रातभर सलहज के साथ सेक्स वार

AviAvi
Jan 5, 2026 - 11:48
Jan 7, 2026 - 20:13
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रातभर सलहज के साथ सेक्स वार

सुबह-सुबह वो मिले, हल्की सरगर्मी थी। कभी-कभी तेज़ी आई, बिना किसी शोर के। एक-दूसरे के पास रहने का अंदाज़ था। कुछ पल खामोशी छाई, फिर चलता रहा वो दौर।

रातभर सलहज के साथ सेक्स वार XXX में खत्म हुआ। अगली सुबह भूख ने पेट पकड़ लिया। नाश्ते का ऑर्डर दिया गया, फिर नजर साले की बीवी पर ठहर गई, जो बिना कपड़ों के थी।

नमस्कार दोस्तों,

एक और कहानी मेरे साथ आई है, इस बार भी आयुष बिंदल के रूप में।

पिछली कहानी

सलहज के साथ एक रात बनी सुहागरात

पता चला था कि मानसी से मुलाकात के बाद हमने खूब संभोग किया, फिर आधे घंटे के लिए नींद में डूब गए।

उसकी सांसें मेरी छाती पर थीं, मानसी का शरीर मेरे साथ जुड़ा हुआ था।

आधी रात के आसपास मानसी की नींद खुल गई।

उसने मुँह छुआकर धीमे स्वर में कहा - पेट खाली है।!

उसकी गोल जाँघों को थपथपाते हुए मैंने चुंबन का जवाब दिया। फिर होटल में पनीर वाला पास्ता और तला हुआ चावल मँगाया गया।

एक-दूसरे में उलझते हुए, मुँह को चाटते हुए तरबतर हो गए, उंगलियाँ धीमे से शरीर पर फिसलने लगीं।

थोड़ी देर में मानसी वहाँ पहुँची, सीधा मेरे खड़े हुए लिंग की गुदा उतार दी तथा अपनी जीभ से चाटने लगी। मैं कामुकता के पानी में घिर गया।

Kissing Handjob Porn Gifs | PornGif.coउसने लंड को मसला, साथ ही जीभ को अपने चक्कर में फँसा लिया।

मुँह में उतना भर लिया जितना संभव था, प्यार से चूसा और सब कुछ अपने अंदर खींच लिया। ऐसा लगा जैसे जन्नत मिल गई हो।

उसने पाँच मिनट तक उसके सिर को पकड़ा, फिर धीमे-धीमे गुलाबी होंठों पर जबरदस्ती की।

गले में लंड पहुँचा, सांस फूलने लगी।

जब दर्द ने पकड़ बढ़ाई, रुक गयी। सांसें टूटने लगीं, धीमे से बोली - धीरे चलो, मुझे सांस लेने दो!

हल्की सी मुस्कान के साथ होंठों पर छेड़ा - अब सांस लो। तुम कुछ न करो, बाकी मैं कर लूंगा।!

पोज बदल ली।

अब वो है नीचे, सामने आई गुलाबी चमकदार लता जैसा मुंह।

हवा में बदन की गर्माहट घुल गई, जैसे कोई रास्ता छूकर निकल गया हो। शरीर की नमी के साथ एक सांस अटक गई। दिमाग में झनझनाहट फैली, मन धीमे से डगमगाया।

मुलायम गुदा को जल्दी से मुँह में लिया, फिर दाँतों से दबोचकर चाटना शुरू किया।

उम्मीद नहीं थी मानसी के पास।

सिसकते हुए, बालों को खींचा, सांस ऊपर की ओर - उफ़, धीरे… हाँ, ऐसे ही… मैं यहीं रहूँगी।!

मौन सुनकर भी कोई सुधि न ली, फिर भी मुँह बंद रखे हुए था।

थक कर मानसी बिछड़ गई, सिसकियों का दौर शुरू हो गया। सांसें तेजी से अंदर खींची। उसने चाटना शुरू कर दिया, जोर से।

एकदम अचानक से वो मुझे चूमने की जगह पर दाँतों से खा जाने लगी।

खाना लाते-लाते वेटर को पकड़ गई घंटी की आवाज।

मानसी छोड़ा।

खुद को ढक लिया मानसी ने चादर से, वहीं तौलिया बाँध मैं दरवाज़ा खोल बैठा।

कपड़ा तिरछा पड़ा था, वेटर ने ध्यान से देखा। उसकी नजर मानसी पर ठहर गई, चादर समझकर आगे बढ़ दिया। मुस्कान लिए वो चल दिया, टेबल के पास जाकर रुका।

खाते समय कपड़े उतारकर रख दिए।

कभी-कभी मानसी पास्ता का टुकड़ा मुँह के एक हिस्से में छोड़कर दूसरे से मेरी तरफ झुकती, मैं उसके होंठों से वो चबाकर ले लेता।

