भाई की साली की अपने मोटे लंड से कुंवारी चुत फाड़ी

Jan 14, 2026 - 12:00
Jan 15, 2026 - 16:50
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भाई की साली की अपने मोटे लंड से कुंवारी चुत फाड़ी

एक दिन मैं भाई के ससुराल पहुँचा। वहाँ मुलाकात हुई उसकी साली से। कुछ हफ्ते बीते, फिर एक शाम उसकी आवाज़ फोन पर आई। धीरे-धीरे बातें जुड़ने लगीं। गपशप में सेक्स के टॉपिक घुस गए।.

मैं राज हूँ, लखनऊ का रहने वाला। परिचय देना शुरू करता हूँ - दोस्तों के बीच।.

उम्र बीस के आखिर में है।.

लंबाई मेरे लंड की काफी होनहार है।.

इसकी लंबाई साढ़े सात इंच की है, वजन में यह तगड़ा भरपूर।.

एक बार अगर कोई लड़की या भाभी मेरे लौड़े से सट जाएगी, तो मेरा मानना है – उसे ये लौड़ा याद रहेगा।.

एक बार की बात है, कॉलेज के दिनों में ऐसा हुआ था।.

एक लड़की को मैं खूब पसंद करता था। इंदू उसका नाम हुआ करता था।.

वो इंदु मेरे भाई की साली थी, हालाँकि मैं जितना सोचता उतना ही घबरा जाता।.

भाई की ससुराल में मैं जब एक दिन पहुँचा।.

मौका मिला तो इंदु से बात हो ही गई, वहां के लोगों ने खासा प्यार दिखाया।.

थोड़ी सी जानकारी मनोविज्ञान की थी मेरे पास। फिर वहीं से हुई शुरुआत इंदु से बात करने की।.

बातचीत कुछ दिनों में सहज हो गई।.

दो दिन मैंने भाई के ससुराल में बिताए, मज़ा आ गया।.

फिर भी, उस बेहतरीन मौके पर मैं इंदु को कुछ शब्द सुना नहीं पाया।.

खूबसूरती से भरपूर है इंदु का रूप।.

तीखे आँखों वाली है, बाल काफी लंबे हैं। चेहरा गोल है, बदन का हाल 32-28-34 में समा है।.

एक झलक मिलते ही सांस थम सी जाती है। आंखें चिपक जाती हैं वहाँ। घटिया खयाल दिमाग में आते हैं। शरीर तन जाता है। कोई भी टटोले बिना नहीं रह पाता। .

कुछ समय बाद वापसी हुई ससुराल से, घर पहुँचते ही मन लगा दिया किताबों में।.

एक दिन किसी अनजाने फोन नंबर से बेल बजी।.

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फोन थामते ही सुन्न रह गया मैं।.

उस आवाज़ में इंदु का स्वर साफ़ सुनाई दे रहा था।.

फिर बातचीत का सिलसिला चल पड़ा, थोड़े समय में ही हम दोनों के बीच जमावट हो गई।.

उस वक्त हम दोनों के उम्र कम थी, फिर धीरे-धीरे गपशप में बातें अधिक निजी होती चली गई।.

कभी-कभी बातें इतनी आगे बढ़ जाती हैं कि रोक पाना मुश्किल हो जाता है। फिर चुप रहने का कोई मतलब नहीं दिखा। सच तो यह था कि वह मुझे अच्छा लगती थी। एक पल ठहरकर, धीरे से बोल पड़ा - मैं तुम्हें पसंद करता हूँ।.

उसको भी मेरे साथ रहना अच्छा लगता था, इसलिए एक दिन उसने कह दिया - मैं तुमसे प्यार करती हूँ।.

लहरों की तरह प्यार धीरे-धीरे बढ़ने लगा। उसके बाद जैसे आग में हवा मिल गई, वासना भड़क उठी।.

उस वक्त हम दोनों के ज़हन में मुलाकात की चिंता सवार हो गई थी, मगर कोई ठिकाना बन ही नहीं रहा था।.

अचानक ख्याल आया – क्यों न दोनों प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दें। इस बहाने मुलाकात का इंतजाम भी हो जाएगा।.

एक बार जब हमें वो ख्याल आया, तुरंत फॉर्म भरने बैठ गए। एक ही शहर के सेंटर पर ठीक-ठाक मान लिया हमने।.

परीक्षा की तारीख एक महीने बाद हो गई।.

