खाला और मैं पूरे गांव से चुद गई
Desisexkahaniya
Xxx Xxx की कहानी में खेत के पास गाड़ी रोककर मैंने मौसी को उन लड़कों के साथ जो वहाँ काम कर रहे थे घेरवा दिया। उस दौरान मौसी का अंदरूनी कपड़ा भी दिखा। मैं भी उसी बीच शामिल हो गया। ये थी मेरी पिछली घटना।
मेरी खाला की चूत चुदाई की हवस
एक बार मैंने पढ़ा कि किसी ने अपनी मौसी को शांत करने के लिए एक जवान आदमी के साथ संबंध बनवाया। वह इतनी तेज़ी से चल रहा था कि उसकी पीठ टूट गई, फिर भी वह और तेज़ चाहती थी।.
थोड़े दिन बाद हमने फिर से औरंगाबाद जाने की सोची। घरवालों को छोड़कर हम चल पड़े। कार किराए पर ली, उसी में बैठकर रवाना हुए।.
सिर्फ मैं और खाला गाड़ी में थे। हर पल कई गाँव आते, उनकी हरियाली इतनी घनी कि मन शांति से भर जाता।.
थकान महसूस होने पर गाड़ी से उतरकर हम खेत के किनारे पानी पीने लगे। कई खेतों में जुताई चल रही थी, हर एक में चार-पाँच आदमी काम करते दिखे।.
खाला को मजबूत मर्द नजर आए, तभी उसकी चूत नम हो उठी। अरमान धीरे-धीरे जाग उठे, बस इतना हुआ।
हंसते हुए मैंने पूछा - अगर इतने सारे आदमी एक साथ आपके साथ सेक्स कर लें, तो आपको क्या महसूस होगा?
खाला बोली – ऐसा ख़्याल तो मेरे दिमाग में आया ही नहीं। मैंने कहा – फिर अब रुकने की क्या बात है? हवा अच्छी है, वक्त सही है, चारों ओर ढेर सारे लड़के घूम रहे हैं… जिससे मन करे, उसी से कर लो।!
खाला ने कहा - मन करे जिसके साथ, पर मुझे तो हर किसी के साथ करना है।
बोल उठी मैं - यह सब हो पाएगा तो कैसे?
शबनम, सिर्फ़ यही कहना है - खाला ने मुस्कुराते हुए कहा। तू बस देखती रह, आज मेरा जलवा चढ़ेगा। तेरी चाल भी बदल जाएगी, इसमें कोई शक नहीं।!
खाला तुरंत कार से बाहर आई। फिर वहीं आसपास घूमने लगी।.
मज़दूरों में से कुछ ने एक सुंदर औरत को देखकर पलटकर तिरछी नज़र से झाँक लिया।.
थोड़ी देर बाद वह ओर मुड़ी, जहाँ मजदूर खड़े थे। सलवार उतारकर सड़क के किनारे मूतने लगी, ऐसा लगा मानो कुछ पता ही नहीं। इधर, कई और मजदूरों की नजर उस पर टिक गई।.
इस Xxx Xxx चुदाई कहानी का आग़ाज़ तब हुआ, जब वो पल आया।
उठकर खाला ने मूत दिया, फिर सलवार का नाड़ा बांधा और मजदूरों की ओर बढ़ गई।.
एक आवाज़ आई - प्यास लगी है, क्या थोड़ा पानी दे सकते हो? मौन के बाद किसी ने जवाब दिया।?
एक मज़दूर बोला - साहब, इसका क्या हुआ?
खाला ने कहा - सुनो, पीने के लिए पानी देना।
पानी पीते समय एक मजदूर ने लोटा थमाया। खाला ने जानबूझकर मम्मों के ऊपर पानी डाल दिया।.
बारिश में भीगते हुए खाला की कमीज़ से काला स्ट्रैप झाँकने लगा। पास खड़े मजदूर ने ध्यान दिया, "अच्छा, पानी चढ़ गया है आप पर।"
सच कहूँ तो, नम हो गई वो… पर प्यास टिकी रही।
खेतों के पीछे बड़ा कुआं है, मजदूर ने मुस्कुराते हुए कहा, वहीं जाओ तो प्यास शांत हो जाएगी।
खाला ने कहा - नहीं बाबा, मैं अकेले जाने से घबराती हूँ। तभी चलूंगी जब आप सब मेरे साथ होंगे।
एक मज़दूर ने कहा - अरे मैडम, हम तो ऐसे नहीं छोड़ सकते आपको प्यास लगी हुई। चलिए, सभी आपके साथ चलते हैं। मैंने कार से बाहर कदम रखा, खाला के पास जाकर खड़ी हो गई। फिर मज़दूर बोला - क्या अब और लोगों को बुलाने की ज़रूरत पड़ेगी?
