बस में मिली अजनबी हॉट लड़की को कमरे में खूब चोदा
(पहली मुलाकात में सील तोड़ी, फिर महीने भर चुदाई का
सिलसिला)
नमस्ते, मैं श्याम हूँ। देवास के इलाके में पला-बढ़ा हूँ। उम्र बीस दो साल है, कद पाँच फुट आठ इंच का। लंड की लंबाई छह इं है – जिससे कोई भी लड़की संतुष्ट हो जाए। आज कहानी सच्ची है, बस के अंदर मिली एक अजनबी गर्म लड़की के साथ हुए रिश्ते की।
सुबह गाँव से देवास के लिए निकल पड़ा। बस में जगह पकड़ी, तभी अगले पड़ाव पर एक आकर्षक लड़की भीतर आई। मेरे बगल वाली सीट सुनसान थी, वो वहीं डट गई। हल्की मुस्कान फैली, झिझक धीरे घटने लगी। बस चल पड़ी, और बातचीत आपमें ही शुरू हो गई। बातों-बातों में पता चला, रिश्तेदार के घर एक महीने के लिए जा रही है।
बातें होते-होते मैं धीरे से उसके पास आ गया। वो भी ढीली पड़ गई, तनाव गायब। उसकी गर्माहट ने मेरे लंड को ऊपर उठा दिया, उसे एहसास हो गया। उसकी नजरें बार-बार मेरी पैंट की ओर झुक रही थीं। हौसला जुटाकर मैंने कहा – "तुम बहुत गर्म हो, दिल लग गया तुम पर!" वो मुस्कुरा उठी, इशारे में हाँ कर दिया। फिर नंबर आदान-प्रदान हो गया।
हर मोड़ पे वो मेरे ऊपर झुकती, धीरे से टालती पर खुश थी। मौका पाकर मैंने उसके सीने दबा दिए। उसके रुख से पता चल गया – आज तमंग में है। मैंने कहा – “गोद में आ जा।” बोली – “इधर नहीं, कहीं छुपकर कर लेंगे। देवास में कमरा लेंगे।”
खुशी के मारे मैं उछल पड़ा। उसके गाल पर होठ रख दिए। 2:30 बजे देवास में आ गए। अपने दोस्त के खाली कमरे में उसे ले चला। रास्ते में नाश्ता हुआ, पानी भी पिया। कमरे में घुसते ही दरवाजा बंद कर दिया। पानी पिया, नाश्ता भी किया। फिर धीरे से उसका हाथ पकड़ा, चूमने लगा। गले पर चुंबन लगाया, वो भी जवाब में आगे बढ़ी।
उसने कपड़े उतारना शुरू किया। मैंने उसके स्तन चूसने लगा - नाजुक, मुलायम, थोड़ा दबाव में लाल हो गए। अब दोनों बिल्कुल नंगे थे। मैं छूता रहा, वो भी घबराहट में खो गई। मैंने कहा - "मेरा लिंग चूसो।" पहले झिझकी, फिर धीरे-धीरे तैयार हो गई। जैसे ही उसने मुँह में लिया, एक अजीब सा आनंद हुआ।
पूछा – “पहले कभी चुदाई की?” बोली – “पॉर्न देखी है, चुदाई नहीं की।” मैंने कहा – “आज कर लो, मजा आएगा।” उसे लिटाया, बोला – “आवाज मत करना, पहली बार थोड़ा दर्द होगा।” वो बोली – “तेल लगा लो।” मैंने कहा – “तेरी चूत तो पहले से गीली है, लेकिन ठीक है।” उसने मना कर दिया – “आराम से करना।”
लंड चूत पर रगड़ा गया। वो कराहने लगी - “इतना मत करो… अब तुरंत डाल दो।” धीरे से समाया, होठों के बीच छुआ, फिर एक झटके में आधा भीतर। उसकी चीख निकल गई। मैंने सहलाया, छाती पर मुँह लगाया। थोड़ी देर आधा ही अंदर-बाहर हुआ। फिर जोर से धक्का - पूरा भर दिया। आँखों से आँसू टपके, चूत से खून बहा। बोली - “बस करो, ये बर्दाश्त से बाहर है।”
थोड़ा इंतजार करने पर उसके अंदर मजा आने लगा। मैंने शुरुआत हल्की सी की। फिर पीछे से जुड़ गया, जैसे घोड़ी पर सवार हो। उसकी सांसें तेज हो गई थीं। कई बार उसका दिमाग खो गया। जब मैं छूटने वाला था, तभी बूब्स पर सब उंडेल दिया।
सुबह की धूप में सटकर लेटे थे। आराम किया, फिर नाश्ते की चीजें खाई गईं। उसने पूछा – “इसे एक बार और दोहराएं?” वो हाँ कर बैठी – “शीघ्रता करो, अभी निकलना है।” इसके बाद उसने लंड को मुँह में ले लिया। मैंने भीतर तक धकेल दिया। वो मेरे ऊपर सवार हो गई, फिर झटपट आगे-पीछे होने लगी। मैंने घोड़े की तरह छलांग लगाई। वो बार-बार आवाज करने लगी। दोनों ने ऐसा कमाल महसूस किया।
उसने कपड़े पहन लिए। उसे मैं रिश्तेदार के घर छोड़ आया। बोला, "कल मिलते हैं।" जवाब में वो बोली, "एक महीने तक यहीं रहूँगी, अब तुम मेरे साथी हो... हर पल साथ निभाना।" जब मैंने शादी का ज़िक्र किया, तो बोली, "शादी नहीं चाहिए, सिर्फ शारीरिक संबंध चाहिए।" इस बात पर मेरा चेहरा खुशी से चमक उठा।
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