गांड में लंबे लंड से चोदने का अहसास था।

JaiJai
Jan 2, 2026 - 13:31
Jan 21, 2026 - 15:22
 0  3
गांड में लंबे लंड से चोदने का अहसास था।

ट् के टिकट घर पर एक वक े दोस्ती । उसकी ांों े बी िा लंड मेरे िछवाड़े ें कै ा? धमेदा झटकों  शर को झकझ िा।?

अब एक ात बत ूँ - मेरा नाम राज है। उम्र े हि  छह और     हूँ,  आठ इंच ाले ाँ   करीब। ारीरि   मधयम और पतला, हर पर गोपन झलकता है।.

पिछली कहानी

मुझे मिले एक साथ दो लंड

ुम् तरफ े मिा प्यार  गहर 

ि एक असल कय  आय ूँ, इस बार भी। ऐस्सहोल ें सेक्स ी कहानी के जरि  है।!

एक वक्त ा, मैं मुंबई गया  था का  चलते। यह सब ोविड से बह पहले   ै।!

सुबह   बजे  उतरकर ैं दादर शन पर खड़ा ।.

ैर ींचत  मैं लोकल ट्रेन े प्लेटफॉर्म की तरफ बढ गया, वल  ा। मुंबई में काम के िलसि ें मना-िरन आम  थी, ो स्टेशन पर किसी से ा पूछने की ज़रूरत नहीं पड़ी।.

सीधे चलत  ैं दादर के पशि िस्से की तरफ पहुँ गया।.

अचनक लगा किी के पीछे- चलन ा।.

तब सुबह के  बजन  आए। कम   गए, िसक वजह से पष  - कोई मेरे पीछे आ रहा है।.

िना ि े-समझ ैंने ि हिाया, ि े-े लोकल ट्रेन के टिकट काउंटर की तरफ चल पड़ा।.

इन ें खड़ा  गया, बोरीवली के टिकट के लिए।.

सब  तभ मन लगा, जब टिकट   आई।.

थोड़ी देर में एहस , कोई े मेरे  के पीछे खड़ा है।.

पलटकर नज डाी, तो शायद वही आदमी था जो मेरे पीछे- चल रहा था।.

थोड़ा ा गुस्सा  गया। उधर, मैंने उसक ओर ा - ऊपर से कर नीचे तक।.

मगर   ैंने उसे देा,  ार कन लगी।.

 गल  रह ा, ि भी ैं  ा पानी एक ही ूँ में  िा।.

उसक नज मे  ऊपर िी थी, पलक झपकन  तज़ार कर रही थी।.

ि अचनक उस आदमी ने  िा - अरे, पलट के क्या ां रहा है? तेरा नंबर आ ा… जल े टिकट ले े!

   े काउंटर  ओर कर बोला - बोरीवली, पस ा टिकट ि।!

पैसे जम करक ैंे टिकट ले िया। ि वहीं ि पर खड़ा हो गया।.

फोन पर नज़र लन लग ैं, ताकि पत चल  आदमी किधर िकल पड़ा।.

उसक नजें मेरी ओर  गईं, एकदम िपक गईं। िर िड़ पर  जाते ही आव आई - बोरीवली  िकट ि।!

जब मैं कुछ समझ  रह ा, तभ उसक िें मे ऊपर ि गईं।.

ैं जब उसे देा, िति और  ़राब हो गई।.

लंाई उसकी छह फुट से  आग ी। गोरा- नहीं, ुंधल िी में ुका हु गत हर पर िरछ कतरी दाढ़ी। ऊपर सफेद हाफ शर्ट, िसमें बांों का घनपन अचनक िं गय ा।  ाली पैंट, शर्ट के दर ीक   , िसस वजन एकदम ताकतवर लग रहा था।   , ांें ी,  ि लन     अभ शर ें भर ो।.

सब कु मिलाकर   सब पर  पड़ रहा था।.

अभी भी ो मेरी तरफ टकटक लग  था।.

तबियत  नहीं  रह ी।.

उल्टे ैरों वह मुड़ा, िकट  में ा। ैं  ास् ें खड़ा ो गया। आव़ छो ी, सव ि  ऊपर उठा - क्या हम कहीं मिे हैं?

