सेक्सी हॉट भाभी की चूत चुदाई करने का आनंद
एक पड़ोस में रहती थीं वो। उन्होंने कहा, आज घर में कोई नहीं है। मैं उनके यहाँ रुक गया। कपड़े धीरे-धीरे फर्श पर आ गए। गर्मी थी, बातों में छुपी। आँखें टालना मुश्किल हो गया। अब सच जानना चाहते हैं? इसलिए ये कहानी लिखी है।
23 साल की उम्र में हूं मैं, नाम है सोनू।.
मैं बंगाली हूँ, हिंदी में मुझे कभी-कभी गलती हो जाती है। इस कहानी में बस इतना है - एक शाम, घर पर कोई नहीं था। उधर से आवाज़ आई, मैं धीरे से चल दिया उस ओर। फिर क्या था, अपने ऊपर खो दिया सब कुछ। अब जो हुआ, वो लिख दिया है यहाँ, ऐसे ही बह गया सब।.
उस वक्त मैं तेईस साल का हो चुका था।.
एक छोटे से मकान में हम लोग किराये पर बस गए थे, उस दौरान।.
वो कमरा हमारे पास वाला था। कोमल भाभी अपने पति के साथ वहीं ठहरे हुए थे।.
जबसे मुझे यौन इच्छा का एहसास हुआ, तभी से भाभी को देखकर मेरा लिंग ऊपर उठ जाता।.
उसका आकार ऐसा था कि हर लड़के की नज़र चिपक जाती।.
शायद वो उस वक्त करीब 28 या 29 साल के थे।.
थोड़ी सी लकड़ी जैसी छाया वाली त्वचा थी। लंबाई पाँच फुट के लगभग। गोल-मटोल बदन का हिस्सा ऊपर की ओर उठा हुआ। एक निश्चित माप के करीब, जिसे 34 कहते हैं।.
गर्म तेजस्विता। उसके शरीर के आयाम 34-25-36 थे। घर में अलग रहना ही चुना उसने।.
शाम को लौटते ही चाचा पहले से ही घिसे-पिटे होते, सीधे बिस्तर पर ढह जाते। कोई आसानी नहीं थी उनकी दुकानदारी में, हर पल जैसे धक्कों से गुज़रना पड़े।.
उस वक्त हमारे घर में टीवी का अभाव था। इसलिए शाम ढलते ही मैं पड़ोस में आंटी के घर चला जाता। वहाँ बैठकर मैं स्क्रीन पर चलते दृश्यों में खो जाता।.
रात को चाचा जल्दी सो गए, तब हम दोनों - चाची और मैं - टीवी पर टिके रहे। कभी कोई बात आई, तो ठहाके भी लग गए।.
बातचीत ऐसे मोड़ पर पहुंच जाती कि उम्र का हिसाब खो जाता।.
कोमल भाभी समझती थीं कि मेरी कोई प्रेमिका नहीं थी। उन्हें इस बात का भी एहसास था कि मैं अब तक कुंवारा हूँ।.
उस वक्त के बाद से ही मन में उनके साथ संभोग करने का विचार आने लगा।.
हर सुबह आती, हम थोड़ा करीब जुड़ते।.
हाथ को आगे-पीछे करते हुए मैं सोचता, वो छोटे बच्चे की तरह झपकियाँ लेते।.
सुबह-सुब वो बालकनी में नाइटी में खड़ी होती। फिर झाड़ू चलाना शुरू कर देती।.
उसकी बालकनी मेरे घर के आगे थी।.
बचपन में अक्सर उन्हें झाड़ू लगाते देख लेता था।.
उसके झुकने पर, नाइटी के ऊपर से गोल-मटोल छाती का आकार स्पष्ट दिख जाता।.
कभी-कभी उसकी नज़र पड़ जाती कि मैं तक रहा हूं।.
उसके पैर फिसलते ही वह और झुक गई।.
हर रात, मेरे ख़्वाबों में वो आ जाती।.
