पड़ोस की भाभी को अन्तर्वासना ने मजबूर कर दिया

Jan 2, 2026 - 15:30
Jan 21, 2026 - 19:41
 0  1
पड़ोस की भाभी को अन्तर्वासना ने मजबूर कर दिया

एक दिन भाभी ने मुझे घर बुलाया। मैं हमेशा उन्हें देखकर छुपकर हाथ चलाता था। वो नहाकर बाहर आईं, तौलिया कमर पर लिपटा था।.

अरे भाई, सुन... मैं अब अर्जुन के नाम से जाना जाता हूँ। घर? वो आगरा में है, उत्तर प्रदेश में बसा हुआ।.

इस देसी कहानी में जहाँ भाभी के साथ घटनाएँ होती हैं, तुम्हें बुलाया गया है।.

मेरी जिंदगी का ये पहला अनुभव था।.

एक बार की बात है, मैं उस वक्त उन्नीस साल का था। कॉलेज के दूसरे साल में पढ़ाई कर रहा था तब।.

आमतौर पर जैसे होता है, बस वैसे ही कुछ।.

हर दिन सुबह कॉलेज के लिए निकल पड़ता, फिर शाम होते ही वापस घर आ जाता।.

धूप तब थी, मैं छज्जे पर किताब लेकर बैठा हुआ था।.

उसी पल मेरा ध्यान उधर गया - पड़ोसिन के घर की छत।.

धूप के नीचे उसकी ब्रा हवा में लहरा रही थी, पैंटी तिरछी लटकी थी।.

एक बात जरा सुन लो, मेरी मल्हम चुपड़वाने वाली भाभी की एक आदत है।.

एक पड़ोस में रहती हैं सरिता। उम्र बत्तीस की है वो। दशकभर पहले उनकी शादी हुई थी, जो अब तक चल रही है।.

छह साल का बच्चा भी है उनके पास, बेटा।.

लड़के की उम्र बढ़ते ही वो अपनी भाभी के प्रति आकर्षित हो गया।.

बहुत बार हो गया था ऐसा।.

उस दिन जब मैंने उसकी ब्रा तथा पैंटी देखी, संयम टूट गया। फिर क्या था, वहीं खड़े-खड़े हाथ चलने लगे।.

सरिता भाभी को देखकर मन में ख्याल आया - अब तुरंत उन्हें नंगा कर दूँ, गांड मार दूँ। पर इतना नहीं समझ पाया कि यही ख्वाब जल्द ही हकीकत बनने वाला है।.

कई बार मौका ढूंढ़कर भाभी के घर पहुंच जाता। वहाँ पहुंचने के बाद उन्हें देखता, फिर हाथ पर झोल छोड़ देता।.

उनका पति दूसरे शहर में नौकरी करता था, सो घर आना मुश्किल होता।.

शाम के समय भाभी घर पहुँची। मम्मी से पूछा - अर्जुन कहाँ है? कल सुबह अगर उसके पास वक्त हो, तो चिंटू के स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग है, उनके साथ चले।.

अच्छा, जब वह पहुँचेगा तब मैं समझा दूँगी।.

थोड़ी देर पहले जब मैं घर आया, तभी मम्मी ने कहा कि भाभी ने फोन कियa।.

सुनते ही मेरा लंड ऊपर को उठ गया।.

हां कहने में एक पल नहीं लगा।.

सुबह होते ही बाइक संभाल कर मैं भाभी के घर के बाहर खड़ा था।.

अंदर कदम रखते ही मुझे पता चला, भाभी बाथरूम से पानी की आवाज़ लाती दिखीं।.

बोलते हुए मैंने कहा, भाभी, आपने जाने को कहा था न… यह रहा, आपका देवर आपके सामने खड़ा है!

पल भर में भाभी के हंसने का स्वर फैल गया - देवर जी, नहा लेती हूँ, थोड़ी देर बैठ जाओ।!

थोड़ी देर में वह टॉवल लिपटी हुई बाहर निकलीं।.

उस तरह से भाभी को देखकर मेरा दिमाग जैसे ठहर गया।!

उसके स्तन और पिछवाड़े को देखकर मन मचल उठा। तौलिया उतारते ही वहीं जमकर संभोग करने का मन किया।!

