कुंवारी टीचर के मोटे- मोटे चुचे दबकार मारी चूत और फाड़ी गांड़ l

Jan 2, 2026 - 13:16
Jan 13, 2026 - 19:44
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कुंवारी टीचर के मोटे- मोटे चुचे दबकार मारी चूत और  फाड़ी गांड़ l

एक सुबह जब मैं फीस जमा करने उसके घर पहुँचा, तभी आँगन में नहाती वो लड़की दिखी। शुरू में कुछ समझ नहीं आया। धीरे-धीरे हर बात अपने आप बदलती गई। बाद में जो हुआ, वो इसलिए हुआ क्योंकि कुछ भी रुक नहीं पाया।?

हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम राकेश है।.

लंड पर काला तिल है, इसी वजह से मन में सेक्स को लेकर थोड़ी बढ़ी हुई चाहत है।.

इतनी बहनों के साथ मौज कर चुका हूँ कि गिनती खत्म हो गई।.

एक बार मैंने सोचा, क्यों न लिखूँ। पहली बार था ये। मेरी Xxx शिक्षिका के बारे में चल रहा है ये किस्सा।.

बारहवीं में होने के दौरान मेरी गणित कमज़ोर थी। पिता ने फिर एक शिक्षक के पास भेज दिया।.

इस ट्यूशन की दूरी मेरे घर से काफी थी। रोज़ साइकिल चलाकर ही पहुँचता था मैं वहाँ।.

पहली बार जब ट्यूशन पर गया, तो पता चला - मेरी क्लास की शिक्षिका एक खूबसूरत लड़की है।.

जैसे ही मैंने उसकी ओर नज़र डाली, सब कुछ भूल गया।.

रोहिणी कहलाती वो।.

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उम्र बीस दो की थी, फिर भी रोहिणी। शरीर के आकार 32-28-34 के कारण छवि युवा लगने लगी। हल्केपन में झूमती चाल ने उम्र से चार साल कम दिखाई।.

एक समय था जब मन में रोहिणी के प्रति कोई खराब बात नहीं चलती थी।.

उसकी पढ़ाई इतनी समझदारी वाली थी कि धीरे-धीरे मैं हर दिन कक्षा में आने लगा। पढ़ाई में मन भी लगने लगा, बस ऐसे ही चलता रहा।.

थोड़े समय बाद मैंने गणित में बेहतर नंबर आने शुरू किए। पिताजी के चेहरे पर मुस्कान आई, माँ भी खुश हो गईं।.

वो तब हुआ, जब शाम के समय मैं रोहिणी के घर फीस जमा करने पहुँचा।.

बाहर से आवाज़ किसी ने मुझे देखकर लगा दी।.

जब कुछ आवाज़ नहीं आई, तभी मन में ख्याल आया कि अंदर चला जाऊँ।.

खोला गया दरवाज़ा सिर्फ टकराया हुआ था, ताला नहीं। धक्का देते ही वह अपने आप बाहर की ओर झुक पड़ा। मैं भीतर कदम रख चुका था, बिना आवाज के।.

अंदर मुड़कर मेरी नज़र रोहिणी पर पड़ी।.

फिर अचानक पानी टपकने का शोर मेरे कान तक पहुँचा।.

तब मैं वहीं के रास्ते आगे बढ़ गया।.

उस आवाज़ का स्रोत एक कमरा था।.

कहीं न कहीं, वो कमरा जिसमें शायद नहाने की जगह थी, मुझे खींच ले गया।.

बाथरूम में स्नान करते हुए रोहिणी का शरीर पानी से तर गया।.

दरवाज़े पर नज़र पड़ी, तो पता चला कि बाथरूम का ढक्कन थोड़ा सा अंदर की ओर झुका हुआ था।.

पीठ दरवाज़े की ओर किए हुए, वो स्नान कर रही थी।.

वो खड़ी थी, पानी की बूँदें उसकी त्वचा पर सफेद मोतियों की तरह झलक रही थीं।.

उसके बिस्तर पर रोहिणी का सामान पड़ा था - ब्रा और पैंटी।.

उसके ढीले-ढाले कपड़ों को देखते ही मेरे भीतर गर्मी सी फैल गई। धीमे से कदम बढ़ाए, उसकी ब्रा और पैंटी उठाई, नाक से सूंघ लिया।.