कभी-कभी तो ऐसा जचता था कि उसका दिमाग भी मेरे संग धड़कने को तरस रहा था।.
फिर भी, उन्हें ये कहने का साहस कभी नहीं हुआ।.
उस दिन पहुंच गई वो घड़ी, जिसके लिए मैं हर पल बेचैन रहता था।.
भाभी को घर पर अकेले होने से तरस आती थी। फिर वो दिन आए जब चाचा को शहर के बाहर जाना पड़ा, दो दिन के लिए।.
उसने मेरी माँ से अनुमति मांगी, फिर मुझे दो रातें वहाँ ठहरने के लिए आमंत्रित किया।.
इस बात पर गौर कर रहा था कि ये मौक़ा हाथ से जाने देना मुश्किल है।.
सिर्फ इतना नहीं, बल्कि उन्होंने शाम का भोजन भी उनके साथ करने की बात कही।.
सुबह के सात बजे, मैं उनके कमरे की ओर निकल पड़ा।.
जैसे ही मैं उनके घर के अंदर दाखिल हुआ, नज़र पड़ी कि वो बाथरूम में स्नान कर रही थी।.
फिर मैंने स्विच दबाया, और परदे पर कुछ नज़र आया।.
कुछ देर के बाद वो नहाने के कमरे से बाहर आई।.
उसी पल में उन्हें देखकर मेरा सारा शरीर जम गया।.
बारिश में खड़े-खड़े साड़ी का नीचला हिस्सा पूरा गीला हो चुका था। कमर पर लपेटा तौलिया बचा था जो ठंड में धीरे-धीरे गर्मी दे रहा था।.
इतना छोटा था वो तौलिया कि महज़ आधे बूब्स पर ही जगह बन पाई। नीचे से गांड बेलगाम झांक रही थी।.
इस तस्वीर को देखते ही मेरा लौड़ा सीधा हो उठा, मानो पैंट फाड़कर बाहर कूदने वाला हो।.
उसकी नजर मेरी पैंट के उभार पर जा पड़ी, मैं कुछ समझ पाता इससे पहले वो हंसने लगी।.
थोड़ी देर के लिए मन असहज हो उठा।.
फिर अचानक विश्वास हो गया। मन में ख्याल आया - आज हो कुछ भी, चाची को अपने लंड का दर्शन तो कराऊँगा।.
वो मेरे पास आए, पूछा – सोनू, कुछ गड़बड़ है? बताओ न, फिर मैं ये सब हटा देती हूँ।.
किसी ने कहा - ऐसा कुछ भी नहीं है।.
वह बोल पड़ा - तुम्हारा नन्नू कुछ अजीब सा कह रहा है, एक झलक लो तंबू में कैसे तब्दील हो गया है।.
बोलते हुए मैंने थोड़ा स्माइल कर लिया - इतनी स्टनिंग किसी औरत को पहले कभी नजर नहीं चढ़ाया।.
वह हंस पड़ी। अब भी ढेर सारा कुछ तो देखना बाकि है, थोड़ा इंतजार करो। मैं जल्दी से कपड़े धर लेती हूं। फिर वक्त आएगा खाना गरम करने का।.
एक लाल रंग की नाइटी उसके शरीर पर थी।.
उसकी छाती इतनी सपाट थी कि हड्डियाँ नजर आ रही थीं।.
रात के खाने के बाद, अब सोने का समय हुआ।.
एक ही बिस्तर था घर में। कहा, साथ सोने में तुम्हें दिक्कत तो नहीं होगी।.
फिर मैंने कह दिया - ऐसा बिलकुल नहीं होगा।.
उसके बाद हम दोनों लेट गए।.
कल तक जिसे सोच-सोच कर मैं अपना हाथ चलाता था, आज वही इतना करीब है। अब तो बस एक झटके में सब खत्म करना है।.
