पति ने पार्टी के दौरान कई लोगों के साथ अपनी पत्नी को शामिल होने के लिए कहा।

Desisexkahaniya

Jan 3, 2026 - 13:08
Jan 9, 2026 - 17:30
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पति ने पार्टी के दौरान कई लोगों के साथ अपनी पत्नी को शामिल होने के लिए कहा।

गोआ की छुट्टियों के दौरान मेरी पत्नी बहुत उत्साहित थी। वो हमेशा गर्मजोशी से भरी खींच-तान पसंद करती है। एक दिन हमने कपल्स मसाज बुक करवाई। मैंने लड़के को उसके कमरे में भेज दिया।.

हेय, मैं राहुल हूँ - उम्र 28 साल। नाम बदलकर रखा है।.

उत्तर प्रदेश में जन्मे हुए हैं मैं, बनारस से।.

लंबाई मेरे लिंग की सात-साढ़े प्रति वह चौड़ाई दो-ढाई इंच।.

इस कहानी को लिखना मेरे लिए नया है। उम्मीद है, यह तुम सबको पसंद आ जाएगी।.

तीन साल पहले मेरी शादी हुई थी। वो एक तय ब्याह था।.

पिंकी वो शख्स है जिससे मैंने शादी की।.

तीनों नाप 32, 30 और 34 हैं।.

उसकी तस्वीर देखकर ही लगता है, अंदर से कितनी आग होगी। एक नज़र में पता चल जाता है, जब बात शारीरिक संबंधों की आए, तो उसमें कितनी भूख है।.

रोज़ सुबह उठकर हम एक-दूसरे को छूना शुरू कर देते हैं। अँधेरा होते ही बिस्तर पर लेट जाते हैं, फिर आवाज़ें धीमी हो जाती हैं। ऐसा लगता है मानो समय रुक गया हो। खिड़की से चाँदनी आती है, और हम वहीं रह जाते हैं।.

बाहर रहना पड़ता है मुझे, क्योंकि बिजनेस है।.

तभी से मेरी पत्‍नी को अधिक प्यास लगने लगती है।.

ठंड में जब हवा सख्त चल रही थी, उसी वक्त की बात है।.

गोवा हम दोनों की छुट्टी में जाने की पसंद बना।.

गोवा में तब भीड़ थी, क्रिसमस के साथ नए साल का छुट्टी का दौर चल रहा था।.

एक तरह से, गोवा के लिए हमारी पुरानी यात्राएँ थीं। फिर भी, इस बार जो कुछ हुआ, उसे मैं कभी नहीं भूल पाऊँगा।.

पहले से ही सभी आरक्षण कर लिए गए थे।.

सीधे हवाईअड्डे से होटल पहुँच गए, फिर कमरे में जगह बना ली।.

तब तक हवा में एक खास सी नरमी आ गई थी।.

अंदर आते ही, हम दोनों ने साथ में तेजी से शुरू कर दिया।.

थोड़ी देर बाद, मैं तैयार होकर नीचे स्कूटी लेने निकल पड़ा - गोवा में घूमने के लिए वो किसी ज़रूरत से कम नहीं।.

घर लौटते-लौटते उसने पहनावा बदल लिया था। अब वो तैयार खड़ी थी, जैसे कहीं जाने को बेचैन हो।.

उसके बाद मैंने समय नहीं गंवाया, एक चुंबन किया। हम दोनों रेत पर टहलने लगे, समुद्र की ओर बढ़ते गए।.

उस वक्त छुट्टियाँ चल रही थीं, इसलिए भरपूर लोग पहुँचे हुए थे।.

ऐसों में काफी युगल नए-नए विवाहित भी थे।.

समुद्र के किनारे एक बियर मिल गई। हवा में नमी थी, तभी धूप ढलने लगी। बैठ गए रेत पर, आगे सागर का पानी उठता-गिरता दिखा। घूँट भरा, फिर चुपचाप देखते रहे लहरों को।.

होटल की ओर कदम बढ़ाया, शाम ढलते ही।.