खुशबू उनके कपड़ों से इतनी तेज थी कि पलभर में घेर लिया।.

बाथरूम की ओर देख रहा था मैं, जब उसकी ब्रा पैंटी को सूंघ रहा था।.

जब रोहिणी बाथरूम की ओर घूमी, मैं उसके बेडरूम से बाहर निकला। सीधे हॉल में चला गया। सोफ़े पर जाकर बैठ गया।.

अब मेरी नज़र सिर्फ़ रोहिणी पर टिकी थी।.

तभी रोहिणी तैयार होकर हॉल में पहुँची। उसने मुझे देखा, फिर सवाल किया - मैं वहाँ कैसे पहुँच गया? बिना बुलाए।?

उस पल मेरी नज़र सिर्फ रोहिणी पर टिकी थी।.

क्या बात है, रोहिणी कितनी सुंदर दिख रही थी।.

जब रोहिणी ने ऊँची आवाज में सवाल किया, तभी मेरी नींद टूटी।.

एक दिन मैंने पैसे सौंपते हुए कहा, मैडम, मैं तो यहाँ ट्यूशन की फीस जमा करने आया था।.

जब वह मेरी तरफ देखा, तभी समझ गया कि मेरी नजरें उस पर टिकी हुई हैं।.

जब वह पैसे ले रहा था, तभी अचानक बोला - तुम सोच में कहाँ खोए हो?

उस पल मेरे हाथ कांप गए। मैंने धीमे स्वर में कहा, माफ़ करें मैडम, ये दोबारा नहीं घटेगा।!

रोहिणी का सवाल था - क्या तुम्हारे पास कोई लड़की है?

मैं उसके सवाल को सुनते ही रुक गया।.

थर-थर कांपते हुए मैं कोई शब्द सही से निकाल नहीं पा रहा था।.

बैठने को कहकर रोहिणी पानी लेकर आ गई।.

फिर वो मेरे पास बैठ गई। हाथ मेरी टांग पर रखकर बोली - इतना घबराने की क्या बात है? डरने की कोई चीज़ नहीं है।!

सिर हलचल कर गया, हाँ के इशारे में।.

अचानक रोहिणी मेरे पास सरककर आ बैठी। उसका हाथ पहले से मेरी जांघ पर था, अब वो दबाव बढ़ा रही थी।.

मेरी गोलियाँ सीधे ऊपर की ओर हिलने लगी थीं।.

एक बात मैं कहने लगा, उधर रोहिणी के नरम होंठ मेरे होंठों से चिपक गए। फिर वो मुझ पर झुकी, धीमे-धीमे किस करने लगी।.

मैंने पहले तो इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई। रोहिणी जी से बोला, मेम, ऐसा नहीं होना चाहिए, कहीं कोई देख लेगा!

वो बोली, फिलहाल तो घर में सिर्फ हम दो ही हैं। किसी और को कुछ पता नहीं चलना चाहिए। तुम भी इसके बारे में शाम तक न बोलना। ये बात दोपहर के बाद भी सिर्फ हम तक ही रहेगी।.

बोलते-बोलते वह मेरे मुँह पर अपना मुँह ले आई। फिर सांस थमे, धड़कन बढ़ी, नजर बंद हुई।.

होंठों के छूते ही मुझमें भी उमड़ने लगी एक गर्म सी लपट।.

चुंबन के बीच हम दोनों खो गए।.

अचानक हमारी जुबानों में झगड़ा शुरू हो गया।.

हल्का सा हंसी छिड़ने लगी।.

उससे पहले कि काम-भावना और भड़कती, रोहिणी के घर के फाटक पर किसी के खटखटाने की आवाज़ आई।.

अचानक हम एक पल में दूर हो गए। कपड़े संभालते हुए थोड़ा सा अलग-थलग बैठ लिए।.

दरवाज़े के खुलते ही अंदर मम्मी-पापा कदम रख चुके थे।.

फीस भरकर मैंने रोहिणी को सौंप दी, इसके बाद घर चला आया।.

