ट्यूशन टीचर मैडम की चूत और गांड दोनों फाड़ी
desisexkahaniya
एक सुबह मैं ट्यूशन की फीस देने उसके घर पहुंचा। तभी आवाज सुनकर रुक गया। वो अंदर शौचघर में थी, पानी की धार ऊपर से बह रही थी। खिड़की के पर्दे हल्के से हिले। मेरी नजर झट से उधर गई। उसकी पीठ चमक रही थी, बाल गीले, सिर पर साबुन का झाग। कुछ पल मैं सांस रोके खड़ा रहा। फिर उसने आवाज पहचानी, झेप लगी, पर रुक नहीं। बाहर निकलते वक्त उसकी आंखों में कुछ भिगो सा था। दोपहर तक बात ऐसी हो गई कि छुआछूत हो गई।?
हे लोग, सुनिए थोड़ी बात। मैं हूँ राकेश।.
लंड पर काला तिल है, इसलिए सेक्स में सक्षमता थोड़ी बढ़ी हुई है।.
अब तक मैंने कई लड़कियों के साथ संबंध बनाए हैं। कुछ भाभियों के साथ भी ऐसा हुआ है। आंटियों में से भी कई के साथ यही हुआ है।.
एक बार मैंने सोचा, क्यों न लिख दूँ वो कहानी। अब तक कभी नहीं लिखी थी। Xxx टीचर के बारे में है। इस बार पहली बार शब्दों में ढाल रहा हूँ।.
उस वक्त मैं बारहवीं में पढ़ता था, गणित में मेरी कमजोरी देखकर पिताजी ने ट्यूशन का इंतजाम कर दिया।.
घर से काफी दूर थी वो ट्यूशन क्लास, रास्ते में साइकिल ही मेरी साथी बनती।.
पहली बार जब ट्यूशन पहुँचा, तो पता चला कि कक्षा की शिक्षिका एक सुंदर लड़की है।.
नजर जब उस पर पड़ी, सब कुछ भूल गया।.
रोहिणी उसका नाम था।.
उम्र के हिसाब से रोहिणी की दावत 22 साल की थी। फिर भी, उसके शरीर का ढांचा - 32-28-34 - में ऐसी झनझनाहट थी कि आँखें मानने से इनकार करतीं। कोई उसे देखकर सोलह के आसपास ही ठहराता। जैसे जवानी ने अपने घुघनों पर छुपकर उसके पीछे चलना शुरू कर दिया हो।.
उस पल मन में रोहिणी को लेकर कोई खराब बात नहीं चल रही थी।.
उसके पढ़ाने का तरीका इतना समझदारी भरा था कि धीरे-धीरे मैं रोज कक्षा में जाने लगा। पढ़ाई में मन लगाकर बैठने की आदत खुद-ब-खुद बन गई।.
थोड़े-थोड़े कदम पर मेरे नंबर बढ़ने लगे थे, यह देखकर मम्मी पापा हल्के से मुस्कुरा उठते।.
शाम के समय मैं रोहिणी के घर पहुँचा, क्योंकि उस दिन ट्यूशन क्लास के लिए पैसे जमा करने थे।.
बाहर से आवाज किसी और तरह सुनाई देने लगी, मैंने वहाँ घूमकर।.
जब कुछ जवाब नहीं आया, तो मन में आया कि अंदर चला जाऊँ।.
खोला गया तभी दरवाज़ा, सिर्फ झपटा था। भीतर से कोई ताला नहीं था। धक्का देते ही वह टूटकर खुल गया। अंदर कदम रखा मैंने।.
आँखें सीधी करके मैंने अंदर झांका, रोहिणी वहीं थी।.
फिर अचानक पानी के बूंदों का शोर मेरे कान तक पहुँचा।.
तब मैंने वहीं किनारे को पकड़ लिया।.
आवाज़ किसी कमरे में से निकल रही थी।.
उस कमरे में नहीं पता, पर लगा कि शायद वहीं से टॉयलेट का रास्ता होगा।.
बाथरूम के अंदर, पानी की बौछार में रोहिणी खड़ी थी।.
थोड़ा सा अंदर की तरफ झुका हुआ था बाथरूम का दरवाजा।.
उसकी पीठ दरवाज़े की ओर थी, और साबुन उसके हाथ में फिसल रहा था।.
पानी के कण उसकी चमकती त्वचा पर सफ़ेद मोतियों-से लग रहे थे, मैं बस देखता ही जा रहा था।.