बहन ने कहा - जितने लोग मौजूद होंगे, उतना डर घेरेगा। जितने आ सकते हैं, उन्हें बुला लेना।
मुस्कान फैलते हुए मजदूर चिल्लाया - अरे भीमा, मुन्ना, गुड्डा, छुट्टन, शादाब, लांड्या, हटेला, कटेला… सभी जल्दी आओ। शहर की मैडमों के लिए कुएँ के पास पानी भरना है!
आवाज सुनते ही पास के खेतों से मजदूर दौड़ पड़े, कुएं के पास जमने लगे। इतने सारे लोग एक साथ देखकर मेरा डर छूट गया, वहीं खाला के चेहरे पर खुशी छलक रही थी। झूमती हुई वो कुएं की ओर बढ़ी। मैं पीछे-पीछे अपने घबराए मन को संभालते हुए धीमे कदमों से चल रही थी।.
खाला कुएँ के पास पहुँची तभी एक ऊँचे कद के आदमी ने आगे बढ़कर कहा - मैडम, फौज में से जिन्हें चाहें, उन्हें चुन लीजिए, शिकायत करने का मौका नहीं मिलेगा।
खाला ने कहा - मुझे किसी से तफरीक नहीं। हर कोई समान अवसर पाए, यही चाहती हूँ।
उस आदमी के मुँह से एक नहीं, बल्कि दो चौंकाने वाली खबर सुनते ही आँखें पहले से भी ज्यादा फैल गईं।.
उसने कहा – मैडम, आपके कपड़े उड़ जाएंगे। कुछ लोगों ने कम करते हुए हंसी छोड़ी। लोखाला बोली – अरे, कपड़े ही तो उड़वाने हैं। फिर भी तुम्हारे कहने पर चलती हूँ। पीछे खड़े दो बूढ़े आदमी... मैंने घटिया सौदा समझा। अपने आप को मजबूत और मुझे टूटा हुआ बताया? नहीं, मुझे तो ये जवान लड़का चाहिए। इसके साथी को भी ले लो।.
इतना कहकर मैंने उन दो बलवान आदमियों की ध्यान अपनी ओर मोड़ लिया।.
एक आदमी ने मेरे स्तन पकड़ने की कोशिश की, तो मैंने उसका हाथ धकेल दिया - खाला के बाद अपनी बारी आएगी। उन सभी पुरुषों की नजरें दो जवान औरतों पर टिकी थीं, जिन्हें चीथड़ों में बदलने के लिए वे बेताब थे।.
फिर भी, मेरी खाला के पास समय की कोई कमी नहीं थी।.
उसने पुरुषों से कहा - एक पंक्ति में आओ। कपड़े उतार दो। वे सभी बिना झिझक खड़े हो गए, मानो कोई डांट सुन चुका बच्चा हो। .
कईयों के पास जितनी मोटाई थी, उसे देखकर मेरा ध्यान वहीं ठहर गया।.
अब समझ आता है कि हिंदुस्तान में आबादी क्यों इतनी तेजी से बढ़ रही है। मेरी खाला पहले आदमी के पास गई, उसकी टाँग पर बैठ गई और उसका लंड चूम लिया। उसके बाद दूसरे के पास गई, वैसे ही किया। फिर तीसरे के पास भी ऐसा ही हुआ। धीरे-धीरे उसने हर एक आदमी के लंड पर अपनी लिपस्टिक के निशान छोड़ दिए।.
एक के पास जाकर खाला ने उसके लंड को मुंह में लिया, थोड़ी देर बाद वैसे ही दूसरे के साथ किया। कुछ पल बाद तीसरे की बारी आई। हर एक के साथ यही हुआ - दो-तीन चुस्से लगे, फिर अगले पर ध्यान गया।.
कुछ आदमियों का धैर्य खत्म हो गया, क्योंकि खाला ने ज़ोरदार तरीके से लंड चूसा। इस क्रम में, कई पुरुषों का वीर्य बह गया। थकान से चूर होकर कई लोग बाहर हो गए।.