कुछ दिनों में स्कूल के पेपर आने वाले थे। रोहिणी ने धीरे-धीरे सब कुछ समझा दिया। इस बार परीक्षा अच्छी तरह निपट गई।.

कुछ दिनों में ही नतीजे आ चुके थे। संख्याएँ मेरे पसंद की थीं, कम से कम उस वक्त ऐसा लगा।.

ख़ुशियाँ घर के हर कोने में फैली थीं, मेरे नंबर देखकर।.

जब मैंने रोहिणी से यह बात कही, तो वह खुश हुई।.

थोड़ी देर पहले की बात है, मैं सीधा रोहिणी के घर पहुँच गया। मिठाई उसके हाथ में थमा दी। शुक्रिया कहते हुए आवाज़ थोड़ी भारी थी।.

रोहिणी ने जब ये सुना, तो मुझे कसकर गले लगा लिया। फिर अचानक एक ज़ोरदार किस दे दिया।.

फिर मैं अपने घर वापस पहुँचा।.

संख्याओं में अच्छा प्रदर्शन करने पर पिता ने मेरे लिए एक नई स्मार्टफोन लाकर दी।.

फिर वो समय आ गया जब मेरी पढ़ाई की कक्षा बंद हो चुकी थी, फिर भी कभी-कभी रोहिणी से बातचीत या मुलाकात जारी रहती।.

जैसे मैंने अपना नया फोन पकड़ा, एक नए नंबर की डिलीवरी हो गई।.

उसके नए नंबर पर मैंने क्या कहा, सोचते हुए बोला - मिस कॉल करनी है। जवाब में उसने अपना फोन नंबर थमा दिया।.

फिर एक सुबह, रोहिणी की आवाज़ फोन पर आई। उसके बाद वह मेरे घर आने को बोली।.

माँ की रोहिणी से पट गई थी।.

एक दिन उसने मम्मी से बात कर ली। रातभर मैं उसके घर रुक सकता था। वजह? उसे कोई काम पूरा करना था। इसीलिए मेरे रहने की ज़रूरत थी।.

अब मैं उसके घर जा सकता हूँ, मम्मी ने हाँ कर दी।.

जैसे ही मैं रोहिणी के घर पहुँचा, उसने दरवाज़ा खोल दिया। फिर वह मुझे भीतर आमंत्रित करने लगी।.

घर में सुन्नता छाई पड़ी थी, रोहिणी के सिवा।.

खुशी से चेहरा बदलते हुए रोहिणी को मैं तब दिखाई दिया।.

रोहिणी के चेहरे पर उस दिन एक अजीब सी चमक थी।.

वो सामने था, मैं तब भी उसी की ओर देख रहा था।.

तभी उसकी आवाज़ छलक पड़ी - अरे सुनो, कहाँ भटक रहे हो... बस यहीं टिक जाओ।!

हँसते हुए जब मैं रोहिणी के शब्द समझा, तभी होश पर लौटा।.

उसके पैर रसोई की ओर उठे। चाय-बिस्कुट तैयार हुए, दोनों के लिए।.

बातें करके दोनों ने सब समाप्त कर दिया, इसके बाद टीवी पर ध्यान जा टिका।.

दोनों के बीच जगह नहीं थी, पास-पास टिके हुए।.

ठीक उसी पल, टीवी पर कोई तेज़ सीन दिखाई दिया।.

दृश्य को देखते ही हमारा तापमान बढ़ गया।.

अचानक रोहिणी ने मुझे पास खींच लिया। उसके बाद वो मुझे चूमने लगी।.

खुशी हो रही थी मेरे सामने वाले को देखकर, इसलिए पल-पल उसके संग बढ़ रहा था।.

अब तो रोहिणी ने सारी खिड़कियाँ और मुख्य दरवाजा बंद कर लिया। उसने मुझे आगे बढ़ते हुए फुर्र से कहा - जैसे वो बोलेगी, वैसे करना।.

मैंने कहा- ओके!

उसने कदम बढ़ाए, मेरे सामने खड़ी होकर कपड़े उतारे।.

मैंने अपनी जेब से कपड़े निकाले, तभी उसकी आवाज़ आई।.

काम में मेरा समय लगने लगा।.

थोड़ी देर में मैं केवल बनियान तथा अंतरवस्त्र में था। रोहिणी के पास सिर्फ ब्रा और पैंटी बची थी।.

