मेरी पत्नी का संबंध मेरे दोस्तों के साथ है
लड़की के घुटने टेढ़े हो गए थे। पेड़ की छाल खुरची जा रही थी। कभी-कभी धूप में चिमटी की आवाज सुनाई देती थी। एक फूल के पंखूड़ियाँ उठी, जैसे कोई बात कहने वाला हो। चाय का कप ठंडा पड़ चुका था।.
प्यारे पाठको,
साहिल कहलाता हूँ मैं। बदायूँ की मिट्टी से जुड़ाव है मेरा, वो भी उत्तर प्रदेश में ही स्थित है।
एक कहानी मैंने पहले बताई थी।
शादी के बंधन में बंधा हूँ मैं, पत्नी का नाम उजमा है। उसके मन में एक इच्छा समाया हुआ है - बड़े लिंग से संभोग करने की।
उजमा पच्चीस साल की है, जबकि मेरी उम्र आठतीस है।
एक ऐसा दिन आया जब मेरी पत्नी के साथ वो हुआ, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।!
एक बार पत्नी ससुराल से दूर भाई की शादी में घर लौटी थी।
थोड़ा समय तक मैं भी वहीं रहा, पर फिर शादी होते ही लौट आया।
थोड़े दिन पहले मेरी पत्नी माता-पिता के घर ठहर गई थी।
अकेले रहने में मजा नहीं आता, हर दिन उसके साथ सेक्स किए बिना कुछ खटखटाता-सा रहता है।
पत्नी के मायके जाए हुए अब पंद्रह दिन हो चुके थे।
वो भी अभी तक सेक्स नहीं कर चुका था, मगर इच्छा जाग रही थी।!
दोस्तों के साथ मिलकर योजना बन गई, उसे फोन करने की बारी आ गई।
तीन दोस्तों में से एक को गाड़ी चलानी आती है, इसलिए मैंने उन्हें ससुराल जाने के लिए साथ बुला लिया।
अगले दिन की सुबह हम चारों में बातचीत हुई।
तीन बजकर कुछ मिनट पर हमारा कदम दरवाज़े से बाहर पड़ा।
कई मोड़ बाद वह सुनसान पगडंडी पर टिका रहा।
आठ बजे का समय होते-होते हम ससुराल में जा पहुँचे।
सुबह के समय मेरी पत्नी ने हर एक के लिए नाश्ता तैयार किया।
दोपहर के खाने के बाद, हमें लगा कि अब घर जाना चाहिए।
उसकी पत्नी के साथ लहंगा-चोली का मेल बिल्कुल सटीक था।
पैंटी के बिना ही लहंगे में चल रही थी।!
गली सिकुड़ रही थी।.
अँधेरा छा चुका था।
हम लोगों की बातचीत के बीच में वो भी शामिल थी। उधर, मैं चुपचाप सुन रहा था। एक तरफ़ दोस्त कुछ हँस रहा था।
उसकी पत्नी को देखकर ऐसा लग रहा था, मानो हवा में कोई जादू सा घट रहा हो।
उस पल मेरा दोस्त उसकी ओर घूर रहा था।
अँधेरा हुआ, रोशनी बंद हुई। सब ने आखें मूँद लीं।
उसकी उंगलियाँ मेरे लिंग पर फिसल रही थीं।
उसकी माँ हाथ कोमलता से पीठ पर फिरा रही थी।!
हाथ जोर से दबा कर मैंने रोक दिया।
उसने मेरा हाथ अपनी मुट्ठी में लिया, फिर धीरे से लहंगे के भीतर सरका दियa।
उसकी योनि नम हो चुकी थी, मैंने महसूस कियa।
हाथ खींचकर मैंने संकेत किया कि अब तो बस घर पर ही सब कुछ होगा।
बैठते-बैठते उसका मन भारी हो गया।
उसकी नज़र सब कुछ पर थी।
थोड़ा सा झपक रहा था मैं।
एक दोस्त, जो मेरे पास बैठा था, उसने मेरी पत्नी के पैर को छेड़ना शुरू कर दिया।
उसकी पत्नी ने रोकने की कोशिश ही नहीं की।
थोड़ी देर बाद उसका हाथ मेरी पत्नी के लहंगे के अंदर गया। फिर वो उसकी चूत को छूने लगा।
उसकी आंखों में खुशी तैर रही थी, जबकि वो अपने पैर धीमे से सिकोड़ ले रही थी।
गाड़ी के पीछे बैठा एक दोस्त सब कुछ आईने में झलकता देख रहा था।
अब उसको हंसी छूने लगी।
आँखें बंद किए, मैं सब कुछ धीरे-धीरे देख रहा था, ऐसा करते हुए कि नींद लगी है।
उसकी पत्नी के मन में भी यही हलचल थी।
हर कोई उस कार में समा चुका था।
तभी मेरे एक दोस्त ने कहा, “कहीं ढाबे पर गाड़ी रोक लो और कुछ पानी वगैरह पी लें!”
गाड़ी कहीं रुक गई। आवाज़ आई, पानी पीने को कहते हुए।
गाड़ी के बाहर पैर पड़ा।
खाने की व्यवस्था ढाबे पर दिखी मुझे।
किसी और के होने का सुराग नहीं मिला वहाँ।
मैंने कहा, “मैं खाना खाऊँगा। तुम लोगों को खाना हो तो खा लो!”
