पड़ोस की भाभी की चुदाई उसी के बेडरूम में

pados ki bhabhi ki chudai ussi ke bedroom me

Jan 3, 2026 - 15:12
Jan 9, 2026 - 17:03
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पड़ोस की भाभी की चुदाई उसी के बेडरूम में

अरे भाई, नमस्ते। मेरा नाम रोहित है। उम्र बतौर 32 साल चल रही है। मध्य प्रदेश में नौकरी करता हूँ मैं। एक नए शादीशुदा जोड़े के बारे में बताऊँ? वो मेरे पड़ोस में रहते थे, वो भाभी और उनके पति।

एक बात भाभी के बारे में बता दूँ। नाम था सुमन, हालाँकि असली नहीं। उम्र लगभग छब्बीस साल के आसपास। ऐसी लड़की थीं कि नजर मिलते ही सोच घूम जाए। ऊपर से नीचे तक पैमाइश शायद 32-30-32 की रही होगी।

हम एक ही मोहल्ले में रहते थे, इसलिए घटते-घटते अच्छी परिचय बन गई थी। अक्सर दोनों के बीच गपशप चलती रहती। उन्हें नज़र से देखता, और तुरंत मन में वही ख्याल तैर जाता - अगर वो मेरी हो जाए तो। ऐसा हो पाना आसान नहीं था, ये भी समझ में था।

मगर मैं भी एक सुनहरा मौका तलाश रहा था। भाभी के पति से मेरा बहुत अच्छा रिश्ता था। उनके पति को शराब की लत थी, इसी वजह से घर में झगड़े हमेशा चलते रहते थे। एक दिन शराब पीने के बाद उनकी तबीयत बिल्कुल गड़बड़ हो गई, फिर मैं और भाभी उन्हें डॉक्टर के पास ले चले गए।

ये बात थी कोरोना के दौर की, उस वक्त कोई आसानी से हॉस्पिटल में एडमिट नहीं हो पाता था। अब, मैं यहाँ लंबे समय तक काम कर चुका था, जिसके चलते लोग मुझे जानते थे। इसलिए धीरे-धीरे, उन्हें एक हॉस्पिटल में भर्ती करवा लिया गया।

एडमिशन के बाद हर काम में सुमन भाभी के साथ थी मैं। उस वक्त मेरे अलावा उनके पास कोई नहीं था। घरवालों से भी बातचीत हुई, जिन्होंने गुज़ारिश की - उनके पति के ठीक होने तक मैं डटी रहूँ।

तभी सुमन भाभी ने कई बार कहा था। उनके पति अस्पताल से छूटने तक मैं काम से दूर रहूँ।

उस अस्पताल में, जहाँ हमने उनके पति को भर्ती करवाया था, कोरोना के चलते मरीज़ के सिवा किसी और को ठहरने नहीं दिया जाता था। इसलिए मैं सुमन भाभी को साथ लेकर घर आने लगा।

सड़क पर आते हुए कई बार मन में आया कि अब सुमन भाभी को छूने का सही समय है, उनकी तकलीफ का इस्तेमाल करने का। लगभग नौ बजे दोनों घर पहुँचे, मैंने पानी माँगा। जब वो गिलास बढ़ा रही थीं, मैंने जानबूझकर उनकी उंगलियों को छू लिया। उन्होंने कुछ नहीं कहा, कोई हरकत नहीं की।

कुछ पल इसी अंदाज में मैं किसी न किसी तरह उन्हें छूता रहा। फिर, जब वो चाय बना रही थीं, तो मैं किसी बहाने से रसोई में पहुँच गया, उनके पास खड़ा हो गया और धीमे स्वर में बोला -

 

भाभी ने कहा - तुम बस इतना सोचना छोड़ दो। मैं खुद ही छुट्टी के लिए आवेदन कर दूँगा।

मैंने जब पैरों से उनके पैर पर दबाव डाला, तभी वो झिझककर पीछे हट गईं। फिर आत्मविश्वास थोड़ा-थोड़ा बढ़ा, और एकदम से मैंने उनके पैर को पूरी तरह नीचे दबा दिया।

उनके मुँह से निकला - तुम ऐसा क्यों कर रहे हो?