वो मेरे होंठ चूमते हुए मेरी बनियान और अंडरवियर उतार चुका था। फिर मैंने उसकी ब्रा व पैंटी भी धीरे से नीचे कर दिया, जैसे उसने कहा था।.

इस वक्त हम दोनों का सामना पहली बार ऐसे हुआ, जैसे कपड़े भी झट से गायब हो गए हों।.

उसकी जाँघों के बीच गर्मी तैर रही थी।.

उसकी ओर देखते ही मेरी नजर नीचे की तरफ चली गई। वहाँ जो दिखा, उसने मुझे स्तब्ध कर दिया। एकदम गुलाबी, ऐसा लग रहा था मानो अभी-अभी खिला हो।.

मेरे साथ बैठकर रोहिणी ने फ़ोन में कुछ वीडियो चला दिए। जिसमें वह ख़ुद मॉडलिंग करती नज़र आई। फिर उसने ऐसा करने को कहा कि मैं बिना कपड़ों के रहूँ। तभी उसने अपनी फिल्म की शूटिंग पूरी की। .

उसने मेरी कई पोज़ में नंगी तस्वीरें अपने फ़ोन से ली। बिना कपड़ों के चलने को कहा, देखते हुए एक वीडियो भी बनाया।.

वह बोला - मेरी कुछ तस्वीरें ले लो, जब मैं बिना कपड़ों के हूँ।.

तब मैंने अपने फ़ोन से उसकी कई पोज़ में तस्वीरें ले ली।.

फिर रोहिणी ने कैमरा संभाला। हमारे सेक्स की फुटेज अब रिकॉर्ड होने लगी।.

जब ये सब हो चुका, तो रोहिणी मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गई। उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया।.

उस वक्त मेरे साथ ऐसा पहली बार हुआ, किसी लड़की ने मेरा लंड मुंह में ले लिया।.

मज़े का सिलसिला जब शुरू हुआ, तो दोनों को अच्छा लगने लगा। वह चूसते-चूसते खुश हो गई।.

उसके बाद रोहिणी ने जैसे ही कुछ कहा, हम दोनों एकदम से 69 की मुद्रा में पहुँच गए।.

मैंने रोहिणी की चूत को जीभ से छेड़ा, वो मेरे लंड पर होंठ फेरने लगी।.

थोड़ी देर बाद रोहिणी मुझे अपने कमरे में ले गई। वहाँ उसने मेरे लिए तेल डालकर हाथ से मालिश शुरू कर दिया।.

मुझे उसकी मुस्कान देखकर ऐसा लगा कि जैसे उसकी चूत पर हल्के से तेल डालना चाहिए।.

फिर वो बिस्तर पर लेट गई, मुझे ऊपर आने को बोली।.

मेरी जांघें उसके ऊपर थीं, लंड चूत से टिक गया।.

अब उसके दोनों पैर समान रूप से फैले हुए थे।.

जब सब कुछ तय हो गया, तब उसने मुझे एक तेज़ धक्का लगाने को कहा।.

एक झटके में, मेरा लंड उसकी चूत के भीतर समा गया।.

वो भी पहली बार कुछ ऐसा कर रही थी। मेरा लंड जैसे ही रोहिणी की चूत में घुसा, उसके चेहरे पर दर्द छा गया।.

रोहिणी चिल्लाई, क्योंकि Xxx टीचर ने फ़क में दर्द पैदा कर दिया। मैंने बिना सोचे अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। ऐसे में वो जवाब भी नहीं दे पाई।.

आँखों में पानी छलक उठा, रोहिणी के।.

आंसू देखकर मेरा डर जाग उठा। धीरे से लंड को चूत से अलग किया रोहिणी की।.

रोहिणी ने सवाल किया, ऐसा क्यों हुआ? तुम क्यों अचानक ठिठक गए, फिर धीरे से ज़िप खोलकर बाहर निकाल दिया?

फिर मैंने कहा - तुम तो रो ही रही थीं…इसी वजह से मैं ठहर गया।.

रोहिणी मेरी बात सुनकर हंस पड़ी। फिर धीमे स्वर में बोली - ये खुशी के कारण आंसू हैं, तुम ऐसे ही काम करते रहना।.

