अजनबी हसीना टीचर लड़की से मुलाकात
मेरे यार ने एक लड़की का नंबर थमाया, कहा कि फोन करके देखना… वो जमकर गालियाँ देती है। उसी लड़की के साथ मेरा अफेयर हुआ।.
हर किसी को नमस्ते, मन से।!
कहीं राजस्थान में सुबह के समय लोग बस इतना कह देते हैं - राम-राम।
हर किसी को नमस्ते, मैं हार्दिक शुभकामना भेजता हूँ।!
अब इस रसभरी सच्ची कहानी का आनंद लें। पढ़ते हुए Xxx गर्म महिला बदशगल गप्पों में भी जैसा मन चाहे, मज़े कर लें। वैसे, अपने खयाल नीचे दिए डाक पते पर अवश्य भेज दें।
रजत कहलाता हूँ मैं। जयपุर में पले-बढ़े हैं, राजस्थान की सड़कों पर।
एक तिहाई फुट का यह डंडा मेरी ग्रोइन में झूलता है।
मेरी पहली बार का अनुभव था वो।
जब मैंने उसकी चूत चोदी, तो यह पहली बार का मौका था मेरे लिए।
घर पहुँचा तब शाम के छह बजे थे। दोस्त का इलाका नए-नए बना था, बीच में खड़े होकर चारों ओर देखा।
उसकी आँखों में खुशी की चमक आ गई, जब मैं नज़र आया।
अंदर आने को मैंने कहा।
उसने जब कहा, तो मैंने इनकार कर दियa।
“चल, अपनी जगह पर चलते हैं!” मैंने कहा।
“तू चल, मैं आता हूँ!” उसने जवाब दिया।
दस मिनट के बाद वो भी पहुँच गया।
बैठ गए हम दोनों, सिगरेट के धुएँ में बातें उलझती चली जा रही थीं।
उसने शुरू किया अपनी पढ़ाई की बात, मैंने भी खोली अपनी कहानी।
बातें चलते-चलते अचानक लड़कियों पर पहुँच गई।
अब वह बताने लगा, “यार, हमारी लाइन में लड़कियों की कमी नहीं है!”
मैंने उसकी बात काटते हुए कहा, “साले, अकेले-अकेले लड़कियों के मजे ले रहा है! किसी का नंबर मुझे भी दे!”
उसने फोन नंबर थमा दिया, जब मैंने बात पूरी की।
उसने बताया, “एक बार फोन मिलाया था, पर उसने गालियाँ देकर फोन काट दिया। मुझे तो ये भी नहीं पता कि ये नंबर किसका है!”
“साले, जब तुझे ही गालियाँ सुनाईं, तो मुझे भी गालियाँ सुनवाने के लिए दिया है क्या?” मैंने कहा।
“नहीं यार, अगर तूने पटा लिया तो मुझे कुछ शांति मिलेगी। नहीं तो दो गालियाँ तू भी सुन लेना!” उसने हँसते हुए कहा।
खिलखिलाने लगे मैं और वो।
थोड़ी देर बातचीत के बाद, घर की ओर कदम बढ़ाए।
तीन दिन तक कुछ नहीं हुआ। फिर समय आया, मैंने वह नंबर खोला। पूरा झटका था। ‘नमस्कार’ टाइप करके भेज दिया।
शाम को वहीं से जवाब मिला - "तुम कौन हो?"
मैंने लिखा, “सॉरी, गलती से मैसेज चला गया!”
“ओह, ओके, पर ऐसी गलती दोबारा मत करना!” उसने जवाब दिया।
“क्यों जी, इतनी बड़ी गलती है?” मैंने पूछा।
“ये तो गलती करने वाले पर होता है!” उसका जवाब आया।
“अच्छा, बाबा, बोला न सॉरी! और आप जैसा कोई मिले तो ऐसी गलती तो मैं रोज करूँ!” मैंने लिखा।
“औए, अपनी हद में रह, ओके! और दोबारा मैसेज मत करना!” उसने गुस्से में कहा।
बस ऐसे ही मैंने उसके संदेश पर कुछ नहीं लिखा।
मगर उस लड़के का सा हौसला मुझमें भी छिपा था।
चौथे दिन, कोई संदेश नहीं आया होने पर, कीड़ा जमकर सुलग उठा। मैंने एक बार फिर "hi" टाइप किया और भेज दिया।
उसका मैसेज शाम को आया - “तुम हो कौन?”