उस वक्त तक जब भैया को खबर हुई, तो फिर ससुरजी से बातचीत हुई। धीरे-धीरे अनुमति मिल गई हमें साथ चलने की। एक झंझट था – भैया के पास छुट्टी नहीं थी। वहीं ससुराल में भी कोई इंदु के संग समय नहीं दे पा रहा था।.

तब दोनों के साथ चलने की इजाज़त मिल गयी।.

गाड़ी शाम को छूटने वाली थी।.

सुबह की परीक्षा में ढीला मन से शामिल होने के लिए, हमने ट्रेन से यात्रा की। केंद्र के ठीक बगल में रुकने के लिए एक होटल चुन ली।.

पहुँचकर सीधे होटल में रजिस्ट्रेशन हुआ।.

बाथरूम के अंदर पहुँचते ही ताजगी से भर गया, वापस निकला तो शरीर में एक झनझनाहट थी।.

उस समय तक इंदु किताब खोलकर पढ़ने में जुट चुकी थी।.

इंदु ने कपड़ों की एक छोटी गठरी उठाई। फिर वह सीधे बाथरूम की ओर बढ़ गई।.

बीस मिनट के आसपास बाद जब वो बाहर आई, मैं सिर्फ घूरता रह गया।

एक सफेद, ढीला सा शरट पहने हुए थी वो। अंदर से लाल ब्रा धुंधली-सी नज़र आ रही थी।.

उसके सामने छाती का हिस्सा धीरे से बाहर को आ रहा था। नीचे गुलाबी धारीदार कपड़े में उसकी पिछवाड़ी ऊपर को उठी हुई थी। ऐसा लग रहा था मानो अभी हाथ बढ़ाकर छू दूँ।.

अभी धैर्य रखने की बारी थी।.

बिस्तर पर इंदु का झुकता हुआ शरीर, मैंने सांस रोक ली। धीमे-धीमे बातें चल पड़ीं।.

फिर भी, आँखें अपने आप वो कुछ देखने लगतीं।.

मुस्कान लिए इंदु बोली - क्या नज़र गड़ाए हो?

लजाते हुए मैंने कहा - कोई बात नहीं।!

इंदु के मुँह से हल्की सी हंसी निकल गई।.

उसकी नज़रों में मेरा दर्द झलक रहा था।.

तभी सामने से इंदु आई। गाल पर हल्का सा चुम्बन छोड़कर वह तुरंत पीछे हट गई।.

वो मुस्कान के साथ चुम्बन देकर फिर से बाथरूम की ओर बढ़ गई।.

उसके चुम्बन के बाद मैं पूरी तरह हिल गया, मानो कोई सागर छाती में उतर आया।.

जैसे-तुरंत इंदु के बाथरूम से बाहर कदम रखते ही, मैंने उसे कसकर खींच लिया। सामने से चिपकी वो तनावहीन, नाज़ुक छाती मेरे सीने पर टिक गई। गर्दन के पास आवाज़ बनकर घुली उसकी सांसें, एक झुलसा देने वाली नमी छोड़ गईं।.

जब मैंने उसे छोड़ दिया, तभी उसकी नजरें मेरी आंखों पर ठहर गईं।.

आगे बढ़कर मैंने उसके नम होंठों पर धीमे स्पर्श किया।.

अब इंदु ने हौसला बढ़ाना शुरू कर दिया।.

उसके होंठों पर मेरा दबाव बढ़ गया, मैंने आगे बढ़ते हुए अपनी जीभ उसके भीतर भेज दी।.

तब इंदु ने मेरी जीभ पकड़ी। धीमे-धीमे उसने चूसा शुरू किया।.

मेरा एक हाथ उसके टॉप के ऊपर से ब्रेस्ट पर था, वहीं दूसरा उसकी पिछवाड़ी को निचोड़ रहा था।.

थोड़ी देर में इंदु का सब्र टूटने लगा।.

मैंने अब उसकी चोटी को हटा लिया।.

इंदु लाल ब्रा में दिखी, तो मन कहने लगा कि कुछ पल ठहर जाए। धड़कनें तेज हो उठीं, जैसे सब कुछ भूल जाने की तैयारी हो। गर्दन के पास होंठ पहुँचे, तो सांस थम सी गई।.

उसके बाद वो बिस्तर पर आ गया। मैंने सिर झुकाया, और गले में होंठ चले गए। कान के पीछे भी छुआ, फिर कंधे पर ठहर गए।.

आग जैसी इच्छाओं ने इंदु को पकड़ लिया।.

