तीन लोगों के साथ सेक्स करने पर एक ने अपना अनुभव साझा किया
मैंने चार बॉयफ्रेंड बदल लिए थे, धीरे-धीरे सब कुछ बदल गया। हर पल में लड़कों के साथ जुड़ने की तलब रहने लगी। फिर एक दिन वो आया, मेरा नया प्रेमी, जिसने मुझे अपने दोस्त के पास ले जाकर छोड़ दिया।.
कहानी के दूसरे भाग
तभी दरवाज़े पर खटखटाहट हुई। एक नए आदमी ने अचानक कमरे में प्रवेश किया। उसके भाई के साथ मेरा बॉयफ्रेंड पहले से मौजूद था। मैंने जल्दी से अपने कपड़े ओढ़ लिए। अभी हम दोबारा शुरुआत करने वाले थे। इससे पहले कि कुछ और हो पाता, मैं उठ गई।
उसके बाद हम लोग नीरज के जाने का वक्त टिके रहे।
तनाव में था मैं, फलित भी साथ थे।
बाहर से अचानक नीरज का स्वर सुनाई पड़ा।
उसने रोमिल से पूछा - तुझे पता है तेरा दोस्त कहाँ है? अभी थोड़ा पहले मौजूद था यहीं।
उधर से पीछे हटते हुए रोमिल ने कहा, "ये बात झूठी है," फिर चल दिया।
नीरज ने पूछा, "सच कह, इधर क्या चल रहा है?" उसके आगे जूते पड़े थे - रोमिल के दोस्त के।
रोमिल पकड़ में आ गया, तब बोला कि वह टॉयलेट जा रहा है।
फलित ने आँख से इशारा किया - तुम्हें यहीं ठहरना है, वो बाहर जाकर सब संभाल लेंगे।
बाथरूम के बाहर फलित निकल पड़ा।
अब वो दरवाज़ा बंद है, मैंने उसे खींचकर बंद किया था।
फिर नीरज बोला, "उसने झूठ बोल दिया, फंस भी गया। अब तुम समझाओ कि आखिर चल क्या रहा है। क्यों उसने ऐसा किया?"?
उसके मन में कोई शब्द नहीं आया, सिर्फ खामोशी।
फलित ने जब गलत बात कही, तभी नीरज को समझ आया कि मामला कुछ अलग है।
बातचीत करने के लिए नीरज आगे बढ़ा, सीधे ही उन दोनों से मिलकर।
नीरज ने फलित से पूछा, रोमिल भी सुन ले - दोनों मिलकर कुछ छुपा रहे हो। बाहर चप्पल पड़ी है, महिला की। थोड़ी देर पहले आया था मैं, तब सोफे के नीचे हरी पेंटी दिखी थी। अभी फिर आया, रोमिल ने दरवाज़ा खोलने में ढेर समय लगाया। इसका मतलब तुम लोगों ने किसी लड़की को बुलाया था यहाँ। अब वो लड़की कहाँ है? बेडरूम में तो कोई नहीं दिखा।
रोमिल बोला, "अरे नहीं, इधर कोई मौजूद नहीं है। एक दोस्त अपनी गर्लफ्रेंड के साथ आया था। वो लड़की अब जा चुकी है।"
बाहर पड़ी सैंडल तुझे देखकर याद आई, नीरज बोला – वो तेरी माँ की हैं न?
अचानक नीरज आगे बढ़ा, फिर वो दोनों घबरा गए। सच खुद-ब-खुद उनके मुंह से निकल पड़ा।
अब सच कहने में रोमिल ने हिचकिचाहट नहीं की।
अचानक नीरज ने पूछा, "तुझे अपनी सखि कहाँ मिलेगी? उसे यहाँ बाहर आमंत्रित कर।"!