मैंने दोबारा वही जवाब दे दिया, “सॉरी जी, गलती से मैसेज चला गया!”
फिर भी, इस बार उसके मुँह से सिर्फ "ठीक है" निकला।
उसके बाद कोई संदेश नहीं भेजा मैंने।
बीत चुके हैं अगले दो दिन।
उसके बाद तीसरे दिन, सिर्फ "hi" टाइप करके मैंने मैसेज भेज दिया।
फिर वो शख्स भी लिखता हुआ ‘कौन’ टाइप करता।
मैंने “सॉरी जी, गलती से मैसेज चला गया” लिख दिया।
इस बार तो सिर्फ मौन था, कोई ‘ठीक है’ तक नहीं।
मज़ा तभी से शुरू हो गया था, जब मैंने धीरे-धीरे समझना शुरू किया।
हौसला जैसे कहीं से लौट आया।
चार दिनों के बाद मैंने एक “hi” भेज दिया।
पर इस बार तो वह बुरी तरह भड़क गई और उसका मैसेज आया, “साले, कुत्ते, कमीने! तुझे इतने दिन से देख रही हूँ। तेरे पास और कोई काम नहीं है क्या? आखिर चाहता क्या है, साले कुत्ते! दोबारा मैसेज मत करना, वरना बुरा हो जाएगा!”
आंखों पर पड़ते ही संदेश के, उसका आदमी बिल्कुल तड़प उठा।
लगा कि साली मिलती भी नहीं, सुना देता हूँ अच्छे से।!
फिर मैंने मैसेज किया, “साली, कुत्ती, कमीनी! इतने दिन से मेरे मैसेज देख रही है, अभी तक नहीं समझी मैं क्या चाहता हूँ! साली कुत्ती, आज के बाद दोबारा तेरे जैसी चूतिया को मैं कभी मैसेज नहीं करूँगा, जिसको समझ में ही नहीं आता कि सामने वाला क्या चाहता है!”
फिर मैंने संदेश भेज दिया।
लाइन के बीच में टूट गया संदेश, फिर भी पहुँच चुका था।
एक हफ्ते बाद भी कोई संदेश नहीं पहुँचा। मैंने भी कुछ नहीं लिखा।
एक सुबह, मेरा फ़ोन बज उठा - नंबर अज्ञात था।
आवाज कहीं दूर से मधुर लगने लगी।
फिर से आँख उठाकर मैंने फोन पर नजर डाली, लेकिन वो नंबर कहीं का नहीं जान पड़ा।
एक बात मुझे सता रही थी - फोन पर कोई लड़की मुझे कॉल नहीं करती थी।
“हाँ जी, आप कौन हैं? किससे बात करनी है?” मैंने पूछा।
“आपसे ही बात करनी है!” उसने कहा।
“सॉरी, मैं लड़कियों से बात नहीं करता!” इतना कहकर मैंने फोन काट दिया।
फिर कुछ पल बाद, वही नंबर चमक उठा।
“क्यों जी, आप लड़कियों से बात क्यों नहीं करते? और वैसे भी आप मुझे जानते हैं!” उसने कहा।
“नहीं, मैं आपको नहीं जानता! और प्लीज मुझे दोबारा कॉल नहीं करना, मैं सच में लड़कियों से बात नहीं करता!” मैंने जवाब दिया।
“अच्छा जी, लड़कियों से बात नहीं करते, पर लड़कियों को मैसेज कर सकते हो!”
इतना सुनते ही मेरे होश उड़ गए।
अब तक सिर्फ एक ही लड़की को मैंने मैसेज किया था, ऐसे में शायद वही हो।!
लेकिन वो गालियाँ देती है, प्यार से बातचीत कम ही करती।!
