पूरे विभाग की रंडी बन गया

JaiJai
Jan 5, 2026 - 11:57
Jan 21, 2026 - 15:19
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पूरे विभाग की रंडी बन गया

लड़कियों की कहानियाँ पढ़कर मुझे अपनी बात सोचना शुरू हो गया। काम के दौरान जो साथी थे, वे मेरे साथ ऐसा करने लगे। मुझे इसमें खुशी मिलती थी। जब वे मुझे गाली देते, तो मैंने धीरे-धीरे पैसे लेना शुरू कर दिया।.
अगर तुम पिछला हिस्सा पढ़ चुके हो, तब यह जानते हो कि बात शुरू हुई थी।
गांड मरवाने की चाहत
एक बार मैंने पढ़ा कि राहुल को ढाई साल की उम्र में ही सरकारी दफ्तर में क्लर्क बनने का मौका मिल गया।.
बहुत से लोग विभाग में ऐसे हैं जो शहर के बाहर एक जगह पर ठहरते हैं। वहाँ सरकारी निर्माण का काम चल रहा होता है।.
साइट पर राहुल के लिए जगह बन गई।.
कॉलेज के वक्त राहु, दो यारों के साथ हँसते हुए शरारतें कर लेता था।.
एक कमरे में रहने वाले थे विशाल और राहुल, दोनों सीनियर क्लर्क। घर-घर अलग-अलग, तीन इंजीनियर भी उसी जगह पर अकेले बसे हुए।.
उसे वो पल याद आता, जब दोस्त हंसते हुए उसकी पीठ ठोक देते।.
थोड़े दिनों में ही राहुल का विशाल के साथ शारीरिक संबंध शुरू हो गया।.
उस रात, जब राहुल विशाल के लंड पर चढ़ा हुआ था, मन में ख्याल आया - शायद कोई खिड़की से झाँक रहा है। धीमे-धीमे वो खिड़की की ओर बढ़ा। पर बाहर कुछ भी नज़र नहीं आया।.
राहुल ने सुनाई एक कहानी, पीछे मोड़े हुए वक्त की बात।
जैसे ही सुबह के वक्त ऑफिस पहुँचे, बड़े साहब - हमारी साइट के सबसे अनुभवी इंजीनियर - ने मुझे और विशाल को अपने कमरे में आमंत्रित किया।.
उम्र के पैंतालीस के आसपास का एक आदमी, गहरी त्वचा रंग का, मजबूत कद-काठी वाला।.
बड़े साहब ने कहा - राहु, विशाल, कल रात तुम दोनों का मजा अच्छा चल रहा था। साइट पर लड़की लाने पर प्रतिबंध है, फिर भी तुमने एक तरीका ढूंढ लिया। यहाँ पांचों में से कोई अलग नहीं है। राहुल के साथ सिर्फ विशाल का आनंद लेना… ऐसा नहीं चलेगा। हम बाकी लोगों को भी जगह दो। अपने बीच तय कर लो, 15 मिनट बाद मिल लेना।.
ख़ुशी छलक रही थी। लंदन के सफर को लेकर मन चाहता जा रहा था।.
उन दिन कॉलेज में दो साथी हमेशा मेरी पिटाई कर देते।.
बाहर कदम रखते हुए, हम दोनों ने बड़े साहब की बात के बाद रास्ता पकड़ा।.
वो सुबह के समय बोला - अब ऐसा करेंगे।?
क्योंकि विशाल के पास कोई चारा नहीं। बॉस ऐसे ही छोड़ने वाले नहीं। अगर तुम सहमत नहीं हुए, तो फिर मेरी ड्यूटी बदल देंगे।.
उस बड़े अफसर को मैंने कह दिया, सुनिश्चित रूप से मैं तुम्हारे हाथों पछाड़वाने के लिए तैयार हूँ।.
विशाल ने कहा, पत्नी को छोड़कर सिर्फ मुझे ही उसने चुना।.
उस दिन सुबह-सवेरे, बड़े साहब जीप में बैठकर मुझे पास के शहर ले जा रहे थे।.
