teen aadamiyon ke beech kuchh hua jahaan sabakuchh apane aap ghatit ho gaya
भाई के साथ एक नौजवान भी मौजूद था, जो पहली बार ऐसे माहौल में था। एक व्यक्ति मेरे पीछे था, दूसरा उसके पीछे जुड़ गया। धीरे-धीरे सब कुछ आगे बढ़ता गया, बिना किसी बाधा के।.
अरे भई, ये कहानी सुनो। मैं हूँ अनुज, और बता रहा एक ऐसा पल जब डर लगा था।.
उस समय तक आपने मेरे भाई श्री की ओर से ये बातें सुनी थीं।
भ्राता श्री द्वारा अज्ञानी दर्शन को दीक्षा
पढ़ा होगा तुमने वो कहानी। मुझे भी पढ़ने लगी थी धीरे-धीरे, फिर एक दिन ऐसा हुआ कि बस नंगे ही पढ़ने लगा। वीडियो बनाकर उन्हें भेज देता, कभी रोक नहीं पाया।.
इस बार कुछ ऐसा था जो अमन चौधरी की कहानी में फर्क साफ़ दिखा रहा था।.
मन में एक तरह से खींचाव पैदा हो गया था। लंबे हथियारों वाला, ढीठ स्वभाव का नौजवान। उसकी छवि आँखों के सामने घूम रही थी। गुलाबी ठुड्डी, अटपटे अंदाज में चलता हुआ। कल्पना करते ही लगा, मिलना जरूरी है।.
आग लगा देने वाली कहानी थी, जिसमें उनकी तस्वीर भी शामिल थी।!
उसी हफ्ते एक सम्मेलन के दौरान उनका शहर आना हुआ। अमन ने मस्ती करने को कहा।.
शायद अमन को भी मेरा वीडियो दिखा चुके थे, सहमति मिल गई होगी।.
लड्डू तभी से मन में कूद रहे थे, जब थ्रीसम का मज़ाकिया पल आया।!
इस बार मन ने कहा, भ्राता श्री की पसंद के हिसाब से झांटे लगवा दूँ। समय था तो सोच लिया। हालाँकि साफ-सुथरा रखने की आदत है मुझे।.
एक ऐसा दिन भी आया, मैं मैसूर में था। तुरंत संदेश छोड़ा, पीच इमोजी के साथ, बस इतना कि पहुंच गया हूं।.
उसी पल उनका संदेश मिल चुका था। बाहें खींचे हुए उनका रूप, और शाम को आने का पता।!
थोड़ी देर गेहूं के रंग की छत वाले कमरे में बिताने के बाद, पानी के झरने जैसी शौचालय की धुंधली आवाज़ सुनाई दी।.
इसके बाद कोई और संदेश आया। उसमें कहा गया कि अमन भी जुड़ना चाहता है।.
अब सारे अवसर मेरी इच्छा पूरी होने के हो गए।.
उस रात खाने के लिए मैंने दोनों को गेस्ट हाउस पर रख लिया, तभी तो वक्त जुड़ेगा।.
चाय लेकर नागराज पहुँच चुका था, वो गेस्ट हाउस का केयरटेकर।.
तीन आदमियों के साथ खाने पर चलने की बात मैंने उससे कह दी।.
छह बजे शाम को भ्राता श्री की गाड़ी मेहमान घर के सामने आकर ठहर गई।.
अमन चौधरी वहाँ खड़ा था, उसके साथ। एक ऐसा लड़का, जिसकी त्वचा पर नमी छलक रही थी। हल्की मूंछों ने ऊपरी होंठ को सजा रखा था। सुनहरे रोए ठोड़ी पर फैले हुए थे। चेहरा बचपन की सादगी लिए हुए था।.
पीली शर्ट उसकी काली जींस के साथ मिली थी।.
उसी बेफ़िक्री की बात हो रही है, जिसे भ्राता श्री ने अपने किस्से में छुआ था।.