इसके बाद कुछ ही पलों में उसकी ब्रा मेरे हाथ से अलग हो गई।.

हल्की साँस छोड़ते हुए, इंदु के नग्न, गुलाबी स्तन मेरे सामने आ गए… विशेषतया मखन जैसी नरम।.

हाथों में दूध के पैकेट लिए, मैंने धीमे से चूसना शुरू कियa - पहला, फिर दूसरा।.

मेरा मुँह उसके दूध से भरने की कोशिश में था, पर बस आधा ही जगह घेर पाया।.

सिसकियों की आवाज़ कमरे में फैली हुई थी।.

कभी-कभी मैं उसके निप्पल पर दाँत चला देता, धीरे से काट लेता - इंदु झट से छलांग लगा देती। "आह्ह… राज…"

मेरा मुँह लगातार उसके दोनों स्तनों पर था, कई मिनटों तक। हर पल उसके शरीर में जोश बढ़ता गया।.

थोड़ा और नीचे जाकर मैंने पेट के सहारे धीरे से जीभ घुमाई। फिर वो नाभि तक पहुँच गई, जहाँ सांस की तरह छू गया।.

कमर पर हाथ डालते हुए इंदु ने ऊपर झांका।.

‘उफ्फ्फ …’

जब वह नाभि पर जीभ घुमा रहा था, तो दूसरे हाथ से कमर पकड़े हुए था। मेरे सिर के बाल उसकी मुट्ठी में थे, और वह बार-बार ऊपर से दबाव डाल रही थी।.

लग रहा था कि वो मुझसे ऐसा करने को कह रही है।.

अब इंदु के साथ रहना मुश्किल हो गया था।.

इस बीच मेरा लंड पूरी तरह से ऊपर को उठ गया था।.

लगभग साढ़े सात इंच का मेरा लंबा हिस्सा पूरी तरह खिंचा हुआ था। घंटी की तरह काँप रहा था वो।.

फिर मैंने इंदु की साड़ी को नीचे खींचा, फिर उसकी गहरी जांघ पर होठ फेरे।.

हवा में सिर्फ़ उसकी खुशबू थी, मैं धीरे-धीरे नीचे सरकता गया।.

मेरा सिर उसकी हथेलियों के बीच धँसता जा रहा था।.

इस बार मैंने उसकी पैंटी सरसरी से नीचे कर दिया।.

चाँद जैसे मुँह पर बिना किसी बाल के साफ-सलामत त्वचा।.

घर से बाहर कदम रखने से पहले ही वो चुटकी साफ़ कर चुका था। इस बात का ज़िक्र उसने मेरे सामने बाद में किया।.

मेरा मुँह अब इंदु की चूत से लग गया था।.

एकदम तब, जब मैंने जीभ से उसके दाने को छुआ, इंदु का शरीर झटके से ऊपर उछल पड़ा। वो मेरे सिर को अपने बीच में खींचने लगी, मानो कहीं भी नहीं, सिर्फ उसी के भीतर रहूँ।.

फिर भी मैंने कदम नहीं रोके।.

वह उसकी जांघों की तरफ घूरता, फिर सिर झुकाकर जीभ चलाने लगता।.

लंबे समय तक मैंने उसकी चुत के हिस्सों पर ध्यान दिया।.

हवा में इंदु की सिसकियां तैर रही थीं - आह्ह… राज… बस, रुक जाओ… अब तक हमेशा ऐसे ही करते रहोगे?

अब तो सहन ही नहीं हो रहा था, ये उसकी आवाज़ में साफ़ झलक रहा था।.

मेरा जब चुत चाटने के बीच था, तभी वो मुझे अपनी ओर खींचने लगी।.

मगर सच कहूं, उसकी पीड़ा बढ़ाने में ही मुझे अच्छा लग रहा था।.

थोड़ा रुको, सबसे पहले मुझे बिना कपड़ों के देख लो।!

अचानक सब कुछ बदला, इंदु ने मेरे कपड़ों को हटाना शुरू कर दिया।.

उसके हाथ मेरी शर्ट के किनारे पकड़े हुए थे… धीरे से खींचकर ऊपर उठा दिया। इसके बाद कमर से कपड़ा सरका दियa गया।.

अंडरवियर उतारते वक्त मेरा ऊपर की ओर खड़ा लंड दिक्कत बन गया।.

अंत में वह मेरे अंडरवियर को पूरी ताकत से नीचे खींचकर फेंक दिया।.

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उसकी नज़र पड़ते ही थी साढ़े सात इंच की मोटाई पर, तभी उसका रुख बदल गया।.

