ट्यूशन टीचर से प्यार और पहली चुदाई

Jan 3, 2026 - 11:51
Jan 13, 2026 - 19:42
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ट्यूशन टीचर से प्यार और पहली चुदाई

एक शिक्षक के पास मैं ट्यूशन के लिए जाता था। उनकी पत्नी भी पढ़ाती थी। एक बार उन्हें देखकर मेरा मन ही मन में झुक गया। धीरे-धीरे वो मेरे ख्यालों में आने लगीं, फिर शारीरिक तड़प भी जागी। कई कहानियाँ पढ़ चुका था मैं ऐसी। लगा, अब अपनी बात भी कह देनी चाहिए।.

मैं योगेश हूँ। लंबाई मेरी पाँच फुट आठ इंच की है, चेहरा बिल्कुल सफेद है, घर इंदौर शहर में है। तीन साल पहले की बात है वो वक्त, मैं पहले साल के कॉलेज में पढ़ता था।.

हालाँकि मैं हर विषय में ठीक-ठाक था। पर इंग्लिश में लिखते समय गलतियों का पहाड़ खड़ा हो जाता था। पंकज सर के पास मैं आयकर का पाठ लेने जाता था। उनका घर कुछ दूर था। वहाँ उनकी पत्नी अंग्रेजी पढ़ाया करती थीं। कई बार सर ने कहा कि इंग्लिश की ट्यूशन भी शुरू कर दो, फिर भी मैं कोई न कोई बहाना बनाकर टाल देता था। 

एक दिन सर की पत्नी ट्यूशन पर आईं। शायद कोई ज़रूरत थी सर से बात करने की। मैंने उन्हें पहली बार देखा तब। ऐसी लग रही थीं, मानो आकाश से उतर आई हों। दिल पर चढ़ गई वो। फिर मन ही मन डाँटने लगा खुद को - इतने दिन बाद क्यों अंग्रेज़ी की पढ़ाई शुरू कर रहा हूँ? कितना मूरख था मैं।.

अगली सुबह तक वो लड़की के बारे में सोचता रहा। धीरे-धीरे थकान हावी हुई, फिर मैंने आखिरकार आँखें बंद कर लीं।.

तीन दिन बाद मैं सर की पत्नी के पास अंग्रेज़ी पढ़ने लगा। पहले दिन जब पहुँचा, तो कई और छात्र भी मौजूद थे।.

उसने जिसने मुझसे नाम पूछा, वो मेम थी।.

उसके जवाब का मैंने जवाब दिया। इसके बाद, मैंने नाम पूछ लिया। अभी तक वो नाम मुझे मालूम ही नहीं था।.

थोड़ा सिहरते हुए मैंने पूछ लिया - आपको क्या कहूँ?

उसका नाम संगीता था। इतना सुनकर विश्वास नहीं हो रहा था कि ये सच में सर की पत्नी हैं। उम्र तो लगभग 30 की होगी, मगर दिखती ऐसे थीं जैसे अभी बीस के आसपास की हों। रंग तो बिलकुल गोरा था। गुलाबी होंठ, चेहरे पर लालिमा… एकदम फ्रेश लग रही थीं।.

दो महीने के आसपास, हम एक-दूसरे के काफी करीब आ गए थे। मजाकिया बातचीत का दौर भी मेम के साथ शुरू हो चुका था। जब भी मेम के सामने होता, नजर उनके होंठों और स्तनों पर टिक जाती। लगता है, मेम को एहसास हो गया था कि मैं उनकी छातियों को घूरता रहता हूँ। इसी वजह से अब उनका ध्यान ज्यादा तर मेरी ओर ही रहने लगा। वो बार-बार साड़ी का पल्लू ठीक करने लगीं। .

हर दिन यही ख्याल आता रहता - अगर कभी मेम मिल जाए, तो फिर चैन से।.

चैट का सिलसिला व्हाट्सएप्प पर भी जारी हो चुका था। ऐसे में एक बार लिंक भेजते वक्त गलती हो गई, पोर्न वीडियो का पता उन तक पहुँच गया। मेम ने इसे खोलकर देख लिया था।.

