अनजान अंकल ने मेरी गांड फाड़ दी

JaiJai
Jan 14, 2026 - 12:07
Jan 21, 2026 - 15:41
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अनजान अंकल ने मेरी गांड फाड़ दी

कहानी में मैं लड़कियों तरह दिखता हूँ। निप्पल व गुदा का रंग गुलाबी है। सिनेमा हॉल के शौचालय में एक बार किसी चाचा को हाथ से खेलते देख लिया था।.
अरे भई, मैं आदित्य हूँ। मध्य प्रदेश में रहता हूँ।.
एक उम्र है मेरी, उन्नीस साल की।.
एक बात जान लेना चाहिए। मेरे शरीर के बारे में कुछ डिटेल्स पहले ही समझ लेना अच्छा रहेगा।.
शरीर बहुत पतला है। त्वचा काफी हल्की, लगभग सफेद। सिर के अलावा जहाँ-कहीं नजर डालूँ, कोई बाल नहीं दिखता।.
गुलाबी हैं मेरे निप्पल, साथ ही एनस का रंग भी।.
ऊँचाई मेरी पांच फुट दस इंच की है, वहीं चेहरा ऐसा जैसे किसी लड़की का हो।.
गांड मेरी भी एक लड़की की तरह बिल्कुल साफ है।.
इस कहानी का वक्त वो था, जब मैं अभी-अभी जवान हुआ था।.
एक बार की बात है, मैं सिर्फ लड़कों की ओर आकर्षित होता था। धीरे-धीरे पता चला कि लड़कियों के प्रति भी मन में कशिश है।.
कभी-कभी मैं ऐसे कपड़े पहनना चाहता था जो सबके लिए नहीं होते।.
अकेले में रहते हुए मैं बाथरूम चला जाता। वहाँ पहुँचकर बहन के ब्रा-पैंटी पहन लेता। फिर गांड में पेन धीरे से घुसा देतa।.
गांड चुदवाने की इच्छा कई बार दिमाग में आई।.
फिर भी, ये सोचकर घबराहट होती कि कहीं खुल न जाए - शर्म का मारा रह जाऊंगा।.
इसलिए मैं इसे कभी किसी से शेयर नहीं करता था।.
उस दिन सुबह से मन में बस एक ही ख्याल था। फेवरेट फिल्म का प्रीमियर आखिरकार आ गया था। मल्टीप्लेक्स जाना तय था, कोई ऑप्शन नहीं था।.
जब मैंने उनसे बात की, तो मेरे माता-पिता सहमत हो गए।.
एक-दो दोस्तों को फ़ोन किया, ताकि साथ में चलें। अकेलेपन से बच जाऊं।.
फिर भी कोई तैयार नहीं हुआ।.
तब भी जब वो मेरी पसंदीदा फिल्म थी, मन बन गया कि घर से निकलकर सिनेमाघर पहुँचूँगा।.
सुबह के आठ बजे, मैंने घर से कदम रखा।.
सिनेमा घर में फिल्म देखने के लिए मैं मुख्य शहर के मॉल पहुँचा।.
दो घंटे बाद ही मैं वहां पहुँच सका।.
तुरंत टिकट लेने के बाद मैं फ़िल्म पर ध्यान देने लगा।.
एक बजे फिल्म खत्म हुई, और मन में उठा सवाल - आगे कौन सा रास्ता?
उस दिन मैंने अपने मम्मी-पापा से कहा था कि शाम नौ बजे तक घर पहुँच जाऊँगा।.
घूमते-घूमते मॉल के अंदर मैं थोड़ी देर रुक गया।.
अचानक मेरे पेट में तेज दबाव महसूस हुआ।.
चौथी मंजिल पर स्नानघर की ओर कदम तेज़ किया, वहीं जहाँ खाद्य सामग्री के ठिआव हुआ करते थे।.
कुछ लोग ही मौजूद थे।.
उस जगह पहुँचते ही मैंने भीतर कदम रखा। वहाँ किसी के बैठे होने का पता चला। एक आदमी पहले से मौजूद था।.
शायद वो पचास के आसपास का हो।.