उसक हर पर मुस्का आई, िर वह बोला - नहीं!

अरे... ! मन में ुछ बज रहा।!

शायद ें पत चल जाएग ि वहीं ै।!

ीमे स्वर ें  शब उसके होंों  िकले।.

े क्या ा? ैं समझ नहीं ा।?

वह- कुछ नहीं!

अचनक लगा, कहीं पर तुम्हें देखा ा। शायद इधर-उधर  चलत ि गया होंगा। वैसे, तुम्हारा नाम क्या है?

वह- इमरान!

मेा नाम नकर ि   आता है ुरा । कॉलेज के वक एक  ि ा, उसका भी  ऐस ी नाम ा।.

उसने हँसत  कहा - क्या ो मु जैसा लगता है?

अचनक  मन में आया… नहीं, ि नहीं, तुम इतन गर लग रही हो।!

उसक  ें कु पल   ही िा।?

मैं चुप रहा.

ि  ुस्ा। हां, वही मैं हूँ, कहकर आव उठी।!

उसने  े निचले होंठ को दांतों ें दबा िया। ि ा - ह्म्म… मेरे … और भी कुछ गर है!

मे तरफ उसक नजें सीधी थीं।.

कहा मैंने - इमर, मने क्या कहा?

बस इतन कहूँगा…   नहीं।!

ो... यद तुम् मतलब कुछ और ा।!

इमरान – क्  है? ाँ… अगर िमा ें कुछ और चल रहा है, तब !

उसने आंख मारत   कहा।.

एक े में ें ुकी, हल िर ि गई।.

ह्म्म… इतन ेंपत ो तुम? इमर।!

शायद ैं और , दोनों  ऐसा समझ ा रहे हैं।.

हाँ, ात  सच है… पर फिर ी क्ों घबर रह ो? जो मन ें है, वह  ो।!

ीक ै, अगर तुम्ें कुछ कहना है तो कह ो। मे  तो कुछ  नहीं ै। ो सकता है, मैं हां कर दूँ…  ी, इसमें गलत  ै?

इमरान ा - अच्छा… हम्म… क्या  है? घर पर आन ा तुम्हें। वहाँ मैं अकेला रहता हूँ। रात ़ारन ो, ो साथ भी रह सकते हो।!

 ा,  ऐस लग े मेरे दर की सच बाहर  गई ो।.

सचम? मैं तेरे घर पर रात भर ठहर सकता हूँ…  कहा, ैं आऊँ?

इमरान – हां, क्यों नहीं… ठहर । मैं ो अकेले रहता हूँ, ऐसे में कोई िक्कत नहीं। सच बतँ, तुम्हारे ि रातभर ठहरन ़ा ि हो सकता है!

मुस्का   उसन  शब कहे।.

क्या  ै… मे समझ ें कुछ नहीं आया?

उसक हर पर ुस् आई, ि वह बोला - अभी मैंने कहा था कि मेरे  कुछ और  गरम है!

उसने कहा,  लौड़े पर ा, फिर जोर से हंस पड़ा। इमरान ा - आज बोरीवली में काम है, पूरा दिन खत ो जाएग वहीं…शाम को नागपुर लौटना है…ट्रेन की टिकट ार ै!

इमरान – ा, पत ै ट्रेन की टिकट मनमी से रद करव ा सकती है। बस, इचा हो तो कल सुबह की जन ैं  करके तु ौं ूँा। !

 े – अरे नहीं, ोंि तुमने कहा, तो मैं कल सुबह की टिकटें ऑनलाइन बना लूँगा!

  ोरीवली में िलन   ै। इमर, यह सुनकर अच लगा। दफ़्तर का काम आज खत्म कर लेा।!

 है, ऐस करन हतर ोगा।!

 आएगा, ै न? मे उमें तुम्हारे  ़ी रहेंगी।!

सच कहूं ो, मे इचा है कि मैं तुझस ़ा रहूँ।.

अचनक बोरीवली े ट्रेन पहुँ गई।.

ट्रेन  दर हम ों पहुँ  े।.