खाला की नज़र जब उन आदमियों के सामान पर पड़ी, तो गुस्सा आग बनकर फूटा। ऊपर से चिल्लाकर बोली - अगर किसी का घटिया हथियार टूटने वाला हो, तो वो खुद बता दे। इस तरह चीज़ें बर्बाद करना नास्ते के बराबर होता है।.
खाला पहले आदमी के पास गई। वहाँ पहुँचकर उसने अपने मम्मे उसके लंड पर घिसे। बाद में दूसरे के पास जाकर भी ऐसा ही किया। तभी तीसरे की ओर बढ़ गई। एक-एक करके सभी के लंड पर उसने यही काम किया।.
एक बार फिर, कुछ पुरुषों की चीजें ढीली होने लगीं। उस समय वे महिला की ओर संकेत करने लगे।.
खाला ने हर एक का लंड मुँह में डाला, फिर वो अपने मुँह में गाढ़ा पानी भरवा लिया। इसके बाद सभी बेसुध होकर लटक गए।.
एक-एक करके वो हर आदमी के पास गई। खाला ने पहले वाले के लंड पर अपनी गांड चढ़ाई, फिर अगले के ऊपर झुक गई। बाद में तीसरे के साथ भी ऐसा ही किया। हर किसी के लंड पर उसने धीरे-धीरे अपनी गांड घिसी।.
कभी-कभी ऐसा होता है कि आदमियों के सामान में ढील होने लगती है।.
फिर कभी खाला ने सबके ज़िदगी का रस चूस लिया, तो हालत खराब हो गई।.
अब सिर्फ कुछ आदमी ही बचे थे, उनके लंड अभी भी ऊपर को उठे हुए थे। मेरी खाला जमीन पर ठहर गई। उसने ऊंची आवाज में कहा - आओ मेरे शेरो, मेरी ओर दौड़ो। मेरी इज्जत छीन लो। मेरी गांड चोद डालो। हर हिस्सा मेरा तुम्हारा हो जाए। मुझे बर्बाद कर दो।!
इतना सुनते ही सभी मुस्टंडे आदमी मेरी चाची के पास दौड़ पड़े।
एक ने उनका कुरता पकड़कर खींच दिया। सलवार तो किसी और ने फाड़ डाली। हवा में ब्रा उछालने वाला कोई तीसरा था। चड्डी के टुकड़े करने वाला शायद चौथा इंसान था।.
खाला की माँ पहले से ही बिना कपड़ों के थी।
एक आदमी ने मेरी खाला को धक्का देकर गिरा दिया। वह उस पर झपटा, अपनी तलवार निकाली। घास से लिपटी छाती ऊपर-नीचे हुई। उसका शरीर बिजली की तरह फड़फड़ाया। खाला की चीख रुक गई। आसमान में बादल छा गए।.
उसके लंड को पकड़ते ही खाला के मुंह से चीख निकल पड़ी। मुस्टंडे के हाथ उठे, और आवाज़ फूट पड़ी।.
जब लंड अंदर गया, तभी मैंने खाला को पहली बार चीखते सुना। वैसे तो वो किसी भी आकार के लंड को शांति से सह लेती थी। जब एक नहीं, दूसरे भी अपनी बारी चाहते थे, तो कोई उसके मुंह में धकेल रहा था, कोई छाती पर झपट्टा मार रहा था, और किसी ने अपना लंड उसकी हथेली में थमा दिया था।.
जब आदमी को जगह नहीं मिली, सीधे खाला के घुटनों के बीच लंड डालकर चोदने लगा।.
एक आदमी पैर के पंजे में घुसा रहा था, दूसरे का सिर में उलझा हुआ था।.
कई आदमी पटरी पर खड़े थे, समय का इंतजार कर रहे।.
खाला के चूत पर मुस्तंडा के वार जारी थे, थकान का नाम नहीं ले रहा था।.
खाला डगमगा उठती, हर झटके पर।.
मुझे पता चला कि उसकी यात्रा में खून आने लगा था।.
उधर जिन पुरुषों का चयन मैंने किया था, वे सेक्स के लिए बेचैन होने लगे थे।.