उसकी कद-काठी में भारीपन था। सिर से पैर तक सब कुछ गहरे रंग का।.
उसकी उंगलियाँ स्क्रीन पर फिसल रही थीं। आँखें झपकना भूल गई थीं कहीं पीछे। धीमे-धीमे हाथ ने अपना रफ्तार बढ़ाया।.
हो सकता है उसने दरवाज़ा बंद करना छोड़ दिया हो।.
दरवाज़ा खुलते ही उसकी नज़र मेरे ऊपर टिक गई।.
जैसे ही मैंने उसे देखा, पलटकर चल दिया, मुँह से निकल गया - 'माफ कीजिए अंकल'।.
अचानक वह मेरा हाथ कसकर पकड़ बैठा।.
पलट कर देखा, तभी उसने आंख घुमाकर संकेत दिया, फिर एक झटके में पास खींच लिया।.
कुछ भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा था मेरे लिए।.
उठने की कोशिश में था, पर उसने कमर पर हाथ डालकर ऐसे रोक दिया कि हिल भी नहीं सका।.
उसकी तरफ मुड़कर बोल पड़ा - ऐसा क्यों कर रहे हो तुम?
वो बोला - तुम काफी आकर्षक लग रही हो। सुनो, बस एक बार मेरा मुंह में ले लो, उसके बाद जाना।!
मैंने इनकार कर दिया। फिर बोला - तुम ऐसा क्यों कह रहे हो?
उसका लंड आहिस्ता-आहिस्ता सीधा होने लगा, मेरे पिछवाड़े में एहसास उठने लगा।.
लगता था, इसी से शुरू कर दूँ। मुँह में लेने का जी चाह रहा था। आज का दिन पसंद पूरी करने के लिए सही था।.
थोड़ा देर बाद मैंने कहा - ठीक है। बस मैं सिर्फ चूसूंगा। इस शर्त पर कि तुम तीन सौ रुपए दोगे।.
हाँ कहने में उसे बिलकुल समय नहीं लगा।.
एकदम अचानक मैंने कहा - तुम्हें इसकी रिकॉर्डिंग बिल्कुल नहीं करनी है!
बिना देर किए, उसने फोन बंद कर दियa।.
हँसते-हँसते चेहरा खिल उठा।.
बैठे हुए थे वो शौचालय की सीट पर।.
जब मैं नीचे होकर लंड चूसने लगा, तभी उसने मेरे कंधे को पकड़ लिया। वापस मुझे अपनी गोद में बैठाया, फिर धीरे से एक छोटा किस दिया।.
देखते-देखते मुझे उसकी आँखों में खो जाना शुरू हो गया।.
थोड़ी देर बाद उसने मुस्कुराते हुए फिर से करीब आकर किस किया।.
मेरे अंदर का ताप बढ़ चुका था।.
उसके पास जाकर मैंने दबे हाथों से उसे खींचा, फिर आवाज़ बदलते हुए उसके होंठों पर तेज़ी से निशान छोड़ दिए।.
उसके होंठों के बीच मेरी जीभ गई, तो वह धीमे से अपनी जीभ से उलझन शुरू कर दिया।.
अचानक से एक ख़ुशनुमा तरंग महसूस हुई, ये पहली बार था जब मैंने ऐसा कुछ महसूस किया।.
तभी मेरा दिल धड़कने लगा, जैसे कुछ होने वाला हो।.
वो मेरे साथ पांच मिनट तक बस किस करता रहा।.
उसके बाद मैं खड़ा हुआ, फिर धीरे से अपने घुटनों पर बैठ गया।.
उसकी पैंट नीचे सरकते ही वो झट से उठा। फिर धीमे से वापस बैठ गया, मानो कुछ हुआ ही न हो।.
उसकी जांघ देखकर मेरा मुंह खुला का खुला रह गया।.
एकदम काले रंग का था उसका लंड, मोटाई चार इंच की। आठ इंच तक फैला हुआ वो हिस्सा सीधे खड़ा था।.
थोड़ी सी छोटी-छोटी लकीरें उस पर मौजूद थीं।.