रास्ते के बीचों-बीच हमने एक छोटे से ढाबे पर पैर जमाया।.
बड़े साहब ने पूछा – राहुल, कभी किसी और के साथ तुमने ऐसा किया था या विशाल पहले हैं? अगर तुमने झूठ बोला, तो मैं खुद समझ जाऊंगा। यह बात तुम्हारे अंदर तक छूने वाली है। खुलकर बता दो, मैं किसी जिब नहीं उतारूंगा।.
मैं - एक बार कॉलेज में दो दोस्तों के साथ सेक्स किया था। वह सब खत्म हो गया, जैसे कभी था ही न। छह महीने बाद मुझे यहाँ भेज दिया गया।
जब वो बोला - मैं तुम्हारी जांच करवाऊंगा, देखेंगे कहीं तुम्हें कोई संक्रमण तो नहीं है।.
उन बड़े साहब ने मुझे डॉक्टर के पास भेज दिया। छह महीने पहले अनसेफ सेक्स किया था, इस बात का ज़िक्र वहाँ हुआ। यौन संबंधित बीमारी नहीं है न? ऐसा पता लगाना ज़रूरी था।.
खून के सैंपल लेकर डॉक्टर ने जाँच की, फिर बताया कि तीन दिन में रिपोर्ट आ जाएगी।.
फिर बड़े साहब मेडिकल स्टोर पहुंचे, बाजार से कई तरह के कंडोम ले आए। कुछ जैल भी उनके साथ थे, वो भी अलग-अलग तरह के।.
कहा था मुझे कि कंडोम पर तेल लगाना ठीक नहीं। ऐसा करने से वो फट सकता है। अब इसकी जगह के-वाई जैल का इस्तेमाल करना बेहतर होता है। यह न सिर्फ चिकनाई करता है, बल्कि पीछे के हिस्से में खिंचाव भी कम करता है।.
सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल तभी तक जारी रखना होगा। उन्होंने यह बात रिपोर्ट आने तक के लिए कही है।.
उसके तीन दिन बाद वो बड़े साहब मेरे पास आए। उन्होंने कहा, अभी-अभी डॉक्टर की रिपोर्ट आई है। कोई जिम्मेदारी नहीं, तुम्हें कोई छुपी बीमारी नहीं है। शाम को मेरे घर पहुंच जाना।.
वो महाराज कुछ ऐसा पसंद करते थे जिसमें दिल हो।.
शहर के नए ब्यूटीपार्लर में जाने के लिए उसने विशाल के साथ मेरा रुख कर दिया।.
शरीर के हर बाल पहले मोम से निकाले गए।.
दर्द तो बहुत हुआ था वैक्सिंग में, पर कहीं अंदर से राहत भी मिली।.
तब नहाने के बाद, स्किन पर क्रीम का लेप हुआ।.
अब त्वचा कहीं से भी खुरदुरी नहीं लगती।.
रात के खाने के बाद मैं बड़े साहब के कमरे में चला गया।.
खिड़की को बंद करते हुए उन्होंने दरवाज़ा भी पटक दियa।.
उसके बाद वो मेरे गालों पर छूआ, फिर आँखों के पास। इसी तरह धीमे-धीमे उनके होंठ मेरे होंठों पर आए। एक खिंचाव सा था, जैसे सांस रुक गई हो।.
वो मुझे गले लगाए हुए काफी देर से जमे थे। मेरे पेट पर उभरा उनका खड़ा लंड महसूस हो रहा था।.
धीरे-धीरे साहब ने मेरे कपड़ों को हटाना शुरू कर दिया।.
अपनी कमर तक का लिबास उतारते ही बड़े साहब की नजर मेरे उभरे छाती के डिंडे और चमकती खाल पर पड़ी। वहीं उनके अंदर एक झांसी-सी दौड़ गई।.
उन्होंने मेरा एक स्तन दबाया, फिर दूसरे पर होठ चला दिए।.
सिसकियों में खुशी की धड़कन थी।.
