दोस्त की पत्नी को सेक्स का मजा दिलवाया
(इज्जत करने वाले दोस्त को उकसाकर उसकी बीवी की
सुहागरात करवाई)
एक शाम, होटल के कमरे में पीते-पीते गपशप छिड़ गई। दोस्त ने सुनाई एक ऐसी घटना। बोला, सच है, खुद उसके दो यारों से हुआ। नाम बदल दिए, विजय और अनिल रख लिए।
विजय की जुबानी:
स्कूल के दिनों में अनिल मेरा साथी था। पढ़ाई में वह आगे रहता, मुझे हमेशा समझाता। कॉलेज में लड़कियों के आने पर हम चर्चा करते उनकी खूबसूरती के बारे में, उनके शरीर के बारे में, पर अनिल टोक देता - "इज्जत से देखो उन्हें, गलत नजर से नहीं!" वह रोज कसरत करता, प्रार्थना में लगा रहता। उसके सहारे मुझे अच्छे अंक मिले, फिर एक ठीकदार नौकरी मिली।
अनिल का ट्रांसफर कॉलेज के बाद हो गया, फिर कभी बात नहीं हुई। प्यार स्वाति से शुरू हुआ, फिर बात शादी तक पहुँच गई। उसकी चमकती त्वचा थी, आकर्षक कद-काठी भी। शादी के बाद सेक्स का फैसला हमने ऐसे किया।
एक हफ्ते के बाद अनिल से मुलाकात हुई। उसने कहा - “शादी को तो केवल चार हफ्ते हुए हैं!” फिर वहीं ले गया। पत्नी का नाम सरोज था - उजली, खूबसूरत, लंबी काया। शालीनता से बातचीत की। एक-दूसरे को ‘आप’ बोलते थे दोनों। मन में आया, यह तो अनिल की पुरानी आदत है।
बात ये हुई कि मैंने शादी का फैसला बता दिया। घर जाने पर स्वाति के साथ मैं भी चल दिया। धीरे-धीरे स्वाति और सरोज भाभी के बीच गहरी दोस्ती हो गई। शादी हो गई, सुहागरात में पहली बार आजमाया, मगर मैं ठहर न सका। अनिल से बात की, तभी उसका चेहरा लाल हो गया – "इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए!"
किसी दोस्त से बातचीत हुई। उसी शाम स्वाति के साथ कुछ अलग हुआ। मुँह ने काम लिया, जीभ ने छेड़ा, तेल डालकर धीमे से घुसाया। शुरू में झनझनाहट रही, फिर लंबे वक्त तक एक-दूसरे में खोए रहे। ऊपर नीचे बदले, ढंग बदलते रहे। इतना डूब गए कि सात दिन तक कुछ और याद न रहा।
उठा जब धुंध, अनिल पर ही संदेह आया – हो सकता है, भाभी के साथ उसका कभी कुछ हुआ ही न हो। एक-दूसरे को ‘आप’ कहते हैं, झुकाव नहीं दिखता किसी में। मैंने स्वाति को बताया, बस इतना। वो मुस्कुराई, फिर बोली - “सरोज भाभी मेरी जान हैं, ठीक ढंग से जान लूँगी मैं।”
स्वाति भाभी से मिली। भाभी ने सच्चाई बता दी – “शादी को 3 महीने हो गए, अनिल मुझे छूते भी नहीं। लड़कियों की इज्जत का भूत सवार है।”
एक योजना तय हुई। खुली नेक वाली मैक्सी पहनने की सलाह दी स्वाति ने भाभी को - अंदर से ब्रा न लगाने का सुझाव, इसलिए कि झुकते समय चूचे दिखें, जब चाय या खाना परोसे। शरीर का वैक्सिंग करवाया गया। साड़ी और ब्लाउज में सज जाने को कहा गया।
मैंने अनिल से बात की। काल्पनिक दोस्त की कहानी सुनाई – “शादी के बाद भी पति सेक्स नहीं कर रहा, बीवी तलाक लेने की सोच रही है। सेक्स शारीरिक जरूरत है!” अनिल पर असर हुआ।
उसके हफ्ते भर में एक शाम को खाने का निमंत्रण आया। भाभी बहुत सज-धजकर पहुँचीं - ब्लाउज बिना बाजू के, साड़ी में देखने वाले घूर गए। इधर स्वाति ने उनकी खूबसूरती के लिए कुछ शब्द झाड़ दिए। खाना बनाते वक्त मैंने स्वाति के पास जाकर छेड़छाड़ की, सीधे अनिल की ओर ध्यान रखते हुए।
अगले दिन भाभी का फोन – “तुम्हारी प्लानिंग काम कर गई! कल रात अनिल ने मुझे खूब प्यार किया!”