एक अजीब किस्म की खुशबू हवा में तैर रही थी, वो लंड।.
उस गंध ने मुझे इतना बाँध लिया कि हाथ खुद-ब-खुद आगे बढ़ गया। लंड को पकड़ते ही सूँघने लगा, जैसे कोई भौंकता हुआ जानवर होऊँ।.
इसके बाद मेरे हाथ ने उसके लिंग को समेट लिया। पीछे और आगे की गति शुरू हो गई।.
आँखें बंद करके वो मुस्कुराया, फिर चुपचाप बैठ गया।.
उसकी टोपी पर मैंने जबरदस्त चुम्मा लगाया, इसके बाद सावधानी से मुँह में डाल लिया।.
उसके माथे पर पसीना चमक रहा था।.
थूक लगाते हुए मैंने चूसना शुरू किया। बाहर-अंदर करता रहा उसके काले लंड पर।.
थोड़ी देर के लिए मैंने उसका लंड चूसा, जैसा मुझे लगा।.
थोड़ा सा ही अंदर जा पाया मैं, चार इंच से आगे नहीं।.
उसने धीरे से अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा। मैं शौचालय की सीट पर बैठ गई।.
उसने खड़े होकर मुझसे कहा कि वह अपनी जान बचाना चाहता है।.
उसका लंड मेरे मुँह के सिर्फ बाहरी हिस्से से छूआ, धीरे-धीरे नम होता गया।.
इसके बाद मैंने हाथ से उसके अंडों को छेड़ा। फिर एक को पूरी तरह मुँह में लिया और धीमे-धीमे चूसने लगा।.
चेहरे पर ख़ुशी साफ़ दिख रही थी।.
उसके आंडों पर मेरा मुँह पांच मिनट तक टिका रहा।.
अब वो बोला - तुझे अच्छी तरह चूसने दूँगा मैं।!
बस इतना किया कि सिर हल्के से झुका दिया।.
उसकी मुट्ठी मेरे सिर पर आई, तभी होंठ अपने आप खुले। गर्म लंड एकदम मुँह के भीतर घुस गया।.

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एकदम अंदर तक पहुँच गया, करीब पांच इंच लंबा होगा। गले से ऊपर कभी नहीं आया।.
कभी-कभी सांस फूलने लगी, धीरे-धीरे नाक से सांस लेने पर मजबूर हुआ।.
उसका हाथ धीमे से आगे-पीछे होने लगा।.
मैंने जब आँखें ऊपर उठाईं, तो वह मेरे मुँह में धीरे से घुस गया।.
इस बार वो सारा का सारा मेरी गरदन तक फैल गया।.
अचानक मुझे लगा, यह तो बिल्कुल अनजाने में हो गया।.
शायद ऐसा हो सकता है कि उन्हें पहले भी किसी को चुसवाने का मौका मिल चुका हो।.
अचानक वह मेरे होंठों पर तेजी से हमला करने लगा।.
अब मुझे लगने लगा कि मैं चाचा की प्रेमिका हूँ, इससे मन बहल गया।.
लगभग बीस मिनट तक वह मेरे मुँह से जुड़ा रहा।.
उसके बाद उसने कहा, "मेरा सामान आने वाला है, क्या मैं इसे अंदर ही छोड़ दूँ?"?
गर्मी से तप रहा था मैं, और उसी भावना में हाथ ने आगे बढ़ने का संकेत दे दियa।.
खुशी उसके चेहरे पर दिख रही थी, मैंने जब कहा कि पी लूँगा।.
उसने मेरे सिर को अचानक कसकर पकड़ लिया। फिर मेरे मुँह में सब कुछ उंडेल दिया।.
मुझे इतना सामान मिला कि होंठों से छलकने लगा।.
एक-एक घूँट को बचाने के लिए मैं तेजी से पी रहा था।.
उसकी हर चीज़ मैंने पी डाली।.
उसके बैठने को मैंने सीट थमा दी, अपने हिस्से के लिए ज़मीन ही ठीक रही।.
वो मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए बैठ गई, जैसे कोई नन्हा बच्चा हो।.