 

मैंने कहा - कुछ भी नहीं।

कुछ देर तक वो खामोश रहीं। अचानक उनके घर का फोन बज उठा, जिस पर वो बात करने लगीं। कुछ समय बाद उन्होंने फोन मेरी ओर बढ़ा दिया, कहा कि कोई मुझसे बात करना चाहता है। मैंने फोन उठाया और बात शुरू कर दी। इधर सुमन भाभी बेड पर बैठी थीं, मैं भी वहीं पर जाकर बैठ गया और बात करता रहा।

हथेलियाँ उनके हाथों पर आ गईं, बातचीत के बीच में। अपना हाथ खींचने की कोशिश की, फिर भी मैंने पकड़ नहीं छोड़ी। घर के अंदर, रसोई की ओर चली गईं वो। मौन रहीं फिर तो समझ आ गया - जबरदस्ती में थीं वो, और जो भी मैं करूँगा, वो झेलेंगी।

फोन की बात खत्म करके जैसे ही किचन में पहुँचा, देखा तो भाभी झाड़ू लगा रही थीं। आँखें उठाकर एकदम सिर से पैर तक घूर लिया मैंने, फिर धीमे से बोला - “इधर आओ न, मैं सब संभाल लेता हूँ।” उनके कंधे पकड़कर मैंने गले लगा लिया, बिना कुछ कहे, बस ऐसे ही।

अचानक उसकी आँखें फैल गईं। उसने कहा - मुझे जाने दो। तुम क्या कर रहे हो?

 

उसे पकड़कर मैंने कहा - जब मैं आपके लिए यह सब कर रहा हूँ, तो क्या आप मेरे लिए थोड़ा भी नहीं करेंगी?

उनका कहना था - ये सही नहीं है। मुझे लोग गलत समझेंगे।

 

उसका हाथ पकड़कर मैंने कहा - आज रात हम दोनों के बीच जो कुछ भी होगा, वो किसी के सामने नहीं आएगा।

इतना कहकर मैंने कपड़ों के ऊपर से भाभी के स्तन पकड़ लिए। कुछ शब्द न निकले तो ब्रा के भीतर हाथ घुसा दिया, धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। फिर वहाँ से उन्हें ले जाकर बेडरूम में खींच आया।

कमरे में कदम रखते ही मैंने बोल दिया - एक तुम सबसे पहले कपड़े निकाल लो।

 

फिर भी तैयार नहीं हुई वो। हालाँकि मैंने जिद पकड़ ली, तो कपड़े सब धरे रह गए उसके। उस पल मेरे सामने कुछ नहीं था उस पर। इधर मैंने भी अपना सामान उतारा, और फिर बिस्तर पर ले जाकर बिठा दिया उसे।

उसकी चूचियों को मैंने खूब समय तक रगड़ा, फिर चाटना शुरू किया। इसके बाद वो मेरी बाँहों में आईं, मैंने धीरे से उनके होंठ चूस लिए।

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थोड़ी देर में वह भी गर्म होने लगीं। अब वह मेरे साथ हो गई थीं। जैसे ही मैंने देखा कि भाभी भी तैयार है, मैंने सुमन भाभी की चूत पर अपना लंड रख दिया। फिर एक तेज़ धक्का दिया। उस धक्के के बाद सुमन भाभी के मुँह से आवाज़ निकली।

 

भाभी: आह्ह्ह्ह...

आवाज़ ऐसी थी कि मन चिड़चिड़ा उठा। फिर मैंने एक और हलचल शुरू कर दी, इस बार तेज। धक्के के बाद वो पूरी तरह मेरे संग घुल गईं, अब उनके मुँह से निकलने लगी अह्ह…अह्ह…

फिर मैंने जोश से भरकर उनकी चूत पर लंड चलाना शुरू कर दिया, वो बिखरते हुए झटके लेने लगीं। अह्ह, ओह्ह... आवाज़ें निकलती गईं। इधर, एक और धक्का दिया मैंने चूत में, तो उनके मुँह से बोल निकला-

 

ओह हाँ, प्रियतम... आगे बढ़ो, मुझे स्पर्श करो।

फिर मैंने उसे लगातार हिलाया। वो मेरे सीने से चिपक गई, अपनी जांघें खोलकर। जब वो थोड़ी देर रुकी, मैं फिर तैयार हो गया। कुछ न बोली, बस मेरे करीब आ गई। मैंने धीमे-धीमे उसके ऊपर दबाव डालना शुरू किया। वो फिर से मेरे हर झटके के साथ लय बनाने लगी।

यह वो पल था जब मैंने भाभी के साथ सेक्स किया। अगर तुम्हें इसके बाद क्या हुआ, उसकी कहानी सुननी है - जैसे बाथरूम में शुरू हुई बात धीरे-धीरे बेडरूम तक कैसे पहुँची, जब उनका पति घर पर नहीं था



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