उस आदमी ने मेरे सारे कपड़े उतारे, फिर अपने भी सब उतार डाले।.
उस आदमी का लिंग ऊपर को उठा हुआ था। काला सा नाग जैसा दिखता था वो। लंबाई में लगभग सात इंच था। मोटाई दो इं के आसपास।.
उस दिन सिर्फ एक चीज याद है - वो लंबाई देखकर रीढ़ में सिहरन उठी।.
चेहरे पर नज़र पड़ते ही बड़े साहब को समझ आ गया - मन में डर था।.
मालिक ने मुझे आवाज़ देते हुए कहा - डरना नहीं। थोड़ा धीरे से, मैं अभी शुरू करता हूँ!
उसके हाथ मेरी छाती पर थे, धीमे-धीमे दबाव डालते हुए। मैं फिर से उत्साहित हो उठा।.
महाराज ने पलंग के किनारे पड़ी शीशी से तेल निकालकर अपने लिंग पर डाला।.
एक ने मुझे कहा, पेट के बल ज़मीन पर लेट जाओ। फिर पीछे के हिस्से में तेल डाल दिया गया।.
हवा में तेल की खुशबू फैल गई। पेट के नीचे ज़मीन सख्त थी। हाथों ने कूल्हों को धीरे से खींचा।.
महल में जैसे ही मैंने प्रेम का घाव दिखाया, बुजुर्ग साहब ने अपना लिंग उस पर रगड़ना शुरू कर दिया।.
थका हुआ आदमी बोला - अब मार दो।.
उन्होंने अचानक मेरी गांड में पूरा लंड डाल दियa। मैं चिल्लाने वाला था कि हाथ मेरे मुँह पर आ गया। फिर वो मेरे ऊपर जम गए।.
गांड में ऐसा झनझोंकता दर्द हुआ कि चीख निकल गई। साहब के हाथ ने मुँह ढक रखा था, ध्वनि अंदर ही फँस गई।.
थोड़ी देर के लिए पीड़ा में तड़पता रहा।.
थोड़ी देर में तकलीफ कम हुई। उस मोटे लंड के अंदर घुसने से मेरी गांड पहली बार इतनी फैली कि हैरान रह गई। ऐसा एहसास पहले कभी नहीं हुआ था।.
उस आदमी ने अपना हाथ मेरे चेहरे से हटाया। जब उसने पूछा, तो मैंने कह दियa कि दर्द अब कम लग रहा है।.
उसके हाथ सख्त चल पड़े, धीरे-धीरे। अब दर्द कम था, मौज बढ़ गई थी।.
कभी-कभी साहब आधे घंटे तक कोई काम नहीं करते। उसके बाद मेरे ऊपर लेट जाते हैं। गर्दन पर हल्के होठ पड़ते हैं, कान के पीछे भी छुआवट आती है।.
इसके बाद फिर से पीछे से हमला करने लगते।.
मज़े का पल था ये।.
एक बार मैंने पूरी तरह हार मान ली। फिर कुछ घंटों बाद, सब कुछ वैसा ही हो गया।.
कभी नहीं लगा था कि इतना मज़ा आएगा।.
वो बड़े साहब किसी काम में दखल नहीं डालते थे। हर पल आराम से गुज़ारते।.
मुझे लगा कि पल भर को सब थम गया। उन्होंने लगभग पौने घंटे तक मेरी पीठ पर हाथ चलाए। फिर बिना कोई संकेत दिए, धक्कों की गति बदल गई। अंत में एक गहरी सांस के साथ वे सब कुछ छोड़ आए।.
दोनों का पैर बाथरूम के अंदर पड़ा।.
साहब का लंड मैंने साबुन लगाकर साफ किया।.
उसने मेरा सिर धोया।.
कमरा साफ करने के बाद अंदर पहुँचे।.
कमरे में अधिकारी खड़ा था, कोई वस्त्र नहीं। मैंने पूछा, उसने इशारे से मना कर दिया।.
एक अच्छी व्हिस्की की बोतल अलमारी से निकाली। दो गिलास हाथ में आए। धीरे से दोनों में शराब भरी गई, फिर पानी मिलाया गया। एक गिलास मेरी तरफ बढ़ा दिया गया।.