पलंग पर आराम से लेट गए, तबीयत अच्छी थी।

उसने मानसी के साथ लंबे पल बिताए - होंठों का स्पर्श किया, हाथ फिराए, धीमे-धीमे दबाव डाला, गति बढ़ाई।

तेजी से उसका लिंग कड़ा हो गया, वो ऊपर आई, धीमे ढंग से भीतर डाला।

जब लंड चूत में गया, सिसकने का अहसास तेज हो उठा।

अब सिर्फ़ धक्के महसूस हुए, तकलीफ़ घटने लगी, आगे-पीछे का हिसाब खो गया।

बैठे रहने पर मिलता है सुख, ऊपर से नीचे तक।

उसने थककर लेट गए को देखा, फिर पैरों से मजबूती से धक्का दिया।

आवाज़ें कमरे में टकरा रही थीं, धीमी साँसें अब लगातार आवाज़ बन चुकी थीं।

बिस्तर से नीचे उतरते हुए कई झटके लगे, फिर जांघें अलग कीं। गुदा पूरी तरह ढीली पड़ गई, मांस टकराया आवाज़ हुई।

चीख़ के साथ मानसी का गला भर गया। उसके मुंह से निकला – आआह, श्ह्ह, ह्म्म।

टांगों में तनाव, स्थिति अब नहीं बन पा रही।

एक कंधे पर टांगें डाली। फिर धीमी गति से चलना शुरू हुआ। स्तनों को हथेलियों में भरकर दबाया।

ख़ुशी आ गई मानसी के चेहरे पर, एक हल्की सी मुस्कान फैल गई।

मुँह के बीच में जीभ ने स्वाद चख लिया।

खड़े होकर उसने समेटा गोद में, हथेलियाँ पीछे की ओर फिसल गईं।

उधर मानसी ने हाथों को पीछे की ओर सरका दियa।

नीचे से ऊपर को छुआ, मुँह लगा रहे।

लड़ाई की शुरुआत होते ही तेजी से बढ़ गया हथियारों का आदान-प्रदान, मुठभेड़ पूरी तरह खिंच गई।

तेजी से हर झटके में धड़ाम।

बाहर की तरफ से लंड पूरा अंदर की ओर, आवाज़ में चिढ़ थी।

थकावट लगती है, वजन के साथ। ऊपर रखा गया मेज़ पर, बैठाकर। उसकी ऊंचाई कमर तक होनी चाहिए।

एक पैर कमर में अटक गया, तभी चूत फैल उठी।

घमंड से भरी जुबान घूमती है, मानो पलक झपकते तेज़ी से लहराए किसी बवंडर की तरह।

ये आसन करते वक्त मस्ती खूब होगी, पढ़ने वालों से बस इतनी बात है।

गति ऐसी मानो पिस्टन सा हिले।

उंगलियों ने गुदा को रगड़ा, वहीं पलटकर स्तन पर हथेली आई।

उसकी उंगलियाँ धीरे से गर्दन को छूती हुई।

मानसी को थकावट महसूस नहीं हुई, फिर भी वह दो बार लड़खड़ा गई।

तब लावा निकल पड़ा, सांसें अटक गई।

नीचे आई मानसी, लंड को मुँह में रखकर सू-सू किया।

कहा - छोड़ दे, मौके पर ही सब कुछ बह जाएगा।

न सुनी।

सर दुख रहल हई, कमरे में गंध फैललई।

गों-गों आवाज।

महज दो मिनट बाद पहाड़ के अंदर से आग निकली, हवा में धुआं छा गया।

पूरा अंदर हो गया, स्खलित द्रव निकलकर छाती-गले में फैल गया।

फिर वो सब अंदर गया, लौंड़े पर जीभ घुमाकर साफ हो गया।

थकावट से चूर होकर मैं बिस्तर पर जा गिरा।

चबाते हुए मानसी ने ध्यान नहीं दिया, फिर सब कुछ साफ कर दिया।

तब वो बाथरूम में गई, चेहरा धोया। पलंग पर जाकर लेट गई।

हवा थोड़ी कम है, पर ये उमंग भरा पल है।

वीर्य ज्यादा निकला।

ऊपर आते ही मानसी ने किस कर दिया।

सूंघने में तो वीर्य का ही रंग-स्वाद है, पर अपने मन के भावों के साथ इसका कोई वास्ता नहीं होता।

इधर पलटकर लिटा दिया, फिर कसकर गले लगा लिया।

इस तरह से लड़कर हम आगे बढ़ गए।

दोपहर की मीटिंग अगले दिन थी, सोने का कोई बुखार नहीं था।

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