एक पाँच सितारा होटल में ठहरने का मतलब था - सभी ज़रूरी चीज़ें कमरे के अंदर ही मिल गईं।.

कभी-कभी ऐसा होता है, सुबह की चाय के बाद मन लग जाता है।.

जब हम पहुँचे, तो कपल मसाज को लेकर चर्चा हुई।.

वो हमें एक बड़े कमरे में ले गए। कमरे में दो अलग-अलग बिस्तर रखे थे। पर्दा ठीक बीच में टाँग दिया गया था।.

दोनों ने कपड़े बदले। फिर होठ मिलाकर वापस अपनी-अपनी सौंय पर लेट गए।.

थोड़ी देर के बाद दो लोग पहुंचे। एक लड़का था, साथ में लड़की भी थी।.

उसने मेरी पत्नी से जवाब सुनना चाहा - तुम्हें किसकी ज़रूरत है, पुरुष कर्मचारी या महिला कर्मचारी?

बिना समय गंवाए मैंने कह दिया - जी हां, उसके पास मेल स्टाफ होना ज़रूरी है।!

तभी एक औरत का ध्यान मुझ पर पड़ा।.

थोड़ी देर के बाद, लगभग बीस मिनट पश्चात्, एक मद्धम आह सुनाई पड़ी। मेरे मस्तिष्क में तुरंत खचाव हुआ।.

उसकी नज़रें मेरे चेहरे पर थीं, और होंठों पर एक धुंधली सी छवि-सी बिखरी थी।.

अब साफ़ हो गया था कि पत्नी बिलकुल आराम से थी।.

उसकी परवाह किए बिना, मैं अपने टीम के साथ आराम से रहने लगा।.

अचानक कुछ पल बाद ध्वनियाँ ऊपर चढ़ गई।.

आग मेरे भीतर और तेज हो गई। पर्दे के पार कुछ छिपा है, यह सोचकर।!

थोड़ी देर में स्पा खत्म हुआ। मैंने पत्नी को बुलाया, कमरे में जा रहा हूँ, तुम भी आ जाओ।.

एक धीमी साँस के साथ, उसने हां में सिर हिला दिया।.

थोड़ी देर में जब वह पहुँची, उसके चेहरे पर थकान के साथ-साथ खुशी भी झलक रही थी।.

जब मैंने उसकी ओर से बियर का कैन बढ़ाया, तो वह हाथ झटककर पलट गया।.

थोड़ी देर आराम करने की इच्छा उसने जताई।.

दस बजे क़रीब रात में हम दोनों स्कूटी पकड़कर फिर घूमने चल दिए।.

सबसे पहले हम लोग बागा बीच की ओर चल दिए। नज़ारा वैसा नहीं था, जैसा कभी देखा हो।.

सब लय में झूल रहे थे। पत्नी के शरीर पर सिर्फ एक तंग कपड़ा था।.

एक क्लब में पहले दरवाज़े से अंदर कदम रखा हमारा। शीशे के सामने खड़े होकर नई ड्रेस में उसने झलक देखी। बार के पास ठंडी चीज़ें मिली दोनों को। फिर धीमे संगीत पर घूमते रहे वो पल भर तक।.

भीड़ इतनी ज्यादा हो चुकी थी कि हर तरफ लोग नजर आ रहे थे।.

देखा तो ये कि कुछ लड़के - चार या पांच - एक कोने में बैठे थे। उनकी नज़रें लगातार मेरी पत्नी पर टिकी हुई थीं। बहुत देर से ऐसे घूर रहे थे, मानो कुछ और ही देख रहे हों।.

बस इतना ही ख़्याल रखते हुए कि ज़्यादा फोकस नहीं, पत्नी के साथ डांस में ढल गया।.

दोपहर के आसपास हम वहाँ से चल पड़े, स्कूटी में बैठकर अब कहीं भी घूमने लगे।.

हमें रास्ते में एक क्लब दिखा, फिर क्या था - वैसे भी अंदर चले गए।.

फिर वहीं पर हमने पेय पदार्थ पीए, उसके बाद नृत्य शुरू कर दिया।.