बिना किसी ढिठाई के मैंने धीरे से कपड़े उतार लिए, फिर घास पर पीठ के बल लेट गई। दोनों आदमियों ने भी अपने-अपने कपड़े उतारे। एक के हाथ में मेरी जांघ थी, दूसरे का लंड मेरे होंठों के बीच चला गया। एक ने मेरे अंदर झट से घुसपैठ कर ली, जबकि दूसरे की सांस मेरे कान पर तेज हो गई।.
उस समय मेरी खाला वहाँ थीं, जबकि मेरे साथ तगड़ी कुछ हो रही थी।.
एक आदमी, जो मेरी खाला के साथ तेजी से जुड़ा हुआ था, अचानक और भी तेज हिलने लगा।.
उसकी आंटी का शरीर दर्द से लड़खड़ा रहा था।.
एकदम से वो आदमी चीखा, फिर जबरदस्ती अपना पूरा स्राव मेरी खाला के मुंह में उड़ेल दिया।.
जब वह शख्स चला गया, मुझे ध्यान आया कि खून मेरी खाला के होंठों से बह रहा था।
खाला को सिर्फ दो सेकंड का विश्राम मिल पाया, उसके बाद कोई अन्य आदमी आया। उसने तुरंत खाला के मुँह में अपना लिंग डाल दिया और जोर-जोर से धक्के देने लगा।.
उधर, वो दोनों मुस्तान हमेशा की तरह मेरी गांड और ओंठों पर सांस लिए फैले थे।.
कुछ देर बाद एक आदमी ने मेरी छातियों की ओर ध्यान दिया। फिर वह मेरे ऊपर बैठ गया। उसके बाद वह छातियों पर घूसने लगा। ऐसे में कुछ समझ नहीं आया क्या हो रहा है।.
आज तो लंडों की गर्माहट में जैसे कुछ अलग ही महसूस हो रहा था।
हाथ के इशारे से दो और आदमी वहाँ आए। मैंने उनके लंड पकड़े, फिर धीरे-धीरे मसलना शुरू कर दिया।.
कभी न उठा था इतना सुकून, धरती छोड़कर कहीं ऊपर होने का एहसास हुआ।
जब मैंने देखा कि किसी का सामान बाहर आने वाला है, तो वो लोग खाली मुँह के चारों ओर इकट्ठा हो गए। फिर हर कोई अपना-अपना लंड झुलाने लगा।.
मुस्काते हुए खाला ने मुंह को पूरा फैला दिया।.
एक-एक कर वो सब लोग खाला के मुँह में सामान डालने लगे।.
एक-एक बूंद को बचाते हुए, खाला सबका वीर्य प्यार से पी रही थी।
एक आदमी मुझ पर झुका हुआ था। उसने तेज़-तेज़ स्पर्श किए, बारहा नहीं, पर इतने ज़रूर कि मेरी छाती धड़कने लगी। उसका गर्म तन टपक गया मेरे अंदर। फिर वो खींचकर दूर हट गया।.
एक अलग आदमी मेरे सामने आया। उसने मेरे मुँह पर हाथ डाल दिया। कुछ नहीं बोला, बस वहीं खड़ा रहा। मैं तब भी चुप था।.
एक आदमी का डंडा मेरी चूत में था, वो भी जल्द ही बाहर निकल गया। उसने कई बार अपना पानी छोड़ा, फिर दूर हट गया। तभी दूसरा आदमी, जो मेरी खाला के साथ था, तेजी से आगे-पीछे हो रहा था।.
उधर कई आदमी पहले ही उसकी चाची के मुँह में अपना सब कुछ डाल चुके थे।.
फिर वो आदमी भी पसीने से तरबतर हुआ, उसके बाद झटपट अंदर-बाहर होने लगा।.
उसकी आवाज़ सुनते ही उसका पेट डोलने लगा।.
एक आदमी ने उस शख्स को धक्का देकर हटा दिया जो खाला के मुँह पर चढ़ा था। फिर उसने तगड़ा झटका दिया।.
खून की धार निकल पड़ी, जब वह लंड चूत से बाहर खींचा। पूरा शरीर लाल हो गया, मानो कोई रंग छिड़क दिया हो।.
एक सफ़ेद दाढ़ी वाले बूढ़े ने कुछ पल पहले ही अपने मौला के छींटे उसकी गरम जगह पर डाल दिए थे।.
