ट्यूशन टीचर मैडम के साथ पहली चुदाई का मजा

Desisexkahaniya

AviAvi
Jan 3, 2026 - 15:43
Jan 8, 2026 - 17:46
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ट्यूशन टीचर मैडम के साथ पहली चुदाई का मजा

(अकेले घर पर पढ़ाई का बहाना, फिर नंगी करके चूत और गांड दोनों फाड़ी)

एक टीचर के साथ मेरा ट्यूशन का सिलसिला शुरू हुआ, क्योंकि वो दिखने में काफी आकर्षक थी। कई महीनों बाद मौका मिला, तब जाकर उसके साथ संबंध बने।.

अरमान कहलाता हूँ मैं। बसेरा बेंगलुरु में है, पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ।.

सांवला रंग तो मेरा है ही, पर चेहरे पर वो खिंचाव है जो किसी भी लड़की या भाभी को झट से अपनी ओर खींच लेता है।.

एक बात जो लड़कियों या भाभियों के लिए कभी-कभी अहम हो जाती है - वो है अच्छा लंड। मेरे पास वो है।.

मेरा लंबा साढ़े छह इंच का है। पतला नहीं, मोटापन ऐसा कि कई बहनें चढ़ाए जाने के बाद रोने लगती हैं। किसी को खुश करना तो ओवर है, कुछ तो बस एक झटके में टूट जाती हैं।.

यार, ये कहानी है मेरे पहले सेक्स का सच।.

गलतियाँ हो सकती हैं, क्योंकि मैं लेखक नहीं हूँ। माफ कर देना, अगर कुछ चूक हो जाए।.

एक दिन बात चल पड़ी मेरे और श्वेता मैम के बीच, जो धीरे-धीरे सेक्स की ओर झुकने लगी।.

साल 2018 में, जब मैं कोलकाता में आकर रहने लगा। तब की बात है वो X टीचर के साथ घटना। उस वक्त सात साल पहले का दौर था।.

एक समय ऐसा भी था जब मैं बीटेक पढ़ने के लिए गया हुआ था।.

तभी एक साथी का परिचय हुआ। इस कथा की शुरुआत उसी व्यक्ति से जुड़ी है, जो धीरे-धीरे मेरा दोस्त बन गया।.

एक दिन कोई पलट कर लगा कि उस दोस्त की पढ़ाई में एक विषय ऐसा है जहाँ वो बिलकुल पीछे रहता। फिर एक बार जैसे-तैसे उसकी नज़र ज़ेरॉक्स की दुकान में एक शिक्षक का नंबर पड़ा।.

वो नंबर कागज पर उतारा। फिर फोन उठाया, आवाज सुनी तो बोला - इस टॉपिक को समझना है मुझे।!

तीसरे सेम में यही हुआ था।.

दोपहर ढलते ही मैम ने मेरे दोस्त को घर पर बुला लिया।.

एक दिन के बारे में सोचो, जब मेरा यार मुझे अपने संग ले गया।.

उस दिन जब मैम से मिलने गया, रुके उनके आँगन के पास वाले कोने में।.

दस मिनट के आसपास इंतजार के बाद, सामने एक खूबसूरत लड़की दिखाई दी।.

उसने मेरे दोस्त से बातचीत शुरू कर दी। पढ़ाई का समय लेकर दोनों चर्चा में थे। मैं ध्यान उस अजीब सी आकर्षण वाली महिला पर टिकाए हुए था।.

एक सुनहरी शाम की तरह, मैम की हॉटनेस का जिक्र मैं यहाँ कर देता हूँ।.

उम्र से कहीं जवाँ दिखती थी वो, पर उसके तैंतीस पार हो चुके थे।.

उसकी छाती का साइज़ 34 इंच का था, जो बहुत तगड़ा लग रहा था। पीछे का हिस्सा 2 इंच ज़्यादा मोटा था, यानी 36 इंच का।.

उस महिला की पीठ सीधी थी, बिल्कुल तनी हुई।.

