इंग्लिश ट्यूशन टीचर को घर पर अकेले में खूब चोदा

Antarvasnastory

AviAvi
Jan 3, 2026 - 15:57
Jan 8, 2026 - 17:43
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इंग्लिश ट्यूशन टीचर को घर पर अकेले में खूब चोदा

एक दिन मैंने सोचा, क्यों न अपनी इंग्लिश टीचर के पास जाऊँ। वो काफी सेक्सी लगती थीं। धीरे-धीरे मैंने उनसे बातचीत बढ़ा दी। वो भी मुझे देखकर मुस्कान छिपाती रहतीं। फिर कभी ट्यूशन का झूठा बहाना बनाकर मैं उनके घर पहुँच गया।.

 

नमस्ते दोस्तों, अभिषेक कहते हैं मुझे। उम्र इस वक्त बीस साल है।.

इंदौर में पले-बढ़े हुए हैं मैं। दूसरे साल में पढ़ता हूँ, बी. एस. सी. के।.

 

मेरी ज़िंदगी में ये पहली बार है जब मैंने सेक्स किया। ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं था।.

 

कुछ दिनों पहले की बात है, मेरी Xxx मैम के साथ एक सेक्स कहानी हुई।.

 

मैं भी कहानियां पढ़ने लगा था, बिल्कुल तुम्हारी तरह। freesexkahani पर मेरा भी समय बीतता है।.

मैंने इस तरफ की उन कहानियों को पढ़ा, जो मस्ती भरी थीं। तभी ऐसा लगा, बस, अब खुद की बात कहने का वक्त आ गया है।.

 

मेरी अंग्रेज़ी की मैम शाईस्ता की ये कहानी है, सेक्स से जुड़ी।.

मैंने उसकी चूत को जीभ से छेड़ा, फिर पूरा मज़ा लिया।.

 

पहली बार कक्षा में पैर रखते ही नज़र भरा हुआ मनचला समूह पड़ा।.

कक्षा में मैम की ओर नज़र पड़ते ही दिल धड़क उठा।.

 

कई बार सोचते थे कि मैम कितनी आग लगा देने वाली नज़रों वाली हैं।.

उस दिन मैंने तय कर लिया था, वो मुझे पसंद आए।.

 

ऐसे ही पल बीतते रहे।.

अब वह मुझसे बहुत प्यार से बोलने लगा।.

कभी-कभी ऐसा होता कि मैं दोहरे अर्थ वाली बातें कह जाता।.

 

उस वक्त मम के पास बस तेइस साल ही थे।.

मैं जब मैम को गहरी नजरों से देखता, तो पहले वो चुपचाप टाल देती थीं। धीरे-धीरे, हालांकि, उनका रुख मेरे तरफ भी मुड़ने लगा।.

 

कभी-कभी मैम ने मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुराहट छोड़ दी। फिर सबके सामने यह बताने के लिए कि वे गलती कर रही थीं, चॉक का टुकड़ा भी फेंक दिया।.

आँखें झपकते हुए मैंने देखा, तो उन्होंने बिना कुछ कहे मुस्कुराहट से सब कुछ कह दिया।.

अब साफ़ हो गया कि मैम का गुस्सा मेरी तरफ़ ठहर गया।.

 

तभी मैंने सोच लिया था - अब तो बस इसे पकड़ कर जमकर चलाना है।.

अब समय की तलाश में हूँ।.

 

एक-दो दिन पहले मैंने मैम को फ़ोन किया। समझ न आ रहा था कुछ नोट्स में। मैंने पूछा, क्या मैं आपके घर आ लूँ? तब वो बोलीं, आ जाओ।?

उसने कहा, "ठीक है, आ जाओ।"!

 

उसके बाद मैं एकदम सीधा होकर खड़ा हुआ, फिर सीधे उनके घर की ओर निकल पड़ा।.

आज सुबह मैं वहाँ पहुँच गया था, उसी इरादे से।.