अचनक   चलते-चलत ो मुझे अपना नंबर थम गया। कुछ  बा हम ों ोरीवली ें े।.

उतरा ट्रेन से ो, ि गले लगा े। ा - जो मेरा हॉट है,  ो, आठ इंच ा है।.

उसने कहा, िर  े गाल पर , एक ाय बोा,  ी चला गया।.

बोलन े पहले ी वह ों   ुम   ा।.

ि ि वट े मैं वहाँ से ऑफिस पहुँ गया।.

उस   आव़ मेरे ि में चल रह ी। कानों तक वही लफ्ज पहुँ रहा था।.

गर हव  ोंे। 20 ेंटीटर   पहल  ी चिपचि महस  ै।

मेरे िमा में एक   कई ार धमाके ी तरह आई। पूरा दिन काम करत रहा, िर ी मन डगमगा रहा।.

आंखों में  नहीं, सिर्फ़  एक इमरान।.

कई सपन ि  े में ीरे- उठन लगे।.

दोस्तों, ैं  कहन   रह ूँ - आप  ही अब समझ ा।.

छह बजकर कु मिनट  गए े, तभ ाम सम हुआ।.

बाहर िकलत  रज  शन ें चमक उठ पथ।.

पहली , मैंने  उठ और इमरान को यल किया।.

इमरान ोला - अरे राज, तेरा  आएग चकर ा था। अब तू कहाँ अटक गया?

काम तभी-तभ ्म हुआ ा … ाँ।.

दिन भर   तक, मन में तुम्हारी  आती रही।.

उस गर-गर बात  ़ि और आठ इंच  चरा – दिमाग ें मते रहे।!

इमरान – अचा हाँ भई, ठहर ़ा। सबसे पहले एक ात बता, तू िधर है?

हाँ, मैं चामुंडा सर्कल के आसपास हूँ,  वल  ें है।!

ीक ै, वहीं खड़े रहना। तुम मे ी दूर नहीं हो, मैं ुम्ें लेने आ रहा हूँ। अभ ि ां मिनट तजार कर ा।!

फोन काटत  उसन यहीं कहा।.

ठहर गया मैं, उसके आन  समय तत खत ।.

बस तभी   याद आई… आठ इंच। ां रुक गई, ्योंकि िछले कई महीने से को तगड़ा अनभव नहीं हु ा।.

पहल  ी मेरी ऐनस कसकर  गई थी।.

आग कहीं नज आया एक मेडिकल स्टोर।.

एक ि मैं वहाँ पहुँा। तब जैली ो खरीदा, ि ामा   ा लिया।.

उस पल आग सड ि  लडा, िसे मैं हीरो समझत ी, चलता हु दिखा।.

दरव़े  दर कदम रखते ही वह मेरे ास आया। ि उसन े गले लगा िया। मेरे गाल पर किस किया, बस ऐस ी।.

वह बोला- चलो!

बाइक के  जगह   ैंने उसक  रव   सल िा।.

शर से आती मर्दों  शब उस हवा में ़ रही थी।.

घर उसक ाँ मिनट दूर था।.

े ही घर में कदम रखा, ा - पहले आर  नह ो।.

बस  गया मे सहन।.

  ैं उसके बेडरूम में ुसा, ामने खड़े रहते हु  कपड़े धर रह गए।.

 लडा मेरी तरफ खत ी जा रहा था।.

ीक ै... मैं ़ी  े लि हर चला जाऊँा।?

हां, क्या मैं भी  ँ? अभी ेरी ी है। तुम पहल चलो, ेजी  ार हो ो!

बाथरूम  दर  पड़े,   गत ।.

ँखों  उसक नजर  ऊपर ि  थी।.

शायद उस एहस  गया था कि मैं उस अपन  चाहता हूँ।.

ानी गर  ा, िर मैं लय    नल    गया।.

ानी े पाइप  ीछे े छेद में डालकर ऐनस साफ़ करने के ,  शरीर और चेहरे पर लगाने लगा।.

िसल गया साबुन, ैं पकड़ा नहीं।.

दरवा बाथरूम का टटलत  खिसक गया। नजर साबुन पर   झपकी में  गए े। आंखों में छलां लग गया साबुन, धधक उठ शन दर।.

