ससुराल में मोटे चुचे वाली साली की शानदार चुदाई

Desisexkahaniya

Jan 3, 2026 - 13:05
Jan 9, 2026 - 17:27
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ससुराल में मोटे चुचे वाली साली की शानदार चुदाई

शादी में जब मेरे साले की बीवी नज़र आई, मन ही मन उसी पल फिसल गया। कभी मौका मिला, तो चुपचाप अपनी ख्वाहिश झट से पूरी कर ली। इधर उधर की बातें होती रहीं…

उस वक्त मैं चौबीस का था, बस अट्ठाइस साल पहले। शादी के समय सुधा को ऊपर उन्नीस लग रहे थे। कमल, जो उसका छोटा भाई है, तब तेरह का था।.

पंद्रह साल तक शादीशुदा रहने के बाद कमल का विवाह हुआ। उसकी धर्मपत्नी की उम्र बस इक्कीस साल थी। मैंसे अठारह साल कम की, मतलब लगभग आधी उम्र जितना अंतर। जैसे ही नज़र पड़ी, कमल की पत्नी नीलम पर दिल ढल गया मेरा।.

शिरडी के लिए प्रोग्राम था। ससुर का फोन आया, बताया कि कमल-नीलम जा रहे हैं। उधर से आवाज़ आई - तुम लोग भी चलो, दर्शन कर लेना। कमल की शादी के पंद्रह दिन बाद था मौका। आँखें हों तो अंधे को भी रास्ता दिखे। जहां इच्छा, वहीं उपाय भी होता है।.

बस थोड़ी झिझक के बाद, हाँ कह दिया मैंने। कमल से बातचीत हुई, फिर आठ दिन का प्लान तय हो गया।.

पाँचवें दिन की सुबह थी। नीलम के पैर में हल्की चोट थी, इसलिए वह साथ नहीं जा पायी। हम तीनों - मैं, सुधा और कमल - बाहर निकल पड़े।.

थोड़े देर बाद मैं होटल वापस आ गया, बहाना बनाकर। कमल और सुधा लौटे तब तक नीलम थोड़ी बेचैन जरूर थी, फिर भी मैंने उसके साथ संभोग कर लिया था। खुशकिस्मती से, उसने इस बात का जिक्र न तो कमल से कियa न सुधा से।.

उस रात, खाने के ठीक पहले, मैंने कमल और सुधा को व्हिस्की मिली कोल्ड ड्रिंक परोसी। बस इतने में दोनों थोड़ी देर बाद झपकी लेने लगे।.

उस रात मैंने नीलम के साथ दो बार सेक्स किया, फिर वह मुझमें पूरी तरह खो गई। मौका मिलते ही ससुराल जाने के बहाने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता, ऐसा कई बार हुआ।.

ऐसा चलता रहा। समय बदला, फिर नीलम ने एक लड़की को जन्म दिया - उसका नाम हनी पड़ा। नीलम कहती है, वो मेरी बच्ची है, लेकिन कमल सोचता है कि हनी उसकी है।.

अब हनी की उम्र अठारह साल है, पढ़ाई में बी.कॉम चल रहा है।.

कुछ दिन पहले, सालों बाद मैं ससुराल पहुँचा। तभी हनी को देखते ही मेरा दिमाग धुंधला गया। वो 18 साल की थी, आलिया भट्ट जैसी लग रही थी। उम्र में वो मुझसे ढाई गुना छोटी थी। फिर भी, मन में उसके साथ सोने का ख्याल आने लगा। एक-एक पल ऐसे विचार मेरे दिमाग में घूमने लगे। .

सुबह-शाम शिलाजीत के दो कैप्सूल लेना मैंने तभी शुरू किया, हनी के बारे में सोचकर लंड तन जाता था। कच्ची कली को चोदते हुए अगर ढीला पड़ जाऊं, तो फिर? वैसे भी हर बार ऐसा नहीं होना चाहिए।.