फिर मैं वहाँ पहुँचा, मेरे होंठों ने उनकी पीठ को छू लिया। धीमे हाथ से कमर तक जाकर उनके नरम स्तनों पर दबाव डाला। मेरा लिंग उनकी गुदा में घिसने लगा।.
उनकी गर्दन पर मेरा किस पड़ते ही, भाभी के अंदर से कुछ ऐसा उठा, मानो हजार वोल्ट की चपेट में आ गई हो।
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अब समझ आया कि भाभी झूठ बोल रही हैं, नींद का नाटक कर रही हैं। उन्हें मेरे साथ संबंध बनाने की इच्छा है, यह धीरे-धीरे स्पष्ट हो रहा है।.
अचानक ही मैंने भाभी को कसकर पकड़ लिया, फिर उनके स्तनों पर हाथ डाल दिया।.
एकदम से भाभी बोल पड़ीं - सोनू, ये क्या हरकत चल रही है? मेरे सीने से हाथ हटा लो।.
फिर मैंने उनकी चूचियों पर हाथ और तेज़ी से चला दिया। मैंने कहा - भाभी, आज रुकने की नहीं, बस अनुमति दे दो। जबसे आपको देखा, विचार घेरे रखा था। अब इतने करीब हो तुम... ऐसे कैसे रोक पाओगी? प्लीज़, भाभी।.
एक बार उन्होंने ये शब्द कहे - तुम मेरी तुलना में काफी कम उम्र के हो।!
फिर मैंने कहा - कोई फर्क नहीं पड़ता। मौका मिले तो सब कुछ अलग हो जाएगा। आपके पति नहीं दे पाते जो खुशी मैं दे सकता हूँ। वो सुख मैं आपको चखा दूँगा। एक बार इजाजत दे दो, भाभी। सिर्फ एक बार के लिए तैयार हो जाओ।.
उन्होंने कहा - ठीक है। फिर भी, मेरे साथ कुछ नियम जुड़े हैं।.
मैंने कहा, जो भी तुम कहोगी, मैं उसके लिए ठीक हूँ। बस इतना करना मत।.
उनके मुँह से निकला - पहली बात… हमारे रिश्ते को लेकर किसी को कुछ नहीं पता चलना। फिर आवाज़ धीमी हुई - जब मैं चाहूँ, उस वक्त तुम्हारे साथ सेक्स होगा।.
ठीक है, मैंने कहा।.
दिल में अचानक हज़ारों पटाखे से जैसे कुछ छलक उठा।.
मुझे तो हमेशा से यही सोच रहा था कि भाभी मेरी पत्नी बन जाए।.
ठीक है, मैंने कहा। फिर बोला - तुमसे प्यार है, भाभी।.
मैंने कहा, इसी बीच उन्हें कसकर पकड़ लिया, फिर चुम्मा देने लगा।.
उसे मैं बिस्तर पर बैठा लाया, फिर अचानक से नाइटी का बटन खोल दिया।.
घर के अंदर अँधेरा छाया हुआ था। प्रकाश की कमी में कुछ सही से नहीं दिख रहा था। फिर मैंने सोचा, बेहतर होगा अगर लाइट जला दूँ। ऐसे में आसपास के सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।.
उसका शरीर मेरे सामने खुला पड़ा था।.
मानो कोई एक्ट्रेस सामने वाली सीट पर जमी हुई हो।.
फिर भाभी ने मेरी पैंट उतार दी। हाथों में लिया उसने मेरा लंड। सहलाने लगी धीमे-धीमे।.
उनके रसीले होठों से मेरे होठ जुड़े रहे, पाँच मिनट बाद आस्ते-आस्ते गर्दन की ओर बढ़ गए।.
इतने ज़ोर से चूस रहा था कि घरभर में उसकी आवाज़ हर तरफ फैल गई।.
एक हाथ उनकी छाती पर था, दूसरा धीरे से नीचे फिसल गया।.