अगले दिन, मेम ने ट्यूशन के बाद मुझे रोक लिया। फिर वो बोलीं - पढ़ाई पर ध्यान देना, इन सब चीजों के लिए तो पूरी उम्र मिली है।.

सिर हिलाते हुए मैं सब कुछ सुनता रहा, फिर आखिरकार माफ़ी माँगकर वहाँ से निकल गया।.

अचानक एक बात याद आई – मेम के सामने वो दिन ठीक नहीं गया। व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा, सॉरी लिखा। जवाब नहीं आया कभी।.

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अगली सुबह जब मैं ट्यूशन पहुँचा, तो कमरे में सन्नाटा था। किसी के आने का नामो-निशान नहीं था। ऐसा लगा, मानो आज कोई पढ़ाई नहीं होने वाली।.

पूछ लिया मैंने मेम से - क्या आज छुट्टी है, मेम? कोई तो नहीं पहुँचा।?

बस इतना ही मेम ने कहा - जहां हो, वहीं रुको। वो खुद यहाँ पहुँच जाएंगे।.

सीट पर जैसे ही बैठा, यह डर सताने लगा। कहीं मेम ने वो लिंक के बारे में सर को तो नहीं कह दिया… ऐसा होता तो सर के सामने भी मुंह छिपाने को मिलता।.

तभी मेरे ट्यूशन के अध्यापक ने पढ़ाई का सिलसिला शुरू कर दिया। सहन हो गया, ऐसा भी नहीं था। फिर मैंने मेम से जाकर कह दिया - मेम, सर को आपने वो बात नहीं बताई न?

कोई जवाब नहीं दिया मेम ने पहले… अब सुना रही हूँ।.

बोला था मैंने - सॉरी मेम… किसी तरह सर को न बताएं।.

उसने जवाब में कहा - डर क्यों लग रहा है तुझे? अच्छा, सुन, मैं तो बस हँसी कर रही थी। खबरदार, मैं उन्हें कभी नहीं बताऊगी।.

फिर मुझे एहसास हुआ कि सब ठीक हो गया।.

उस दिन मेम लाल साड़ी में थीं, ऊपर काला ब्लाउज। इतना खिंचा हुआ कपड़ा कि लग रहा था - अब तो कोई भी पल छोटी सी चीख के साथ कुछ बाहर आएगा।.

आज तुम लाल साड़ी में कितनी खूबसूरत दिख रही हो, मैंने कहा।.

फिर वह हल्के से मुस्कुरा पड़ीं।.

आज जब मैंने ट्यूशन शिक्षक को अकेले पाया, तो रीढ़ में एक झुरझुरी सी दौड़ गई। बस इतना कह दिया - मेम, आप मुझे ठीक लगती हैं।.

हां, मुझे पता है। ऐसा कहकर वह बोली।.

इस बात को सुनते ही मेरी त्वचा पर छोटे-छोटे उभार आ गए।.

बीच में ही वह बोले - ये भी जानता हूँ कि तुम्हें मेरे अंदर क्या चाहिए।.

अचानक से मैं ठिठक गया। बस इतना कहकर वो मेरे पास चली आईं। जैसे ही वो पास आईं, उनके शरीर की खुशबू हवा में घुलने लगी। अभी तक उस मेम की खुशबू मेरे दिमाग में तैरती रहती है।.

उसके आगे बढ़ते हुए कदम मेरी सीट तक आकर रुक गए। उसका शरीर मेरे सिर के ठीक ऊपर झुका था। एक पल में यह ख्याल दिमाग में आया कि काम कर लूं।.

मैंने कहा, तुम देखने में ऐसी लगती हो जैसे कोई अप्सरा हो। पंकज साहब वाकई कितने भाग्यशाली हैं। उन्हें एक ऐसी औरत मिल गयी जो धरती पर नहीं, आसमान से उतरी लगती है।.