रोहिणी ने मुझे समझाया, फिर मेरा लंड अपनी चूत पर बैठ गई। उसने कहा - अब तेज़ी से हिलो।.

लंबे समय बाद मैंने पहली बार कुछ अजीब सा महसूस किया। फिर हम धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब आए।.

थोड़ी देर के बाद रोहिणी को खेल में मजा आने लगा। वह मुझसे तेज-तेज हिलने के लिए कहने लगी।.

वह मेरी गोद में थी। हर धक्का तेज़ होता जा रहा था।.

खुशी से दोनों के चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी।.

रोहिणी ने मेरा सारा लंड अपने भीतर उतार लिया था। हलचल करते हुए वह इसे पेट के अंदर धकेल रही थी, जैसे कहीं गहरा छिपा देना चाहती हो।.

थोड़ी देर के बाद रोहिणी का रूप घोड़ी जैसा हो गया। पीछे से संभोग करने को उसने मुझसे कहा।.

पीछे की तरफ से मैंने ड्रिल चला दी।.

एक बार हुआ, रोहिणी का पत्ता झड़ चुका था।.

फच-फच का सिलसिला कमरे भर में छा गया।.

थोड़ी देर के बाद वह मुझसे बोला – सामने पड़ी मेकअप टेबल से तेल की छोटी शीशी ले आओ।.

तेल जब मैं लाया, उसने कुछ बूँद मेरे लिंग पर डाल दी। फिर वह अपने गुदे पर भी थोड़ा तेल लगाने लगी।.

उसने कहा, "अब तुम्हारा लंड मेरी गांड में।".

मैंने उसकी बात मान ली। फिर अपना लंड गांड पर रगड़ने लगा। थोड़ा सा झटका दिया। लंड अंदर चला गया।.

गांड का छेद इतना तंग था कि रोहिणी चिल्लाकर बोली - आह, धीमे कर यार... मैं कहीं भाग नहीं रही।.

लंड का सिर्फ पचास फीसदी हिस्सा अभी तक रोहिणी के भीतर जा पाया था।.

तकलीफ़ में झूलते हुए पल-पल बेचैन थी रोहिणी।.

थोड़ी देर के लिए मैंने धक्के देना बंद कर दिया। तब तक रोहिणी सांस लेने लगी।.

उसके ठीक होते ही पल में, मैंने तेज़ धक्का दिया।.

एक सात इंच का लंबा धरा मेरा, उसकी पिछली नली में अंदर तक चला गया।.

रोहिणी ने फिर आवाज़ निकाली - अरे ओये… समझ पा रहा है तू भाभी के बेटे… ये अब वो नहीं यहाँ तो सब कुछ धीमा होता है।.

मैंने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया, मेरा हर झटका तेज होता गया।.

थोड़ी देर के बाद उसने भी मस्ती में हिस्सा लेना शुरू कर दिया।.

थोड़ी देर तक खामोशी रही। फिर वह बोल उठी - अब हॉल के सोफे पर जा लेटते हैं।.

दरवाज़े से अंदर क़दम रखते ही हम दोनों हॉल में थे।.

मैंने रोहिणी को सोफे पर लेटाया, फिर उसकी एक जांघ ऊपर उठाकर धीमे से घुसा दिया।.

एक-दूसरे से जुड़े रहते हुए हम लंबे समय तक अलग-अलग ढंग से बदलते रहे।.

एक-दो नहीं, कई बार रोहिणी टूट चुकी थी।.

खून उसकी चूत से बह रहा था, वैसे ही गांड से भी।.

लाल निशान पड़ गए थे सोफे के कपड़े पर। बिस्तर की चादर पर भी यही हुआ।.

थोड़ी देर तक साथ रहने के बाद हम अलग हो गए, फिर नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।.

छत पर चढ़े हम, मैं और रोहिणी।.

एक कोने में जगह बनाकर बैठ गए हम। रोहिणी के हाथ में पड़ा था वो पीला डब्बा। चुपचाप खोला उसने, फिर दो गिलास भरे। एक-एक करके सभी पी गए।.

धूम्रपान की आदत थी उसके हाथ में सिगरेट तब बाहर खड़े होकर जला दी फिर धुआं अंदर खींच लिया।.