बाथरूम के पास फलित आकर खड़ा हो गया। उसने कहा, बाहर आ जाओ। कुछ भी नहीं होगा, घबराने की ज़रूरत नहीं है।
अब कोई रास्ता नहीं दिखा, यह समझकर मैंने भी दरवाज़ा खोल लिया।
आगे की ओर देखने का मन ही नहीं कर रहा था।.
फिर भी, आँखों से आँखें जोड़े खड़ा था वो – नीरज।
बाहर निकलते ही नीरज ने कहा, "अंदर के कमरे में चलो।"
उसके बाद वह सीधा रोमिल पर भड़क गया, गुस्से में झल्लाकर। फिर निशाना चला फलित की ओर, आवाज़ में कर्कशता छाई हुई।
कुछ समय पश्चात् नीरज कमरे में घुसा, मेरी ओर मुड़ा फिर डांटने लगा, सुधार के नाम पर बकबक शुरू कर दी।
अचानक वह डराने लगा - तुम कहाँ रहती हो? चलो, मैं खुद तुम्हें घर छोड़ने जाऊँगा। फिर तुम्हारे पिता को सब कुछ सुना दूँगा।
थोड़ी देर के लिए तो हौसला बहुत कमजोर पड़ गया, आखों से आंसू छलक पड़े।
अचानक वह फलित के कमरे में प्रवेश करता हुआ दिखा, उसकी गलती के लिए नीरज से सॉरी बोलने लगा।
माफ़ी माँगने के बाद, रोमिल ने फलित के पक्ष में आवाज़ उठाई।
थोड़ी देर में नीरज का रवैया कुछ हद तक ढीला पड़ने लगा।
फिर भी क्लास में जमकर बोल रहा था।
उसने मुझे आंसू भरी आंखों से देखा, फिर बोला - जाओ, पानी से चेहरा साफ कर लो। इधर मैं तुम्हें वापस पहुंचा देता हूं।
अचानक से बाथरूम की तरफ पैर उठे। पानी के छींटे चेहरे पर लग रहे थे।
अचानक समझ में आया - भागने के रास्ते ढूंढने से काम नहीं चलेगा, इस डर को आँखों से ओढ़ना होगा।
दिखने में काफी आकर्षक लगता है वह। पलक झपकते ही मैं उसकी ओर झुक गई थी।.
फलित मैंने पुकारा, बाथरूम से आवाज़ करते हुए।
बाहर की तरफ से नीरज की आवाज़ आई - वो तो नहीं पहुँचेगा, खुद ही निकलकर चले आओ।
एक बार फिर मैंने उसका नाम पुकारा।
एक-दो बार नहीं, तीन-चार बार पुकारने पर फलित अंदर घुस आया।
उसकी तरफ़ मुड़कर बोला - आगे कौन सा कदम होगा?
फलित बोला - माफ़ करना भई, मैं वो बात समझाने लगता हूं।
फलित की ओर मुड़कर बोला - ये राह मेरे पास है।
रास्ता क्या है, इसे लेकर फलित ने सवाल कियa।?
फलित से मैंने बात की - उसकी नज़रें मुझ पर ठहरी रहती थीं, ऐसा लगता जैसे वो मेरी तरफ आकर्षित हो। मौका मिले तो उसे पास खींचने की कोशिश मैं करती हूं।
फलित ने कहा, "हाँ भई, तूने अगर वो बात सम्हाल ली तो हर चीज़ सही हो सकती है।"
फलित ने धीरे से, थोड़ा घबराहट में कहा - तुम्हें लगता है वो तुम्हारी बात मान जाएगा?
मुस्कान लिए, मैंने फलित से कहा - तुम बाहर चले जाओ, मैं अभी पहुँच रही हूँ। बस इतना करो, मेरा इंतज़ार करते रहना। देखना कैसे मैं उसे समझाती हूँ।
बाद में वो घर से निकल पड़ा।
बाहर आने में इतना समय क्यों लग रहा है? नीरज चिल्लाकर बोल पड़ा।?