़ी  के बाद  लगा साबुन।.

खड़े हो  एक ़ सिर   लगी।.

  झरन ें आंखों में सनसनी थी। ीमे  दरव लकर शौचालय   बै गया, तभ पलकों पर डक महसूस ।.

आंखें साफ़ करते ही एक छवि  गई… इमरान ि नंगा मेरे सामने।.

आधा उठ  लंड उसका मेरी नजों के सामने था।.

ें जब उस पर ि गईं,  ैं ि हो गया।.

उठ   ि नहीं था, पर फिर भी आठ इंच  ़्ा का था।.

आसम  ओर नज उठ मैंने, तभी इमरान  कहा -  करना।.

अब मु पत चल गया था कि ो अपनी गर लंड के बा ें ात कर रहा था।.

ो मे  पकड़  आया,  ा खड़ा किया। ि शौलय    ॉवर में गले लगा लिया।.

पच ो मेरे होों पर अपने हो ले आया, ि  समझ  ुका ो, ी से मत रहा।.

आग  तरह जल रहा था मैं भी, इसलि  नहीं हटा।.

दो  अब एक ी सां में समा गए।.

ऐसा लगा, माो प्यार   जनम पलक झपकते मु िल े हों।.

हथ िसलत रही पी से कर कमर तक। साबुन   े- टपकने लगा गरदन  े। उसक गलियां चलत रहीं,   खज ूं रहा हो। एक े से  कर सर  तक सब     में   ुका नहीं।.

कभी-कभी वह मे ों  ा, कई  तन के  िस् पर मुँ ेर ा।.

पागलपन  तरफ बढ़ रहा था ैं।.

ी के सा-सा हव  गर्म हो गई ी। यद वहीं  गए  हम ों।.

कौन नता था कि  पलों में मेरी उमों पर   एगी।.

अब उसक नजों में प्यार की बज लच  झलकता था, ऐस ैं तभ समझा।.

भूखे पशु की ों  इमर े मे ओर देखा।.

ों े मेरा चेहरा सम िा…  े नीचे की ओर लत । सामने उभर एक ऊर शर-, जो अब तन गय ा - 9 इंच से भी आगे, घना और मज।.

इमरान  वच गहरे रंग की थी। उसका हथियार ी काला था, े किी काले घोड़े की मड़ी  िकला हो।.

आंखों के सामने  सल लटक रहा था।.

इमरान - मा करना। ैंने तुझसे थो़ा सच  ा, कह ा कि मेरा लंड 8 इंच का है… पर अगर सच लता, कि ो 9 इंच से भी ऊपर, घोड़े  तरह मोटा और काला है, तो शायद तू आता  नहीं।!

वह झूठ बोला, इसक ाद उसक असल हर मन आया।.

उसकी ांों के बी हा लत  ैं कहा - बढ़िा।.

उसन िी-ि धमक भर वर में कहा - तू तो हर पल  रहती है, अब  गर्म   कर।!

अचनक  शब उसकी  पर आत  मैं स्तब रह गया।

इमरान –  ा तूे, मैं तुझपर मर िूँगा? गलत। मेरी ान, आज ऐसा करूँगा कि पत चल असली ताकत क्या होती है। पूरी रात… चाहे  ू, चाहे ि, मेरी मर हर पल तेरे शर में घर कर एगी।.

ि  उसने अपन गलिां मेरे मु में ा दिया। हाथों से मेरे मुँह के ऊपर-  ींचकर फैलाया। धी े उसका केला मेरे तर चल गया।.

 ी मैंे उसके लौ़े को मुँह में महसूस किया, ि हल ी मुान आई घबरहट   चल आई।.

ह्म्म… इमर ा। ा तू ेंपती भी है, मेरी ारी?

़ी देर लंड चूसने के बाद हम दोनों की हवस इतन बढ़ गई ि चुदाई  करने का मन िा।.

एक डर   तर  रह ा। उसका ा, मोटा, नौ इंच का अरबी घो़े जैसा लिं ंदर ा। सिहरन  महस ो रही थी मुझे।.