उसके बिस्तर पर रोहिणी का सलाखदार फंडा भी पड़ा था।.
उसके ढंग के कपड़ों को देखकर मेरे अंदर एक सरगर्मी सी हुई। फिर मैं धीमे से उसकी ओर बढ़ा। उसके अंडरवियर को हाथ में लिया। नाक से छुआया। गहरे से सांस भरी।.
तेज खुशबू उसके कपड़ों से ऐसे आ रही थी, मानो किसी ने पूरा इत्र उंडेल दिया हो।.
बाथरूम की ओर देख रहा था मैं, जब उसकी ब्रा पैंटी को सूँघ रहा था।.
एकदम वैसे ही, जब रोहिणी ने बाथरूम की ओर कदम बढ़ाया, मैं पलटकर उसके बेडरूम से निकल आया। सीधे हॉल की तरफ बढ़ गया। सोफ़े पर जाकर बैठ गया, ठीक वहीं।.
अब मैं सिर्फ इस बात का ध्यान रख रहा था कि रोहिणी कब पहुँचेगी।.
बीच-बीच में ही रोहिणी तैयार होकर हॉल में आई। नज़र पड़ते ही वह मुझसे पूछने लगी - मैं यहाँ कैसे पहुँचा इस घर में?
उस पल मेरी नज़र सिर्फ रोहिणी पर टिकी थी।.
क्या बात है, रोहिणी कितनी सुंदर दिख रही थी।.
तभी रोहिणी की आवाज़ सुनकर मैं चौंका, वो पूछ रही थी।.
एक दिन मैंने धीरे से उसकी तरफ कुछ रुपये बढ़ा दिए। फिर बोला, जी, मैं यहाँ अपनी ट्यूशन की फीस भरने आया हूँ।.
वो जब मुझ पर नजर डाला, तभी समझ गया कि मेरी आँखें उसी पर टिकी हैं।.
जब वह पैसे ले रहा था, तभी अचानक बोला - तुम सोच में कहाँ खोए हो?
एकदम घबरा के मैंने माफ़ी मांग ली, बस इतना कहा - अगली बार ये नहीं दोहराऊंगा।!
रोहिणी ने पूछा, क्या तुम्हारे साथ कोई लड़की है?
मुझे उसके सवाल को सुनते ही रुकना पड़ा।.
मेरी जबान अटक गई थी। डर लग रहा था।.
बैठने को कहकर रोहिणी पानी लेकर आ गई।.
फिर वो मेरे पास आकर बैठ गई। हाथ मेरी टाँग पर रखते हुए बोली - डर किस चीज़ का है… सहज रहो।!
सिर ऊपर-नीचे हुआ, मैंने कहा हां।.
अचानक रोहिणी मेरे पास सरककर आ बैठी। उसका हाथ पहले से मेरी जांघ पर था, अब वो दबाव बढ़ा चुकी थी।.
मेरी तकलीफ का सिलसिला अब धीरे-धीरे बढ़ने लगा था।.
उस समय तक मैं कुछ कह पाता, रोहिणी पहले ही मुलायम ठंडे होंठ मेरे ऊपर चढ़ा चुकी थी। फिर धीरे-धीरे उसने मुझे चूम लिया।.
मैंने पहले तो ऐसा करने से मना कर दिया। फिर रोहिणी जी की ओर मुड़कर बोला - ये सब ठीक नहीं है, कहीं कोई देख लेगा!
वह बोली, इस वक्त घर में सिर्फ हम दो ही हैं। किसी भी आदमी से मैं कुछ शब्द नहीं कहूँगी। यह बात तुम किसी पड़ोसी को भी न बताना। यह सिर्फ हम दोनों के बीच छुपी रहेगी।.
बस इतना कहकर वो मेरे होंठों पर झुक गई। फिर सांस थमे जैसे, उसने मुझे चूम लिया।.
होंठों के स्पर्श ने छूआ, तो मेरे भीतर कुछ हलचल-सी होने लगी।.
चुंबन के बीच हम दोनों खो गए।.
जीभों का आपस में टकराव होने लगा था।.
हंसी-ठिठोली का दौर शुरू हो चुका था।.
उससे पहले कि कामुकता और भड़कती, अचानक दरवाजे पर खटखटाहट हुई - रोहिणी के घर के।.
दोनों के बीच अचानक फासला आ गया। कपड़े संभालते हुए हम थोड़ा परे-परे बैठ गए।.
