भैया की साली करिश्मा की धमाकेदार चुदाई

Jan 2, 2026 - 13:56
Jan 13, 2026 - 19:45
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भैया की साली करिश्मा की धमाकेदार चुदाई

(शादी में नजरें मिलीं, घर आने पर सील तोड़कर खूब पेला)

हैलो दोस्त, मैं कार्तिक हूँ। कानपुर, उत्तर प्रदेश में रहता हूँ, उम्र एकबीस साल है। आज कुछ ऐसा बताऊँगा जो मेरे साथ हुआ – बड़े भैया की साली करिश्मा के साथ उनका पहला पल। करीब उन्नीस साल की थी वो। शरीर का आकार 28-26-30, छोटे स्तन पर फिर भी तनाव में, कमर संकरी, पिछवाड़ा गोल। उसकी छवि इतनी आकर्षक थी कि हर नौजवान का ध्यान खींचती। गोरी त्वचा, लंबे बाल, आँखें चौड़ी - एक झलक में सब कुछ बता देती थी।

शुरुआत हुई भैया के तिलक से। बारात से पहले ये रस्म थी। मैं पहुँचा, और मेरी नजर सीधे करिश्मा पर टिक गई। वो साड़ी में बैठी थी, पल्लू थोड़ा हटा हुआ, जिसमें उसके छोटे-छोटे पर नमाया सीने की झलक दिख रही थी। मैं ऐसे ताकता रहा, मानो समय ठहर गया हो। उसने महसूस किया, झेंप गई, फिर हल्के से हँस दिया। अंदर से ख्याल आया - बस, ये तो बढ़िया लग रही है।!

खाने का समय हुआ तब तिलक खत्म हुआ। लाइन में जगह बना रहा था मैं, उधर से वो आ गई। आँखें मिल गईं ऐसे जैसे कुछ पहले से तय हो। मैंने कह दिया हाय, वो मुस्कुराई और बोली - “आप भैया के छोटे भाई हो न?” बातचीत चल पड़ी, धीरे-धीरे नाम पूछा मैंने। थोड़ी मस्ती हुई, एक दूसरे पर। जाने लगी तो बोली - “शादी में अवश्य पहुँचना।” दिल में डर था, पर सोचा - अब घड़ी-घड़ी शादी का इंतजार लगेगा।

दुल्हा अपने साथियों के साथ पहुँच गया। उधर, करिश्मा लाल रंग के लहंगे में खड़ी थी। ऊपर से छोटा ब्लाउज था। कमर ऐसी थी, जैसे हवा को चीर सकती है। उसकी नाभि दिख रही थी। आँखें वहीं ठहर गईं। अंदर, एक धमाल मच गया। थोड़ी देर बाद वो मेरे पास आई। "हाय," बोली। मैंने भी जवाब दिया। कुछ बातें हुईं। फोटो लेने का बहाना किया। उसने कुछ पोज दिए। फिर नंबर माँगा। कहा, "तस्वीरें भेज दूँगा।"

बात शादी के बाद शुरू हुई। पहले साधारण गपशप, फिर धीरे-धीरे मस्ती बढ़ने लगी। एक दिन उसने पूछा - "क्या तुम्हारा BF है?" मैंने कहा - "नहीं है।" मजाक में कह दिया - "फिर जीजा के भाई को ही बना लो।" वो बोली - "अगर चाहूँ तो बना भी लूँ।" बातचीत आगे बढ़कर ‘आई लव यू’ तक पहुँच गई। अब बातें थोड़ी गर्म होने लगीं। मैंने कहा - "अगर आई तो चूत देनी पड़ेगी।" उसने जवाब दिया - "जब भी टाइम मिले, चोद लेना, लेकिन सील बंद रखना… ढील में।"

अचानक वो दिन आ धमका। करिश्मा घर में दस्तक दे गई। सबसे हाथ मिलाया, मेरे कमरे में झांकी – थोड़ा प्यार भी हुआ। भाभी को पहले से खबर थी सारी। चौथे दिन मम्मी-पापा गाँव चले गए। मैंने भाभी को बोला – “भैया के साथ बाहर टहल आओ।” भाभी मुस्कुराई – “समझदार बन गए हो, करिश्मा अभी छोटी है... उसे जल्दी दुखी मत करना।”