उसी लम्हे मेम ने मेरे होठों पर उंगली दबा दी। अंदर ही अंदर मैंने महसूस किया - आज किस्मत मेरे साथ है। तभी खिड़की के बाहर हवा भारी हो गई। फिर बूंदें धरती पर गिरने लगीं।.

दरवाज़ा बंद कर देने की सलाह मेम ने दी, वरना पानी भीतर घुस जाएगा।.

दरवाजा बंद करते ही मैंने महसूस कियa। उसके बाद मेरा लंड, जो सात इंच लंबा और ढाई इंच मोटा था, धीरे-धीरे ऊपर उठने लगा।.

उस वक्त मैंने मेम की ओर देखा, फिर बोला - यू नो, मेम, मैं तुमसे प्यार करता हूँ।.

वो मेरे करीब आए, दोनों बाहें फैलाकर। मैं उनके सीने से चिपक गया, ठीक वैसे जैसे बारिश के बाद पत्तों पर ओस टिक जाती है। मेम के गाल पर मेरे होंठ पहुंचे। फिर मैंने उनके मुंह पर धीमे से छुआ। उनके होंठ इतने नरम थे, मानो कपास के ऊपर एक साफ कपड़ा बिछा हो। मैं लगातार उन्हें छूता रहा। कभी मुंह के किनारे, कभी गर्दन के पीछे।.

लंड मेरा पूरी तरह से ऊपर उठ चुका था। कुछ सोचे बिना, मैंने ट्यूशन वाली शिक्षिका के स्तन पकड़ लिए, ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगा। इतने मुलायम स्तन मैंने अब तक कभी नहीं छुए थे। संभाल नहीं पाया, और मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोल दिए। ब्रा के फास्टन को खोलने में एक पल भी नहीं लगा। जैसे ही ब्रा खुली, ऐसा लगा, मानो दो पक्षी पिंजरे से बाहर निकल गए हों।.

उनके स्तनों पर गुलाबी-गुलाबी निपल थे, ठीक खड़े। वो नजारा देखते ही मेरा लिंग सख्त हो उठा। मैंने ट्यूशन मास्टर के एक स्तन को होंठों में डाल लिया, धीरे-धीरे चूसने लगा। इस बीच, दूसरे स्तन को मेरी उंगलियों ने जकड़ लिया।.

अचानक मेम की आवाज़ बदल गई - "उममम... इस्स।"

कुछ ऐसा लगने लगा जैसे सच न हो। मेम को उठाकर मैं हॉल की ओर चल पड़ा। शर्ट के बटन खुलने लगे, वहीं गोद में बैठी मेम के हाथों से। फिर मैंने भी उसके होंठों को छू लिया।.

उसे मैं सोफे पर बैठा चुका था, खुद को उनके सामने डटा हुआ पाया। जीन्स उतारने को कहा, मेम से वो काम करवाना था।.

उसने कहा था, मुझे पहचानो तो नाम से।.

संगीता डार्लिंग… कहते हुए मैंने उनकी साड़ी ढीली पकड़ ली। बस इतने में ही, मिनटभर में भी कम समय में, हम दोनों बिल्कुल नंगे हो गए।.

लंड देखकर संगीता मेम बोलीं - इतना विशाल पंकज का भी नहीं। उसका काफी छोटा है, तुम्हारे आगे।.

अब सुनो, ये चीज़ तो तुम्हारी ही बनी है।.

हाथ में उसका लंड आया, फिर धीमे से मसलने लगी।.

उसके पैर अलग हुए, मैंने उसे सोफे पर बिठाया। कभी न देखी हुई वो गर्मी सामने थी।.

बस मैं ही ऐसी चीज पाने वाला था, संगीता प्रिय, मैंने कहा।.

मेरी जुबान उसकी चूत पर पड़ते ही संगीता झटके से हिल गई। वो मेरे सर को धक्का देकर और नीचे खींचने लगी। मैंने बिना रुके जारी रखा। एक उंगली आहिस्ता से अंदर सरका दी।.