एक दिन पड़े-पड़े सोच रहा था कि हनी के साथ क्या करूँ, तभी अचानक नीलम कमरे में घुस आई। उससे पहले कई बार संबंध बन चुका था मेरा, फिर भी आज वो ज़्यादा आकर्षक लगी। दरवाज़ा बंद करते ही वो मेरे सीने से चिपक गई, मुखर हुई - हनी कोचिंग में है, अब तक हम जो चाहें कर सकते हैं।.

उसके होठ मेरे होठों से टकराए, मेरा हाथ उसकी जांघ पर फिसल गया। कुछ पल वहाँ सहलाते रहने के बाद, उसकी लाल सिल्क की सलवार कमर से नीचे खिंच गई। भीगी पैन्टी धीरे से नीचे खिसकी, मेरी उँगली उसके अंदर घुस गई।.

उसके अंदर उंगली डालते ही नीलम झटके से छलांग लगा दी। मेरे आगे कहने पर कुर्ता खोला, ब्रा भी नीचे गिरा दी। उसका स्तन मेरे होंठों में घुल गया। वो मेरी पीठ पर हथेली घुमा रही थी, पहले कपड़े उधेड़े, फिर नीचे का भी सब हटा दिया।.

दोनों के कपड़े पूरे उतर चुके थे। मेरा हाथ उसकी जांघ पर से होता हुआ आगे बढ़ रहा था, वहीं उसकी उंगलियाँ मेरे शरीर के ऊपर तनाव भरती हुई फिसल रही थीं।.

खड़े-खड़े ड्रेसिंग टेबल के पास फोरप्ले में जुटे, हम दोनों बिलकुल उत्तेजित हो चुके थे। बेड की ओर बढ़ आए।.

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हम एक-दूसरे के साथ बिस्तर पर उलझे हुए थे, चुंबन करते हुए। अचानक मैंने शरीर को घुमाया, 69 की स्थिति में। अब मेरी जीभ नीलम की चूत पर धीरे-धीरे फिसल रही थी। वहीं उसके हाथ मेरे लंड पर थे, उसने मुँह में ले लिया, ऊपर-नीचे करने लगी।.

एकदम खड़ा हो चुका था लंड, मूसल-सा सख्त। उठकर मैंने नीलम को चढ़ाया पीठ के बल। वहाँ उसकी जांघें मोड़ दी मैंने घुटनों से, फिर झुका अंदर।.

मैंने नीलम के चूत के लबों को फैलाया, अपने लंड को उसके भीतर धकेल दिया। नीलम की कमर पर हाथ जमा लिया मैंने।.

मेरा लंड नीलम की चूत में घुसने ही वाला था कि अचानक दरवाज़े की घंटी बज उठी।.

हड्डी कबाब में? मैंने पूछा, ये कौन आ गया।?

अचानक नीलम खड़ी हो गई। उसने कहा - ये हनी है, ऐसे दरवाज़े पर धमाल मचाना सिर्फ़ वही कर सकता है।.

नीलम ने फटाफट कपड़े पहने, फिर दरवाज़ा खोलने उठी। बाथरूम में मैं टी-शर्ट और लोअर लेकर घुसा। कपड़े बदलकर बाहर आते ही हनी दिखाई दी। उधर मेरे साथ क.ल.प.ड़. का मामला हो चुका था। .

खाना खत्म हुआ, हम सभी के साथ में।.

जब हनी कमरे की ओर बढ़ी, मैंने नीलम की तरफ देखकर कहा - अब बस, जो छूटा था, पूरा कर लो।.

सिर हिलाते हुए नीलम बोली, नहीं। हनी तो अभी घर पर मौजूद है। चलने से पहले मुझे दंत चिकित्सक के पास जाना भी है, अब समय निकट आ गया है।.

थोड़ी देर के बाद नीलम डेंटिस्ट के पास निकल गई, मैं अपने कमरे की तरफ। कमरे में पहुंचते ही एकदम से हनी का ख्याल आया, फिर वो कमरा ढूढने चल दिया मेरा पैर।.