एक के बाद एक हम खुले में बैठे थे, चखना साथ लेकर।.
उन्होंने कहा, उनकी पत्नी की मृत्यु दो साल पहले हुई थी। एक हादसे में वो चल बसी थी।.
कुछ वक़्त गुज़रने के बाद उन्होंने फिर से एक-दूसरे को छुआ।.
बातें हो चुकी थीं कई, पर मेरा पिछवाड़ा सूनापन महसूस कर रहा था।.
राहुल, एक बात समझ लेना। तुम्हारा ध्यान केवल ऑफिस के पुरुषों पर रहे। कभी किसी के साथ कुछ करना हो, तो पहले उससे बात कर लेना। अगर वह आदमी अपनी पत्नी के अलावा किसी और के साथ संबंध बनाता है, तो तुम्हें कंडोम जरूर लगाना।.
उस आदमी ने मुझे संक्रामक बीमारियों के बारे में जानकारी दी।.

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आधे घंटे के लगभग बाद।.
एकदम अचानक मन में आया, राहुल। फिर करने को दिल चाह रहा है, बड़े साहब।.
उसने कहा ये बात, मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।.
दबाव में चूचे पर हाथ पड़ा, तभी उत्साह छलकने लगा।.
ऊपर वाले साहब ने आधे ढीले लंड की ओर हाथ उठाया। मुँह से छेड़ने को कहा, जिससे वो खड़ा हो जाए।!
शुरू किया मैंने लंड चूसना, तभी वो ऊपर उठ गया।.
अधिकारी ने कहा - इस बार मिशनरी स्थिति में!
पेट के बल लेटकर मैंने घुटनों को छाती के पास खींच लिया। साहब ने तेल लगाकर लंड को धीरे से अंदर ठूंस दियa। इस बार जलन कम महसूस हुई।.
थोड़ी देर बाद साहब धीमे-धीमे मेरी गांड पर हल्के हाथों से मारने लगे। एकदम अचानक रुक गए, फिर मेरे चूचे को मुंह में डाल लिया। उसे चूसते-चूसते दबोचा। फिर वापस वहीं से शुरू कर दिया।.
थोड़ी देर में कमर में तकलीफ होने लगी। फिर मैंने पलंग पर हाथ टिकाए, सीधे खड़े होकर झुकते हुए। पैर जमीन पर अलग कर दिए गए।.
जब साहब ने मेरी कमर पकड़ी, तो फिर वो गांड मारने लगे। कूल्हों पर जोरदार चांटे पड़ने लगे, एक के बाद एक।.
हिलती कमर के साथ मैंने उसे भीतर खींच लिया। कुछ समय पश्चात साहब ढल गए।.
कभी-कभी साहब ऐसे चलाते कि मुझे हंसी छूट जाए।.
उस रात मैंने नींद साहब के कमरे में खोली।.
उसके बाद हुई दो रातें, दोनों इंजीनियरों ने मेरे साथ कमबख्त छेड़छाड़ की।.
हर किसी के पैर धोने का तरीका जुदा होता था।.
जब मैं गांड मरवाकर कमरे में आता, तो विशाल मुझे देखकर बोलता - आ गई मेरी रंडी बीवी… उठा, मेरा मन लगा।!
गुस्सा उतरने के बाद वो मेरी पिटाई भी कर देता।.
हर रात किसी न किसी के हाथों पीछे का हिस्सा दबता, मन में खुशी होती।.
एक दिन विशाल ने मुझे गाली दी। उसने कहा, "तू तो रंडी है।" मैंने सीधे जवाब दिया, "अगर मैं रंडी हूँ, तो पैसे क्यों नहीं देते?" फिर मैंने आगे कहा, "आज पैसे दे दो, तभी असली भावना आएगी।".
मैंने पैसे लिए, फिर उसने मुझे पीटा।.
इसने काम बखूबी किया।.
उसके बाद हर कोई पैसा देने लगा, जब से मेरी पिटाई हुई।.