दरवाज़ा खुलते ही अंदर के कमरे से मम्मी-पिताजी बाहर निकले।.
घर वापस आने से पहले मैंने रोहिणी को क्लास की फीस सौंप दी।.
कुछ दिनों में ही स्कूल में परीक्षाएँ शुरू होने वाली थीं। इस बार रोहिणी ने मेरी पढ़ाई को समय से संभाल लिया। धीरे-धीरे सब कुछ सही होता चला गया। परीक्षा के दिन आसानी से बीत गए।.
थोड़े समय बाद परिणाम आ गए। मेरे हिस्से के अंक काफी सही थे।.
ख़ुशियाँ घर के हर कोने में फैली हुई थीं, मेरे नंबर देखकर।.
जब मैंने यह बात रोहिणी से कही, तो वह मुझे बधाई देने लगी।.
थोड़ी देर पहले की बात है, मैं सीधा रोहिणी के घर पहुँचा। वहाँ मिठाई उसके हाथ में रखते हुए शुक्रिया कहा।.
रोहिणी ने इतनी ताकत से मुझे गले लगा लिया कि उसकी छाती मेरे सीने से चिपक गई। फिर उसने अचानक मेरे होंठों पर ऐसा चुम्मा दिया जैसे किसी ने आग लगा दी हो।.
फिर मैं घर पहुँचा।.
संख्याओं में बढ़त देखकर पिता ने हाथ में नई गैजेट डाल दी।.
ट्यूशन बंद होने के बाद भी रोहिणी से बातचीत जारी रही।.
जैसे मेरा नया फोन पहुँचा, उसके साथ ही एक अलग नंबर भी मिल गया।.
उसके हाथ से पेन छूटा, फिर मैंने नंबर लिखवाया। जब मैंने कहा कि मिस कॉल करे, तभी उसने अपना फोन नंबर सुना दिया।.
एक सुबह रोहिणी की तरफ से फ़ोन आया। वो चाहती थी कि मैं उसके घर आऊँ।.
माँ और रोहिणी के बीच समय के साथ पटरी पकड़ती दोस्ती।.
एक दिन उसने मेरी माँ से बात की। घर में रुकने की इजाज़त माँगी। कहा, कोई काम है। वह मेरे साथ रहना चाहती है। कोई प्रोजेक्ट पूरा करना है उसे। ऐसे ही बातचीत हुई।.
अब मैं उसके घर जा सकता हूँ, मम्मी ने हाँ कर दी।.
घर पर रोहिणी से मिलने पहुँचा था मैं। उसने दरवाजा खोलते हुए अंदर आने को कहा।.
घर में सुन्नत छाई पड़ी थी, रोहिणी कहीं बाहर चली गई थी।.
खुशी से चेहरा उसका खिल उठा, मैं दिखते ही।.
उस दिन रोहिणी के चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी।.
उसकी तरफ़ नज़र मेरी जमी हुई थी।.
तभी उसकी आवाज़ छलक पड़ी - सुनो, कहाँ भटक रहे हो? बस वहीं टिक जाओ।!
इतना सुनकर रोहिणी के मुँह से, मैं झट से होश पर लौटा। फिर बैठे-बैठे जोर से हँस पड़ा।.
चाय के साथ बिस्कुट लेकर वो किचन से वापस आ गई।.
बातें होते-होते सबकुछ खत्म हुआ, फिर आँखें स्क्रीन पर जम गई।.
बैठते ही हमारा एक-दूसरे से टकराव हो गया।.
ठीक उसी पल स्क्रीन पर कुछ गरमागरम दिखा।.
उस पल के बाद हम दोनों में जोश घर कर गया।.
रोहिणी ने धीरे से मुझे पास खींच लिया। उसके बाद वो मुझे चूमने लगी।.
खुशी लग रही थी मुझे, इसलिए पलट कर वैसे ही जवाब दे दिया।.
अब रोहिणी ने सारी खिड़कियाँ और मुख्य दरवाजा बंद कर लिया। फिर उसने मेरी ओर देखा, धीमे स्वर में बोली - जो मैं कहूँगी, वो तुम करना।.
मैंने कहा- ओके!
उसने कदम बढ़ाए, मेरी तरफ। शर्ट हाथ में ली, फिर जींस साथ में निकली।.
मैंने अपने कपड़े नीचे रख दिए, जब उसने कहा।.