आसपास देखा तो पता चला कि वो लड़के हमारे साथ-साथ यहाँ भी पहुँच गए।.

बिना उनकी परवाह किए मज़े से पार्टी में व्यस्त था।.

दो लड़के हमारी ओर बढ़े, फिर नाचने लगे।.

एक और पेय की माँग पत्नी ने की, मैंने कहा - इतना काफी है।.

मान लिया मैं, जब उसने हठ धर लिया।.

पीने के लिए मैं वहाँ से दूर हो गया।.

मुड़कर जब आगे देखा, तो पत्नी उन दो लड़कों के साथ झूम रही थी।.

उसके बीच में वो झूम रही थी, मेरी पत्नी, ठीक उसी तरह से जैसे कोई लड़की डांस बार में मूव्स करती है।.

गुस्सा तो आया, हाँ, पर मैंने सोचा कि अब क्या होता है इसे देख लूँ।.

दोस्तों की मदद करते हुए, उसने खुद के अलावा दो और लोगों को शामिल कर लिया।.

मेरी पत्नी चारों लड़कों के बीच जैसे ही झूमने लगी।.

एक लड़का जिसकी नज़र मुझ पर थी।.

उसे लगा, अब कोई रोकेगा नहीं। मौका देखकर आगे बढ़ गया।.

अब मैं दूर खड़ा था। मेरी नजर मेरी पत्नी पर थी। कुछ लड़के उसके स्तनों पर हाथ फेर रहे थे। किसी ने पीठ पर हाथ फिराया।.

इसे देखते ही मुझमें जैसे कोई नया सूरज उग आया।.

थोड़ी देर रुककर, एक लड़का मेरे पास चला आया। हाथ मिलाते हुए उसने कहा - विक्की हूँ मैं।.

उसका जन्म गुजरात में हुआ था।.

वो कह रहे थे, कुछ और भी तो इधर सप्ताहांत गुज़ारने पहुंचे हैं।.

बातें होती रहीं, कुछ पल के लिए।.

उस पल मेरी नज़र उस तरफ हुई। वहाँ मेरी पत्नी एक युवक के साथ गले मिल रही थी।.

उसी लम्हे में, विक्की का साथी हमारे पास पहुँच गया।.

होटल संभालने को लेकर पत्नी अब तैयार है, उसका कहना था।.

विक्की के मुंह से ये खबर सुनने को मिली।.

ऐसा लगा जैसे धरती मेरे पैरों से फिसल रही हो।.

एक पल बाद यह ख्याल आया कि आज तो बस इतना ही कर लूँ - अपनी पत्‍नी के सेक्‍स में झांक लूँ।.

उनमें से चार किसी कार में सफर कर रहे थे।.

वह मेरी पत्नी को अपनी गाड़ी में ले गया। फिर मेरी तरफ मुड़कर बोला - अगर मस्ती करनी है, तो पीछे चले आओ… वरना सुबह उसे खुद ले जाना।.

स्कूटी चालू हुई, मैं कार के पीछे-पीछे निकल पड़ा।.

कुछ समय पश्चात कार एक हवेली नमा इमारत के सामने ठहर गई।.

उसकी आंखों में धुंधलापन था, सड़क के बारे में कोई ख्याल नहीं। एक अजनबी के पीछे चल पड़ी, बिना सोचे। कदम डगमगा रहे थे, दिशा का भ्रम गहरा रहा। घटना के बारे में बाद में पता चला, तब तक वो दूर निकल चुकी थी।.

जैसे ही वह कमरे में प्रवेश किया, सभी ने तुरंत उसका स्वागत कियa।.

एक-एक करके हर किसी के पास वो पहुँच रही थी।.

शुरू में, विक्की ने धीरे से जीन्स नीचे की। फिर उसका लंड मेरी पत्नी के हाथों में आ गया।.

उसने फटाक से मुँह में डाल लिया।.

एक के बाद एक हर कोई अपना-अपना लंड बाहर निकालने लगा। मेरी पत्नी सबका धीमे-धीमे चुस्ती गई।.