 

जैसे मैं मैम के घर पहुँचा, दरवाजा बंद पड़ा था। कोई पढ़ाई नहीं हो रही थी उस वक्त।.

 

दरवाज़े पर घंटी बजते ही नज़र पड़ी मैम, सामने खड़ी थीं बिल्कुल काले रंग में – स्वेटर भी काला, नीचे का कपड़ा भी।.

तंग स्वेटर में उनकी कमर पर नज़र अटक गई। बदन का हर हिस्सा साफ़ झलक रहा था। आस्तीनों से उभरे हुए हथेली जैसे ढल रहे थे।.

 

दिल ने सोचा, अब तो मज़ा आएगा।!

अंदर के तरफ़ मैं पहुँच चुका था।.

 

शिक्षिका बोलीं - हाँ, बताओ कौन सी बात अस्पष्ट हो रही है तुम्हें?

उसके बाद मैंने कहा, कक्षा तो आज छूट गई है मैम...घर पर कोई उपलब्ध नहीं है?

 

उसने कहा - हां, बहन दिल्ली चली गई है। रुकेगी वहाँ सिर्फ़ दो दिन।.

एकांत में वो और उसकी बहन यहीं पड़ोसिन के साथ ठिकाना जोड़े रखती थी।.

तो पता चलता है कि बचे हुए परिवार का घर दिल्ली में था।.

 

खुशी की बात थी, मेरा दिल और भी उछल पड़ा।.

उनकी नजर मेरे ऊपर पड़ी। बोलीं, "तुम तो बहुत खुश हो। क्या मन में चल रहा है?"?

 

उसकी ओर नज़र जाते ही पता चला, आंखों में एक हल्की सी मुस्कान थी।.

बस मैंने कह दिया - तुम आज कितनी स्टाइल में हो!

 

उनकी आवाज़ में हल्का सा झुंझलाहट थी, बोलीं - तो क्या?

जी मैडम, सही कहा आपने।!

 

अब धीरे-धीरे मैं भी उनकी बातों में शामिल होने लगा।.

थोड़ी देर के बाद वो मुझसे सच बोलने लगीं।.

 

उसके मुँह से निकला - आज तुम भी काफी अच्छे दिख रहे हो।!

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थोड़ी देर बाद मैंने कहा, सुनिए मैम… पढ़ाई में मन नहीं लग रहा।!

उसने कहा - अच्छा… अब दोस्त के साथ कौन सी चीज़ करेंगे?

 

जब मैंने उन्हें ऐसे बोलते सुना, तो बस इतना कहा - इतना कुछ करना है… लेकिन…

उस पल में ही आवाज़ फैल गई - कितना सब कुछ उठाकर चल रही हो?

 

अचानक मैंने पीठ फैलाई। धीरे से हाथ नीचे लाते हुए, मेरी नजर उन पर टिक गई। एक हाथ सीधे जांघ पर आ गया।.

उनके हाथ को हटाने की बजाय मैम बोलीं - अभिषेक, तुम्हें क्या हुआ?

 

थोड़ा संकोच करते हुए मैंने कहा, तुम्हारी ओर देखकर ऐसा लगता है, मन कहीं और भाग जाता है।!

 

महज इतना हुआ कि मैंने झट से उन्हें चूम लिया।.

 

अचानक उनकी आवाज़ में गुस्सा झलकने लगा - तुम ऐसे क्यों व्यवहार कर रहे हो? माता-पिता को सब पता चलेगा।!

मैंने कहा, "नहीं मैम, आपकी अदाएँ वाकई भड़काती हैं।"!

 

इस बात को कहते हुए मैंने मम्मी के होंठों पर चुम्मा देना शुरू कर दिया, फिर उन्हें लेटा दिया।.

एक तरह से वो मुझ पर से अलग करने की कोशिश कर रही थी। लगता था, बस मैं भी यही करूँ।.

 

जैसे ही यह एहसास हुआ, मैं उनके सिर पर बैठ गया।.

