भारी आपदा में चुदाई का अवसर
एक कहानी में, मैं छत पर आराम करने वाला लड़का हूँ। हिल स्टेशन पर घूमने गया था, पर भारी बारिश के चलते रुक जाना पड़ा। कमरे में मेरे साथ पुलिस ने तीन अनजान लड़कों को भी ठहरा दिया। एक लड़की भी थी, जो उसी कमरे में रुकी।.
एक बार की बात है, परिवार में सबके सामने यौन संबंध जैसा माहौल बन गया।
पढ़ी ही होगी।
इससे पहले भी कई बार मेरे अनुभव आपके साथ साझा हो चुके हैं।
इस बार जो मेरे साथ घटा, तुम सबके हाथ-पैर फूल जाएंगे। पढ़ते ही तुम मेरे खयाल से अपना लंड हिलाओगे। मुझे याद करके छुओगे। कहोगे – रंजन, हमें तो बस तेरे मुंह में डालना है।!
पहाड़ों में घूमना मुझे खूब पसंद है, दरअसल मैं यात्रा करना बहुत पसंद करता हूँ। ऐसी जगह अक्सर शांत होती है, वहाँ प्रकृति का आसपास खूब होता है।
इस बार तो सैर का मतलब ही कुछ और हो गया, जान डगमगा उठी।
गर्मियों के दिन थे, पहाड़ों पर लोगों का आना-जाना ज़्यादा था।
जैसे-तुरंत घर से निकला, तभी मौसम की ऐप पर भारी बारिश की चेतावनी दिखने लगी।.
बस इतना सोचकर वो चल दिया, मन में एक हल्के-फुल्के खयाल के सहारे।
थोड़ी देर चलने के बाद मन ऊबने लगा, कहीं कोई लड़का नजर ही नहीं आया।
कमरा पाने के लिए होटल में भारी झंझट हुई।
अंधेरा घिर आया था, नींद भारी पड़ चुकी थी।
सुबह-सुबह ये आवाज़ें पड़ने लगीं कि वहाँ बारिश छिटक गई, तो यहाँ भी तेज़ हो गई।
कुछ लोग घूमकर वापस आने लगे, मगर सड़कें अटक चुकी थीं।
आसमान से पानी की फुहार छलकने लगी, धीरे-धीरे चारों ओर तैरने जैसा मचलापन आ गया।
एक होटल सामने था, जिसे पुलिस ने खाली करवा दिया - बहती नदी के ठीक ऊपर बना होने की वजह से।
हवा चल रही थी, तो मन में आया कि जिंदगी के हर पल को बिना झझक महसूस किया जाए।
ठंड इतनी तेज़ हो गई थी, गर्मियों के बीच में भी पीने को कुछ गर्म चाहिए था। वहाँ खड़े होकर लगने लगा था जैसे कहीं और आ गया हूँ मैं।
तभी होटल का मालिक आया और बोला, “सर, आपके कमरे में काफी जगह है और पुलिस ने हमें ऑर्डर्स दिये हैं कि कोई भी सैलानी बाहर न रहे, तो आप इनको अपने साथ एडजस्ट कीजिए!”
तब मैंने नजर उठाई, सामने तीन लड़के थे, एक कोने में लड़की बैठी थी।
एक बात साफ़ हो चुकी थी - फूल के पीछे तीन दिमाग थे।
दिमाग ने सब कुछ समझ लिया, बस इतने में।
उन्होंने भी राहत की सांस ली और बोले, “हमें तो लग रहा था कि किसी फैमिली के साथ न रहना पड़ जाये!”
हो सकता है, मेहमानों को अकेले छोड़ना ज्यादा उचित लगा होटल वालों को।
मैंने कहा, “बेड एक है और हम चार कैसे बात बनेगी?”
उनमें से एक आंख मार के बोला, “कि चार कहाँ! एक नीचे होगा और ये उसके ऊपर और इस छमिया के ऊपर फिर एक!”
मैंने पैग खींचते हुए बोला, “देखते हैं कौन कौन ऊपर होता है और कौन नीचे!”
एक बार मैंने पेय की पेशकश की, तो उसने इनकार कर दिया। फिर वह अपनी जेब से सिगरेट निकालकर पीने लगा। धुआँ खींचते ही समझ आ गया - यह कोई सामान्य सिगरेट नहीं थी। हो सकता है, इसमें कुछ और मिला हो।
उनमें से एक बोला, “हमने इकट्ठे रहना है, पता नहीं कितने दिन, तो हमें एक दूसरे के साथ खुल कर रहना होगा!”
मैंने कहा, “वो तो है, मैं भी यही चाहता हूँ!”
दूसरा बोला, “कि ये हम सबका माल है और तुम भी एन्जॉय कर सकते हो, कोई प्रॉब्लम नहीं है!”
मैंने हंस कर कहा, “मुझे ये छमिया नहीं, तुम तीनों चाहिये!”
एक पल के लिए चुपचाप आँखें मिलीं। फिर किसी ने कहा - “मैं तो बिलकुल भ्रमित हूँ।”
लगता है, उन्हें कुछ भय महसूस हुआ था।
मैंने कहा, “ये तो बहुत बेइंसाफी है कि एक लड़की और तुम तीन लड़के। अब से तुम तीन लड़के और हम दोनों लड़कियां!”
एक उनमें से बोला, “तेरी बहन की! ये तो गांडू है रे!”
