कॉलेज की हॉट लड़की की पहली चुदाई
Desisexkahaniya
पहली बार घर से दूर, जोधपुर में कॉलेज की पढ़ाई के लिए पहुँचा था। उम्र तब बीस साल की थी। छोटे से गाँव से आया था राजस्थान के। मेरा नाम रमेश है। दोस्त की मदद से एक फ्लैट में जगह मिली। रूम ढूँढना आसान नहीं था। फ्लैट मालिक ने सभी कमरे किराए पर दे रखे थे। मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक था।
ऊपर मेरा कमरा है। पड़ोस के कमरे में दोनों भाई-बहन रहते हैं - शकूर, 25 साल के, नौकरी करते हैं, और अरशी, 21 साल की, पढ़ाई चल रही है। एक ही कॉलेज में हम सभी। बातचीत हुई शकूर से। उसने कहा, "अरशी को पढ़ाई छोड़वा दो।" मैंने झट से हाँ कर दी।
एक बार अरशी नज़र आई, दिल धड़क उठा। उसके काले घने बाल, गोरा चेहरा, आँखें बड़ी-बड़ी काली। शरीर 34-28-36 का। छाती भरी हुई, सफेद और मुलायम, कमर इतनी पतली कि हाथ लगाए बिना घेर लूं। पैंट या सलवार में भी ढंग की दिखती। रोज साथ चलते कॉलेज, रास्ते में बातें होती रहतीं। मैं तो घूरता रहता, वो झेंप जाती।
एक दिन उसके कमरे का दरवाजा टटोलता हुआ खुला। अंदर कदम रखा, तो बाथरूम का दरवाजा आधा खुला पड़ा था। अरशी ब्रा पहनने के चक्कर में थी – कमर नंगी, पैंटी गांड में अटकी। गोरी त्वचा पसीने में चमक रही थी। छाती का किनारा, गुलाबी निप्पल झांक रहा। मेरे लंड में हरकत आई। वो मुड़ी – मेरी ओर देख लिया, धम से दरवाजा बंद। मैं वहां से निकल गया। शर्म में अगले दिन आंखें नहीं मिलाई।
रात को वो दृश्य फिर आँखों के सामने घूमा। गोरी छाती, पिछवाड़े की लंबी खाई। कहानी पढ़ते हुए जब धड़कन बढ़ी – अरशी को मन में उठाया। लंबे शरीर पर उसकी उंगलियाँ, होंठ, चुभन। थरथराते हुए उसके नाम से सांस भरी।
फिर सब कुछ अलग हो गया। हर रोज मैं उसके सीने, पीठ की ओर देखता रहता। वो पकड़ लेती, हल्के से हंस देती। ट्यूशन का ढोंग किया – शकूर ने कहा – "अरशी को समझा दिया करो।" मैं चुपचाप खुश हो जाता। शाम को हर दिन मेरे कमरे में पढ़ाई शुरू होती। वो रात के कपड़े में आती – गहरा उतार, सीने की छाया साफ दिखती। झुकती तो सब कुछ सामने आ जाता। मेरा लंड भी सीधा हो उठता। वो देख लेती, झेंपकर किताब में नजर गड़ा लेती।
एक साल बाद चाचा-चाची शहर चले गए। घर में सिर्फ हम लोग। शकूर ने कहा – “रात को अरशी तुम्हारे कमरे में पढ़ेगी।” दिमाग में मिठाई छा गई।
रात गहरा चुकी थी। पढ़ाई के बहाने घर आए थे। हवा में सर्दी धमक रही थी। अरशी ने कहा - ठंड लग रही है। मैंने कहा - बिस्तर पर आ जा। वो चलते-चलते रजाई के अंदर समा गई। कंधा मेरे कंधे से छू गया। उसके शरीर की गर्माहट मुझे झपटने लगी। मेरी गांड में ऊपर को खिंचाव हुआ। उसकी नजर वहीं ठहर गई। मैंने किताब बंद कर उसकी तरफ देखा। उसकी आंखें भी मेरे चेहरे पर टिकी थीं। उनमें एक अजीब सी भूख डोल रही थी।
मेरा हाथ उसके हाथ पर आया। वो नहीं हटाया। पहले धीमा, फिर गहरा किस हुआ। उसकी आँखें खुली रह गईं, लेकिन मुँह नहीं छोड़ा। पंद्रह मिनट तक जीभें भिड़ीं, सांसें भागती रहीं। मैंने कपड़ा ऊपर खींचा – ब्रा नहीं थी, गोल सफेद छाती बाहर आए। चूसा, दबाया, निप्पल पर दांत लगे। वो बोली – “अबे… ऐसे… और…” पैंट नीचे, पैंटी उतरी – चूत चमक रही, बाल हल्के। जीभ से घिसा, क्लिट पर दबाव, अंदर भी घुसाया। वो झुकी – “ओह… पहली बार ऐसा… आ रहा…” कमर उछली, शरीर ढीला। तरल बहा, मैंने चाट लिया।
मैं नंगा। लंड देखकर अरशी – “इतना मोटा-लंबा...” चूसने लगी। ग्ग्ग्ग... गी गी... गले तक। मैंने मुँह चोदा। फिर चूत में सेट किया। वैसलीन लगाया। धीरे घुसाया – टाइट। पूरा पेला – सील टूटी, खून। वो चीखी – “आह्ह... फाड़ दी...” मैं रुका, किस किया, बूब्स चूसे। दर्द कम हुआ तो चोदा। वो गांड उछाली – “और जोर से... फाड़ दो... भोसड़ा बना दो...” अलग पोजीशन – मिशनरी, घोड़ी, सवारी। वो बोली – “रंडी बना लो...” 30 मिनट तक चोदा। वो तीन बार झड़ी। मैं चूत में झड़ा।
रातभर दस कोनों में धमाल। 69 से लेकर डॉगी, काउगर्ल, स्पूनिंग और लोटस तक। हर बार वो ज्यादा झपट्टा मारती। सुबह दो फेरे और चढ़े। शकूर को खबर ही नहीं थी। जब ट्रांसफर हुआ, अरशी गायब हो गई। आज भी वो पल लंड को ऊपर खींच लेते हैं।
पहली बार किसी लड़के ने उसे छुआ, तब कॉलेज की वो लड़की क्या महसूस कर रही थी? सोचते हुए दोस्तों ने अपने ख्याल टिप्पणी में लिखे।
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