किरायेदार ने लैंडलॉर्ड की कुंवारी बेटी की चूत फाड़ी
Desisexkahaniya
नमस्ते दोस्तों, मैं रूबीना हूँ। मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव में जन्म हुआ था मेरा। अब उम्र बीस से ऊपर हो गई है। लंबाई पांच फीट तीन इंच के आसपास, गोरी त्वचा, आँखें काली और बड़ी, बाल कमर तक लंबे। आकार 34-30-36, गोरे घने स्तन, कमर संकरी, पिंडली मोटी और ठाठ वाली। परिवार का कहना है कि बहनों में मैं सबसे नजाकत वाली हूँ। हालाँकि स्वभाव में बहुत झिझकने वाली। कभी किसी युवक से ज्यादा बातचीत नहीं की। कुंवारी थी, ढंग का सेक्स जानती भी नहीं थी, सिर्फ भाई और भाभी को खिड़की से चुपके चुपके चूसते देखा था।
हमारे घर में मॉम-डैड के साथ, बड़ा भाई और उसकी पत्नी, बड़ी दीदी व उनके पति रहते थे। शादी हो चुकी थी भाई-दीदी की। छोटी थी मैं सबके बीच। खासा बड़ा घर, कई कमरों वाला। अपने कमरे में अकेले सोती थी। जरूरतमंदों को कभी-कभी डैड कमरा दे देते।
शादी के बाद भाई के कमरे से आवाज़ें आईं। खिड़की के पास छुपकर देखा - भाभी मुँह में लंड लिए झूल रही थीं, जीभ घुमा रही थीं, सांसें तेज़। भाई ने उनके बूब्स चूसे, फिर चूत पर हाथ फेरा। वो बोली, "ओह्ह… तेज़…" लंड अंदर गया, शरीर डगमगाया। चपचप की ध्वनि दीवारों से टकराई। मेरे अंदर गर्मी फैल गई। बिना सोचे हाथ नीचे चला गया। इच्छा हुई - कोई मुझे भी ऐसे छुए। चूत में खुजली सी उठी। फिल्मों में देखा, पर असली छुअन की तलब बढ़ी।
एक दिन राहुल आया, भाई के दोस्त के साथ, कमरे के लिए। उसकी उम्र लगभग पच्चीस थी, गहरी त्वचा, धांसू बदन, कंधे चौड़े मानो किसी फिटनेस ऐप के इंस्ट्रक्टर जैसे। बातचीत में सीधा था, घरवालों से तुरंत अटैच हो गया। डिनर टेबल पर भी जगह बना ली। मैं खुद को चुप रखती, पर वो मेरी ओर देखता - छाती, पिछवाड़े पर ठहर जाती नजर। ये सब देखकर मन में गर्माहट आ जाती, नमी बढ़ जाती, लेकिन लज्जा में आँखें नीची कर लेती।
एक सुबह झाड़ू लगा रही थी। कोई दुपट्टा नहीं था, गर्दन खुली थी - ब्रा के ऊपर वाला हिस्सा नजर आ रहा था। तभी राहुल आ गया, नजरें सीधी मेरी ओर थीं। उसकी आंखें मेरी छाती पर ठहर गईं। मैं लजा उठी, पलटकर दूसरी दिशा में देखने लगी। वो भी चलकर वहीं आ खड़ा हुआ। छाती में धड़कन तेज हो गई। योनि में एक सी झनझनाहट उठी। फिर मैंने हिजाब ओढ़ा और तेजी से चल दी।
रात को टॉयलेट गई। हमारा वो राहुल के साथ शेयर्ड था। अंधेरा था, घबराहट हुई तो दरवाजा खुला ही रखा। पेशाब करके सलवार ऊपर खींच रही थी, फिर नाड़ी बांधने लगी, एक झटके में मुड़ी - राहुल वहाँ खड़ा था। उसकी नजर सीधी मेरी पिछवाड़ी पर टिकी हुई। घबराकर सलवार पकड़ी और कमरे में भाग गई। दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। शर्म में नींद दूर थी। फिर भी उसकी नजरों का ख्याल आया, चूत में एक गर्माहट सी फैल गई। हाथ लगाया, पर मन नहीं लगा।
अगली सुबह के बजाय रात हुई। पहला कदम टॉयलेट के अंदर। ताला डालने के बाद बाहर आई – वहाँ राहुल, धमकते हुए खड़ा, लंड घुमा रहा। काली-स्याह, मोटी छड़ जैसा लंड। सिरा गहरा लाल, नसें फूली हुईं। झटके में डर लगा। फिर भी नजर टिक गई। चलती बनी। कमरे में दरवाजा खुला रखा। उल्टी तरफ लेट गई।
आँख खुली तो सलवार और पैंटी नीचे थी, कोई मेरी गांड चाट रहा था। एक गर्म जीभ मेरे सफेद, भारी गांड के ऊपर फिसल रही थी। मैं खामोश रही। उसने गांड के छेद को चाटा - इससे खुजली होने लगी। टाँगें अलग की, चूत को हाथों से छुआ - उँगलियाँ अंदर घुस गईं। फिर जीभ आई चूत पर। मैं तड़प उठी - इतना मजा आया कि रोक नहीं पाई। जब मैं सीधी हुई, तो वो डर गया। मैंने कुछ शब्द नहीं बोले। उसने मेरा शरीर लपेट लिया, फिर मुझे चूमा। उसने कहा - “बस एक बार प्यार करने दो।” मैं चुप रही। उसने कपड़े उतारे। मैं नंगी हो गई। ब्रेस्ट को चूसा, निप्पल को दाँतों से काटा। चूत को चाटा - और मैं खुद को सहेज नहीं पाई।
मुझे लंड मुँह में डाला गया। चूसने लगी। हम 69 के ढंग पर आए। फिर वैसलीन लगाकर लंड अंदर गया। एक झटके में सील टूट गई, खून निकला। मैं चीख उठी। वो रुक गया, फिर किस कियa। बाद में सब कुछ अंदर चला गया। दर्द के बीच में मजा भी था। घोड़ी की तरह बैठकर गांड चढ़ाई। चार बार जुड़ाव हुआ। कंडोम में सब उतर गया।
उठी सुबह-सुबह पलटकर। सभी लौट चुके थे। मुस्कुराता राहुल, मैं झेंप जाती। मगर धीमे-धीमे चोदने का आदी हो गया। घर में कोई नहीं होता, तो वो चढ़ जाता। मैं डूबकर भोगती।
एक बार बड़ी दीदी ने हमें ऐसे पकड़ा कि कपड़े तक नहीं थे। डराया, धमकाया। पर अचानक उनका गुस्सा बदल गया – "अब मेरे साथ भी ऐसा करो।" राहुल आगे बढ़ा, दीदी के साथ सब कुछ हुआ। मैं वहीं खड़ी रही, सब कुछ देखते हुए। फिर एक साथ तीनों का पलटाव हुआ। और दीदी? जिन्हें सब संभलते दिखते थे, वो सबसे ज्यादा बेकाबू निकलीं।
राहुल जा चुका था। प्यास लगी हुई थी हम दोनों बहनों को। अब जब भी डैड कोई नया किरायेदार लाते, हम झट से जाँच लेतीं – उसके पास लंबा होना ज़रूरी था। नया आदमी आता तो पहले दीदी उसके साथ सोती, बाद में मैं आकर उसके ऊपर चढ़ जाती।
लोगों को इस कहानी में किरायेदार और उसके साथ हुई घटना पर बात करनी आई। जो हुआ उसपर कुछ लिख देना अगर मन करे। 💬
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