उसके लंड में इतना वीर्य था कि वह चूत के पास खड़े-खड़े ही छींटे छोड़ने लगा। धार इतनी तेज थी कि खाला के चेहरे पर सब कुछ लिपट गया। उस आदमी ने बार-बार छींटे मारे, हर एक गाढ़ा और मोटा था। खाला हर बार मुंह फैलाकर पकड़ने की कोशिश करती। कुछ छींटे मुंह में जा पहुंचे, बाकी चेहरे, बालों और गर्दन पर लथपथ हो गए।.
थोड़ी देर तक सभी सिर्फ घबराए हुए इधर-उधर देखते रहे। फिर कोई बोला - दीनू काका उम्र में बूढ़े हैं, पर आज भी जवानों पर भारी पड़ते हैं! इस बात के बाद एहसास हुआ कि वो चंचल युवक असल में दीनू काका हैं।.
फिर भी हमें क्या पड़ी, मज़े में झूलना ही असली बात है।.
एक आदमी ने कहा, ये छिनाल तो पूरी ख़राब हो चुकी है। कौन जाएगा अब इसके पास? उसके मुंह से शब्द निकले तो वहाँ खड़े लोग थम गए।?
एक बोला - अरे, पीछे की तरफ सब ठीक है। तभी कुछ लोगों ने खाला को पलटकर घोड़ी जैसा बना दिया। ऐसे में कोई आदमी बिना रुके सोचे, उसकी गांड में अपनी लंबी छड़ी धँसा दिया।.
फिर आवाज़ छूट गई खाला की, पीड़ा से भरी। कहाँ था कोई सुनने को तब? हर तरफ सन्नाटा था।.
एक आदमी ने धीरे-धीरे तेजी से खाला के पीछे घुसना शुरू कर दिया। हर बार जब वो अंदर जाता, खाला के मुँह से चीख निकल पड़ती।.
एक आवाज़ उठी, "जल्दी करो, अब और वक्त नहीं है, खेत में काम पूरा नहीं हुआ तो मजदूरी छूट जाएगी।" मालिक के कदम धरती पर गूंजने लगे थे।
सुनते ही उस आदमी ने चाची के पिछवाड़े में इतनी तेजी से घूसना शुरू किया कि बुलेट ट्रेन भी पीछे रह जाए।
मेरे मुंह और चूत से अभी रिसना बंद नहीं हुआ था कि पीछे से किसी ने मुझे धक्का देकर गिरा दियa। फिर एक लंबी सख्त छड़ मेरी गांड में उतरने लगी।.
दर्द के कारण मैं वहाँ खड़ी लोगों को रोक पाने में असफल हो गई।.
एक आदमी ने मेरी पिछली तरफ़ बहुत थूक दिया। फिर धक्का देकर अपना लंड भीतर घुसा दिया।.
दर्द इतना तेज था कि सांस रुकने लगी। उन्हें हमारी चीखों से कोई फर्क नहीं पड़ता था, वो बस अपना खत्म करना चाहते थे। हम दोनों चिल्लाती रहीं, आवाज़ें भर्राई जा रही थीं। वो धक्के मारते रहे, बिना ठहराव के, गांड में घूसते रहे। जैसे जैसे उनका छूटने वाला होता, मुंह में उफान आ जाता। एक-एक कर वो पीछे हटते, सांस तेज, शरीर टूटा सा लगता।.
थोड़ी देर में हाल इतना उलझ गया कि किसका क्या अंदर जा रहा है और किसका क्या बाहर आ रहा है, समझ ही नहीं आती थी।.
गांव के लोगों ने हमारा पेट इतना भर दिया कि सुबह से कुछ खाए बिना भी भूख महसूस नहीं हो रही थी।.
गांव वालों ने हमारी गांड पकड़कर कुएं का मजाक उड़ाया। फिर खेलने के चक्कर में हम पर मुठ मारने लगे।.
गहरी शाम तक हर जगह सिर्फ़ एक ही निशान था। चूत पर भी वो असर था, मम्मे पर भी। मुंह के कोनों से लेकर छातियों तक फैला था। बाल चिपचिपे हो गए थे, पेट पर धब्बे थे। पीठ पर ख़िंचाव था, जांघों के बीच भीड़ थी। पाँव तक उसी गाढ़ेपन में डूबे थे।.
कुछ लोग पानी की बंदूक से मज़ाक उड़ा देते, फिर वापस अपने काम में जुट जाते।.
सायं के समय Xxx Xxx के बाद मैं वहाँ और खाला भी वहीं थी।.