उनका ज़ोर मुझे धक्का देने पर था, फिर भी हौसला कमज़ोर साबित हुआ। मेरी मुट्ठी में खिंचाव बढ़ता गया।.

 

थोड़ी देर बाद मम्मी को लगने लगा मज़ा, फिर वो भी मेरे साथ हो गई।.

अब साफ़ हो गया था मुझे, इसके पेट में लंड की तलब चल रही थी।.

 

मुझे अब वो काम छोड़ना पड़ा, इसकी जगह मैंने उनके बच्चे को दूध पिलाना शुरू कर दिया।.

मैंने पूछ लिया मैम से - बिल्कुल सच कहिए, मैम, मैं आपको कैसा दिखता हूँ?

 

उन्होंने कहा - अभिषेक, पहले दिन से ही तुम मुझे अच्छे लगते थे। फिर भी, झिझक थी, आखिर तुम मेरे छात्र थे!

मैंने कहा, फिर क्या हुआ? इस कमरे में कौन पड़ताल कर रहा है - मैं छात्र हूँ या तुम्हारा प्रेमी।!

 

उन्होंने पूछा - तो फिर, क्या तुम सच में मेरे प्रेमी हो?

अभी मैं फकर हूँ, पर तुम्हारी मर्जी होगी तो लवर भी बन जाऊंगा।!

 

आवाज़ सुनते ही उनकी नज़रों में तड़प दिख पड़ी।.

 

एक हाथ सीधे मैम के दूध पर पड़ गया। फिर वो धीमे-धीमे घुटने की तरह दबने लगा, जैसे कोई सीटी बज रही हो।.

 

यार, तुम क्या कर रहे हो मैम ने पूछा।?

गाड़ी शुरू करने से पहले मेरा मन हॉर्न बजाने का कर रहा है।!

 

उन्होंने पूछा - हम्म… इतने वक्त में कितनी बार गाड़ी चलाना शुरू कर दिया?

आज पहली बार कार चला रहा हूँ मैं… अब सीटी बजाने के बजाय तुम्हें चूमने का मन कर रहा है, प्रिय।!

 

ऊपर की ओर स्वेटर उठते हुए मैने कहा।.

 

खुशी उनमें भी धीरे-धीरे घर करने लगी।.

फिर मैंने उनसे कह दिया - उठो न, अभी तो मस्ती शुरू हुई है।!

 

अचानक वह खड़ी हो गई।.

उसकी गर्म कोट पलंग पर पड़ी थी।.

 

उसकी काली ब्रा मुझे सबसे पहले नज़र आई।.

उनकी छाती, जो टाइट ब्रा में भरी थी, दूध से लबरलबा थी।.

 

उनकी उँगलियाँ छाती पर फिसल रही थीं, मानो किसी बात से डर रही हों।.

 

अरे भई, वो मैम के पास जो बूब्स थे न… सच कहूँ? हैरानी हुई।

उसके दोनों स्तनों पर मेरी हथेलियाँ फैल गईं।.

 

उसके मुँह से निकला – आआह, आह्ह… ऐसा लग रहा है दोस्त… धीरे करो न… ओह आआह।

उसकी सांसें तेज हो गईं, वह बोली - मुझे अकेले को ही नंगा करोगे?

 

अब सुनकर मैंने भी कपड़े उतार लिए। बस चड्डी पहने हुए वहाँ खड़ा था।.

बहुत ठंड पड़ रही थी उस वक्त। हल्की झुलसाहट-सी महसूस होने लगी, बावजूद इसके कि चारों ओर जमाव था।.

 

उस समय मैंने कहा था - निचला कपड़ा उतार दो।!

हटा दिया, बस।.

 

अब उनके पास केवल ब्रा और पैंटी थी।.

उसकी छाती पर हाथ फिरते हुए मैंने स्ट्रैप खींचा।.

 

हे भगवान... तुम्हारी छातियों पर क्या खतरनाक सौंदर्य है।

जब मैंने ये कहा, तो उसकी आँखें नीचे हो गईं।.