इसके बाद मैंने सवाल किया, “तुम्हारा नाम क्या है?”
“मेरा नाम स्नेहा है। आपने कुछ दिन पहले मुझे मैसेज किए थे!” उसने बताया।
“ओह, सॉरी, आप हैं! सॉरी अगेन, लेकिन मुझे यकीन नहीं हो रहा कि आपने खुद फोन किया!” मैंने हैरानी से कहा।
“हाँ, आपका आखिरी वाला मैसेज मुझे पसंद आया! तुम्हारी गालियाँ देखकर गुस्सा भी बहुत आया। सोचा, अभी फोन करके तुम्हारी सारी हेकड़ी निकाल दूँ! पर उस समय मैं खाना बना रही थी, तो सोचा बाद में बात करूँगी। फिर खाना बनाते-बनाते सोचने लगी कि है तो लड़का ही, मैं भी देखती हूँ कब तक मैसेज नहीं करता! पर आपने तो उस के बाद सच में मैसेज नहीं किया!” उसने बताया।
“मेरी आदत है ये! और फिर आपको बोल दिया था कि मैं मैसेज नहीं करूँगा, तो कैसे कर सकता था? हम लड़कों की बात का भी कुछ मान होता है!” मैंने कहा।
“हाँ, शायद इसलिए ही तुम मुझे थोड़े अलग लगे!” उसने जवाब दिया।
बस फिर क्या था, हम दोनों बातें करने लगे।
वो बताने लगी कि मूल रूप से भोपाल, मध्य प्रदेश का हिस्सा है।
फिर वो मुझे देखने के लिए राजस्थान पहुँची।
उसका पहुँचना ट्रेन के जरिए हुआ।
मुझे फोन उसने स्टेशन से किया, रेलवे पर खड़े होकर।
पहुँच गया था मैं तब तक रेलवे स्टेशन पर।
मैंने सुना, वो कहाँ है।
जगह के पास मैं पहुँच चुका हूँ।
ट्रेन से कदम रखते ही, मेरी आँखों के सामने वही खड़ा था।
दरवाज़े से अंदर कदम रखते ही उसने मेरा हाथ थाम लिया, तब तक हम चित्र आपस में बाँट चुके थे।
मगर फिर भी, वो मेरे दिखते ही सब कुछ समझ गया।
बाद में गपशप शुरू हो गई।
बाद में स्टेशन के बाहर कदम रखा हमने।
बाहर आकर मैंने उससे पूछ लिया - "अब कहाँ जाना है?"
“जहाँ तुम्हें लगे सही,” उसके मुँह से निकला।
मैंने उसे बताया, “घर तो मैं नहीं जा सकता। मैं अपने घर वालों को बोलकर आया हूँ कि मैं अपने फ्रेंड के यहाँ जा रहा हूँ। रात में वहीं रुकूँगा। तो फिर किसी होटल में चलें क्या? मैं अपने किसी फ्रेंड के यहाँ भी तुम्हें नहीं ले जा सकता!”