बाहर निकलते समय मुझे पूरा अहसास था कि ताजगी लगभग चमकदार थी।
सोफे पर नीरज अभी भी बैठा था।
उसके पास-पास रोमिल खड़ा था, वहीं फलित भी था।
नीरज ने कहा, मैं तुम्हें घर छोड़ आऊंगा। तुम्हारा घर कहाँ है?
आखिरकार मैं सोफे की ओर हल्के-हल्के कदम बढ़ाने लगी।
खड़े होते हुए नीरज सोफे से धीरे-धीरे बाहर कदम रखने लगा।
एकदम अचानक मैं लड़खड़ाई, फिर सीधे नीरज पर आ गिरी।
कदम धीमे रखना, यहाँ पैर फिसल सकते हैं - नीरज का आवाज़ में था डर।
मेरी कमर पर उसका हाथ पड़ गया।
उसने मेरी कमर पर हाथ डाला, ताकि मैं सीधा खड़ा हो सकूँ।
हाथ जैसे ही उसके लड़के को छुआ, सिकुड़ गया वो।
हाथ उठा कर मैंने अपनी कमर पर उसके हाथ लपेट लिए, जबकि वो शर्माते हुए सॉरी बोल रहा था।
मैंने नीरज के होंठों पर अपने होंठ रख दिए, जब वह कुछ कहने ही वाला था।
सोफे के किनारे टिका हुआ था नीरज।.
उसकी गर्दन पर मेरी बाँहें आ गईं, फिर मैंने उसके होंठ छुए।
उसके हाथों को मेरी कमर पर लपेटना मेरा ही काम था।
खड़ा हुआ वो भी, उस समय।
एक आम आदमी के पास जब डिरेक्टली सामने चुनौती हो, तो फिर वह खड़े हुए शरीर के साथ कैसे ठंढा रह पाएगा। गोद में बैठी युवती का तापमान भी तो कम नहीं होता।
मेरे होंठ उसके होंठों से टकरा रहे थे, तभी उसने भी जवाब में किस कर दिया।
नीरज के अंदर उत्सुकता धीरे-धीरे बढ़ रही थी।
उधर से फलित चल पड़ा, उसके साथ रोमिल भी हुआ।
उस पल मैंने नीरज को चुम्मा देते हुए फलित को रुकने का संकेत किया, वे दोनों ठहर गए।
उसके होंठ मेरे सामने थे, मैंने धीमे से उन्हें छुआ। पैन्ट के ऊपर से उसकी जांघ पर हाथ रख दिया।
लंबा हुआ उसका लिंग पूरी तरह से।
थोड़ी देर में नीरज का पसीना छूट गया, वह मुझे चाटने लगा।
उसके हाथ मेरी कमर पर तब घूम रहे थे, जब मेरा शरीर सिमटने लगा।
देखते-देखते उनकी नज़रें अटक गईं, फलित का ध्यान रोमिल पर ठहर गया।
शर्ट के बटन खोलते हुए मैंने नीरज को पास खींचा। फिर मैंने उसकी छाती पर होंठ रख दिए।
नीरज ने मेरी त्वचा पर हाथ फैला दिया, उसकी मुट्ठी मेरी कमर के पास बैठ गई।
खड़ी होकर मैंने कुर्ती नीचे रख दी।
नीरज ने कहा था मुझसे - अरे सुन, ब्रा भी उतार दे, तेरे स्तन इतने बड़े हैं।
उसकी ओर मुस्कुराते हुए, मैंने अपनी ब्रा निकाल ली।
नीरज ने मेरे बड़े-बड़े बूब्स को देखते ही संभलना छोड़ दिया, सोफे से उठकर खड़ा हो गया।
उसने हाथ कमर पर फेरा, और छाती को चूसने लगा।
नीरज मेरे स्तनों को एक-एक कर चूस रहा था। फिर मैंने हाथ से संकेत किया कि फलित पास आ जाए।
तभी फलित मेरे पास आकर ठिठक गया। उसके लंड को हाथ में लेकर मैंने धीरे से नचोड़ा।