 

एक दूध को मैंने अपने होंठों में भींचा, तभी वो मेरा सिर अपनी छाती पर चिपकाते हुए बोली – उफ़, निगल जाओ इन्हें!

 

उसके सीने पर मेरा होंठ आया।.

एक के बाद एक, उसने दोनों निप्पल काट डाले।.

 

खुशी उनके चेहरे पर दिखने लगी।.

उसकी आवाज़ में एक तरह का स्वर था - आआ हहह हाआआ उह… फिर अचानक बोल पड़ीं, ऊऊहह!

 

मैं बोल पड़ा - तुम मेरी होकर रहना।!

उसके मुँह से निकला - तुम्हारे आगे तो मैं बेड़ियों में जकड़ी हूँ… गुज़ार दे अब ये घटिया करतूत।!

 

इतना कहते ही मैम ने मेरे लंड को हाथ में ले लिया।.

तुरंत मैंने अपने तहत कपड़े उतार लिए।.

 

मेरे पैंट के अंदर सात इंच का घोड़ा ऊपर की ओर मुड़ा हुआ था। जैसे ही अंडरवियर नीचे गया, वह छलांग लगाकर बाहर आ गया।.

उसने तेज़ नज़र से देखा, फिर मुंह बनाकर कह दिया - अच्छा प्रभु, ये क्या चीज़ है!

 

सुन मेरी बात - हां, वो गधी… आज उसकी गांड फाड़ दूंगा।!

उसके हाथ धीरे से उठे, नखरों के साथ बोली - हाँ, जमकर तोड़ दो मेरे स्वामी।!

 

उसने कहा - इसे मुँह में डालकर सूखी तरह चूस लो।!

एकदम से उन्होंने चुसाई का पोज ले लिया। फिर हाथ में लंड लेकर हिलाना शुरू कर दिया।.

 

एक बार फिर उसने लंड को सूँघा, मुँह में डाल लिया। फिर चूसने लगी।.

एकदम ऐसा लग रहा था, मानो कहीं स्वर्ग में हूँ।.

 

वो धीरे से मेरे लौड़े को होठों में ले गईं।.

थोड़ी देर के लिए माँ ने मेरी गांड पकड़ रखी।.

 

तभी मैं बोल पड़ा - अब सो जा, तुझे कह रहा हूँ।!

मैम लेट गईं.

 

एक ही कोशिश में उसकी पैंटी नीचे आ गई।.

वह अपनी चूत को ढक चुकी थी।.

 

उसकी जांघें मेरे बीच आईं, मैंने नज़र डाली।.

उसकी चूत इतनी साफ थी। हे भगवान, कश्मीर की कोई कली-सी गुलाबी चूत दिखी, तो मन लुभा गया।.

 

उसकी जांघों के बीच मेरा हाथ सरका। फिर मैंने आहिस्ता-आहिस्ता छुआई शुरू कर दी।.

Xxx मैम जब सेक्स के लिए तैयार हुई, तो उनकी आवाज़ कांप उठी - आआ हहह… इसे अब छेड़ दो।!

 

मैंने कहा था - हां रानी, बिना चोदे मैं तुझसे दूर भी नहीं हटूंगा… सब कुछ अपने आप में समा लेगा।!

एक उंगली को मैम की चूत में धीरे से घुसाते हुए मैंने झट से रगड़ना शुरू कर दिया।.

 

अब मैम को खुशी मिलने लगी।.

उसकी उंगलियाँ स्तनों पर धीमे से दबाव डालने लगीं। आँखें झपक गईं, श्वास थोड़ा सा रुका।.

 

अब मेरा मुँह उसकी चूत के ऊपर था। फिर मैंने जीभ से चूत चाटनी शुरू कर दी।.

 

गर्म सांस महसूस करते ही मैम झटके से ऊपर उठीं - “अआह, रुकिए… ऐसा मत कीजिए…”

 

उसकी बातें सुनकर मैं मन भुलाकर चूत पर झुक गया।.