मेरे दोस्त ने कहा, “तुम खाना खा लो, हम लोग गाड़ी पर भाभी के साथ हैं!”
मैंने कहा, “ठीक है, तुम लोगों को मैं अभी आता हूँ!”
उस ढाबे के पास गाड़ी रुकी, धीमे अंधियारे में छुपी हुई।
मैं अंदर गया।
पूछ लिया मैंने वेटर से - "कुछ खाने वाला उपलब्ध है?"
वेटर बोला, “साहब, अभी सब्जी खत्म हो गई है। कहो तो आधे घंटे में तैयार करके दे दूँ!”
मैंने कहा, “रहने दो! एक सिगरेट हो तो दे दो!”
सिगरेट हाथ में आई, धुआँ छोड़ते हुए कदम गाड़ी की ओर बढ़े।
फिर बस, एकदम से मेरी नजर गाड़ी के भीतर जा टिकी।
थोड़ा सा भीतर की झलक मिल रही थी।
खड़ा होकर मैंने किनारे पर जाकर झांकना शुरू किया।
तीनों दोस्त मशीन के भीतर थे। पत्नी से टेढ़े होकर वो उसके स्तन पर जोर डाल रहे थे।!
उसका दोस्त हल्के से लहंगे को सरकाता गया। फिर मुँह नीचे ले जाकर वहाँ चुम्मे लेने लगा।
मेरी पत्नी के मुँह में एक साथी ने धीरे से अपना लिंग रख दिया।
एक रात वह पत्नी बेचैन होकर दोस्त के लिंग पर मुंह ले गई।
मेरी पत्नी को लेकर तीनों यार बहुत उत्सुक थे।!
मेरी पत्नी के साथ एक आदमी दूध पी रहा था, वहीं दूसरा उसकी जांघों के बीच मुँह छिपाए हुए था।
एक साथी ने अचानक अपना लिंग पत्नी की योनि में घुसा दिया। फिर वह तेजी से हिलने लगा।
वो ख़ुशी-ख़ुशी अपने पति के साथ जुड़ रही थी।!
एक बार किसी के साथ ऐसा हुआ कि उनका प्राइवेट पार्ट आम से ज़्यादा लंबा नज़र आया। वो शख्स अपने मुँह से उसे छूते हुए था।
उसके मुँह से लिंग निकलवाकर, एक पल बाद वो दूसरे के पास गया। फिर धीमे से अपना घुटना मोड़कर चूत में घुस गया।
उसे मजबूती से पटक-पटक कर हिलाने लगा।
उसकी पत्नी को खूब मज़ा आ रहा था। हिप्स ऊपर उठाते हुए वो जोश में झूल रही थी!
उसी वक्त एक साथी ने पत्नी को अपने ऊपर बैठा लिया, धीरे से भीतर घुसा।
उसकी पत्नी चिल्लाना चाहती थी, मगर किसी साथी ने मुँह में लिंग घुसा दिया।
आवाज़ उसके गले में ही अटक गई।
एक तीसरे आदमी ने अपना लिंग पत्नी की योनि में घुसा दिया, फिर वह ज़ोर-ज़ोर से धकेलने लगा।
मेरी पत्नी को वो तीनों दोस्त जोर-जोर से धक्का दे रहे थे, मैं आखिरी कोने से खड़ा हर एक लम्हा देख रहा था।
आधे घंटे तक लगातार उसने मेरी पत्नी को मारा।!
तीस मिनट बाद, पहले व्यक्ति ने उसके होंठों पर छिड़क दिया, फिर दूसरे ने जबड़े के भीतर ऊपर चढ़ा दिया, आखिर में तीसरे ने गले के पास ठहरा दिया।
तीनों का रस मेरी बीवी ने पी लिया।!
मुँह पोंछा तौलिए से, फिर कपड़े सँभाले। गाड़ी में आराम से बैठ गई।
तीनों दोस्त मौके पर आकर बैठ चुके थे।
गाड़ी के पास पहुँचकर मैंने दरवाजा खोला, अंदर बैठ गया।
गाड़ी चलाने के लिए उसे संकेत मिला।
एक दिन मेरे दोस्त ने अचानक कहा, "भाभी जी कितनी सुंदर लगती हैं!"
मैंने मुस्कराते हुए कहा, "धन्यवाद भाई।"
घर की ओर कदम बढ़ाया हमने फिर से।
1 बजे रात में वापस लौटे।
मैं घर पहुँचा, तब मेरी पत्नी से बात हुई।
वह मना करने लगी, “मैं बहुत थक गई हूँ! आज नहीं, कल करेंगे!”
तभी दिमाग में खयाल आया - अगर तीन पुरुष एक साथ हों, और सबके शरीर भारी-लंबे हों, तो फिर मज़े का ठिकाना नहीं रहेगा।!
तब मैंने पूछा, “गाड़ी में मेरे दोस्तों ने तुम्हें परेशान तो नहीं किया?”
मेरी बीवी बोली, “नहीं! आपके दोस्त बहुत अच्छे हैं! बहुत ख्याल रखा उन्होंने मेरा!”
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