खाला के पास जब मैं घिसटकर पहुँची, तो उनकी आँखें बंद थीं। शरीर अब काँप नहीं रहा था, वीर्य और खून से तर। एक डर छाती में फैल गया - शायद वे नहीं रही।.
आँसू थे कि वहीं से उसकी आँखें खुल गई। मुस्कान फैली उसके चेहरे पर, धीमे स्वर में बोली - यही है असली ज़िंदगी... इसे पूरे दिल से महसूस कर, क्योंकि ऐसा अनुभव जीवन में एक बार आता है।!
फिर मैंने भी खाला के शुक्र से तर मम्मों पर सिर टिका कर आराम किया। धीरे-धीरे उन भयानक ढ़ंग से हुए सेक्स के पलों को याद करके ख़ुशी महसूस करने लगी।.
हर बार जब याद आता कि कैसे उनके वीर्य की गर्म-गर्म धारें मेरे मुँह, चूत और गांड में छिड़क दी गई थीं, तो दर्द थोड़ा हल्का हो जाता।.
थोड़ी देर के लिए मैं सिमटकर पड़ी रही।.
जब अँधियारा छा गया, तब वह उठी। सीधे कार में चली गई, बिना कपड़ों के।.
खाला से मैंने पूछ लिया - पानी कुछ नहीं पीओगी?
खाला ने कहा - अरे नहीं, गले में सिर्फ़ वीर्य है। पानी के लिए जगह ही नहीं बची।.
हंसते हुए हम दोनों ने शरीर धोया। फिर ताज़े कपड़े पहन लिए। मैंने सवाल किया - खाला, प्यास बुझी या सिर्फ़ पानी के छींटे लगे?
खाला बोली - शबनम, आज तो मेरे सिर पर बाढ़ आ गई, छींटे नहीं। यही चुदाई मैं हमेशा से चाहती थी। आज पहली बार शरीर और दिमाग को सच्ची ठंडक मिली। इस चुदाई को भूल पाऊंगी नहीं। अगली बार ऐसा होगा कब, कौन जाने। मैंने कहा - आपके पीछे मेरी चूत और गांड फीकी पड़ गई, अब इंसानों की जगह हाथी चाहिए।
खाला ने कहा - अब तो मुझे लंड की जगह किसी को पूरा-का-पूरा भीतर उतारना पड़ेगा।
फिर वहाँ खड़े-खड़े हम दोनों को हंसी आ गई।
कई दिनों तक हमारे मुँह से लंड और वीर्य की बदबू आती रही। उसके बाद हमें चूत और गांड का इलाज कराने सर्जन के पास जाना पड़ा। कुछ समय बाद पता चला - खाला को माहवारी नहीं आई।.
जब डॉक्टर के पास गए, तो पता चला - खाला माँ बनने जा रही है।.
ग्यारह बच्चे एक साथ पैदा होने वाले हैं, ऐसा स्कैन के नतीजे में पता चला।.
पति ने आखिरी बार दो महीने पहले संबोधन किया था, ऐसा खाला ने कहा।.
बस इतना हुआ कि चूत में सिर्फ़ दीनू काका का ही जहाज़ पहुंचा।.
दीनू काका सब बच्चों के पिता हैं, ऐसा इसलिए है क्योंकि।.
एक बार की बात है, जब भारत में महिलाएँ सैकड़ों बच्चों को जन्म देती थीं। अब ये बात समझ आई है। कभी-कभी गलतफहमी होती थी। उस दौर में गिनती अलग ढंग से होती थी। कोई आधुनिक तरीका नहीं था। इसलिए अंकों में फर्क आ जाता था। ऐसे में सौ बच्चे का आंकड़ा भी झूठा लग सकता है। वास्तविकता कुछ और थी। घटनाओं को गलत तरीके से लिखा गया। धीरे-धीरे सच सामने आया।.
उसी शाम को घर पहुँचकर वो अपने पति के साथ बिस्तर में लेट गई। फिर धीमे-धीमे उसके हाथ आगे बढ़े। एक झटके में वो अंदर था। जैसे-जैसे वक्त बीता, उसकी सांसें भारी होती गईं। अंत में वो छलनी हो चुकी थी।.
इस वक्त पूरा घर सोच रहा है कि खाला के पति ने ग्यारह बच्चे पैदा कर डाले। मगर सच तो ये है कि ऐसा दीनू काका ने किया। इस बात का पता सिर्फ खाला और मुझे है।.
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