सब कुछ चल रहा था, तभी संगीता मैम ने एक धीमी आवाज़ छोड़ी - "ऊम्म्ह… अहह… हय… ओह… हाँ प्रिये, उहहह…"।

मेरा लंड सख़्त पत्थर जैसा हो गया था। जब मैं संगीता मेम की चूत में घुसने वाला, तभी उन्होंने कहा - पहले मुझे 69 करना है। मुझे ऐसा करना अच्छा लगता है… पर अब तक पंकज ने कभी नहीं किया।.

ऊपर लेकर मैंने संगीता मेम को अपने पर बिछाया। फिर वही हुआ, मेरी जीभ उनकी चूत में घुस गई। ट्यूशन वाली मैडम ने धीरे से मेरा लंड मुंह में ले लिया। ऐसे में मजा खूब आया।.

इतने में मेम बोल पड़ा - अब यहाँ से निकलना है। बस करो ये सब।.

मैंने भी उस मेम के पैर अलग किए, फिर धीरे से लंड को चूत पर घुमाया।.

मेम संगीता बोल उठीं - जल्दी से डाल दो, हां, अभी डाल दो।.

बिना समय गंवाए, मैंने अपना लंड उसकी चूत में घोंप दिया। तभी जोर का झटका लगा। मेम की चूत इतनी कसी हुई थी कि रुकावट हुई। पानी की वजह से फिसलाव आ गया।.

फिर मैंने वही कोशिश की। थोड़ा तेज़ दबाव डाला, तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया।.

आंखें बंद कर संगीता मेम ऊऊ… आहाहा… हाय… हाय… करने लगी। मैंने धीरे से और जोर डाला, तब लंड पूरा चूत में चला गया। उसके चेहरे पर एक अजीब सी खुशी छा गई। साथ ही, चुदाई के दर्द के निशान भी दिखे।.

लंड को अंदर-बाहर करने लगा। संगीता मैम की हल्की-हल्की मीठे दर्द वाली आवाज़ें तेजी से चोदने के लिए प्रेरित कर रही थीं।.

उलटी लगाम में वो मेरी हो गई। पीठ से जब घुसा, चीख फूट गई। बिना रुके धमाल मचाया… कभी-कभी भारी स्तन दब गए हाथ में। कहीं झटके से चूतड़ पर तमाचा पड़ गया।.

अब संगीता मेम खुद हिलने लगीं। उन्होंने अपनी बड़ी चाल शुरू कर दी, पीछे से आगे झटके डाले।.

थोड़ी देर तक घुटनों के बल रहने के बाद वो थक गई। मैं भी अब ज्यादा नहीं रोक पा रहा था। संगीता को खड़ा किया, धीरे से पीठ पर हाथ फेरा, और अपना छींटे उसके स्रोत और ठोड़ी पर गिरा दिए।.

मुझे हल्के से हंसते देखकर उसने मेरा लंड चूस लिया, इधर-उधर नज़रें भटकाते हुए चेहरा पोछ लिया।.

बिना कुछ पहने हम दोनों सीधे उसके बेडरूम में चले गए। तीन बार वो दिन में सेक्स हुआ, कोई जल्दी नहीं थी। बारिश रुकते ही मैं अपने घर की ओर चल पड़ा।.

अब तो हर ट्यूशन के बाद छुपकर बाथरूम में, कभी किचन में, कभी बेंच पर… संगीता डार्लिंग के साथ मौका मिला तो वहीं घटिया मज़ा लिया। इधर मैं शहर के बाहर हूँ। कभी-कभी फोन पर ऐसा हो जाता है कि दोनों की तस्वीरें आपस में नंगी हो जाती हैं। जब भी इंदौर जाता हूँ, उसके साथ बिना रोक-थाम के झंझट खत्म हो जाता है।.

बस अभी-अभी उनके घर में नन्हा मेहमान आया है। कहीं ऐसा तो नहीं कि इस खबर से आपका कोई पुराना वादा जुड़ा हो? फिर चाहे जितना भी वक्त लगे, पर बता देना।.

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