लंबाई सही करके मैंने पैंट में जगह दी, फिर वहीं टिक गया।.

इस सबके बीच, भाभी की नज़र मेरे ऊपर पड़ गई।.

उससे पहले कई बार भाभी ने मुझे उन्हें इस तरह देखते हुए पकड़ा, मगर कोई शिकायत नहीं की।.

कभी-कभी लगता है कि महिलाएं पढ़ लेती हैं उन नज़रों में छुपे इरादे।!

Not Just A Kiss - GIF - Imgur

उसकी नज़र पड़ी मेरे सूजे हुए लिंग पर।.

वो मुस्कुराती हुई आंखों के किनारों से, धीमे-धीमे कमर हिलाती हुई कमरे के भीतर जा पहुंची।.

थोड़ी देर में वह तैयार होकर लौट आईं।.

आज तुम कितने स्मार्ट दिख रहे हो, अर्जुन - इसपर मैंने यही कहा।!

एकदम अचानक मैंने कह दिया - भाभी… आज तुम्हारी काली साड़ी बहुत अच्छी लग रही है।!

भाभी मुस्कुरा पड़ीं। फिर बोलीं - इतने सज-धज कर कहाँ जा रहे हो?

बस यही सोचा था - आपके वास्ते।!

उस पल भाभी की नज़र मेरे ऊपर टिक गई।.

अचानक मैंने अपनी बात को रोकते हुए कहा – छोड़िये भाभी, इतना ही सही।!

फिर से उनकी हंसी छूट गई। कहा, अब चलो वर्ना देर हो जाएगी!

स्कूल के रास्ते में भाभी बाइक पर बैठी थी।.

बैठक समाप्त होते ही पलट पड़े हम।.

बीच रास्ते में भाभी बोलीं - अर्जुन, तुझे भूख लगी होगी। सुबह के उतावलेपन में खाने का ज़िक्र करना छूट गया।!

बस इतना कहा - हां भाभी, अभी तो पेट कई चीज़ों को माँग रहा है।!

उन्होंने कहा - ज्यादा कुछ चाहिए नहीं, सिर्फ थोड़ा सा खाना अभी।.

दोनों बातें सुनते-सुनते मेरा लंड खड़ा हो गया।.

बस इतना कहा - ठीक है, जो चाहें उतना दे दें।.

उसके बाद कहीं एक होटल में दोनों पहुँच चुके थे।.

खाने का ऑर्डर मैंने तब दिया, जब वहां पहुंच गया।.

उस वक्त तक हम एक-दूसरे से बातचीत शुरू कर चुके थे।.

एकदम से भाभी ने पूछा - अर्जुन, कॉलेज में कोई लड़की तो होगी न? चलो, फोटो दिखाओ।!

सुनते ही मेरा लंड ऊपर को उठ पड़ा।.

आज भाभी के मन का हाल समझ में आ गया।.

आँखों से पानी बहने लगा, जैसे किसी ने संकेत दिया हो।.

अचानक भाभी का ध्यान गया उधर। उन्होंने पूछा, अर्जुन, तुम्हें क्या हुआ? तुम किस बात पर रो रहे हो?

बोला मैंने - अब और क्या हो सकता है? इतना वक्त बीत चुका, पर किसी लड़की ने दिल नहीं लिया। उम्र के साथ-साथ सब कुछ खत्म होता जा रहा है!

उसके हाथ मेरी तरफ़ बढ़े, जैसे कोई गिरते कदम को रोकने की कोशिश कर रहा हो।.

उस पल का सहारा लेकर मैं भाभी के पास हिचकियाँ भरते हुए आ गया।.

मुँह को धीरे से खिसकाते हुए वो उनके गहरे सांसों जैसे उठते छाती पर आ टिका।.

एकदम अचानक ऐसा लगा कि भाभी के ब्लाउज का बटन खोल दूँ। फिर सारा दूध पी लूँ, कुछ पल के लिए ही सही।!

रोते हुए देखकर भाभी बोलीं - चिंता मत कर। यह तो स्वाभाविक है, मैं यही तो हूँ।!