ऊपर के कमरे में हनी रहती थी। वहाँ पहुँचकर दरवाज़े पर नज़र पड़ी, तो पता चला कि अंदर से बंद है। खोलने ही वाला था कि एक आवाज़ ने शरीर ठिठका दिया। कान लगाकर सुना - लैपटॉप पर कुछ ऐसा चल रहा था जिसे हनी देख रही थी। दस्तक दी, फिर झट से भीतर कदम रख दिया।.

अचानक दिख जाने पर हनी घबरा उठी, लैपटॉप तुरंत बंद करने को हाथ डाला। गड़बड़ में कई बटन एक साथ दब गए, ऐसे में स्क्रीन जल्दी बंद नहीं हुई।.

उठते हुए हनी की बाजू पकड़कर मैंने पूछा - ये किस चीज़ को घूर रही हो?

आँखें झुकाए हनी स्तब्ध खड़ी थी।.

“कब से देख रही हो, यह सब?”

हनी मौन रही.

“बोलो हनी, कब से देख रही हो?”

इस बार हनी ने आंखें झुकाकर धीमे स्वर में कहा - पिछले 15 से 20 दिनों से। शगुन नाम की लड़की मेरी क्लास में है, मोबाइल पर चीजें दिखाती रहती है वो। उसी के जरिए मुझे मिला है।.

“तुम लोग सिर्फ देखते हो या कुछ करते भी हो?”

“शगुन के घर में उसका चाचा रहता है, वो अपने चाचा के साथ करती है.”

“और तुम?”

“मैं ऊंगली से कर लेती हूँ.”

“उसके घर में चाचा रहता है और वो चाचा के साथ करती है. तुम्हारे घर में भी तो फूफा रहता है, तुम क्यों उंगली से करती हो? चलो आओ बेड पर.”

मैंने हनी का हाथ थामा, फिर उसे बिस्तर की ओर खींचा। कपड़े - स्कर्ट, ब्लाउज, ब्रा, पैंटी - एक-एक कर सोफे पर जा गिरे। अब वह बिल्कुल नंगी थी।.

हनी कांप रही थी, डर से भरी हुई। मैंने धीरे से उसकी पीठ पर हाथ फेरा, गर्दन को छुआ, फिर होंठों को चूम लिया। मेरा लंड तना हुआ था, जैसे किसी डोरी में खिंचा हो। उसकी उंगलियां मेरे लंड पर पड़ीं, मैंने मौका नहीं गंवाया और उसके होंठों पर हमला कर दिया।.

थोड़ी देर तक चुप रहने के बाद मैंने हनी से पूछ लिया। तुम्हें कैसा लग रहा है? कहीं डर तो नहीं लग रहा है?

हनी सिर झुकाए खड़ी रही। मैंने कुछ देर इंतजार किया। फिर धीरे से बोला - ठीक है, कोई बात नहीं। आज कुछ भी नहीं करेंगे। अब तुम्हारे कपड़े पहनने का वक्त है।.

हनी धीरे से उठी। सोफे की ओर बढ़ी, कपड़े उठाने के इरादे से। मैंने उसका हाथ छुआ। रुक गया वो। फिर मैंने कहा - कुछ खास नहीं, सिर्फ एक बार मेरा लंड चूस लेना।.

मैंने धीरे से अपनी पैंट नीचे की ओर खिसकाया। फिर लड़खड़ाते हुए लंबे धब्बेदार लंड को बाहर निकाला। हनी के होठों तक पहुंचते-पहुंचते वो थोड़ा सा कांपा। उसकी सांसें गर्म थीं। मैंने आगे बढ़कर उसके मुंह में घुसा दियa।.

हनी ने आहिस्ता-आहिस्ता मेरा लंड मुंह में ले लिया। मैंने जवाब में उसकी छातियों पर हथेलियां फेरनी शुरू कर दीं। कुछ पल बाद उसका घबरापन गायब होने लगा। इस बीच मेरी उंगलियां उसकी चूत के किनारे पहुंच गईं। वहां के नरम बाल मुझे और भड़काने लगे।.

