मैथ्स ट्यूशन टीचर को घर पर नंगी करके खूब चोदा
एक टीचर मुझे आकर्षित करती थी। उससे पढ़ाई करने का बहाना बना लिया मैंने। एक बार मौका मिला, घर पहुँच गया सवेरे। ध्यान उसकी छाती पर ठहर गया।.
आकास कहलाता हूँ मैं।
लंबाई छह फुट की है, त्वचा का रंग साफ़ उजाला।
छह इंच का होता मेरा उपकरण।
इस कहानी का आग़ाज़ मेरे स्कूल के दिनों से होता है, जब एक भारतीय शिक्षिका के साथ अनुभव ने रास्ता बदल दिया।
हमारे स्कूल की एक अध्यापिका ऐसी थीं, जिनका ज़िक्र मन में बार-बार आता।
कभी-कभी वो पढ़ाने वाली औरत मेरे दिमाग में आ जाती।.
उसके माप थे 36-32-38।
उनके चलने का अंदाज़ ऐसा था कि नज़र चुनौती बन जाती।
उसकी छाती पर मांसलता साफ़ दिख रही थी।
एक तेइस का दिखने वाली महिला, हालांकि उम्र चौंतीस की थी। ऐसी छवि जो किसी परिपक्व महिला की याद दिलाए।!
उस साल मेरी पढ़ाई ग्यारहवीं में हुई थी।
उसकी कक्षा में हम अर्थशास्त्र सीखते थे।
उसके घर से मेरी पढ़ाई का सिलसिला शुरू हो गया।
जैसे ही वो नज़र आते, मेरा खड़ा हो जाता।
हर दिन वो सोच के मैं हाथ पर ज़ोर डालता था।
सुबह के समय मैं वहाँ पहुँच चुका था, बस तीस मिनट पहले ही।
उन्होंने गेट खोला और कहा, “आज इतनी जल्दी कैसे आ गए?”
मैंने जवाब दिया, “मैम, घर पर कोई नहीं था, इसलिए जल्दी आ गया।”
“अच्छा, ठीक है, बैठो,” उन्होंने कहा।
अंदर क़दम रख दिया मैंने।
पास आकर मैम बैठ गईं।
पढ़ाई के बारे में बातचीत शुरू हो गई।.
मगर नज़र गई तो सीधे उनकी छाती की ओर।
ये बात उनकी नज़र से ओझल नहीं हुई।
“क्या देख रहे हो?” मैम ने पूछा।
थर-थर कांपते हुए मैंने कहा, “कुछ भी तो नहीं हुआ, मैम।”
कुछ समय बाद उसने पूछा, "क्या तुम्हारे साथ कोई लड़की नहीं है?"
ठिठक तो गया मैं, पर कह दिया - “नहीं, मैम!”
फिर मैंने कहा, “मुझे अपनी उम्र से बड़ी लड़कियाँ पसंद हैं।”
वे मुस्कराईं।
लगने लगा कि अभी का पल सही हो सकता है।
मैंने हिम्मत करके कहा, “मैम, आप बहुत ज्यादा सेक्सी लगती हैं!”
“शर्म नहीं आती अपनी टीचर से ऐसे बोलते हुए?” उन्होंने कहा।
“सॉरी, मैम, लेकिन जो मुझे लगा, वही बोल दिया!” मैंने जवाब दिया।
बैठ गईं मेरे पास, कहा – “मुझमें क्या सबसे अच्छा लगता है?”
मैंने हिम्मत जुटाकर कहा, “मैम, आपकी गांड बहुत अच्छी लगती है!”
अचानक से वो मुझे छूने लगीं।
हवा में उनकी साँसों का अहसास होने लगा।
उसके होंठों पर मेरे होंठ समा गए, ऐसे कि जैसे कुछ हुआ ही न हो।
मेरा सांस उसके मुँह के पास आया।
खुशी का ठिकाना नहीं था।!
फिर वे हट गईं और बोलीं, “आज का ट्यूशन कैंसिल कर देती हूँ।”
बाकी बच्चों से उसने फ़ोन पर बात कर ली।
इसके बाद मैं वापस उनके होठों पर मुँह ले गया।
मुझे याद है, उसकी जीभ पर मेरा मुँह था। कभी-कभी वो भी मेरे स्पर्श में आती थी।
उसके कमरे की तरफ हम लोग पहुँच गए।
उसकी गर्दन पर मेरा किस था, धीमे-धीमे जीभ फिरने लगी।
उसकी सांसें तेज हो रही थीं, "आह… आह…" कहते हुए।
उसकी छाती पर हाथ रखते हुए मैंने धीरे से दबाव डाला, फिर ब्लाउज़ के बटन खोलने लगा।
सामने फैला था उनकी सफेदियों का दही-दूध।
उसके बाद मैंने सांस लेना छोड़ दिया।
वे बोलीं, “आह… आराम से… आह… ये तुम्हारे ही हैं!”
उसके निप्पल पर मेरे दांतों का छूना हुआ।
वे चीख पड़ीं, “आह! आराम से, दर्द होता है!”