उसके मुँह से निकला - हे भगवान… ये कितना विशाल है? इतना उठाना मेरे बस की बात नहीं। पीठ टूट जाएगी, समझदारी से काम लेना पड़ेगा।!

मैं हँसा, बोला - कुछ खास नहीं होगा। पहले मेरा लंड चूस लो।!

शुरू में वो नामंजूर कर देती है पर मैंने जब उसकी चूत में गहरे स्वर में झुककर जीभ घुमाई, इंदु के शरीर में फिर एक झटका सा दौड़ गया।.

अब तक उसका बदन इतना गरम हो गया था कि वह बार-बार पीछे की ओर झुककर मेरे लंड को भीतर घुसाने की कोशिश करने लगी।.

एक बार फिर मैंने कहा - अब नहीं, पर पहले मेरा लंड चूसो।!

झट से इंदु नीचे झुकी, मेरा लंड होठों के बीच आया।.

एकदम से उसके होंठ थरथरा गए। पछतावे में झुकी, फिर अचानक तेजी से चूसने लगी - मानो कई घंटों से इसी का इंतजार कर रही हो।!

दूध को थपथपाते हुए मैं बोला - आज ये काम हम दोनों मिलकर करेंगे।.

वह समझ गई.

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इस बार हम दोनों ने 69 की स्थिति में जगह ले ली।.

मेरा सिर उसकी जांघों के बीच था, तभी उसने मेरा पूरा लंबा हथियार मुँह में ले लिया।.

असल में, मैं ऐसा महसूस कर रहा था, जैसे कोई स्वर्ग में हो।.

कुछ ऐसा महसूस हुआ, मानो समय रुक गया हो।.

इंदु ने मेरा लंड पांच मिनट तक चूसा। उसके बाद दोनों जन्नत की सैर पर निकलने को तैयार थे।.

तब मैंने इंदु को पीठ के बल लिटा दिया। उसकी कमर के नीचे तकिया रख दिया गया, ताकि उसका खाली धड़ ऊपर को उठ जाए।.

मैं धीरे से उस पर सवार हो गया, तभी उसकी जांघें अपने आप फैल गईं।.

जमीन पर घुटने टेककर वह उसकी जांघों के ऊपर अपना हाथ फेरने लगा।.

इंदु के शरीर में हलचल हुई - उसकी सांसें तेज हो गईं। राज, अब थोड़ा और… बस एक पल मत रोकना। धीमे से नहीं, तुरंत शुरू कर दे।!

मेरा शरीर धीरे-धीरे उसके ऊपर आ गया, लंड चूत के किनारे टिक गया, मैंने उसके होंठों को अपने से जोड़ लिया।.

मुझे एहसास था कि जैसे ही वह झटका महसूस करेगी, इंदु ऊंची आवाज़ में चीख सकती थी।.

सिर्फ इतना कहा - डालूँ?

सिसकी भरी आवाज़ में इंदु बोली - हाँ… अभी।!

एक बार मैंने सुपारी को उसके ऊपर रख दिया था।.

इंदु गनगनाने लगी.

एक झटके में तीन इंच भीतर खिसक गया।.

अचानक इंदु को तेज़ हलचल महसूस हुई। दर्द के मारे उसकी आवाज़ ऊपर को उछल गई।.

मैं रुक गया.

थोड़ी देर ठहरकर मैंने अचानक मजबूत धक्का लगा दिया।.

लंबाई भर का मेरा लंड नीचे तक चला गया।.

आश्चर्य में खिंच गई इंदु की पलकें।.

अचानक उसकी आँखें लड़खड़ाने लगीं।.

बिना कदम हिलाए, मैंने पानी की बोतल उठाई। फिर धीरे से उसके चेहरे पर छिड़काव किया।.

इंदु को पानी के छींटे मिलते ही हल्का सा झटका-सा लगा। कमर को धीरे से ऊपर खींचने लगी वह।.

अब तभी समझ में आया कि इंदु को ये सारा नज़ारा कितना पसंद आ रहा है।.

मेरी कमर धीरे-धीरे हिलने लगी, फिर मैंने उसके होंठों से दूर हो लिया।.

अब इंदु कमर को ऊपर-नीचे करती हुई मेरे हर झटके के साथ बिलकुल सिंक में चल रही थी। ‘आह्ह… आह्… राज… तुम और भी तेज़ करो… ऐसे ही जारी रखो… अच्छा लग रहा है’

एक हाथ से उसकी छाती पर दबाव डालते हुए मैं लगातार धक्के दे रहा था।.