उसकी कमर डगमगाती, मैडम एक तरफ़ से दूसरी ओर झुकतीं। मेरी नजरें चिपक जातीं उनकी 30 इंच की कमर पर। रुक-रुक कर देखना शुरू कर देता मैं।.

उसके आगे तपती धूप में भी छाया सूख जाती। कोई नज़र मिलाता, तो शरीर झुलसने लगता। हर सांस में बवासीर घी की तरह फैल जाता। चलते-चलते राह में पत्थर भी मुड़कर देखते।.

हर कोई जानता है, बंगाल की लड़कियाँ कितनी सुंदर होती हैं।.

एक दिन मेरे यार ने टीचर से बात की। फिर वो महिला मेरी ओर घूमी। आखिरकार उसने प्रश्न किया - तुम भी मेरे साथ पढ़ोगे?

अगर मैं उस विषय में इतना मजबूत क्यों न हो, पर उसे देखकर ऐसा लगा जैसे समझ बूझ छूट रही हो।.

देखते हुए मैंने कहा - जी हाँ मैडम, मुझे तो सिर्फ आपके पास ही कक्षा लेनी थी!

उसकी आँखें मुझ पर टिकी हुई थीं, ऐसे जैसे कुछ अजीब सा देख रही हो।.

वापसी के बाद हॉस्टल में दोनों पहुँच गए।.

एक दोस्त ने पूछा - तुम्हें तो यह सब अच्छी तरह आता है… फिर भी क्या बात है?

मैंने कहा - अरे सुनो, वो मम बहुत अच्छी लगी। प्यार हो गया उसके साथ… मिलना ज़रूरी है मुझे उससे… तो मैंने हाँ कर दिया!

वह हंसने लगा.

इसके बाद गपशप शुरू हो गई, मैम की जवानी पर चर्चा होने लगी।.

अगली सुबह ट्यूशन के लिए निकला। वो मैम व्हाइट टी-शर्ट में खड़ी थी, बगल में बैठी छात्रा की तरफ झुकी। बैंगनी लंबी स्कर्ट उसकी कमर पर ठीक बैठी थी। आवाज़ ऊपर से आई, "कल फिर आना"।.

ऊपरी कपड़ा तंग होने पर भीतर की चीजें समझ में आ गईं।.

उसके बूब्स गोल-गोल से नजर आ रहे थे, क्योंकि ब्रा बहुत तंग पड़ रही थी।.

मैं तभी उस मैम की जवान चूचियों पर नज़र टिकाए हुए था।.

मैम को पता चल गया था कि मैं उनके दूध की ओर घूर रहा हूँ।.

उसी पल उनकी नज़र मेरी ओर घूमी। मुझे देखते ही वो मुस्कुराईं, फिर कक्षा शुरू हो गई।.

अब साफ़ हो गया था कि उसे भी यही पसंद आ रहा है।.

ऐसे ही कुछ दिन बीतते गए।.

खत्म हुआ थर्ड सेमेस्टर, अब वो दोस्त ट्यूशन नहीं जा रहा।.

फिर मैम से बात हुई। अब अगले सेमेस्टर की पढ़ाई शुरू हो गयी है।.

अगले दिन से आना, मम्मी ने पखवाड़े भर बाद कहा - उनके दूसरे घर।.

एक दिन कोई बात समझ में आई - उसके पास दो घर हैं।.

उसके नए घर का पता मैंने तब लिया, जब मैम ने हफ्ते के अंत में मुझे वहाँ आने को कहा।.

ग्यारह बजे के करीब मैम ने बुला लिया।.

एक कमरे में जाकर उसने पढ़ाना शुरू किया, मैं अकेला था।.

लग रहा था मानो कमरे की सफाई आज ही हुई हो। कोई तब से यहाँ नहीं आया।.

पूछ लिया मैंने - यहाँ क्यों बुलाया है आपने?

उसने कहा - ये तो अब बना है, ज़्यादा किसी के आने का चलन नहीं। घरवाले भी अभी इधर पैर नहीं रखते। यहाँ बैठकर पढ़ने में कोई रुकावट नहीं आती।.