उसके होंठ धीमेसे उसकी त्वचापर सरक रहे थे।.

एकमात्र सोफा कमरे में पड़ा था, मैं उस पर बैठकर आसपास नजर घुमा रहा था।.

बाद के कुछ पलों में, लड़के के पास से हर चीज़ फिसल गई। पत्नी ने उसे झपटा, और अगले ही क्षण वह खत्म हो चुका था।.

उस रूप को मैंने पहली बार आज देखा। अचानक वो लड़का उछलकर खड़ा हुआ, व्हिस्की की बोतल थामी, सभी के लिए डालने लगा।.

एक पैग मुझे भी उसने दे दी, काफी शालीनी से।.

फिर सभी लोग नशे में धुत होकर एक-दूसरे से चिपक गए।.

कुछ पल के लिए सब कुछ ऐसे ही चलता रहा।.

फिर वो लम्बे समय तक जारी रहा।.

शुरूआत में विक्की ने मेरी पत्नी के साथ संभोग किया। लगभग 8 इंच का होना चाहिए उसका लिंग।.

एक लड़का मेरी पत्नी के मुँह में अपना लंड डाले हुए था।.

दोपहर के करीब दो बजे आँख खुली। फिर बालकनी की तरफ कदम बढ़ाए, हाथ में सिगरेट लिए।.

उस जगह पर पहुंचकर दृश्य ने मुझे स्तब्ध कर दिया।.

उसकी चाल में कोई संयम नहीं था, धीमे-धीमे आगे बढ़ते हुए।.

उसके बाद मैंने विक्की को पास आने को कहा। फिर धीमे से बताया कि अब मैं होटल चला जा रहा हूँ। सुबह उठकर पत्‍नी को लेने आऊंगा, ऐसा कहा।.

वैसे ही विक्की को भी यह ठीक लगा। उसने मुझे जाने को कह दिया।.

निकलते वक्त मुझे पत्नी की ओर से दृष्टि मिल गई।.

उसके होठ हिल रहे थे, संदेश देना चाहती थी। पर मुँह में लंड आ गया तो आवाज़ सिसक गई। बस एक ध्वनि रह गई - घु…घु…घघु….

सीढ़ियों से उतरा, फिर स्कूटी की चाबी मुड़ाई। होटल की ओर बढ़ गया, इंजन के साथ धीमी आवाज़ छोड़ते हुए।.

लगातार यही खयाल आता रहा कि पत्नी उन चारों के साथ कैसे जुड़ी थी।.

होटल के कमरे में दाखिल हुआ, तब एक गिलास शराब और चढ़ाई। धीरे से कपड़े उतारे, फिर अपने आप को छूना शुरू किया।.

थोड़ी देर के बाद वह ढीला पड़ गया, फिर मैं सोने लगा।.

आठ बजे के आसपास जब आंख खुली, सारा शांतिपूर्ण भ्रम टूट गया।.

अचानक याद आया - वो पल, जब कल रात मैंने वह सब देखा।.

दौड़कर मैं नीचे पहुँचा। स्कूटी को चालू किया। फिर सीधे उस होटल की ओर निकल पड़ा।.

उस कमरे के पास जाते-जाते महिला की आवाज़ सुनाई दी।.

दरवाज़े पर बजते ही आवाज़ सुनकर उनमें से एक ने झट से खिड़की के पास से झाँका। फिर वह पीछे हटा, धीमे से कुछ बड़बड़ाया और दरवाज़ा खोल दिया। मैं थोड़ा ठिठका, तभी उसने हाथ से इशारा किया - अंदर आ जाओ।.

होश तब उड़े, जैसे अंदर का दृश्य आँखों सामने आया।.

उसके मुँह में लंड था, चुत में भी घुसा हुआ था। पीठ के बल लेटी थी, गांड में भी कुछ नजर आया।.

आखिरकार वो मेरी तरफ मुड़ी। बोली, राहुल, चल यहाँ से। इन लोगों का दिल नहीं है। पूरी रात ये मेरे साथ ऐसे बर्ताव कर रहे जैसे मैं कुछ नहीं। मेरी तबीयत खराब हो गई है।!