काम शुरू हो गया मेरा।.
थोड़े वक्त में मैं सिर्फ बनियान और अंडरवियर में था। तब तक रोहिणी के पास सिर्फ ब्रा और पैंटी बची थी।.
वो मेरे होंठ चूमते हुए मेरी बनियान और अंडरवियर उतार चुका था। फिर उसने कहा, मेरी ब्रा और पैंटी भी धीरे से खींचकर नीचे कर दी।.
इस वक्त हम दोनों का सामना ऐसे हुआ, जैसे कपड़े भी झूठ लगने लगे।.
उसकी जाँघों के बीच छिपा हुआ हिस्सा, पूरी तरह से मुलायम था।.
नज़र जब उसकी चूत पर पड़ी, तो गुलाबी रंग देखकर हैरान रह गया।.
रोहिणी ने मोबाइल पर मॉडलिंग के अपने वीडियो मुझे दिखा दिए। बिना कपड़ों के रहकर मैंने उसकी फिल्म की शूटिंग करवाई।.
फिर उसने मेरी कई पोज़ में नंगी तस्वीरें अपने फोन से ली। मैं बिना कपड़ों के ही चलती रही, जैसे कोई आदमी देख रहा हो। उसने यह सब वीडियो में भी रिकॉर्ड कर लिया।.
मैंने सुना, उसके होंठों से आवाज़ निकली। तब वो बोला, थोड़ी ऐसी तस्वीरें ले लो मेरी।.
फोटो लेने की बात हुई तो मैंने अपने फ़ोन से उसकी कई पोज़ में तस्वीरें बना ली।.
फिर रोहिणी ने कैमरा संभाला। हमारे सेक्स के पल अब उसके फ्रेम में आने लगे।.
जब यह सब खत्म हुआ, तो रोहिणी सामने आकर घुटनों के बल बैठ गई। उसके बाद वह मेरा लंड चूसने लगी।.
उस वक्त मैंने पहली बार महसूस किया, कि कोई लड़की मेरा लिंग चुस रही है।.
खुशी लगने लगी थी मुझे, वैसे ही जैसे उसको भी प्रसन्नता मिल रही थी इस काम में।.
उसके बाद रोहिणी की बात सुनकर, हम दोनों ने 69 की मुद्रा अपना ली।.
मुझे याद है, रोहिणी की चूत पर मेरा मुँह था। उधर, उसके होंठ मेरे लंड पर सरगर्म थे।.
थोड़ी देर के बाद रोहिणी मुझे अपने कमरे में ले आई। वहाँ उसने मेरे लंड पर तेल डालकर हल्के हाथों से मालिश शुरू कर दी।.
मैंने उसकी मुस्कान देखी, फिर बिना कुछ कहे उसकी जांघों पर हल्के से तेल लगाया।.
फिर वो बिस्तर पर लेट गई, मुझे ऊपर आने को बोली।.
मेरा लंड अब उसकी चूत पर जम गया था, मैंने वह पोजीशन सेट कर ली थी।.
दोनों पैर जमीन पर, बस इतना ही फैलाव कि सब कुछ सही लगे।.
तैयारी पूरी होने पर उसने कहा - ठोकर मारने का समय आ गया।.
एक ही झटके में मेरा लंड उसकी चूत में समा गया।.
पहली बार कुछ ऐसा हो रहा था, तभी उसकी आँखों में दर्द साफ झलकने लगा।.
रोहिणी चिल्लाई, क्योंकि Xxx टीचर ने फ़क में दर्द पैदा कर दिया। मैंने बिना सोचे अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। फिर मैंने धीमे-धीमे उसे चूमना शुरू कर दिया।.
आंसू धीरे-धीरे रोहिणी की आँखों से बाहर आने लगे।.
आँखों में पानी देखकर मुझे तुरंत एहसास हुआ, धीरे से वो हरकत रोक दी।.
रोहिणी ने सवाल किया, ऐसा क्या हुआ? ठहर गए क्यों? वो चीज़ बाहर क्यों निकाल दी?
फिर मैंने कहा, "तुम्हारी आँखों से आंसू बह रहे थे… इसीलिए मैं खड़ा रह गया।".
रोहिणी मेरी बात सुनकर हँस पड़ी। फिर बोली, "ये खुशी के आँसू हैं," वह मुस्कराई, "तुम आगे बढ़ते रहो।".