मैंने कहा, “तमीज से! तुम गे बोल सकते हो, गांडू नहीं! और मेरी मर्जी होगी कि अब से कैसे रहना है। और पहली मर्जी ये है, तुम सब अपने कपड़े उतारो और मैं भी!”
एक पल में ही कपड़े गायब हो चुके थे, सभी के ऊपर।
उस लड़की का अंदाज़ कमाल का था, मगर लड़कों ने तो हवा ही सूखा दी।
माँ, सफेद-सफेद लंबे लंड जो चिकने होते हैं… वो मुझे बहुत पसंद हैं।
तीनों के बीच मैं फिसल गया, लड़की को किनारे कर दिया गया।
अचानक से एक को गले लगाऊँ, तो पीछे से दूसरा मेरी गांड में चढ़ने लगता है।
कभी सोचा नहीं था कि इतना अच्छा लगेगा।
उस समय मगर मैं होशोहावली में नहीं था, बाकियों की तरह पीकर लड़खड़ा रहा था।
उसकी गर्म सांसें मेरे चेहरे पर थीं, फिर वो धीमे से आगे बढ़ा।
एक ने मेरी छातियों को चूमना शुरू कर दिया, जबकि दूसरे के हाथ पीछे की ओर बढ़ गए।
उन सभी के पैरों में तल्लीनपन था, मैं बस आँखें फैलाए खड़ा रहता।
जब सबसे पीछे वाले ने मेरी कमर पर ज़ोरदार धक्का दिया, तभी मैंने बिना सोचे ऊपर की ओर सांस खींच ली।
उसी दम एक ने मेरे मुँह में अपना लंड ठूस दिया, जबकि दूसरा मेरे शरीर पर नाखूनों से निशान बनाने लगा।
सैंडविच मेरा पहले से तैयार था।
फिर वो लड़की खड़ी हुई, धीरे से मेरे लिंग को अपने मुंह में डाल लिया।
लड़का जो नीचे है, वह सेक्स के दौरान आगे की ओर धक्का लगाता है। पीठ के रास्ते भी ऐसा ही होता है। कभी-कभी ऊपर वाली लड़की के नीचे से भी छेड़छाड़ चलती है।
अचानक एक पल में, 15 से 20 मिनट ने मुझे स्वर्ग के ऊपर घुमा दिया।
आगे बढ़ते हुए उसने पीछे का सब कुछ जलाकर रख दिया, मेरी त्वचा के नीचे एक अजीब गर्माहट फैल गई।
हाँ… पीछे से तमंग भरने के बाद जब कोई गर्म-गर्म चूस अंदर उड़ेल देता है, तब लगता है मानो जान निकल गई।
जब वो मेरे मुँह में अपना लंड डाल रहा था, तो मेरी सांसें ऊपर तक जा रही थीं। कभी-कभी गले तक धकेल देता था वो। पर मैंने भी चूसकर उसका हश्ता खत्म कर दिया।
तभी वो हटा था, अचानक मेरे मुंह में घुस गया जो पहले मेरे शरीर को चूस रहा था।
तब तक वो लड़की नीचे मुझ पर झुकी हुई थी, धीमे-धीमे सब कुछ खींच लिया। आखिरकार हर बूंद उसने अपने भीतर समेट ली।
जिसके होंठ मेरे मुँह पर थे, वही अब मेरी निगल में तड़प रहा था।
एक बार मैंने सोचा था कि ऐसा होगा ही नहीं, पर तीन अलग-अलग आदमियों ने मेरे साथ वैसा किया।
फ्रेश होने के लिए मैं स्नानघर में गया था।
थोड़ी शराब पिया, फिर धीमे-धीमे कपड़े उतारे। कोई बात नहीं कर रहा था, सब चुपचाप एक दूसरे के पास आए। अंत में, हवा भी ठहर सी गई थी।
मौसम के हालत खराब थे, बारिश पूरी तरह से छा गई थी।
तभी लड़की मुझे बोली, “लंड तो खूब चूसते हो, अब जरा मेरी चूत चाटो!”
मैंने धीरे से अपनी जीभ उसकी चूत पर घुमाया, जिसे सुनकर वो हल्के से आवाजें निकालने लगी।
तभी किसी ने उसके मुँह में अपना लंड डाल दिया।
एक कोने में मुझे चूत चाटते हुए देखा, तभी किसी ने पीछे से आकर गांड पर लंड रख दिया। फिर सिर्फ एक धक्का था, जो सब कुछ बदल गया।
लगभग आधा हिस्सा मेरे भीतर चला गया।
एक झटके में वो अंदर हो गया, फिर दूसरे धक्के से पूरा भीतर चला गया।
वह इतने क्रूरता से मेरे अंदर घुसा कि हर याद धुंधली पड़ गई।
कभी ऐसा मज़ा नहीं आया, हो सकता है आगे भी कभी न आए।
एक तरफ मैडम की चूत से रस टपक पड़ा, वहीं दूसरी ओर मेरी गांड में भी उसने अपना रस छोड़ दिया।
सभी लोग अब नींद में डूब चुके हैं, थकावट ने छा लिया है।
अब से कुछ ऐसा होगा जहाँ एक के बाद एक कई लोग शामिल हुए, धीरे-धीरे बहाव में फंसते गए।
लड़के का लड़की के साथ सेक्स का प्रसंग कैसा लगा तुम्हें?
बता दो मेल के ज़रिए। हाँ, कमेंट में भी लिख सकते हो।
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