मैंने कहा- मतलब?

भाभी ने कहा - तुम्हें किसी और की ज़रूरत नहीं, अब से मैं ही तुम्हारी गर्लफ्रेंड हूँ।!

खाना खाने के बाद हम लोग घर वापस आ चुके थे, तब भाभी ने मुझे रोते हुए रोक लिया।.

घर आते ही भाभी बोलीं - अर्जुन, तुम्हें थकान ज़रूर महसूस हो रही होगी, थोड़ा विश्राम कर लो। शाम ढलते अपने घर लौट जाना। चिंटू पहले ही नींद में समा चुका है। .

जहां-तहां घूमने का मन ही नहीं कर रहा था।.

थोड़ी देर में, कप में गर्माहट लिए वो आ धमकी।.

कॉफी के घूँट के बीच हम दोनों की नज़रें स्क्रीन पर टिकी रही।.

हँसते-हँसते वो मुझसे बहुत कुछ शेयर करने लगी थीं।.

उसकी बहन-बहू ने टिप्पणी की – पहली बार वो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ कॉफ़ी पर जा रहा है!

सुनते ही मन में ख्याल आया - मौका ठीक है, गँवाना नहीं।!

गुलदस्ते में से एक फूल उठाया, वो भाभी के हाथ में आ गया।.

फिर उसने कह दिया… मैं तुम्हें प्यार करता हूँ।!

उसकी भाभी ने कहा - ये सब क्यों कह रहे हो? मेरी शादी हो चुकी है, तुम्हें ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए।!

मगर मैंने जवाब दियa – हाँ, पर क्या फर्क पड़ता है? खुद तुमने कहा था कि तुम मेरी गर्लफ्रेंड हो। सच तो यह है, तुमने ऐसा सिर्फ इसलिए कहा, क्योंकि मैं रो रहा था।!

पता चला कि भाभी का नाटक था। ज़रा सी कोशिश और हुई, तो बात बन सकती है।.

फिर मैंने भाभी को जकड़ लिया, आवाज़ काँपते हुए रो पड़ा।.

उसने कहा था - भाभी, मुझे कोई प्रेमिका नहीं है… अब तक मैंने किसी लड़की का शरीर भी नहीं देखा!

अचानक मेरे होंठों से वो शब्द निकला तो भाभी का रंग उड़ गया।.

मैं उनसे चिपका रहा, आँखों से पानी बहता गया।.

कोई बात उसकी सास के मुँह से निकली ही नहीं।.

हौसला जैसे किसी ने पंख लगा दिए हो।.

एक दिन मैंने कहा, "भाभी, भैया तो घर पर ही नहीं रहते, इतने समय बाद दिखाई देते हैं!"!

उनकी जुबान पर अभी भी सन्नाटा हावी था।.

उस पल जब मैंने लोहे पर घुटने टेके, बोल पड़ा - शायद आपके मन में भी ऐसा ही कुछ चलता होगा।!

सुनते ही भाभी ने कहा - क्या तुम्हें एकदम समझ में है, जो शब्द तुम्हारे मुँह से निकल रहे हैं?

फिर भी, उस पल भाभी के स्वर में कोई विरोध बसने की गुंजाइश ही नहीं छोड़ता था।.

पीछे से आकर मैंने उसे छेड़ दियa, हालांकि वो ना कह रही थी।.

मैंने भाभी के चुतड़ को मजबूती से पकड़ लिया, फिर उनकी गर्दन पर होठ रख दिए।.

उसके मुँह से एक आह निकल पड़ी।.

अचानक भाभी ने मुझे धक्का दिया। वो पीछे हट गईं। उनकी आवाज़ काँप रही थी - अर्जुन, ऐसा नहीं होना चाहिए। कमरे का दरवाज़ा खुला रह गया था। कहीं कोई आ जाए तो?

बस मैंने कहा, भाभी… कोई कुछ समझ ही नहीं पाएगा।!

हर बार मैं कुछ कहता, तो भाभी खामोश।.

अब समझ में आया, भाभी को भी पानी की जरूरत है।.

इस बार मैंने भाभी को पकड़ लिया, फिर धीरे से उनकी साड़ी खींच दी।.