फिर वहीं पलट कर देखा तो रोमिल मेरे ठीक पीछे था, जैसे कहीं से उग आया हो।
गर्मी से रोमिल का लंबा शरीर मुझसे चिपका हुआ था। धीरे-धीरे उसका हाथ नीचे की ओर बढ़ा।
रोमिल ने सलवार खींच ली। हाथ पैंटी के भीतर घुसा, चूत पर उंगलियां फिसलने लगीं। तभी नमी महसूस हुई। शरीर गर्म हो उठा।
थोड़ी देर में वे तीनों मेरे पास से हटे, मैंने भीगी हुई अपनी पैंटी धीरे से नीचे उतार दी। बीच में खड़ी, मैं पूरी तरह नंगी थी, जैसे कोई स्लट। फिर वे तीनों ने भी सारे कपड़े उतार लिए, शरीर खुले हवा में।
नीरज के साथ-साथ फलित भी उत्सुक दिख रहा था, रोमिल की आँखें चमक उठीं। मैं धीरे से बीच में घुटने टेककर बैठ गई, मेरे होंठों ने नीर के लिंग को ढक लिया।
मेरे मुँह में नीरज का लन्ड था, मैं धीरे-धीरे चूसने लगी। तभी पास से रोमिल खड़ा हो गया, उसके हाथ ने मेरे हाथ को छुआ। फिर वो अपना लन्ड मेरी उंगलियों में डाल बैठा। मैंने झट से उसे हिलाना शुरू कर दिया।
उसकी नज़र पड़ते ही वो मेरे पास आ गया, साथ ही मेरे हाथ में अपना लंड रख दिया। एक हाथ में उसका, दूसरे में नीरज का लंड - मैं हिला रही थी, चूस रही थी।
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थोड़ी देर में मैंने एक-एक कर सभी के लिंग को मुंह में ले लिया। हाथों से उन्हें इधर-उधर हिलाती जा रही थी। मज़ेदार अहसास हो रहा था।
लगभग बीस मिनट तक मैंने एक-एक करके तीनों के लड़कपन को अपने मुंह में लिया। उनमें सबसे अधिक बार मेरे होठ नीरज के प्रति खिसके।
नीरज का लंड मेरी चूत में घुसने के लिए बिल्कुल तैयार था। खुद-ब-खुद वो मेरे थूक में सना हुआ था। मेरी चूत ने जवाब देना शुरू कर दिया, धीमे-धीमे गर्म होने लगी।
बिस्तर पर लेटते ही मुझे नीरज ने पकड़ लिया। उधर से फलित-रोमिल भी अंदर घुसे। खींचकर बेडरूम के अंदर ले जाते हुए नीरज ने कहा कि शाम करनी है तो तैयार हो जाओ।
फिर नीरज ने मेरे पैरों को अलग किया, और वह धीमे से अंदर घुस गया। उसका आधा हिस्सा एक साथ मुझमें समा गया, बस इतना हुआ।
इसके बाद नीरज ने मेरे पैरों को कंधों पर समेट लिया। धीमे-धीमे वह मुझे अपने ऊपर उठाए हुए चोदने लगा। फलित वहीं दाहिने किनारे खड़ा हो गया। उसका लंड मेरे मुंह की ओर बढ़ने लगा।
बाएं किनारे रोमिल खड़ा हुआ, मेरी उंगलियों में उसका लन्ड आ गया। फलित के हाथ मेरे बूब्स पर थिरक रहे थे, रोमिल के साथ मिलकर वो दबाव डालता रहा। नीरज अपनी कमर से छुट्टी दिला रहा था, झटके मारता हुआ भीतर घुसता जा रहा था।
कुछ देर में रोमिल ने कहा, मेरा भी चूस। फिर मैंने फलित का लिंग मुँह में लिया, उसके बाद धीरे से रोमिल का। अब वो खुद आगे हट गया। नीरज तभी पीछे से जोर-जोर से घुसा रहा था।