अब कु  नहीं हो ा … शायद बस इतना ही भव था

अब तय ो चु ा। मन-ही-मन बोला, "राज, आज  को धत पर े के लिए तैयार रहना।" े एक ऐस मज़ेार पल ा, जो  उम याद रहा।.

एक नहीं ा, मैं सीधे ितर पर ि पड़ा। दोनों  हव ें चढ गए।.

मैंने इमरान के सामने अपनी गांड लकर  कर दी।.

़ी   इमरान ने हथी में जमा थूक ो मेरे िछवाड़े के ऊपर ाना  कर िा।.

लग रहा था ि डर  ै, ि भी सव ि ें  रहा था - क् ो बड़ा काला लंड मेरी गांड में समा पाएगा?

बस यही सोच रहा था ैं, अचनक इमरान ने अपना लंड मेरी गांड के ऊपर िा दिा। िर एकदम से े ज़ोर े धक्का देकर तर  िा।.

उसने धक्का दिया और  लगभग छह इंच का, े सि   मेरी गांड के दर आधे से ी ज़्यादा  गया।.

एकएक मु चककर आया।.

एकदम अचनक लगा कि इमरान  ो 9 इंच से ा लंबा  ेरी गधे में पूरा  ुका ै। ीरे-ीरे आगे-  लगा था  दर।.

 सकत  ितर े पार खून  गया था।.

जब मैं ेहोश था, तभी उसे समझ आया।.

तब भी ो मेरी       ा रहा था।.

  तरबतर उसका लंड मेरी गांड से हर आया।.

  े लंड ो बाहर ींचता, फिर एकदम ेजी  उसे पूरा-पूरा तर ों देता।.

 सकत  ो लंड मेरी   बल चढकर ाती तक  गया था।.

मैं होश  पड़ा था, तभ उसने भूखे ां की तरह मेरी  पर हमल कर िा।.

आध  े बाद  ी।.

एकदम अचनक समझ ें आया कि मेरी गांड में 9  से     रह ै। खून की लकीर ां े बिना रुके टपकती जा रही थी।.

उसक ँख लते ही इमर बोला - अबे राज... होश ो आ गया। , आधे घंटे से मैं ेरी ि कर रहा हूँ... अभ तक महसूस हुआ ा? अच लग रहा है या ि   रह ै?

कैसा लग रहा था,  -चकर मन ें  उठत ा।.

ऐस लग रहा था, मा  े किसी ने आकर धमाका कर दिा हो।.

पलटकर जब हाथ लगाा, तो उसमें खून ा।.

मैं डर गया.

इमरान हंसत  बोला - जान, घबरा मत। आज तेरी गांड का  िं गया है… तू मेरे सा चढ़ गया है। अब तू एक साथ तीन लंड भी सह लेा… इतना ा दिया है मैंने तेरा! यद तू मुझे धनयव  ा होा!

उसका बोलन लग चल ी रहा था, इधर-उधर े मेरी ि करत ा रहा था।.

थोड़ी  ें तकल कमज पड लगी।.

़ा कन ो मैंने कहा, इमरान।!

वह रुका.

उसके मुँ  आव़ निकली, तभ ैं कहा - अपना लंड बाहर निकाल। ि धी वर ें ोला,   बल ेट जा।!

बितर पर कर इमर सीधे लेट गया।.

 मने उसका लंड सलाम कर रहा था।.

खड़ा हो  ैं ा उसके लंड  तरफ बढ़ा।.

 ने े के हिस् ो छू िा।.

अचनक ुम्ारे  में कौ   हो गई… चारों उँगलियाँ आपन  ो सीधे ंदर धक िा।.

सोच ें पड गया - आजकल राज    घमंडी ो गया ै।!

एक  से इमरान का लंड पकड़  ैं बि  ऊपर ैठ गया।.

ैंे आंखें बंद कर ीं, िर े- ा लंड तर तक समा लियa ऊपर-    ुँ उसके लंड पर रद चलने लगा।.

कभ ऐस लगा, े दर्द कने का ाम नहीं  रहा। पर फिर मैं े- उठने लगा।.

़ी  तक कुछ और चत रहा, िर मैंने खुद पर  डालना शुरू कर िया।.