दो महीने बाद.
छुट्टी के दिन हम तीनों - विशाल, एक और इंजीनियर मैं - जंगल में पिकनिक पर निकलने वाले थे।.
वो बड़े साहब कहीं नहीं जा पा रहे थे।.
अचानक विशाल ने एक वीडियो चला दिया। उसमें गुलामी का सेक्स था। फिर बोला, आज कभी ऐसा कर लेते हैं? ज़िंदगी में थोड़ा अलग कुछ हो जाएगा।!
हां, मेरी हां हो गई।.
जंगल की ओर हमारी यात्रा जीप में हुई।.
एक घने पेड़ के पास, जहाँ झाड़ियों ने चारों ओर घेरा था, हमने जीप रुकवाई। वह रास्ता जंगल में गहराई तक जाता था।.
रास्ते में हम पर नज़र डालना किसी के बस की बात नहीं थी।.
चाय-नाश्ते के बाद सब ने गद्दे पर जगह बनाई। फैली हुई दरी पर वो सभी आराम से बैठ गए।.
एक बार फिर से कोई बोला - अब शुरू होता है ये सब।.
पेड़ के पीछे खींचकर विशाल ने मेरे कपड़े उतार दिए। आगे के हाथों को बांध दिया गया। गले में कुत्ते का पट्टा डाला गया। फिर उस रस्सी को पकड़कर, जो पट्टे से जुड़ी थी, सभी के बीच ले जाकर घोषणा कर दी गई।.
एक गुलाम को पकड़कर लाया हूँ, आज उसके साथ खेलेंगे।
उसने कमर पर पट्टा मारा, फिर बोला - हथियार ऊपर उठा।!
मैंने किया.
बड़े आदमी ने इंजीनियरों के पास जगह ली – सामान पहले देख लेते हैं, मस्ती कब शुरू होगी, यह फैसला नीलामी से होगा।.
हथेलियाँ सरकीं मेरी त्वचा पर, एक-एक कर। छाती के निपल दबे, कमर पर आवाज़दार थपखन।.
नीलामी शुरू हुई.
एक इंजीनियर के हाथ सबसे ऊँची बोली में आया।.
वह बिस्तर पर खड़ा होकर बोला - आ जा नौकर, गद्दे पर अब घुटनों के बल ठहर।!
मैं हो गया.
उसने मेरे होंठों के पास अपना लिंग धकेलते हुए कहा - इसे चूसो।.
हाथ पीछे कसकर बांधे गए थे, फिर मैंने धीमे से उसका लंड चूसना शुरू कर दिया।.
जब उसने बेल्ट से मेरी पीठ पर वार किया, तो एक तेज़ आवाज़ आई। दर्द इतना था कि मैं लड़खड़ा गया।.
एक इंजीनियर ने कहा - यार, ऐसा भी नहीं आता तुम्हें? पूरा गले तक खींचकर चूसो।.
थोड़ी देर में उसका लंड सीधा हो गया।.
अब उठ खड़े हो। पेड़ के सहारे हाथ लगा। आगे की तरफ झुक पड़।.
मैंने किया.
बेल्ट से कमर पर वार करते हुए उसने आदेश दिया - पैरों को अलग कर।.
तब उसने लंड पर तेल को डाला, फिर गांड मारी।.
एक बड़ा आदमी और कोई अन्य तकनीशियन मेरे स्तन को जोर से दबाने लगे।.
एक के गिरते ही मैं सीधा खड़ा हुआ। फिर नंबर आया दूसरे इंजीनियर का।.
पहले से मौजूद इंजीनियर के बाद, एक और तकनीशियन मेरे पीछे आया। उसने धीमे से मेरे कंधों को पकड़ा। फिर वह मुझे नीचे गद्दे पर ले गया। मेरी पीठ ऊपर की ओर थी।.
हवा में हाथ उठे, सिर के पास खेजड़ की डाली से बंध गए। पैर कंधों पर चढ़े, फिर धक्के शुरू हो गए।.
