ट्रक ड्राईवर से एनल सेक्स
एनल सेक्स में मेरी जबरदस्त दिलचस्पी है। गांड मरवाना मुझे काफी पसंद है। एक बार ट्रक में लिफ्ट लेनी पड़ी थी। उस वक्त ड्राइवर के साथ यही हुआ। कैसे हुआ, आगे पढ़िए।!
अरे, मैं स्वप्निल हूँ। अमरावती में मेरा घर है। अब कुछ ऐसा बताऊंगा जो मेरे साथ हुआ। पीठ के नीचे उस तरह का अहसास मुझे खींचता है। ये घटना चालीस दिन पुरानी है। लंबे वक्त तक कुछ नहीं हुआ था।.
एक काम के सिलसिले में मैं वर्धा जा पहुँचा। वापसी में रात हो चली थी। कार अचानक से बीच रास्ते में ठप्प हो गई। घबराहट छा गई। सड़क के किनारे गाड़ी रखकर मैंने इधर-उधर नज़र दौड़ाई। अमरावती उस वक्त से महज 34 किलोमीटर दूर था।.
बस गुज़रते रहे, मैं हाथ उठाता तो कोई भी रुकने का सोच नहीं रहा था।.
अचानक से सड़क पर एक ट्रक दिखा। हाथ उठाकर मैंने ड्राइवर को ध्यान दिलाया। गाड़ी धीमी हुई, फिर रुक गई। सांस छोटी-छोटी चल रही थी, पर अब घबराहट खत्म हुई।.
मेरी तरफ़ देखकर उसने सवाल किया - आखिर क्या बात है?
उसके सामने मेरी परेशानी की बात आ गई।.
मुझे लगा कि मशीन सुधार पाऊंगा, पर ड्राइवर बोला - इसे ठीक करना मुमकिन नहीं। फिर भी अगर तुम्हें मेरे साथ जाना है, तो मैं तुम्हें आगे कहीं उतार दूंगा।.
जान जा रही थी। मैंने कार ताला लगाया, फिर उसके ट्रक में चढ़ गया।.
उस ट्रक चालक की उम्र पचपन के आसपास थी। धड़ भारी था, मजबूत दिखता था। कुछ ही देर में ऐसा लगने लगा कि शायद वो मेरी तले में अपना लंड घुसा दे। सुना था, ट्रक वाले अक्सर क्लीनर की गांड मार लेते हैं।.
आँखें उसकी ओर मुड़ीं। ट्रक के भीतर सिर्फ वही एकला था। पास वाली सीट पर मैं ढह गया। चल पड़ा वो आगे।.
दोनों ट्रक के अंदर आराम से बैठे थे। कुछ दूर जाने पर उसने गाड़ी रोक ली। उसने मेरी ओर झाँका, फिर छोटी उंगली ऊपर उठाई। वह बाहर निकला, पहिये के पास खड़ा हो गया। अब वह शौच करने लगा… मैं उसे घूरने लगा। .
उसी पल उसने मेरी ओर नज़र डाली, फिर झट से हंसते हुए लंड हिलाकर ट्रक में लौट गया।.
उसकी मुस्कान थी। सिर मेरी ओर घूमा। फिर लंड हिला दिया। बस, सब कुछ समझ आ गया था।.
एक लड़का मिलने आ रहा था। मैंने सोचा, क्यों पहल करूं? गपशप शुरू हो गई। मेरे दिमाग में सिर्फ वो चीज़ घूम रही थी। इसी बीच, मैं उसकी ओर ताकता रहा, बातें करते हुए।.
एक बातचीत से पता चला - वो इरफान था।.
उसने अचानक कहा - इतना क्यों घूर रहा है? सिर्फ देखता रहेगा क्या पूरा वक्त? चाहे तो कदम बढ़ा।.
झट से मैंने आँखें नीची कर लीं।.
लुंगी नीचे सरक गई। कुछ भी नहीं था उसके अंदर, बस इतना ही। एक झटके में आँख से संकेत मिला, फिर खींच लिया मुझे पास। पैर खुद-ब-खुद चल पड़े, जैसे कोई डोरी खींच रही हो।.
उसने मेरे सिर को पकड़ा। धीमे से अपनी तरफ खींचा। फिर कहा - अब इसे मुँह में ले लो।.
उसका लंड मेरे होंठों तक पहुँचते ही, मैंने सिर झुकाकर चूसना शुरू कर दिया।.