इसके बाद मैं नीचे आया, फिर उनकी सलवार का ड्रॉपर खोल दिया।
अब उनके पास सिर्फ काला अंडरवियर था।
उसकी जांघों के बीच में हल्के से उंगली सरका दी।
पैंटी तरबतर हो चुकी थी।
जब मैंने उसकी पैंटी नीचे की, तो वहाँ बस एक गुलाबी चमक दिखी।
तुरंत मैंने अपनी उंगली उसके भीतर सरका दी।
वे तेज़ साँसें लेने लगीं, “आह… आह… मज़ा आ रहा है… और करो!”
उसकी चूत का स्वाद मुझे पसंद आया, मैंने धीरे से चखा।
इसके बाद मैंने उनकी योनि को जीभ से छुआ।
वे बोलीं, “आह… चाटो… पूरा चाट डालो… अंदर तक अपनी जीभ डाल दो!”
मैंने उसकी योनि पर अपनी जीभ से हलचल की।
कुछ समय के बाद उन्होंने खुद को ऊपर उठाया। मेरे होंठों के पास उनकी जांघें आ गई थीं।
असल में हंसी छूट गई।!
उसकी बत्तम मेरे चेहरे से सट गई, मैं धीमे से उसके आगे को छूता रहा।
अचानक वो मेरे चेहरे के सामने आ गिरीं।
मेरे होंठों तक उसकी रसधार पहुँच गई।
उसने बिस्तर पर आराम किया।
मैंने कहा, “मैम, जो सुख आपने मुझे दिया, वे मुझे भी आपको देना है!”
मैंने हां कही, तो वो नीचे कपड़े समेटकर ले गए।
इसके बाद वो मेरे लंड को अपने मुँह में डालकर चूसने लगीं।
सच कहूं, स्वर्ग जैसा अहसास हो रहा था!
उसके होठ मेरे लिंग के आधार तक खिसकने लगे।
गिरने ही वाला था मैं।
उसके होंठों को पकड़कर मैंने अपना सिर आगे बढ़ाया।
थोड़ी देर के बाद मैं सीधे उनके मुँह में जा गिरा।
एक-एक बूंद तक उसने खत्म कर दिया।
उसके बाद हम दोनों ने बिस्तर पर जगह बना ली।
कुछ समय बाद मेरा लंड ऊपर को उठ गया।
मेरे मन में होने लगी इच्छा, संभोग करने की।
ऊपर चढ़कर मैंने मैम के पास धीरे से लंड रख दिया, उनकी चूत को छूते हुए।
मैंने धक्का लगाया।
मेरा लंड आसानी से मैम की चूत में घुस गया, बस इतना ही कि वहाँ पानी भरा था।
सिसकी छोड़ते हुए मैम बोलीं, "आह..."
थोड़ी देर बाद मुझसे धक्के लगने शुरू हो गए।
अब मम्मी को हंसी छूने लगी।
तब मैंने तेजी पकड़ ली।
मैम बोलीं, “आह… आह… चोदो… और तेज़ चोदो… आह… येस… आह!”
मैंने माँ को कुत्ते की तरह झुका दिया, फिर पीछे से घुसा दिया।
खुशी के मौके थे, हंसी छेड़ने वाली बातें चल रही थीं।
उसके बाल मेरी मुट्ठी में आए, फिर मैं तेज हरकतों के साथ अपना सिर झुकाने लगा।
मैम बोलीं, “आह… चोदो… चोदो… फाड़ दो मेरी चूत को… आज से ये तुम्हारी है!”
तेजी से आगे बढ़ते हुए मैंने उनके बालों को हाथ में लिया, फिर धक्के देना शुरू कर दिया।
फिर मैम बोलीं, “मुझे तुम्हारे लंड की सवारी करनी है!”
उसके बाद मैं वहाँ से हट गया, पलंग पर जाकर लेट गया।
उसका शरीर मेरे ऊपर आ गया, फिर वह मेरे लिंग को अपनी योनि में उतारने लगी।
उसके बाद वो लंड को भीतर घुसा चुकी थी, धीमे-धीमे सेक्स में जुट गई।
फिर वो तेज हो गई, मेरे लंड पर अपने आप को तभी से झोंकते हुए।
चलते समय उनकी कमर हल्के से डोल रही थी, देखने में अजीब तरह का संतुलन था।
वो मेरे हाथों में आए तो फिर कई बार छूटे।
मस्ती का पल था।
उनका सारा गुस्सा मेरे ऊपर आ गिरा।.
फिर भी मेरा लंड सीधा हुआ था।
उसके बाद वो मेरे लिंग पर हर सेकंड तेज़ होती गई, ऐसा लग रहा था जैसे कोई अभिनेत्री हो।!
मैं संभल नहीं पाया, फिर वो होठों तक आ गया, छाती पर भी हाथ पड़ा।
उसके बाद हम दोनों को बिस्तर पर आराम मिला।
फिर से जब-जब अवसर मिला, मौज उठाया हमने।
जब कभी स्कूल में अकेले मिलते, मेरा हाथ उनके गुपचुप में घूम जाता।
मुझे ख़ास मज़ा आता था जब देसी Xx शिक्षिका मेरे चेहरे पर बैठकर सेक्स करती थीं।
मुझे उसकी चूत चखने का लगातार आनंद मिलता था।
अगली कहानी सुनना हो, जहां दो मैडम के साथ मेरा थ्रीसम हुआ, तो कमेंट में लिख दो।
आशा करता हूँ, तुम्हें वो कहानी पसंद आई होगी - जिसमें देसी शिक्षिका के साथ Xx के पल थे।!
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