अच्छा महसूस हो रहा था मुझे।.
उसकी नजर मेरे ऊपर थी, मेरी आँखें उस पर टिकी हुई थीं।.
ख़ुशी का ठिकाना नहीं था हम दोनों।.
इतनी देर तक कोई हिला नहीं। वो पल था, जब समय ठहर सा गया।.
बाद में सड़क पर कदम रखा।.
बाहर मॉल के पास हम दोनों वहीं पहुँचे।.
वह बोला, कार में आकर बैठो।.
बिना कुछ सोचे मैं वहीं जगह पर बैठ गया। फिर धीरे से आगे बढ़कर उसके होंठों पर मुझे लगा कि ये पल कभी खत्म न हो।.
उसने कहा, मैं राकेश हूँ, पत्नी का देहांत हो गया। एक समय था, जब वो सेक्स भी नहीं कर पाया था, लगभग हर दिन खालीपन महसूस किया। जितने सालों से कुछ नहीं किया, उसके बाद ऐसा हुआ। वजह ये थी कि बहुत ज्यादा निकला, अचानक। .
उसके सामने कहा मैंने जो मुझे लगा।.
वो बोला, "चल घर चलते हैं", फिर मुस्कुराते हुए कहा - वहाँ सब कुछ और भी तगड़ा होगा।!
हाँ कह दिया मैंने।.
एक दिन वो मेरे पास आया। फिर से कभी नहीं भूला जा सकता था वो लम्हा। धीरे-धीरे रास्ता बदल गया था हमारा। उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी। घर की ओर कदम बढ़े।.
गाड़ी के अंदर, पसीना छूटने लगा।.
अब पैंट नीचे थी।.
अंदर से जैसे ही आवाज़ आई, बाहर धुंधला सा लगने लगा।.
डर लगता था, पर किसी के आँखों से बचने का नहीं।.
उसने गाड़ी को रोकने की सलाह मुझसे पाई।.
गाड़ी ठहरते ही मैंने झट से उसकी गोद में जगह बना ली, चेहरा अपनी ओर घुमाकर।.
उसका हाथ मेरे कमर पर पड़ गया। आंखें सड़क पर टिकी रहीं। गाड़ी धीमी चलने लगी।.
मैंने अपनी गांड से उसके लंड को पैंट के बाहर घिसना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे वो ऊपर उठने लगा।.
ठहरना मुश्किल हो चला था।.
मैंने कहा, घर पहुँचने का कोई मतलब नहीं। बस इधर ही कार में कर दो जो करना है। अब मैं और धीरज नहीं रख सकता।!
ठीक है, उसने कहा।.
एक खाली सड़क पर वो कार रोकता है। धीमे से गाड़ी किनारे खींच लेता है।.
उसकी बाँहों में मेरा सिर टिका हुआ था।.
उसने मेरी ओर हाथ बढ़ाया, फिर मुंह के पास अपना चेहरा ले गया।.
गुस्सा मेरे अंदर ही धधक रहा था।.
उसे दोबारा गर्म किया मैंने, फिर शर्ट उतारकर पलंग पर डाल दी।.
एक दिल की धड़कन में, मेरा निप्पल उसके होंठों से छू गया।.
उसने जल्दी से मेरे गुलाबी निप्पल को होठों में ले लिया।.
खिंचाव महसूस हो रहा था, साथ में हंसी भी छलक पड़ी।.
उसके बाद मैं पीछे की सीट पर चला गया। जब मैंने उसे अपना दूध पिला दिया, तो सभी कपड़े उतारे। नीचे फेंक दिए वे।.
बैठा हुआ था मैं, आँखों के सामने वो, कपड़े नहीं थे मेरे।.
उसकी नज़रें मेरे ऊपर पड़ी थीं, मानो किसी भूखे जानवर की तरह हों।.
हल्की मुस्कान बिखर गई ओर को।.
उसने मेरी बात को समझ लिया, फिर वापस आ गया।.
उसने मेरे ऊपर झुकते हुए चुंबन किया।.