भैया-भाभी बाहर निकले। मैं किचन में था – करिश्मा खाना बना रही थी। पीछे से घेर लिया, स्तन दबाए। वो बोली – "छोड़ दो..." मैंने कहा – "आज चुदाई करनी है।" वो झिझकी। चुंबन किया, टी-शर्ट और लोअर उतारे। ब्रा और पैंटी में भी अच्छी लग रही थी। उठाकर कमरे में ले गया। ब्रा-पैंटी उतारी – पूरी नंगी। मैं भी नंगा। लिंग उसके मुँह में डाला। पहले मना किया, फिर चूसने लगी। मैंने मुँह में धकेला।

69 की स्थिति में हम पहुँचे। मैंने उसकी चूत चाटना शुरू कियa, जिससे वह संवेदना में आ गई और अपना रस छोड़ बैठी। मेरा भी उत्तेजना से खत्म हो गया, तो उसने मेरा सब कुछ मुँह में ले लिया।

उंगलियाँ फिर से चूत में, इतनी तंग जगह कि एक और घुसाना मुश्किल। वो पसीने से तर, आवाज़ कांपते हुए बोली - “खींचकर तोड़ दो… पूरा बिखरा दो।”

तेल लगा दिया। डंडा सही किया, धीरे-धीरे भीतर घुसाया, खून आया। चीख पड़ी वो। मैंने मुंह चूमा, स्तन चूसे। फिर एक और झटका – आधा ही जा पाया अंदर। रोने लगी – "छोड़ दो..." मैं थम गया। दर्द कम हुआ तो खुद ही पिछवाड़ा ऊपर उठाने लगी।

थर्राते हाथों से उसने कहा - "छोड़ दे..." मैं रुका नहीं। एकदम गहरे तक पहुंच गया। आवाजें उठने लगीं, धीमी फिर तेज। वह खुद बढ़ने लगी - "जोर लगा," "पूरा घोंप दे।" घंटे के बीच में भी ऐसा लगा जैसे टाइम रुक गया। दो बार उसके हिस्से का छूट गया। मेरा भी छूटा, भीतर ही भीतर।

थकने के बाद वो लिपट गए। जब लंड बाहर निकाला, तो उस पर खून था। उसने मुँह में लिया, धीरे-धीरे साफ कर दिया।

उसके बाद चेहरे पर मारा – वो तरल पदार्थ निगल गई। कपड़े उतारकर सो गए।

शाम को भाभी का फ़ोन आया। करिश्मा उठ ही नहीं पा रही थी। मैंने उसका हाथ पकड़कर बाथरूम तक पहुँचाया। वहाँ सब साफ़ किया। एक गोली दी, फिर बिस्तर पर लिटा दिया।

अगले दिन सुबह भैया जिम के लिए निकल पड़े। किचन में मैंने करिश्मा को ऊपर से ढक लिया। तभी भाभी वहाँ आ गईं – “इसमें क्या छुपा रखा है?” पल भर बाद हँसते हुए बोलीं – “जो करना है, कर लो।” मैंने उसे घोड़ी की तरह बनाया, फिर उछाल दिया। बाद में दस-बीस मिनट में दोनों धड़ाम से नीचे गिरे।

अगले पल भाभी के कमरे में। वो बोलीं, "इतनी सुबह-सुबह?" करिश्मा ने अपनी गीली चूची उँगली से छुआया। जैसे ही भाभी ने टटोला, तरल बाहर आया। धीरे-धीरे उनकी सांस तेज हुई - "अब मेरी बारी"। मैंने उन्हें भी अंदर घुसाया।

हर बार करिश्मा के आने पर मज़ा दोगुना हो जाता। कभी-कभी मेरे साथ, कभी भाभी के संग। वो बोली, "साले का घटा फिर निकले, ऐसा धमाल कौन?"

अगर कहानी पसंद आई हो, तो अपना ख्याल टिप्पणी में लिख देना। भैया की साली के साथ उसकी पहली बार की घटना कुछ ऐसी थी, जिसने सबकुछ बदल दिया।



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