तूने खुद कहा था, विक्की - खोल देना। पूरा दिन हुआ, फिर भी बस इधर-उधर हो रही है। सारी रात चला, मगर अब तक झपट रही है।!

विक्की का भाई... बस करो। उसे जाने दो, सच में। हाथ धो लो इस बात से। कुछ तो दया आए उस पर।!

विक्की का नाम जब रहम के साथ आए, तो मज़ा ही कुछ और है। राहुल भाई कहते हैं, चाहे दस लंड मिल जाएं उस औरत को, फिर भी कम पड़ेंगे। उसके भीतर जो तपिश है, वो कम नहीं। .

लड़के ने आदेश दिया, कुछ खाना ऊपर बुला लो। उसके साथ हमारा भी टाइम मिल जाएगा।.

खाने के लिए मैंने नीचे पड़े रेस्तरां को कॉल कर दिया।.

उसके पीछे वो लगातार आगे बढ़ रहा था।.

दरवाज़े पर आवाज़ हुई, लगभग बीस मिनट बाद। मैंने सबको धीमे स्वर में बताया - अभी कुछ पल के लिए इधर ठहर जाओ।.

पिंकी ने कहा, इन्हीं के चलते रातभर कुछ न कुछ मँगवाए जा रहा है। जो भी आता है, मेरी चुदाई देखकर वापस लौट जाता है, ऐसा लगता है।.

इतना सुनकर मेरे होश उड़ गए।.

सोचता हुआ मैं वहाँ से आगे बढ़ गया, गेचुदाई के दृश्य को आखिर में देखकर।.

दस मिनट के भीतर ही सभी ने पिंकी को धरती पर बैठा दिया। फिर एक-एक करके अपना सामान उसके मुँह पर डालने लगे।.

उसकी आँखें खुलीं, पिंकी ने धीरे से कदम बढ़ाए। वो सीधे बाथरूम की ओर चल पड़ी। पानी के छींटे उसके चेहरे पर पड़े।.

फिर विक्की ने उसे रोक लिया। बाथरूम के फर्श पर बैठाकर अपनी गांड से पिस्सू की धार उसके चेहरे पर मार दी।.

देखते ही दूसरे लड़कों ने भी बाथरूम में कदम रखा। फिर सबने मिलकर पिंकी पर पेशाब कर दी।.

वो सारे आदमी उस पर पेशाब कर रहे थे, मैं सिर पकड़े कमरे में बैठा देखता जा रहा था। पिंकी ये सब चुपचाप भोग रही थी।.

नहाने की इच्छा पिंकी को सताने लगी, मगर रास्ते में कई अड़चनें आ गईं।.

गोआ में, पिंकी के साथ सेक्स होने के बाद Xxx का मन वहाँ से हट नहीं रहा था।.

थोड़ी देर बाद मैंने पिंकी से कहा कि अब चलते हैं, पर वो हिलने को भी तैयार नहीं थी।.

एक कैब सेवा पर मेरी नजर पड़ी, फिर गाड़ी आने लगी।.

उसने वैसे ही पोशाक धारण कर ली। पिंकी मेरे संग बाहर निकल गई, बिना कुछ कहे।.

उसके शरीर से पूरे रास्ते मेहकता रहा पेशाब व मल का गंध।.

मैं होटल पहुँचा तो सबसे पहले उसे गर्म पानी से नहलाया। इसके बाद एक दर्दनिवारण की गोली भी दी।.

तीन दिन तक गोवा में ही ठहरे रहे।.

अगले हिस्से में मैं बताऊँगा कि उन तीन रातों में क्या-क्या घटित हुआ।.

इतने में तुम अपनी जान से खेलते रहो।.

Xxx ने गोवा में हुई सेक्स कहानी पर टिप्पणी की। फिर उसने कमरे का दरवाज़ा भी खोल दिया।.

अंदर का रास्ता तभी सामने आया, जैसे ही वेटर मुस्कुराया।

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