एक पल ठिरकर, उसने मेरे गाल पर हाथ मारा। फिर बोली - खोल अपना मुँह।!
मुझारा मुंह में थूकते हुए बोला - ये, निगल।!
मैं पी गया.
कई बार उसने यही किया।.
पत्तों के गिरने के बाद अब विशाल पर नज़र थी।.
तभी मैंने धीरे से कहा - प्यास लगी है।!
गिलास को हिलाते हुए विशाल बोला - अब इसे पी ले।!
मैंने पी लिया.
उसने मेरे हाथ पीछे बांध दिए, फिर घुटनों पर खड़ा कर दिया।.
उसके हाथ से कपड़ा आया, आंखों पर।.
लंबे हाथों से विशाल ने मेरे होंठ छुए, फिर कहा - चूस।!
मेरे मुँह ने काम शुरू किया।.
अचानक विशाल ने मेरा सिर पकड़ लिया। फिर धीमे से गले तक अपना लंड खिसका दियa। मैं हैरान था, कुछ समझ नहीं पा रहा था। उसने मुँह में घुसा दिया, बस।.
मैंने उसके हाथ से पी लिया।.
हँसते-हँसते पेट दुखने लगा।.
उस वक्त से हर महीने कभी एक, कभी दो बार खेल आता है - गुलाम का।.
कभी तो अकेले होता है मन, कई बार भीड़ में खोया पाया।.
वो अधिकारी सप्ताह में कभी-कभी आकर मुझ पर चिल्ला देते।.
मज़ा तब आता, जब वो होते।.
एक साल पहले किसी गंडे की चुदाई हुई थी।.
काम पूरा होने के बाद, शहर के ऑफिस में लौट आए।.
एक बूढ़ा आदमी मुझे पीट रहा था। उसके तीन साथी घर पर अपनी पत्नियों के साथ बैठे थे।.
शहर के बाहर एक नए काम की शुरुआत हुई, इसलिए ऊपरवालों ने अपना ट्रांसफर वहीं करा लिया।.
मैं भी उनके साथ चल पड़ा।.
कुल मिलाकर पांच नए कर्मचारी साइट पर आए, हर एक की शादात हो चुकी थी।.
पूरे डिपार्टमेंट में यह बात फैल चुकी थी कि मुझे गंदा समझा जाता है।.
काम की जगह पर बदलाव हुआ तो मैंने खुद को नए स्थान पर ढाल लिया। पाँच कर्मचारियों की पत्नियों की ज़रूरतें पूरी करने लगा।.
कई बार वो अधिकारी मुझे पीटता।.
एक-एक लंबाई का स्वाद तो बस अपने आप में होता है। जिसने पीछे से झटके खाए हैं, उसे इसका अहसास है।.
हफ्ते में एक बार, सलोन जाकर वैक्सिंग करवा लेती हूँ।.
जब कोई मुझे धोखा देता, तो हर कोई पैसे देने लगता। मैं अपने ही ऑफिस का गुलाम बनकर रह गया था।.
हर बार जब मेरी ट्रांसफर किसी नए शहर में होती है, मैं स्वास्थ्य जाँच करवा लेता हूँ। डॉक्टर के पास जाकर एक सर्टिफिकेट भी ले आता हूँ। इसमें लिखा होता है कि मैं यौन रोगों से मुक्त हूँ।.
जहाँ नया स्थल होता है, वहाँ यौन रोग का प्रमाणपत्र चेक किया जाता है, स्थानांतरण पत्र के साथ।.
हर बार जब टॉयलेट से निकलता हूँ, पोछने के बाद भी चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।.
हर बार पाइल्स होने पर गुदा में तेल नहीं डाल सकते। कब्ज न आए, इसलिए भोजन पर ध्यान देता हूँ। खाली करने से पहले ऊपर से नहीं, अंदर तक तेल लगाकर चढ़ा देता हूँ।.
दस साल से इस विभाग में काम करता आया हूँ, पूरी तरह बेजार होकर।.
मज़ा आया कहानी सुनकर? अपना ख्याल ज़रूर शेयर करें।.

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