“बस हो गया!” वो बोला।
जैसे ही हम बातचीत में आए, कुछ ही समय में अश्लील तस्वीरें भेजना शुरू कर दिया। वीडियो कॉल के दौरान कपड़े उतारकर ही बातें होती थीं। उससे पहले ही हम चुदाई के बारे में सभी बातें तय कर चुके थे। मेरा लंड उसने देख लिया था, मैंने उसकी चूत को ध्यान से देखा था।
बाहर कदम रखते ही अब होटल की तलाश शुरू हुई।
कुछ होटल सड़क के उस पार दिखे।
हम एक होटल में गए, वहाँ सिंगल रूम की जानकारी ली।
“आइडेंटिटी बताइए, सर,” होटल के कर्मचारी ने धीमे स्वर में कहा।
हमारे पीछे-पीछे स्टाफ चलता रहा, फिर कुछ देर बाद एक कमरे के अंदर जाकर खड़ा हो गया।
अंदर कदम रखते ही, मैंने दरवाज़े पर ताला लगा दिया।
पीछे मुड़ते ही मेरी नजर उस पर पड़ी, डोर लॉक करने के बाद वह बैग समेट रही थी।
पलक झपकते मैं वहाँ पहुँच गया, उसकी कमर पकड़ ली। फिर बिना कुछ कहे उसके गालों पर, धीरे-धीरे गर्दन तक चुम्मे देने लगा।
“रुको यार, पहले मैं फ्रेश होकर आती हूँ! पूरी रात पड़ी है!” उसने कहा।
“अब तुम्हें देखने के बाद सब्र नहीं होता, मेरी जान! आ जाओ, अब तो एक राउंड चुदाई करते हैं, उसके बाद ही फ्रेश होंगे!” मैंने जवाब दिया।
इसके बाद वो जो था, मैंने उसे सही कर दिया।
उसके स्तन मेरे सामने के हिस्से से लग रहे थे।
इस बार मैंने उसके होठ धीरे से चूस लिए।
पंद्रह मिनट तक हमारे होंठ जुड़े रहे, बस इतना सा।
उसके होठ मेरे पर आए, धीमे से चूसने लगी। कभी ऊपर के होठ पर दबाव, कभी नीचे पर खिंचाव।
कभी-कभी वो मेरे होंठों के बीच अपनी जीभ सरका देती। फिर किसी पल मैं उसके मुँह के भीतर धीमे से घुस जाता।
मुँह में जीभ हल्के से किनारे छू गई, फिर वो होठों पर आ ठहरी।
उसके बाद मैंने उसे जोर से बिस्तर की ओर धकेल दिया, हाथ सीधे उसके स्तनों पर चले गए।
उधर, मेरा हाथ पूरे शरीर पर फिसल रहा था।
धीरे-धीरे हाथ बढ़ाकर मैंने उसके कपड़ों पर हाथ डाल दिया।
एक टी-शर्ट उसके ऊपर की तरफ थी, नीचे लोअर जमा हुआ था।
उसकी टी-शर्ट मेरे हाथों से निकल गई।
उस पल उसका गुलाबी ब्रा में दिखना मेरे लिए कमाल कैसा लग रहा था।
उसकी छाती से कपड़ा हटाकर मैंने धीरे से अपने होठ वहाँ रख दिए।
मुंह से एक हल्की सी "आह हहह" निकल पड़ी।
फिर उसने मेरा सिर पकड़ लिया, धीरे से अपने मम्मे चुसाए।
“आहहहह, चूस लो, रजत जी!” उसने कहा।
“चूसने और चोदने के लिए ही तो तुम्हें यहाँ बुलाया है, मेरी जान!” मैंने जवाब दिया।
इसके बाद मुझे दूध पीना शुरू हो गया।
थोड़ी देर में ही, उसके सारे कपड़े फर्श पर बिखर गए।
शर्ट का बटन उसके हाथ ने खोल दिया।
वह मेरे करीब आया, उसकी बाँहों ने चारों तरफ से घेर लिया। धीरे-धीरे उसकी उँगलियाँ मेरी पीठ पर सरकने लगीं।
उसके छाती का हिस्सा मेरे सीने पर ऐसे टिका था, जैसे कोई बोझ समेट रहा हो।
एकदम से उसकी तरफ़ से हाथ मेरे लंड को छू गया।
“पैंट खोलकर लंड चूस लो!” मैंने कहा।
“मैंने कभी नहीं चूसा!” उसने जवाब दिया।
“चलो, बाद में चूस लेना!” मैंने कहा।
थोड़ी देर के लिए हम दोनों ने आग सा मचाया।