उसने कार से निकलते हुए कहा, तो हैलो चाचा।!
उसके पास जाकर मैंने भाई श्री को आलिंगन देते हुए हाय बोला।.
उसकी बाँहों में समाते ही मैंने महसूस किया, वो मेरे गोल-चौड़े कमर के निचले हिस्से को छू रहे थे। फिर हल्के से थपथपा दिया, जैसे किसी पुरानी आदत का हिस्सा हो।.
अचानक मैंने अमन को सीने से लगा लिया। उसकी आँखों में झांकते हुए, ऐसा लगा जैसे कोई नया सवाल चमक रहा हो।.
कमरे के अंदर पहुँच चुके हैं हम।.
भ्राता श्री ने हम दोनों - मुझे व अमन को - ज़ोर से चूम लिया। उनके मुख से निकला, "अरे अनुज... ऑनलाइन चुदवाते-चुवाते गांड का आनंद ऐसा छा गया कि मस्ती छलक उठती है। हर बार फ़ोटो देखता हूँ, प्रीकम बहने लगता है!"!
मैंने कहा - भाई, ये सब तुम्हारी वजह से होता है। तुम्हारी बातें पढ़कर मेरा भी दिमाग घूम जाता है। क्यों अमन! उन चाचा जी का तो जवाब ही नहीं, ऐसा लगता है तुम्हें कैसा लगता है? ओई, तेरा लंड तो ऊपर उठ गया हे लड़के!
अमन लाल हो गया, उसकी आवाज़ काँपती थी - फिर बोला, "याद है वो वीडियो... अंकल का... सेक्स साइट पर।"!
क्या बात है… क्या तुम भी रेगुलर पढ़ते हो? वाकई अच्छी जगह है।!
बातचीत चल रही थी, बहन के हाथ मेरी कमर पर था। वो शांति के उदय का नज़ारा कर रहे थे।.
तभी डोरबेल बजी.
चाय का कप हाथ में लिए नागराज वहीं खड़ा था। उसकी नजर सड़क पर थी, जहाँ से सर आए थे। पलक झपकते उसने कह दियa - मैंने तुरंत पहचान लिया था। इसलिए चाय बना ली।.
थैंक्यू नागराज, तुमने सच में अच्छा किया। हम लोग खुद मेस में डिनर पर नौ बजे तक पहुँच जाएंगे।.
अभी वह चला था कि भाई साहब ने अमन की ओर आंख घुमाई। फिर बोल पड़े - यार, तुझे पता है, अंकल को जानवरों के बारे में भी गहरा ज्ञान है!
शुरू किया उसने शर्ट निकालना।.
आंखों में चमक लिए अमन ने तुरंत शर्ट-जींस उतारी। पलक झपकते ही वह उनके पास पहुँच गया।.
इतना देखकर कौन समझदार कपड़े पहने रखता… मैंने सब कुछ उतार फेंका।.
उन दोनों ने मेरी चिकनी गांड और बूब्स पर नज़र डाली, फिर धीरे से अपना अंडरवियर उतार लिया।.
हल्के से खींचकर पास बुलाया भ्राता श्री ने। आँखें घूमीं मेरे चेहरे के हर कोने पर। छोटी दाढ़ी जो लगभग पंद्रह दिन की थी, उसे छुआ उन्होंने धीरे से।.
उसने कहा - अरे अनुज, मैं सच कह रहा था न, ऐसे होते पर लंबाई कमाल दिखती है… तुम्हारा तेरह सेंटीमीटर चौड़ाई में ढाई सेंटीमीटर का होकर भी आकर्षण बढ़ा रहा है!
मेरे होंठों पर उसके होंठ आ गए।.
उधर मेरी तरफ से पीठ किसी को दिख रही थी। वो आदमी, जिसकी चौड़ाई-ऊंचाई कुछ 16×3 सेमी के आसपास थी, अंदर घुसने के लिए बेचैन नजर आया।.