लगा कि चूँकि यहाँ कोई नहीं आता, मैम को पीछे से धीरे-धीरे छेड़ा जा सकता है।.

हंसते-हंसते शायद उनके मन में भी खेल जाग गया। फिर वो मुझसे मज़ाक करने लगीं।.

सब्बर के दिन जब दोनों पढ़ाई समाप्त करके चले गए, तो उसने मुझसे कहा कि कल फिर आना।.

उसने कहा, दोपहर के तीन बजे आओ। जब मैंने समय के बारे में पूछा।.

तब आमतौर पर हर किसी के घर में नींद छा जाती है।.

अगले दिन जब मैं वापस आया, घड़ी में तीन बज रहे थे। कमरे के अंदर जाने से पहले मैंने धीमे से दरवाज़े पर हाथ चलाया।.

दरवाज़ा खुलते ही नज़र पड़ी मैम, बारिश में भीगी हुई।.

उसने कहा - तुम वहीं रुको, मैं थोड़ा सा कपड़ा धो लाती हूँ।.

मैं बैठ गया.

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थोड़ी देर बाद, वहीं के भीगे हुए लबादे में वो वापस पढ़ाने आई।.

उस दिन मैम की टी-शर्ट भीग चुकी थी। उसने अंडरवियर में ब्रा नहीं पहनी थी, जिससे 34 साइज के उनके छोटे-छोटे स्तन आकर्षक ढंग से झलक रहे थे। उनकी निप्पल्स साफ़ खड़ी हुई थीं, बिल्कुल तनी हुई डंठल की तरह।.

नीचे नज़र डालते ही पता चला, लैगिंग तो बारिश में भीग गई थी। अंडरवियर का एक टुकड़ा भी नज़र नहीं आया। इसलिए जांघों के बीच की खाँच की झलक छलक उठी।.

एक दिन मैं जींस में बाहर निकला। वो तस्वीर देखते ही मेरा धड़ भारी हो उठा।.

मेरा लड़का टाइट जींस में दब गया, उठाने की कोशिश की तो कुछ नहीं हुआ।.

सरकती हुई वो मेरे पास आ गई, जैसे कुछ समझाना हो।.

वह मेरी जांघ पर किताब रखकर बैठ गई। उसका हाथ मेरे सख्त लंड के पास से छूता हुआ निकला। फिर वो पढ़ाने लगी।.

ऐसा पहली बार हुआ। मेरी पकड़ ढीली पड़ गई थी।.

बिना कुछ कहे, मैंने धीरे से कक्षा में आवाज़ उठायी - मैम, टॉयलेट तक पहुँचना ज़रूरी है।.

वो मुस्कुराई, फिर मुझे बाथरूम की तरफ चलते हुए दिखा।.

अंदर कदम रखते ही मेरी नज़र ऊपर पड़ी - वहाँ दो ब्रा और पैंटी हुक पर लटक रही थी।.

एक पल बाद मैंने पैंटी उठायी। धीरे से अपना लंड उसमें छिपाकर घिसने लगा।.

तेजी से लंड हिलाते हुए पूरा रस डालकर वहाँ ढह गया।.

उसकी पैंटी में वीर्य छोड़ता हुआ रह गया, फिर सू-सू करता हुआ लौट आया।.

जब मैं पांच मिनट बाद वापस आया, तो उनके चेहरे पर मुस्कान थी।.

उसे एहसास हो चुका था कि मैं बेवजह शोर मचाता हुआ आया हूँ।.

उस दिन वो मुझ पर बहुत गुस्सा कर रहा था। मगर सच बताऊँ, मैं भी कम गलत नहीं था, इसलिए कुछ बोला तक नहीं। अब सोचो, चिड़िया खुद ही दाने की तलाश में घबराई जा रही थी, फिर मेरी जल्दबाजी क्यों?

इस बार मैंने एक ढीली पतलून चुनी, जिससे सब कुछ साफ़ झांक रहा था। अगले हफ्ते के आखिर में फिर उसी नए कमरे में जाना था मुझे।.

उसके हाथ में साबुन था, जब मैं दरवाज़े पर खड़ा।.