दर्द कम हुआ.

इसक  मैंने इमरान  ओर ा, ि े से ा - चलो, अब जगह बदल े हैं।!

पल के ास एक ोटी  रख  थी।.

एक पैर फर पर ा, सर मन ी मे़ पर टिा हु इस तरह ऊपर उठते ही सब  ो गया।.

मैंने कहा, चल इमरान, पूरा ों अपना लंड मेरी गांड में।!

एकदम अचनक, उसने  े बिना मेरी गांड में ूरा   दिया। ि ि ठहर े आगे-पीछे हिलन लगा।.

तभी मे दर भी उमड उठ , ीमे वर ें  पड़ा – आह… ेज़ करो, और ेज़… ूँ  चलत रह  झटका… आह, मेरी   जा इस ें… ऐस  लत रहो, बस लत रहो।!

हर े में मेरी ांों की ़ आवाज़  गई।.

िसटत आवाज़ें … हला सा पन  अब ़, ़ा और गहरा।

 मेरी लताड़ से होकर ैर  ंगू तक िसल रहा था।.

उस पल ेरी नज ि उस कि पर थी।.

नगहट भर ांें े हु ी, "इमर... ऐस   रख।" ि   एक ीमी  िकली। शर पर गर्मी  हो गई हव ें शब   तन ुल गया।

आज कुछ भी हो, मैं तय कर लि ा – पल-पल  आन उठँगा।.

उसन कहा - राज, ़ी ेर ुको। पल पर   बल लेट जाओ।.

  बल टन पर मैं कहा - आओ ा, तुम्ारा ।!

उसने मु पर ीरे  शर ाल ियa ि एकदम बिना ठहर के अपना पूरा लंड मेरी गांड में  दिया।.

िसक भरी।  नत नहीं। ि   गई

उसका पूरा लं हथि मे दर  ँसा, िर ो पीछे  आग  तरफ बढ़ने लगा। ऐस लग  तर  मश चल रह ो।.

शुरू हु इमर  लना - हाँ… हाय… िाओ े, पूरे दम े।!

उसक िर हल  कता, ि पीछे हटता।.

आँखों से पानी झलक रहा था, तब भी मैं वह शब लता जा रहा था - ो, लगार ो… इस  को ुप कर ो।!

इमरान बस ोर-ोर  ां   रह ा। हर धक   मेरी    टकरा रही थी। कभी-कभ उसक आव भदक उठती,  ि   ि  रह ो।  एकदम लकर आग बढ रह ा।  दर  हर ि उसक िलन   उठता।.

एक  वक  उसकी गांड माी जा रही थी।.

ौ बजे का समय  गया था,  े।.

उसन कहा - राज, अब ो मेरा पानी टन ी वाला है… जल्दी  बता… कहाँ उतू?

अचनक मैंने कहा - ो, राजा, अपन  मेरे मुँह  हट ो।!

़े और झटक ि उसने, फिर लंबी ां के सा अपन  मेरे होंों पर िा दिया।.

उसने मेरे ोंों पर अपना मुँह धकेल िा,  ें बडबड़ाा - अभी गन्ने का रस छलकन ा है…   सम े, मेरी तरफ  एक झलक पी ेने  ि।!

इतन कहते ही मेरे गले में ा लं  गया।.

पिचकारी   उसक  से िसल गया। ो मेरे गले से लगकर पेट तक  पहुँा।.

हल े नमक   एक झलक खटा   रही थी  ें।.

उसका लंड  ुँ ें ा, ैं हर    से ाफ कियa।.

उसके लंड  लत ढीली े भी ो 7-8 इंच ें नजर  रहा था।.

थका उसक हडिों ें घर कर चुकी थी।.

इसक  हम दोनों बाथरूम ें े, नहाकर जग महस की। जन करन े बाद ीं आई।.

सुबह-बह ि   आई मेरी बजाई पर। एक ि ो कहानी जरूर लिखूंगा।.

धन्यवाद.

इस कह पर   ़् ै, ो ऐस्सहोल सेक्स के  ें ै?

मेल  ि  सकत ै, कभी-कभी कमेंट में ी।.

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