भाई श्री ने उसे खींच लिया। फिर कमर पर हल्की सी थपथपाहट करते हुए बोले - अंकल की गांड पर मेरा अधिकार पहले आता है, तेरा अधिकार मेरे ऊपर है। अगर तू इन पर पहले हावी हो जाएगा, तो मेरा मज़ा खराब हो जाएगा!
उसका तरीका देखकर मन में खुशी हुई, साथ ही एहसास ने रंग बदल लिया। धीरे-धीरे लंबे होते और मोटे पड़ते दो लंड मेरी गर्म चूत में जाने वाले थे।.
अमन ने भ्राता श्री के लंड को पकड़ा, फिर धीरे-धीरे चूसने लगा। मानो कोई सॉफ्टी आइसक्रीम हाथ में आ गई हो। वह लंबाई में 14×2.5 सेमी का हो चुका था, और ऊपर की ओर 90 से 110 डिग्री झुकाव लिए खड़ा था।.
उसकी गर्दन पर सिकुड़ती हुई नसें थीं। मेरी सांसों के बीच एक चिपचिपा सा अहसास फैला। आवाज़ भरी खामोशी में टूटती ड्रॉप्स की धड़कन थी।.
अच्छा नहीं लगता मुझे ओरल सेक्स, पर फिर भी मैंने जीभ से नरमाहट महसूस करते हुए शिश्नमुंड को चूसना शुरू कर दिया, ऊपर से प्रीकम का खट्टा-खारा स्वाद आया।.
चूत के अम्लीय माहौल को संतुलित करने के लिए प्रीकम का pH 10 होता है। यह मान 7 के करीब पहुँचाने में सहायता करता है। फिर भी, गांड में जलन पैदा कर सकता है। ऐसे में चूसने से नरमी आती है। वहीं, नमी बढ़ाने में भी यह योगदान देता है।.
भ्राता श्री का लंड अब पूरा तैयार हो चुका था, मेरी गांड उसे भीतर आमंत्रित करने को बेकरार थी।.
हल्के से कमर हिली।.
वो मेरे भाई थे, जब वह मुझे बेचैन देखा तो उठाकर पलंग पर लटका दिया।.
उसके बाद वो मेरी गांड पर क्रीम लगाने लगे, साथ ही अपने लंड पर भी।.
ऊपर से झुकते हुए उसने मेरी टांगों को खींचा। पीठ के बल लेटे मैंने महसूस किया वो चीज़ मेरे अंदर घुस गई।.
गहरी सांस के बीच में, लंड धीमे से फचाक में खिसक गया।!
मेरे पास इसकी तैयारी पहले हो चुकी थी। पहले के दिनों ने सिखा दिया था - गांड लंड़ उठाने में कोई बच्चा नहीं था मैं, किसी चूत से कम नहीं।.
एक बड़ी त्रासदी हुई थी, मगर उसमें से कुछ अच्छा भी निकला।.
एक हफ्ते तक रोज बटप्लग डालने से मलद्वार की लचीलापन इतना बढ़ गया कि 20 से 24 सेमी लंबा, 3.5 सेमी चौड़ा लिंग भी खून बहाए बिना अंदर घुस सकता।.
भाई जी अब लगातार वार कर रहे थे, जबकि मैं स्वर्ग के चहलकदमी पर निकला हुआ था।.
मेरे होंठों से आवाजें फूट रही थीं - वाह, भ्राता श्री… मुझे और दो पल दो… ओ ला ला… तेजी से धक्के लगाओ!
तभी, अमन ने क्रीम मलकर धीरे से लिंग पर हाथ फेरा।.
पांच मिनट के आसपास ही भाई ने कहा - जल्दी से मेरे पिछवाड़े में घुसा दे, अमन।!
वे बोलने लगे, मेरे ऊपर झुक गए, कमर से पकड़कर धीमे दाखिल हुए।.