रोहिणी ने मुझे समझाया, तब मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया। वो बोली, ज़ोर से हिलाओ मुझे।.
लंबे समय तक कुछ नहीं हुआ। फिर मैंने पेल दिया। वो लम्बे से इंतज़ार कर रही थी। अब चुदाई शुरू हो गई।.
थोड़ी देर में रोहिणी को खेल में मस्ती सूझने लगी। अब वह मुझे जोरदार हिलाने को कहती - आवाज़ में उतार-चढ़ाव आ गया था।.
वह मेरे ऊपर बैठी हुई थी। मैंने तेजी से कमर हिलाना शुरू कर दिया।.
खुशी से दोनों के चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी।.
लंड को भीतर तक खींच लेने के बाद रोहिणी तेजी से आगे-पीछे होने लगी। उसका धक्का डालना ऐसे था, मानो पेट के अंदर तक पहुँचाना चाहती हो।.
थोड़ी देर के बाद रोहिणी का रूप घोड़ी जैसा हो गया। पीठ से लगकर वह मुझे ऐसा करने को बोली।.
पीछे से ड्रिलिंग का स्विच मैंने ऑन कर दिया।.
एक बार हो चुका था कि रोहिणी झड़ गई।.
फच फच फच... कमरा भर में यही आवाज हर तरफ छा गई।.
थोड़ी देर के बाद वह बोला - वह तेल की छोटी शीशी, जो सामने मेकअप टेबल पर पड़ी है, उसे यहाँ ले आओ।.
तेल जब मैं लाया, उसने कुछ बूँदें मेरे लंड पर डालीं। अपनी गांड के छेद पर भी थोड़ा तेल गिरा दिया वो।.
उसने कहा, अब तुम्हारा लंड मेरी गांड में होना चाहिए।.
मैंने उसकी बात सुनी, फिर अपना लंड गांड पर घिसा। थोड़ा सा झटका दिया, और वो अंदर चला गया।.
गांड का छेद इतना तंग था कि रोहिणी चिल्लाकर बोली - आह, धीरे कर यार… मैं कहीं नहीं भाग रही।.
उस समय तक मुझे पूरा नहीं लग रहा था। केवल आधा हिस्सा ही उसके अंदर जा पाया था।.
तकलीफ़ में रोहिणी का शरीर बार-बार हिल रहा था।.
थोड़ी देर के लिए मैंने धीमा कर दिया, ताकि रोहिणी सांस ले पाए।.
उसके सही होते ही मैंने पलटकर तेज़ धक्का दे दिया।.
एक सात इंच का लंबा हिस्सा धीरे-धीरे उसकी पिछली छेद की गहराई में अंदर चला गया।.
रोहिणी एक बार फिर चीख पड़ी - आह मादरचोद… कुछ समझ नहीं आ रहा, भाई की औलाद… ये चूत नहीं, गधा है… इसमें आहिस्ता डाला जाता है।.
उसकी आवाज़ मेरे कानों पर पड़ी तब भी मैंने ध्यान नहीं दिया। हर धक्के के साथ गति बढ़ रही थी, लय तेज हो गई थी।.
थोड़ी देर के बाद उसने भी हंसना शुरू कर दिया।.
थोड़ी देर बाद उसके मुंह से निकला - अब सोफे पर हॉल में प्यार करते हैं।.
दरवाज़े से अंदर कदम रखा।.
मैंने रोहिणी को सोफे पर लिटा दिया, फिर उसकी जांघ ऊपर उठाकर धीमे-धीमे घुस गया।.
एक-दूसरे से अलग ढंग से मुड़े हुए, कई मिनटों तक हरकतें जारी रहीं।.
कई बार हवा में उड़ते हुए पत्तों के साथ वो पेड़ खाली हो गया था।.
खून उसकी चूत से बह रहा था, पीठ के नीचे भी लाल छुआ हुआ था।.
लाल निशान अचानक सोफे के कपड़े पर आ गए। बिस्तर की चादर पर भी वही हुआ।.
थोड़ी देर तक साथ रहने के बाद हम अलग हो गए, नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।.
छत पर चढ़े हम दोनों, मैं तब और रोहिणी।.
उस पास बैठे हुए, रोहिणी ने एक ऊर्जा वाला पेय निकाला। धीरे से ढील में, हमने चार गिलास तक पी लिया।.
खुली हवा में खड़े होकर उसने सिगरेट जलाई, क्योंकि धूम्रपान की आदत थी। कश लगाना शुरू कर दिया।.