सरोज भाभी के होंठों से निकला हुआ
एक ओढ़नी वाली मैक्सी पहनी, सीधे बिना ब्रा के। आगे झुकते हुए चाय का कप सौंपा। पहले तो छिपकर नजरें डालता, धीरे-धीरे घूरने लगा। नहाकर बाहर आई, मैक्सी भूल गई। दरवाजा थोड़ा खींचकर बुलाया – जांघें साफ दिखीं। अगली बार तौलिए से ढके चूचे भी दिखे। उसकी नजरों ने लंड को ऊपर उठा दिया।
घर आकर मैं कपड़े बदलने लगी, दरवाजे को थोड़ा खुला छोड़ दिया। अब्रा-अंडरवियर में क्रीम लगाते हुए अनिल झांक रहा था। धीरे से कमरे में घुसा, पीठ पर होंठ फेरे, कमर पर हाथ टिकाए। सामने आकर मुझे भींच लियa - होंठ, गाल, गर्दन सब चाटे। स्तनों पर दबाव डाला, ब्रा उतारने में हाथ फिसले। खुद हटा दी मैंने। वो बेकाबू हो गया - ऊपर नीचे चूसता, दबाता, चखता रहा।
बिस्तर पर लिटाया, फिर पैंटी नीचे की। हाथ घूमे पेट से लेकर जाँघों तक। पहले ही भीग चुकी थी मैं। वो हिचक रहा था, तो मैंने उसके कपड़े खुद उतारे। ऊभरे हुए लंड को देखकर डर लगा, फिर भी तैयार थी।
पैर अलग किए। ढीठ घुसाने लगा, पर अंदर नहीं गया। उसके मुँह पर रख दिया। तभी धक्का लगा – दर्द से चीख पड़ी। वो बोला – “चिकनाई करूँ?” मैंने कह दिया हाँ। फिर तेल लगाकर घुसाया – आराम से अंदर चला गया। दर्द कम हुआ, खुशी बढ़ गई।
थोड़ी देर धीमे से चला, बाद में तेज हो गया। मैं बिखर गई। उसने मेरे अंदर अपना सब कुछ डाल दिया। चादर पर लाल निशान थे। पोंछ दिया, फिर दोबारा शुरू किया। सुबह तक ऐसे ही चलता रहा, ऑफिस जाते वक्त होंठों को छुआ, कमर पर हाथ फेरा।
इस वक्त हम एक-दूसरे को तुम कहते हैं। अनिल मेरा नाम हाय सेक्सी रख दिया है। कभी नई मुद्रा में उलझ जाते हैं, कभी वह घोड़ी बनकर मुझपर झपटता है। मैं उसके लिंग पर चढ़ जाती हूँ। फिल्मों में ऐसे दृश्य देखकर आगे बढ़ते हैं।
धन्यवाद स्वाति, धन्यवाद विजय - तुमने मुझे और अनिल को सेक्स का असली आनंद चखाया।
यारो, ये कहानी कैसी लगी - दोस्त की पत्नी को सेक्स सिखाने वाली? अपना रिएक्शन मेल या कमेंट में शेयर कर लेना। नाम ज़रूर बताना कि कहानी का क्या टाइटल था।
जरूर बताएँ कि कौन-सी कहानी पढ़कर मेल किया है। कई कहानियाँ मेरे द्वारा लिखी जा चुकी हैं।
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