हनी से मैंने कहा, तुमने मेरा लंड चूस लिया है। फिर मैं तुम्हारी चूत न चाटूं, क्यों?

फिर मैंने हनी की चूत पर जीभ से खेलना शुरू कर दियa। थोड़ी देर के लिए हम दोनों ने 69 की मुद्रा में समय बिताया।.

अब मंज़िल मेरे क़दम चूमने वाली थी। पत्ता डालते हुए बोला - इतना सब किया है, अब लड़की की गोद में चुम्मा भी खा लेने दे, तू बस आराम से लेटी रह।.

एक झटके में हनी के ड्रेसिंग टेबल से कोल्ड क्रीम की शीशी हाथ में आई। उसकी चूत पर क्रीम लगाते हुए मैंने धीरे-धीरे मालिश शुरू की। फिर कुछ क्रीम अपने लंड के सिरे पर भी घिस दी। इसके बाद मैं उसकी टाँगों के बीच खिसक गया।.

उसकी माँ नीलम के मजबूत ढांचे के आगे हनी कद्द से कमजोर लगती थी। पर मैं जानता था, कमजोर दिखने वाली लड़की भी पूरा घण्टा सह लेती है। उसकी टांगें मेरे कंधे पर टिकी थीं।

हनी की कमर पकड़कर मैंने उसे करीब खींच लिया, तभी उसके चूतड़ बिस्तर से ऊपर उठ गए। लण्ड हाथ में लेकर मैंने उसकी चूत पर घिसटाव शुरू किया, फिर वो धीरे-धीरे मस्त होने लगी। उसकी आँखों में चुदाई की भूख देखकर मैंने उसके चूतड़ों के नीचे तकिया ठूंस दिया, इसके बाद अपना लोअर दोहराकर तकिये पर फैला दिया।.

एक तरफ़ हनी की जांघें फैली थीं, मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। धीमे-धीमे आगे बढ़कर मैंने अपना लंड उसकी चुत के भीतर घुसा दिया। जैसे ही मैंने दबाव बढ़ाया, सिरा अंदर तक चला गया। उसके होंठ मेरे होंठों से चिपके रहे, जैसे कुछ न हो रहा हो।.

हनी चिल्लाना चाहती थी, मगर मेरे होंठ उसके मुँह पर ऐसे टिके थे। धीमे-धीमे दबाव बढ़ा, फिर मैंने आधा लंड उसकी चूत में ठूस दिया। भले ही जोर लगा रहा था, अब वो अंदर नहीं जा रहा था। तभी मैंने उसके होंठ छोड़े, सीधा हुआ, कमर पकड़ी, और आधे लंड को अंदर-बाहर करने लगा।.

थोड़ी देर तक कुछ नहीं हुआ। फिर वैसे ही अपना लंड बाहर निकाला, ऊपर और क्रीम लगा दी। इधर उंगली पर भी क्रीम लगाकर हनी की चूत में घुसा दिया। गुलाबी, सूजी हुई चूत जैसे डबल रोटी की तरह फैल रही थी। टुकड़े-टुकड़े होने का वक्त अब बस कुछ पल दूर था।.

उसके मुंह पर सुपारा रखकर तेजी से धकेला, तो टप्प की आवाज हुई और सुपारा अंदर चला गया। दबाव डालते ही आधा लंड अपनी जगह पर जा पहुंचा। हनी की कमर थामकर अंदर-बाहर करते हुए एक बार झटका दिया, तो पूरा लंड उसकी चूत में समा गया।.

हनी के चिल्लाने की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि पलभर को मुझे भी लगा कुछ ग़लत है। फिर भी, अब पीछे हटने में कोई वजह नज़र नहीं आ रही थी।.