उसकी पीठ के निचले हिस्से पर मैंने धीरे से क्रीम लगा दी, दो उंगलियां इस्तेमाल करके।.
लौड़ा नितंबों में आटकते ही अमन ने धक्का दिया। एक आह के साथ वो बीच में फंस गए, जैसे कोई सैंडविच हो।.
मस्ती का पैमाना दोगुना हो गया था।!
उसके बिना कुछ कहे, दो मिनट में ही सब कुछ छलक पड़ा। गर्मजोशी लबों तक न पहुंची, रास्ते में ही फैल गई।.
जैसे ही वह हिला, उसका लंड अपने आप बाहर निकल पड़ा।.
तब तक अमन को धक्के मारे जा रहे थे।.
थोड़ी देर में स्थिति बदलने के बाद वह शीघ्र ही चरम सुख महसूस करने लगा।.
उसके शरीर को हल्का सा झटका लगा। फिर वह बेसुध हो गया। अब तक जमा सारा दबाव एक साथ बाहर आ गया। भ्राता श्री के पीछे के हिस्से में हर चीज़ उतर गई।.
युवावस्था का असर होता है, इसमें कोई शक नहीं।!
उसके वीर्य छलकने के तुरंत बाद ही, 12×2.5 सेमी का डंडा बाहर झाँक पड़ा। धीरे-धीरे वो फिर से सूजकर 16–17×3.5 सेमी के आकार में आ गया।!
बिस्तर पर आराम से लेटे हुए, भ्राता श्री हांफते हुए मेरा वीडियो बनाने लगे। उसके बाद अमन का भी फ़िल्माया।.
अब अमन ने मेरे कमर पकड़ लिया, फिर सब होता गया।.
उसने मेरी तरफ झुकते हुए अपने हाथ से लंड को सहलाया। फिर धीमे से मेरी गांड में घुसा दिया, जो पहले से ढीली थी।!
थोड़ा दर्द हुआ शुरू में, फिर क्रीम लगाते-लगाते आराम मिला।.
आवाज़ें आने लगीं - ऊ आ आ… वाउ, बहुत अच्छा… फच फच! - एक के बाद एक।.
अमन की आवाज़ ऊपर की ओर उठी - वाह, अनुज चाचा… ये सब देखकर दिल खुश हो गया!
वह साढ़े छह मिनट तक ऐसे ही चलता रहा। पिछली बार जब भ्राता श्री को पूरा किया था, तब कुछ देर के लिए खत्म हो गया था सब।.
अंत में वो लम्हा आ धमका। मेरी खूबसूरत बुट से उसका सामान ख़ुश हो उठा!
इस बीच मेरे लंड ने चार बार ऐसा किया कि गर्म लावा निकल पड़ा, और तौलिया हर बार उसे सोखता रहा।.
अब भ्राता श्री के वीडियो की रिकॉर्डिंग खत्म हो चुकी।.
थ्रीसम के बाद भ्राता श्री का लंड एक बार फिर ऊपर उठ आया। इसके बाद वो अमन की कसी हुई गांड में पांच मिनट तक घूसते रहे, धक्के लगाकर।.
अब तो अमन हुआ एक मजबूत खिलाड़ी, उसकी पढ़ाई के बाद।.
इसके बाद सभी ने मिलकर नहाया। किसी ने किसी के स्तनों पर हाथ फेरा, कोई कमर पर ठहर गया। बिना कपड़ों की तस्वीरें खींची गईं, एक दूसरे की ओर देखते हुए।.
शाम के करीब नौ बजने वाले थे। खाना खाने हम मेस की ओर चल पड़े।.
भ्राता श्री के मुख से हमें 'सदा सुहागन रहो' की बधाई मिली, उसके बाद अमन ने एक उछलते चुंबन के साथ प्रस्थान किया।.
खुशी मिली इस कहानी को तैयार करके, अगला हिस्सा आपके भीगे हुए ज़िद्दी लंडों के बीच घटेगा।.
डॉ कामेश
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