उसकी उंगलियाँ मेरे सिर पर तेजी से दब गईं, धीमे-धीमे उसके होंठ खुशी से फैलने लगे।.

 

उसके बाद कई घंटों तक मैंने मैम की योनि पर जीभ से हलचल की।.

एक बार फिर वो ढह गई थीं, मैंने हर बूंद चख ली। दूसरी बार भी ऐसा ही हुआ, मैंने सब कुछ निगल लिया।.

 

क्या सचमुच उसके होंठों पर खारापन था… ओह, बस ऐसे ही लग गया।!

 

उसके बाद वो बोलीं – अब तू भी अपना लंड उघाड़ दे… इतना चूत चाट चुका है कि सिर्फ तड़पता रहेगा क्या!

मैंने कहा - हां मेरी प्यासी… अभी डाल रहा हूं… आज तेरी गुदगुदी वाली जगह को इतना छेदूंगा कि तेरी मां की बात भी निकल जाएगी।!

 

उसके मुंह से निकला - यार, पहले मेरी गांड चुटकी भर ले। उसके बाद माँ की बातें करना।!

 

मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया। फिर सुपारे से चूत की तहों को घिसने लगा।.

उनका दिमाग हल्का सा चूर हो गया। धीरे-धीरे कमर उठाई, लंड के पास जाने की कोशिश में।.

 

एक दूध को मैंने अपने मुँह में लिया, फिर तेजी से चूसने लगा। बाद में लौड़े को चूत में धकेलने की कोशिश करने लगा।.

फिर वो उठीं, मैंने अपना लौड़ा उनकी चूत में धुसका दिया।.

 

जब लंड अंदर गया, वो चीखने लगी – आह्ह आह्ह, इतना मोटा कैसे? ओह ओह ओह, दर्द सचमुच जलेबी बना रहा।!

तो मैंने पूछ लिया - क्या हटा दूँ?

 

उसने मुझे कसकर पकड़ रखा था - ओय, धत् तेरी… ऐसे ही छोड़ दिया तो समझ। ओह, गहराई तक जा रहा है… बेहद तकलीफ हो रही है। तेरे साथ वाली घटना पे मैं खौल उठी हूँ। चाहे जो हो जाए, मैं झेलूंगी।!

 

एकदम साफ हो गया था कि ये लगातार चुदवाने वाली है… अब सिर्फ इतना कि मोटे घोड़े जैसे लौड़े पर टूट रही, और दर्द में भी मीठी आह छूट रही।.

मैंने लंड को मैम की चूत की गहराई तक धकेला। मज़े का एहसास होते ही मैंने तेजी से चुदाई शुरू कर दी।.

 

तीस मिनट तक मैंने लगातार उसकी चूत पर हमला कियa।.

उस समय तक मैम कई बार लड़खड़ा चुकी थीं।.

 

फिर वहीं पल था, मैंने धीमे से लंड को बाहर निकाला। फिर सब कुछ उनकी छाती पर गिर गया।.

वो मुझपर झुलसी हुई आंखों से देखती रहीं। फिर धीमे स्पर्श से मेरे बालों में हाथ डाला। कभी-कभी छाती पर सिर टिका लेतीं, जैसे कोई सुकून ढूंढ रही हों। एक-एक गति के बाद ठहर जातीं, फिर मुस्कुरातीं। उनकी सांसें मेरी गर्दन पर थीं। बिना कुछ कहे, वो सब कुछ बयां कर रही थीं।.

 

थोड़ी देर बाद, मैं वहाँ से चला आया।.

अब वो सरकारी पैसा नहीं लेती हैं मेरे से, बल्कि जिस वक्त मन करता है मेरे हाथों से खुद को शांत करवा लेती हैं।.

 

मेरी नजर उसकी बहन की ओर भी है। अब वक्त आएगा, तो पेल लूँगा।.

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