एक पल को तो मन में यही हुआ कि क्यों न, थोड़ा जोर से खींचकर देख लिया जाए।.

सिगरेट मैंने भी जलाई। वहाँ लगा झूला था, हम दोनों बैठ गए। फिर बात शुरू हो गई।.

छत पर हवा इतनी तेज़ थी कि सिहरन छा गई, पर हम दोनों के माथे से पसीना टपक रहा था।.

पसीने से हमारे कपड़े तरबतर हो गए, शायद उस ऊर्जा वाले पेय ने ऐसा किया।.

गर्मी से लथपथ होकर उसके कपड़े चिपक गए थे।.

वह जिसे मैं रोहिणी समझ रहा था, अचानक कुतिया बन गई।.

फिर हम दोनों सीढ़ियों पर जा पहुँचे। वहाँ हमने साथ में सेक्स किया।.

अब तक मेरा पतन हो चुका था - दो बार।.

सीढ़ियाँ उतरकर हम दोनों नीचे पहुँचे, फिर सोफे पर जा बैठे।.

रोहिणी के फ़ोन पर अब वीडियो चल रहा है।.

एक शाम को मैंने उसके साथ फ़ोन पर वीडियो चला दिया।.

एक बार फिल्म के नज़ारे में उलझे, तो वहीं से फिर से पुराना सिलसिला शुरू हो गया।.

रात भर हम लोग सेक्स में व्यस्त रहे।.

तकरीबन दो बजे रात, हम दोनों सुस्त पड़ चुके थे।.

आज सुबह उठते ही रोहिणी ने मेरे होंठों पर चुम्बन दे दिया।.

खुद भी हाथों में लेकर चुम्मा दिया।.

इसके बाद, हम लोग नहाने के कमरे की ओर चल पड़े।.

फिर हम बाथरूम में गए। पानी के छींटों के साथ शुरुआत हुई। मैंने नल खोल दिया।.

बारिश की पहली बूँदें सिर पर आकर टपकने लगीं।.

मस्ती से दोनों के चेहरे पर मुस्कान छा गई।.

रोहिणी का पतझड़ में झड़ना हुआ।.

उसके बाद मैंने रोहिणी से पूछ डाला - मेरा निकलने वाला है, फिर मैं कहाँ जाऊँ?

रोहिणी ने मुस्कुराते हुए कहा – पूरी रात ऐसे चोद रहे हो, अब जाकर पूछते हो कि कहाँ उड़ेगा। ठीक है, इस बार सीधा मेरे मुँह में डाल दो।.

सुनते ही मैंने अपना लंड झट से रोहिणी की चूत में से बाहर खींच लिया। रोहिणी ने एकदम से उसे अपने हाथों में जकड़ लिया।.

उसके हाथ मेरे लौड़े पर थे, झूलते हुए।.

अचानक मेरा शरीर सख्त हो गया, फिर वह सफेद तरल मेरे लिंग से छूटकर रोहिणी के मुँह में जाने लगा।.

उसके होठों तक पहुँच गया मेरा वीर्य, फिर आगे बढ़कर चेहरे पर भी छाने लगा।.

मेरा वीर्य उनके चूचों पर भी जा लगा।.

वो हर बूंद लेती गई।.

बाथरूम से निकलते समय हम दोनों का पूरा शरीर गीला था।.

दोबारा तैयार हुए, फिर नंगे वीडियो आपस में बाँट लिए।.

फिर सुबह का खाना खाया गया, चाय के साथ।.

एक बड़ा सा प्यार भरा किस हुआ, मिलेंगे के ऐदाज़ तय हुई... मैंने रोहिणी को छोड़ा, धीमे-धीमे घर वापस चला आया।.

फिर भी, जब-जब संधि मिलती, हम दोनों एक-दूसरे को पकड़ कर उठा लेते।.

आज वह शादीशुदा है, पर उसके बच्चे के साथ मेरा नाता है।.

मुझे ये सच रोहिणी ने स्वयं कहा था।.

अभी भी वो मुझे जमकर चुदवाती है। चुदवाती है, यही सच है। एक-दूसरे की नंगी तस्वीरें हमारे पास हैं।

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