नीरज ने लगभग पंद्रह मिनट तक मुझे चूसा। मेरी चूत से दो बार पानी निकला, उसके बाद उसने अपना पूरा वीर्य मेरे अंदर डाल दिया।
नीरज ने गुदगुदाते हुए कहा, इतना अच्छा लगा तेरे अंदर उतरकर। फिर धीमे से खींचकर अपना लंड बाहर निकाल लिया, जब वो खत्म कर चुका था।
जैसे ही नीरज ने अपना लंड बाहर निकाला, रोमिल सीधा हुआ। वह मेरे पास जाकर लेट गया। फिर उसके मुँह से निकला - थोड़ी देर के लिए मेरे ऊपर चढ़ जा।
रोमिल का लंड सीधा होकर मेरी चूत में जाने को बेकरार था।
हल्के से मैं रोमिल केऊपर हो गई, अपनी चुत को उसके लंड पर जमाते हुए।
लन्ड पर चूत की मेरी पकड़ ढीली हुई, फिर मैंने धीमा दबाव शुरू किया।
थोड़े समय बाद मेरी चूत ने रोमिल का पूरा लंड अंदर उतार लिया।
रोमिल का पूरा लंड मेरी चूत में जा घुसा, फिर वह तेजी से ऊपर-नीचे हिलने लगा।
सिसकियों का पल-पल बाहर निकलना शुरू हो गया, मेरे होठों से अब आहें छूट रही थीं।
उसका लन्ड मेरे मुँह में नहीं समा रहा था। एक हाथ से मैंने उसके लन्ड को पकड़ रखा था। इधर-उधर झूलते हुए मेरे बूब्स आगे-पीछे हिल रहे थे।
कुछ समय बाद नीरज मेरे पास आ गया, उसने मेरे स्तनों पर हाथ रख दिया।
उसने मेरे बूब्स पर हाथ डाल दिया, जबकि मैंने साफ़ कहा था – अभी नहीं।
एक हाथ से उसने मेरी तरफ धकेलते हुए अपना लंड मेरे हाथ में रख दिया।
गिरावट के दौरान मेरा संतुलन खो गया, फिर मैं रोमिल पर चढ़कर नीचे आ गई।
रोमिल ने मेरे जांघों को अलग किया, फिर धीरे से अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया।
मैं रोमिल के साथ व्यस्त थी, इधर फलित और नीरज का लिंग मेरे मुँह में था।
कुछ ही पल बाद, रोमिल का सारा वीर्य मेरी चूत में उंडेल गया।
फलित ने रोमिल के बाद क्रम संभाला। उसका लन्ड मेरी चूत में घुस गया। धीमे-धीमे चोदने लगा। हर झटका अपने अंदाज़ में था।
मैं फलित को छोड़कर नीरज का लंड चूस रही थी।
नीरज का लंड भी ऊपर उठ आया था, वो फिर से मुझे पैदल चलाना चाहता था। फलित ने मुझे दस मिनट से अधिक समय तक चोदा, जब उसका शुक्र बाहर आने वाला था तो उसने अपना लंड मेरे मुंह में धंसा दिया।
उसने अपना पूरा शुक्राणु मेरे मुँह में डाल दिया। होठों के बीच सब कुछ फैल गया, मैंने एक-एक बूंद निगल ली। तीनों ने मुझे जमकर घेर लिया, हर धक्के में झटके भर गए। मुझे भी उतना ही आनंद मिला, जितना उन्हें लगा होगा।
उस दिन मैं दो लड़कों के साथ हुक्म करने निकली थी, पर रास्ते में एक और जुड़ गया।
उस दिन मैंने फलित के साथ चार बार यौन संबंध बनाए, उसके बाद रोमिल के साथ भी चार बार हुआ। नीरज के साथ ऐसा तीन बार हुआ।
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