“अब डाल दो!” वह बोली।
उसकी चूत में नमी आ गई थी।
मैंने जगह सुधारी, फिर लंड को उसकी चूत के किनारे टिका दियa।
वह भी अपनी जांघें थोड़ी खींचकर रख ली थी। मेरे लिंग को हाथ में उठाया, फिर अपनी योनि में धीरे से समा दिया।
थोड़ा सा लंड अंदर जाने पर मैंने दबाव बढ़ाया।
“आह, यार, दर्द हो रहा है!” वह बोली।
“क्यों?” मैंने पूछा।
“लंड तुम्हारा बड़ा है, चूत मेरी है छोटी, टकराती है तेरी दोनों गोटी!” उसने कहा।
“अरे वाह, दर्द में भी शायरी!” मैंने हँसते हुए कहा।
“शायरी तो तुम्हें देखकर ही आ जाती है, मेरी जान!” उसने जवाब दिया।
थोड़ी देर बाद मैंने आहिस्ता काम शुरू किया, इसके साथ ही पलट कर उसे चुम्मा भी दे दिया।
उसकी जांघों के बीच मेरा आधा हिस्सा समा चुका था।
अचानक, मैंने तेज़ गति से बॉल पर हमला कर दिया।
मेरा पूरा लंड धीरे-धीरे उसकी चूत के भीतर समा गया।
“आईई ईईई ईई माँआ आआ मर गईई ईई ईईई! मादरचोद, आज फाड़ के मानेगा मेरी चूत को! अबे, पूरी रात यहीं हूँ, जितना चोदना है, चोद लेना! आह, यार, पर अभी धीरे करो, मेरी चूत छिल गई शायद!” वह चिल्लाई।
इस बार मैंने सुना, पर कुछ नहीं कहा।
थोड़ा सा बाहर खींचकर वापस धकेल दिया।
“पहले ही बोला था, लंड को मुँह में लेकर ढंग से चूसकर गीला कर देती, तो दर्द कम होता!” मैंने कहा।
“अच्छा, तो लंड चुसवाने के लिए कुतिया समझ के चोद रहे हो क्या? ओके बाबा, अगली बार पक्का चूस लूँगी तुम्हारा लंड भी और लंड की गोलियाँ भी!” उसने जवाब दिया।
मैंने कोई शब्द नहीं कहा, सिर्फ़ अपना काम करता रहा।
उसने यह भी पकड़ लिया कि मैं अब एक जंगली कुत्ता हो चुका था, फिर वह सिर्फ आवाजें निकालती रही, धीरे-धीरे लंड को चूत में उतारती गई।
थोड़ी देर बाद दर्द घटने लगा। मैंने तेजी से आगे बढ़ना शुरू किया।
थोड़ी देर बाद वह मेरेऊपर अपनी जांघें भींचने लगी। हाथों ने मुझे तब घेर लिया, फिर एकदम से ढीली पड़ गई।
फिर मैंने उससे कहा, “बहुत देर से कुतिया और कुत्ता कर रही थी! अब आ जा, बन जा कुतिया और खोल दे अपनी चूत!”
एकाएक वो मौन हो गई, कुतिया सी।
उसके सिर के पीछे हाथ फंसाकर मैंने धक्के देने शुरू कर दिए, गहरे अंदर तक झटकों के साथ।
“आह आह ऊह, चोदो! हाँ, ऐसे ही जोर से चोदते रहो!” वह कहने लगी।
बीस मिनट तेजी से संभोग करने के बाद भी मन में यह डर था कि अभी मैं नहीं उतर पाऊँगा।
“चलो, बाथरूम में खड़े होकर शावर चलाकर चोदेंगे!” मैंने कहा।
“यहीं कर लो ना!” उसने कहा।
“निकल नहीं रहा यार, और शायद पानी में निकल जाए!” मैंने जवाब दिया।
“ठीक है, मुझे भी पानी वाला मजा मिल जाएगा, बिल्कुल रंडी की तरह!” उसने कहा।
मैंने जब उसके होठों पर वो शब्द सुना, तो आँखें उसकी ओर उठ गईं।
“क्या देख रहे हो? क्या आज से मैं तुम्हारी रंडी नहीं बनी क्या?” उसने पूछा।
“तो आ जा मेरी रंडी! अब तेरे मुँह में लंड दूँगा!” मैंने कहा।
“चलो, ठीक है! आज पूरे मजे दो अपनी रंडी लुगाई को!” उसने जवाब दिया।
आज उसका व्यवहार मुझे किसी से बातचीत करने जैसा लगा।!