उस वक्त मैं बिलकुल उसी के साथ खड़ा था।.
एक हाथ में उसके लंड को छूते हुए मैं।.
अब उसके शरीर में गर्माहट का एहसास होने लगा।.
वो मुझे पेट की ओर लेटा चुका था। फिर मेरी तलवीं हवा में उठी, और उसके होंठ मेरे अंदर धँस गए।.
खुशी का एहसास तब हुआ, जब सब कुछ ठीक लगने लगा।.
उसकी जीभ मेरे गुलाबी होंठों पर फिसल रही थी।.
पीछे का हिस्सा बिलकुल तर हो गया था मेरा।.
अब तक वो चढ़ाई सहन होती नहीं।.
उसने मेरे चूतड़ पर हाथ डाला, दबाव बढ़ाया। फिर उसकी जुबान मेरी गांड पर घूमने लगी।.
उसका सिर मेरी जांघों के बीच दब गया।.
फिर वो खड़ा हुआ, सभी कपड़े निकाले, पास ही जगह ले ली।.
बैठकर मैंने उसके लिंग को मुँह में लिया, धीमे से चाटते हुए।.
उसने मेरे बालों को पकड़ लिया था। मेरा सिर हल्का सा झुक गया।.
अचानक कैसे हुआ पता ही नहीं… सिर्फ इतना देखा कि खिड़की का कांच थोड़ा-सा टूट चुका था।.
अंदर को ताकता हुआ कोई भिखारी वहीं पड़ा था।.
उसकी नज़रें हम दोनों पर टिकी थीं, जैसे-तैसे ये सब करते हुए।.
आखिरकार वो दिखा, मैं कांपते हुए खड़ा हो गया।.
तुरंत मैंने खिड़ी ऊपर उठाई, फिर हम दोनों कपड़े पहनने लगे।.
उसके बाद से हम दोनों का चलन शुरू हो गया था चाचा के घर पहुँचने का।.
ग्यारह बजे से थोड़ी देर पहले हम वहाँ के आंगन में खड़े थे।.
अभी तक मेरे चेहरे से उस भिखारी का खौफ गायब नहीं हुआ था।.
उस काका ने समझाया था - शायद वो सच में पागलपन में ही बड़बड़ा रहा था। तुझे तो उसके दिमाग की बात पर यकीन ही नहीं करना चाहिए। खैर, ऐसे लोगों से कोई तुलना नहीं करता, इसलिए घबराओ मत।!
सिर को आगे-पीछे कर दिया।.
उसके बाद, घर के भीतर कदम रखा हमने दोनों ने।.
घर इतना विशाल था कि मानो कोई होटल हो।.
घर काफी आलिशान था।.
वह मेरी तरफ मुड़ा, हाथ में कोल्ड ड्रिंक लिए।.
उसने वो पिया, फिर बिना कुछ कहे मेरे साथ अपने घर की ओर चल पड़ा।.
फिर वो कमरा में पहुँचे, हम दोनों।.
वह मुझे बेड पर बैठाकर धीरे से पीछे की ओर गिरा दिया।.
तभी मेरा ध्यान सेक्स की ओर गया।.
वहीं पल वो अपने कपड़े उतारने लगा, फिर मेरे पर हाथ डाल दिया।.
उसने सभी कपड़ों को तनिक झटके के साथ गिरा दिया।.
उसने बिना कुछ कहे मेरे ऊपर जा पड़ा, फिर मेरे निप्पल्स को मुंह में ले लिया।.
उसने मुझे पकड़ लिया था, एक हाथ से।.
गर्मी में मेरा शरीर धुआँ-धुआँ सा हो रहा था।.
तैयारी के सिलसिले में हम दोनों ने अपना-अपना ध्यान उसी ओर कर लिया।.
होश उड़ा देने वाली घटना क्या थी, सब कुछ पढ़कर पता चलेगा।.
अगली कहानी में ये बात मैं समझाऊंगा।.
लव यू ऑल.
इस कहानी के बारे में सोचकर ऐनल ऐस्स Xxx ने जो मन में आया, वह धीरे-धीरे शब्दों में लाया।

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