आँखों से पानी गिर रहा था हनी का, मैंने उसके चेहरे से नमी हटा दी। कह दिया - अब ठीक है, जो होना जरूरी था, वो हो गया। ऐसा होता है जब कोई बंद चीज खुलती है, थोड़ा झटका लगता है, फिर सब कुछ हल्का सा लगने लगता है। इधर देख, अब शांति से बैठ जा।.

इतना कहकर मैंने हनी पर धीमेपन से झुकना शुरू किया। उसकी पहली बार की तप्तता से मेरा लंड लाल हो गया था। अच्छा हुआ, हनी अब आराम से महसूस कर रही थी।.

हनी के साथ प्रेम करते हुए मैंने उसके स्तनों के छोरों से छेड़छाड़ जारी रखी। निकट आते हुए विस्फोट के समय सिर्फ एक सवाल था – बाहर छोड़ दूँ या भीतर, और फिर उसे गर्भनिरोधक गोली देकर धोखा दूँ।.

एकदम सही लग रहा था दूसरा रास्ता। कंधों पर हनी के पैर आए, मैं जोर से धकेलने लगा। हर झटके के साथ, लड़का सख्त होता गया। फिर वो पल नजदीक आया, जब सब कुछ बाहर निकलने वाला था।

हनी के भाव उमड़ आए, वह अपनी तलवार हिलाकर बोली - फूफा जी, पीटो... और जोरदार। थपकते रहिए फूफा, ऐसे ही जारी रखिए। तेज, और तेज।.

एकदम छोटे से पल में, जैसे ही लंड का सिरा फूलकर मोटा हो गया वो इतना अंदर-बाहर हो रहा था कि हनी को झटका सा लगा। उसकी सांस फूलने लगी। तभी उसके मुँह से निकला - फूफा जी, अब बस कर दीजिए। धीरे से सिसकते हुए बोली, मैं खत्म हो गई, सच में खत्म।.

जैसे ही लण्ड से पानी का फव्वारा बाहर आया, मेरी ट्रेन और तेज़ हो गई। पूरा खाली होने के बाद मैं थककर हनी के ऊपर ढह गया।.

उसके अंदर मेरा लंड अब भी था, शिलाजीत के कारण सख्ती बरकरार थी। हनी के ऊपर पड़े-पड़े खयाल आया - एक ओर 63 साल का आदमी, दूसरी ओर 18 साल की नाजुक उम्र। मेरा वजन था 110 किलो, उसका शायद 50 के आसपास। फिर भी हनी ने हौसले से चुदवाई, झिझक नहीं दिखाई।.

थोड़ी देर हनी के ऊपर लेटे रहने के बाद मैं सीधा हो गया। उसकी कमर को पकड़कर, मैंने धीमे-धीमे आगे-पीछे हिलना शुरू कर दिया। जब मेरा लंड फिर से सख्त होने लगा, तो मैंने उसकी छाती के निपल चूस लिए।.

कहाँ से आया पता नहीं, लेकिन उमड़ता जोश मुझे फिर से चोदने के मूड में ला दिया। एक हाथ चूचियों को चूस रहा था, वहीं दूसरी तरफ लंड अन्दर-बाहर हो रहा था।.

अब हनी को घोड़ी बनाकर मैं उसके पीछे हो गया। फिर धीरे से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। जैसे ही लंड अंदर गया, मैंने चोदना शुरू कर दिया। मैं जितना आगे बढ़ता, हनी उतना ही पीछे हटकर झटका देती। ऐसे में दोनों तरफ से धक्के लगे, तो मैं चरम सीमा पर पहुंच गया। फिर मेरे लंड से एक बार फिर पानी की तरह छलक निकला, जिससे हनी की चूत पूरी तरह भर गई।.

अब तक हम सब नहाकर अपने-अपने कमरों में आ गए थे, बस इतना ही वक्त रहा था नीलम के डॉक्टर के पास जाने का। खाने में मुझे नीलम का पराठा चाहिए, वैसे हनी को पिज्जा पसंद है। जब भी मौका मिला, कहीं घूमने का नया प्लान तय हो जाएगा - थोड़ा अलग, थोड़ा अनजाना।!

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