वह ऊपर की तरफ देखकर चीख उठी - आह, ऐसे ही रखो मुझे… धीमा मत होना। मैं तुम्हारे लिए हमेशा इसी तरह फैली रहूँगी… वो सब कुछ अंदर भर दो, जहाँ तक जा सके… ओह्ह्ह!

तेजी से आगे बढ़ने लगा, हर एक झटके के साथ वो पूरा साढ़े सात इंच का मोटा डंडा गहराई तक चला जा रहा था।.

थोड़ी देर के बाद स्थिति में फेरबदल हुआ।.

जब मैं पीछे को झटका देकर जमीन पर आ गिरा, तभी वह मेरे साथ हुई।.

उसका वजन मेरी जांघों पर था, धीमे हिलते स्तन मेरी छाती को छू रहे थे।.

मेरी मुट्ठियों में उसकी कमर थी। छलांग लगाते हुए वह सीधा ऊपर नीचे हो रही थी।.

मगर सच कहूं, तो वो पल बस ऐसे ही खुशियों से भर गया।.

उसके नितंबों को मेरी मुट्ठियों में दबाए हुए था, अचानक गुदा में उंगली सरका देता।.

तकरीबन दस मिनट बाद उसे तमाम हरकतों से ऊब महसूस होने लगी।.

थोड़ी देर रुककर, मैंने इंदु के साथ डॉगी स्टाइल में संबंध बनाया।.

मुझे उसकी जांघें दिखीं, सब कुछ भूल गया।.

उसकी चूत में मेरा लंड गहराई तक समा गया।.

कमर के हिलने से ठप-ठप की ध्वनि चारों ओर फैल गई।.

आवाज़ निकलते ही मज़ा बढ़ गया था।.

चलती हुई इंदु के चूतड़ देख मैं बहुत खुश हो गया।.

इस बीच में इंदु का गिरना दूसरी बार हो चुका था।.

मुझे भी पहुँचना था, अब।.

मैंने तेज़ धक्का दिया, लंड अंदर तक पहुँचा, फिर इंदु की चूत में गर्म झरना छोड़ दिया।.

इंदु ने बस इतना कहा था - मैं गोली खा लूँगी। उसके भीतर तुम्हारा वीर्य महसूस होना चाहिए था।!

गर्म तरल को अंदर महसूस कर इंदु के चेहरे पर समाधि-सी छा गई।.

थोड़ी देर बाद हम दोनों पलंग पर फैल गए।.

उठने का दिमाग कहता था, मगर पैर जवाब नहीं दे रहे थे।.

उसकी मदद करते हुए मैंने उसे खड़ा किया।.

खून के निशानों को बिस्तर पर देखकर हड़बड़ा उठी।.

समझदारी से बताया मैंने - जब पहली बार सील टूटती है, खून थोड़ा सा आता है, घबराने की जगह नहीं।.

फिर वो कुछ हल्का महसूस करने लगा।.

फिर धीरे से हम दोनों खुले आसमान के नीचे एक-दूसरे से चिपक गए।.

उसकी खुली पीठ पर हथेली फेरते हुए महसूस हुआ, जैसे बारिश के बाद की धरती। इतनी चुपचाप गर्माहट थी कि आवाज़ भी डर गई।.

थोड़ी देर बाद, फिर से घूमने की इच्छा हुई।.

बार इसमें मैंने इंदु को गोद में उठा लिया, घुटनों के नीचे हाथ सरकाते हुए चूतड़ को पकड़ा, फिर लंड को एक झटके में भीतर धकेल दिया।.

गले में हाथ डालते हुए इंदु ने पकड़ मजबूत कर ली।.

मेरी तेज़ गति से वो हिलने लगी।.

इंदु को उस अंदाज में छूए जाने से एक अजीब सी खुशी होने लगी। "आह्ह… राज… ऐसे ही चलते रहो," वह बड़बड़ाई, सिसकते हुए। फिर धीमे से, "छोड़ देना मत, मेरे राजा…" उसकी आवाज गहरे अंधेरे में घुल गई।

थोड़ी देर में इंदु सहम गई। उसके ऐसे हिलने के बाद मैं भी अपने आप ढल गया।.

उसके बिना कपड़ों के बाथरूम जाते पल, मुझे लगा जैसे उसकी गांड पर हाथ डाल दूं। ऐसा मन किया, सीधा और साफ।

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