“रंडी तक तो ठीक था, पर लुगाई कब बनी?” मैंने पूछा।
“अरे यार, चूत और लंड के रिश्ते में सब चलता है!” उसने हँसते हुए कहा।
हँसते-हँसते वो शावर चला देती है। मैं भी पास आकर खड़ा हो जाता हूँ।
बिना कोई आवाज किए, वह धीरे से नीचे बैठ गई और लंड पर मुँह से खेलने लगी।
मुँह में लंड डालकर उसने सू-सूकर चूसा, बीच-बीच में गोलियाँ भी चखती रही।
अरे भई, वो जुबान कितनी स्वादिष्ट थी।!
पानी का हर छोटा कण उसके मुँह की ओर बढ़ रहा था, शावर से टपकते ही।
एक बार फिर से उठने का प्रयास करते हुए, 20 से 25 झटकों के बाद वह खड़ी हो गई।
मैंने आवाज़ उठाई, "तबियत ठीक नहीं लग रही?"
“मेरे जानेमन, शावर के पानी से ही पेट भरवाओगे क्या? खाना भी तो खाना है!” उसने कहा।
“अरे हाँ यार, चलो, जल्दी से लंड से पानी निकाल लेते हैं!” मैंने जवाब दिया।
उसकी एक टांग पकड़ कर मैंने ऊपर उठा दिया।
उसने मुझसे जकड़ लिया, फिर अपनी चूत को उसके लंड पर तान दिया।
लंड को चूत में तभी धकेल दिया, जब मैंने जोर से धक्का दिया।
शायद अभी भी पानी के कारण मेरा नहीं निकल पा रहा था।
फिर वापस उसे तरतरा करके निकाला, बिस्तर पर धप्पादार गिराया, अब ऊपर से जुड़ गया।
मैंने तब उसके पैरों को अपने कंधों पर टिकाया, बाद में लंड को चूत में आहिस्ता से सरका दियa।
उसकी चूत मेरे लौड़े के हिसाब से ढीली पड़ चुकी थी, अब उसे ज्यादा दर्द नहीं हो रहा था।
उसके साथ मेरा तेज़ी से आगे बढ़ना जारी रहा।
अब उसे अच्छा लगने लगा और उसकी कामुक आवाजें निकलने लगीं, “आह आह आआह ओह हहहह आईई ईईई उफ्फ आहा, मजा आ रहा है!”
इतनी जल्दी गिर गई, सिर्फ 4 से 5 मिनट में।
वो मेरे हथेलियों में सिमट गया।
मैंने फिर से मिशनरी पोजिशन अपनाई, उसके ऊपर आकर धीरे से लिंग घुसाया, फिर हल्के-हल्के झटकों से चुदाई शुरू कर दी।
तेज़ी से आगे बढ़ रहा था मैं, दूध के लिए उसकी छाती पर मुँह चिपटा हुआ था।
थोड़ी देर के बाद मैंने उसकी तरफ देखा। “अब मैं आऊगा,” मैंने कहा।
“रस अंदर मत निकालना!” वह कहने लगी।
मैंने उसकी चूत पर ही मुड़कर जम्हाई भर दी, फिर सीधे वहीं लेट गया।
खाना खाने के बाद हम वापस लौटे।
फिर वो मजेदार पल आया, जब Xxx गर्ल फक का सीन एक बार फिर शुरू हुआ।
अगली कहानी में समझाऊँगा कि मैंने उसे कैसे पिछवाड़े तक धकेला।
यारों, सुना तुम्हें वो कहानी अच्छी लगी, जहाँ मैं उस अजनबी खूबसूरत लड़की से मिला था।
ज़रूर लिखें, कुछ कहना हो तो टिप्णी भी दे दें।!
लिखने का उत्साह तब जागेगा, जब आपके कमेंट मिलेंगे।
अब तो बस इतना कहूँगा - ये मेरी पहली कहानी है।
देखो, बस इतना कहना है - मेरी ये पहली कहानी आखिरी न बन जाए। आशा करता हूँ, तुम सब यहीं रहोगे।
लव यू ऑल!
आपका इंतज़ार रहेगा।
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