बारिश में तरबतर होकर वो मेरे पास आई, फिर पढ़ाने लगी।.

उसके ऊपर कुछ ऐसा था जिसमें सब कुछ दिख रहा था। नीचे एक छोटी सी स्कर्ट थी। जो जांघों के बहुत करीब तक पहुंचती थी।.

आज फिर वो ब्रा या पैंटी में नहीं थी।.

एक बार पैन छूट जाने पर मैं नीचे झुका। फिर टांगों के बीच देखते ही सब स्पष्ट हो गया। कोई पैंटी नहीं थी।.

उस दिन सुबह-सुबह मुझे उसकी चूत देखने को मिली।.

उसकी चुत पर कहीं-कहीं झांटे निकल आए थे।.

उसकी काली झांटों में वो गुलाबी चुत थी। मैंने जैसे ही नजर डाली, मेरा लंड सीधा हो उठा।.

उसकी जांघों को देखकर मैं धीरे से सीधा हुआ, पलकें भारी हो गईं। फिर मैंने नज़र उठाकर उसकी छाती की ओर देखा, बिना कुछ कहे।.

सब कुछ उसकी समझ में आ चुका था, पर फिर भी ज़ुबान पर कोई शब्द नहीं।.

वो हर बार कोई न कोई तरीका ढूंढ लेती, मेरे लिंग को छूने का। पढ़ाने का बहाना बनाकर ऐसा करती।.

आज मैंने पहना हुआ था सिर्फ एक ढीला पजामा, पतले कपड़े का। कुछ और उसमें नहीं था।.

इसी बात के कारण मेरा लंड साफ़-साफ़ नज़र आ रहा था। अब उसकी नज़रें भी मेरे ऊपर उठे लंड पर टिक गई थीं।.

अचानक से वह कॉपी पास रखकर मेरी ओर देखने लगी। मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई।.

अचानक उसने मुझे पकड़ लिया, फिर बिना कुछ कहे मुंह पर चुम्मा दे दियa।.

मैंने जानबूझकर शुरू किया बोलना - अरे मैम, ऐसा क्या कर रही हो… ये सही नहीं, कोई आ सकता है!

उसने झल्लाकर कहा - सब ठीक रहेगा, अभी तो किसी के आने का मौका ही नहीं।.

उसके मुँह से वो शब्द निकलते ही मन में खयाल आया कि आज बात गंभीर है। फिर बंदूक उठाई, निशाना साधा, और चुत में घुसा दी - आवाज़ हुई ठां-ठां।.

जब उसने मेरे होंठों को छू लिया, तभी मैंने पहली बार किसी ऐसी लड़की को चुम लिया जो बेहद उत्तेजित थी।.

ओह, उसके होंठ कितने मुलायम थे…

हाथ कैसे वोहाँ पहुँचा, समझ नहीं आया। धीरे से उसके स्तन पर दबाव डाला।.

उसकी सांसें तेज होने लगीं।.

थोड़ी देर बाद उठ खड़ी हुई, दरवाजा पीछे से बंद किया।.

बार इस, वो मेरे सामने जमीन पर बैठ गई। हाथ उसका मेरे लिंग पर चलने लगा।.

एकदम से उसने ट्राउजर्स के भीतर हाथ घुमाया, मेरा कठोर लिंग बाहर आ गया।.

उसकी नजर लड़के पर पड़ी। हैरत में पड़कर बोली - अच्छा, इतना बड़ा? अब तक कभी सामने नहीं आया था कुछ ऐसा। फिल्मों जैसा लग रहा है, सचमुच एक भारी सा डंडा।!

एकदम तभी समझ में आया कि मास्टरनी पहले ही किसी और के साथ व्यवहार कर चुकी थी। फिर भी आज तक उसकी नज़र कभी कोई ऐसा लड़का नहीं पड़ा जैसा मैं था।.

मैंने कहा - हम लोगों में तो ऐसे चलता है, सामने से कटा हुआ। अगर तुम इस पर मुँह लगाओगी, तो यह और फैल जाएगा।.