वो ट्रक चला रहा था, मौज में डूबा हुआ। मेरा सिर उसकी गोद में था, नाक से सांस लेते हुए मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया। धीमे-धीमे उसे अच्छा लगने लगा। उसके होठों से आवाजें फूट पड़ीं - ‘आहहह… उउह… हाह…’ - बिना रोकथाम के।.
थोड़ी देर में उसने सिर पर हाथ डाल दिया, फिर मेरे मुँह में छलांग लगा दी। मैंने चूसा हुआ लंड बाहर निकाला, जोर की खांसी आई। मेरे अंदर तक वो गर्म द्रव फैल गया। रस भरा मुँह से मैंने सब कुछ बाहर निकाल दिया।.
इरफान ने मेरी तरफ देखकर कहा - सुन, लंड को अच्छी तरह चाटकर साफ कर देना।.
मैं वापस उसके लिंग पर अपनी जुबान फिरने लगा।.
फिर अचानक वह ट्रक को सड़क के किनारे रोकने लगा, मेरे कपड़े उतारने लगा। कुछ ही क्षणों में मैं पूरी तरह बिना कपड़ों के था, जबकि वह स्वयं भी ऐसा ही बन चुका था।.
उसने फिर से मुझे घोड़ी बताया, इसके बाद मेरी पिछवाड़ी को जीभ से नम करने लगा। हल्के हाथों से मेरे पीछे के हिस्से पर थूक फैलाते हुए वह धीरे-धीरे आगे बढ़ गया।.
इरफान - अबे, तेरी गांड बहुत जकड़ी हुई है… ऐसा लगता है, कोई चीज़ उसमें घुसे हुए काफी समय हो गया।.
एक न मिला ऐसा आदमी, जो मेरी खुशी का ध्यान रख पाता।.
तुम्हें पता है, इरफान बोला - आज मेरा लंड संभाल ले। वह कहने लगा, तुझे खूब सारा मज़ा दूंगा।.
एक तेज़ धक्के के साथ उसने अपनी मोटी लंबाई मेरे पिछवाड़े में धँसा दी। सात इंच का वो हथियार तीन इं चौड़ाई लिए भीतर खिसकता गया। अचानक इतना बड़ा आकार महसूस कर आवाज़ मेरे गले से निकल गई।.
ओह… फाड़ दी तुमने… ऐसा लग रहा हूँ मैं… सावधानी से करो अब… चिढ़ रहा है दर्द।.
आखिरकार उसने कोई पूछताछ किए बिना तेजी से धक्का दे दिया। चीखने के बजाय मेरे आँसू खुद-ब-खुद बहने लगे, इतना अधिक दर्द था।.
साले इरफान… गधे के पिल्ले, तुझे गांड में डंका चाहिए था न? फिर रोया क्यों बहनचोद… ले, जो देना है वो दे दूंगा। चीखता रह, जितना मन चाहे चिल्ला ले। पर आज लंड बाहर तभी निकलेगा जब कम पूरा हो जाएगा। कोई तुझे बचाने नहीं आएगा, समझ।.
वह तेजी से मेरे पीछे आगे-पीछे हो रहा था। धीरे-धीरे मुझे एक तरह की सुकून महसूस होने लगी। मैंने भी उसके लिंग को अपने अंदर बिना किसी झिझक के उतार लिया।.
लगभग पंद्रह मिनट के बाद अचानक उसकी चाल तेज हो गई, फिर वो सीधा मेरे पिछवाड़े में घुस गया।.
उसने धीरे से अपना लंड मेरी गांड से बाहर निकाला। हंसते हुए तुरंत बोला - तेरी तो फट चुकी है, देख इधर… पूरा होल बन गया है यार।.
अब मुझे बेहतर महसूस होने लगा। हंसने का मन किया, मैं भी धीरे-धीरे हँस पड़ा।.
एकदम अचानक वो बोला - अबे और मार डाल यार…इतने सालों के बाद किसी ने इतनी मजबूत छड़ी महसूस कराई।.
इरफान – अच्छा मेरे साथ… रुको पलभर, मैं तुम्हें एक बार फिर छूऊँगा… तुम ठहरो… मुझे पेशाब आ गई है… मैं जल्दी लौटता हूँ।.
ठहरो… मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ। अकेले रहने से मन घबराता है।.
इरफान- आ जा.
बिल्कुल नंगे पैर हम ट्रक से नीचे आए। एक किनारे जाकर वो झाड़ी में बैठ गया, पेशाब करने लगा।.
खड़ा था मैं वहीं... तभी आवाज़ आई, पास आने को कहा। कदम रखते ही उसने हाथ बढ़ाए, लंबाई सहलाई और धीरे से मुँह में ले लिया। फिर चूसने लगा, बिना कुछ बोले।.