एक पल को तो मन में यही हुआ कि क्यों न थोड़ा जोर लगाकर आजमाऊँ।.
सिगरेट मेरे हाथ में थी। वहाँ के झूले पर दोनों बैठे, फिर आपस में जुड़ गए।.
छत पर हवा इतनी तेज़ थी कि कंपकंपी आ रही थी, मगर फिर भी हम दोनों घुटने टेके बैठे थे।.
तपिश में हमारे कपड़े तरबतर हो गए, शायद वो पीली ड्रिंक कुछ ज्यादा ही चढ़ गई थी।.
तेल बह रहा था, इसलिए मशीन से टकराने की आवाज आई।.
रोहिणी के साथ मेरा शारीरिक संबंध चल रहा था।.
फिर वहाँ, सीढ़ियों पर हम दोनों ने एक-दूसरे के साथ सेक्स किया।.
अब तक मेरा पतझड़ में दो बार गिरना हो चुका था।.
तब हम दोनों नीचे उतरे, सोफे पर जाकर बैठ गए।.
रोहिणी के फ़ोन पर अब वो वीडियो चल रहा है।.
एक दिन हम दोनों का ध्यान मोबाइल पर चला गया। वीडियो शुरू हुआ, तभी से हम टकटकी लगाकर देखने लगे।.
एक बार फिर वही हरकतें शुरू हो गईं, जब नीली कहानी पर नज़र थी।.
रात भर हम लोग सेक्स में व्यस्त रहे।.
तकरीबन दो बजे रात का समय हुआ था। उस वक्त मैं लेट चुका था, रोहिणी भी पलंग पर आराम कर रही थी।.
सुबह का समय था। रोहिणी ने प्यार से मेरे होंठों को छू लिया, आँखें खुल गईं।.
हवा सी थी वो, पर मैंने गले लगा लिया।.
उसके बाद हम लोग नहाने के लिए अंदर हिले।.
पहले बाथरूम में घुसे, फिर क्रम से कुछ पल बाद शौचालय के पास खड़े होकर काम शुरू किया। धीरे से नल खोला, इसके बाद पानी की आवाज छिड़कने लगी।.
ऊपर से पानी की बूँदें आकर छूटने लगीं।.
मस्ती से भरा पल था, उनके लिए।.
रोहिणी सबसे पहले उतर गई।.
उसके बाद मैंने रोहिणी से पूछ डाला - जब मेरा निकलने वाला है, तो मैं कहाँ जाऊँगा?
रोहिणी हँसते हुए बोली - पूरी रात चोदते रहे, अब पूछ रहे हो कहाँ उतारना है? ठीक है, इस बार मेरे मुँह में छोड़ दो।.
सुनते ही मैंने अपना लंड रोहिणी की चूत में से बाहर खींच लिया। फिर उसके हाथ झट से आगे बढ़े और वो मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में लपेट चुकी थी।.
उसकी उंगलियाँ धीमे-धीमे मेरे लौड़े पर चल रही थीं।.
अचानक मेरा शरीर सख्त हो गया, जैसे ही मेरे लंड से सफेद मलाई छलककर रोहिणी के मुँह में आने लगी।.
उसके होठों तक पहुँच गया मेरा वीर्य, फिर चेहरे पर भी छिटक गया।.
उसके चूचों पर भी मेरा वीर्य गिर गया था।.
वह सब तरल उसके मुँह में आया। रोहिणी ने हौले से जीभ से साफ किया।.
बाथरूम से निकलते समय पानी की बूंदें अभी भी हमारे बालों से टपक रही थीं।.
हम दोनों ने अपने-अपने नए सिरे से तैयार होकर एक-दूसरे के बिना कपड़ों वाले चित्र भेजे।.
फिर सुबह का खाना खाया, उसके बाद गर्म चाय।.
उसके बाद हमने कई पलों तक एक-दूसरे को गले लगाया… फिर मुझे रोहिणी से जुदा होना पड़ा। घर लौटते समय वादा था दिमाग में - जल्द मिलेंगे।.
फिर भी, हर बार मौका पड़ने पर हम दोनों साथ आ जाते।.
अब तो वह शादी कर चुकी है, और उसके बच्चे का संबंध मुझसे है।.
खुद रोहिणी ने मुझसे कहा था ये बात।.
अभी भी वो मेरे संग ज़बरदस्ती करती रहती है।.
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