक जाएगा।
“मैं तो अभी सो जाऊँगी,” रीमा ने कहा। सुबह चार बजे ही प्रदीप ने सेक्स शुरू कर दिया था।
उसने कहा और लम्बी होकर लेट गई।
उसके लेटते ही सब लोग आपस में चिपट गए। नीता को बदमाशी लगी तो उसने अपना गाउन उतार दिया। वह पूरी तरह से नंगी थी। रीमा के मुंह के पास अब घुटनों पर बैठ गई। रीमा ने अपनी जीभ को उसकी चूत में डाल दिया।
इसके बाद क्या हुआ? प्रत्येक व्यक्ति ने एक-दूसरे के कपड़े नोच डाले..। रेखा ने रीमा की चूत में अपनी जीभ डाल दी, जब सीमा और अनीता एक दूसरे के मम्मों को चूसने लगीं।अनीता की चूत की खुजली रीमा अपने एक हाथ की उँगलियों से मिटाने लगी।
अनीता ने दूसरी की उंगली अपनी चूत में डालते देखा।
सभी खिलखिलाकर सीत्कार कर रहे थे। यद्यपि पिछले बारह घंटों में उन सभी को जमकर चोट पहुँचाई गई थी, फिर भी वे चोट पीने को उत्सुक दिखाई देती थीं।
नीता भाग गई और किचन से पांच खीरे ले आई..। यह भी लगता है कि खीरे खास तौर पर बाजार से मंगवाए गए थे..। मोटे और लंबे..। अनीता ने एक खीरा झपट लिया और रीमा ने दूसरा..। अनीता ने खीरा ऐसे मुंह में लिया जैसे कोई लंड चूस रही हो। उसने जोर से खीरा सीमा की चूत में डाल दिया और उसे अंदर बाहर करने लगी।
रीमा ने भी उसे देखते हुए अपना खीरा अपनी चूत में डालकर टांगें उठा कर जोर से बाहर करने लगी। नीता ने रेखा की ओर एक खीरा उछालकर अनीता की चूत में खीरा डाला।
रेखा को भी बदमाशी लगी तो उसने नीता को लिटाकर एक खीरे को उसकी चूत में डालकर दूसरी ओर से चुदाई करने लगी।
अब सब कुछ वासनामय हो गया। अब सीमा और अनीता एक दूसरे से चिपटी पड़ी थीं और एक दूसरे की चूतों से मसाज कर रही थीं।
69 की पोजीशन में भी नीता और रेखा एक दूसरे की चूत चाट रही थीं। रीमा भी अनीता की चूत में अपनी जीभ डाल दी। सीमा ने अनीता को भी छोड़ दिया और रीमा की चूत को चाटने लगी।
एक दूसरी की चूत और मम्मे पंद्रह बीस मिनट तक लाल करने के बाद सभी लड़कियां निढाल होकर गिर पड़ी। डेढ़ घंटे बाद हर किसी की आँख खुली..। 12 बज गए थे। नीता ने अपना गाउन पहनकर रानी को फोन करके खाने की तैयारी करने को कहा और सबको अपने कमरे में जाने को कहा।
अनीता और रेखा ने फटाफट कमरे को ठीक किया और खीरों को फ्रिज में रख दिया, ताकि वे सलाद में काट सकें।
अगले तीन दिनों में भी उनकी भाषा बदल गई थी..। अब ये बड़ी बेशर्मी से आपस में अश्लील वाक्य बोल रहे थे। बातों बातों में, नीता कहती, "आजा चढ़ जा मेरे ऊपर!"
अनीता ने घोषणा की कि अगर तुम चुप नहीं रहोगे तो मैं तुम्हारे बाल चूसकर लाल कर दूँगी।
इन सभी ने दूसरी रात भी शराब पी ली और बेशर्मी से नशा किया।
यदि ये लोग अंदर से लॉक नहीं लगाते तो वे नशे में नंगे ही बाहर निकलते।
रेखा और अनीता ने सिगरेट भी पीते थे। रेखा ने बताया कि शादी से पहले भी वह हॉस्टल में शराब पी चुकी थी।
नीता के पास एक वाइब्रेटर था, जिसे उसने आज तक न तो किसी को दिखाया था न किसी को बताया था। उस दिन, रेखा और अनीता को एक खीरे से चुदाई करते देख नीता ने अपना वाइब्रेटर इन सबको दिखाया, जबकि उसने अंकित को भी इसके बारे में नहीं बताया था। रमेश का लंड शादी के बाद हर समय चढ़ाई के लिए तैयार रहता था।
नीता को भी अपने हॉस्टल में इससे प्यार था। अब नीता ने हर किसी की चूत एक-एक करके लाल करनी शुरू कर दी। उस दिन मैंने इसकी नई बैटरी मंगवा दी थी, इसलिए स्पीड भी बहुत अच्छी थी। वाइब्रेटर के घुसते ही रीमा उछलने लगी और रोने लगी..। नीता और बाकी बाकी ने कभी अपनी चूतों में वाइब्रेटर नहीं पहना था, इसलिए यह उनके लिए एक नया तजुर्बा था।
सभी सुबह से ही भयभीत थीं क्योंकि अगले दिन उनके पति आने वाले थे। तीन दिनों से घर की सफाई नहीं हुई थी, और रानी और उसके पति को रात को शाही डिनर बनाना था।
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