सुनते ही उसके होंठों ने लंड को चूस लिया।.

अचानक ऐसा लगा, जैसे किस्मत ने मुड़कर देख लिया हो।.

वो आजकल एक ढंग की हरकत से दाँत बना रही थी।.

मुँह देखते ही समझ आ गया, मानो किसी पॉर्न स्टार की बात हो। भैंस की तरह वो लड़की पूरा लौड़ा गले तक चट जाती थी।.

दूध को थामे हुए मैंने कहा - ओ मेरे प्रिय… आहत सी गति से चूसना… नहीं तो रास्ते में लुढ़क जाऊंगा मैं।!

लेकिन वो तो पानी के लिए बेकरार सूखी जड़ की तरह हर पल चूसती रही, कहीं ठहरने का सवाल ही नहीं था।.

उसने लगभग आठ से दस मिनट तक लंड चूसा, फिर मेरा वीर्य बाहर आ गया। उसने हर बूँद को अपने मुँह में रखा और निगल लिया।.

चेहरे पर जमा दिया उसने थोड़ा सा वीर्य।.

ऊपर उठकर वापस किस करने लगी।.

कुछ समय बाद वह धक्का खाकर गिर गया, फिर उसकी टी-शर्ट निकाल ली गई।.

एकदम अचानक मैंने उसके स्तनों पर मुँह रख दिया। सफेद-सफेद गोलाई पर हल्के भूरे छाती के बटन थे। वो ठंडी आइसक्रीम की तरह नरम लगे।.

उसके दूध पर हाथ का दबाव बढ़ाते हुए मैं धीमे स्पर्श में निप्पल को घेरे खींच रहा था।.

उसके हाथ लौड़े पर फिरने लगे, धीमे-धीमे दबाव बढ़ा। सांसें तेज हो गईं, आवाज में कंपकंपी छा गई।.

मैंने उसे सोफे पर बैठाया, फिर धीरे से नीचे बैठते हुए उसकी टांगें अलग की।.

थोड़ी देर बाद मेरी नाक उसकी गुलाबी योनि पर सरकने लगी, धीमे धीमे। होंठ फिर उन तहों को छूने लगे, जहाँ खुशबू थी नमी की।.

उसने मेरे बाल खींचे, सिसकियाँ भरते हुए।.

वाकई में कितनी मुलायम चूत थी। धब्बेदार सफ़ेद जैसे ताज़ा दूध। हल्के से फैली हुई, भीतर से गहरा गुलाबी झलक रहा था।.

शुरू में मैंने अपनी जीभ से उसकी चुत पर हल्का सा दबाव डाला।.

आज सुबह मैंने ऐसा काम किया, जो पहले कभी नहीं किया था।.

एकदम स्वादिष्ट लग रहा था मुझे।.

वो खुशबू ऐसी थी कि दिमाग धुंधला गया। सामने वाली के होंठों पर नज़र ठहर गई। एक पल में लगा जैसे सब कुछ रुक गया हो। मन ने कहा, अब कुछ भी हो जाए।.

थोड़े देर सुलगाने पर वो ही टूटकर गिर पड़ी।.

मैंने उसकी चुत से आते हुए सारा पानी पी लिया।.

नमकीन अमृत का स्वाद ऐसा लगा, मानो ज़िन्दगी पलट गई हो… फिर क्या था, चुत पर जीभ आई और टिक गई।.

गुस्सा फिर से उमड़ पड़ा।.

अब तो वह संभल नहीं पा रही थी। उसके मुँह से शब्द फिसलने लगे - तुम्हारा लंड भीतर ठूस दो, ये हालत और नहीं सही जा रही!

मैंने जान-बूझकर समय गवाया, फिर खड़े होकर उसे मजबूती से अपना लंड चुसाए देने पर मजबूर किया।.

लंड के सख्त होते ही मैंने उसे नीचे बिछा दिया। फिर मिशनरी में उसकी चुत में लंड घुसाना शुरू कर दिया।.