खेलते हुए मुस्कुरा रहा है इरफ़ान - क्या बात है?
गांड मरवाने से मुझे ख़ुशी मिलती है।.
हंसते हुए उसके मुँह से निकला - अच्छा, तू तो बिलकुल गांडू निकला।.
फिर उसने अपनी गांड साफ की, खड़ा हो गया। एक मिनट तक नहीं बीता था कि उसने मेरे सिर को पकड़ लिया, मेरे मुँह में अपना लंड ठूस दिया। मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया। वो मेरे मुँह को जोर-जोर से चोदने लगा।.
उसने मुझे ट्रक के पहिए के सहारे खड़ा किया। पीछे आया, लंड घुसाया और तेजी से हिलने लगा।.
लगभग पंद्रह मिनट तक वह मेरे अंदर आया-गया, बाद में फिर से मेरे ही पिछवाड़े में खत्म हो गया।.
अब तक कितनी रात हो चुकी है, इरफान बोला। फटापस से ट्रक में ही लेट जाओ। पलक झपकते नहीं, सुबह अमरावती पहुंच जाएगा तू।.
हाँ, अच्छा हुआ।.
पीछे की सीट पर बिस्तर बना लिया, दोनों ने। उसकी आँखें बंद हो गईं, मेरी खुली रह गईं। शरीरों पर कपड़े नहीं, सिर्फ अंधेरा ढके था।.
अचानक मैंने अपने शरीर पर हथेली घुमाई। हथेली गुदा तक पहुँचते ही एहसास हुआ - छेद बहुत ढीला था, और वहाँ से इरफान का स्खलन धीरे-धीरे बाहर आ रहा था। उस पानी को उंगली से छुआ, फिर मैंने उसे जीभ से चख लिया।.
मुझे लगने लगा कि फिर से एनल सेक्स करूँ।.
थोड़ी देर बाद मैंने देखा, इरफान की आँखें बंद थीं। उसका लंड सिकुड़ा हुआ था, धीरे से मैंने उसे मुँह में ले लिया। फिर शुरू कर दिया चूसना। पाँच मिनट के भीतर ही वो तन गया।.
उसकी पीठ ज़मीन पर थी। मैंने धीरे से उसके ऊपर घुटने टिकाए, फिर अपने शरीर को नीचे उतारा। गर्मी महसूस हुई, जब मैंने पूरा छेद खुद में ले लिया। फिर मैं ऊपर-नीचे हिलने लगा, बिना रुके। सांसें तेज़ हो गई थीं, इसलिए मैंने आगे झुककर उसके मुंह को छुआ। ठीक उसी पल उसकी आंखें खुल गईं - जैसे कुछ सुनाई दिया हो।.
इरफान - अब तक तेरी प्यास नहीं बुझी? मैंने तुझे दो बार खड़ा किया। तू हर औरत से ज्यादा लत में डूबा है।.
हाँ चाचा, मारो मेरी पीठ… अच्छा लग रहा है। कभी तुम्हारे जैसा डंडा मिलेगा, ऐसा कुछ पता नहीं। .
सुनते ही चचा ने तल से धक्का देना शुरू कर दियa। आधे घंटे तक ऐसे ही चलता रहा, फिर मैं पीठ के बल लेट गया। उन्होंने मेरे पैर कंधे पर उठा लिए। अब वो मेरी गांड में लंड डालकर जोर-जोर से चोदने लगे।.
अंधेरे में ट्रक के पीछे आवाजें उठ रही थीं। लगभग बीस मिनट बाद वो मेरे अंदर ही खत्म हो गया। इसके बाद चुपचाप नींद आ गई।.
अगली सुबह जैसे ही आँख खुली, चाचा ने वो काम फिर से कियa। बाद में तेजी से कपड़े पहने गए, और फिर उसने गाड़ी का इंजन जल्दी से चालू कर दिया।.
इरफ़ान – तूने मुझे खूब मस्त किया… जो लड़खड़ाहट तेरी हरकत से आई, पहले कभी किसी और के साथ ऐसा नहीं हुआ।.
वो मेरा नंबर लेकर चली गई।.
हर बार जब वो अमरावती के पास होता है, मेरा फ़ोन आ जाता है। फिर दोनों साथ में नई बातों में खो जाते हैं, धीमे-धीमे रात गुज़र जाती है।.
तुम्हें मेरी ऐसी हरकत पसंद आएगी।!
आपकी उषा रांड
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