भाभी ने अचानक मुझे कसकर पकड़ लिया। फिर खुशी से उनके होठों से धीमी आवाज छूटने लगी - आह… आह… ऊँ म… मैं तुझे प्यार करती हूँ सोनू!
“आई लव यू टू भाभी.”
थोड़ा झुककर मैंने उसके होठों को छुआ, फिर गर्दन तक आ गया। सांस थमी सी रह गई जब मेरा मुंह उसके सीने पर पहुंचा और बूब्स को छू लिया। .
उसके स्तनों को मैंने होंठों में ले लिया, फिर मैं ज़ोर से चूसने लगा।.
उसने अपने दोनों हाथों से उसके छाती को पकड़ लिया, मानो कोई जानवर हो।.
फिर वह धीमे से उनके शरीर के हर हिस्से पर मुँह फेरने लगा।.
पेट के बीचोबीच से होकर उनकी त्वचा पर मुंह फिसल गया।.
मैंने धीरे से उसकी नाभि में जीभ डाली, बाद में वहाँ से चाटना शुरू कर दिया।.
आहिस्ता-आहिस्ता मैं नीचे की ओर सरकने लगा। उनकी कमर को चूसते हुए मेरा मुंह धीरे-धीरे उनकी चूत के पास पहुंच गया।.
आज मैंने खासकर तुम्हारे लिए चूत साफ की। उसने कहा, ये सब तुम्हारे वास्ते ही किया।.
उसकी चूत पर मेरी जीभ फिसलने लगी, धीमे-धीमे अंदर घुस गई।.
मेरी जुबान हल्के से उस पर फिसल रही थी।.
अंदर हो गया था, फिर कुछ पल बाद बाहर।.
मुझे लगा जैसे सिर पर हथेली का दबाव बढ़ गया। फिर वो मेरे सिर को धीरे से खींचने लगी।.
थोड़ी देर तक वैसे ही चलता रहा, फिर वो सब कुछ मेरे मुंह में ही खत्म कर दिया।.
उसके माल की वजह से मेरा चेहरा भीग रहा था। नाक पर खिंचती तरल धाराएँ मुझे झेंपा रही थीं।.
भाभी ने मटमैली आवाज़ में कहा - उफ़... सोनू... अब और कितनी देर? पूरा वक्त मेरे लिए खत्म हो गया। जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में घुसा दो!
एकदम सही पल में मेरा लंड उनकी चूत के भीतर जा धंसा।.
इस बार हम सीधे तरीके से लेटे।.
मैंने धीमे हाथ से अपने लंड को उसकी चूत के ऊपर घुमाया। इसके बाद, आगे बढ़कर उसे भीतर खींच लिया तथा गति शुरू कर दी।.
थोड़ी देर बाद मैंने तेजी पकड़ ली, मजबूती से आगे बढ़ने लगा।.
उसके बैठने के तरीके में हलचल हुई, फिर उनका शरीर आगे-पीछे हो गया।.
मैंने धीमे से शुरुआत की, फिर एकाएक तेज़ हो गया। हाथ पलट गए, दबाव बढ़ गया। चुंबन गहरे होते गए। छूने का अंदाज़ बदल गया। हर छोर से आवाज़ उठी।.
लंड के झटकों पर भाभी के होठों से आवाज़ें छूट गईं - आह… आह… ओह… उम… फ… क… फक… मी… बेबी… ओह… यह… यह!
आवाज सुनते ही उमड़ पड़ा अंदर से, मैंने तेज धक्के देना शुरू किया।.
जैसे ही थप-थप की आवाज हुई, कमरा सचमुच गूंज उठा।.
लगभग पंद्रह मिनट तक मैं यूँ ही जारी रखे।.
फिर वो मेरे लौड़े को मुंह में डालने लगी। बस इतना ही, धीरे-धीरे सब शुरू हो गया।.
लगभग सात इंच की लंबाई मेरे लंड की थी।.
उसने शुरू किया - तुम्हें देखकर ऐसा नहीं लगता कि तुम्हारा लंड इतना लंबा होगा।.