कभी-कभी ऐसा होता है। मेरे बेटे का सिर का बाल इतना गाढ़ा है कि पगड़ी बांधना मुश्किल हो जाता है।.

ऐसा ही कुछ हो रहा था, उस पूरे मामले में भी मेरे लंड का सुपारा नहीं जा रहा था।.

अचानक से मैंने तेजी से धक्का दिया, और आधा पैनिस भीतर चला गया।.

आंखों में पानी छलक आया, जब मैम की चीख निकल पड़ी।.

मुझे वो तरीका देखकर ही समझ आ गया था कि इसने किसी मोटे लंड के साथ बहुत पहले घट्टा है।.

तब मैंने थोड़ा और धक्का दिया, बिना कुछ सोचे। पूरा लंड भीतर हो गया।.

दर्द के चलते उसकी हालत खराब होने लगी, पर मैं तब भी जुड़ा रहा।.

थोड़ी देर में उसका तनाव कम हुआ। वह कमर ऊपर उठाकर बोली - ओह, यह अच्छा लग रहा है… जोर से मार डाल मुझे, हरामखोर। हाँ, और भी तेज, भइया के पुटे!

गुस्सा इतना बढ़ चला था कि शब्दों पर काबू रहा नहीं।.

उसके दूध पकड़कर मैंने झट से मसल डाला, गाली भी निकल पड़ी - कुतिया साली, अबे चुद जा… मेरे लंड से आह!

ओह… धीमे-धीमे नहीं, जोर से करो। आज ऐसा लग रहा है, मानो पहली बार हो रहा हो। पहले भी तीन बार हुआ, लेकिन ये अहसास कुछ और ही है। तेरे साथ ये सब कुछ अलग लगता है। ओह…

ठहर जा कुतिया… आज तेरी गांड फोड़ दूंगा।!

लंबे समय तक मैंने लंड पेला।.

मेरा हथियार पहले भी ढीला पड़ चुका था, क्योंकि उसने लंड चूसा था। तभी से मैं देर तक टिक पाने की कोशिश कर रहा था।.

अरे अंकल, वो घण्टा जितना मोटा है… उतनी ताकत होती है कटे नारियल में भी। हे भगवान, और जोर से धक्का दो!

मैंने कहा - आज तो ऐसा करूँगा कि टिक के चल पाना मुश्किल हो जाए।!

वो मेरी पैंटी में लंड घुमाकर चला गया, साला। अब कम से कम पैंटी धोने की जहमत तो उठाएगा।!

ठीक है, मैं कर दूँगा… पर पहले तू मुझे गले से लगा ले।!

उसके करीब छह से सात मिनट बाद, जब मुझे खत्म होना था, मैंने अपनी जगह बदल ली। इसके बाद मैंने उसे डॉगी स्टाइल में घुमाया। फिर पीछे से धीमे-धीमे चलने लगा।.

उसकी गांड कितनी मजबूत थी… अब चप-चप करती हुई आवाज आ रही थी।.

थोड़ी देर में मैम का रंग बदलने लगा। X शिक्षक के साथ घटना तेजी से आगे बढ़ी।.

थोड़ी देर के बाद वह फिर से ढीली पड़ गई। जैसे ही उसका हाल ऐसा हुआ, मैंने भी अपने आप को छोड़ दिया।.

कहीं बाहर जाऊँगा, मैंने सोचा।?

उसने कहा - ठहरो, मुझे सिर्फ इतना चाहिए।.

उसने अपना लंड बाहर निकाला, फिर मेरे लंड को होंठों में समेट लिया।.

थोड़ी देर में ही मेरे लौंडे का पूरा वीर्य उसने चाट लिया।.

फिर भी वो गिरने के बाद भी खड़ा रहा।.

पांच बजे का वक्त होते-होते उसने इंकार कर दिया।.

अगली बार क्या हुआ था, वो मैं तुम्हें सुनाऊंगा। मैम के अंदर की बात कैसे जागी, ये भी पता चलेगा। कौन किस पर नजर रखे हैं, ये तो अब तक समझ आ गया होगा। फिर देखना, किसे कब मौका मिलता है।.

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