अब सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में दिखीं भाभी।.

उसकी बाँहों में खींचते हुए मैंने आवाज़ निकलने से पहले ही तेज़ चुम्मे देना शुरू कर दिया।.

भाभी ने पहले धक्का देने की कोशिश की, मगर बीच में ही ठिठक गई।.

उसकी नज़र मेरी तरफ थी। फिर वह झल्लाकर बोल पड़ी।.

लंबी चुम्मी के पाँच मिनट बाद, भाभी को होश तक पहुँच गया।.

उसका पेटीकोट मैंने एकदम से खोल लिया। फिर ब्लाउज़ को हाथ में लेकर चीर डाला।.

मेरी भाभी का गुस्सा सिर पर आ गया।.

पहले कभी ऐसा कब हुआ था, मैंने सोचा।?

उसी वक्त, जब होली का मौका था, भैया घर आए थे - ऐसा भाभी ने कहा।!

कितना समय बीत चुका है - होली तो छह महीने पहले की बात है!

प्यास लगी हुई है मुझे। भाभी ने कहा - अब क्या हो सकता है?

मैंने कहा, कोई फर्क नहीं पड़ता - आज हर एक प्यास मिट जाएगी!

जैसे ही उनकी ब्रा को हटाया, भाभी के स्तन ढीले पड़कर बाहर आ गए।.

खुशी के आगे ऐसा लगा, जैसे दिल में कोई नाच रहा हो।.

थोड़ी देर तक मम्मे चूसने के बाद मैं उठकर भाभी के सामने आ गया।.

भाभी को बात समझ आ गई। उन्होंने मेरी पैंट निकाली, फिर वैसे ही मेरे लिए झुक गईं जैसे भूखा शेर किसी को पकड़ता है।.

कुछ ही पल बाद, मेरा सब कुछ भाभी के मुँह में आ गया।.

फिर मैंने जब भाभी की पैंटी नीचे की, तो उनकी चमकदार योनि से रस बह रहा था।.

उसकी भाभी की चूत में एक भी रोम नहीं था। कई दिनों से सेक्स न होने के कारण वो बहुत तंग हो चुकी थी।.

उंगली डालते ही भाभी का मुँह से चीख निकल पड़ी।.

उसके बाद भाभी ने पैर फैलाए, इशारा किया मेरी तरफ।.

एकदम तुरंत मैंने अपना लंबा लंड धीरे से उसकी चूत के भीतर पहुँचा दियa।.

किसी ने कहा था ना, मन कर रहा था उड़ने का।!

इसके बाद धीमेपन से हटकर मैंने भाभी के साथ जल्दबाज़ी में तेजी से संभोग शुरू कर दिया।.

उस रोज भाभी ने देसी अंदाज में चुदाई का पूरा साथ निभाया।.

वो चीख उठी - अर्जुन… तेज। उसके होंठ काँप गए। गहरी सांसें टूटने लगीं। धमाका कर दे अंदर। आवाज़ भर आई घबराहट से। आज पूरा खोल दे मुझे।!

कुछ समय पश्चात मैं वहीं भाभी के अंदर ढह गया।.

थोड़ी देर बाद भाभी ने मेरा लंड चूसना शुरू किया। वह इतनी तेजी से चूस रही थी कि वह फिर से ऊपर उठ गया।.

एक बार फिर मैंने भाभी को चढ़ाया।.

तीन बार पड़ोस के साथ हुए बाद मैं धीमे कदमों से अपने घर की ओर बढ़ गया।.

अब तो हर सुबह उठकर मैं देसी अंदाज में प्रेम करने लगा हूँ।.

फिर भी जब भैया घर पहुँचते हैं, तो भाभी कोई न कोई वजह ढूँढकर मेरे पास आ ही जाती हैं।.

एक बार जब वो लंड चूस लेती है, तभी से मजा आने लगता है। फिर मुँह से काम खत्म होते ही वो अपनी चूची में घुसने को बेकरार हो जाती है।.

अगर कहानी पसंद आई हो, तो लिखकर जरूर बता देना। कैसी लगी ये भाभी वाली देशी मस्ती की घटना, इसे अपने ढंग से बयान कर दो।!

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0