मुझसे बोला गया - तुम्हारे स्वभाव में उत्साह दिखने पर कहीं यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि तुम इतनी चढ़ी हुई होगी।.
इतना कहते ही वापस अपना लंड उनके मुंह में डाल दिया, बालों को जबड़े से पकड़कर आगे-पीछे करने लगा।.
लंबे समय तक वो मेरे लिंग को पूरी गहराई तक अपने मुँह में उतार चुकी थी।.
उसकी छाती में मेरा सिर धँसा हुआ था।.
हवा तक नहीं मिल रही थी, फिर भी वो चलते रहे काम।.
थोड़ी देर के बाद मैंने वापस उनकी चुत में अपना लंड डाल लिया। पूरे जोश के साथ मैं तेजी से हरकत करने लगा।.
पाँच मिनट तक चोदने के बाद एक बार फिर उसका माल टूट गया।.
मेरी कमर पर उनका माल टपक रहा था। नीचे तक फैल चुका था।.
थोड़ी देर में मैंने तेजी से धक्के देना शुरू किया, बस इतना ही। फिर मुँह पर गहरे चुंबन पड़े, एक के बाद एक।.
थोड़ी देर में उसकी चीखें आवाज़ बनकर फूटी – रुको, अब और नहीं। मेरे भीतर कुछ भी नहीं बचा। लोहा सर कर दो।!
फिर भी मैंने उनकी आवाज़ को पीछे छोड़ते हुए तेजी से धक्के देना शुरू कर दिया।.
थोड़ी नाराज़ होकर उसने कहा - कल समेट लेंगे, आज तो इतना काम बंद करो। अब मैं और झेल नहीं पाऊँगी।.
बोले मैंने - अभी थोड़ा और। कुछ ज्यादा भी हो सकता है।.
उसने बड़ी बहन के साथ गलत किया।.
अचानक उसकी चीखें बदल गईं - आह… ह… आह… ओह… माई… यह… फक… फक… फ..क… ओह… यह… य… ये… उ म्… म… म…
उसके पास जाकर पाँच मिनट तक चोदने के बाद, मेरा सारा शीघ्र उनकी योनि में छूट गया।.
थोड़ी देर उनके स्तन चूसने के बाद, हम एक-दूसरे को संभालते हुए नींद में डूब गए।.
उठते ही सुबह-सुबह पलंग पर भाभी का होना गायब लगा।.
बिस्तर पर नंगा सोने के बाद मैं वैसे ही उठ खड़ा हुआ।.
टॉवेल लिपटी हुई, वो बाथरूम से बाहर आई। मैंने ध्यान से देखा वो अभी-अभी नहाकर आई थी।.
मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया, फिर धीरे से बाल सुलझा दिए। इसके बाद हाथ आगे बढ़ाया और छाती पर दबाव डाला।.
बीच कमरे में, पैर ज़मीन से चिपके।.
न्यूड भाभी कहने लगी- रात भर करने के बाद भी तुम्हारी प्यास नहीं बुझी क्या?
बस इतना कहा - अभी तो मज़ा शुरू हुआ है!
फिर उसने मेरे लंड पर चिमटी मारते हुए कहा - अब जाओ घर। देर हो रही है। वरना तुम्हारी माँ यहाँ पहुँच जाएँगी। और मुझे भी थोड़ा काम करना है। शाम को फिर से वही होगा।.
मैं हँसा, फिर बोला - ठीक है, अब जा रहा हूँ। शाम को वापस आऊँगा।.
रात को घर पर कुछ न खाना। तुम मेरे यहाँ आकर खाना खाओगे।.
ठीक है, मैंने कहा, अब चलता हूँ।.
इतना कहकर वहाँ से चला गया।.
तुम्हें शायद मज़ा आया होगा, मेरी उस कहानी से जिसमें Xxxx थी।.
बता देना कैसी लगी तुम्हें कहानी।
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